New Incest Porn Story
ये कहानी मेरे और मेरी बड़ी बहन आशना के बीच की है। वो मुझसे तीन साल बड़ी है और बचपन से ही हम दोनों हमेशा साथ रहते थे। हमारा घर मुंबई के पास मुम्ब्रा में है। मेरे बचपन से ही वहाँ का माहौल बहुत अलग था। छोटी छोटी गलियाँ, हर तरफ लोगों की भीड़, मस्जिदों की आवाज़, और ऐसा माहौल जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता था। New Incest Porn Story
उस एरिया में लोगों की सोच भी काफी सख्त थी, इसलिए हमारे अब्बू हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि लोग हमारे परिवार के बारे में सिर्फ अच्छी बातें करें। अब्बू का मानना था कि बच्चों की परवरिश ऐसी होनी चाहिए कि पूरा मोहल्ला उनकी मिसाल दे। इसी वजह से हमारे घर में बहुत सारे नियम थे।
बाहर ज्यादा घूमना, जोर से बोलना, या किसी भी तरह की ऐसी हरकत करना जो लोगों को गलत लगे, ये सब हमारे लिए मना था। मैं लड़का होने की वजह से कभी कभी दोस्तों के साथ नीचे खेलने चला जाता था, लेकिन आशना दीदी की जिंदगी काफी अलग थी। उन्हें इतनी आज़ादी नहीं थी।
वो ज्यादातर घर में ही रहती थी। अगर बाहर जाना होता, तो सिर्फ कॉलेज, ट्यूशन या फिर अब्बू की टेलर की दुकान तक। और जब भी उन्हें घर से बाहर जाना पड़ता, उन्हें हमेशा बुर्का पहनना पड़ता था। चाहे कितनी भी गर्मी हो या कितनी भी जल्दी हो, बिना बुर्के के बाहर निकलने की इजाज़त नहीं थी।
मेरे अब्बू की छोटी सी टेलर की दुकान अंधेरी में थी। दुकान बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन अब्बू ने मेहनत से उसे संभाल रखा था। पूरे दिन मशीनों की आवाज़, कपड़ों के टुकड़े, नाप लेने वाले फीते और ग्राहकों की बातें यही उनकी दुनिया थी। कभी-कभी आशना दीदी भी वहाँ मदद करने चली जाती थी।
वो कपड़े पैक करती, हिसाब लिखती या ग्राहकों को कपड़े दिखा देती। अब्बू को उन पर बहुत भरोसा था क्योंकि वो बचपन से ही जिम्मेदार थी। लेकिन घर के अंदर हमारी दुनिया बिल्कुल अलग थी। मैं और आशना दीदी सिर्फ भाई बहन नहीं थे, हम एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे।
बचपन में हम दोनों हर चीज साथ करते थे। कभी तकियों से लड़ाई, कभी छुपन-छुपाई, कभी बिना वजह हँसना, और कभी ऐसी शरारत करना जिससे अम्मी परेशान हो जाएँ। कई बार हम दोनों पूरे घर में भागते रहते और अम्मी पीछे से चिल्लाती रहती कि थोड़ा शांत बैठो।
हम दोनों का रिश्ता इतना मजबूत था कि अगर मुझे किसी बात का डर लगता, तो सबसे पहले मैं दीदी के पास जाता। और अगर दीदी उदास होती, तो वो भी सबसे पहले मुझसे ही बात करती। बाहर की दुनिया हमारे लिए सख्त थी, लेकिन घर के अंदर हम दोनों एक-दूसरे की छोटी सी दुनिया थे।
शायद यही वजह थी कि समय के साथ हमारी दोस्ती और भी ज्यादा गहरी होती चली गई। लेकिन जब मैं बाहरवीं में था, तब मैंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर दी। मेरी क्लास में एक लड़की थी और धीरे-धीरे मैं उसके करीब आ गया। कुछ ही महीनों में वो मेरी गर्लफ्रेंड बन गई।
