Bhai Bahan Suhagrat Sex
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 18 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि गोलू ने मुझसे शादी करने को बोला, पर मैं डर रही थी की समाज हम दोनों भाई बहन की शादी को किस नजर से देखेगा. पर अन्दर ही अन्दर मुझे भी उससे शादी करने का मन था. अब आगे- Bhai Bahan Suhagrat Sex
शादी करना वैसे ही इस दुनिया के मुश्किल कामों में से एक है, लेकिन हमारे लिए तो यह लगभग नामुमकिन लग रहा था। हम दोनों भाई-बहन थे, इसलिए समाज के सामने सात फेरे लेना या सबके सामने शादी करके एक होना किसी बहुत मुश्किल काम से कम नहीं था। हम समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर हमें क्या करना चाहिए और शादी कैसे करनी चाहिए।
हमारे बिल्डिंग के लोग और ऑफिस के साथ काम करने वाले लोग तो हमें पहले ही शादीशुदा जोड़ा मान चुके थे, लेकिन उन्हें सच के बारे में कुछ भी पता नहीं था। इसलिए हमें एक ऐसी जगह चाहिए थी जहाँ कोई हमें पहचान न सके। बैंगलोर जैसे शहर में किसी मंदिर में जाकर शादी करना या कोर्ट में शादी के कागजों पर साइन करना हमारे लिए बहुत बड़ा खतरा था।
अगर कोई भी हमें पहचान लेता, तो हमारी जिंदगी हमेशा के लिए खराब हो सकती थी। ऊपर से हमारे माता-पिता को इस रिश्ते के बारे में कुछ भी पता नहीं था, इसलिए हमें हर कदम बहुत सोच-समझकर रखना पड़ रहा था। हमने इंदौर भागने या किसी दूसरी जगह जाने के बारे में भी सोचा, लेकिन वहाँ भी किसी अनजान शहर में अपनी पहचान छिपाना आसान नहीं था।
बहुत सोचने और बहुत सारे तरीकों के बारे में बात करने के बाद आखिर में हमने तय किया कि हमारे लिए शादी की जगह या शादी में होने वाली चीजें ज्यादा जरूरी नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे का हो जाना सबसे ज्यादा जरूरी है। क्योंकि हम बाहर कहीं जाकर बिना किसी परेशानी के यह काम नहीं कर सकते थे, इसलिए हमने अपने ही अपार्टमेंट के हॉल को शादी की जगह बना लिया।
हमने बाजार से गेंदे और गुलाब के ताजे फूल मंगाए और रात के समय चुपचाप पूरे हॉल को फूलों से सजा दिया। अगले दिन सुबह की पहली किरण के साथ ही हमारे उस अधूरे सपने को पूरा करने की कोशिश फिर से शुरू हो गई थी। सब कुछ लगभग तैयार था, लेकिन हमारी इस अलग और छिपी हुई शादी का सबसे जरूरी हिस्सा अभी भी बाकी था और वह था एक पंडित।
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गोलू सुबह-सुबह ही कमरे से बाहर निकल गया था, ताकि बैंगलोर के किसी मंदिर में जाकर ऐसा कोई पंडित ढूंढ सके जो चुपचाप आकर हमारी शादी की सारी चीजें करवा सके। हालांकि मेरे मन के किसी कोने में मुझे भी पता था कि बैंगलोर जैसे शहर में किसी पंडित को मनाकर अपने अपार्टमेंट में ले आना और वो भी भाई-बहन की इस अजीब शादी के लिए, बहुत मुश्किल काम था।
लेकिन उसके वापस आने से पहले मुझे अपनी तरफ से खुद को पूरी तरह तैयार करना था। मैं अपने कमरे के अंदर आई और सीधे बाथरूम की तरफ चली गई। अपनी इस शादी को लेकर मेरे दिल में अजीब सी घबराहट और बेचैनी दोनों थी। मैंने एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार दिए, अपनी ब्रा और पैंटी भी शरीर से उतार दी और पूरी तरह नंगी होकर बाथरूम के शीशे के सामने खड़ी हो गई।
