Bahan Sealpack Chut Chudai
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 19 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि मैंने अपने चूत की खुजली से मजबूर हो कर अपने भाई गोलू से शादी कर ली. अब हम हमारी सुहागरात मानाने जा रहे थे आज पहली बार मेरी कुंवारी चूत में मेरे सगे भाई का लंड घुसने वाला है. अब आगे- Bahan Sealpack Chut Chudai
मैं उस बड़े से बिस्तर पर बिल्कुल नंगी, अपने पैरों को पूरी तरह फैलाए हुए लेटी हुई थी। मेरी वह चिकनी और बिना बालों वाली चूत गीली होकर चमक रही थी, और उसके ठीक सामने मेरा भाई और मेरा नया पति गोलू खड़ा था। उसका वह कड़क और भारी लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ था, जिसकी नसें साफ तनी हुई थीं और जो अब मेरी उस तंग और बेताब चुत के पास जाने के लिए पूरी तरह तैयार था।
यह मेरी ज़िंदगी का पहला मौका था जब भाई-बहन का रिश्ता इतनी दूर तक पहुँच गया था और हम पति-पत्नी बनने जा रहे थे। मेरे दिल की धड़कनें बहुत तेज़ चल रही थीं और मेरी साँसें भी तेज़ हो गई थीं। गोलू धीरे से मेरे पैरों के बीच आकर खड़ा हो गया और अपने उस कड़क लंड को मेरे दोनों खुले हुए पैरों के बीच रखते हुए, अपनी गर्म और काँपती साँसों के साथ मेरे बिल्कुल करीब झुक गया।
गोलू बिस्तर पर मेरे बिल्कुल करीब झुक गया और अपने उस तने हुए, गर्म लंड की टोपी को मेरी नंगी और गीली चूत के होंठों पर धीरे-धीरे फेरने लगा। उसकी सुपाड़ी का वह कड़क और थोड़ा खुरदुरा छूना जब मेरी त्वचा पर लगा, तो मेरे पूरे शरीर में सिहरन की एक तेज लहर दौड़ गई।
मुझे अच्छी तरह याद आ गया कि यह दूसरा मौका था जब उसका लंड मेरी चूत को छू रहा था। पहली बार तो उसने बिना मेरी मर्जी के अचानक अपना लंड मेरे अंदर डाल दिया था, और वह पल सिर्फ कुछ सेकंड का था, जिसमें मुझे संभलने का मौका भी नहीं मिला था। लेकिन आज का यह पल उससे बिल्कुल अलग था।
इस बार वह कोई जल्दी नहीं कर रहा था, बल्कि अपने उस मोटे और कड़क लंड को मेरी चूत के चारों तरफ और उसके हर हिस्से पर धीरे-धीरे फेर रहा था। उसके इस छूने के साथ ही मेरे दिल के अंदर एक अजीब सी उलझन और मन की लड़ाई शुरू हो गई। मेरे मन का एक हिस्सा मुझे लगातार बुरा महसूस करा रहा था।
मैं खुद को एक बुरी और बदचलन लड़की मान रही थी क्योंकि जिस मर्द के लंड से मेरी चूत को छुआ जा रहा था, वह कोई और नहीं बल्कि मेरा अपना सगा भाई था। समाज, सही-गलत की बातें और परिवार के सारे नियम मेरी आँखों के सामने आकर मुझे गलत ठहरा रहे थे।
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लेकिन उसी पल, मेरे शरीर के अंदर दौड़ती आग और उसके छूने से मिलने वाला बहुत ज़्यादा सुकून उन सारे सही-गलत के नियमों से ज्यादा बड़ा लग रहा था। एक तरफ मुझे अंदर से गलती करने का बुरा एहसास हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ उस भाई के लंड के हर एक धीरे छूने से मुझे जो शरीर का सुख और नशा मिल रहा था, वह मुझे अंदर से पागल कर रहा था।
मैं एक ही समय पर खुद को दुनिया की सबसे बुरी बहन समझ रही थी और साथ ही अंदर ही अंदर इस बात में पूरी तरह खो भी रही थी कि मुझे अपने भाई के शरीर से कितना गहरा और अलग सुख मिल रहा है। मेरी जाँघों के बीच झुककर गोलू ने अपनी गर्म साँसें मेरी नाभि और चूत के पास छोड़ीं।
