Nude Didi Sexy Kahani
हेल्लो फ्रेंड्स, आप सभी का एक बार फिर मेरी कहानी में स्वागत है. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आशना दीदी और मेरे राज 1 पढ़ा होगा, जिसमें की मैंने बताया था की बचपन में ही अब्बू ने मुझे बोर्डिंग स्कूल भेज दिया. वहां मुझे मेरी आशना दीदी की बहुत याद आती थी. और फिर मेरी स्कूलिंग पूरा होने के बाद जब मैं वापस घर आया तो दीदी जवान हो चुकी थी. और रात में उनके साथ उनके कमरे में सोना पड़ा और मैंने तब दीदी का जवान जिस्म देख कर कामुक हो गया और उनकी डायरी मेरे हाथ लगी. जिसमे दीदी भी अपने चुदाई की तड़प लिखी थी. अब आगे- Nude Didi Sexy Kahani
आशना दीदी के उन भारी और गोल स्तनों को देखने के बाद और उनकी डायरी में लिखी उन गंदी और बेकाबू सेक्स की चाहतों को पढ़ने के बाद, मेरे अंदर भाई और बहन वाला रिश्ता कहीं पीछे छूट गया था। अब मैं चाहकर भी उन्हें पहले की तरह नहीं देख पा रहा था। मेरे दिमाग में दीदी की एक नई तस्वीर बन गई थी।
एक ऐसी औरत, जिसकी अपनी चाहतें थीं और जिसके शरीर को पाने की चाहत मेरे अंदर पागलपन की तरह बढ़ चुकी थी। अब हाल ऐसा हो गया था कि घर में जब भी आशना दीदी मेरे सामने से गुजरतीं या किसी काम से मेरे पास आतीं, तो मेरी साँसें रुक सी जाती थीं। जैसे ही वे मेरे सामने आतीं, मेरी नज़रें अपने आप उनके चेहरे से हटकर सीधे उनके भारी सीने पर चली जाती थीं।
जब वे घर के काम करतीं और इधर-उधर चलतीं, तो उनके वे दूध जैसे भारी स्तन ढीले कपड़ों के अंदर जिस तरह हिलते थे, मैं उन्हें बिना पलक झपकाए देखता रहता था। मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी और हवस बहुत बढ़ने लगती थी। मेरा मन करता था कि मैं सबके सामने उन्हें अपनी बाहों में खींच लूँ और बिना किसी डर के उनके उन बड़े-बड़े उभारों को अपने हाथों में कसकर दबा दूँ।
दिन हो या रात, बस यही बात मेरे दिमाग में चलती रहती थी कि कब और कैसे मुझे उनके उन खूबसूरत स्तनों को अपने हाथों से छूने और दबाने का मौका मिलेगा। फिर एक दिन ऐसा मौका आया जब हमारे अब्बू किसी काम से दूसरे शहर गए हुए थे और उन्हें शाम तक वापस आना था।
उसी सुबह मुझे और आशना दीदी को अपनी टेलर की दुकान के काम से अंधेरी जाना था। हम दोनों सुबह जल्दी उठे, फ्रेश हुए और दुकान के लिए तैयार होकर घर से निकल गए। घर से बाहर जाने से पहले आशना दीदी ने हमेशा की तरह अपना काला बुर्का पहन लिया, क्योंकि अब्बू के सख्त नियम के हिसाब से घर से बाहर जाते समय बुर्का पहनना उनके लिए जरूरी था।
अंधेरी जाने के लिए हमें लोकल ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन सुबह उस रूट पर ऑफिस जाने वाले लोगों की बहुत ज्यादा भीड़ होती थी। स्टेशन और ट्रेन दोनों में बहुत भीड़ थी। महिलाओं का डिब्बा इतना भरा हुआ था कि अंदर पैर रखने की भी जगह नहीं थी, इसलिए मजबूरी में मुझे और दीदी को जनरल डिब्बे में चढ़ना पड़ा।
