Bhai Bahan Chudai Night
मेरा नाम पार्थ है और मेरी बहन का नाम लावण्या, जिसे मैं प्यार से लवली दीदी बुलाता हूँ। लवली दीदी मुझसे दो साल बड़ी हैं, यानी वो 24 की हैं और मैं 22 का। दीदी का गोरा रंग, लंबे काले बाल, और भरा हुआ जिस्म हमेशा से ही सबकी नजरें खींचता था, लेकिन अब तो वो विदेश से लौटकर कुछ और ही हॉट हो गई थीं। Bhai Bahan Chudai Night
दो साल पहले, 12वीं के बाद वो कनाडा पढ़ने चली गई थीं। दो साल का कोर्स था, और वो वहीं हॉस्टल में रहती थीं। हम लोग वीडियो कॉल पर बात करते थे, लेकिन जब वो वापस आईं, तो मैं उन्हें देखकर दंग रह गया। मैं उन्हें एयरपोर्ट लेने गया था। जैसे ही वो टर्मिनल से बाहर निकलीं, मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।
दीदी ने टाइट जीन्स और लो-कट टॉप पहना था, जिसमें से उनकी भरी-भरी चूचियाँ आधी बाहर झाँक रही थीं। उनकी कमर पतली थी, और जब वो चलती थीं, तो उनकी गोल-मटोल गांड का हर उछाल मेरे दिल में आग लगा रहा था। उनका चेहरा, वो लाल होंठ, और वो गोरे गाल—हाय, मैं तो बस उन्हें देखता ही रह गया।
जब वो बैग उठाने के लिए झुकीं, तो उनकी चूचियों का गहरा क्लीवेज मेरे सामने आ गया। मेरे दिमाग में तूफान मच गया। मैंने मन में सोचा, “ये मेरी बहन है, पार्थ, क्या सोच रहा है?” लेकिन मेरा लंड तो जैसे मेरी बात ही नहीं मान रहा था। रास्ते भर मैं चुपचाप उनकी गाड़ी की सवारी करता रहा, और मेरी नजरें बार-बार उनके जिस्म पर चली जाती थीं।
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पापा उनसे बातें कर रहे थे, लेकिन मेरा ध्यान तो बस उनकी हिलती गांड और उन टाइट कपड़ों में कैद चूचियों पर था। मैंने सोचा, “काश, ये मेरी बहन न होती, मैं तो अभी प्रपोज कर देता।” फिर मन में ख्याल आया कि ये गलत है, लेकिन तभी मुझे वो कहानियाँ याद आईं जो मैंने पढ़ी थीं—भाई-बहन के बीच प्यार और सेक्स की।
मेरे दिमाग में एक अजीब सी उलझन थी, लेकिन मेरा जिस्म कुछ और ही चाह रहा था। घर पहुँचते ही मम्मी ने दीदी का जोरदार स्वागत किया। हम सब साथ बैठे, खाना खाया, और ढेर सारी बातें कीं। दीदी का स्टाइल पूरी तरह बदल गया था। विदेश में रहकर वो और भी बोल्ड हो गई थीं।
रात को उन्होंने जो नाइटी पहनी, वो तो कमाल की थी। पतली सी सिल्क की नाइटी, जो उनकी चूचियों को मुश्किल से ढक रही थी। नीचे स्कर्ट इतनी छोटी थी कि उनकी गोरी-मोटी जाँघें साफ दिख रही थीं। मैं तो बस उन्हें घूरता रहा। मेरा लंड पैंट में तन गया था, और मैं अपने आप को रोकने की कोशिश कर रहा था।
जब सोने का वक्त आया, तो पापा ने पूछा, “लवली, तू कहाँ सोएगी?” मुझे नहीं पता उस वक्त मेरे मुँह से कैसे निकल गया, “पापा, दीदी आज मेरे बेड पर सोएँगी। मेरा बेड तो 6 फुट का है, हम दोनों आसानी से सो जाएँगे।” मम्मी ने कुछ नहीं कहा, और दीदी ने हँसते हुए कहा, “हाँ, क्यों नहीं? पार्थ के साथ सो जाऊँगी। वैसे भी मुझे लैपटॉप पर कुछ काम करना है।”
मैंने मन में सोचा, “बस, आज तो मौका है।” रात को हम दोनों मेरे कमरे में चले गए। पापा-मम्मी अपने कमरे में थे। मैं बेड पर लेटा हुआ मोबाइल पर कुछ कहानियाँ पढ़ रहा था, और दीदी अपने लैपटॉप पर कुछ टाइप कर रही थीं। उनकी नाइटी का गला इतना ढीला था कि जब वो झुकती थीं, तो उनकी चूचियाँ साफ दिख रही थीं। मैं बार-बार उनकी तरफ देख रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा, “पार्थ, मुझे नींद आ रही है। मैं थक गई हूँ। आज जल्दी सो जाती हूँ, बाकी काम कल निपटा लूँगी।”
मैंने कहा, “ठीक है, दीदी। आप सो जाओ, मैं भी सोता हूँ।”
दीदी ने लैपटॉप बंद किया और मेरे बगल में लेट गईं। उन्होंने करवट ली और अपनी गांड मेरी तरफ कर ली। उनकी नाइटी ऊपर खिसक गई थी, और उनकी गोरी-मोटी जाँघें मेरे सामने थीं। मैंने देखा कि वो गहरी नींद में चली गई थीं। मेरा लंड अब पूरी तरह तन चुका था। मैंने सोचा, “बस, मुठ मार लेता हूँ।”
लेकिन मेरा दिल कुछ और ही चाह रहा था। मैंने हिम्मत जुटाई और धीरे से अपना लंड बाहर निकाला। उसका 7 इंच का तना हुआ शक्ल मेरे हाथ में था। मैंने उसे दीदी की गांड पर हल्के से सटाया। उनकी स्कर्ट को धीरे-धीरे ऊपर सरकाया, और उनकी पैंटी को नीचे खींच दिया।
उनकी चिकनी, गोल गांड मेरे सामने थी, और उसकी गर्माहट ने मुझे पागल कर दिया। मैंने अपने लंड को उनकी चूत की फाँकों पर रगड़ना शुरू किया। उनकी चूत गर्म और नरम थी। मैंने सोचा, “बस, सटाकर मजा ले लूँ, अंदर नहीं डालूँगा।” लेकिन मेरे से रहा नहीं गया। मेरे जिस्म में आग लगी थी।
