Meri Bur Chudai Kahani
क्रेजी सेक्स स्टोरी के सभी पाठकों को नमस्ते। मैं अभी 20 साल की हूं और मैंने अपना सबसे पहला सेक्स अनुभव अपने पापा के दोस्त के साथ किया था। आशीष अंकल उस समय 50 के आसपास रहे होंगे। उनका हमारे पापा के साथ काफी पुरानी दोस्ती थी और वे घर पर आया-जाया करते थे, हम भी उनके घर पर आया-जाया करते थे। Meri Bur Chudai Kahani
साथ में पिकनिक मनाना, सभी त्यौहार मनाना यह हम लोगों की एक तरह से नॉर्मल बात थी। और मैं देखती थी कि वह हमेशा मुझे अपनी बच्ची की तरह ही प्यार करते थे। लेकिन उस दिन जो हुआ उसने अचानक हमारे रिश्तों को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया कि सब कुछ बदल गया।
मुझे अभी याद है वो ठंड के दिन थे और पुष्पा आंटी बाहर गई हुई थीं कुछ 10-12 दिनों के लिए, तो घर में यही तय हुआ था कि आशीष अंकल का खाना हमारे ही यहां होगा। हमारे घर को छोड़कर करीब 7-8 मकान के बाद मोहल्ले में उनका घर था। तो ऑफिस जाते समय वो हमारे ही यहां आ जाते थे, यहीं पर नाश्ता वगैरह करते थे पापा के साथ और फिर दोनों दोस्त चले जाते थे।
और रात को वे कभी आ जाते थे, या कभी मैं या मेरी मम्मी जा करके उन्हें खाना दे आती थीं। वो 20 जनवरी 2021 की बात थी, काफी ठंड थी उस दिन। मम्मी ने शाम के लगभग 8:00 बजे खाना निकाल कर और पैक करके मुझे दिया कि जाओ आशीष अंकल को दे आओ। और मैं वो खाना लेकर उनके घर पहुंची।
घर का दरवाजा खुला ही था, मैं आराम से घुस गई, मुझे कोई दिक्कत नहीं थी उनके यहां आने-जाने में। वो अपने बेडरूम में थे और उन्होंने कंबल ओढ़ रखा था और मोबाइल देख रहे थे। मैं उनके कमरे में घुस गई। मुझे देखते ही उन्होंने अपना मोबाइल लॉक करके नीचे रख दिया और मुझसे कहा कि खाना वहां टेबल पर रख दो।
मैंने वो खाना टेबल पर रख दिया और वहीं बैठ गई। मैंने सोचा था थोड़ी देर उनसे बात करूंगी लेकिन मैंने नोटिस किया कि रजाई के अंदर उनके हाथ कुछ हरकत कर रहे थे। कंबल के अंदर वह बार-बार अपनी कमर पर हाथ ले जाते थे और कुछ कर रहे थे।
आज मैं उस वाकये को याद करती हूँ तो मुझे लगता है वो जरूर अपने पायजामे का नाड़ा बंद कर रहे थे, या अंदर में अपना पायजामा उतार कर अपने लंड के साथ खेल रहे थे। लेकिन मैंने इस बात पर उस समय ज्यादा ध्यान नहीं दिया। कुछ देर के बाद वो कंबल से बाहर निकले।
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हम लोग बातें कर ही रहे थे और बोले कि मैं जरा वॉशरूम हो करके आता हूं, तुम बैठो। मैं बैठी थी, वो मोबाइल छोड़ कर वॉशरूम में चले गए। मेरे पास करने को कुछ था नहीं, मैंने उनका मोबाइल उठा लिया। मोबाइल तो बंद था, लेकिन जैसे ही मैंने उठाया और लॉक स्क्रीन का बटन दबाया, मैंने पाया कि मोबाइल खुल गया।
अंकल ने शायद मोबाइल में कोई पासवर्ड या फिंगरप्रिंट नहीं लगाया था। मोबाइल खुल गया मेरे सामने। मैं बस यूं ही कुतूहल से उस मोबाइल को घुमा-फिरा कर देखने लगी। काफी महंगा मोबाइल था, मुझे उत्सुकता थी उसको देखने की। मैं मोबाइल चलाते हुए उनके गैलरी पर पहुंची। गैलरी को जैसे ही मैंने खोला, मैं दंग रह गई।