हम किसी तरह धक्का-मुक्की करते हुए जनरल डिब्बे के अंदर गए और भीड़ के बीच हमें खड़े होने के लिए बहुत मुश्किल से थोड़ी सी जगह मिली। दीदी बिल्कुल मेरे सामने खड़ी थीं और उस बहुत ज्यादा भरी हुई ट्रेन में जब भी ट्रेन को झटका लगता या वह आगे बढ़ती, तो बात करते समय उनके बुर्के और कपड़ों के ऊपर से उनके भारी स्तन बार-बार मेरे सीने से आकर छू जाते थे।
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उस हल्के से छूने पर मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती थी। तभी रास्ते में मुझसे कोई जरूरी बात कहने के लिए दीदी ने अपने बुर्के का चेहरे को ढकने वाला पर्दा ऊपर कर लिया। उनका खूबसूरत चेहरा अचानक पूरी तरह मेरे सामने आ गया और मेरी आँखें सीधे उनकी आँखों में और फिर उनके शरीर पर टिक गईं।
अगले ही स्टेशन पर ट्रेन रुकी और डिब्बे के अंदर लोगों की एक और बहुत बड़ी भीड़ आ गई। नए लोग डिब्बे में घुसते ही बहुत ज्यादा धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे पीछे खड़े लोग मुझे और आगे की तरफ धकेलने लगे। जगह बनाने के लिए वे मेरी पीठ पर जोर दे रहे थे, जिसकी वजह से मैं चाहकर भी खुद को संभाल नहीं पा रहा था।
आशना दीदी ने अचानक बढ़े इस दबाव को समझते हुए खुद को मुझसे दूर करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वे पीछे हट ही नहीं पाईं। इस वजह से हम दोनों के शरीर पूरी तरह एक-दूसरे से चिपक गए। भीड़ के तेज़ धक्के से दीदी के बड़े और भारी स्तन सीधे मेरे सीने से बुरी तरह दब गए।
उनके शरीर की नरमी और उनके स्तनों का भारीपन मेरे सीने से इस तरह लगा कि मेरे अंदर हवस बढ़ने लगी। दीदी मुझसे कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोल ही रही थीं, तभी पीछे खड़े किसी आदमी ने एक और जोरदार धक्का दिया, जिससे मैं पूरी तरह संभल नहीं पाया और आगे की तरफ झुक गया।
इससे पहले कि मैं खुद को रोक पाता, अगले ही पल वह हो गया जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। मेरे होंठ सीधे आशना दीदी के होंठों से जाकर टकरा गए और हमारा पहला किस हो गया। मेरे होंठ सीधे आशना दीदी के नरम होंठों से पूरी तरह लगे हुए थे और इस तरह अचानक छूने से मेरे अंदर हवस बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीदी के होंठों की नरमी मेरे अपने होंठों पर साफ महसूस हो रही थी। उनके होंठों पर लगी स्ट्रॉबेरी फ्लेवर की लिपस्टिक का मीठा और हल्की खुशबू वाला स्वाद धीरे-धीरे मेरे मुँह में घुलने लगा था, जो किसी नशे की तरह मेरे दिमाग पर चढ़ रहा था। यह सिर्फ अचानक हुआ छूना नहीं था, बल्कि मेरे लिए वह बहुत खास पल था, जिसके लिए मैं जाने कब से इंतज़ार कर रहा था।
अपनी ही बहन के होंठों का स्वाद मिलते ही मेरा दिल पागलों की तरह तेज़ धड़कने लगा और मेरी साँसें तेज़ हो गईं। दूसरी तरफ इस अचानक हुई बात से दीदी बहुत ज्यादा घबरा गईं और उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई देने लगा। उन्होंने अपनी आँखें बड़ी करके मुझे देखा और खुद को मुझसे दूर करने और पीछे हटने की पूरी कोशिश करने लगीं।
