School Girl Sex Fantasy
मैं निशिका साहू। मेरी उम्र अभी 20 साल है। मैंने अभी कुछ ही दिन पहले कहानी का पहला भाग पापा के दोस्त ने मेरी पहली चुदाई की 1 लिखी। आप लोगों को पढ़ने के लिए दिया। आशीष अंकल ने उस रात मेरी चड्डी उतार कर मेरा बूर चाटा और फिर मुझे अपना लंड चूसने के लिए दिया आशीष अंकल मेरा मुंह चोदने लगे और मेरे मुंह के अंदर ही अपना लंड झाड़ दिया. School Girl Sex Fantasy
फिर उन्होंने दूसरे रोज मुझे स्कूल जाने के बहाने उनके घर आ जाने को कहा। और कहा कि वो दिन भर मुझे चोदेंगे। उस रात जब वो उनके घर से मैं निकल के अपने घर जा रहे थे, तो मेरे मुंह में उनके वीर्य का स्वाद और मेरे फेफड़ों में उनके लंड की गंध बिल्कुल एकदम से भरी हुई थी। अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन सेक्सी-सेक्सी आ रही थी।
पूरी तरह संतुष्ट तो मैं नहीं थी। मेरी बूर में आशीष अंकल ने लंड पेला नहीं था। बीच में ही मम्मी का phone आ गया था और मुझे वापस आना पड़ा। लेकिन एक एहसास, अपने पूरे होने का एहसास मेरी पूरी मन मस्तिष्क पर छा गई थी। पूरी संतुष्ट तो मैं नहीं थी पर एक मर्द की बाहों में अपनी देह को पाकर थोड़ी राहत जरूर हुई थी।
मन ही मन मैं खुश हुई थी कि मेरी बूर को चोदने वाला लंड मुझे मिल गया था। डिनर करने के बाद थोड़ी देर मैंने अपनी बूर के साथ खिलवाड़ किया। बड़ी इच्छा हो रही थी कि काश अंकल बेड पर मेरे साथ होते और वो सब करते जो वो करना चाह रहे थे। मैं अपना सब कुछ उनको सौंप देना चाहती थी।
मन में एक मीठा सा एहसास था और एक गंदी-सी वासना थी। पिछली रात उस वासना के कारण मैं सो नहीं पाई थी पर इस रात उस वासना को पूरा होते देख मैं बहुत आराम से गहरी नींद में सोई। दूसरे दिन मैं उठी। अपने समय पर स्कूल जाने को तैयार हुई और मुझे ख्याल आया कि अंकल ने तो कहा है कि मैं उनके घर आ जाऊं।
मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। आज मेरी बूर में लंड पिलने वाला था और मेरी बूर से हल्का-हल्का सा पानी रिसने लगा था। मैं चलती थी तो मेरी जांघों के बीच बूर के पानी की चिकनाई से लसफसाहट होती थी। मुझे अपनी कुतिया होने पर बड़ा सेक्सी आ रहा था। मैं स्कूल के लिए तैयार हुई और घर से निकल गई।
मेन रोड पर मैं पहुंची। वहां पर आशीष अंकल पहले से खड़े थे। मैंने उनको देखा तो चौंक सी गई। उन्होंने भी मुझे देखा। मैं उनके पास पहुंची और रुक गई। तो उन्होंने बोला कि निशिका, तुमको तो मैंने अपने घर आने को कहा था। मुझे पता था तुम्हें सीधा मेरे घर पर आने में शर्म आएगी और तुम स्कूल के रास्ते पर निकल जाओगी। इसलिए मैं यहां खड़ा हूँ। मेरे पीछे-पीछे आओ और मेरे साथ मेरे घर चलो। आज मैं तुम्हें पूरी तरह अपना बना लूँगा।
मैं चुपचाप उनके पीछे चलने लगी। वो मुझे दूसरे रास्ते से अपने घर के पीछे ले गए और जो बाउंड्री थी, उसको हमने क्रॉस किया और उनके घर पर पहुँच गए। रास्ते भर हमने कोई बातचीत नहीं की। वो मुझसे थोड़ा आगे चल रहे थे, मैं थोड़ी पीछे ताकि किसी को पता ना चले कि मैं उनको फॉलो कर रही हूँ।
घर पर पहुंचकर उन्होंने सारे दरवाजे सारी खिड़कियां बंद कर दी और मुझसे कहा, “तुम भी स्कूल गई हो और मैं भी ऑफिस गया हूँ। अब किसी को कुछ पता नहीं है कि तुम मेरे घर पर इन बंद दरवाजों के पीछे क्या करती हो।” मैंने पीठ पर लदे अपने बस्ते को उतार कर रखना चाहा.