उसने अपनी चमकती हुई और हवस से भरी आँखों से मेरी आँखों में देखा और बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “आलिया दीदी… मेरा लंड अब और इंतज़ार नहीं कर सकता, मैं पूरी तरह तैयार हूँ इसे तुम्हारी इस चूत के अंदर डालने के लिए… क्या मैं डालूँ?” उसकी वह सीधी और साफ़ बात सुनकर मेरा चेहरा एक बार फिर शर्म से लाल हो गया।
मेरे सीने में दिल किसी हथौड़े की तरह धड़कने लगा था। मैंने अपनी आँखें थोड़ी सी नीचे कर लीं, अपने बदन को हल्का सा मरोड़ा और बहुत धीमी, काँपती हुई और शर्माई हुई आवाज़ में जवाब दिया, “हाँ… तो फिर कर दो न, गोलू… अब और मत तड़पाओ मुझे।” मेरी हाँ मिलते ही गोलू की आँखें चमक उठीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसने अपने दोनों हाथों से मेरी जाँघों को और चौड़ा करके अपने कंधों पर टिका लिया, जिससे मेरी वह बिना बालों वाली चूत पूरी तरह से उसके सामने खुल गई। उसने अपने उस मोटे और कड़क लंड के सिरे को मेरी चूत के उस गीले और तंग हिस्से पर बिल्कुल सही जगह पर रखा।
उसकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं और मेरा पूरा शरीर इस बात को महसूस करके काँप रहा था कि अब कुछ ही पलों में मेरा सगा भाई, मेरा पति बनकर पूरी तरह से मेरे अंदर आने वाला था। गोलू ने हल्का सा ज़ोर लगाते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का दिया।
उसके उस भारी और कड़क लंड का सिरा जैसे ही मेरी चूत के उस तंग हिस्से को पार करते हुए अंदर जाना शुरू हुआ, मेरे मुँह से एक लंबी चीख निकल गई। वह महसूस इतना गहरा और ज़ोरदार था कि मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। मेरे अंदर का वह नरम और तंग हिस्सा उसके उस मोटे लंड के दबाव से जैसे फट सा रहा था।
अंदर जाते ही उसने महसूस किया कि मेरी चूत कितनी कसकर उसके लंड को पकड़े हुए है। गोलू ने थोड़ा रुककर मेरे चेहरे की तरफ देखा और मेरी उस तकलीफ और बहुत ज़्यादा सुख से भरी हुई हालत को देखकर उसके चेहरे पर एक पागल सी मुस्कान फैल गई।
उसने मेरे माथे पर प्यार से अपने होंठ रखे और अपनी कमर को पूरी ताकत से आगे की तरफ धकेलते हुए अपना पूरा लंड एक ही झटके में मेरे अंदर तक डाल दिया। जैसे ही उसका वह मोटा और भारी लंड मेरी उस छोटी और तंग चूत के अंदर पूरी गहराई तक चला गया, मेरे अंदर दर्द और जकड़न का बहुत तेज़ अहसास हुआ।
मेरी चूत के अंदर का हिस्सा उसके इतने बड़े आकार से जैसे फटने वाला था, और शुरुआत के कुछ पलों के लिए उस तेज़ दर्द ने मेरी साँसें रोक दीं। मैं दर्द से थोड़ा तड़पने लगी और मेरी आँखें बंद हो गईं। लेकिन उस दर्द के पीछे एक ऐसा नशे जैसा और गहरा सुकून था, जिसे शब्दों में बताना मुश्किल था।
यह महसूस करना कि मेरे अपने सगे भाई का लंड मेरी चूत के अंदर गहराई तक था, मेरे सारे दर्द को धीरे-धीरे एक अजीब से पागल कर देने वाले सुख में बदल रहा था। क्योंकि आज से पहले मेरी वह चूत पूरी तरह से वर्जन थी, इसलिए पहली बार उसका लंड पूरी तरह अंदर जाने पर मेरी अंदर की पतली परत टूटने से थोड़ा सा खून बाहर आ गया, जो गोलू के उस तने हुए लंड पर भी लग गया था।
खून को देखकर गोलू एक पल के लिए घबरा गया। उसने तुरंत हल्का सा पीछे होकर अपने लंड को बाहर निकाला और थोड़ी घबराई हुई आवाज़ में मुझसे पूछा, “दीदी… यह खून… यह क्या हो गया? मुझे क्या करना चाहिए?” मैंने दर्द और सिहरन के बीच अपनी आँखें खोलीं और हाँफते हुए उससे कहा, “कुछ नहीं… बस थोड़ा सा खून है, तुम अपनी अंडरवियर से इसे साफ कर दो।”