वे अपनी गर्दन पीछे खींचने और अपना चेहरा हटाने की लगातार कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनकी कोशिश का कोई फायदा नहीं हो रहा था। चारों तरफ से आ रहे लोगों के बहुत ज्यादा दबाव की वजह से वे पीछे हट ही नहीं पा रही थीं। भीड़ ने उन्हें पूरी तरह मेरे सीने से दबाकर रखा था और इस सबके बीच हमारे होंठ चाहकर भी एक-दूसरे से अलग नहीं हो पा रहे थे।
दीदी की बेचैनी और खुद को दूर करने की कोशिश से वह पल और भी ज्यादा अजीब और खतरनाक लग रहा था और मैं उस हालत में भी उनके होंठों के उस नए स्वाद को पूरी तरह महसूस कर रहा था। थोड़ी देर बाद, जब डिब्बे के अंदर की भीड़ थोड़ी कम हुई और थोड़ी सी खाली जगह बनी, तो आशना दीदी ने तुरंत अपनी पूरी ताकत लगाकर खुद को पीछे खींचा और अपने होंठ मेरे होंठों से अलग कर लिए।
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अलग तो वे हो गई थीं, लेकिन उस बुरे हादसे के बाद हम दोनों के बीच सब कुछ शांत हो गया था। किसी के मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था। हम चाहकर भी एक-दूसरे से बात नहीं कर पा रहे थे। हम दोनों जैसे डर से जम गए थे क्योंकि हम अच्छी तरह जानते थे कि हम भाई-बहन हैं और जो कुछ अभी हुआ था, वह बहुत गलत था।
जब मैंने थोड़ी देर पहले बिना जाने ही अपनी सगी बहन के होंठों को अपने होंठों से छुआ था, तो वह बात अजीब होने के साथ-साथ मेरे अंदर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर गई थी। हमारे बीच भाई-बहन का रिश्ता उस वक्त हमारे दिमाग में एक बहुत बड़ी परेशानी की तरह घूम रहा था और उस अजीब सी शर्म, डर और अंदर बढ़ रही गंदी सी बेचैनी ने हम दोनों को पूरी तरह हिला दिया था।
करीब आधे घंटे के सफर के बाद लोकल ट्रेन अंधेरी स्टेशन पर रुकी और हम दोनों भीड़ से बचते हुए किसी तरह बाहर निकले और अपनी टेलर की दुकान पर पहुँच गए। वह एक छोटी सी दुकान थी, जहाँ सिलाई की कुछ मशीनें रखी थीं और चारों तरफ ग्राहकों के कपड़े टंगे हुए थे।
अब्बू ने हमें बचपन से ही सिलाई का सारा काम सिखाया था, इसलिए दुकान पर पहुँचते ही बिना कुछ बोले हम अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठ गए और चुपचाप काम करने लगे। मैं मशीन पर कपड़े सिल रहा था और आशना दीदी कपड़ों पर बटन लगाने और बाकी काम करने लगीं।
अजीब बात यह थी कि दुकान के अंदर कोई दूसरा आदमी नहीं था, फिर भी दीदी ने अपना काला बुर्का नहीं उतारा। अब्बू का डर ऐसा था कि वे दुकान के अंदर भी बुर्का पहनकर बैठी थीं। दुकान के उस छोटे से कमरे में बहुत ज्यादा चुप्पी थी और यह चुप्पी मुझे अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी।
कुछ ही मिनटों बाद जब मुझसे और चुप नहीं रहा गया, तो मेरा दिल जोर से धड़कने लगा और मैंने काम रोककर धीरे से कहा, “दीदी… जो ट्रेन में हुआ, उसके लिए मैं सॉरी कहना चाहता हूँ… मेरा इरादा आपको किस करने का नहीं था।” मेरी बात पूरी होते ही दीदी ने तुरंत सुई-धागा पकड़ा हुआ अपना हाथ रोक लिया।