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मुझे लगा था कि ये बस एक छोटी सी बात है और किसी को पता नहीं चलेगा, लेकिन हमारे घर में ऐसी चीजें बहुत बड़ी मानी जाती थी। सबसे बड़ी बात ये थी कि अब्बू पहले से ही अपने भाई को वादा कर चुके थे कि मेरी पढ़ाई पूरी होने के बाद मेरी शादी उनकी बेटी से होगी।
वो मेरी कज़िन थी और दोनों परिवारों में ये बात सालों से तय मानी जाती थी। जब अब्बू को मेरे रिश्ते के बारे में पता चला, तो वो गुस्से से पूरी तरह टूट गए। मैंने उन्हें पहली बार इतना गुस्से में देखा था। उन्हें लगा कि मैंने सिर्फ उनका भरोसा नहीं तोड़ा, बल्कि पूरे परिवार की इज्जत खराब कर दी।
उस दिन घर का माहौल इतना डरावना था कि मैं आज तक नहीं भूल पाया। अब्बू ने मुझे बहुत मारा और कई दिनों तक मुझसे ठीक से बात भी नहीं की। कुछ ही दिनों बाद उन्होंने फैसला कर लिया कि मुझे मुम्ब्रा से दूर भेज दिया जाएगा। उन्होंने मेरा एडमिशन एक बोर्डिंग कॉलेज में करवा दिया जहाँ मुझे दो साल रहना था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे लिए सबसे मुश्किल बात कॉलेज नहीं थी… सबसे मुश्किल बात थी आशना दीदी से दूर होना। बचपन से हम कभी इतने लंबे समय के लिए अलग नहीं हुए थे। जिस दिन मैं घर छोड़ कर जा रहा था, उस दिन पहली बार मुझे एहसास हुआ कि मैं दीदी के बिना कितना अकेला महसूस करने वाला हूँ।
मैं बोर्डिंग कॉलेज चला गया और आशना दीदी मुंबई में ही रह गई। शुरुआत के कुछ दिन मेरे लिए बहुत मुश्किल थे। वहाँ सब कुछ नया था। नए लोग, नए कमरे, नए नियम… लेकिन इन सब से ज्यादा मुश्किल था दीदी के बिना रहना। मैं हर छोटी बात उन्हें बताने का आदी था।
रात को सोने से पहले उनसे बातें करना, उनके साथ हँसना, या बस उनके आस-पास रहना ये सब अचानक मेरी जिंदगी से गायब हो गया था। मुझे कई बार उनसे बात करने का मन करता था, लेकिन बोर्डिंग कॉलेज में मोबाइल रखने की इजाज़त नहीं थी। वहाँ का माहौल बहुत सख्त था। “New Incest Porn Story”
हर चीज का टाइम फिक्स था। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक सब नियमों के हिसाब से चलता था। कई बार मैं रात को अकेले बैठ कर बस यही सोचता रहता कि इस समय दीदी क्या कर रही होंगी। सबसे ज्यादा दर्द मुझे ईद के समय हुआ। मुझे पूरा यकीन था कि शायद त्योहार पर घर जाने की इजाज़त मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
बाकी बच्चे भी उदास थे, लेकिन मेरे अंदर कुछ और ही चल रहा था। पहली बार मैं ईद अपने परिवार और खास कर आशना दीदी के बिना मना रहा था। धीरे-धीरे वही बोर्डिंग लाइफ मेरी पूरी जिंदगी बन गई। दिन, महीने और फिर साल गुजरते चले गए। शुरुआत में जो जगह मुझे जेल जैसी लगती थी, वही अब मेरी रोज की दुनिया बन चुकी थी।
लेकिन इन दो सालों में एक चीज कभी नहीं बदली… आशना दीदी की यादें। फिर आखिरकार वो दिन आ गया जब मेरे दो साल पूरे हो गए। मैं वापस मुंबई लौट रहा था। ट्रेन में बैठा हुआ मैं बार-बार सिर्फ एक ही बात सोच रहा था… अब आशना दीदी कैसी दिखती होंगी। दो साल बहुत लंबा समय होता है।
