Nude Didi Sexy Figure
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 2 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था की मुझे और मेरे भाई को मकान मालिक ने अपने बेटे की बर्थडे पार्टी में इनवाईट किया था, और हम दोनों पार्टी में पति पत्नी बन कर गए थे. पार्टी में ज्यादा शराब पीने की वजह से मुझे बहुत नशा हो गया, और हम फ्लैट पर वापस लौट आये. मैं बिलकुल बेसुध थी मैंने भाई को अपने कपड़े चेंज करने को बोला और वो मुझे नंगी कर दिया और मुझे देखने लगा. अब आगे- Nude Didi Sexy Figure
मैं उस बिस्तर पर बिना कपड़ों के चुपचाप लेटी रही। मेरी आँखें बंद थीं और मैं बस गोलू के अगले कदम का इंतज़ार कर रही थी। उस समय मेरा दिमाग बिल्कुल सुन्न-सा हो गया था। मैं ठीक से कुछ सोच भी नहीं पा रही थी। नशे की वजह से सब कुछ धुंधला-धुंधला लग रहा था और समझ नहीं आ रहा था कि मेरे आसपास क्या हो रहा है।
लेकिन उस नशे और कमरे की खामोशी के बीच भी एक बात मुझे साफ महसूस हो रही थी। मुझे अच्छी तरह एहसास था कि मेरे भाई की नज़रें बार-बार मेरी छाती पर ही टिक जा रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे वह बिना नज़र हटाए लगातार उसी तरफ देख रहा हो। मैंने आँखें नहीं खोलीं, फिर भी उसकी नज़रों का एहसास मुझे हर पल होता रहा।
मैं वैसे ही चुपचाप लेटी रही और बस इंतज़ार करती रही कि अब आगे क्या होने वाला है। कमरे में पूरी तरह सन्नाटा था। उसी खामोशी के बीच गोलू ने बहुत धीमी और काँपती हुई आवाज़ में फुसफुसाकर पूछा, “आलिया दीदी… क्या आप जाग रही हैं…?” लेकिन मैं अपनी जगह से ज़रा भी नहीं हिली।
मैं वैसे ही आँखें बंद किए चुपचाप लेटी रही। मन तो बार-बार कर रहा था कि उसकी बात का जवाब दूँ, उसे बता दूँ कि मुझे सब सुनाई दे रहा है और मैं होश में हूँ। मगर नशे की वजह से मेरा शरीर जैसे बिल्कुल साथ नहीं दे रहा था। मैं चाहकर भी होंठ नहीं हिला पा रही थी और मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था।
मेरे लिए बस चुपचाप लेटे रहना ही मुमकिन था। कुछ पल तक कमरे में फिर वही गहरी खामोशी छाई रही। उसके बाद उसने हिचकिचाते हुए एक बार फिर धीमी आवाज़ में कहा, “दीदी… अगर आप कहें… तो मैं आपको वापस कपड़े पहना दूँ…?” मैंने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया।
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मैं बस आँखें बंद किए उसी तरह पड़ी रही। कुछ पल तक पूरे कमरे में गहरी खामोशी छाई रही। उसी सन्नाटे के बीच मुझे महसूस हुआ कि गोलू धीरे-धीरे अपनी जगह से उठकर मेरे और करीब आ गया है। मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसकी हर धड़कन मुझे अपने कानों में साफ सुनाई दे रही थी।