मैंने देखा वो तस्वीर तो मेरी ही थी, लेकिन बिल्कुल नंगी थी। चेहरा तो मेरा था, लेकिन वो तस्वीर मेरी तो नहीं थी। मेरी चूत, मेरी गांड़, मेरी चूची सब उसमें साफ-साफ दिख रहे थे। मेरा माथा घूम गया ये मैं क्या देख रही हूं। अंकल ने मेरी तस्वीर की मॉर्फिंग कर ली थी।
पोर्न वेबसाइट तस्वीर उठाकर उन्होंने मेरा चेहरा चिपका कर गंदी तस्वीर बनाई थी। मैं आगे देखती चली गई तो एक-एक फोटो उसमें जो थे वो बिल्कुल मुझे हैरान करने वाले थे। कई जगह चुदाई की फोटो थे जिसमें मर्द ने लड़की की बूर में लंड पेला हुआ था और उसके मुंह पर मेरी तस्वीर थी, और उस मर्द के मुंह पर अंकल की तस्वीर थी।
कई जगह फोटो ऐसे थे जैसे मैं अंकल से गांड़ मरवा रही हूं, कई जगह ऐसे थे जैसे मैं अंकल का लौड़ा चूस रही हूं। बहुत हाई क्वालिटी और स्किल वाली फोटोज थी जिसमें यह बता पाना बिल्कुल संभव नहीं था कि वो मैं नहीं हूं। मुझे तो काटो तो खून नहीं था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वो ए आई का तो जमाना नहीं था, लेकिन जरूर अंकल ने काफी मेहनत करके यह कला सीखी थी और अपने फोन में मुझे रंडी जैसा बना करके रखा था। और मैं समझ गई थी कि अंकल की बुरी नजर मेरे पर है, वो मुझे जरूर चोदना चाहते हैं। उफ! मैं हैरान रह गई।
तत्क्षण मुझे ख्याल आया कि मैं इन सारी तस्वीरों को अपने मोबाइल पर ले लेती हूं। मैंने उसमें से करीब 20-25 फोटोग्राफ वाट्सऐप माध्यम से अपने मोबाइल पर ट्रांसफर किए। और मैंने पाया कि उन्होंने मेरा फोन नंबर निशिका रंडी के नाम से सेव करके रखा हुआ है।
ओह माई गॉड! मुझे चक्कर आने लगे और उस ठंड में भी पसीना आने लगा। जब वॉशरूम के फ्लश की आवाज आई, मैंने तत्काल उस मोबाइल को लॉक किया और अपनी जगह पर जा कर बैठ गई। अंकल जरूर वॉशरूम में मेरे नाम का मूठ मारने गए होंगे। जब वो बाहर आए तो मैं अंकल से नजरें नहीं मिला पा रही थी।
मैंने इतना भर कहा कि अंकल मैं जा रही हूं और वहां से निकलने लगी। मेरे पैर जवाब दे रहे थे, एक कदम भी चला नहीं जा रहा था। मैं वहां से निकल गई और अपने घर पहुंचकर सबसे पहले वॉशरूम जाकर उन सारी तस्वीरों को सेव किया। तभी मुझे ख्याल आया कि मैंने एक बहुत भारी भूल कर दी थी।
अंकल के वॉट्सएप हिस्ट्री में जरूर वह छूट गया था जो मैंने उनके मोबाइल से अपने वॉट्सएप पर ट्रांसफर किया था। मैं सन्न रह गई, मेरे कान बजने लगे कि अंकल समझ गए होंगे कि मैंने उन सारी तस्वीरों को देख लिया है और ट्रांसफर कर लिया है। वो क्या सोचेंगे मेरे बारे में? फक! वो तो मेरे बारे में कितनी गंदी-गंदी बातें सोच रहे थे, मेरा फोन नंबर निशिका रंडी के नाम से सेव किया हुआ था।
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लेकिन उस गुस्से में भी मेरी देह साथ नहीं दे रही थी। मैंने जब अपनी देह पर गौर किया, मैंने पाया कि मेरी चूचियां और निप्पल्स एकदम से टाईट हो गए थे और थोड़ा सा दर्द का एहसास हो रहा था। ऐसा मैंने कभी नहीं सोचा था, कभी ऐसा एहसास नहीं किया था। “Meri Bur Chudai Kahani”
मैंने अपने निप्पल्स छू कर देखे, वह काफी कड़े और नुकीले हो गए थे। और मेरी बूर तो इतनी गर्म हो गई थी कि मैं क्या ही बताऊं। मैंने अपनी बूर पर हाथ लगाया तो पाया कि वह चिप-चिपी हो गई थी। ओह, यह मुझे क्या हो गया था! अंकल मुझे किसी रंडी की तरह चोदने का मन बना कर बैठे थे और यह जानकर मेरा शरीर किसी कुतिया की तरह गरम हो गया था।