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तो अंकल ने कहा, “नहीं, इसे तुम अपनी पीठ पर ही रहने दो। मैं तुम्हें एक स्कूल की छोकरी की तरह प्यार करना चाहता हूँ स्कूल ड्रेस में ही।” स्कूल की छोकरी, स्कर्ट और शर्ट, पीठ पर बस्ता। देखकर मैं बहुत गरम हो जाता हूँ। मेरा मन चोदने को करने लगता है। वो वहां सोफे पर बैठ गए और मुझे भी अपने बगल में बिठा लिया।
उन्होंने मुझे एक हाथ से पकड़कर अपनी छाती पर सटा लिया। आशीष अंकल मेरा मुंह चूमने लगे। कहने लगे, “तुम्हें कुछ भी आज कहने की जरूरत नहीं है। मुझे पता है तुम भी मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो। मैं भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ। हम लोग आज पूरा दिन सेक्स करेंगे। मैं तुम्हारे पापा का दोस्त हूँ। अपने दोस्त की बेटी की इच्छा पूरी करना मैं अपनी जिम्मेदारी समझता हूँ। कोई दूसरा-तीसरा तुमको छू जाए, मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
उन्होंने शर्ट के ऊपर से मेरी दोनों चुचियां पकड़ ली और मेरी दोनों चुचियों को मसलने लगे। मैंने हल्की सी सिसकारी भरी। मदहोशी की सिसकारी। किसी मर्द का हाथ आज पहली बार मेरी छोटी-छोटी चूचियों को मसल रहा था। अंकल के पैंट के अंदर उनके लंड का उभार बिल्कुल साफ-साफ नजर आ रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अंकल काफी देर तक मेरा मुंह चूसते रहे और मेरी चूचियां मसलते रहे। मेरी गर्दन पर जब वो किस करते और उनकी दाढ़ी मेरी कोमल त्वचा को चुभती थी, तो मैं वासना के सागर में गोते लगाने लगती थी। वो मेरी गर्दन चाट रहे थे और मैं हल्के-हल्के मोन कर रही थी। अंकल ने मुझे सोफे से उठाकर अपने सामने खड़ा कर दिया और वो मेरे शर्ट का खोलने लगे।
शर्ट का बटन उन्होंने पूरा खोल दिया। उन दिनों मैं शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहनती थी। मेरी चूचियां काफी छोटी थी। मैं अंदर में एक पतली गंजी पहन लेती थी। शर्ट खोलकर जब उन्होंने मेरी गोरी-चिकनी छाती देखी, उनके मुंह से आह निकल गया। वो मेरी गर्दन और मेरी छाती को सहलाने लगे। गंजी के ऊपर मेरी चूची का नोक दिख रहा था।
मेरी पीठ पर बस्ता अभी भी लदा हुआ था जो थोड़ा भारी था उसमें से कई सारे बुक्स और कॉपीज अंकल ने निकालकर बाहर रख दी लेकिन बस्ता नहीं उतारने दिया। अंकल मेरी गंजी पर अपना मुंह रखकर मेरी छाती सूंघने लगे वो गंजी के ऊपर से मेरी चोंचियों के निप्पल्स चूस रहे थे।
बाद में उन्होंने गंजी को ऊपर कर दिया और मेरी अमरूद जैसी छोटी-छोटी चूचियां देखकर उनकी आँखें फटी रह गईं। आशीष अंकल कहने लगे, “आह निशिका, ऐसी छोटी-छोटी चूचियां। जो उस समय मैं सपनों में देखता था, आज मेरे सामने है।” आशीष अंकल अपनी जीभ चौड़ी करके मेरी चूची को कुत्ते की तरह चाटने लगे।
मेरे स्कर्ट के अंदर टक किया हुआ शर्ट उन्होंने बाहर निकाल दिया और मेरे हाथ दोनों ऊपर उठा दिए। आशीष अंकल मेरी कांख सूंघने लगे। मैं इतनी मदहोश हो गई थी और काफी जोर-जोर से मोन करने लगी थी। आशीष अंकल मेरी कांख चाट रहे थे। उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया।
उनका तना हुआ लौड़ा मेरी गांड़ से सट गया और वो मेरे बदन को चाटने लगे। आशीष अंकल स्कर्ट के नीचे से अपना हाथ डालकर मेरी बूर सहलाने लगे और फिर अपना फिंगर सूंघते थे और फिर मेरी बूर सहलाने लगते थे। कहने लगे, “निशिका, तुम्हारी पैंटी कितनी भींग गई है। तुम्हारी बूर से काम वासना का रस टपकने लगा है।
