Hot Incest Chudai Kahani
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 1 पढ़ा होगा, जिसमे मैंने बताया था कि मेरा भाई बेंगलुरु में नौकरी करता था, और मैं भी उसके पास नौकरी की वजह से आ गई. फ्लैट रेंट पर लेने के लिए मेरे भाई ने मुझसे झूठी शादी की. और हमें फ्लैट मिल गया. एक दिन मैंने देखा मेरा भाई मेरी तस्वीर देख कर मुठ मार रहा था. अब आगे- Hot Incest Chudai Kahani
उस दिन के बाद से गोलू का सामना करना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो गया था। जब भी मैं उसे देखती, मेरी आँखों के सामने वही डरावना नज़ारा आ जाता। वह पूरी तरह नंगा होकर अपना लंड हिला रहा था और मेरी तस्वीरों को छू रहा था। यह सब याद आते ही मुझे घिन आने लगती थी।
कई बार मेरा मन हुआ कि मैं उससे इस बारे में साफ-साफ बात करूँ, लेकिन मुझमें कभी इतनी हिम्मत नहीं हुई। मुझे डर था कि अगर मैंने उससे कुछ कहा, तो बात और ज़्यादा बिगड़ जाएगी। हो सकता है उसके बाद हम दोनों एक-दूसरे का चेहरा तक न देख पाते। शायद मुझे सब कुछ छोड़कर वापस घर जाना पड़ता।
और अगर मैं घर लौट जाती, तो मेरे मम्मी-पापा तुरंत मेरी शादी के लिए लड़का देखना शुरू कर देते। उस समय मेरी उम्र सत्ताईस साल थी, और सिर्फ यही नौकरी थी जिसकी वजह से उन्होंने अभी तक मेरी शादी नहीं कराई थी। अगर मैं वापस चली जाती, तो शायद मेरी शादी किसी ऐसे आदमी से कर दी जाती जिसे मैं जानती तक नहीं थी।
इन्हीं सब बातों की वजह से मैंने चुप रहना ही ठीक समझा। लेकिन इसके बाद भी वह नज़ारा मेरे दिमाग से एक पल के लिए भी नहीं निकल रहा था। बचपन से लेकर आज तक, गोलू मेरे लिए सिर्फ मेरा छोटा भाई था। वह मुझसे बहुत प्यार करता था और हमेशा मेरा ख्याल रखता था।
लेकिन जिस दिन मुझे पता चला कि वह मेरी तस्वीरों को देखकर अपना लंड हिलाता है, उसी दिन से मेरे मन में एक सवाल बार-बार आने लगा। क्या उसने मुझे कभी सच में अपनी बहन की तरह देखा भी था? या फिर बचपन से आज तक जब भी वह मेरे पास आया, उसके मन में हमेशा ऐसी ही गंदी और घिनौनी बातें चलती रहती थीं?
इसलिए मैंने गोलू से थोड़ा दूरी बनानी शुरू कर दी। जब भी वह पहले की तरह मुझसे देर तक बातें करने की कोशिश करता, तो मैं काम या थकान का बहाना बनाकर बात टाल देती। मैं बस सुबह उसके साथ नाश्ता करती और फिर ऑफिस चली जाती। ऑफिस में भी मैं उससे ज़्यादा बात नहीं करती थी।
वह भी अपने काम में काफ़ी व्यस्त रहता था, इसलिए शुरू-शुरू में उसे मेरे इस बदले हुए व्यवहार का ज़्यादा एहसास नहीं हुआ। हालाँकि मैं अभी भी उसी अपार्टमेंट में उसके साथ रह रही थी, लेकिन मेरे मन में बार-बार यही बात आती थी कि मुझे यह घर छोड़ देना चाहिए। लेकिन अगर मैं ऐसा करती, तो मुझे अपने मम्मी-पापा को बताना पड़ता कि मैं अचानक घर क्यों बदल रही हूँ।
उन्हें पूरा भरोसा था कि उनके दोनों बच्चे साथ में सुरक्षित हैं। मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं उन्हें यह सच बता सकूँ कि उनका बेटा अपनी ही बहन की तस्वीरों को देखकर अपना लंड हिलाता है। मैं उन्हें कभी यह सब नहीं बता सकती थी। इन सब हालातों में मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
इसलिए मैंने चुप रहकर उसी अपार्टमेंट में रहने का फैसला किया और जैसे-तैसे समय बिताने की कोशिश करने लगी। इसी तरह देखते-देखते तीन महीने और निकल गए। अब मैं किसी तरह उस घर में रहने की आदत डाल चुकी थी। फिर एक दिन, जब मैं सुबह ऑफिस जाने के लिए निकल ही रही थी, तभी अचानक दरवाज़े की घंटी बजी।
