Threesome Chudai Family Porn
मैं अलका, तेईस साल की, अभी ग्रेजुएशन खत्म करके घर पर ही थी। दीदी प्रियंका, अट्ठाईस की, शादी के बाद भी जीजा राजेश के साथ यहीं रहती थीं। जीजा राजेश तीस का था, एक अच्छी कंपनी में मैनेजर, बाहर से देखने में स्मार्ट और हैंडसम। पापा-मां गांव में थे, इसलिए घर में हम तीनों ही रहते थे। Threesome Chudai Family Porn
एक छोटा-सा परिवार लगता था बाहर से, लेकिन अंदर कुछ ऐसा चल रहा था जो किसी की नजरों से छिपा हुआ था। शुरुआत ठीक-ठीक याद नहीं आती, लेकिन पहली बार जब मैंने कुछ महसूस किया, वो एक जनवरी की बहुत ठंडी रात थी। बाहर कोहरा इतना घना था कि खिड़की खोलते ही ठंड हड्डियों तक उतर जाती थी।
मैं अपने कमरे में लेटी थी, लेकिन नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी। कमरे में सिर्फ हल्की पीली नाइट लैंप जल रही थी, जिसकी रोशनी से दीवारों पर लंबी-लंबी छायाएं बन रही थीं। दीदी और जीजा का कमरा ठीक बगल में था। दीवार पतली थी, इसलिए हर छोटी-मोटी आवाज साफ सुनाई दे रही थी।
अचानक दीदी की भारी-भारी सांसें मेरे कानों में पड़ीं, गहरी और अनियमित। फिर जीजा की रूखी, गहरी आवाज गूंजी, “प्रियंका, आज बहुत जोर से… तेरी चूत कितनी गीली है यार।” मेरे कान तड़प उठे। दीदी की लंबी, कांपती सिसकारी निकली, “हां राजेश… आह… गहरा करो… पूरी तरह फाड़ दो।”
मैंने तकिए से सिर उठाया और कान दीवार से सटा दिए। दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि लग रहा था उसकी आवाज बाहर तक पहुंच जाएगी। बिस्तर की चादर सरसराने की आवाज आई, मांस के टकराने की थप-थपाहट शुरू हुई। दीदी की दबी हुई चीखें साफ सुनाई दे रही थीं।
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मेरी चूत में अचानक गर्म, गहरी सनसनी दौड़ गई। मैंने जांघें कसकर दबाईं, लेकिन वो चाहत और तेज हो गई। शरीर कांप रहा था। मेरी उंगलियां खुद-ब-खुद पजामे के अंदर सरक गईं। चूत की ऊपरी सतह पर हल्के से उंगली फेरी तो पूरी तरह गीली और चिपचिपी महसूस हुई। उंगली थोड़ी अंदर डाली तो एक गहरी आह गले से निकल गई। मैंने होंठ काट लिए ताकि आवाज बाहर न जाए। अगले दिन सुबह सब कुछ सामान्य था।
ब्रेकफास्ट टेबल पर दीदी ने पराठा परोसते हुए पूछा, “अलका, रात को नींद आई?”
मैंने झूठ बोलते हुए कहा, “हां दी, अच्छी नींद आई।”
मेरी आवाज हल्की कांप रही थी। जीजा कॉफी का कप उठाकर मेरी तरफ देख रहा था। उसकी आंखों में एक गहरी, जानकार चमक थी, जैसे वो सब जानता हो। उसकी नजर मेरे होंठों पर ठहरी, फिर गर्दन पर, फिर मेरे सीने पर रुकी। मैं नजरें झुका ली। शाम को मैं सोफे पर लेटी टीवी देख रही थी। हल्की रोशनी थी, एसी की ठंडी हवा चल रही थी। जीजा मेरे पास आकर बैठ गया। उसकी मोटी, मजबूत जांघ मेरी जांघ से सट गई। गर्मी तुरंत महसूस हुई।
उसने धीरे से कहा, “अलका, तू आजकल बहुत खूबसूरत लग रही है।”
मैं शरमा गई, गाल लाल हो गए।
दीदी किचन से आई और बोली, “क्यों राजेश, छोटी को तंग कर रहे हो?”