उनकी गोद में बैठे हुए मैं उनके हर मूव का मजा ले रही थी। वो मेरा मुंह चूसते, मेरी गाल चाटते, तुरंत मेरी चुचियों को चाटने लगते। मेरी बांहों को ऊपर करके मेरी कांख चाटते थे। मेरी गर्दन चाटते थे। मुझे तो कोई होश ही नहीं था। मेरी बूर में हजार चींटियों जैसी रेंग रही थी। लग रहा था जैसे वहां कोई बाजा बज रहा हो।”
अंकल ने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरी दोनों टांगों को ऊपर कर दिया। दोनों घुटनों को उन्होंने मेरी छाती से सटा दिया। मेरी चूत और मेरी गांड़ उनके सामने थी। उन्होंने मेरी कछिया को एक तरफ साइड किया और मेरी बूर देखने लगे। और क्याही मादक सिसकारियां निकाल रहे थे वो भी और मैं भी।
उन्होंने दोनों अंगूठे से मेरी चूत के फांक को फैला-फैलाकर देखा। फिर आशीष अंकल मेरी बूर पर नाक रखकर मेरी बूर सूंघने लगे। आह! आह! काफी देर तक उन्होंने मेरा बूर सूंघा। तभी मेरे मुंह से निकल गया, “अंकर, मेरी बूर चाटो।” अंकल बोले, “इतनी गंदी-बूर है, कैसे मुंह लगाऊं?”
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इतना सुनते ही मैंने उनके बाल पकड़े और उनका सिर खींचकर अपनी बूर पर रख दिया। उन्होंने मुंह खोलकर जीभ मेरी चूत पर लगाई, मैं मछली की तरह तड़प गई। वो पूरे मजे से मेरी बूर चाटने लगे। वो मेरी चूत चाटते और मेरे मुंह पर किस करते थे। मेरी बूर चाटने के बाद जब वो मुझे मुंह पर kiss करते थे, तो मेरी बूर की मद मस्त गंध मुझे मिलती मिलने लगती थी।
शायद वो भी चाहते थे कि मैं अपनी बूर की गंध खुद लूं और मुझे ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था। वैसे मुझे खुद अपनी बूर की गंध लेने में कोई दिक्कत नहीं थी। जब मैं अकेले मास्टरबेट करती थी, तब मैं अपनी बूर जरूर सूंघती थी। आगे जो उन्होंने किया, वह मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
बूर चाटते चाटते उन्होंने मेरी चूतड़ पकड़कर दोनों तरफ फैलाया और सीधा मेरी गांड़ पर अपना मुंह लगा दिया। अरे बाबा रे! वो मेरी गांड़ चाटने लगे थे। हे भगवान! क्या कर रहे थे वो। जहां जिस छेद से मैं हगती हूं, उस छेद को वो चाट रहे थे। मेरी गांड़ चाटने के बाद उन्होंने मुझे फिर से किस किया और फिर उन्होंने अपना पैंट और अपना अंडरवियर उतार दिया। “School Girl Sex Fantasy”
उन्होंने मुझे उठाया और अपनी नंगी जांघ पर बिठा लिया और कहने लगे, “निशिका, तुम्हारी बूर और तुम्हारी गांड का स्वाद लाजवाब है।” और वो फिर मेरा मुंह चूसने लगे। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे हाथ में अपना लौड़ा थमा दिया। आह! कितना गर्म लंड था उनका। एकदम टाईट और खड़ा। बाहर से मुलायम और अंदर से कड़ा।
वो मेरे बदन को सहलाने लगे। मेरी चूचियों को कस-कस करके वो दबाने लगे। उसको मसलने लगे। मेरी बूर पर हाथ फिराने लगे। मेरी गांड में अपनी उंगली से पोक करने लगे और मैं उनके लौड़े को सहला रही थी। उन्होंने दूसरा हाथ पकड़कर अपनी आंड़ से सटा लिया। बोले, आंड़ को इग्नोर मत करो, निशिका। आंड़ में बहुत रस है। आंड़ को सहलाओ, आंड़ को थोड़ा नाखून से खरोंचो, और लौड़े का मूठ मारो।
फिर आशीष अंकल ने मुझे अपना मुंह खोलने को कहा और मैंने जैसे ही अपना मुंह खोला, उन्होंने मेरे मुंह में थूक दिया और मेरे मुंह में दो उंगलियां डालकर मेरा मुंह चोदने लगे। उनका थूक मेरे मुंह में था। वो मेरे बूर की फुन्नी रगड़ रहे थे। गांड़ में उंगली डालने की कोशिश कर रहे थे। मैं उनका आंड़ सहला रही थी और उनके लौड़े का मूठ मार रही थी।