कुछ मुझे सूझ नहीं रहा था। जैसे-तैसे मैं खाना खाकर अपने कमरे में आकर लेट गई, बत्ती बुझा दी और दरवाजा बंद कर दिया। दो ही मिनट में मैं अपनी बूर सहला रही थी और वो तस्वीरें देख रही थी। कितनी गंदी-गंदी तस्वीरें! उन तस्वीरों में अंकल मेरी बूर, गांड, चूची, मुंह सब चोद रहे थे।
हाँ उफ! मुझे पता भी नहीं चला और मैंने अपनी बूर में दो उंगली पेल लिया। मेरी बूर तो वैसे ही लसलसाई हुए थे। मेरी उंगली सीधा उसके भीतर धंस गयी। और बूर की फुन्नी को मैंने अंगूठे से रगड़ना शुरू किया, मैं तो तीसरी दुनिया में पहुंच गई। हाँ उस समय मैं काफी जोर-जोर से अपनी बूर को अपनी उंगली से चोदने लगी थी।
पता नहीं क्यों उस समय मुझे इतना मज़ा आ रहा था, जितना मजा मैंने पहले कभी नहीं पाया था। मास्टरबेशन तो मैं बहुत सालों से कर रही थी, लगभग 2-3 साल से। पर उस दिन अपनी उन गंदी पिक्चर्स को देखते हुए खुद की बूर में उंगली करना मुझे बहुत बहुत अच्छा लग रहा था।
मैं उठ कर लाईट जलाई, अपने सारे कपड़े उतार दिए। रोशनी में मेरा दुधिया बदन, तनी हुई चूचियां और लसलसी बूर खुद देखकर मैं काम वासना से दहकने लगी। मैं ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर खुद को निहारने लगी और अपने दोनों टांगे फैलाकर अपनी बूर में 2 उंगलियां पेलने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
आह उस दिन बहुत मज़ा आ रहा था। उन फोटोज में आशीष अंकल के लंड के फोटोज भी थे, काफी बड़े, उनका आँड़ भी बहुत बड़ा और एक फोटो में उनकी गांड भी मुझे दिखाई पड़ रही थी। इतना गंदा और इतना सेक्सी फोटो। आह मैं 5-7 मिनट से ज्यादा बर्दाश्त ही नहीं कर सकी और ड्रेसिंग टेबल के आईने पर ही अपना सारा बूर का जूस रस छुरछुरा कर झाड़ दिया। “Meri Bur Chudai Kahani”
उफ्फ! मेरा सर दुखने लगा था। वासना से मैं इतनी धधकने लगी थी। हाँ मुझे याद नहीं उस रात मैंने कितनी बार अपनी बूर को झाड़ा होगा। अपनी चूत में कम से कम 5 पेंसिल एक साथ पेलकर भी मैंने खुद की चुदाई की थी उस रात। और अपनी गांड़ में भी पेंसिल पेला था।
मुझे कुछ याद नहीं कितनी बार, पर मैं उस रात सोई नहीं थी, ये मुझे बराबर याद है। सुबह मेरा बदन टूटा हुआ था और मेरा सर बहुत दुख रहा था। मैं दूसरे दिन स्कूल भी नहीं गई। हाँ मैं घर पर ही रही, दिन भर, मुझे वही ख्याल आते रहे। अंकल उस रोज नाश्ता करने भी नहीं आए सुबह। रात को फिर मम्मी ने कहा कि अंकल को खाना देकर के आओ। मैंने तो साफ मना कर दिया पर मम्मी जिद पर लगी रही।
अब मैं कैसे जाऊं? तुझे ही जाना पड़ेगा, मैं खाना बना रही हूँ ना, जा जाकर देकर आ, मम्मी ने कहा।
क्या करती मुझे जाना ही पड़ा। दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी। रास्ते पर मैं सोचती गई अंकल क्या बोलेंगे, I अंकल के यहाँ पहुँची तो कल वाला ही नजारा था। अंकल कंबल में लेटकर मोबाइल देख रहे थे। उन्होंने खाना फिर टेबल पर रख देने को कहा। मैं रख करके जाने लगी, तो अंकल ने कहा निशिका थोड़ी देर बैठो। मैंने उनकी तरफ देखा भी नहीं, मुझे शर्म आई और फिर मुझे पसीने आने लगे।