तभी अचानक मुझे अपने स्तनों पर उसकी उँगलियों का हल्का-सा एहसास हुआ। उसने अपनी उँगलियों के सिरों से मेरे दोनों निपल्स को पकड़ लिया और उन्हें बहुत धीरे-धीरे मरोड़ने लगा। उसके हाथ ठंडे थे, और जैसे ही उसकी ठंडी उँगलियाँ मेरे दोनों निपल्स पर पड़ीं, एक सिहरन मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई।
उसके इस तरह छूने और उँगलियों के बीच उन्हें धीरे-धीरे मरोड़ने से मेरे दोनों निपल्स तुरंत सख्त होने लगे। उस खामोशी के बीच गोलू ने फिर बहुत धीमी और घबराई हुई आवाज़ में पूछा, “दीदी… क्या आप जाग रही हैं…?” शायद वह खुद को तसल्ली देना चाहता था, या फिर यह समझना चाहता था कि मैं पूरी तरह होश में हूँ या नहीं।
मैं उसकी आवाज़ साफ़-साफ़ सुन पा रही थी, लेकिन मेरे शरीर में इतनी भी ताक़त नहीं बची थी कि मैं उसे कोई जवाब दे पाती। कुछ पल तक कमरे में गहरा सन्नाटा पसरा रहा। जब उसे मेरी तरफ़ से कोई हरकत या जवाब नहीं मिला, तो शायद उसे यक़ीन हो गया कि मैं पूरी तरह बेहोश हूँ।
इसके बाद उसके हाथ पहले से कहीं ज़्यादा बेझिझक होकर चलने लगे। इस बार उसने मेरे सीने को अपनी उँगलियों से ज़्यादा कसकर पकड़ना और दबाना शुरू कर दिया। उसकी उँगलियों का दबाव हर पल बढ़ता जा रहा था। उस तेज़ एहसास ने मेरे भीतर अजीब-सी हलचल पैदा कर दी।
नशे की वजह से मेरा दिमाग़ वैसे ही भारी और सुन्न महसूस हो रहा था। सब कुछ जैसे धुंधला-धुंधला लग रहा था, लेकिन मेरा शरीर पूरी तरह बेजान पड़ा था। मैं चाहकर भी अपनी उँगली तक नहीं हिला पा रही थी। कभी उसकी उँगलियाँ मेरे सीने पर धीरे-धीरे घूमतीं, तो कभी वह उन्हें कसकर दबा देता।
हल्के दर्द और उस अजीब-से एहसास का मिला-जुला असर मेरे पूरे शरीर में फैलता जा रहा था। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था, साँसें बेकाबू हो रही थीं, लेकिन मैं सिर्फ़ सब कुछ महसूस कर सकती थी। मेरे पास न कुछ कहने की ताक़त थी, न ही खुद को उससे दूर करने की।
कमरे में फैली खामोशी और मेरी पूरी बेबसी उस पल को और भी ज़्यादा भारी बना रही थी। मेरे निपल्स को मरोड़ते हुए वह झुककर मेरे कान के पास आया और बहुत धीमी, काँपती हुई आवाज़ में फुसफुसाया, “काश दीदी… मैं आपको यह बात होश में कह पाता कि मैं हमेशा से आपको पसंद करता हूँ और हमेशा से आपको चोदना चाहता हूँ…”
इतना कहने के बाद उसने मेरे निपल्स को मरोड़ना बंद कर दिया। अगले ही पल मुझे अपने स्तन पर उसके होंठों का हल्का सा स्पर्श महसूस हुआ। उसने धीरे-धीरे मेरे निपल को अपने होंठों के बीच लिया और चूसना शुरू कर दिया, जैसे वह उसी एहसास में पूरी तरह खो गया हो।
उसके होंठ बहुत मुलायम थे और उस स्पर्श की वजह से मेरा दिमाग जैसे काम करना ही भूल गया था। वह बीच-बीच में अपनी जीभ से मेरे निपल को छूता और धीमी आवाज़ में बुदबुदाता, “आलिया दीदी… कभी तो आप मुझे समझोगी और मुझे अपनी चूत में लंड डालने की इजाजत दोगी…”