आशीष अंकल ने मेरे मुंह में तीन-चार बार थूक-थूका होगा। फिर आशीष अंकल ने अपने मुंह में मुझे थूकने को कहा। मैं आशीष अंकल के मुंह में थूकने लगी और वो उसको निगल लेते। बार-बार वो मुझे अपने मुंह में थूकने को बोलते और उसको निगलते और फिर मेरे मुंह में जीभ डालकर मुझे चाटने लगते थे।
अब आशीष अंकल सोफे पर दोनों टांगें फैलाकर बैठ गए। मुझे अपनी जांघों के बीच में, घुटनों के बीच में खड़ा किया और लंड जड़ से पकड़कर मुझसे कहा, “चूसो, इसको। मेरा लंड चूसो, निशिका।” मैं झुककर आशीष अंकल के लौड़ा को मुंह में लेने की कोशिश करने लगी। उनके लौड़े से एक मदहोश करने वाली गंध आ रही थी, एक मर्दानी सी गंध। “School Girl Sex Fantasy”
मैंने उनके सुपाड़े की चमड़ी को नीचे किया और उनका सुपाड़ा पहले तो मैंने सूंघा और फिर अपने मुंह में भर लिया। आशीष अंकल ने मेरा सिर पकड़कर नीचे की तरफ धांसना शुरू किया। उनका आधा लौड़ा मेरे मुंह में समा गया और मैं हो हो करने लगी। उनके लंड का सुपाड़ा जब मेरे कंठ के भीतरी भाग को छूता था, तब मुझे उल्टी जैसे आने लगती थी।
पर वो इसकी परवाह नहीं कर रहे थे और दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़ के तड़ा तड़ अपने लौड़े पर धांस रहे थे। फिर आशीष अंकल खड़े होकर मेरा मुंह चोदने लगे। घप घप मेरे मुंह में वो लौड़ा पेल रहे थे। फिर लौड़ा निकाल कर अपना आंड़ मेरे मुंह में दे देते थे। आशीष अंकल का लंड किसी लोहे की तरह सख्त हो गया था और फिर भी कितना मुलायम लग रहा था।
उनके लंड के छेद से पतला सा पानी रिस रहा था। बड़ा नमकीन। कोई स्वाद नहीं था उसमें। मेरी सांसों में उनके लंड की गंध समा गई थी। मुंह चोदते हुए आशीष अंकल मेरा एक हाथ पकड़कर पीछे अपनी गांड़ की तरफ ले गये और कहने लगे, “मेरी गांड़ के छेद में उंगली डालने की कोशिश करो निशिका।”
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मैं आशीष अंकल की गांड़ के छेद पर उंगली रखकर भीतर घुसाने की कोशिश करने लगी और आशीष अंकल वासना की मस्ती में जोर-जोर से आहें भरने लगे। फिर आशीष अंकल ने मुझसे कहा, “निशिका, अब तुम्हारी बूर चोदने का वक्त आ गया है। पर तुम्हें पता है ना मैं जबरदस्ती नहीं करूंगा। तुम मुझसे कहोगी कि आशीष अंकल, मेरी बूर में अपना लंड डालिए। तभी मैं तुम्हारी बूर में लंड डालूंगा। “School Girl Sex Fantasy”
प्लीज़, जब तुम्हारे अंदर इतनी मस्ती छा जाए और तुम्हें लगे कि अब बिना बूर में लंड लिए तुम बर्दाश्त नहीं कर पाओगी। तब मुझसे यह बात कहना और तब मैं तुम्हारी बूर चोदूंगा.” वैसे मैंने यह बात तुम्हारी बूर चोदने के लिए कही थी। तुम्हारा मुंह चोदने के लिए मुझे तुमसे परमीशन की जरूरत नहीं थी। और यह भी जान लो कि तुम्हारी गांड़ चोदने के लिए भी मैं परमीशन नहीं लूंगा। तुमको जब बूर में लेना हो तब मुझसे कहना।
उन्होंने मुझको पकड़ कर उठाया और मेरा मुंह चूसने लगे। मैं यही सोचकर हैरान थी कि वह मेरी गांड़ चोदने की बात कर रहे थे। मेरा देह एकदम से झुरझुराने लगा। गांड़-सेक्स की मूवीज मैंने तो देखी थी पर मैंने सोचा नहीं था कि आशीष अंकल मेरी गांड़ मारेंगे। आशीष अंकल कहने लगे, “मैं तो पूरा मस्त हो गया हूँ। अब तुमको बिना चोदे मैं रह नहीं सकता हूँ। तो तुम अपनी बूर चोदने के लिए जितनी जल्दी बोल दो, उतना अच्छा है। वरना मैं तुम्हारी गांड में लंड पेल दूंगा.”
