Virgin Cousin First Sex
ये तीन साल पहले की बात है। मेरी छोटी बहन की शादी थी और पूरे गांव से रिश्तेदार और मेहमान आ गए थे। घर इतना भर गया था कि सोने के लिए जगह ही नहीं बची थी। आखिरकार मैं स्टोर रूम में एक पुरानी चारपाई बिछाकर सोने का इंतजाम कर लिया। Virgin Cousin First Sex
बाहर सर्दी का मौसम था, हल्की धुंध और ठंडी हवा चल रही थी। मैंने मोटी रजाई ओढ़ ली और लेट गया। रात के करीब 11 बजे मेरी ताई बाहर से आवाज लगाती हुई आईं। उनके साथ उनकी बेटी सना भी थी, जो मुझसे सिर्फ दो साल छोटी थी। उस वक्त मेरी उम्र 23 साल थी और सना की 21।
ताई ने कहा, “बेटा अरमान, जगह की बहुत तंगी है। सना को यहीं तुम्हारे पास ही सुला दो। भाई-बहन हो, क्या दिक्कत है?”
मैंने हामी भर दी। ताई सना को अंदर छोड़कर चली गईं। सना शर्माते हुए अंदर आई। उसने सलवार-कमीज पहनी हुई थी और ऊपर से एक हल्का शॉल ओढ़ रखा था। वह मेरी चारपाई के किनारे पर बैठ गई।
“भैया, तुम सो जाओ, मैं बाहर वाली चारपाई पर लेट जाती हूँ,” उसने धीरे से कहा।
लेकिन मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे पागल, इतनी ठंड है। रजाई के अंदर आ जा, वरना जुकाम हो जाएगा।”
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वह हिचकिचाई, लेकिन ठंड ज्यादा लग रही थी। आखिरकार वह रजाई के अंदर आ गई। जैसे ही उसका नरम, मुलायम बदन मेरे बदन से लगा, मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। चारपाई छोटी थी, इसलिए हम दोनों को एक-दूसरे से सटकर ही लेटना पड़ रहा था। उसकी कमर मेरी कमर से छू रही थी, उसकी पीठ मेरी छाती से।
मैंने सोने का बहाना किया, लेकिन नींद कहां आ रही थी। उसकी खुशबू – हल्की सी पाउडर और लड़कियों वाली महक – मेरे दिमाग को भिगो रही थी। कुछ देर बाद मैंने करवट बदली। मेरा हाथ अनजाने में उसके मम्मों पर आ गया। वे इतने नरम, गोल और गरम थे कि मेरा हाथ वहां रुक गया।
सना सिहर गई। उसने अपना हाथ ऊपर किया और मेरा हाथ हटाने की कोशिश की। लेकिन मैंने धीरे से कहा, “ठंड लग रही है ना… ऐसे ही रहने दो।” वह कुछ पल खामोश रही, फिर उसका हाथ धीरे-धीरे नीचे सरक गया। उसकी सांसें तेज हो चुकी थीं। अचानक सना उठकर बैठ गई।
उसने स्टोर रूम का दरवाजा बंद किया और चिटकनी लगा दी। अब कमरा पूरी तरह अंधेरा और बंद था। वह वापस लेट गई और मेरे करीब आ गई। फिर उसने खुद मेरा हाथ उठाया और अपने मम्मों पर रख दिया। मेरी हथेली उसके नरम मम्मों को पूरी तरह कवर कर रही थी। मैंने हल्का दबाया। सना की आह निकल गई, “उम्म्म… अरमान…”
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मैंने आंखें खोल दीं। अंधेरे में भी उसकी चमकती आंखें दिख रही थीं। मैंने धीरे से उसके होंठों पर किस किया। पहले तो वह शर्मा गई, लेकिन फिर उसने भी मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया। हमारे किस गहरे होते गए। जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं।
मैंने उसकी कमीज के बटन खोल दिए और कमीज ऊपर कर दी। उसके सफेद, गोल मम्मे बाहर आ गए। निप्पल्स हल्के गुलाबी और सख्त हो चुके थे। मैंने एक मम्मा मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। सना की उंगलियां मेरे बालों में फंस गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“आह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… मत छोड़ना…” वह फुसफुसा रही थी।
मैं दूसरे मम्मे को भी चूसने लगा। कभी हल्का काटता, कभी जीभ से चक्कर लगाता। सना की कमर ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने हाथ नीचे सरकाया और उसकी सलवार के ऊपर से चूत पर हाथ फेरा। वहां पहले से ही गर्मी और नमी महसूस हो रही थी। सना ने खुद अपना नाड़ा खोल दिया।
मैंने उसकी सलवार और पैंटी दोनों उतार दी। अब वह पूरी तरह नंगी थी। उसकी चिकनी जांघें, गीली चूत और गोल गांड देखकर मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मेरा मोटा, लंबा लंड बाहर आ गया। सना ने उसे देखा और शर्मा कर आंखें बंद कर लीं, लेकिन फिर उसने हाथ बढ़ाया और लंड को पकड़ लिया।