अंकल ने कहा निशिका, तुमने तो सब देख ही लिए हैं, सब जान ही गई हो। लेकिन मैं तुम्हारा कुछ भी बुरा नहीं चाहता हूँ। हाँ यह सब मेरी फैंटेसी है। और मैं तुम्हें थैंक्यू कहता हूँ, क्योंकि तुमने किसी को घर में बताया नहीं। नहीं तो मैं अभी जेल के रास्ते में होता। “Meri Bur Chudai Kahani”
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मेरे मुँह से तो कुछ आवाज़ निकल नहीं रही थी, फिर भी मैंने अंकल से पूछ ही लिया कि तुम तो मुझे अपनी बेटी की तरह समझते थे, फिर ऐसे गंदे-गंदे ख़याल तुमको मेरे बारे में क्यों आते हैं? आशीष अंकल, कितनी गंदी तस्वीरें बनाई हैं मेरी। अगर मैं किसी को दिखा दूँ तो तुम्हारा क्या हाल होगा, जानते हो न? तुम्हारा मेरा रिश्ता क्या है, पता है न?
आशीष अंकल कहने लगे, निशिका, वो सारे फोटो तुम्हें पसंद आए हैं, मैं जानता हूँ, तभी तुमने सब अपने मोबाइल पर ट्रांसफर कर लिए। और तुम एक सेक्सी लड़की हो। कभी अपनी खूबसूरती देखी है? कितनी खूबसूरत हो, मक्खन जैसा मुँह है तुम्हारा, जवानी की दहलीज़ पर खड़ी हो। मेरी उम्र का कौन मर्द तुम्हारे साथ सेक्स नहीं करना चाहेगा?
कितनी बेशर्मी से अंकल ने सेक्स वाली बात बता दी मेरे सामने। मैं उनकी उम्र से तिहाई से भी कम थी और वो मेरे साथ सेक्स की बातें कर रहे थे। मेरा पूरा देह चुभने लगा, मेरे माथे पर पसीना आ गया। अंकल अपने कंबल के भीतर काफी हरकत करने लगे थे।
निश्चित रूप से वो अपने लंड को मज़ा दे रहे थे मेरे सामने, बेशर्म मर्द की तरह। मैं भी चाहती थी कि वो आकर मुझे अपनी बाहों में भींचकर, अपने मोटे लंड से मेरा बूर फाड़ दें, लेकिन लड़की कहाँ कुछ कह पाती है कभी। लड़कियों को तो लड़कों को ही पटाना पड़ता है।
वो चाहे या न चाहे, लड़कों को ही उसे बेड पर ले जाना होता है और नंगा कर के बूर चोदना होता है। मैं चुपचाप अपना सर नीचे किए वहाँ बैठी थी। अंकल बिल्कुल ही समझ गए थे कि मैं उनसे संभोग करने के लिए तैयार हूँ। अंकल ने एक झटके में अपना कंबल उठाकर बगल में फेंक दिया।
ओह, उनका तना हुआ मोटा लौड़ा, काला, जिसका सुपाड़ा काफी रेड और बड़ा और काली लटकती हुई उनकी आंड़, बिल्कुल मेरे सामने थी। आशीष अंकल पूरे नंगे तो नहीं थे। अंडरवियर पहना था और उसके पेशाब वाली फांक से लंड और आंड़ बाहर निकाला हुआ था। मैंने एक पल को देखा और अपना सर नीचे कर लिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अंकल, मेरे सामने अपना मूठ मारने लगे, धीरे-धीरे से। उनकी साँसें काफी भारी हो गई थीं और वो काफी उत्तेजित हो गए थे। मूठ मारते हुए वो मेरी ही ओर देख रहे थे। मैं थोड़ी-थोड़ी देर पर सर उठाकर उनकी तरफ देखती, फिर उनके लौड़े की तरफ देखती और सर झुका लेती थी। अंकल, मेरे सामने अपना मूठ मारने लगे। अंकल मेरे साथ गंदी गंदी बातें करने लगे, और बीच बीच में जोर जोर से आह और निशिका बोल पड़ते थे। “Meri Bur Chudai Kahani”
“निशिका, तुमने बूर चुदवाया है कभी?” अंकल ने पूछा।
मेरा गला सूख गया यह सुनकर के। वो मुझसे चुदाई के बारे में बातें कर रहे थे। मैंने ना में सिर हिला दिया। फिर वो जोर से आहें भरने लगे और अपने लंड का मूठ मारने लगे। कहने लगे, “ओह निशिका, तुम कुंवारी हो। तुम्हारी बूर कितनी टाईट होगी। तुमको चोदने में कितना मजा आएगा? निशिका, मेरा लौड़ा तो झर ही जाएगा, ऐसा लग रहा है!”