जीजा ने हंसकर कहा, “नहीं प्रियंका, बस कह रहा हूं कि अब वो बड़ी हो गई है।”
दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई।
फिर उसने पूछा, “अलका, तुझे कभी बॉयफ्रेंड की याद आती है?”
मैंने सिर हिलाकर ना में कहा।
दीदी ने जीजा की तरफ देखा, फिर मेरी आंखों में देखते हुए बोली, “हम दोनों सोच रहे थे कि तुझे भी थोड़ा मजा आना चाहिए।”
मेरा दिल जोर से धड़क गया।
मैंने हकलाते हुए पूछा, “दी… क्या मतलब?”
दीदी मेरे पास आकर सोफे पर बैठ गई। उसका हाथ धीरे से मेरे कंधे पर रखा। उंगलियां हल्के से मेरी गर्दन को सहला रही थीं।
उसने कहा, “मतलब हम रात को जो करते हैं… तू भी शामिल हो सकती है।”
मैं चौंक गई।
मेरे मुंह से निकला, “दी… ये गलत है न?”
जीजा ने शांत लेकिन गहरी आवाज में कहा, “गलत-ठीक तो समाज तय करता है, लेकिन हम तीनों खुश रहेंगे तो क्या बुरा है?”
दीदी ने मेरे गाल पर हाथ फेरा। उंगलियां मेरे होंठों के पास आईं।
उसने बहुत प्यार से कहा, “अलका, डर मत… हम तुझे कभी दुख नहीं देंगे।”
रात हो चुकी थी। हम तीनों लिविंग रूम में बैठे थे, हल्की-हल्की बातें हो रही थीं। दीदी ने अचानक उठकर लाइट्स डिम कर दीं। कमरे में सिर्फ एक छोटी-सी टेबल लैंप जल रही थी, जिसकी पीली रोशनी से सब कुछ नरम और रहस्यमयी लग रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीदी मेरी तरफ मुड़ीं और धीरे से बोलीं, “अलका, आज हमारे साथ सो।”
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मैं कुछ नहीं बोली, बस चुपचाप उठी और उनके साथ बेडरूम की तरफ चली गई। बेड पर हम तीनों लेट गए। बीच में मैं थी, दीदी बाईं तरफ और जीजा दाईं तरफ। कंबल के नीचे गर्माहट फैल गई, तीनों शरीरों की मिली-जुली गर्मी से कमरा और गरम हो उठा।
जीजा का हाथ धीरे-धीरे मेरी कमर पर सरक आया। उंगलियां मेरी त्वचा पर हल्के से फिसल रही थीं। मैं सिहर उठी, पूरा शरीर कांप गया। जीजा ने मेरे कान के पास मुंह लगाकर फुसफुसाया, “शश… बस चुप।” दीदी मेरी तरफ मुंह करके लेटी थीं। उन्होंने धीरे से मेरे गाल को छुआ, फिर होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
वो किस इतना गहरा और लंबा था कि मेरी सांस रुक गई। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई, मेरी जीभ से लिपट गई। मैंने आंखें बंद कर लीं, पूरी तरह डूब गई उसमें। जीजा ने मेरी टी-शर्ट को धीरे-धीरे ऊपर सरकाया। मेरे स्तन बाहर आ गए, छोटे लेकिन पूरी तरह सख्त और उभरे हुए। उसने दोनों हाथों से उन्हें थामा, हल्के से दबाया।
“अलका… कितने नरम हैं ये,” उसने गहरी सांस के साथ कहा।
मैंने एक लंबी सिसकारी ली, शरीर में करंट-सा दौड़ गया। दीदी धीरे-धीरे नीचे सरकीं। उन्होंने मेरी शॉर्ट्स को खींचकर उतार दिया। मेरी चूत पहले से ही पूरी तरह गीली और सूजी हुई थी। दीदी ने अपनी जीभ मेरी चूत की ऊपरी सतह पर फेरी।
मैं चीख पड़ी, “आह दीदी… ओह!”