मैंने दरवाज़ा खोला, तो सामने मकान मालिक खड़े थे। उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी। उन्होंने बताया कि आज रात उनके बेटे का जन्मदिन है, इसलिए उन्होंने अपने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी है। फिर उन्होंने कहा कि मैं और गोलू, दोनों रात को पार्टी में ज़रूर आएँ। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
शाम को जब मैं और गोलू ऑफिस से वापस आए, तो हमारे सामने एक नई दिक्कत आ गई। मकान मालिक हमें पति-पत्नी समझता था। अगर हम उसकी पार्टी में नहीं जाते, तो उसे हम पर शक हो जाता। इसलिए हम उसे सीधे मना भी नहीं कर सकते थे। रात करीब आठ बजे हम दोनों पार्टी में जाने के लिए तैयार हो गए।
मैंने खुद को एक शादीशुदा औरत की तरह तैयार किया था। मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी। गले में मंगलसूत्र था और माँग में सिंदूर भी लगाया हुआ था। वहीं गोलू ने अपनी नॉर्मल फॉर्मल ड्रेस पहन ली थी। जब हम दोनों मकान मालिक के घर के दरवाज़े तक पहुँचे, तभी अचानक गोलू ने अपना हाथ मेरी साड़ी से दिख रही कमर पर रख दिया।
उसके ऐसा करते ही मैं हल्का सा चौंक गई और धीरे से बोली, “गोलू, ये क्या कर रहे हो?” वो धीरे से बोला, “कुछ नहीं दीदी… बस लोगों को सब असली लगे। अगर हम पति-पत्नी बनकर आए हैं, तो थोड़ा-बहुत वैसे ही रहना पड़ेगा, तभी किसी को शक नहीं होगा।” हम दोनों घर के अंदर गए। पूरा घर लोगों से भरा हुआ था।
हमने सबसे पहले मकान मालिक के बेटे को जन्मदिन का गिफ्ट दिया। वहाँ ज़्यादातर लोग हमारी ही बिल्डिंग में रहने वाले थे, और हमारे अलावा वहाँ मौजूद हर जोड़ा पति-पत्नी था। उसके बाद मकान मालिक ने हमें अपने पड़ोसियों और बाकी मेहमानों से मिलवाया। हमने सबको यही बताया कि हमारी शादी को अभी सिर्फ़ छह महीने हुए हैं और हम इस बिल्डिंग में नए आए हैं।
लोग हमसे हमारी लव स्टोरी और शादी के बारे में पूछने लगे। हम भी मुस्कुराते हुए एक के बाद एक झूठ बोलते जा रहे थे। कमरे के एक तरफ एक टेबल पर शराब की बोतलें और ग्लास रखे थे। थोड़ी देर बाद लोगों ने ड्रिंक लेना शुरू कर दिया। उन्होंने हमारे हाथ में भी ज़बरदस्ती ग्लास पकड़ा दिए।
वैसे गोलू कभी शराब नहीं पीता था। और मैं भी कॉलेज के दिनों के बाद, जब मैं पुणे में अपने दोस्तों के साथ रहती थी, तब से शराब से दूर ही थी। लेकिन उस दिन सबके बार-बार कहने पर मैंने भी पीना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि मैंने गोलू के ग्लास से भी कुछ घूंट पी लिए।
पार्टी में हर कोई अपनी-अपनी ड्रिंक का मज़ा ले रहा था। पता ही नहीं चला कि मैंने चार से ज़्यादा ग्लास पी लिए। उसके बाद मेरा सिर भारी होने लगा। मुझे हल्का-हल्का चक्कर आने लगा। करीब तीन साल बाद शराब पी थी, इसलिए मेरा शरीर उसे संभाल नहीं पा रहा था।
धीरे-धीरे मेरी आँखों के सामने सब धुंधला होने लगा, और मुझे ऐसा लगने लगा जैसे पूरा कमरा घूम रहा हो। मैंने नशे में गोलू के कान के पास जाकर धीरे से कहा, “गोलू… मुझे लग रहा है कि मुझे उल्टी आने वाली है।” उसने तुरंत मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला, “घबराओ मत दीदी, मेरे साथ आओ।”