मैंने अपने पूरे शरीर को ध्यान से देखना शुरू किया, क्योंकि आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था। आज मुझे अपने भाई की दुल्हन बनना था। आज से वह मेरा सिर्फ भाई नहीं, बल्कि मेरा पति बनने जा रहा था, इसलिए यह बहुत जरूरी था कि मेरा शरीर उस शादी और उस रात के लिए एकदम अच्छा लगे।
मेरी नजरें खुद ही मेरे सबसे खास हिस्से यानी मेरी चूत पर चली गईं। गोलू पहले भी कई बार मेरी नंगी चूत को देख चुका था, उसने अपनी उंगलियों और अपनी जीभ से इसे कई बार मरोड़ा था, लेकिन आज का दिन उन दिनों से बिल्कुल अलग था। आज के बाद हमारा रिश्ता एक नए मोड़ पर जाने वाला था।
वह मेरा भाई होने के साथ-साथ दुनिया और समाज के हिसाब से भले ही कुछ न हो, लेकिन मेरे लिए मेरा पति बनने जा रहा था। मैं चाहती थी कि जब वह आज रात मुझे देखे, तो उसे मुझमें किसी भी तरह की कमी महसूस न हो। हालांकि, मेरी चूत के आसपास हल्के बाल थे, जो नेचुरल थे, लेकिन आज के इस खास दिन पर मैं खुद को उसके लिए और ज्यादा साफ और खूबसूरत बनाना चाहती थी।
मैंने तय किया कि शादी से पहले मैं अपने शरीर के इस हिस्से को पूरी तरह से साफ कर लूंगी, ताकि जब मेरा नया पति मुझे अपनी बाहों में भरे, तो उसका हर एक छूना और भी ज्यादा अच्छा और साफ लगे। मैंने बाथरूम की स्लैब पर रखा रेज़र उठाया और शीशे के सामने खड़े होकर अपनी चूत के बाल साफ करना शुरू कर दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं बहुत ध्यान से रेज़र चला रही थी, क्योंकि मैं बिल्कुल नहीं चाहती थी कि जल्दी करने की वजह से मेरी मुलायम त्वचा पर कोई कट लग जाए या खून निकल आए। आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा और खास दिन था, और मैं किसी भी छोटी सी गलती की वजह से इस पल को खराब नहीं करना चाहती थी।
आज रात गोलू पहली बार मेरी चुत के अंदर अपना कड़क लंड डालने वाला था, और मैं चाहती थी कि वह जब भी अपना लंड मुझे छुए, उसे पूरी तरह चिकना और मुलायम महसूस हो। रेज़र चलाते-चलाते अचानक मेरे दिल में एक गहरी और अजीब सी शर्म महसूस होने लगी। मेरे हाथ की रफ्तार एक पल के लिए रुक गई, और मेरा दिमाग उस सच्चाई के बारे में सोचने लगा जो मैं कर रही थी।
मैं अपनी चुत को इसलिए साफ कर रही थी, ताकि मेरा अपना भाई अपने लंड से उसका मजा ले सके और उसे चोद सके। यह ख्याल आते ही मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गईं। एक भाई और बहन के बीच ऐसा सोचना और खुद को इस तरह एक पत्नी की तरह उसके सामने जाने के लिए तैयार करना इस दुनिया की नजरों में सबसे बड़ा गुनाह था।
लेकिन मैंने तुरंत अपने उन विचारों को जोर से रोक दिया। मैं उस अजीब सी झिझक और शर्म को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहती थी, क्योंकि मैं आज के इस खास माहौल और अपने मूड को किसी भी कीमत पर खराब नहीं करना चाहती थी। मैंने खुद को समझाया कि अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है।
वह इंसान जो मेरे लिए इस समाज से लड़ने को तैयार बैठा है, जो हर कदम पर मेरा साथ दे रहा है, वह सिर्फ मेरा भाई नहीं बल्कि मेरा होने वाला पति है। यह सोचते ही मेरे अंदर की सारी शर्म एक मीठी सी सिहरन में बदल गई, और मैंने फिर से पूरे मन से अपनी चूत को पूरी तरह साफ और चिकना कर लिया ताकि जब मेरा भाई, मेरा पति मुझे अपनी बाहों में भरे, तो उसे मुझमें कोई कमी न दिखे।