यह कहते हुए उसने फिर से मेरे निपल को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं हमेशा से अपने मन में यह सपना देखती थी कि जब मेरी शादी होगी, तो मेरा पति मेरी हर इच्छा समझेगा और उन्हें पूरा करेगा। सबसे पहले मैं उससे यही कहती कि वह मेरे स्तनों को चूमे और चूसे, क्योंकि मैं हमेशा से उस एहसास को जीना चाहती थी कि कोई मर्द अपने होंठ मेरे स्तनों पर रखे।
लेकिन आज मेरे स्तनों को अपने मुँह में लेकर चूसने वाला कोई और नहीं, बल्कि मेरा अपना छोटा भाई गोलू था। यह सोचते ही मेरे अंदर शर्म की एक अजीब सी लहर दौड़ गई। फिर भी, उस शर्म के साथ जो एहसास मैं महसूस कर रही थी, वह इतना गहरा था कि मेरी रूह तक काँप उठी।
उस समय मेरे शरीर में उसे रोकने की बिल्कुल भी ताकत नहीं थी। और सच कहूँ, अगर मुझमें उसे रोकने की ताकत होती भी, तो शायद उस पल मैं उसे रोकना नहीं चाहती। मेरे स्तनों को सहलाते हुए वह धीरे-धीरे मेरे शरीर पर ऊपर की तरफ बढ़ने लगा। वह मेरे पेट और सीने को हल्के-हल्के चूमता हुआ आगे आया, और कुछ ही पलों में उसका चेहरा मेरे चेहरे के बिल्कुल पास आ गया।
फिर उसने झुककर अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे चूमने लगा। उसके होंठों का यह स्पर्श कुछ दिन पहले हुई उस घटना से बिल्कुल अलग था। उस दिन मैंने कैमरे के सामने फोटोशूट के लिए मजबूरी में उसे चूमा था। वह बस दिखावे के लिए था, उसमें कोई एहसास नहीं था।
लेकिन आज… आज यह सब बिना किसी मजबूरी के, अपनी मर्जी से हो रहा था। इस बार उसके होंठों का एहसास ही कुछ और था। उस एक पल में जो गर्माहट, अपनापन और नशा महसूस हो रहा था, उसने मेरे दिल की धड़कनों को जैसे और तेज़ कर दिया। मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे हुए उसने हल्की सी साँस ली और बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “तुम्हारे होंठ कितने मुलायम हैं, दीदी…”
उसकी यह बात सीधे मेरे दिल में उतर गई। मैं पहले ही नशे की हालत में थी, और उसकी इतनी करीब मौजूदगी मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उस पल के अलावा मुझे किसी और चीज़ का होश ही नहीं रहा। वह धीरे-धीरे पीछे हटा और हमारे होंठ अलग हो गए।
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कुछ पल के लिए पूरे कमरे में गहरी खामोशी छा गई। तभी मुझे फिर अपने चेहरे पर किसी चीज़ का स्पर्श महसूस हुआ। लेकिन इस बार वह उसके होंठ या हाथ नहीं थे, बल्कि कोई लंबी, गर्म चीज़ थी जो बहुत धीरे-धीरे मेरे चेहरे पर फिर रही थी। उसे महसूस करते ही मैं समझ गई कि वह उसका खड़ा हुआ लंड था।
जैसे ही उसका स्पर्श मेरे चेहरे पर हुआ, मेरे दिल की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि ऐसा लगा जैसे सीना फाड़कर बाहर निकल आएँगी। उस वक्त मेरे साथ इतनी सारी बातें एक साथ हो रही थीं कि मेरा दिमाग बिल्कुल सुन्न पड़ चुका था। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि इस हालत को कैसे संभालूँ या कैसे यह दिखाऊँ कि सब कुछ ठीक है, जबकि सच तो यह था कि सब कुछ मेरी सोच से कहीं आगे निकल चुका था।