मैं उसके साथ चलने लगी, लेकिन नशे की वजह से मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। खुद को संभालने के लिए मैंने दोनों हाथ उसके कंधों पर रख दिए। वो मुझे संभालते हुए सीधे बाथरूम में ले गया। मैं झुककर कमोड के पास गई, लेकिन मेरे लंबे खुले बाल बार-बार चेहरे पर आ रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं उन्हें हटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन नशे में मुझसे कुछ भी ठीक से नहीं हो रहा था। मेरी आँखों के सामने सब धुंधला दिख रहा था और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ। तभी गोलू आगे आया। उसने धीरे से मेरे बाल पीछे कर दिए और उन्हें अपने हाथ में पकड़कर रखा, ताकि वो फिर से चेहरे पर न आएँ।
मैंने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, “थैंक यू, गोलू…” लेकिन मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि मुझे ज़ोर से उल्टी हो गई। नशे और कमजोरी की वजह से मैं अपना सिर भी ठीक से नहीं संभाल पा रही थी। इसी वजह से उल्टी के कुछ छींटे मेरी लाल साड़ी और ब्लाउज पर भी पड़ गए।
उल्टी होने के बाद मेरा पेट पूरी तरह खाली हो गया था। मेरा शरीर इतना ढीला पड़ चुका था कि मुझसे ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। गोलू ने तुरंत नल खोला और हाथों में पानी लेकर मेरा चेहरा धोया। लेकिन मेरा सिर इतना घूम रहा था कि मैं आँखें भी नहीं खोल पा रही थी।
तभी उसने बिना देर किए मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया। जब उसने मुझे उठाया, तो मुझे उसके सीने की धड़कन साफ़ सुनाई दे रही थी। उसने मकान मालिक से जल्दी से माफ़ी माँगी और मुझे लेकर पार्टी से बाहर निकल आया। बाहर आते ही रात की ठंडी हवा मेरे चेहरे से टकराई। “Hot Incest Chudai Kahani”
उस ठंडी हवा से मुझे थोड़ा अच्छा लगा, लेकिन मेरा सिर अभी भी बुरी तरह घूम रहा था। वो मुझे गोद में उठाकर लिफ्ट तक ले गया और सीधे हमारे पाँचवें फ्लोर पर आ गया। फिर उसने फ्लैट का दरवाज़ा खोला और मुझे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। जैसे ही मेरी पीठ मुलायम गद्दे पर लगी, मुझे थोड़ा अच्छा लगा।
लेकिन मेरा पूरा शरीर जैसे जवाब दे चुका था। मुझमें न बोलने की ताकत बची थी, न हिलने की। मैंने बस आँखें बंद कर लीं। थोड़ी देर बाद गोलू मेरे पास आया और धीरे से बोला, “सुनो, आलिया दीदी… क्या आप अपने कपड़े बदल सकती हो? आपकी साड़ी और ब्लाउज पर उल्टी लग गई है।”
उसकी आवाज़ मुझे बहुत दूर से आती हुई लग रही थी। मेरा सिर इतनी तेज़ घूम रहा था कि उसकी बात ठीक से समझ ही नहीं आ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत दूर से मुझसे बात कर रहा हो। मैं कुछ बोलना चाहती थी, लेकिन मुँह से आवाज़ ही नहीं निकल रही थी। मेरा दिमाग बिल्कुल सुन्न पड़ गया था।
मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। मैंने किसी तरह आँखें थोड़ी-सी खोलीं और बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “गोलू… मुझसे नहीं होगा… क्या तुम… मेरे कपड़े बदल सकते हो…?” कुछ पल तक कमरे में पूरा सन्नाटा छाया रहा। फिर उसने बहुत धीरे से कहा, “ठीक है दीदी…” मेरी आँखें अब भी बंद थीं।
नशे की वजह से मैं आधी नींद में थी और ठीक से कुछ सोच भी नहीं पा रही थी। उसके शब्द मेरे कानों तक पहुँचे, लेकिन मेरा दिमाग उनका मतलब समझने की हालत में नहीं था। मैंने बस सोते-सोते हल्का-सा मुस्कुराकर हाँ कर दी। मुझे बस इतना महसूस हो रहा था कि वह मेरे बिल्कुल पास खड़ा था।