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मैंने बहुत धीरे-धीरे और पूरी सावधानी के साथ रेज़र चलाकर अपनी चूत के एक-एक बाल को पूरी तरह साफ कर दिया। जब वह नाजुक हिस्सा बिल्कुल चिकना और बिना बालों का हो गया, तो मैंने शॉवर चालू किया और गुनगुने पानी को अपने शरीर पर बहने दिया। जैसे ही वह पानी मेरी साफ की हुई चुत और अंदर के हिस्से पर पड़ा, एक अजीब सी सिहरन मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई।
उस हल्के गर्म पानी के छूने से मेरी मुलायम त्वचा और भी ज्यादा नाज़ुक हो गई थी। वह अहसास इतना अच्छा था कि मेरी आंखें अपने आप बंद हो गईं और मेरे मुंह से एक हल्की सी आवाज निकल गई। अपनी उंगलियों से उस साफ और चिकनी जगह को छूकर मुझे खुद को देखकर एक अजीब सा अच्छा महसूस हो रहा था।
मेरा वह हिस्सा अब पूरी तरह तैयार था, उस आने वाले पल और गोलू के उस मोटे लंड के लिए, जो आज रात मुझे अपनी दुल्हन बनाने वाला था। शॉवर लेने के बाद मैं तौलिए से अपने भीगे हुए शरीर को सुखाकर सीधे अपने कमरे में आ गई। अलमारी से मैंने अपनी वह लाल रंग की भारी और खूबसूरत साड़ी निकाली, जिसे मैंने अपनी इस अलग शादी के लिए खास तौर पर चुना था।
एक-एक करके मैंने उस लाल साड़ी को अपनी कमर पर लपेटा, उसकी सिलवटें बनाईं और पल्लू को कंधे पर रख लिया। इसके बाद मैंने वह गहने पहने, जो इस दुल्हन के जोड़े के साथ अच्छे लग रहे थे, गले में हार, कानों में झुमके और हाथों में लाल चूड़ियाँ। उस लाल जोड़े में शीशे के सामने खड़े होकर जब मैंने खुद को देखा, तो सच में मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने ही भाई के नाम की पूरी दुल्हन बन चुकी हूँ।
लगभग एक घंटा बीत चुका होगा, तभी बाहर दरवाज़े पर किसी के आने की आवाज़ हुई। गोलू वापस लौट आया था और हैरानी की बात यह थी कि वह अपने साथ एक पंडित को भी ढूंढकर ले आया था। जैसे ही गोलू कमरे के अंदर आया और उसकी नज़र लाल साड़ी और दुल्हन के कपड़ों में तैयार मुझ पर पड़ी, वह अपनी जगह पर जैसे रुक गया।
उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं और कुछ पलों के लिए वह बस मुझे देखता ही रह गया। उसके चेहरे पर एक ऐसा सुकून और खुशी साफ दिख रही थी, जिसे शब्दों में कहना मुश्किल था। पंडित जी ने बिना ज्यादा समय गंवाए हॉल के उस कोने में अपनी जगह बना ली जहाँ पूजा और फेरे होने थे और अपने थैले से पूजा का सारा सामान निकालकर रखने लगे। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
इसी बीच मौका देखकर गोलू धीरे से मेरे पास आया। उसने मेरे करीब आकर मेरे कान के पास अपना मुँह किया और बहुत धीमी आवाज़ में फुसफुसाया, “आलिया दीदी… इस लाल जोड़े में तुम सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो… मुझसे अब और इंतज़ार नहीं हो रहा, बस जल्दी से फेरे पूरे हो जाएँ, ताकि हम दोनों अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकें।”
उसकी वह बात सुनकर मेरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई, लेकिन इससे पहले कि मैं धीरे से उसे कोई जवाब देती, पंडित जी ने पूजा का सामान सजाते हुए हमें अपनी जगह पर बैठने का इशारा कर दिया। गोलू बिना देर किए अपने कमरे में चला गया ताकि वह भी दूल्हे के कपड़ों में जल्दी से तैयार होकर वापस आ सके। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे मन में अजीब सी बेचैनी और खुशी थी। मैं चाहती थी कि अभी उसी समय उसे बता दूँ कि मैंने उसके लिए अपनी चूत के सारे बाल साफ कर दिए हैं ताकि आज रात उसे पूरा मजा मिले। लेकिन फिर मैंने खुद को रोक लिया। मैंने तय किया कि मैं उसे यह बात अभी नहीं बताऊँगी, बल्कि यह बात आज रात के लिए संभालकर रखूँगी, जब हम दोनों पूरी तरह अकेले होंगे और वह मुझे अपनी बाहों में भरेगा।