मेरा अपना छोटा भाई अपना लंड मेरे चेहरे पर फेर रहा था। मैं उसकी मोटाई और लंबाई को अपने चेहरे पर साफ़-साफ़ महसूस कर पा रही थी। वह बहुत धीरे-धीरे अपने गर्म लंड को मेरे पूरे चेहरे पर घुमा रहा था। कभी वह मेरी बंद आँखों को छूता, कभी मेरे गालों को, कभी मेरे माथे को, और आखिर में आकर मेरे नरम होंठों से लग जाता।
मेरे होंठ बार-बार उसके गर्म और तने हुए लंड को छू रहे थे। उसके लंड की नोक से आती एक अलग सी मर्दानी महक मेरी साँसों के साथ अंदर जा रही थी। वह गंध मेरे लिए बिल्कुल नई थी। एक पल के लिए मेरे मन में आया कि मैं आँखें खोल दूँ और उसे रोक दूँ, लेकिन अगले ही पल मेरे अंदर एक ऐसा एहसास उठा जिसे मैं खुद भी समझ नहीं पा रही थी।
ऐसा लग रहा था जैसे मेरा दिमाग और मेरा दिल एक-दूसरे से बिल्कुल अलग बातें कह रहे हों। एक पल के लिए मुझे खुद से ही घिन होने लगी। मैं यही सोच रही थी कि मैं वही बड़ी बहन हूँ जो चुपचाप बिस्तर पर लेटी हुई है और अपने छोटे भाई का लंड अपने चेहरे और होंठों पर महसूस कर रही है।
मेरा मन मुझे बार-बार धिक्कार रहा था, लेकिन मैं पूरी तरह बेबस थी। उस वक्त चाहकर भी मेरे शरीर में इतना दम नहीं था कि मैं उसे रोक पाती या कुछ कर पाती। वह लगातार अपने कड़े लंड को बार-बार मेरे चेहरे पर फेरता रहा। हर बार जब उसका लंड मेरे चेहरे को छूता, मैं उसकी पूरी लंबाई और उसकी गर्माहट को अपने चेहरे पर साफ़-साफ़ महसूस कर रही थी।
उसकी हर हरकत मेरे चेहरे पर साफ़ महसूस हो रही थी। कुछ देर तक ऐसा ही करने के बाद उसने अपने लंड की नोक को सीधे मेरे होंठों के सामने लाकर रोक दिया। फिर उसने अपने ही हाथ से उसे तेज़ी से ऊपर-नीचे चलाना शुरू कर दिया। उसके मुँह से निकल रही दबी-दबी और कामुक आहें मेरे कानों में लगातार गूँज रही थीं।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसके हाथ की रफ़्तार भी बढ़ती गई। वह पहले से भी ज़्यादा तेज़ी से अपना हाथ चलाने लगा। तभी अचानक उसके लंड से गाढ़ा और गर्म सफ़ेद पानी निकल पड़ा, जिसकी पहली धार सीधे मेरे होंठों पर आकर गिरी। उसके बाद लगातार और भी सफ़ेद पानी निकलता गया और मेरे होंठों पर फैलने लगा।
वह अपना लंड मेरे पूरे चेहरे पर घुमाता रहा ताकि उसका निकला हुआ सफ़ेद पानी मेरे चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर फैलता जाए। कुछ ही पलों में मेरे होंठ पूरी तरह उससे भीग चुके थे। मेरी बंद आँखों पर भी उसकी कई गर्म धारें आकर गिरीं और धीरे-धीरे मेरे गालों तक बहने लगीं।
मेरा लगभग पूरा चेहरा उसके सफ़ेद पानी से ढक चुका था। मेरे होंठ, मेरी बंद आँखें, मेरे दोनों गाल और चेहरे का ज़्यादातर हिस्सा उसके सफ़ेद पानी से पूरी तरह सन चुका था। कुछ मिनटों तक कमरे में पूरी खामोशी छाई रही। माहौल में एक अजीब-सा सन्नाटा और झिझक महसूस हो रही थी। “Nude Didi Sexy Figure”