कुछ पल तक उसने कोई हरकत नहीं की। शायद वह खुद को संभाल रहा था। फिर उसने धीरे से मेरी साड़ी का किनारा पकड़ा और बहुत आराम से उसे उतारने लगा। उसके हाथ साफ़ काँप रहे थे। वह जल्दी नहीं कर रहा था। साड़ी की एक-एक परत धीरे-धीरे हटाता जा रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जहाँ साड़ी फँस जाती, वहाँ वह मुझे बहुत संभालकर थोड़ा-सा उठाता और फिर उसे आराम से निकाल देता। उसकी हर हरकत में घबराहट भी थी और हिचक भी। जब साड़ी पूरी तरह उतर गई, तो उसने उसे नीचे ज़मीन पर गिरा दिया। उसके गिरने की हल्की-सी आवाज़ सुनाई दी। “Hot Incest Chudai Kahani”
फिर उसने कुछ पल रुककर मुझे धीरे से बिस्तर पर बैठाया। उसके बाद उसने मेरे ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए। उसके हाथ अब भी पहले की तरह काँप रहे थे। उसकी लंबी और नरम उँगलियाँ जब मेरी पीठ को छू रही थीं, तो उनकी गर्मी मेरी ठंडी पड़ चुकी चमड़ी पर साफ़ महसूस हो रही थी।
कुछ ही देर में उसने मेरा ब्लाउज भी उतार दिया और फिर मुझे वापस बिस्तर पर लिटा दिया। इसके बाद उसने मेरे पेटीकोट की डोरी खोली और उसे धीरे से नीचे खींचकर उतार दिया। अब उस नशे की हालत में मैं अपने ही भाई के सामने सिर्फ़ नीले रंग की ब्रा और पैंटी में थी।
मुझे नहीं पता था कि इस वक्त उसकी नज़रें कहाँ थीं या वह क्या कर रहा था। लेकिन नशे और उस अजीब-सी घबराहट के बीच मुझे अपने दिल की धड़कनें साफ़ सुनाई दे रही थीं। मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि मुझे साफ़ महसूस हो रहा था कि मेरी ब्रा के अंदर मेरे स्तन कैसे थरथरा रहे हैं और हर धड़कन के साथ हल्के-हल्के हिल रहे हैं।
कमरे में अब पहले से भी ज़्यादा सन्नाटा था। उस खामोशी में गोलू की साँसों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी। उसने बहुत धीमी, काँपती हुई और लगभग फुसफुसाते हुए पूछा, “दीदी… क्या… क्या मैं आपकी ब्रा भी हटा दूँ…?” नशे की वजह से मेरा सिर अब भी घूम रहा था।
मुझमें इतनी ताकत नहीं थी कि मैं ठीक से कोई जवाब दे पाती। मैंने बस अपनी भारी पलकों को बंद रखा और हल्की-सी “हूँ…” की आवाज़ निकाली। यही मेरी हामी थी कि वह जो करना चाहता है, कर सकता है। मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न पड़ चुका था, लेकिन दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसकी धड़कनें मुझे अपनी छाती के अंदर साफ़ सुनाई दे रही थीं। “Hot Incest Chudai Kahani”
मेरी हामी मिलते ही गोलू के हाथ और भी ज़्यादा काँपने लगे। उसने धीरे से मेरी ब्रा का पीछे वाला हुक पकड़ा और एक झटके में खोल दिया। हुक खुलने की हल्की-सी आवाज़ पूरे कमरे की खामोशी में साफ़ सुनाई दी। फिर उसने बहुत धीरे-धीरे ब्रा को मेरी बाँहों से सरकाया और पूरी तरह उतार दिया।
जैसे ही ब्रा हटी, मेरे दोनों स्तन पूरी तरह खुल गए। कमरे की हल्की ठंडी हवा सीधे मेरी नंगी त्वचा और स्तनों से आकर लगी। उस ठंडक और अचानक खुले होने के एहसास से मेरे दोनों निपल्स तुरंत सख्त और तन गए। मेरे दोनों स्तन, जो भरे हुए, मुलायम और भारी थे, नशे की हालत में मेरी छाती पर हल्के-हल्के हिल रहे थे।
हल्की रोशनी में उनका आकार और गोरा रंग साफ़ दिखाई दे रहा था। मेरे ये दूध जैसे गोरे स्तन, जिन्हें मैंने आज तक अपनी ज़िंदगी में किसी भी पराए लड़के, दुनिया या किसी की भी बुरी नज़र से हमेशा छिपाकर और संभालकर रखा था, आज मेरे अपने छोटे भाई के सामने पूरी तरह नंगे, बेबस और खुले हुए थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
लेकिन वह इतने पर ही नहीं रुका। वह धीरे-धीरे मेरे दोनों पैरों के बीच में आ गया। उसने झुककर मेरी पैंटी का कोना पकड़ा और बहुत ही धीरे-धीरे उसे नीचे की तरफ खींचते हुए पूरी तरह उतार दिया। उस एक पल में मेरे अंदर शर्म और झिझक का ऐसा समंदर उमड़ पड़ा कि मेरा दिल अंदर तक काँप उठा। “Hot Incest Chudai Kahani”