कुछ ही मिनटों बाद गोलू दूल्हे के कपड़ों में तैयार होकर कमरे से बाहर आया और सीधे हॉल में आ गया। पंडित जी ने मंत्र पढ़ना शुरू करने से पहले हमें शादी के लिए सजाई गई उस जगह पर एक-दूसरे के सामने बैठने को कहा, और हम दोनों चुपचाप अपनी-अपनी जगह पर पालथी मारकर बैठ गए। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
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पंडित जी ने अपनी पूजा की किताब और मंत्रों के साथ शादी की रस्में शुरू कर दीं। हम दोनों एक-दूसरे के बिल्कुल पास, उस सजे हुए मंडप में बैठे थे। पंडित जी जैसे-जैसे हमें बताते जा रहे थे, हम दोनों वैसे-वैसे चुपचाप उनकी हर बात मान रहे थे। समय बीतता गया और आखिर वह पल आ ही गया जिसका हम दोनों इंतज़ार कर रहे थे।
मंत्र खत्म होने वाले थे और अब मंगलसूत्र पहनाने का समय था। पंडित जी के कहने पर गोलू ने काले मोतियों वाला मंगलसूत्र अपने हाथ में लिया और मेरे सामने झुक गया। उसने अपने काँपते हुए हाथों से वह मंगलसूत्र मेरी गर्दन में पहना दिया। जैसे ही वह मंगलसूत्र मेरी गर्दन में पड़ा, गोलू अपना चेहरा मेरे बहुत करीब लाया.
और मेरे कान में धीरे से काँपती आवाज़ में पूछा, “आलिया दीदी… क्या तुम सच में मेरी पत्नी बनने के लिए तैयार हो?” मैंने अपनी आँखें उठाकर सीधे उसकी आँखों में देखा और बिना एक पल की झिझक के, पूरे यकीन के साथ धीरे से जवाब दिया, “हाँ गोलू… मैं पूरी तरह तैयार हूँ, तुम्हारी पत्नी बनने के लिए।”
पंडित जी के कहने पर आगे बढ़ते हुए, हमने एक-दूसरे के गले में फूलों की वरमाला डाली, जो हमारे रिश्ते को पूरा करने का अगला कदम था। जैसे ही मैंने गोलू के गले में वरमाला डाली और उसने मेरे गले में पहनाई, सातवें और आखिरी फेरे के साथ हमारी शादी की सारी रस्में पूरी हो गईं। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
समाज की नज़रों में भले ही हम भाई-बहन थे, लेकिन उस मंडप में और उस शांत कमरे के अंदर हम रीति-रिवाज के हिसाब से एक-दूसरे के पति-पत्नी बन चुके थे। उस पल मेरे दिल में बहुत सारी बातें एक साथ चलने लगीं। मन के किसी कोने में थोड़ा दुख हुआ कि काश हमारे माता-पिता भी इस पल हमारे साथ होते।
काश वे देख पाते कि उनका बेटा और बेटी एक-दूसरे के कितने करीब आ चुके हैं। लेकिन अगले ही पल मुझे सच्चाई भी समझ आ गई कि वे शायद कभी इस बात को नहीं समझ पाते। वे कभी यह नहीं जान पाते कि दो सगे भाई-बहन ने इस दुनिया के खिलाफ जाकर एक-दूसरे से शादी करने का फैसला क्यों किया।
समाज के लिए यह भले ही सबसे बड़ा पाप और गलत काम हो, लेकिन मेरे लिए उस समय यही सबसे बड़ा सच था। गोलू ने मुझे इस दुनिया में वो खुशी दी थी जो कोई और नहीं दे सकता। जब भी मैं उसका कड़क लंड अपने मुँह में लेती थी, उसके उस गाढ़े सफ़ेद पानी का गर्म और अलग स्वाद मुझे चॉकलेट या दुनिया की किसी भी दूसरी चीज़ से ज़्यादा मीठा और नशे जैसा लगता था।