जिस लड़की की मैं तस्वीर बनाता था गंदी-गंदी, वो लड़की मेरे सामने बैठी है और मैं मूठ मार रहा हूँ उसके सामने आह निशिका। अंकल फिर पूछने लगे, “निशिका, क्या तुम लंड चूसना पसंद करती हो?” अरे, नहीं, यह भी मैं क्या पूछ रहा हूं। तुमने तो कभी सेक्स किया ही नहीं है। मैं तुम्हारे साथ बेइंतहा सेक्स करना चाहता हूं। तुम्हारी कुंवारी और जवान होती हुई देह को चोदकर के मसल देना चाहता हूं। लेकिन यह मैं तभी करूंगा जब तुम मुझे कहोगी कि, “अंकल, आप मुझे चोदिए।” मैं बिना तुम्हारे कहे कुछ नहीं करूंगा।
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यह सारी गंदी-गंदी बातें करते हुए वह अपने लौड़े को काफी तेजी से ऊपर-नीचे कर रहे थे और अब मैं उनके लंड को देखने लगी थी। वह आहें भर रहे थे: “आह निशिका! आह निशिका!” मेरा भी मन कर रहा था कि मैं उनके सामने अपनी कछिया उतार दूं और अपनी बूर फैलाकर के उसको अपनी उंगलियों से पेलने लगूं।
मैं बहुत, बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी। फिर आशीष अंकल ने मुझसे पूछा, “निशिका, तुम कहोगी तो मैं अपना अंडरवियर उतार दूंगा ताकि तुम मेरे लंड और मेरी आंड़ को बहुत अच्छे से देख सको। मैं चाहता हूँ कि मैं तुम्हारे बगल में बैठूँ और तुम अपने नाजुक कोमल हाथों से मेरा लौड़ा थाम लो।”
इतना कहते हुए अंकल बेड से उतरकर मेरे बगल में आकर खड़े हो गए। उनका तना हुआ लौड़ा बिल्कुल मेरी छाती से एक फुट की दूरी पर रहा होगा। वो अपने हाथ से मेरी ठुड्डी ऊपर करके मेरी आँखों में आँखें डालकर देखने लगे। उन्होंने मुझसे पूछा, “निशिका, तुम्हारे बगल में बैठ सकता हूं क्या.”