गोलू ने खुद को बिल्कुल सामान्य दिखाने की कोशिश की। उसने चुपचाप मेरे चेहरे को साफ किया। मैं पहले से ही बिना कपड़ों के थी, इसलिए उसने बिना कुछ कहे मुझे आरामदायक शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहना दिए। फिर मेरी बाकी चीज़ें भी ठीक से पहनाकर मुझे ऐसे संभाल दिया, जैसे वह चाहता हो कि सब कुछ सामान्य लगे।
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इसके बाद वह बिना कुछ बोले अपने कमरे में चला गया और मुझे बिस्तर पर अकेला छोड़ दिया। नशे की वजह से मेरा पूरा शरीर बेहद थका हुआ था। मेरा सिर भारी हो रहा था और जैसे शरीर में बिल्कुल ताकत नहीं बची थी। मैं कब गहरी नींद में चली गई, मुझे खुद भी पता नहीं चला।
अगली सुबह जब मेरी आँख खुली, तो हैंगओवर की वजह से मेरा सिर बुरी तरह दर्द कर रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे अभी फट जाएगा। रात की बहुत-सी बातें मेरे दिमाग से धुंधली हो चुकी थीं। मैं जितना याद करने की कोशिश करती, उतना ही सब कुछ बिखरा-बिखरा सा लगता। रविवार था, इसलिए गोलू घर पर ही था।
वह किचन में मेरे लिए कॉफी बना रहा था। थोड़ी देर बाद वह गर्म कॉफी का एक कप मेरे हाथ में देकर बोला कि वह नाश्ता लेने बाहर जा रहा है। उसके जाने के बाद मैंने धीरे-धीरे पूरी कॉफी पी। गर्म कॉफी से मेरे सिर का भारीपन थोड़ा कम हुआ और दर्द भी पहले से हल्का लगने लगा। “Nude Didi Sexy Figure”
इसके बाद मैं सीधे बाथरूम गई और काफी देर तक शॉवर लिया, ताकि शरीर की थकान और सुस्ती पूरी तरह उतर जाए। नहाने के बाद मैं चुपचाप बिस्तर पर बैठ गई। मैंने आँखें बंद करके पिछली रात को याद करने की कोशिश की। तभी अचानक सब कुछ मेरे दिमाग में किसी फिल्म की तरह एक-एक करके चलने लगा।
मुझे हर बात साफ-साफ याद आने लगी कि कैसे गोलू ने मेरे कपड़े उतारे थे, कैसे उसने मेरे निपल्स को अपने होंठों से चूसा था, और कैसे उसका कड़ा हुआ लंड मेरे होंठों और चेहरे पर रगड़ खा रहा था। यह सब याद आते ही मेरी आँखें भर आईं। मेरा गला रुँध गया और ऐसा लगा कि मैं किसी भी पल रो पड़ूँगी।
कल रात शराब के नशे में मेरा दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा था। उस वक्त मुझे जो कुछ भी हो रहा था, वह गलत नहीं लग रहा था। लेकिन अब मैं पूरी तरह होश में थी। मेरा दिमाग शांत था और मेरी अंतरात्मा मुझे बार-बार धिक्कार रही थी। मुझे खुद से ही घिन आने लगी थी।
और गोलू… उसने तो अपनी ही सगी बहन के साथ नशे की हालत का फायदा उठाकर इतनी गंदी हरकत की थी। यह सोचकर मेरा दिल और भी भारी हो गया। कल रात नशे में मुझे सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अब बिना शराब के मैं हर बात को ठंडे दिमाग से सोच रही थी। मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