फिर मैं सिर्फ इस डर से कि दुनिया क्या कहेगी? अपने इस प्यार और अपने जिस्म के सुकून को क्यों छोड़ देती? जब मेरी खुशी, मेरा सुकून और मेरा सब कुछ मेरे भाई में है, तो मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया हमारे इस रिश्ते को क्या नाम देती है। शादी की आखिरी रस्में पूरी होने के बाद, हम दोनों ने झुककर पंडित जी के पैर छुए। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
पंडित जी को हमारी असली बात पता नहीं थी, लेकिन उन्होंने पूरी शादी करवाई और हमें खुश रहने और लंबी जिंदगी का आशीर्वाद दिया। इसके बाद गोलू ने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले और पंडित जी को दक्षिणा दे दी। हम दोनों उन्हें अपार्टमेंट के दरवाजे तक छोड़ने गए और उनके जाने के लिए चुपचाप एक कैब बुक कर दी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जैसे ही पंडित जी की टैक्सी हमारी बिल्डिंग से निकलकर दूर चली गई और उसकी लाल लाइटें दिखाई देना बंद हो गईं, गोलू ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। दरवाजा बंद होते ही पूरे अपार्टमेंट में खामोशी छा गई। अब घर में हमारे अलावा कोई नहीं था। पंडित जी भी जा चुके थे और हमें रोकने वाला भी कोई नहीं था।
अब उस घर में हम दोनों अकेले थे। दुनिया की नजरों में हम भले ही भाई-बहन थे, लेकिन हमारे लिए अब हम एक-दूसरे के पति और पत्नी बन चुके थे। दरवाजे की कुंडी बंद करने के बाद कुछ देर तक हम दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे। उस भारी लाल साड़ी और गहनों में मेरा शरीर थोड़ा थक गया था.
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इसलिए मैंने चुप्पी तोड़ते हुए उससे पूछा, “गोलू… डाइनिंग टेबल पर खाना रखा है, क्या तुम्हें भूख लगी है? कुछ खाना है?” मेरी बात सुनकर उसने सिर हिलाया और उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई। उसने सीधे मेरी आँखों में देखते हुए, बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “आलिया… मुझे खाने की कोई भूख नहीं है। मैं तो बस अपनी इस नई नवेली पत्नी की चूत को अपने लंड से चखना चाहता हूँ, क्योंकि इस पल के लिए मैंने सालों इंतज़ार किया है।”
उसके मुँह से सीधे अपना नाम सुनकर मेरे अंदर जैसे करंट सा दौड़ गया। आज से पहले, हर पल और हर बार उसने मुझे हमेशा “दीदी” कहकर ही बुलाया था। लेकिन आज, इस मंडप में और मंगलसूत्र पहनने के बाद, उसने पहली बार मुझे उस रिश्ते से अलग करके सिर्फ “आलिया” कहा था। उसकी आवाज़ सुनकर मैं कुछ पल के लिए अजीब सी सोच में पड़ गई। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
मेरा अपना भाई अब सच में मेरा पति बन चुका था। जब उसने मेरी चूत और अपने लंड की बात इतनी खुलकर कही, तो मेरा चेहरा शर्म से पूरी तरह लाल हो गया। मेरा दिल तेज़-तेज़ धड़कने लगा और एक हल्की सी सिहरन मेरे पैरों से लेकर सिर तक फैल गई। उस शर्म के पीछे कहीं न कहीं एक छुपा हुआ उत्साह भी था।
मेरा मन अंदर ही अंदर यह देखने के लिए बेचैन था कि जब वह मेरी उस नंगी, चिकनी और बिना बालों वाली चूत को देखेगा, जिसे मैंने सिर्फ उसी के लिए पूरी तरह साफ़ किया था, तो उसकी आँखें और उसका रिएक्शन कैसा होगा। वह पल अब ज्यादा दूर नहीं था और मेरी सारी झिझक धीरे-धीरे उस तेज़ चाहत के आगे खत्म हो रही थी।
इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाती, उसने मेरा हाथ अपनी गर्म हथेलियों में कसकर पकड़ लिया और मुझे खींचते हुए अपने बेडरूम की तरफ ले जाने लगा। मेरे कदमों में एक पल के लिए झिझक जरूर आई, मेरा मन थोड़ा सा काँपा, लेकिन उसकी उस मजबूत पकड़ और जिद के आगे मैंने खुद को पूरी तरह उसके हवाले कर दिया और चुपचाप उसके पीछे-पीछे चलती गई।