मेरे दिमाग में उनकी वही पुरानी तस्वीर थी, लेकिन अब मैं उन्हें फिर से देखने के लिए बेचैन हो चुका था। मुंबई वापस लौटने की सबसे बड़ी खुशी मेरे लिए सिर्फ एक थी… आशना दीदी से दोबारा मिलना। शाम के समय मैं आखिरकार घर पहुँच गया। जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, अम्मी ने मुझे देखा और तुरंत खुशी से मेरे पास आ गई। उनकी आँखों में खुशी साफ दिख रही थी।
वो बार-बार मेरे चेहरे को देख रही थी जैसे उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा हो कि मैं सच में वापस आ गया हूँ। अब्बू भी बाहर आए। वो हमेशा की तरह शांत थे, लेकिन उनके चेहरे पर भी हल्की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। शायद वो खुल कर नहीं दिखाते थे, लेकिन उन्हें भी मेरी कमी महसूस हुई थी। “New Incest Porn Story”
मैंने कुछ देर अम्मी और अब्बू के साथ बैठ कर बातें की। घर की बातें, कॉलेज की बातें, रिश्तेदारों की बातें… लेकिन सच कहूँ तो मेरा ध्यान कहीं और ही था। इतने सालों बाद मैं सिर्फ एक इंसान को देखने के लिए सबसे ज्यादा बेचैन था। आखिरकार मैंने इधर उधर देखते हुए पूछा, “आशना दीदी कहाँ हैं?”
अम्मी कुछ सेकंड चुप रही। फिर उन्होंने हल्की उदासी के साथ बताया कि मेरे जाने के कुछ महीनों बाद ही अब्बू ने आशना दीदी की पढ़ाई रुकवा दी थी। उनका मानना था कि लड़की को इतनी पढ़ाई कराने का कोई फायदा नहीं है। वो कहते थे कि आखिर में उसे घर ही संभालना है, इसलिए ज्यादा पैसे और समय बर्बाद करने का मतलब नहीं।
ये सुनते ही मेरे अंदर कुछ टूट सा गया। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि आशना दीदी की पढ़ाई बंद करवा दी गई। वो लड़की जो हमेशा पढ़ना चाहती थी… जिसने कभी किसी चीज की शिकायत नहीं की… उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना ऐसे ही रोक दिया गया। मैंने एक पल के लिए अब्बू की तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा।
दो सालों में मैंने इतना समझ लिया था कि इस घर में कुछ बातें बोल कर बदली नहीं जा सकतीं। मैं बिना कुछ बोले धीरे से खड़ा हुआ… और सीधा छत की तरफ चल पड़ा। जैसे ही मैं छत पर पहुँचा, मेरे कदम अपने आप धीरे हो गए। सामने का नज़ारा देख कर मैंने एक गहरी साँस ली। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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दो साल पहले जो लड़की मैं छोड़ कर गया था… आशना दीदी अब वैसी बिल्कुल नहीं दिख रही थी। वो पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। छत पर कुछ छोटी लड़कियाँ बैठी थी और आशना दीदी उनके सामने खड़ी होकर उन्हें कुछ समझा रही थी। उनके हाथ में एक किताब थी और वो बड़े ध्यान से बच्चों को पढ़ा रही थी।
उनकी आवाज़ पहले जैसी ही नरम थी, लेकिन अब उसमें एक अलग ही बात आ गई थी। शाम की हल्की हवा चल रही थी। उनके बाल बार-बार चेहरे के सामने आ रहे थे और वो हर कुछ सेकंड बाद उन्हें कानों के पीछे करने की कोशिश कर रही थी। उस छोटी सी हरकत को देख कर भी मेरी नज़र उनसे हट नहीं रही थी।