उनकी जीभ गर्म और नम थी, हर हरकत से मेरी कमर उठ रही थी। जीजा मेरे होंठ फिर से चूम रहा था, एक हाथ से मेरे स्तन दबा रहा था। उसकी उंगलियां मेरे निप्पल को हल्के से मरोड़ रही थीं। धीरे-धीरे जीजा ने अपना लंड बाहर निकाला। वो मोटा, लंबा और पूरी तरह सख्त था, नसें उभरी हुईं, सिरा चमक रहा था।
दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराकर कहा, “अलका, इसे छू।”
मैंने कांपते हाथ से हाथ बढ़ाया। उसका लंड गर्म था, धड़क रहा था जैसे जिंदा हो। जीजा ने मेरी उंगलियां उसके लंड पर फेराईं, ऊपर-नीचे सरकाईं।
“अच्छा लग रहा है?” उसने पूछा।
मैंने बस हां में सिर हिलाया, गला सूख रहा था।
दीदी ने फिर कहा, “अब मुंह में ले।”
मैंने झुककर अपना मुंह उसके लंड के पास ले जाया। सिरा मुंह में लिया, स्वाद नमकीन और थोड़ा कड़वा था लेकिन बहुत उत्तेजक। मैंने जीभ से चाटा, धीरे-धीरे अंदर लिया।
जीजा सिसकारा, “अलका… तेरी जीभ कितनी गरम है।”
उसका हाथ मेरे सिर पर था, हल्के से दबा रहा था। दीदी मेरी चूत चाट रही थीं। उनकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, क्लिटोरिस पर घूम रही थी। मैं पूरी तरह कांप रही थी, शरीर में आग लगी हुई थी। सांसें तेज हो गईं, हर स्पर्श से नई लहर उठ रही थी। फिर जीजा ने मुझे धीरे से पीठ के बल लिटा दिया।
मेरा सिर तकिए पर था, शरीर कंबल के नीचे पूरी तरह नंगा और गर्म। दीदी ने मेरी दोनों जांघें फैलाईं, उंगलियां मेरी त्वचा पर दबाव डालते हुए। जांघें खुल गईं, हवा मेरी गीली चूत पर लगी। जीजा मेरे ऊपर झुका, उसका मोटा लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा। सुपारा मेरी चूत की दरार पर ऊपर-नीचे फिसल रहा था, गीलेपन से चिकना होकर। हर रगड़ से क्लिटोरिस पर करंट दौड़ रहा था। “Threesome Chudai Family Porn”
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“अलका… तैयार है?” उसने गहरी आवाज में पूछा।
मैंने आंखें बंद कर लीं, सांसें तेज हो गईं। वो धीरे से आगे बढ़ा, सुपारा मेरी चूत के मुंह पर दबाव डालने लगा। फिर एक झटके में अंदर घुस गया। दर्द हुआ, तेज और जलन भरा, लेकिन साथ में एक मीठा, गहरा मजा भी।
मैंने सिसकारी ली, “आह जीजा… धीरे।”
वो रुक गया, मुझे सांस लेने का मौका दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा, हर धक्के के साथ और गहरा जाता। दीदी मेरे बाईं तरफ लेटी थीं, उन्होंने मेरे एक स्तन को मुंह में लिया। जीभ से निप्पल को चाट रही थीं, हल्के से काट रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं चीख रही थी, “दीदी… जीजा… और जोर से।”
जीजा तेज हो गया, धक्के तेज और गहरे।
“अलका… तेरी चूत कितनी टाइट और गीली है… आह,” वो गुर्राया।
दीदी ने अपना हाथ नीचे सरकाया, मेरी क्लिट पर उंगली फेरी। उंगलियां तेजी से घूम रही थीं, दबाव बढ़ा रही थीं। मैं झड़ गई, पूरा शरीर कांप उठा। चूत सिकुड़ गई, जीजा के लंड को कसकर पकड़ लिया। जीजा ने और जोर से धक्के मारे, फिर मेरे अंदर झड़ गया।
गर्म-गर्म वीर्य की धार अंदर महसूस हुई, भरपूर और गहराई तक। मैं सांस ले रही थी, शरीर अभी भी कंपकंपा रहा था। लेकिन रात खत्म नहीं हुई। दीदी ने जीजा को पलटा, अब मेरी बारी। जीजा ने दीदी को पीठ के बल लिटाया। वो ऊपर चढ़ गया, लंड फिर से सख्त हो चुका था। दीदी की मोटी गांड बिस्तर पर हिल रही थी हर धक्के के साथ। जीजा तेज धक्के मार रहा था, कमर आगे-पीछे हो रही थी।
