Didi Kunwari Chut Kahani
हेल्लो फ्रेंड्स, आप सभी का एक बार फिर मेरी कहानी में स्वागत है. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आशना दीदी और मेरे राज 2 पढ़ा होगा, जिसमें की मैंने बताया था की मैं और दीदी अब्बू के सिलाई की दुकान पर गए थे, और वहां से आने के टाइम तेज बारिश शुरू हो गई. जिससे हम दोनों पूरी तरह भींग गए और वापस दुकान में आ गए. फिर दीदी ने अब्बू के डर से मुझे अपने कपड़े सुखाने के लिए दिए और मैंने पहली बार अपनी दीदी को पूरा नंगा देखा. अब आगे- Didi Kunwari Chut Kahani
बारिश में जो कुछ हुआ था, उसके बाद आशना दीदी के साथ उसी घर में रहते हुए उन्हें फिर से बिना कपड़ों के देखने का ख्याल मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। जिंदगी में पहली बार मैंने अपनी सगी बहन को इस तरह बिना कपड़ों के देखा था, और वह तस्वीर बार-बार मेरी आँखों के सामने आ जाती थी।
मैं बार-बार उसी बारे में सोचता था और उनके शरीर को फिर से देखने की चाहत होती थी। मुझे अच्छे से पता था कि वह मेरी सगी बहन हैं और अपनी ही बहन को इस तरह गलत नजर से देखना या उन्हें बिना कपड़ों के देखने की इच्छा रखना गलत है। लेकिन दो सालों तक मैं अपने घर से बहुत दूर एक ऐसे बोर्डिंग कॉलेज में रहा था, जहाँ कई महीनों तक किसी लड़की को देखने का मौका तक नहीं मिलता था।
वहाँ की अकेली और बोरिंग जिंदगी से वापर आकर जब मैंने अपनी खूबसूरत आशना दीदी को उस हालत में देखा, तो मेरे दिमाग में बस यही चलता रहा कि शायद मुझे उस खूबसूरत पल को एक बार फिर देखने का मौका मिलना चाहिए। चाहे मैं कितनी भी कोशिश करूँ, मेरा दिमाग उस एक पल को भूल नहीं पा रहा था।
आशना दीदी के वे बड़े-बड़े और भारी स्तन, बिना कपड़ों के उनकी वह कसी हुई गोरी त्वचा, और उनके वे हल्के गुलाबी रंग के कड़े निप्पल मेरी आँखों के आगे से हटते ही नहीं थे। लेकिन उन सबसे बढ़कर, जो चीज़ मेरे दिल और दिमाग पर पूरी तरह छा गई थी, वह थी उनकी चुत का वह खूबसूरत नजारा।
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उनकी चिकनी जांघों के बीच की वह बनावट, वह गीलापन और उसकी हर एक बारीक लाइन आज भी मेरे दिमाग में ऐसी बसी हुई थी कि उसे याद करते ही मेरी साँसें तेज हो जाती थीं। वह नजारा इतना खूबसूरत और नशीला था कि उसे चाहकर भी भुला पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो गया था।
मेरे दिमाग में अब बस एक ही जुनून सवार हो गया था। मैं किसी भी तरह आशना दीदी की उस चुत को अपनी इन आँखों से दोबारा देखना चाहता था। मेरी उंगलियाँ उस मुलायम हिस्से को छूने के लिए बेचैन हो रही थीं, और मेरा दिल चाहता था कि मैं अपनी जीभ से चाटकर उस गीलेपन को महसूस करूँ।
अगर मुझे मौका मिल जाए, तो मैं अपनी सगी बहन की उस चुत के अंदर अपना कड़ा हुआ लंड डालकर उसे पूरी तरह से भर देना चाहता था। मैं अच्छी तरह जानता था कि यह सब सोचना बहुत बड़ा पाप है। लेकिन अब मैं आशना दीदी को अपनी बड़ी बहन की तरह देखना बंद कर चुका था।
मेरे अंदर की हवस और चाहत इतनी बढ़ गई थी कि अब रिश्ते की कोई परवाह नहीं रह गई थी। मैं बस उन्हें अपनी बाँहों में भरकर उनके साथ जिस्मानी रिश्ता बनाना चाहता था, चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। फिर एक दिन मुझसे रहा नहीं गया।