उन्होंने एक सिंपल सा सूट पहना हुआ था। नीचे से कपड़ा ढीला था, लेकिन ऊपर से वो उनके शरीर पर काफी फिट बैठ रहा था। उसी वजह से उनके स्तन कपड़ों के अंदर साफ उभर कर दिख रहे थे। जब वो हाथ उठाती या किताब पकड़ती, तब कपड़ा उनके सीने पर और ज्यादा खिंच जाता था।
उनके स्तनों का गोल आकार सूट के अंदर बहुत साफ दिखाई दे रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कपड़ा उन्हें छुपाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन पूरी तरह छुपा नहीं पा रहा था। दो सालों में उनका शरीर काफी बदल चुका था। उनकी कमर पहले से पतली लग रही थी और उसके ऊपर उनका भरा हुआ सीना तुरंत ध्यान खींच रहा था।
हवा चलने पर कपड़ा हल्का सा उनके बदन से चिपक जाता और उनके शरीर की बनावट और ज्यादा साफ दिखने लगती। जब वो झुक कर किसी लड़की की कॉपी देखती, तब उनका ऊपरी बदन और ज्यादा उभर कर सामने आता। उनकी गर्दन, उनके हाथों की हल्की हरकतें, और बात करते समय उनके होंठों का धीरे-धीरे हिलना… सब कुछ मुझे पहले से अलग महसूस हो रहा था। “New Incest Porn Story”
मैं बस चुप-चाप खड़ा उन्हें देख रहा था, जैसे दो साल बाद पहली बार सच में समझ पा रहा हूँ कि आशना दीदी अब सिर्फ वही पुरानी शरारती लड़की नहीं रहीं… वो अब पूरी तरह जवान हो चुकी थी। मैं कुछ सेकंड तक वहीं खड़ा उन्हें देखता रहा। फिर आखिर मैंने धीरे से आवाज़ दी, “आशना दीदी…”
मेरी आवाज़ सुनते ही वो अचानक रुक गई। पहले तो उन्होंने हैरानी से इधर-उधर देखा, लेकिन जैसे ही उनकी नज़र मुझ पर पड़ी, उनके चेहरे पर इतनी बड़ी मुस्कान आ गई कि मैं बस उन्हें देखता रह गया। अगले ही पल वो किताब एक लड़की को पकड़ाकर तेजी से मेरी तरफ भागी।
“तू सच में आ गया…” इतना कहते ही उन्होंने सीधे आकर मुझे जोर से गले लगा लिया। दो सालों का सारा इंतजार जैसे उस एक पल में बाहर आ गया था। उनका शरीर पूरी तरह मेरे सीने से लगा हुआ था। उनके बड़े और भरे हुए स्तन मेरे सीने पर दब गए थे। सूट के कपड़े के ऊपर से भी उनकी नरमी साफ महसूस हो रही थी।
मैं पहली बार इतना करीब से उनके बदन को महसूस कर रहा था। उन्होंने मुझे कुछ सेकंड तक वैसे ही पकड़े रखा। फिर धीरे से पीछे हटकर दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़ लिया। उनकी आँखें हल्की सी चमक रही थी, जैसे वो खुद यकीन नहीं कर पा रही हों कि मैं सच में उनके सामने खड़ा हूँ।
अगले ही पल वो हल्का सा आगे झुकी और अपने होंठ मेरे गाल पर रख दिए। उनके होंठ बहुत नरम थे। फिर उन्होंने मुस्कुराते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “मैंने तुझे बहुत मिस किया गोलू…” उसके बाद उन्होंने उन छोटी लड़कियों की क्लास खत्म कर दी। लड़कियाँ धीरे-धीरे अपनी किताबें उठा कर नीचे चली गई और छत पर सिर्फ मैं और आशना दीदी रह गए। “New Incest Porn Story”
हम दोनों छत के कोने में जाकर बैठ गए। शुरुआत में बस एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे, जैसे दो सालों की बातें कहाँ से शुरू करें ये समझ ही नहीं आ रहा था। फिर धीरे-धीरे बातें शुरू हुई… और पता ही नहीं चला कब समय निकलता चला गया। हम लगभग दो घंटे तक लगातार बात करते रहे।