“प्रियंका… तेरी चूत आज और ज्यादा गरम है,” वो बोला।
दीदी चीख रही थीं, “राजेश… जोर से… अलका को दिखा कि कैसे चोदते हैं।”
मैं बगल में लेटी सब देख रही थी। मेरा हाथ खुद-ब-खुद चूत पर चला गया। उंगलियां गीली चूत पर फेरने लगीं, क्लिट को सहलाने लगीं।
दीदी ने मुझे देखा और बुलाया, “अलका… मेरी चूत चाट।”
मैंने झुककर अपना मुंह उनकी चूत के पास ले जाया। दीदी की चूत जीजा के लंड से चिपकी हुई थी, गीली और गरम। मैंने जीभ लगाई, चाटने लगी। जीभ क्लिट पर घूम रही थी, जीजा के लंड के साथ मिलकर। जीजा दीदी को जोर-जोर से चोद रहा था, मैं चाट रही थी। दीदी का शरीर कांप उठा, वो झड़ गईं। “Threesome Chudai Family Porn”
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“आह… दोनों… बहुत अच्छा,” वो चीखीं।
फिर हम तीनों एक-दूसरे से चिपककर लेट गए। शरीरों की गर्मी कंबल के नीचे और बढ़ गई थी। जीजा का लंड मेरी जांघ से छू रहा था, फिर से सख्त और गरम हो चुका था।
दीदी ने मेरी तरफ देखा, मुस्कुराई और बोलीं, “अलका, अब तेरी गांड ट्राई करें।”
मैं डर गई, दिल जोर से धड़कने लगा।
“दी… दर्द होगा न?” मैंने कांपती आवाज में पूछा।
जीजा ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और धीरे से कहा, “धीरे-धीरे करेंगे, डर मत।”
दीदी ने बेडसाइड टेबल से ऑयल की बोतल उठाई। उन्होंने अपनी उंगलियों पर ठंडा-ठंडा ऑयल लगाया। फिर मेरी गांड के बीच में उंगली सरकाई, हल्के से दबाव डाला। मैं सिहर उठी, पूरा शरीर कांप गया।
“जीजा… आह,” मैंने सिसकारी ली।
जीजा ने पहले अपनी एक उंगली धीरे से अंदर डाली। ऑयल की वजह से फिसलन थी, लेकिन फिर भी टाइट महसूस हो रहा था। वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, मुझे आदत डालते हुए। फिर उसने अपना मोटा लंड मेरी गांड पर रखा। सुपारा दबाव डाल रहा था।
धीरे से धक्का दिया, सिरा अंदर घुसा। तेज दर्द हुआ, जैसे फट रहा हो। मैंने दांत भींच लिए। लेकिन जीजा रुका नहीं, बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा। धीरे-धीरे दर्द कम हुआ, जगह पर एक अजीब सा भराव और मजा आने लगा।
“जीजा… अब अच्छा लग रहा है,” मैंने फुसफुसाकर कहा।
दीदी ने अपना हाथ मेरी चूत पर रखा। दो उंगलियां अंदर डाल दीं, तेजी से अंदर-बाहर करने लगीं। जीजा मेरी गांड चोद रहा था, धक्के अब गहरे और नियमित हो गए थे।
मैं चीख रही थी, “आह जीजा… दीदी… और।”
शरीर में आग लगी हुई थी। हम तीनों साथ में झड़ गए। जीजा ने मेरी गांड के अंदर गर्म वीर्य छोड़ दिया। दीदी की उंगलियां मेरी चूत को कसकर पकड़े हुए थीं। उस रात के बाद हर रात यही होता। कभी जीजा मुझे चोदता, दीदी मेरी चूत चाटती। कभी दीदी को चोदता, मैं जीजा का लंड मुंह में लेकर चूसती। कभी दोनों बहनों को साथ में लेता।
एक रात जीजा ने हमें दोनों को एक-दूसरे के ऊपर लिटाया। मैं ऊपर थी, दीदी नीचे। दीदी की चूत मेरे मुंह में थी, मेरी चूत दीदी के मुंह में। जीजा बारी-बारी से हम दोनों को चोदता। पहले दीदी की चूत में गहरा धक्का, फिर मेरी चूत में। सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। “Threesome Chudai Family Porn”