मेरी बात सुनते ही गोलू ने फर्श पर पड़ी अपनी वही अंडरवियर उठाई और उससे अपने लंड पर लगे उस खून को धीरे से पोंछ दिया। इसके बाद उसने बड़े प्यार से मेरी उस गीली और नाज़ुक चूत को भी उसी कपड़े से हल्के हाथों से साफ किया, जिससे वह जगह फिर से बिल्कुल साफ हो गई।
खून साफ होते ही गोलू के अंदर का वह जोश और हवस एक बार फिर बहुत बढ़ गई। उसने बिना एक पल गंवाए अपने उस लंबे और मोटे लंड को दोबारा मेरी उसी तंग चूत के पास सही जगह पर रखा और इस बार बिना किसी झिझक के अपनी पूरी ताकत से एक ज़ोरदार धक्का देकर उसे मेरे अंदर डाल दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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इस बार खून तो नहीं निकला, लेकिन मेरे अपने भाई के उस बड़े और कड़क लंड की पूरी लंबाई और मोटाई को अपनी चूत के अंदर महसूस करना मेरे होश उड़ाने के लिए काफी था। मेरे अंदर उसके उस मोटे और भारी लंड के होने से मेरे पूरे शरीर में जैसे एक नया करंट दौड़ गया था।
अब उस शुरुआत के दर्द और झिझक की जगह एक गहरा और नशे जैसा सुख आ गया था, जो मेरे पूरे शरीर को हिला रहा था। गोलू अब अपनी कमर को थोड़ा पीछे खींचता और फिर एक झटके के साथ पूरी ताकत से मेरे अंदर धकेल देता। उसके हर एक धक्के के साथ कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की और शरीर के आपस में टकराने की आवाज़ गूँज रही थी।
जब भी वह अपना लंबा लंड मेरी चूत के अंदर पूरी गहराई तक ले जाता, मेरे मुँह से अपने आप एक लंबी आह निकल जाती। गोलू का चेहरा पसीने से पूरी तरह भीग चुका था, उसकी आँखें लाल थीं और उसकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं। उसने मेरे दोनों पैरों को अपनी कमर के और करीब खींच लिया, जिससे उसका लंड मेरी चूत के और भी ज़्यादा अंदर तक जाने लगा।
उसने अपना एक हाथ मेरे स्तनों पर रखकर उन्हें ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया और अपने दूसरे हाथ से मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया। “दीदी… तुम्हारी यह चूत इतनी गर्म है ” उसने हाँफते हुए मेरे कान में धीरे से कहा। उसकी उस बात ने मेरे अंदर छिपी हुई हवस को और बढ़ा दिया। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
मैंने अपनी बाँहें उसके गले के चारों ओर कसकर लपेट लीं और उसके चेहरे की तरफ देखते हुए कहा, “हाँ गोलू… मुझे और ज़ोर से धक्का दो… अपनी बहन को पूरी तरह से भर दो…” मेरी वह बात सुनकर गोलू पूरी तरह बेकाबू हो गया। उसने अपनी रफ्तार और तेज़ कर दी और लगातार अपनी कमर को चलाने लगा।
हर एक झटके के साथ मेरा शरीर ऊपर उठता और उसके सीने से आ मिलता। उस वक्त मुझे दुनिया की किसी बात का होश नहीं था। न समाज का डर, न किसी पाप का अहसास, बस मेरे अंदर मौजूद मेरे सगे भाई का वह लंड ही मेरी दुनिया का सच था। गोलू की रफ्तार अब और भी ज़्यादा तेज़ हो चुकी थी।
उसके मजबूत और मोटे लंड के लगातार तेज़ धक्कों से मेरी वह नाज़ुक चूत अंदर तक सुन्न सी होने लगी थी। हर एक धक्का मेरे अंदर तक महसूस हो रहा था। कमरे की हल्की रोशनी में हमारे पसीने से भीगे शरीर एक-दूसरे से इस तरह चिपके हुए थे कि हमारे बीच की हर दूरी खत्म हो चुकी थी।