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मैं उन्हें बोर्डिंग कॉलेज की बातें बता रहा था । वहाँ के सख्त नियम, हॉस्टल के लड़के, अकेलापन, और कैसे हर त्योहार पर मुझे घर की याद आती थी। और वो मुझे घर की बातें बता रही थी। मोहल्ले में क्या बदला, कौन कहाँ चला गया, अम्मी अब भी कैसे हर बात पर चिंता करती हैं… सब कुछ। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर बातों बातों में उन्होंने बताया कि मेरे जाने के बाद उन्होंने एक डायरी लिखना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें बहुत अकेलापन महसूस होता, या किसी से बात करने का मन करता, तो वो अपनी सारी बातें उसी डायरी में लिख देती थी। वो हल्का सा हँसते हुए बोली, “तेरे जाने के बाद घर बहुत खाली लगने लगा था… इसलिए लिखना शुरू किया।”
उनकी आवाज़ में हल्की उदासी साफ महसूस हो रही थी। फिर कुछ सेकंड चुप रहने के बाद उन्होंने बताया कि उन्हें अभी भी अपनी कॉलेज लाइफ बहुत याद आती है। अपनी सहेलियों के साथ बातें करना, क्लास में बैठना, बाहर जाना… ये सब अचानक खत्म हो गया था। “New Incest Porn Story”
हम दोनों इतने समय से बातें कर रहे थे कि नीचे से अम्मी की आवाज़ आई, “खाना तैयार है… नीचे आ जाओ दोनों!” फिर मैं और आशना दीदी साथ में नीचे गए। खाने की मेज पर बैठ कर हम सब ने साथ खाना खाया। इतने समय बाद घर का खाना खाकर मुझे अलग ही सुकून महसूस हो रहा था।
बीच बीच में आशना दीदी मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी और मैं भी उन्हें देखता रह जाता था। खाना खत्म होने के बाद मैं अपने कमरे की तरफ जाने लगा, लेकिन तभी अम्मी ने मुझे रोक दिया। उन्होंने कहा, “तेरा कमरा अभी साफ नहीं हुआ है… आज रात तू आशना के कमरे में ही सो जा।”
ये सुनते ही मैंने एक पल के लिए आशना दीदी की तरफ देखा और वो हल्का सा मुस्कुरा दी। कुछ पलों बाद आशना दीदी कपड़े बदलने के लिए अपने कमरे में गईं ताकि वह आराम से कपड़े बदलकर सो सके। थोड़ी देर बाद जब मैं भी उनके कमरे में गया और मेरी नज़र उन पर पड़ी, तो मेरी साँसें वहीं रुक गईं।
उन्होंने जो टी-शर्ट पहनी हुई थी, वह उनके भारी और बड़े स्तनों पर पूरी तरह से कसी हुई थी। उस पतले और हल्के कपड़े के अंदर उनके बड़े-बड़े दूध जैसे उभार साफ बाहर की तरफ निकले हुए थे, जिन्हें देखकर ऐसा लग रहा था कि वे टी-शर्ट के कपड़े को भी फाड़कर बाहर आ जाएंगे।
उन्होंने अंदर कोई ब्रा नहीं पहनी थी, जिसका साफ असर उस पतले कपड़े पर दिख रहा था। उनके दोनों निप्पल्स उस हल्के कपड़े के आर-पार बहुत कड़े, उठे हुए और साफ दिखाई दे रहे थे। उस टी-शर्ट का डिजाइन ऐसा था कि उनके दोनों भारी स्तनों के बीच की गहरी और सेक्सी जगह भी साफ दिख रही थी। “New Incest Porn Story”
जब वे अपनी जगह पर हल्का सा भी हिलती थीं, तो उनके बड़े और बिना सहारे के झूलते हुए स्तन उस पतले कपड़े के अंदर हिलते थे, और उस एक-एक पल में उनके शरीर की गर्मी और खूबसूरती साफ महसूस हो रही थी। मैं जानता था कि वह मेरी बहन थीं और उन्हें इस तरह गंदी नज़र से देखना पूरी तरह गलत था, लेकिन दिल और आँखों पर किसका बस चलता है?