और मैं कुछ जवाब देती उससे पहले वो मेरे बगल में बैठ गए। उन्होंने अंडरवियर उतार लिया था और मैं उनके मस्त लौड़े और आंड को काफी नजदीक से देख रही थी। मेरी गर्दन, मेरा माथा, मेरी ठोड्डी, मेरे होंठ, सब पर पसीना ऐसे आ गया था जैसे वो गर्मी का मौसम हो। “Meri Bur Chudai Kahani”
अंकल ने कहा, “निसिका, चड्ढी उतार दो।” इतना सुनते ही जैसे देह में बिजली दौड़ गई। मेरी बूर झनझनाने लगी। मैंने अभी तक कभी किसी को अपना बूर देखने नहीं दिया था। आज पहली बार अंकल के सामने मैं अपना बूर खोलकर दिखाने वाली थी। बड़े ही नाजुक हाथों से अंकल ने मेरी कमर पकड़कर मुझे खड़ा किया।
मेरे स्कर्ट में हाथ डाला और मेरी कछिया उतारकर नीचे कर दी और मुझे वहीं टेबल पर बिठा दिया। मेरे दोनों पैर टेबल पर रख दिए और स्कर्ट को ऊपर करके आशीष अंकल मेरी बूर देखने लगे। आशीष अंकल ने जमीन पर पड़ी हुई मेरी कछिया उठाई और उस जगह को सूंघने लगे, जो जगह मेरी बूर से सटी रहती थी।
ओह! आशीष अंकल मेरे सामने मेरी कछिया सूंघ रहे थे। वो कछिया दिखाते हुए उन्होंने मुझे कहा, “देखो तुम्हारी बूर से कितना रस टपका है। तुम भी मेरा लौड़ा अपने बूर में लेना चाहती हो? है ना निशिका? अब तुमको मेरे साथ कोई शर्म नहीं करनी चाहिए। तुम्हारे मन में जो है, वो साफ-साफ मुझे कहो।”
मुझे पता है तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो। मैं भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ। लेकिन तुमको बोलना पड़ेगा निसिका। सारी शर्म, हया को तुमको भूलकर कहना पड़ेगा, “आशीष अंकल, मुझे चोदिए।” नहीं तो जानती हो क्या होगा? कल रात तो तुम सोई नहीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं भी सोया नहीं और आगे आने वाली सारी रातें हम लोग नहीं सोएंगे। एक-दूसरे के देह को भोगने की कामना में तड़पते रह जाएंगे और यह समय फिर लौटकर हमारी जिंदगी में नहीं आएगा निशिका। इतना कहते हुए अंकल ने मेरी गर्दन पर हल्के से हाथ लगाया। मेरे मुंह को ऊपर उठाया और मेरे मुंह को चूसने लगे।
उनके ऐसा करते ही मैं बिल्कुल चुदाई की वासना में डूब गई। मैंने अपने दोनों हाथ उनकी गर्दन के पीछे कर दिए और उनसे लिपट गई। उनका लौड़ा सीधा मेरी बूर को टच करने लगा और फिसलने लगा। उनका देह इतना गर्म था और मैं उनसे कहीं ज्यादा गर्म थी। इतना हुआ और मेरी मोबाइल की घंटी बजाने लगी।
पता ही नहीं चला था कि काफी वक्त गुजर गया था और मम्मी को चिंता होने लगी। उधर मेरा फोन बज रहा था, जिस पर मम्मी लिखा था, और इधर आशीष अंकल मेरी जवान मुंह को चूसने में बिजी थे। उन्होंने देखा कि मम्मी का फोन है, तो और जोर से मेरा मुंह चूसने में लग गए। किसी तरह उनसे छूटकर मैंने फोन उठाया।
तो उधर से मम्मी बोली, “कहां है तू? क्या कर रही है? खाना लगा आकर खा ले। आशीष जी ने खाना खाया कि नहीं?”