अगर किसी को पता चल गया कि हमारे बीच क्या हुआ था, तो क्या होगा? अगर मम्मी-पापा को इसकी भनक भी लग गई, तो हम उन्हें क्या जवाब देंगे? हम उनका सामना कैसे कर पाएँगे? लेकिन जब मैंने पूरी बात पर ध्यान से सोचा, तो मुझे लगा कि शुरुआत से ही यह सब गोलू की वजह से हुआ था। “Nude Didi Sexy Figure”
उसी ने मुझे मनाकर बेंगलुरु बुलाया था। वही मेरी तस्वीरें देखकर अपना लंड हिलाया करता था। और कल रात भी जो कुछ हुआ, उसमें पूरी गलती उसी की थी। मैं तो शराब के नशे में धुत्त थी और मुझे ठीक से होश भी नहीं था। उसने मेरे साथ जो भी किया, वह पूरी तरह गलत था।
लेकिन तभी मेरे मन में एक और डरावना ख्याल आया। अगर मैंने गोलू को बता दिया कि मुझे पिछली रात की हर बात याद है, तो मामला और भी उलझ जाएगा। जो हो चुका था, उसे मैं बदल नहीं सकती थी। और अगर उसे यह पता चल गया कि जब वह अपना लंड मेरे होंठों पर फेर रहा था, तब मैं पूरी तरह जाग रही थी…
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और सबसे बड़ी बात, मुझे उसकी वे हरकतें अंदर ही अंदर अच्छी भी लग रही थीं… तो सब कुछ हमेशा के लिए बदल जाएगा। फिर उसके मन से मेरा, यानी अपनी बड़ी बहन का, डर पूरी तरह खत्म हो जाएगा। और अगर उसका डर खत्म हो गया, तो हो सकता है कि वह फिर से ऐसी हरकत करने की कोशिश करे।
बहुत देर तक यही सब सोचने के बाद मैंने एक फैसला किया। मुझे चुप रहना होगा। यही सबसे सही रास्ता था। इससे पहले कि गोलू नाश्ता लेकर वापस आता, मैं एक बार फिर बाथरूम गई। मैंने ठंडे पानी से अपना चेहरा अच्छी तरह धोया, ताकि आँसुओं के सारे निशान मिट जाएँ। “Nude Didi Sexy Figure”
फिर आईने में खुद को देखा, गहरी साँस ली, अपने चेहरे पर एक झूठी मुस्कान लाई और ऐसे बाहर आ गई… जैसे पिछली रात कुछ हुआ ही न हो। थोड़ी देर बाद गोलू नाश्ता लेकर वापस आया। तब तक मैं खुद को पूरी तरह संभाल चुकी थी। मैंने ऐसे बर्ताव करना शुरू कर दिया, जैसे मुझे पिछली रात की कोई भी बात याद ही न हो।
वह मेरे लिए जो सैंडविच खरीदकर लाया था, उसने चुपचाप मेरे हाथ में दे दिया। इसके बाद हम दोनों बिना कुछ बोले साथ बैठकर नाश्ता करने लगे। कमरे में अजीब-सी खामोशी छाई हुई थी। नाश्ता करते-करते उसने कई बार मेरी तरफ देखा, लेकिन हर बार कुछ कहने से पहले ही नज़रें झुका लीं।
आखिर थोड़ी हिम्मत जुटाकर उसने झिझकते हुए, हल्की घबराहट भरी आवाज़ में पूछा, “दीदी… क्या आपको कल रात की कोई बात याद है…?” मैंने पूरी सहजता और बेफिक्री का दिखावा किया। उसकी आँखों में देखते हुए बिल्कुल सामान्य लहजे में कहा, “मुझे बस इतना याद है कि पार्टी में मैंने बहुत उल्टी कर दी थी… उसके बाद क्या हुआ, मुझे कुछ भी याद नहीं है, गोलू। क्यों… कुछ हुआ था क्या?”