क्योंकि रात में जब घर के सभी लोग गहरी नींद में सो चुके थे, तो मैं धीरे-धीरे अपने कमरे से निकला और सीधे आशना दीदी के कमरे के दरवाजे तक पहुँच गया। मैंने बहुत धीरे से कुंडी घुमाई और बिना कोई आवाज किए दरवाजा खोलकर अंदर चला गया। बिस्तर पर लेटी हुई दीदी को देखकर मेरी साँस वहीं रुक गई।
उन्होंने सोने के लिए टी-शर्ट और नीचे काले रंग की शॉर्ट्स पहन रखी थी। वह गहरी नींद में करवट लेकर सो रही थीं और करवट लेने की वजह से उनकी शॉर्ट्स धीरे-धीरे ऊपर खिसक रही थी। जिससे उनकी गोरी और चिकनी जांघों का ऊपर वाला हिस्सा पूरी तरह खुल गया था। वही जांघें, जिनके बीच की जगह मेरे मन में हवस पैदा कर रही थी।
वह बहुत आराम से धीरे-धीरे और गहरी साँसें ले रही थीं। हर साँस के साथ उनके भारी और भरे हुए स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। उन्होंने टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए उनके दोनों बड़े और भारी स्तन बिना किसी सहारे के थोड़े नीचे की तरफ लटके हुए थे। उनके कड़े और नुकीले निप्पल टी-शर्ट के पतले कपड़े के नीचे साफ दिखाई दे रहे थे।
टी-शर्ट उनके शरीर पर काफी कसी हुई लग रही थी, इसलिए उनके स्तनों का आकार और निप्पलों का उभार साफ दिख रहा था। यह सब देखकर मेरा पूरा शरीर जैसे एक पल के लिए सुन्न पड़ गया। मैं धीरे-धीरे चलकर उनके बिस्तर के पास गया और बिल्कुल करीब बैठ गया। मेरी आँखें उनके सीने पर ही टिकी हुई थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जब भी वह लंबी और गहरी साँस ले रही थीं, उनके भारी स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं अच्छी तरह जानता था कि वह मेरी सगी बहन हैं और उन्हें इस तरह देखना बहुत गलत है, लेकिन उस पल मेरे दिमाग से भाई-बहन वाला रिश्ता जैसे गायब हो गया था। मेरे लिए वह अब मेरी दीदी नहीं, बल्कि सिर्फ एक ऐसी खूबसूरत लड़की बन गई थीं, जिसके खूबसूरत शरीर को पाने के लिए मैं किसी भी हद तक जाने को तैयार था, चाहे इसके बाद कुछ भी क्यों न हो जाए।
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मैं कांपते हाथों से उनके बिस्तर के पास बैठा और धीरे से अपनी उंगलियाँ उनकी शॉर्ट्स की डोरी पर रख दीं। मैं बहुत धीरे-धीरे उस डोरी को ढीला करने लगा। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि मुझे लग रहा था कि शायद उनकी नींद खुल जाएगी। अगर वह जाग गईं तो मैं क्या करूँगा, यही सोचकर मेरे हाथ कांप रहे थे।
इसलिए मैं एक-एक इंच बहुत ध्यान से आगे बढ़ रहा था। जब आखिरकार वह डोरी पूरी तरह खुल गई और उनकी कमर के पास शॉर्ट्स का कपड़ा ढीला हो गया, तो मैंने दोनों तरफ से शॉर्ट्स के किनारे अपनी उंगलियों से पकड़ लिए। इसके बाद मैंने बहुत धीरे से, बिना कोई आवाज किए, शॉर्ट्स को नीचे खींचना शुरू कर दिया।
मैं पूरा ध्यान रख रहा था कि मेरी किसी भी हरकत से उनकी गहरी नींद न टूटे। धीरे-धीरे शॉर्ट्स उनकी जांघों से नीचे खिसकने लगी। जब शॉर्ट्स धीरे-धीरे नीचे खिसकते हुए आखिरकार दीदी के घुटनों तक आ गई, तो उनकी पैंटी पूरी तरह मेरी आँखों के सामने दिखाई देने लगी।
वह हल्के गुलाबी रंग की एक बहुत कसी हुई पैंटी थी, जिसने उनके नीचे वाले हिस्से को अच्छी तरह ढक रखा था। जैसे ही शॉर्ट्स पूरी तरह नीचे हुई, हवा में एक बहुत हल्की और नशीली खुशबू फैल गई। वह किसी परफ्यूम की खुशबू नहीं थी, बल्कि उनके शरीर के उस खास हिस्से से आने वाली अपनी खुशबू थी।