मैंने भी कुछ जवाब दिया उनको और जाने को तैयार उठने जाने को होने लगी। फिर आशीष अंकल ने उसी समय मुझे कसकर पकड़ लिया। और मेरी गर्दन पर, मेरे मुंह पर, मेरे गाल पर, मेरे माथे पर कस-कस कर चूमने लगे और कहने लगे, “निशिका, ऐसे चली जाओगी तो न तुम सोओगी, न मैं सोऊंगा। कम से कम तुम मेरा मुठ मार दो। मैं तुम्हारा बूर चाटना चाहता हूँ। कम से कम मुझे तुम्हारी बूर चाटने दो।”
और उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। मेरी दोनों टांगें उन्होंने उठाई और मेरे बूर में मुंह लगा दिया! ओह माय गॉड ! कैसी सनसनी थी। मैंने अपनी गांड़ ऊपर उठाकर उनके मुंह से दूर होने की कोशिश की। लेकिन आशीष अंकल ने मेरी कमर पकड़कर फिर मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरी बूर चाटने लग गए। “Meri Bur Chudai Kahani”
वो मेरी बूर के कोने-कोने पर जीभ फिरा रहे थे। जीभ नुकीला करके कभी मेरी बूर के भीतर घुसाने की कोशिश करते थे, कभी मेरी बूर की फुन्नी को वो चाटते थे। इतनी कामुकता में बूर झड़ने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है। आशीष अंकल मुश्किल से 4-5 मिनट मेरा बूर चाटे होंगे कि मैं पूरे जोर से होशोहवास खोकर लगभग चिल्लाती हुई उनके मुंह पर ही झड़ गई और वो मेरी बूर का सारा रस चाटने लगे।
थोड़ी देर यहीं पर रहने के बाद उन्होंने मुझे उठाया और मेरे मुंह पर चुम्मा देने लग गए। मैं उनके मुंह से अपने बूर की बास एकदम से महसूस करने लगी। फिर आशीष अंकल ने मुझसे कहा, “मेरा लौड़ा पकड़ो और मुंह में ले लो।” ओह! इतना बड़ा भयानक विशाल लौड़ा। उससे आती हुई सेक्सी, भीगी भीगी सी महक।
मैं मन ही मन सोच रही थी, ये सब क्या हो रहा है? लेकिन मैंने अपने आप को बिल्कुल छोड़ दिया था। आशीष अंकल की मर्जी पर आशीष अंकल ने मेरे बायाँ हाथ पकड़कर कहा, “मेरी आंड़ पकड़ो और दाहिने हाथ से मेरा लंड जड़ में पकड़ो और मुंह में ले लो। मेरा सुपाड़ा चूसो।” और मैं वैसा ही करने लगी।
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फिर उन्होंने कहा, “मेरी आंड़ को जोर-जोर से दबाओ और लंड पर मुठ मारो।” मैं उसी तरह अंकल की आंड़ को जोर-जोर से दबाकर उनका लौड़ा का मुठ मारते हुए उनके लौड़ा को चूसने लग गई। आशीष अंकल थोड़ा सा झुके और उन्होंने मेरी दोनों चूचियां कसकर पकड़ ली और मेरी चूचियों को मसलने लग गए। “Meri Bur Chudai Kahani”
मैं एक हाथ से उनकी आड़ पकड़कर दबा रही थी। दूसरे हाथ से लंड का मुठ मार रही थी और लंड का सुपाड़ा मेरे मुंह में था, जिसको मैं चूस रही थी। आशीष अंकल मेरी चूचियां मसल रहे थे। फिर आशीष अंकल ने कहा, “निशिका, क्या मैं तुम्हारे मुंह के भीतर लंड झाड़ दूं?” मैंने थोड़ी देर के लिए लंड मुंह से निकाला।
उनकी तरफ देखा और फिर उनका लौड़ा अपने मुंह में ठूस लिया। आशीष अंकल मेरे सिर पकड़कर जोर-जोर से मेरे मुंह को चोदने में लगे हुए थे। और मैं उनकी आंड़ सहलाते हुए, उनके लौड़े का मुठ मार रही थी और अपने मुंह से चूस रही थी। ज्यादा वक्त नहीं लगा जब वो मेरे गले तक अपना लौड़ा उतारने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
और 5 ही झटकों में मेरे मुंह में गड़गड़ा कर अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। वीर्य का स्वाद बिल्कुल ही अच्छा नहीं था और उसकी गंध बहुत ही तीखी थी। मेरे पूरे मुंह में आशीष अंकल का वीर्य भर गया था। मैं चाहती थी कि तुरंत उसको उगल दूं। मुझे वोमिट जैसा फील होने लगा था। मैंने उसको फर्श पर उगल दिया और बेसिन पर जाकर कुल्ला करने लगी।
आशीष अंकल वहीं निढाल अपने बिस्तर पर नंगे ही लेट गए। उनका लौड़ा जो कि मुरझा सा गया था, पर अब भी काफी बड़ा था, अपनी आंड़ पर चढ़ा था। मैं कुल्ला की। आशीष अंकल को जाकर कहा कि अब मैं जा रही हूँ। आशीष अंकल ने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और मुझे चूमने लगे। फिर वो कहने लगे, “कल स्कूल जाने के बहाने तुम मेरे घर पर आ जाना। कल मैं तुम्हारी बूर चोदूंगा.” कल मैं तुम्हें दिन भर चोदूँगा।
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