जब वह सामने इतनी खूबसूरत और मदहोश कर देने वाली लग रही थीं, तो मैं चाहकर भी अपनी नज़रें उनसे नहीं हटा पा रहा था। मेरे मन में हवस का ऐसा तूफ़ान उठ रहा था कि मेरा बस यही मन कर रहा था कि मैं आगे बढ़कर उनकी टी-शर्ट फाड़ दूँ और अपने प्यासे होंठों से उनके उन भारी और गोल स्तनों को पागलों की तरह चूसने लगूँ।
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हम दोनों पूरे दो साल बाद मिले थे, और उस वक्त उनके शरीर के उभारों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उन पर मेरा पूरा हक हो और उनके इन दूध जैसे भारी स्तनों को अपने हाथों से दबाने का हक सिर्फ मेरा ही है। लेकिन उस पल मैंने किसी तरह अपने अंदर जल रही आग को रोक लिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
शायद आशना दीदी को समझ आ गया था कि मैं उन्हें किस बुरी नज़र से देख रहा हूँ और लगातार उनके शरीर को घूर रहा हूँ। उन्हें थोड़ा अजीब लगा, इसलिए उन्होंने बिना देर किए बिस्तर पर लेटकर खुद को चादर से अच्छे से ढक लिया। वह बिस्तर काफी छोटा था, इसलिए जब मैं भी लेट गया, तो हम दोनों के बीच की दूरी बहुत कम रह गई थी।
वह जगह इतनी तंग थी कि जब भी मैं थोड़ा सा हिलता या दीदी बिस्तर पर अपनी जगह बदलने के लिए करवट लेतीं, तो हमारे हाथ आपस में टकरा जाते थे। उनके शरीर की हल्की सी रगड़ और त्वचा का वह अनजाना छूना मेरे अंदर की बेचैनी को और ज्यादा बढ़ा रहा था, जिससे मेरे पूरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ जाती थी।
मैं उस तंग बिस्तर पर ठीक से लेटने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आशना दीदी के शरीर की खुशबू और उनके पास होने की वजह से मेरी रातों की नींद पूरी तरह उड़ गई थी। उनके शरीर की गर्मी मेरे शरीर को छू रही थी, जिसकी वजह से मेरी पैंट के अंदर मेरा लंड आग की तरह भड़ककर पूरी तरह तना हुआ था।
मेरी नसों में दौड़ता खून उबाल मार रहा था और मैं चाहकर भी अपने अंदर उठ रही इस बेकाबू चाहत को रोक नहीं पा रहा था। रात धीरे-धीरे और गहरी होती जा रही थी, वक्त बीत रहा था, लेकिन मेरी आँखों में नींद बिल्कुल नहीं थी। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ दीदी के पास होने पर था। “New Incest Porn Story”
कुछ घंटों तक इंतज़ार करने के बाद जब आशना दीदी गहरी नींद में सो गईं, तब भी मेरे दिल की धड़कनें कम नहीं हुईं। तभी अचानक ऐसा हुआ कि खुद को ढकने के लिए उन्होंने जो चादर ओढ़ी थी, वह उनके शरीर से फिसलकर नीचे फर्श पर जा गिरी और उनका पूरा बदन एक बार फिर मेरी नज़रों के सामने साफ दिखाई देने लगा।
वह पीठ के बल सीधी लेटी हुई थीं और उनका भारी-भरकम और दूध जैसा गोरा शरीर साफ दिखाई दे रहा था। जब भी वे गहरी साँस लेती थीं और उनका सीना ऊपर उठता था, तो उनके बहुत बड़े स्तन ऊपर-नीचे होते थे और उनका वह हिलना किसी के भी होश उड़ा सकता था।