“राजेश… चोदो… हम दोनों को फाड़ दो,” दीदी चीखीं।
हम झड़ते रहे, बार-बार, एक-दूसरे के शरीर में खोकर। भावनाएं गहरी हो गईं।
दीदी कहतीं, “अलका, तू हमारी जान है अब।”
जीजा कहता, “हम तीनों बिना एक-दूसरे के अधूरे हैं।”
लेकिन डर भी था। अगर किसी को पता चल गया तो परिवार, समाज, सब बर्बाद। फिर भी हम रुक नहीं पाए। हर रात वो आग जलती। जीजा का मोटा लंड मेरी टाइट चूत में। दीदी की जीभ मेरी गांड पर। मेरी उंगलियां दीदी की चूत में। हम तीनों एक-दूसरे में पूरी तरह खो जाते।
एक रात बाहर तेज बारिश हो रही थी। खिड़कियों पर पानी की बूंदें जोर-जोर से टकरा रही थीं। अचानक बिजली चली गई, कमरा अंधेरे में डूब गया। सिर्फ एक मोमबत्ती जल रही थी, जिसकी लौ हवा में कांप रही थी। पीली रोशनी हमारे चेहरों पर पड़ रही थी, छायाएं दीवारों पर नाच रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जीजा ने हमें दोनों को देखा और मुस्कुराकर कहा, “आज कुछ स्पेशल।”
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उसने हमारे हाथ पकड़े, हमें बेड पर लिटाया। फिर स्कार्फ निकालकर हमारे दोनों हाथों को सिर के ऊपर बांध दिया। कसकर बंधे हुए, हम हिल नहीं पा रही थीं। जीजा धीरे-धीरे हमारे ऊपर झुका। पहले दीदी के होंठ चूमे, गहरा और लंबा किस। फिर मेरे होंठों पर आया, जीभ मेरे मुंह में घुस गई। “Threesome Chudai Family Porn”
उसकी जीभ मेरी गर्दन पर सरकी, कानों को चाटा। फिर नीचे आकर स्तनों पर जीभ फेरी, निप्पल को मुंह में लेकर चूसा। दीदी और मैं एक-दूसरे को देखकर सिहर रही थीं। हमारी सांसें तेज हो गईं, आंखें बंद हो गईं। जीजा ने पहले दीदी की जांघें फैलाईं। उसका मोटा लंड उनकी चूत पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर डाला।
दीदी चीखीं, “आह राजेश… जोर से।”
वो तेज धक्के मारने लगा, बिस्तर हिल रहा था। फिर मेरी बारी आई। जीजा ने मेरी चूत में लंड घुसाया, गहराई तक। मैं चीख रही थी, “जीजा… और जोर से… हमारी चूत फाड़ दो।” वो तेज-तेज धक्के मारता रहा, हर धक्के से शरीर कांप उठता। दीदी और मैं दोनों झड़ गईं, चूत सिकुड़ गई, कांप रही थीं।
फिर जीजा ने पहले दीदी के अंदर झड़ा, गर्म वीर्य की धार। फिर मेरे अंदर, भरपूर और गरम। हम तीनों सांसें लेते हुए लेटे रहे। समय बीतता गया। हमारा रिश्ता सिर्फ शारीरिक नहीं रहा। प्यार था, गहरा और सच्चा। विश्वास था, जो हर स्पर्श में बढ़ता जाता। एक ऐसा बंधन जो शब्दों से परे था। लेकिन अपराध बोध भी था, रातों में सताता। मैं सोचती, ये गलत है, समाज इसे कभी माफ नहीं करेगा।
दीदी कहतीं, “हम खुश हैं, यही काफी है।”
जीजा कहता, “अलका, तू हमारे बिना जी नहीं सकती, हम भी नहीं।”
गुड़गांव की इन ऊंची दीवारों के बीच हमारा गुप्त संसार था। बाहर सब सामान्य दिखता, हंसी-मजाक, रोजमर्रा की जिंदगी। अंदर हम तीनों जलते रहे, चाहत की आग में। स्पर्श की गर्मी में, चूमने की नमी में। और उस अनकहे प्यार में जो शायद कभी खत्म न हो। कभी-कभी सोचती हूं कि ये कितने दिन चलेगा। लेकिन उस पल में हम बस जी रहे थे। तीन शरीर, तीन दिल, एक ही चुदाई के जाल में फंसे हुए।
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