आशीष अंकल ने मेरा एक भी कपड़ा नहीं उतारा था। मेरे जूते भी नहीं उतारे थे। मेरी कच्छी अभी भी मेरी गांड़ पर थी। सिर्फ मेरा शर्ट का बटन खोला था और मेरी गंजी ऊपर की थी। मेरे पीठ पर अभी भी स्कूल का बस्ता लदा हुआ था और वो मेरी गांड़ मारने की बात कर रहे थे। मैं थोड़ी डरी भी। गांड़ में मैंने पेंसिल भी लिया था लेकिन उतनी पतली पेंसिल लेने पर भी थोड़ा दर्द होता था।
आशीष अंकल का मोटा लौड़ा मेरी गांड़ में जाएगा तब तो मुझे मार ही डालेगा। पर सेक्स तो सेक्स है। इसमें सब अच्छा लगता है। फिर आशीष अंकल मुझे अपने बेडरूम में ले गए। क्या मस्त सजाया हुआ था उन्होंने बेडरूम को! सब साफ-सुथरा और चमचमाता हुआ। उन्होंने बेड पर गुलाब की पंखुड़ियां सजा दी थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उस पर दो तकिए रखे थे और बगल के साइड टेबल पर उन्होंने एक अच्छे से फ्रेम में एक बड़ी सी तस्वीर लगा रखी थी। जिसमें उन्होंने अपने मोबाइल से मेरी और उनकी एक गंदी-गंदी तस्वीर की प्रिंट निकाल कर लगा रखी थी। इस तस्वीर में हम दोनों खड़े थे। आशीष अंकल सूट में थे और सूट का चेन खुला था। “School Girl Sex Fantasy”
मैंने एक पीले रंग की ड्रेस उसमें पहनी थी और आशीष अंकल के पैंट से उनका लौड़ा और उनकी आंड़ बाहर निकली हुई थी। मैं टांग उठाकर उनके कमर पर रखी हुई थी और उनका लौड़ा मेरी बूर में घुसा हुआ था। रूम में घुसते ही आशीष अंकल ने मुझे हग किया। मेरे मुंह पर चुम्मा लिया और कहने लगे, “निशिका, आज से तुम मेरी बिन ब्याही दुल्हन हो। और मैं तुम्हारे साथ आज सुहागरात मनाऊंगा। देखो, इस सुहाग की सेज को मैंने कितना सजा कर रखा है तुम्हारे लिए।”
मैं भी यह सब देखकर के बड़ी खुश हो गई और आशीष अंकल की गर्दन के दोनों तरफ अपने हाथ डालकर उनको किस करने लगी। फिर आशीष अंकल मुझे उस तस्वीर के पास लेकर के गए, जिसके आगे एक दीया रखा हुआ था। उन्होंने कहा, “निशिका, आज मैं तुम्हें पूरी तरह अपना बनाने वाला हूं। चलो, इस दिए को हम दोनों मिलकर के जलाते हैं।”
वहां पर रखे दिए को हम दोनों ने पकड़ कर जलाया और आशीष अंकल ने मेरा मुंह चूमा। मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और आहिस्ते से मुझे मेरे सुहाग की सेज पर रख दिया। इतनी देर में तब मैंने कुछ उनसे कहा। “आशीष अंकल, तुम मुझे दुल्हन बनाना चाहते हो, दुल्हन बना रहे हो। लेकिन तुमने फोन में मेरा नंबर ‘रंडी’ के नाम से सेव करके रखा है। क्या मैं तुम्हारी रंडी बन रही हूँ या तुम्हारी दुल्हन?”