अब मैं सिर्फ उसकी बाँहों में उसकी पत्नी थी, और वह मेरा अपना भाई, मेरा पति था। मेरे स्तनों के वो उभार उसके सीने से रगड़ खा रहे थे, और उसके हाथों की मजबूत पकड़ मेरी कमर पर और कसती जा रही थी। मेरे मुँह से लगातार सिसकियों और आहों के बीच उसका नाम निकल रहा था। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
उसके हर एक गहरे धक्के के साथ मेरे पेट के नीचे एक अजीब सी सिहरन और गर्मी बढ़ने लगी थी, जो धीरे-धीरे बहुत तेज़ होती जा रही थी। उसने अपने चेहरे को मेरे चेहरे के बिल्कुल करीब लाते हुए अपनी साँसों को मेरी साँसों से मिलाया और हाँफते हुए मेरे कान में कहा, “दीदी… बस… अब मैं और खुद को नहीं रोक पाऊँगा… मेरा निकलने वाला है।”
उसकी बात सुनते ही मेरे अंदर का रोमांच बहुत बढ़ गया। मेरे पैरों के पंजे कस गए, मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं और मेरा पूरा शरीर उस सोच से ही काँपने लगा कि मेरे अपने भाई का वह सफ़ेद पानी अब मेरे अंदर आने वाला है। उस पल के करीब पहुँचते ही मैंने अपनी टाँगों को उसकी कमर पर और कसकर लपेट लिया और हाँफते हुए कहा, “हाँ गोलू… कर दो…।”
मेरी उस आखिरी पुकार के साथ ही गोलू ने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए एक आखिरी और सबसे गहरा धक्का दिया। उस पल उसके अंदर का गाढ़ा सफ़ेद पानी एक झटके में मेरी चूत के अंदर भर गया। उसके उस गर्म सफ़ेद पानी की पहली धार जैसे ही मेरे अंदर गई, मुझे लगा कि मेरा पूरा शरीर पिघल रहा है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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हर पल के साथ वह गर्माहट मेरे अंदर तक महसूस होती रही। उस गर्मी और उस पल के एहसास से मेरी चूत अंदर तक भर गई, और मेरा पूरा शरीर उस बहुत ज़्यादा सुख में डूब गया। उस बहुत ज़्यादा सुख के कुछ मिनट बाद, हम दोनों उस बड़े बिस्तर पर थककर एक-दूसरे की बाँहों में थोड़ी देर के लिए चुपचाप पड़े रहे।
हमारे शरीर पसीने से भीगे हुए थे और कमरे में हमारी तेज़ साँसों की आवाज़ आ रही थी। थोड़ी देर बाद जब थकान कम हुई, तो पेट में हल्की सी भूख महसूस हुई और हमने सोचा कि अब बाहर चलकर कुछ खाना चाहिए। मैंने उठकर अपने कपड़े पहनने की कोशिश की, ताकि खुद को ढक सकूँ, लेकिन गोलू ने मुझे एक पल का भी मौका नहीं दिया।
उसने मेरा हाथ पकड़कर रोक लिया और प्यार लेकिन जिद वाले अंदाज़ में कहा, “नहीं दीदी… आज हमारी शादी का दिन है, आज के दिन तुम एक पल के लिए भी कपड़ों में नहीं रहोगी। मैं तुम्हें पूरे दिन, हर पल इस तरह बिना कपड़ों के देखना चाहता हूँ।”
उसकी उस जिद के आगे मैं मुस्कुरा दी और बिना कपड़े पहने ही उसके साथ बाहर डाइनिंग एरिया की तरफ बढ़ गई। हम दोनों बिना कपड़ों के ही एक-दूसरे के सामने डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। हमने एक ही बड़ी प्लेट में खाना परोसा और एक साथ बैठकर खाने लगे। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
जब हम दोनों खाने का एक-एक कौर ले रहे थे, तब मैं महसूस कर सकती थी कि खाते वक्त भी गोलू की नज़रें मेरे बिना कपड़ों वाले शरीर पर ही टिकी हुई थीं। वह मेरे स्तनों, मेरे पेट और मेरी उस बिना बालों वाली जगह को लगातार देख रहा था। उसकी उन भूखी नज़रों का असर यह हुआ कि देखते ही देखते उसका वह शांत हुआ लंड एक बार फिर से मचल उठा और कड़क होने लगा।