हम जैसे ही उसके कमरे में उस बड़े बिस्तर के पास पहुँचे, गोलू ने बिना देर किए मेरे शरीर पर पहने हुए गहने उतारना शुरू कर दिया। उसने सबसे पहले मेरे गले का हार और कानों के झुमके उतारे, और फिर एक-एक करके मेरे हाथों की चूड़ियाँ बहुत प्यार से उतार दीं। जैसे ही सारे गहने उतर गए, उसकी उंगलियों ने मेरी उस भारी लाल साड़ी के पल्लू और प्लेट्स खोलना शुरू कर दिया। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
उसकी उंगलियाँ जब साड़ी हटाते समय मेरी गर्म त्वचा से छुईं, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। एक-एक परत करके वह लाल साड़ी मेरे शरीर से नीचे सरकती गई और जमीन पर गिर गई। साड़ी उतरने के बाद उसने बिना रुके मेरे पेटीकोट की नाड़ी खोली और उसे भी मेरे पैरों से नीचे गिरा दिया।
इसके तुरंत बाद उसने मेरे ब्लाउज के हुक भी एक-एक करके खोल दिए और उसे भी मेरे शरीर से अलग कर दिया। अब उस कमरे की हल्की रोशनी में मैं उसके सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। मेरे शरीर पर कपड़ों के नाम पर सिर्फ मेरी वह लेस वाली ब्रा और पैंटी बची हुई थी, जो मेरी तेज़ धड़कनों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी।
इससे पहले कि उसके गर्म हाथ मेरी ब्रा के हुक तक पहुँचते, मैंने घबराकर उसका हाथ अपने हाथों में पकड़ लिया। मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था और मेरी आवाज़ में एक अजीब सी घबराहट थी। मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा, “गोलू… प्लीज़, क्या तुम मुझे पहले की तरह ‘दीदी’ कहकर ही बुला सकते हो? जब तुमने मेरा नाम लिया, तो मुझे अंदर से बहुत अजीब लगा।”
मेरी बात सुनकर गोलू थोड़ी देर के लिए रुक गया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है दीदी… अगर तुम्हें इसी में सुकून मिलता है, तो मैं तुम्हें हमेशा दीदी ही बुलाऊँगा।” उसकी बात सुनकर मेरे दिल का भारीपन पल भर में गायब हो गया और मैंने राहत की साँस लेते हुए उसका हाथ छोड़ दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरी इजाज़त मिलते ही गोलू ने बिना देर किए मेरे शरीर से कपड़ों की आखिरी चीज़ भी हटानी शुरू कर दी। उसने बहुत धीरे से मेरी ब्रा के स्ट्रैप्स मेरे कंधों से नीचे किए और उसे मेरे शरीर से अलग कर दिया, जिससे मेरे दोनों उभार और निप्पल पूरी तरह खुले हो गए। इसके तुरंत बाद उसने झुककर मेरी पैंटी का इलास्टिक पकड़ा और उसे भी मेरे पैरों से नीचे खींचकर कमरे के फर्श पर गिरा दिया। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
जैसे ही मेरी वह पैंटी भी उतरकर फर्श पर गिरी, मैं पूरी तरह से नंगी होकर उसके सामने खड़ी थी। कमरे की उस हल्की रोशनी में मेरा बदन किसी खूबसूरत मूर्ति की तरह चमक रहा था। मेरे जिस्म का हर एक हिस्सा आज सिर्फ उसी के लिए था। गोलू की आँखें खुली की खुली रह गईं और वह बस मेरे शरीर को देखता रह गया।
उसने सबसे पहले मेरे दोनों स्तनों को अपने हाथों में लिया। मेरे स्तन वक्त के साथ और भी ज़्यादा भारी और मुलायम हो चुके थे, जिनके गोल उभार किसी पके हुए फल की तरह उसके हाथों में थे। उसने अपनी हथेलियों से मेरे उन गोल उभारों को दबाया और फिर अपने मुँह से मेरे दोनों सख्त हो चुके निपल्स को बारी-बारी से छूने लगा।