बिना मेरी तरफ देखे वे बहुत जल्दी और धीमी आवाज़ में बोलीं, “चुप रहो गोलू… वो कोई किस-विस नहीं था, वो सिर्फ अचानक हुआ एक हादसा था… बस! अब इस बारे में दोबारा एक भी बात मत करना।” हम एक बार फिर चुपचाप अपना काम करने लगे, लेकिन सुई-धागे की आवाज़ के बीच भी हमारे दिल तेज़ धड़क रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
बाहर मुंबई के आसमान से तेज़ बारिश होने लगी थी, जो वहाँ आम बात थी। बारिश वाले उस दिन हम दोनों ने पूरा दिन दुकान के अंदर चुपचाप काम करते हुए बिताया। शाम होते-होते अंधेरा होने लगा, तो हमने दुकान का शटर नीचे किया, ताला लगाया और घर के लिए निकल गए।
लेकिन हम मुश्किल से पंद्रह मीटर ही चले होंगे कि आसमान काले बादलों से भर गया और अचानक बारिश बहुत तेज़ हो गई। हमारे कपड़े कुछ ही पलों में पूरी तरह भीग गए। तेज़ बारिश से बचने के लिए हमारे पास कोई और जगह नहीं थी, इसलिए हम दौड़कर वापस दुकान के पास आ गए।
ताला खोलने और शटर उठाने में हमें कुछ ही मिनट लगे, लेकिन तब तक हम दोनों सिर से पैर तक पूरी तरह भीग चुके थे। दुकान के अंदर जाते ही हमने जल्दी से शटर नीचे करके अंदर से बंद कर दिया और बिजली का स्विच दबाकर बल्ब जला लिया। बारिश के पानी से आशना दीदी का पूरा बुर्का और उनके अंदर के कपड़े पूरी तरह गीले हो गए थे।
अब दुकान का दरवाजा अंदर से बंद था और वहाँ सिर्फ हम दोनों भाई-बहन थे, इसलिए दीदी ने तुरंत अपना भारी और पानी से पूरी तरह भीगा हुआ बुर्का उतारकर एक तरफ रख दिया। लेकिन बुर्का उतरते ही मेरे सामने जो आया, उसे देखकर मैं हैरान रह गया। “Nude Didi Sexy Kahani”
बारिश में पूरी तरह भीगने की वजह से उनके सारे कपड़े उनके शरीर से बहुत ज्यादा चिपक गए थे, जिससे उनके कपड़ों की हर सिलवट और शरीर का आकार साफ दिखाई दे रहा था। उनके कपड़ों के गीले होने की वजह से उनके शरीर का आकार और भी साफ दिख रहा था और मेरा ध्यान उनकी तरफ चला गया।
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लेकिन गीले कपड़ों में अपने शरीर की परवाह किए बिना, इस वक्त दीदी के चेहरे पर सिर्फ डर और घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। वे बारिश और इस हालत से इतनी डर गई थीं कि उन्हें इस बात का भी ध्यान नहीं था कि मैं उन्हें किस तरह देख रहा हूँ। उनकी हालत देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत चिंता करते हुए पूछा, “दीदी, क्या हुआ? इतनी घबराई क्यों हो?”
मेरी बात सुनते ही उनकी आँखों में आँसू आ गए और वे रोते-रोते कांपती हुई आवाज़ में बोलीं, “अगर मैं इन भीगे हुए कपड़ों में घर वापस पहुँची, तो अब्बू मुझ पर बहुत चिल्लाएंगे। तुम्हें तो पता ही है कि उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है कि मैं बारिश में भीगूँ या इस हालत में घर आऊँ। वो बहुत गुस्सा करेंगे…”
मैं अच्छी तरह समझ रहा था कि दीदी के मन में अब्बू का इतना डर क्यों था। मुझे बचपन के वो दिन अच्छी तरह याद आ गए, जब हम दोनों बारिश में भीग गए थे। उस समय जब अब्बू को इस बात का पता चला था, तो उन्होंने दीदी को बहुत बुरी तरह पीटा था, जबकि मुझे तो ज्यादा डाँट भी नहीं पड़ी थी।