वह खुशबू ऐसी लग रही थी, जैसे हवा में बहुत सारे गुलाब एक साथ महक रहे हों। पसीने से भीगी मेरी उंगलियाँ अब बुरी तरह कांप रही थीं, और मेरी पैंट के अंदर मेरा कड़ा हुआ लंड फटने को बेचैन था। लेकिन उस समय रुकने का सवाल ही नहीं था। मैंने अपनी उंगलियों से गुलाबी पैंटी का किनारा मजबूती से पकड़ा और उसे धीरे-धीरे नीचे खींचने लगा।
जैसे ही मैंने आशना दीदी की पैंटी नीचे की, उनका नीचे वाला हिस्सा मेरी आँखों के सामने आ गया। वह मेरी सगी बहन की चुत थी, लेकिन मेरे अंदर जरा भी शर्म या डर नहीं था, क्योंकि वह नजारा इतना खूबसूरत था कि मेरी नजरें वहाँ से हट ही नहीं रही थीं। उनकी दूध जैसी गोरी जांघों के बीच खुली हुई वह चुत मुझे खिले हुए गुलाब जैसी लग रही थी।
उनकी चुत के दोनों मोटे और गुलाबी होंठ हल्के से खुले हुए थे और अंदर गीली और चमकती हुई परत साफ दिखाई दे रही थी। आशना दीदी के चुत के ठीक ऊपर वह छोटा सा दाने जैसा हिस्सा थोड़ा उठा हुआ था और दीदी की हर गहरी साँस के साथ हल्का-हल्का कांप रहा था।
उस खुले हुए हिस्से से आ रही गर्म और अपनी सी महक मेरे दिमाग पर पूरी तरह छा गई थी। मेरा दिल कर रहा था कि बिना एक पल गँवाए अपनी जीभ उस गीली चुत पर रख दूँ और उसे अच्छी तरह चाट डालूँ। मैंने अपनी उंगलियों से धीरे से उनकी गीली चुत को छुआ।
मेरी उंगलियों को उनका वह हिस्सा बहुत मुलायम लगा और मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ गई। जिंदगी में यह पहली बार था जब मैंने अपनी सगी बहन की चुत को इस तरह छुआ था। अंदर से एक अजीब सा एहसास भी हो रहा था, क्योंकि बचपन से लेकर आज तक मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी आशना दीदी के इतने करीब आऊंगा और उनकी इस निजी जगह को इस तरह छू पाऊंगा।
लेकिन वह खुशी और सुकून ज्यादा देर तक नहीं रहा। जैसे ही मेरी उंगलियों ने उनकी चुत को छुआ, दीदी ने अचानक अपनी आँखें खोल दीं और घबराकर बोलीं, “यह क्या कर रहे हो गोलू…?” मेरे मुँह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। मैं बस वहीं चुप खड़ा रह गया। उन्होंने तुरंत घबराकर खुद को चादर से ढक लिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनकी आँखों में आँसू आ गए थे और रुंधी हुई आवाज में उन्होंने कहा, “गोलू, मैं तुम्हारी बहन हूँ… फिर तुम सोते हुए मेरे साथ यह सब क्यों कर रहे हो?” मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उन्हें क्या जवाब दूँ। मेरे पास कहने के लिए कोई सफाई नहीं थी। मैं बिना एक शब्द बोले वहाँ से भाग गया और सीधे अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर औंधे मुँह गिर पड़ा। “Didi Kunwari Chut Kahani”
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मेरे अंदर एक अजीब सा डर बैठ गया था, क्योंकि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी चुत छूते समय वह अचानक जाग जाएंगी और मुझे रंगे हाथों पकड़ लेंगी। जैसे ही मैं अपने कमरे में लेटा, मेरा दिमाग बस यही सोच रहा था कि कल सुबह क्या होगा। अगर अब्बू को इस बात का पता चल गया, तो वह मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे, जान से मार देंगे।