आशीष अंकल बोले, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है निशिका बेटा। हर दुल्हन अपने दूल्हे की रंडी ही होती है। जो रंडी बनने का व्यवसाय करती है, वह बूर चुदाने के पैसे लेती है। दुल्हन भी अपने दूल्हे से बूर चुदाने के एवज में अपना रख-रखाव का सारा खर्च लेती है। दुल्हन और रंडी में कोई फर्क नहीं होता है निशिका बेटा।
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मैं सोचने लगी, “ओह! यह आदमी कितना खतरनाक और कितना गंदा है।” अपने बेड पर मुझे लिटाने के बाद आशीष अंकल ने अलमीरा खोला और उसमें से एक सोने की चेन निकालकर उन्होंने मेरे गले में डाल दी। मुझे उन्होंने किस किया और कहा, “निशिका, यह तुम्हें मेरी दुल्हन बनने का गिफ्ट है। इसको स्वीकार करो।” और मैं मुस्कुराने लगी।
मुझे उस समय अपने आप पर थोड़ा गर्व महसूस हो रहा था कि मैं अपनी उम्र के तीन गुने उम्र वाले मर्द की दुल्हन बन रही थी। मेरे अंदर वो क्षमता थी कि मैं इतने मैच्योर आदमी को भी पटाकर उससे अपनी कामवासना तृप्त करवा सकती थी। और लड़की थी ना। गहना पाने के लिए तो हर लड़की तड़पती है। “School Girl Sex Fantasy”
वो सोने की चेन पाने की खुशी तो थी ही। मैं मुस्कुराने लगी। मैं मुस्कुराने लगी और अपना सिर अपने घुटनों के बीच छुपा लिया। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उस सुहाग की सेज पर भी मेरे स्कूल के जूते अब भी बंधे थे और मेरी पीठ पर मेरे स्कूल का बस्ता अभी भी लटका हुआ था। हां मेरे शर्ट के सारे बटन खुले हुए थे।
मेरी गंजी मेरी गर्दन तक चढ़ी हुई थी। मेरी छोटी-छोटी चूचियां साफ-साफ दिख रही थीं और मेरी कच्छी तो भीग कर बिल्कुल लसलसी हो गई थी। आशीष अंकल ने अपना टी-शर्ट और अपनी गंजी भी उतार दी और मुझे भींचकर उस बिस्तर पर वो सो गए। उनका लौड़ा बिल्कुल ही टाईट और खड़ा था, जो मेरी बूर को टच कर रहा था और हम लोग गीला-गीला किस कर रहे थे।
हमारे मुंह का लार भी चिपचिपा हो गया था। मुझे कोई शर्म नहीं आ रही थी। मैं बेशरमों की तरह आहें भर रही थी और अंकल के लौड़े पर अपना बूर रगड़ने की कोशिश कर रही थी। अंकल भी दोनों टांगों के बीच में मेरी कमर को बांधकर मेरी बूर पर अपना लौड़ा फिसलाना चालू कर दिया था।
फिर वह थोड़ा झुककर मेरी छोटी-छोटी चूचियों के निप्पल्स कस-कस करके चूसने लगे। उस समय मुझे थोड़ा दर्द हुआ और मैंने उनकी पीठ पर एक हल्का सा मुक्का मारकर उनकी तरफ मुस्कुरा कर देखने लगी। वो भी मेरी तरफ देखे और फिर मुझे मुंह पर किस करने लगे। हम दोनों के मुंह से एक-दूसरे के जननांगों की गंध आ रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
हम लोग उसी में सराबोर हो रहे थे। उस समय सब कुछ मेरी बर्दाश्त के बाहर ही था। मैं चाहती थी कि आशीष अंकल अब देर किए बिना मेरी बूर में अपना लंड पेल दें। मेरी बूर को फाड़ दें और मेरी बूड में घपाघप इतना लौड़ा पेलें कि मेरी जन्म भर की इच्छा पूरी हो जाए। लेकिन लड़की हूं ना। लड़की को तो बोलना नहीं आता है। कैसे बोलेगी? बेशरम तो मैं हो ही गई थी। पर अंकल को कैसे कहूं कि अंकल मेरे बूर में लौड़ा डालकर मुझे चोदो। चोदो, मुझे एक रंडी की तरह। “School Girl Sex Fantasy”