मेरी बात सुनते ही उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा तनाव पल भर में गायब हो गया। उसने राहत की एक लंबी साँस ली, जैसे उसके दिल पर रखा कोई बहुत बड़ा बोझ अचानक उतर गया हो। फिर तुरंत खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश करते हुए हल्की-सी मुस्कान के साथ बोला, “नहीं दीदी… कुछ भी नहीं हुआ था।”
उस दिन के बाद हमने उस पार्टी वाली रात के बारे में फिर कभी बात नहीं की। धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी फिर से पहले जैसी हो गई। हम रोज़ ऑफिस जाते, अपना-अपना काम करते, ज़रूरत पड़ने पर थोड़ी-बहुत बात कर लेते और अपनी ज़िंदगी जीते रहे। लेकिन जब भी मैं गोलू का चेहरा देखती, तो मेरे मन में अजीब-सी शर्म और घिन महसूस होती। “Nude Didi Sexy Figure”
मैं बार-बार यही सोचती कि मैं कैसी बहन हूँ, जिसे अपने ही भाई के लंड का अपने चेहरे और होंठों पर लगना अच्छा लगा था। उस रात के बाद मैंने उससे थोड़ा दूर रहना शुरू कर दिया। अगर गोलू हॉल में बैठा होता, तो मैं उसके पास बैठने की बजाय बालकनी में जाकर बैठ जाती। मैं कोशिश करती कि उससे जितना कम हो सके, उतनी ही बात करूँ।
करीब छह महीने तक सब कुछ ऐसे ही चलता रहा। फिर अचानक हमारे सामने एक बड़ी परेशानी आ गई। गोलू हमारी आईटी कंपनी में सीनियर इंजीनियर था, जबकि मैं अभी जूनियर इंजीनियर थी। मेरा ज़्यादातर काम डेटा रिकॉर्ड करना, ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करना और रिपोर्ट बनाना था।
लेकिन जब भी कोड या सिस्टम में कोई बड़ी दिक्कत आती, तो उसे ठीक करने का काम गोलू जैसे सीनियर इंजीनियर करते थे। बेंगलुरु में हमारी कंपनी, दिल्ली की एक बहुत पुरानी और बड़ी कंपनी का डेटा और सिस्टम सिक्योरिटी संभालती थी। वही कंपनी हमारी सबसे बड़ी क्लाइंट थी। “Nude Didi Sexy Figure”
लेकिन एक दिन अचानक उनके सिस्टम में बहुत बड़ा क्रैश हो गया। हमारे सीनियर इंजीनियरों ने बेंगलुरु से ही उसे ठीक करने की बहुत कोशिश की, लेकिन दिल्ली वाले ऑफिस का सिस्टम इतना पुराना था कि उसे दूर बैठकर ठीक करना मुमकिन नहीं था। इसलिए कंपनी ने पाँच इंजीनियरों की एक टीम बनाने का फैसला किया।
इस टीम को तुरंत दिल्ली जाकर वहीं रहकर उस समस्या को ठीक करना था। लेकिन सबसे बड़ी बात तब हुई, जब उस टीम की लिस्ट आई। मैं जूनियर इंजीनियर थी और डेटा व रिकॉर्ड्स संभालने के लिए मेरा जाना भी ज़रूरी था, इसलिए मेरा नाम भी उस टीम में था। और सबसे बड़ी बात… उस पूरी टीम का लीडर गोलू को बनाया गया था।
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ऑफिस में हमारे डिपार्टमेंट अलग थे, इसलिए हम दोनों एक-दूसरे से आसानी से बच जाते थे। हमारा ज़्यादा सामना भी नहीं होता था। लेकिन अब उससे बचना बिल्कुल भी आसान नहीं था। अब हम दोनों को पूरी टीम के साथ एक ही काम के लिए दिल्ली जाना था, जहाँ कई दिनों तक साथ रहकर उसी प्रोजेक्ट पर काम करना था।
उस समय हमें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि दिल्ली का यह सफर हमारी पूरी ज़िंदगी बदल देगा। लोग कहते हैं कि भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सबसे साफ और पवित्र रिश्तों में से एक होता है। लेकिन मैंने एक बात समझी… इंसान, इंसान ही होता है। “Nude Didi Sexy Figure”
जब सही मौका मिलता है और हालात वैसे बन जाते हैं, तो कई बार रिश्तों की सारी हदें टूट जाती हैं। यहीं से मेरी और मेरे भाई की कहानी शुरू हुई। धीरे-धीरे हम दोनों इस रिश्ते की हदें पार करते गए और कब सेक्स हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया, हमें खुद भी पता नहीं चला। If you want next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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