इसी डर और घबराहट की वजह से मैं अगली सुबह सूरज निकलने से बहुत पहले ही उठ गया, जबकि घर में बाकी सभी लोग सो रहे थे। मैं चुपचाप जाकर हॉल में बैठ गया, क्योंकि मुझे पता था कि आशना दीदी रोज सुबह सबसे पहले उठती हैं और उठते ही सबसे पहले वॉशरूम जाती हैं।
कुछ ही मिनट बाद आशना दीदी अपने कमरे से निकलकर हॉल में आ गईं। सुबह-सुबह मुझे वहाँ इस तरह बैठा देखकर उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई देने लगा। उन्होंने मेरी तरफ देखना तक ठीक नहीं समझा और मुँह दूसरी तरफ करके सीधे वॉशरूम की ओर जाने लगीं। घबराहट की वजह से मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
मैंने तुरंत उठकर उनका रास्ता रोक लिया और उनके सामने हाथ जोड़कर बिना कुछ बोले उनसे माफी माँगने लगा। लेकिन गुस्से में कांपती हुई दीदी ने मुझे बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया और मेरा हाथ झटकते हुए जोर से चिल्लाने लगीं। वह इस बात से बहुत गुस्से में थीं कि मैंने उनके सोते समय उनकी मर्जी के बिना उन्हें छुआ था।
मेरे पास अपनी इस हरकत के लिए कोई जवाब या बहाना नहीं था। मेरी आँखों में आँसू थे और मैं बुरी तरह कांपते हुए उनसे बस यही कह रहा था कि वह इस बात के बारे में घर में किसी को कुछ न बताएँ। वह बिना कुछ बोले सीधे वॉशरूम के अंदर चली गईं और दरवाज़ा ज़ोर से बंद कर लिया।
उस वक्त मेरा दिल बैठ गया था, क्योंकि मुझे पूरा यकीन था कि अब वह अब्बू-अम्मी को सब कुछ बता देंगी। लेकिन अजीब बात यह थी कि उन्होंने यह गंदी बात घर में किसी को भी नहीं बताई। इससे मुझे बहुत राहत मिली, लेकिन आशना दीदी ने मुझसे पूरी तरह बात करना बंद कर दिया। “Didi Kunwari Chut Kahani”
उन्होंने मेरी तरफ देखना तक छोड़ दिया था और ऐसा बर्ताव करने लगीं जैसे मैं इस दुनिया में हूँ ही नहीं। मैं उनके गुस्से को पूरी तरह समझ सकता था, क्योंकि वह मेरी अपनी सगी बहन थीं और जब वह गहरी नींद में सो रही थीं, तब मैंने उनकी चुत को छुआ था। ऐसी हालत में कोई भी बहन अपने भाई से बात करना बंद कर देती।
लेकिन जब दीदी ने मुझसे बात करना छोड़ दिया, तो मुझे अंदर ही अंदर बहुत बुरा और अकेला महसूस होने लगा। वह घर में इकलौती ऐसी इंसान थीं जो मेरी सबसे अच्छी दोस्त जैसी थीं और मेरा सबसे ज्यादा ख्याल रखती थीं। मैंने उन्हें मनाने और अपनी इस बड़ी गलती के लिए माफी मांगने की जाने कितनी कोशिशें कीं, लेकिन मेरी गलती इतनी बड़ी थी कि उनका गुस्सा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था और वह मुझे माफ करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं।
मैं उनके इस बर्ताव को अंदर तक महसूस कर सकता था, लेकिन इसके बावजूद मन ही मन मैं उनका शुक्रगुजार था कि उन्होंने मेरी उस शर्मनाक हरकत को अपने तक ही रखा और घर में किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगने दी। देखते ही देखते उस बात को हुए पाँच महीने गुजर गए।
अम्मी और अब्बू के सामने वह खुद को संभालकर रखती थीं और मुझसे सिर्फ उतनी ही बात करती थीं, जितनी जरूरी होती थी, ताकि उन्हें किसी भी तरह का शक न हो। बाहर से देखने पर सब कुछ आम लगता था और अम्मी-अब्बू को यही लगता था कि भाई-बहन के बीच सब ठीक चल रहा है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