आशीष अंकल का जोर-जोर से आहें भरना, मेरा नाम ले-ले करके और मेरी बूर पर अपना लौड़ा रगड़ना। इतना गर्म लौड़ा! मैं एकदम से पागल हो गई थी। आशीष अंकल के भी काबू से बाहर हो गई सारी बातें। उन्होंने मुझे तुरंत दूसरी तरफ करवट किया और मेरे चुतड़ों को फैलाकर मेरी गांड़ पर अपना लौड़ा टिका दिया।
गांड़ के छेद पर उनका गर्म लौड़े का सुपाड़ा लगते ही मेरी आह निकल गई और मैं बिल्कुल ही डर गई। तो आशीष अंकल मेरी गांड़ मारने वाले थे। मैं तपाक से पलट गई। आशीष अंकल की आँखों में आँखें डालकर के कहा, “नहीं।” गांड़ में नहीं आशीष अंकल। अंकल, आप मेरी बूर में अपना लंड डालकर के मुझे चोदिए। आह! मैंने बेशरमी से उनके मन की बात बोल दी।
आशीष अंकल ने अपने को पकड़ा। मेरी लसलसाई बूर के छेद पर उसे टिकाया और हचाक से एक धक्का मेरी बूर में पेल दिया। आह! हम दोनों किसी घायल कुत्ते-कुतिया की तरह आहें भरने लगे। उनका लौड़ा इतना गर्म मेरी बूर के अंदर घुसा और मेरी बूर की गर्मी उनके सुपाड़े पर चढ़ी। हम दोनो के जन्म-जन्म की प्यास बुझने लगे।
उनका एक तिहाई लौड़ा मेरी बूर के अंदर था। उन्होंने कसकर मुझे अपनी छाती से सटा लिया और मेरा मुंह चूमने लगे। उन्होंने मुझसे कहा, “अरे निशिका, कितना गर्म है तुम्हारा बूर।” मैंने कहा, “हां अंकल, चोदिए, मेरी गरम बूर को। पूरा जड़ तक अपना लंड मेरी बूर में पेल दीजिए। मुझे अपनी दुल्हन या अपनी रंडी जो भी समझना हो, समझकर के मेरी बूर को फाड़ डालिए।” मुझे आपके जैसे ही किसी गंदे-मर्द से अपनी वासना को तृप्त करवाना था। थैंक्यू अंकल. आपने मेरे शरीर की सेक्स इच्छा को बड़े अच्छे ढंग से पूरा किया।
आपको बताऊं, आशीष अंकल ने उसके बाद कुछ भी बाकी नहीं रखा। मेरे ऊपर चढ़कर मेरी बूर में जो मोटा लौड़ा पेला है उन्होंने उस रोज, क्या बताऊं? पहले तो जब उन्होंने बूर में लंड डाला, उसके 2-3 मिनट के बाद ही मैं पहली दफे झड़ गई। चीखती हुई उनसे लिपट कर अपनी कमर उठाकर उनका पूरा लौड़ा अपने बूर में ले लिया और मैं झड़ती ही चली गई। “School Girl Sex Fantasy”
फिर हर स्टाईल में डॉगी बनाकर, करवट लिटाकर, गोद में बिठाकर हर स्टाईल में वो मुझे चोदने लगे। मैं कितनी बार झड़ी होगी उस रोज, यह मुझे याद नहीं है। लेकिन अंकल थे कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे। मतलब कम से कम 1 घंटा उन्होंने मुझे चोदा होगा। उन्हीं स्कूल के कपड़ों में। मेरे कपड़े पसीने से पूरे भींग गए थे।
स्कूल के बैग में जो कम्पास बॉक्स था, वो इतनी आवाज कर रहा था जब वो मेरी बूर में धक्का मारते थे या मैं उनके लंड को अपने बूर में लेकर उस पर उछलती थी। उसका एक अलग मजा आ रहा था उनको भी और मुझे भी। आपको बताऊं, मैं बिल्कुल ही थक गई थी। इतनी झड़ने के बाद मेरी देह में ताकत बची नहीं थी।