शायद सालों की वह दबी हुई चाहत और इंतज़ार आज जाकर पूरा हुआ था, यह सच कि वह अपनी ही सगी बहन के साथ पति-पत्नी के रिश्ते में था, उसके अंदर एक ऐसी हवस जगा रहा था जो एक पल के लिए भी शांत होने का नाम नहीं ले रही थी। खाना खत्म करने के बाद हम दोनों उठे और रसोई में जाकर अपने हाथ धोए।
इसके बाद हम वापस उसी डाइनिंग एरिया की कुर्सियों पर आकर थोड़ी देर के लिए बैठ गए। मैं बिना कपड़ों के अपनी कुर्सी पर बैठी हुई थी, और मेरे ठीक सामने गोलू भी बिना कपड़ों के बैठा था। कुछ ही मिनट पहले शांत हुआ उसका लंड अब मेरे खुले हुए शरीर को सामने देखकर एक बार फिर पूरी तरह तन गया था।
वह पूरी तरह कड़क होकर खड़ा था, और उसकी तनी हुई नसें साफ दिखाई दे रही थीं। मेरा वह बिना कपड़ों वाला रूप और उसके साथ बिताए गए उन पलों का नशा उसके सिर पर इस कदर चढ़ा हुआ था कि उसका वह लंड हर पल सिर्फ मेरी तरफ इशारा कर रहा था और बिना किसी आराम के एक बार फिर किसी नए तूफान के लिए तैयार हो गया था। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
लेकिन इस बार मैंने उसे पहल करने का कोई मौका नहीं दिया। मैं अपनी कुर्सी से उठी और उसका हाथ कसकर अपने हाथ में पकड़ लिया। “चलो, कमरे में चलते हैं,” मैंने उसकी आँखों में देखते हुए धीरे से कहा। हम दोनों वैसे ही बिना कपड़ों के डाइनिंग एरिया से निकलकर सीधे अपने बेडरूम की तरफ गए।
कमरे में पहुँचते ही मैंने उसे हल्का सा धक्का दिया, जिससे वह पीछे की तरफ सीधे बड़े से बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया। बिस्तर पर लेटते ही उसका वह लंबा और मोटा लंड हवा में पूरी तरह कड़क होकर ऊपर की तरफ तन गया। मैं उसके पैरों के पास घुटनों के बल आई और फिर उसके शरीर के दोनों तरफ अपने पाँव फैलाते हुए उसके ऊपर चढ़ गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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मैंने अपनी दोनों जाँघों को उसके कमर के दोनों तरफ फैलाया और अपने घुटनों के बल ऊपर उठकर बैठ गई, ताकि मेरा शरीर बिल्कुल उसके ऊपर हो। मैंने अपने हाथों से उसके उस बहुत कड़क लंड को पकड़ा और उसे अपनी उस गीली और नाज़ुक चूत के पास बिल्कुल सही जगह पर रखा।
उसके बाद, मैंने अपने हाथों का सहारा लेते हुए धीरे-धीरे अपने शरीर का पूरा वजन नीचे की तरफ छोड़ना शुरू किया। जैसे ही मैंने खुद को नीचे की तरफ उतारा, उसके उस गर्म और भारी लंड ने मेरी चूत के होंठों को पार करते हुए अंदर जाना शुरू कर दिया। मेरे हाथों के सहारे और मेरे अपने वजन के दबाव से उसका वह बड़ा लंड एक ही झटके में मेरे अंदर पूरी गहराई तक चला गया। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
उसके अंदर जाते ही मेरे मुँह से एक लंबी और गहरी आह निकल गई, और मैं पूरी तरह से उसकी गोद में ऊपर बैठी हुई उसकी साँसों में अपनी साँसें मिलाने लगी। मेरे भीतर अपने लंड की इस गहरी और मजबूत पकड़ को महसूस करते हुए गोलू की आँखें खुशी और हवस से पूरी तरह बंद हो गईं।
उसने अपना सिर पीछे गद्दे पर टिका दिया और अपनी छाती फुलाते हुए गहरी, काँपती और हाँफती हुई आवाज़ में कहा, “आह… आलिया दीदी… अच्छा लग रहा है” उसकी उस बहकाने वाली बात ने मेरे भीतर की हवस और जोश को कई गुना और बढ़ा दिया।