उनके बिना ब्रा वाले स्तनों के कड़े निप्पल्स उस हल्की टी-शर्ट के ऊपर से साफ दिखाई दे रहे थे, जिन्हें देखकर मैं पूरी तरह पागल हो चुका था। अब मुझमें खुद को रोकने की बिल्कुल भी ताकत नहीं बची थी। मैंने बिना देर किए बहुत धीरे से अपनी पैंट की चैन नीचे सरकाई और अपने कड़क हो चुके लंड को बाहर निकाल लिया, जो हवा में पूरी तरह तना हुआ था।
मेरे हाथ जैसे सुन्न हो रहे थे और मेरा दिल पागल हुआ जा रहा था। आशना दीदी को छूने की हिम्मत मुझमें नहीं थी क्योंकि मैं जानता था कि उनकी नींद हल्की है और हल्की सी आवाज़ से वे जाग सकती हैं। मैं उन्हें किसी भी तरह जगाना नहीं चाहता था। लेकिन अपनी ही बहन के उस खूबसूरत और सेक्सी रूप को अपने इतने पास सोते हुए देखने का नशा मेरे दिमाग पर पूरी तरह चढ़ चुका था।
मैंने अपनी आँखें उनके चेहरे और साँस लेते हुए उनके भारी स्तनों पर टिका दीं और मेरे हाथ अपने आप मेरे बेकाबू लंड पर चलने लगे। मैं अपनी मुट्ठी को कसकर उनके शरीर को देखते हुए अपने लंड को ऊपर-नीचे करने लगा। यह पहली बार था जब मैंने अपनी ही बहन को देखकर यह गंदा और हवस से भरा काम किया था और उस वक्त सही या गलत का हर ख्याल मेरे दिमाग से निकल चुका था। “New Incest Porn Story”
बस पास में सोती हुई दीदी का शरीर था और मेरे हाथों का तेज़ी से चलना था, जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने अपनी मुट्ठी और तेज़ चलानी शुरू कर दी। मेरा हाथ मेरे कड़क लंड पर पागलों की तरह ऊपर-नीचे चलने लगा। नसों में खिंचाव बहुत बढ़ गया था और अगले ही पल मेरे लंड से गाढ़ा सफ़ेद पानी फव्वारे की तरह बाहर निकलकर मेरे हाथों और कपड़ों पर फैल गया।
अपनी ही प्यारी बहन को सोते हुए देखने के इस एहसास के साथ झड़ना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन इस हवस भरे काम के बाद अब खुद को संभालना भी ज़रूरी था। मेरे हाथ और पैंट का कुछ हिस्सा निकले हुए सफ़ेद पानी से गंदा हो गया था, जिसे साफ करना जरूरी था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं धीरे-धीरे बिस्तर से उठा और बेड के पास रखी टेबल की तरफ गया। वह टेबल ठीक आशना दीदी की उस डायरी के सामने रखी थी, जिसमें वे अक्सर लिखा करती थीं। मैंने टेबल से टिशू पेपर उठाया और उससे अपने हाथों और कपड़ों पर लगा सफ़ेद पानी साफ किया। फिर अपने शांत हो चुके ढीले लंड को वापस पैंट के अंदर कर लिया।
कमरे में पूरी खामोशी थी और मेरा दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था। मुझे अभी भी नींद नहीं आ रही थी। तभी मेरी नज़र टेबल पर रखी आशना दीदी की उसी डायरी पर पड़ी। वे उस डायरी में तब भी लिखा करती थीं, जब मैं दो साल पहले उन्हें अकेला छोड़कर कहीं और चला गया था।
उनके बारे में और जानने की चाहत में मैंने धीरे से वह डायरी उठा ली, ताकि देख सकूँ कि जब हम अलग थे, तब वे उसके पन्नों पर क्या लिखा करती थीं। मैंने धीरे से डायरी खोली और उसके पन्ने पलटने लगा, लेकिन वह किसी आम लड़की की तरह अपने दिनभर के छोटे-मोटे कामों या रोज़ क्या हुआ, उसके बारे में नहीं लिखती थीं।