आशीष अंकल थे कि रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। इतने वो चोदने में लीन लग रहे थे कि मुझे लगता था मैं मर ही जाऊंगी। वो मुझे थोड़ी देर पर बगल पर रखे ग्लास में पानी देते। मैं पी लेती और ग्लास रखकर वो फिर मुझे चोदने लगते थे। मैं चाहती थी कि वो जल्दी से झड़ जाएं। मैं चाहती थी यह कांड थोड़ी देर के लिए रुक जाए।
लेकिन उस 50 साल की उम्र में भी आशीष अंकल के लंड में जो जोश था, वह एक घंटे बाद भी कम होने का नाम नहीं ले रहा था। आशीष अंकल भांप गए कि मैं थक गई हूँ। उन्होंने मुझसे पूछा, “निशिका, बेटा, थक गई हो क्या?” मैंने हाँ में सिर हिला दिया। उन्होंने कहा, “ठीक है, अब मुझे भी तुम्हारी बूर में अपना लौड़ा झाड़ने का बहुत मन हो रहा है। “School Girl Sex Fantasy”
देखो, तुम सीधी लेट जाओ और मैं तुम्हारे बूर में लंड पेल करके तुम्हें चोदूंगा। तुम मेरी गांड़ में उंगली करो। मैं जल्दी झड़ जाऊँगा। मेरी गांड़ में बहुत ज्यादा सेक्सी फीलिंग है। तुम मेरी गांड को टच करोगी, सहलाओगी, उसमें उंगली करोगी। तब जाकर मैं तुम्हारी बूर चोदते हुए झड़ जाऊँगा। यही ट्रिक है मेरे साथ, मैंने तुम्हें बता दिया।”
फिर उन्होंने वैसा ही किया। मुझे चित्त लिटाकर वो मेरे ऊपर चढ़ गए। अपनी देह का सारा वजन उन्होंने मेरी देह पर डाल दिया। अपना मोटा काला लौड़ा उन्होंने मेरी बूर में पेल दिया और मेरा हाथ पकड़कर अपनी गांड़ की दरार पर रख दिया। मैं उनकी गांड को पहले तो सहलाने लगी और वो हल्के-हल्के मेरी बूर में लंड पेलने लगे। “School Girl Sex Fantasy”
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : मेरे साथ चुदाई वाला खेल खेलने लगी आंटी
मेरी साँसें तेज़ हो गई थीं और वह मुझे बहुत जोश के साथ चूम रहा था—कभी मुझे चूस रहे थे, कभी मेरे मुँह को, तो कभी मेरी नाक को चाट रहे थे—और फिर मैंने अपने हाथ को लार से गीला किया और अपनी एक उंगली उनकी गांड में पेल दिया। और आशीष अंकल जो मस्ती में आए और जो उन्होंने मेरी बूर में अपना लौड़ा ठोंकना शुरू किया, और जो उन्होंने मुझे रंडी की तरह चोदना शुरू किया, और जो उन्होंने ठपाठप मेरी बूर पर ठाप मारना चालू कर दिया।
मैं समझ गई। अब आगे मुझे यह ख्याल रखना होगा कि मैं उनकी गांड़ के साथ भी खेलूं। मैं उनकी गांड़ में अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगी और आपको बताऊं कि ज्यादा वक्त नहीं लगा। जब उन्होंने मेरी बूर में अपना लौड़ा जड़ तक पेल दिया। मेरे लिफ्स को पूरा अपने मुंह में भरकर चूसते हुए वो मेरे बूर के अंदर झाड़ने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनका देह किसी वाइब्रेटर की तरह थरथरा रहा था और वो किसी भाले लगे हुए सांड की तरह चीख रहे थे। मेरी बूर के अंदर कम से कम उन्होंने अपने वीर्य की दस धार तो जरूर मारी होगी। वे किसी कटे हुए पेड़ की तरह मेरी देह पर गिर गए और हाँफने लगे। उनकी आँखें मुदी हुई थीं। मैंने देखा उनकी बाहों का एक-एक रोआं खड़ा था। मुझे बिल्कुल अंदाजा हो रहा था कि वो इस समय क्या फील कर रहे थे। और आपको बताऊं कि जब उनका लौड़ा झड़ रहा था और उनका गर्म वीर्य मेरी चूत में भर रहा था!
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