मैंने हल्का सा धक्का मारा, और मेरा लंड उनकी चूत की फाँकों को चीरता हुआ थोड़ा अंदर चला गया। दीदी की नींद टूटी, और वो एकदम से पलटीं। मैं डर गया, लेकिन उन्होंने मेरे लंड को बाहर नहीं निकाला। बस इतना कहा, “पार्थ, ये क्या कर रहा है? लगता है तू आजकल अंग्रेजी मूवीज ज्यादा देख रहा है।”
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मैंने डरते-डरते कहा, “दीदी, आप इतनी हॉट हो गई हो, मैं खुद को रोक नहीं पाया। सॉरी।”
दीदी ने मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराईं। फिर बोलीं, “आज तो मैं तुझे माफ कर देती हूँ, लेकिन कल से ऐसा मत करना। पर जब तूने मेरी चूत में लंड डाल ही दिया है, तो आज तू मुझे चोद ही ले।”
मेरे कानों में जैसे घंटियाँ बजने लगीं। मैंने तुरंत उनकी नाइटी ऊपर की और उनकी ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ मेरे सामने थीं—गोरी, गोल, और निप्पल्स गुलाबी। मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर-जोर से मसलने लगा। दीदी ने अपनी टाँगें फैलाईं और कहा, “पार्थ, पहले मेरी चूत चाट।”
मैं नीचे गया और उनकी चूत को चाटने लगा। उनकी चूत गीली हो चुकी थी, और उसका नमकीन स्वाद मेरे मुँह में घुल रहा था। मैंने अपनी जीभ उनकी चूत की फाँकों में डाली और उनके दाने को चूसा। दीदी की सिसकारियाँ शुरू हो गईं, “आह्ह… पार्थ… और चाट… हाय… कितना मजा आ रहा है।”
मैंने उनके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा, साथ ही उनकी चूत में उंगली डाल दी। दीदी की साँसें तेज हो गई थीं। वो मेरे बाल पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगीं। थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा, “बस, अब डाल दे अपना लंड।” मैंने अपना लंड उनकी चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा।
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मेरा पूरा लंड उनकी गीली चूत में समा गया। दीदी के मुँह से चीख निकली, “आह्ह… पार्थ… धीरे… कितना बड़ा है तेरा लंड।” मैंने धक्के मारने शुरू किए। उनकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड हर धक्के में और उत्तेजित हो रहा था। मैंने उनकी चूचियाँ पकड़ीं और उन्हें मसलते हुए जोर-जोर से चोदने लगा।
दीदी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं, “आह्ह… ऊह्ह… पार्थ… चोद मुझे… और जोर से… हाय… मेरी चूत फाड़ दे।” मैंने उन्हें पलट दिया और उनकी गांड की तरफ से लंड डाला। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी, और मैंने उसे थपथपाते हुए धक्के मारने शुरू किए। “फच-फच” की आवाज कमरे में गूँज रही थी। “Bhai Bahan Chudai Night”
दीदी की गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी। मैंने उनकी कमर पकड़ी और और जोर से चोदने लगा। दीदी चिल्ला रही थीं, “हाय… पार्थ… मेरी चूत में आग लग गई… और चोद… आह्ह…” थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझे लेटने को कहा। मैं लेट गया, और वो मेरे ऊपर चढ़ गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर सेट किया। फिर धीरे-धीरे बैठ गईं। मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। दीदी उछल-उछलकर चुदवाने लगीं। उनकी चूचियाँ मेरे सामने हिल रही थीं, जैसे दो बड़े-बड़े तरबूज। मैंने उन्हें पकड़ लिया और उनके निप्पल्स को उंगलियों से रगड़ने लगा।
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दीदी चिल्ला रही थीं, “आह्ह… पार्थ… तेरा लंड मेरी चूत को फाड़ रहा है… हाय… कितना मजा आ रहा है।” मैंने नीचे से धक्के मारने शुरू किए, और दीदी ऊपर से उछल रही थीं। हम दोनों की साँसें तेज थीं। दीदी ने मेरे होंठों पर किस किया और मेरी छाती पर अपने नाखून गड़ा दिए।
मैंने उनकी गांड को थपथपाया और और जोर से धक्के मारे। करीब एक घंटे तक हम दोनों चुदाई करते रहे। आखिर में मैंने अपना सारा माल उनकी चूत में छोड़ दिया। दीदी मेरे ऊपर लेट गईं, और हम दोनों एक-दूसरे को बाहों में भरकर सो गए। उस रात के बाद से हम दोनों रोज चुदाई करते हैं। पहले दिन हमने बिना कंडोम के किया था, लेकिन अब हम कंडोम इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि सावधानी जरूरी है। मैं अपनी अगली कहानी जल्द ही लिखूँगा।
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