मैंने हमेशा यही सोचा था कि जिस आदमी से मेरी शादी होगी, जो मेरा पति होगा, वही सबसे पहले मुझे इस रूप में देखेगा। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अपनी ज़िंदगी में मुझे इस तरह देखने वाला पहला इंसान मेरा कोई हमसफ़र या पति नहीं, बल्कि मेरा अपना छोटा भाई गोलू होगा। आज मेरा भाई मेरी उस जगह को अपनी खुली आँखों से देख रहा था।
इस पूरी बात को और भी ज़्यादा शर्मनाक बनाने वाली बात यह थी कि मैंने अपने उस नाज़ुक हिस्से की शेविंग नहीं की थी। बेंगलुरु आने के बाद ऑफिस के काम, कमरे की भागदौड़ और लगातार थकान की वजह से मुझे अपने शरीर की इस बात पर ध्यान देने का बिल्कुल भी समय नहीं मिला था।
मेरा वह नाज़ुक हिस्सा बिल्कुल किसी खिलते हुए फूल की तरह छोटा और नाज़ुक था, जिसके दोनों कोमल होंठ हल्के से खुले हुए थे और बीच में एक छोटा सा छेद था। बिना शेव की हुई मेरी वह बालों वाली चुत, जिसे मैंने आज तक किसी दूसरे लड़के के सामने तो क्या, खुद भी कभी आईने में इस तरह खुलकर नहीं देखा था, आज मेरे अपने छोटे भाई की नंगी और भूखी नज़रों के सामने बिल्कुल बेबस पड़ी थी।
नशे की धुंध और सिर के भारीपन के बावजूद, मेरे दिमाग में बार-बार यही बात घूम रही थी कि मेरा भाई मेरी उस बिना शेव की हुई, बालों से भरी और पूरी तरह नंगी चुत को एकटक देख रहा है, और मेरा पूरा बदन इस अजीब सी शर्म और घबराहट से अंदर ही अंदर सुलग रहा था। “Hot Incest Chudai Kahani”
कमरे की हल्की और ठंडी हवा सीधे मेरी नंगी त्वचा से लग रही थी। मैं उस बिस्तर पर अपनी आँखें बंद किए बस चुपचाप पड़ी थी, क्योंकि उन्हें खोलने की भी ताकत मेरे शरीर में नहीं बची थी। लेकिन इसके बावजूद मुझे साफ़ महसूस हो रहा था कि मेरे भाई की नज़रें लगातार मेरी नंगी छाती और मेरी खुली हुई चुत पर टिकी हुई थीं।
नशे के इस गहरे असर में मेरे दिमाग में तरह-तरह के ख्याल आने लगे थे। मैं सोचने लगी कि अब आगे क्या होगा? मेरा दिमाग इस हालत में बिल्कुल नहीं था कि मैं ठीक से कुछ सोच पाती। सब कुछ धुंधला और उलझा-उलझा सा लग रहा था। शायद शराब के नशे की वजह से ही मेरे अंदर के सारे डर और रोक-टोक धीरे-धीरे खत्म हो रहे थे।
मेरे मन में यह ख्याल आने लगा कि अगर वह मेरे स्तनों को छुएगा, तो मैं उसे बिल्कुल नहीं रोकूँगी। हम दोनों अपने मम्मी-पापा से इतनी दूर, इस अनजान शहर में बिल्कुल अकेले रह रहे थे। उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी और न ही मेरी ज़िंदगी में कोई बॉयफ्रेंड था।
मेरे मन में यह भी आया कि अगर वह अपना लंड मेरी चुत से लगाएगा या उसके अंदर डालेगा, तो इसमें भी क्या बुराई है? हम दोनों अब पूरी तरह से बडे थे। मेरे होश का एक छोटा सा हिस्सा बार-बार मुझे समझाने की कोशिश कर रहा था कि मैं जो सोच रही हूँ, वह बिल्कुल गलत है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
लेकिन दिमाग का वही हिस्सा, जो सही और गलत का फर्क समझाता है, शराब के नशे की वजह से उस समय जैसे काम करना ही बंद कर चुका था और ठीक से सोच नहीं पा रहा था। मैं उस बिस्तर पर बेबस पड़ी बस यही सोचती रही कि अगर उस वक्त गोलू अपनी शरीर की चाहत पूरी करने के लिए अपना लंड मेरी चुत के अंदर डालना भी चाहेगा, तो भी मैं उसे बिल्कुल नहीं रोकूँगी। उस पल मेरे मन में उसे रोकने का ख्याल तक नहीं आ रहा था। For next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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