आशना दीदी के लिखे हुए हर शब्द को पढ़कर ऐसा लग रहा था जैसे ये उनके अधूरे और दबे हुए सपने थे, जो उनके दिल में ही दबकर रह गए थे। डायरी के शुरू के पन्नों में उन्होंने आज़ादी से जीने की अपनी चाहत के बारे में लिखा था। उन्होंने लिखा था कि वे सारी रोक-टोक तोड़कर अपनी पसंद की जींस और टी-शर्ट पहनकर बाहर खुली हवा में घूमना चाहती हैं, अपनी दोस्तों के साथ खुलकर शराब पीना चाहती हैं और किसी चमकते हुए नाइट क्लब में जाकर नाचना चाहती हैं। “New Incest Porn Story”
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लेकिन जैसे-जैसे मेरी उंगलियाँ कांपते हुए आगे के पन्ने पलटती गईं, उन पन्नों पर लिखी बातें और भी ज़्यादा खुली और गहरी होती गईं। आगे के पन्नों में उन्होंने अपनी उन ख़्वाबों के बारे में खुलकर लिखा था, जिन्हें उन्होंने सालों से अपने अंदर दबाकर रखा था।
उन्होंने लिखा था कि वे एक ऐसा बायफ्रेंड चाहती हैं जो किसी भूखे बच्चे की तरह उनके भारी और दूध जैसे स्तनों को अपने मुँह में लेकर पागलों की तरह चूसे। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा था कि उन्हें नहीं पता कि लड़कों का लंड कैसे चूसा जाता है, लेकिन वे किसी का लंड अपने मुँह में लेकर उसे चूसना और उसका स्वाद लेना अच्छी तरह सीखना चाहती हैं।
उस डायरी के पन्नों पर ऐसी बहुत सारी सेक्सी बातें लिखी थीं, जैसे किसी मर्द की गर्म जीभ का उनकी गीली चूत के अंदर जाने का एहसास कैसा होता है और वे इन चीज़ों को करने के लिए अंदर ही अंदर कितनी बुरी तरह तड़प रही थीं। उस डायरी का एक-एक शब्द पढ़ने के बाद मेरे अंदर सब कुछ बदल गया था और मैं दीदी को बिल्कुल अलग तरह से देखने लगा था।
बचपन से लेकर अब तक मैं हमेशा यही सोचता था कि मेरी आशना दीदी बहुत सीधी-सादी, मासूम और दुनिया की बातों से दूर रहने वाली लड़की हैं। मैंने कभी सपने में भी उन्हें ऐसी औरत के रूप में नहीं देखा था, जिसकी अपनी सेक्स की ज़रूरतें और हवस भरी चाहतें भी हों।
उनके दिल में भी अपनी जवानी की उन सभी चाहतों को पूरा करने की बहुत इच्छा थी, लेकिन हमारे अब्बू की बहुत सख्त रोक-टोक और घर के नियमों की वजह से उन्हें कभी अपनी मर्ज़ी से जीने का मौका नहीं मिला। अब्बू की सख्ती ने उन्हें कभी किसी लड़के के पास तक नहीं जाने दिया था और उनकी इसी सख्ती ने दीदी को अंदर से बहुत परेशान कर रखा था। “New Incest Porn Story”
और शायद वही रात हमारी असली ज़िंदगी का वह खूबसूरत मोड़ थी, जहाँ से हमारी असली कहानी की शुरुआत हुई। एक ऐसी भाई-बहन की कहानी, जिसमें हम दोनों दुनिया और समाज की सारी रोक-टोक भूलकर एक-दूसरे के और ज्यादा करीब आने वाले थे। For next part tell me golutales07@gmail.com
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