लेकिन इस दिखावे के पीछे मैं अच्छी तरह जानता था कि हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं थे और हमारे बीच का वह पुराना प्यार और बेफिक्र अपनापन हमेशा के लिए खत्म हो चुका था। मैं रोज किसी ऐसे करीश्मे की उम्मीद करता था जिससे दीदी मुझे माफ कर दें, लेकिन पाँच महीने बीत जाने के बाद भी हालात वैसे ही बने रहे और कुछ नहीं बदला। “Didi Kunwari Chut Kahani”
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फिर एक दिन शाम के वक्त वह अचानक मेरे कमरे में चली आईं। उस हादसे के बाद यह पहली बार था जब वह किसी काम या किसी वजह के बिना मेरे कमरे में आई थीं। उन्होंने बिल्कुल सीधे और रूखे तरीके से मुझसे कहा, “सुनो गोलू, कल मेरी एक दोस्त की शादी है… और अगर तुम किसी तरह अब्बू को मनाकर मुझे वहाँ जाने की इजाज़त दिला दो, तो मैं तुम्हें माफ कर दूंगी।”
मुझे लगा कि आशना दीदी का गुस्सा शांत कराने और उन्हें फिर से अपने करीब लाने का यह इकलौता और आखिरी मौका है। लेकिन असली मुश्किल यह थी कि उनकी वह दोस्त दूसरे मज़हब से थी, और अब्बू इस बात के सख्त खिलाफ थे कि दीदी किसी दूसरे मज़हब के शादी में जाएँ।
लेकिन दीदी उस शादी में किसी भी हालत में जाना चाहती थी, क्योंकि वह दोस्त बचपन से लेकर कॉलेज के दिनों तक उनकी सबसे पक्की सहेली रही थी। हालांकि अब्बा के इन नियमों और सख्त स्वभाव को देखते हुए मैं अच्छी तरह जानता था कि यह काम लगभग नामुमकिन था।
इसके बावजूद मैंने दीदी की शर्त तुरंत मान ली, क्योंकि मैं किसी भी तरह उनके साथ अपना रिश्ता ठीक करना चाहता था। दिल में एक अजीब सा डर लिए मैं हिम्मत करके अब्बा के कमरे में गया और बहुत सोच-समझकर उन्हें मनाने की कोशिश करने लगा। मैंने उन्हें समझाने की पूरी कोशिश की कि दीदी की उस सहेली से बहुत पुरानी दोस्ती है और उन्हें सिर्फ एक शाम के लिए जाने की इजाज़त दे दें। “Didi Kunwari Chut Kahani”
लेकिन काफी देर तक बहस और मिन्नतें करने के बाद भी अब्बा का फैसला वही रहा, उन्होंने साफ मना कर दिया। वह जवाब ऐसा था जिसे मैं बिल्कुल नहीं सुनना चाहता था। जब मैंने जाकर यह बुरी खबर आशना दीदी को सुनाई, तो उनका चेहरा उतर गया और वह अंदर से टूट गईं।
उनकी आँखों में आँसू आ गए और वह फूट-फूटकर रोने वाली हालत में पहुँच गईं, क्योंकि वह लड़की उनकी बचपन की सबसे करीबी दोस्त थी। दोनों ने हर सुख-दुःख में साथ वक्त बिताया था और एक-दूसरे के साथ पूरी जिंदगी साथ रहने की कसमें खाई थीं, जब तक कि अब्बा ने रोक-टोक लगाकर दीदी का कॉलेज जाना और घर से बाहर निकलना बंद नहीं कर दिया था।
वह बुरी तरह से रो रही थीं और मैं उनके सामने चुपचाप बैठा हुआ था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उनके इन आँसुओं को कैसे रोकूँ और उन्हें कैसे दिलासा दूँ। तभी रोते-रोते उन्होंने अपने आँसू पोंछे, सीधे मेरी आँखों में देखा और भरी हुई आवाज़ में कहा, “गोलू… मुझे हर हाल में अपनी दोस्त की शादी में जाना है। अगर तुम किसी भी तरह से मुझे वहाँ जाने का रास्ता निकाल देते हो, तो मैं तुम्हारी वो हर ख्वाहिश पूरी कर दूँगी जो तुम चाहते हो…”
मैंने हैरानी से उनका चेहरा देखा और पूछा, “कौन सी ख्वाहिश, दीदी…?” उन्होंने एक पल के लिए रुककर सीधे मेरी आँखों में देखा और धीरे से बोलीं, “अगर तुम चाहो… तो तुम मेरी चुत को दोबारा छू सकते हो… और इस बार मैं तुम्हें बिल्कुल नहीं रोकूँगी।” मैं अपनी जगह पर सुन्न होकर रह गया, क्योंकि आशना दीदी के मुँह से ऐसी बात पहली बार निकली थी। “Didi Kunwari Chut Kahani”