बचपन का वह डर आज भी दीदी के दिल और दिमाग में बैठा हुआ था, जिसकी वजह से इस समय उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। मैं यह भी जानता था कि अगर घर पहुँचकर मैंने अब्बू को समझाने की कोशिश की कि बारिश अचानक शुरू हो गई थी और इसमें हमारी कोई गलती नहीं थी, तो वे मेरी एक बात भी नहीं सुनेंगे।
उनका गुस्सा ऐसा था कि वे किसी की बात सुनने को तैयार ही नहीं होते थे। ऐसे में दीदी की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती। उस समय दुकान के उस बंद कमरे में मैं पूरी तरह परेशान खड़ा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, कैसे दीदी का डर कम करूँ और उन्हें थोड़ा अच्छा महसूस कराऊँ। “Nude Didi Sexy Kahani”
दीदी की कांपती हुई हालत और उनकी आँखों में आँसू देखकर मेरे दिमाग में अचानक एक तरीका आया। मैंने तुरंत दुकान के कोने में रखी बिजली वाली भारी प्रेस उठाई और उसे बोर्ड में लगाकर चालू कर दिया। कुछ ही सेकंड में प्रेस का नीचे वाला हिस्सा पूरी तरह गर्म हो गया।
मैंने दीदी के हाथ से उनका पानी से पूरी तरह भीगा हुआ काला बुर्का लिया और उसे दुकान की पुरानी मेज पर फैला दिया। इसके बाद मैंने गर्म प्रेस को उस गीले कपड़े पर चलाना शुरू कर दिया। जैसे ही गर्म प्रेस गीले बुर्के पर लगी, उसमें से छर्र-छर्र की आवाज़ के साथ हल्की भाप निकलने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
बारिश का सारा पानी गर्मी की वजह से जल्दी-जल्दी सूखकर हवा में जाने लगा और कमरे में हल्की सी गर्म भाप फैलने लगी। मैं पूरा ध्यान लगाकर बुर्के को सुखाने के काम में लग गया, ताकि किसी तरह दीदी को अब्बू के गुस्से से बचाया जा सके। कुछ ही मिनटों तक प्रेस चलाने के बाद उसकी गर्मी से वह काला बुर्का पूरी तरह सूख गया।
दीदी ने उसे छूकर देखा तो वह बिल्कुल सूखा और गर्म था। उनके उदास चेहरे पर एक पल के लिए राहत और हल्की सी खुशी आ गई। उन्हें लगा कि चलो, अब्बू के सामने पहनने के लिए कम से कम बुर्का तो तैयार हो गया। लेकिन बड़ी परेशानी अभी भी खत्म नहीं हुई थी। “Nude Didi Sexy Kahani”
दीदी के अंदर पहने हुई सूती कुर्ते और लेगिंग अभी भी बारिश के पानी से पूरी तरह भीगे हुए थे और उनके शरीर से चिपके हुए थे। हम दोनों अच्छी तरह जानते थे कि अगर उन्होंने इन गीले कपड़ों के ऊपर से यह सूखा बुर्का पहन लिया, तो बुर्का भी अंदर से फिर गीला हो जाएगा और घर पहुँचते ही अब्बू को पता चल जाएगा।
इस परेशानी में दीदी की आँखों में फिर से डर आ गया। उन्होंने मेरी तरफ देखा और बहुत झिझकते हुए, कांपती और धीमी आवाज़ में मुझसे कहा, “गोलू… बुर्का तो सूख गया है, लेकिन मेरे अंदर के ये कपड़े अभी भी पूरी तरह गीले हैं। अगर मैं इन्हें ऐसे ही पहनूँगी तो बुर्का फिर से गीला हो जाएगा… क्या तुम मेरे ये कपड़े भी प्रेस से सुखा सकते हो?”