“इतना बड़ा…” वह फुसफुसाई और धीरे-धीरे मलने लगी। मैंने अपनी उंगली उसके गीले चूत पर रखी और हल्के-हल्के अंदर-बाहर करने लगा। सना की सांसें बहुत तेज हो गईं। “हां… और करो… अंदर डालो…” मैंने पास रखे तेल की बोतल उठाई। अपने लंड पर अच्छे से लगाया और उसकी चूत पर भी।
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फिर मैं उसके ऊपर आ गया। उसकी टांगें फैला दीं। लंड को चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। सना ने खुद अपनी कमर उठाई। पूरा लंड धीरे-धीरे अंदर चला गया। “आह्हह… भर गया… बहुत गर्म है…” सना ने आह भरी। मैंने धीमी गति से चोदना शुरू किया। “Virgin Cousin First Sex”
हर धक्के पर उसके मम्मे हिल रहे थे। वह अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट लेती और मुझे गहराई तक ले जाती। हम दोनों की सांसें एक हो गईं। ठंडी रात में स्टोर रूम गर्मी से भरा हुआ था। मैं रफ्तार बढ़ाता गया। सना के मुंह से अब लगातार “हां… तेज… और तेज… अरमान मुझे चोदो…” जैसी आवाजें निकल रही थीं।
उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी। करीब 15-20 मिनट बाद मुझे झड़ने वाला था। मैंने तेजी से धक्के मारे और उसके अंदर ही अपना गर्म माल छोड़ दिया। सना भी कांप उठी। उसका पूरा शरीर सिहर गया और वह चरम सुख में पहुंच गई। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।
उसने मेरे सीने पर सिर रखा। “ये बहुत गलत है… लेकिन बहुत मजा आया,” वह शर्माते हुए बोली। मैंने उसके माथे पर किस किया और कहा, “तुम्हें जितना अच्छा लगे, उतना ही कर सकते हैं। मैं कभी जबरदस्ती नहीं करूंगा।” वह मुस्कुराई और मुझे और कसकर जकड़ लिया।
कुछ देर आराम करने के बाद सना ने फिर मेरे लंड को पकड़ा। वह फिर खड़ा हो गया। इस बार उसने कहा, “पीछे से ट्राई करेंगे?” मैं हैरान हुआ, लेकिन उसकी आंखों में वही चाहत थी। मैंने उसे घोड़ी बनाया। उसकी गोल, नरम गांड सामने थी। मैंने फिर तेल लगाया। पहले उंगली अंदर डाली, फिर धीरे-धीरे लंड लगाया।
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सना ने खुद पीछे धक्का दिया। लंड पूरा अंदर चला गया। “उम्म्म्म… भर गया… धीरे-धीरे…” मैंने धीमी गति से चोदना शुरू किया। उसकी गांड बहुत टाइट और गर्म थी। सना को शुरू में थोड़ा अजीब लगा, लेकिन फिर वह मजे लेने लगी। “हां… अच्छा लग रहा है… तेज करो…” मैंने रफ्तार बढ़ाई। “Virgin Cousin First Sex”
उसके मम्मे नीचे लटककर हिल रहे थे। मैंने आगे हाथ डालकर उन्हें दबाया। करीब 10 मिनट बाद मैंने फिर उसके गांड के अंदर ही झड़ दिया। सना भी दूसरी बार झड़ चुकी थी। हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया। हम देर तक किस करते रहे, बातें करते रहे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसने बताया कि उसे भी बहुत दिनों से ऐसा एहसास हो रहा था। हमने फैसला किया कि ये हमारा राज रहेगा। उसके बाद पूरे हफ्ते सना रोज रात को मेरे साथ स्टोर रूम में सोई। हर रात हम नई-नई तरीके से एक-दूसरे का मजा लेते। कभी वह ऊपर बैठकर चुदती, कभी डॉगी स्टाइल, कभी साइड से।
कभी मैं उसके बूब्स के बीच रख कर लंड रगड़ता, तो कभी वह मुंह से चूसती। उसकी चूत और गांड दोनों जगह हमने खूब मजे किए। हर बार वो खुद मांगती, “आज ज्यादा देर तक करो… मुझे पूरी तरह भर दो।” एक रात तो हमने तीन बार किया। पहली बार चूत में, दूसरी बार गांड में, तीसरी बार फिर चूत में।
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सुबह होने तक हम दोनों की बॉडीज दर्द से नहीं, बल्कि मजे से थकी हुई थीं। सर्दी की ठंडी हवा के बावजूद स्टोर रूम हमेशा गर्म रहता। हम एक-दूसरे की खुशबू, नमी, गर्मी और छुअन में खो जाते। हफ्ता खत्म होने पर मेहमान चले गए। सना वापस अपने घर चली गई, लेकिन वो हफ्ता आज भी मेरी सबसे गर्म याद है। कभी-कभी फोन पर वो कहती है, “याद है वो सर्दी वाली रातें?” और मैं मुस्कुरा कर कहता हूँ, “कभी भूल सकता हूँ क्या?”
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