यह सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सी खुशी और सिहरन दौड़ गई थी, लेकिन साथ ही मुझे यह भी लगा कि वह यह सब सिर्फ इसलिए कह रही हैं क्योंकि वह इस वक्त बहुत ज्यादा भावुक और कमजोर थीं। मैंने किसी तरह खुद को संभाला और उन्हें समझा-बुझाकर शांत किया, जिसके बाद वह अपने कमरे में सोने चली गईं।
उस रात मुझे यही लगता रहा कि दीदी ने वह बात सिर्फ जज़्बात में आकर कही थी। लेकिन अगली सुबह, जब घर में कोई आसपास नहीं था और हम दोनों चुपचाप नाश्ता कर रहे थे, तो वह झुककर मेरे करीब आईं और मेरे कान में फुसफुसाते हुए बोलीं, “गोलू… अगर तुम मेरी चुत को सच में छूना चाहते हो, तो उसके लिए कुछ ऐसा करो कि मैं उस शादी में जा सकूँ।”
उस रात से पहले तक मेरी बस यही एक चाहत थी कि आशना दीदी मुझे माफ कर दें और हमारे बीच की कड़वाहट खत्म हो जाए, ताकि हम पहले की तरह आम हो सकें। लेकिन जब उन्होंने खुद मुझे वो चौंकाने वाला ऑफर दिया, तो मेरे अंदर का वह दबा हुआ लालच और दीवानगी फिर से जाग उठी।
अब मेरे लिए सिर्फ माफी पाना ही काफी नहीं था, बल्कि मैं हर हाल में उनकी उस ख्वाहिश को पूरा करना चाहता था, चाहे इसके लिए मुझे हर मुमकिन कोशिश क्यों न करनी पड़े। मेरे दिल और आँखों के सामने उस रात की यादें किसी फिल्म की तरह चल रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं चाहकर भी उस भयानक रात के बाद से उनकी उस खूबसूरत महक, उनकी गुलाबी चुत के उन मुलायम होंठों और उसके बीच की उस बारीक सी भीगी हुई लकीर को एक पल के लिए भी अपने दिमाग से नहीं निकाल पाया था। और इस बार सबसे बड़ी बात यह थी कि मुझे चोरी-छिपे या डरते हुए नहीं, बल्कि उनकी अपनी मर्जी से उन्हें दोबारा छूने का मौका मिलने वाला था। “Didi Kunwari Chut Kahani”
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यही सब सोचते हुए मेरे सीने में एक अजीब सी हलचल और बेचैनी बढ़ गई, और मेरा दिमाग तेजी से इसी सोच में लग गया कि किसी भी तरह अब्बू के सख्त पहरे और रोक-टोक को चकमा देकर दीदी को उनकी दोस्त की शादी में भेजने का पक्का रास्ता निकाला जाए।
मैंने हिम्मत की और उनके बिल्कुल करीब झुककर धीमी आवाज़ में कहा, “दीदी… इस बार मैं सिर्फ आपकी चुत को छूना नहीं चाहता… मेरा दिल उससे कहीं ज्यादा कुछ करने के लिए बेचैन है। मैं आपकी चुत को अपनी ज़बान से चाटना चाहता हूँ।” मेरी यह बात सुनकर वह एक पल के लिए चौंक गईं और सीधे मेरी आँखों में देखने लगीं।
उनकी उन गहरी आँखों में थोड़ी हैरानी जरूर थी। उन्होंने कुछ सेकेंड तक चुप रहकर मुझे देखा और फिर एक गहरी साँस लेते हुए मेरे कान में फुसफुसाया, “ठीक है गोलू… अगर तुम मुझे मेरी दोस्त की शादी में जाने का रास्ता दिला देते हो और मैं वहाँ चली जाती हूँ, तो मैं तुमसे वादा करती हूँ… शादी के बाद तुम जितनी देर चाहो, मेरी चुत को अपनी ज़बान से चाट सकते हो।” For next part tell me golutales07@gmail.com
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Reena says
Mere bhai or mera jeth bhi mujhe chodte hai jeth ka to kafi bada hai meri chut bacha hone ke baad bhi pura nahi le pati