मैंने खुद को आम दिखाने की कोशिश करते हुए तुरंत कहा, “हाँ दीदी… लाओ, मैं तुम्हारे ये कपड़े भी प्रेस करके सुखा देता हूँ, तुम इन्हें उतार दो।” मेरे मुँह से ये बात बिल्कुल आम तरीके से निकल गई, जैसे यह कोई साधारण सी बात हो, लेकिन मेरे सीने में मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैं अच्छी तरह जानता था कि यह हमारे बीच की कोई आम बात नहीं थी। आज से पहले मैंने कभी आशना दीदी को बुर्के और सलवार-कमीज के अलावा किसी और कपड़े में नहीं देखा था। मैंने उन्हें कभी अपने सामने ऐसी हालत में भी नहीं देखा था। लेकिन अब हालात ऐसे थे कि उन्हें अब्बू के गुस्से से बचने के लिए अपने गीले कपड़े मेरे सामने उतारने पड़ रहे थे। “Nude Didi Sexy Kahani”
उस छोटे से बंद कमरे में चारों तरफ चुप्पी थी और मेरे दिमाग में बस यही बात चल रही थी कि कुछ ही पलों में मेरी सगी बहन मेरे सामने बिना कपड़ों के खड़ी होने वाली थी। यह बात सोचकर ही मैं अंदर से पूरी तरह घबरा गया था। आशना दीदी कुछ सेकंड तक वहीं चुप खड़ी रहीं।
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उनके चेहरे पर इस बात को लेकर बहुत झिझक और घबराहट साफ दिखाई दे रही थी और उनके हाथ कांप रहे थे। लेकिन दूसरी तरफ अब्बू के बहुत गुस्से और मार का डर इतना ज्यादा था कि मजबूरी में उनकी सारी शर्म चली गई। आखिर में, भारी मन और कांपते हाथों से उन्होंने अपनी कुर्ती के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए।
कुर्ती के सारे बटन खुलने के बाद उन्होंने उसे उतारकर एक तरफ रख दिया और फिर बिना मेरी तरफ देखे अपनी गीली लेगिंग भी पैरों से नीचे उतारकर अलग कर दी। अब उस बंद कमरे में, हल्की सी रोशनी के बीच, मेरी सगी बहन सिर्फ लाल रंग की ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी।
मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि मेरी बहन कभी इस तरह लाल रंग की चमकीली ब्रा और पैंटी पहनती होगी। उस लाल रंग ने मुझे अंदर तक हिला दिया और मुझे महसूस हुआ कि हम भाई-बहन अब एक ऐसी जगह आ गए हैं जहाँ से वापस जाना बहुत मुश्किल था। “Nude Didi Sexy Kahani”
दीदी ने एक लंबी और गहरी साँस ली, जैसे वे अपने अंदर का सारा डर कम करना चाहती हों। फिर उन्होंने अपने हाथ अपनी पीठ की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया। उनके ऐसा करते ही वह लाल ब्रा उनके शरीर से अलग होकर नीचे फर्श पर गिर गई और उसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी पैंटी भी उतारकर फेंक दी।
और फिर मेरी जिंदगी में पहली बार मेरी सगी बहन पूरी तरह बिना कपड़ों के मेरे सामने खड़ी थी। दीदी के जिस्म का एक-एक हिस्सा अब मेरी आँखों के सामने पूरी तरह साफ दिखाई दे रहा था। उनके दोनों बड़े और भारी स्तन बिना किसी ब्रा के उनके सीने पर लटक रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दूध जैसे गोरे रंग वाले उनके स्तन इतने भारी थे कि वे थोड़े नीचे की तरफ झुके हुए थे। उनके बीच के गहरे भूरे और चौड़े निप्पल ठंड और जोश की वजह से पूरी तरह कड़े और नुकीले हो गए थे। जब-जब दीदी लंबी साँस ले रही थीं, तब-तब उनके भारी स्तन ऊपर-नीचे हिल रहे थे और उनके निप्पलों की सख्ती साफ दिखाई दे रही थी।
उनकी नजरों से बचकर जब मैंने अपनी आँखें नीचे उनकी जांघों के बीच की तरफ कीं, तो उनकी चुत का पूरा नजारा मेरी आँखों के सामने था। उनकी चिकनी और गोरी जांघों के बीच उनकी चुत का ऊपर वाला हिस्सा उभरा हुआ था, जिस पर मुलायम काले बालों की मोटी परत थी।