मैंने इस बार किसी भी झिझक को अपने पास नहीं आने दिया और खुद ही अपनी कमर का कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया। मैंने अपने शरीर पर जोर डालते हुए अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाया, जिससे उसका वह लंबा और बहुत कड़क लंड मेरी चूत के मुहाने तक बाहर आया, और तुरंत अगले ही पल अपने पूरे शरीर का वजन नीचे की तरफ छोड़ते हुए उसके उस बड़े आकार को अपनी गहराई के आखिरी हिस्से तक वापस खींच लिया।
मेरी कमर के इस एक जैसी और लगातार ऊपर-नीचे होने के साथ हमारे शरीर एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ चुके थे। जब मैं अपनी कमर को ऊपर उठाती, तो उसका वह चमकता हुआ लंड मेरी गीली चूत के अंदर से हल्का सा बाहर दिखता, और जब मैं अपनी जाँघों के बल नीचे की तरफ झुकती, तो उसका वह गर्म और भारी सिरा मेरे अंदर के आखिरी हिस्से को छूकर मेरे पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर देता।
उसी दौरान, गोलू ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और मेरे दोनों नरम स्तनों को अपनी मजबूत मुट्ठियों में कसकर पकड़ लिया। उसने अपनी उंगलियों से मेरे उन गोल उभारों को ज़ोर-ज़ोर से दबाना और सहलाना शुरू कर दिया। उसके खुरदुरे हाथों का वह दबाव और उसके अंगूठों का मेरे सख्त हो चुके निपल्स को रगड़ना मेरे पूरे शरीर में एक तेज़ नशा भर रहा था। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
मैंने अपनी आँखें आधी बंद कर लीं और अपनी पूरी ताक़त से अपनी कमर की रफ्तार को और तेज़ कर दिया। मैं लगातार ऊपर उठती और नीचे गिरती, जिससे उसके लंड की हर एक रग और उसका भारी सिरा मेरी चूत के अंदर लगातार रगड़ खाता रहता। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
हर बार जब मैं नीचे बैठती, तो उसका पेट मेरी गांड से आ टकराता, और हमारे पसीने से भरे शरीर आपस में इस तरह चिपक जाते कि हमारे बीच की हर एक साँस एक हो जाती। गोलू अपने मुँह से लगातार सिसकियाँ ले रहा था और मेरे बालों को अपनी उंगलियों में लपेटकर मेरे चेहरे को अपने करीब खींच रहा था, जबकि मैं उसकी छाती पर हाथ टिकाए बिना किसी झिझक के उसके उस मोटे लंड को अपने अंदर महसूस कर रही थी।
मेरे बदन का हर एक रोआं उस वक्त सिर्फ और सिर्फ उस नशे में डूब चुका था। गोलू की छाती पर टिके मेरे हाथ और उसकी कमर पर कसी हुई मेरी जाँघें इस बात को दिखा रही थीं कि अब हमारे बीच कोई भी झिझक या डर नहीं बचा था। मैं अपनी कमर को और भी ज़्यादा तेज़ी से ऊपर-नीचे उठाने लगी।
हर बार जब मैं नीचे की तरफ झुकती, तो उसका वह लंबा और बहुत कड़क लंड मेरी चूत के सबसे अंदर वाले हिस्से को चीरता हुआ सीधे मेरे पेट से जा टकराता, और मेरे मुँह से एक लंबी, धीमी सी आह निकल जाती। गोलू की आँखें हवस से बिल्कुल लाल हो चुकी थीं।
उसने अपने हाथों से मेरे स्तनों को दबाना जारी रखते हुए अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाया और मेरी रफ्तार के साथ चलने की कोशिश की। उसके उस दूसरी तरफ के दबाव से हमारा यह साथ होना और भी ज़्यादा गहरा और तेज़ हो गया। उसकी हर एक हरकत मेरे भीतर एक ऐसा तूफान ला रही थी जहाँ मुझे अपने भाई के अलावा और कुछ भी नहीं सूझ रहा था।
“दीदी… तुम एकदम रंडी लग रही हो…” उसने हाँफते हुए मेरे कान में धीरे से कहा। उसकी उस गंदी और जोश बढ़ाने वाली बात ने मेरे भीतर छिपी हुई उस औरत को पूरी तरह खुलकर सामने ला दिया जो अब सिर्फ अपने भाई की बाहों में मिट जाना चाहती थी। मैंने अपनी कमर की रफ्तार को और तेज़ कर दिया, जिससे हमारे बदनों के आपस में टकराने की आवाज़ और तेज़ हो गई।