वह उन्हें ऐसे चूस रहा था जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ के दूध के लिए तरसता है। उसके गर्म मुँह और गीली जीभ का छूना मेरे स्तनों पर पड़ते ही मेरे मुँह से एक लंबी सी आह निकल गई। मेरे निपल्स उसके चूसने से और भी ज़्यादा कड़क और नुकीले हो गए थे, और मेरे पूरे जिस्म में बिजली सी दौड़ रही थी।
मेरे स्तनों से अपनी नज़रें और होंठ हटाकर गोलू धीरे-धीरे घुटनों के बल नीचे झुका। जब उसकी आँखें मेरे पेट के नीचे वाले हिस्से पर पड़ीं, तो उसकी साँसें पल भर के लिए रुक गईं। मेरी वह चुत, जिसे मैंने कुछ देर पहले ही बाथरूम में पूरी तरह से साफ़ और चिकना कर लिया था, अब उसके सामने बिल्कुल बिना बालों के और गुलाबी दिख रही थी।
वहाँ एक भी बाल नहीं था, जिससे वह जगह और भी ज़्यादा साफ़ और उभरी हुई दिख रही थी। गोलू ने अपनी उंगलियों से मेरी उस चिकनी और नंगी जगह को हल्के से छुआ। उसकी गर्म उंगलियाँ जब मेरी ताज़ा शेव की हुई मुलायम त्वचा पर लगीं, तो मेरा पूरा बदन सिहर उठा। “Bhai Bahan Suhagrat Sex”
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उसने अपनी एक उंगली मेरे दोनों गुलाबी और सूजे हुए चुत के होंठों के बीच फेरी, जो पहले ही गीले थे। उसने देखा कि मैं पूरी तरह से साफ़ और उसके लिए तैयार थी, तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई। उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और बिना देर किए मेरी उस बिना बालों वाली जगह पर रख दी।
जैसे ही उसकी गीली और गर्म जीभ ने मेरी उस जगह को चाटना शुरू किया, मेरे मुँह से चीख जैसी आवाज़ निकल गई और मैंने कसकर उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा लीं। मेरी चुत पर अपनी जीभ फेरते हुए गोलू अचानक थोड़ा ऊपर उठा। उसने अपनी चमकती हुई आँखों से मेरी आँखों में देखा और थोड़ा हँसते हुए पूछा, “दीदी… क्या तुमने सच में आज मेरे लिए अपनी चूत पूरी तरह से साफ की है?”
मेरा चेहरा शर्म और खुशी से एकदम टमाटर की तरह लाल हो गया था। मैंने अपनी आँखें नीचे कर लीं और बहुत धीमी, काँपती हुई आवाज़ में जवाब दिया, “हाँ… हाँ, गोलू… तुम्हारे लिए ही की है।” मेरी यह बात सुनते ही गोलू के चेहरे की खुशी देखने लायक थी। उसकी आँखों में मेरे लिए बहुत सारा प्यार और हवस साफ दिख रही थी।
वह तुरंत सीधा खड़ा हुआ और उसने अपने मजबूत हाथों से मुझे धीरे से धक्का देकर पीछे बिस्तर पर गिरा दिया। मैं पीठ के बल उस मुलायम गद्दे पर लेट गई और बिना किसी हिचक के अपनी दोनों टाँगें पूरी तरह से फैला दीं, ताकि मेरा भाई मेरी उस बिना बालों वाली, चिकनी और गीली चूत को और अच्छे से देख सके और उसे देखकर खुश हो सके। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मुझे इस तरह पूरी तरह खुला हुआ देखकर गोलू बहुत बेचैन हो गया। उसने बिना एक पल गंवाए अपने शरीर के बाकी कपड़े भी उतारने शुरू कर दिए। उसने अपनी शर्ट, पैंट और आखिर में अपनी अंडरवियर भी खींचकर नीचे उतार दी। उसके कपड़े उतरते ही उसका वह कड़क और मोटा लंड पूरी तरह से बाहर आ गया, जो मेरी चुत को देखने की वजह से खड़ा हो चुका था और मेरे अंदर जाने के लिए पूरी तरह बेचैन हो रहा था। For next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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