उनकी चुत के दोनों मोटे और भरे हुए होंठ आपस में पूरी तरह मिले हुए थे, लेकिन उनके बीच की गहरी लाइन साफ दिखाई दे रही थी। गीले होने की वजह से उनकी चुत का पूरा हिस्सा चमक रहा था। जैसे ही वे हल्का सा कांपीं, उनकी चुत के दोनों बाहर वाले होंठों के बीच से चिपचिपा और गाढ़ा सफेद पानी धीरे-धीरे बाहर निकलने लगा और उनकी चिकनी जांघों पर नीचे की तरफ बहने लगा, जिससे कमरे की उस चुप्पी में हमारी धड़कनें और तेज़ हो गईं।
दीदी के जिस्म की खूबसूरती को देखते हुए मेरी नजरें उनके दूध जैसे गोरे सीने के आसपास घूमने लगीं। उनके स्तनों के पास एक बहुत प्यारा और छोटा सा काला तिल था, जो उनकी गोरी त्वचा पर ऐसा दिख रहा था जैसे चाँद पर कोई छोटा सा दाग हो। वह छोटा सा तिल उनकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था और देखने में बहुत अच्छा लग रहा था।
उसे देखते ही मेरे दिल में एक अजीब सी चाहत उठने लगी और मैं मन ही मन सोचने लगा कि वह खुशनसीब इंसान कौन होगा, जिसे इन खूबसूरत और भारी स्तनों को चूसने और इस जिस्म को करीब से महसूस करने का मौका मिलेगा। मेरा पूरा मन बस यही चाह रहा था कि काश वह मौका मुझे मिले। “Nude Didi Sexy Kahani”
उस गर्म और बहुत अजीब माहौल के बीच दीदी ने अपने सारे गीले कपड़े मेरे हाथ में दे दिए, जिन्हें पहनकर वे अभी बारिश में भीगी थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं इन्हें जल्दी से प्रेस करके सुखा दूँ। मैंने तुरंत आयरन उठाई और सबसे पहले उनकी कुर्ती और लेगिंग को अच्छी तरह प्रेस करके उनकी सिलवटें हटा दीं।
इसके बाद जब मेरी नजर उनके छोटे कपड़ों यानी ब्रा और पैंटी पर पड़ी, तो मेरा दिल और भी जोर से धड़कने लगा। मैंने कांपते हाथों से उनकी ब्रा उठाई और फिर उनकी रेशम जैसी पैंटी को हाथ में लिया। जैसे ही मैंने उस पैंटी को सीधा करके प्रेस करने के लिए फैलाया, उसमें से एक हल्की, मीठी और गर्म महक सीधे मेरी नाक तक आई।
वह महक किसी बाजार के परफ्यूम जैसी नहीं थी, बल्कि उसमें दीदी के शरीर की अपनी गर्म महक मिली हुई थी। वह वही पैंटी थी जो अभी कुछ ही मिनट पहले उनके शरीर पर थी। उस कपड़े से आ रही महक और उस पर लगी हल्की सी नमी ने मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी पैदा कर दी और मैं उस पैंटी को हाथ में पकड़े हुए कुछ पल के लिए चुप सा खड़ा रह गया।
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मैंने उस पैंटी और ब्रा को अच्छी तरह प्रेस करके तह लगाई और फिर बाकी सूखे कपड़े भी समेटकर दीदी के हाथ में दे दिए। कपड़े मिलते ही दीदी ने एक-एक करके अपने सारे कपड़े पहनने शुरू कर दिए। उन्हें अपने सामने फिर से कपड़ों में देख मेरे दिल में एक अजीब सा खालीपन और कसक होने लगी। “Nude Didi Sexy Kahani”
अंदर ही अंदर मुझे बहुत बुरा लग रहा था कि वह खूबसूरत और नंगा नजारा इतनी जल्दी खत्म हो गया। जिंदगी में यह पहला मौका था जब मैंने अपनी सगी बहन के जिस्म को इस तरह पूरी तरह नंगा देखा था। मेरे मन का एक लालची हिस्सा बार-बार यही कह रहा था कि मुझे उनकी उन भारी और भरे हुए स्तनों और गीली चुत को थोड़ा और देखने का मौका मिलना चाहिए था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
यह नजारा इतनी जल्दी खत्म नहीं होना चाहिए था। दीदी ने अपनी कुर्ती और लेगिंग पहनने के बाद ऊपर से अपना बुर्का भी पहन लिया। उनके सारे कपड़े अब पूरी तरह सूख चुके थे, जबकि बारिश की वजह से मेरे अपने कपड़े अभी भी थोड़े गीले थे। लेकिन मुझे अपने गीले कपड़ों की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी। इस वक्त मेरा पूरा जिस्म सुन्न सा था और मेरे अंदर एक अजीब सी गर्मी चल रही थी। मैं बस कुछ देर पहले हुए उस पल को बार-बार याद कर रहा था। For next part tell me golutales07@gmail.com
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