मेरी सांसें उखड़ चुकी थीं और गोलू भी अपनी आखिरी हद की तरफ बढ़ने लगा था, लेकिन इस बार हम दोनों ही इस सफर को और लंबा खींचना चाहते थे ताकि इस अलग रिश्ते का हर एक पल हमारे दिल में बस जाए। मेरी कमर की उस तेज़ और बिना रुके चल रही रफ्तार ने गोलू का खुद पर पूरा काबू तोड़ दिया था। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
मैं जिस जोश, बिना झिझक और बिना किसी रोक-टोक के उसके ऊपर अपनी कमर को ऊपर-नीचे चला रही थी, उसने उसे पागल सा कर दिया था। मेरी रफ्तार अब इतनी तेज़ हो चुकी थी कि वह खुद को संभाल ही नहीं पा रहा था। उसकी साँसें पूरी तरह से उखड़ चुकी थीं, उसकी पसलियाँ तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थीं।
“आह… दीदी… अब और नहीं… अब मैं बिल्कुल नहीं रोक पाऊँगा।” उसने काँपते और भरे हुए गले से हाँफते हुए धीरे से कहा। उसकी बात सुनते ही मेरे भीतर का रोमांच और हवस अपनी आखिरी हद पर पहुँच गई। मैंने उसकी बात सुनकर अपनी रफ्तार धीमी करने के बजाय अपनी कमर को और भी ज़्यादा ताक़त और जोश के साथ चलाना शुरू कर दिया।
मेरे हर एक गहरे धक्के के साथ उसका वह कड़क और भारी लंड मेरी चूत की दीवारों को बुरी तरह चीर रहा था। अगले ही पल, गोलू के पूरे जिस्म में एक जोरदार और हिला देने वाला झटका लगा। उसने अपनी पीठ को गद्दे पर कसकर टिका लिया, अपने दोनों मजबूत हाथों से मेरी कमर को अपनी तरफ कसकर पकड़ लिया, और अपनी कमर को पूरी ताक़त से ऊपर की तरफ उठा दिया।
उस आखिरी झटके के साथ ही उसके लंड की नसों में जमा हुआ वह बहुत गर्म और गाढ़ा सफ़ेद पानी फव्वारे की तरह बाहर निकल पड़ा। उसकी पहली ही धार इतनी ज़ोरदार और भारी थी कि उसने सीधे मेरी चूत के सबसे अंदर वाले हिस्से के मुहाने पर जाकर जोर से टक्कर मारी। “Bahan Sealpack Chut Chudai”
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उसके बाद एक के बाद एक कई गर्म धारियाँ मेरे अंदर उतरने लगीं। वह सफ़ेद पानी कोई आम पानी जैसा नहीं था, बल्कि उसकी जवानी का वह गाढ़ा, मलाईदार और चिपचिपा रस था जो पूरी तरह से गर्म था। उसकी हर एक धार के साथ वह गर्म सफ़ेद पानी मेरी तंग चुत की दीवारों के हर हिस्से पर फैलता चला गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
चूत की अंदरूनी दीवारों ने उसके उस भारी और गाढ़े सफ़ेद पानी को इस तरह सोख लिया जैसे वह प्यासी ज़मीन हो। उसके उस सफेद पानी का असर इतना गर्म था कि मेरे अंदर उतरते ही मेरे पेट के निचले हिस्से में एक तेज़ जलती हुई सिहरन दौड़ गई। वह सफ़ेद पानी मेरे और गोलू के मिलन की उस आखिरी हद की सबसे बड़ी निशानी बनकर मेरी गहराई में पूरी तरह समा चुका था।
उसका दबाव इतना ज़्यादा था कि जब उसने अपने लंड को बाहर निकाला, तो वह गाढ़ा और सफेद मलाईदार पानी जैसा पदार्थ मेरी चूत के मुहाने से बाहर की तरफ रिसने लगा, जो इस बात को साफ दिखा रहा था कि मेरे अपने भाई ने अपनी पत्नी बनी इस बहन की कोख को अपने उस गर्म और हवस से भरे सफ़ेद पानी से पूरी तरह भर दिया है। हम दोनों पसीने से भीगे हुए, एक-दूसरे की साँसों में डूबे हुए, उसी बिखरे हुए बिस्तर पर बहुत थककर ढीले पड़ गए, और मेरे भीतर बहता हुआ उसका वह गाढ़ा सफ़ेद पानी हमारे उस रिश्ते की गहराई को और ज़्यादा गहरा कर गया। Thank you for reading, The end.
Author:- Golu Jr.
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