Desi Slut Threesome Sex
नमस्कार दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग नेटवर्क मार्केटिंग वाली सेक्सी लड़की की चुदाई 1 पढ़ा होगा, जिसमे आपने जाना होगा की कैसे सचिन ने कामिनी को सूरत में होटल में अपना रखैल बना लिया था. सूरत से लौटने के बाद कामिनी के अंदर की झिझक पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। Desi Slut Threesome Sex
अब उसके पास सचिन से मिलने का सबसे बड़ा बहाना था- उनकी नई दुकान। कस्बे में दुकान खुल गई और उसमें वही सब सामान सजाया गया जो वे सूरत से लाए थे: छोटे थोंग्स, जालीदार ब्रा और पारदर्शी नाइटियाँ। दुकान के पीछे एक छोटा सा केबिन बनाया गया था जिसमें एक गद्दा बिछा रहता था।
ऊपर से वह दुकान एक गारमेंट्स शॉप थी, लेकिन अंदर वह सचिन और कामिनी की हवस का अड्डा बन चुकी थी। अब कामिनी घर से तैयार होकर निकलती, टाइट जींस और फिटिंग वाली टी-शर्ट में वह गजब ढाती थी। दुकान पर पहुँचते ही सचिन शटर गिरा देता और कामिनी को केबिन के अंदर ले जाता।
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वहां वह अक्सर वही कपड़े पहनती जो वे सूरत से लाए थे। एक दोपहर, जब बाहर तेज धूप थी, कामिनी ने दुकान में आई एक नई जालीदार चड्डी (Thong) पहनी और उसके ऊपर बस अपनी जींस चढ़ा ली। सचिन ने जैसे ही उसकी जींस नीचे सरकाई और उस जालीदार कपड़े के पीछे से उसकी गोरी और भारी गांड देखी, वह पागल हो गया।
उसने उसे केबिन की दीवार से सटाया और पीछे से ही अपनी पैंट खोलकर अपना सख्त लंड उसकी चूत में झोंक दिया। केबिन की पतली दीवारों के पीछे से आती “पट्ट-पट्ट” की आवाज़ें और कामिनी की दबी हुई सिसकियाँ अब उनकी रोज की कहानी बन गई थीं।
सचिन अक्सर अपने उस दोस्त को भी वहां बुला लेता था जिसके बारे में केशव को शक था। वे दोनों मिलकर कामिनी के साथ वह सब करते जो उसने कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था। कामिनी अब एक नहीं, बल्कि दो-दो मर्दों के बीच पिसने का मजा लेने लगी थी।
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एक उसका मुँह भरता, तो दूसरा पीछे से उसकी चूत फाड़ रहा होता। उसे अब अपनी मर्यादा की कोई परवाह नहीं थी; उसे बस उस ‘गंदे खेल’ की लत लग चुकी थी। शाम को जब वह वापस लौटती, तो उसके बदन पर उन मर्दों के हाथों के निशान होते और चेहरे पर एक अजीब सी चमक।
वह केशव से फोन पर बात करते वक्त भी सचिन के लंड की मोटाई को याद करती रहती। दुकान का बिजनेस तो बस दिखाने के लिए था, असल में वहां कामिनी के जिस्म की हर रोज नीलामी हो रही थी। सचिन उसे अपनी जागीर समझने लगा था और कामिनी भी उसकी हर गंदी फरमाइश को पूरी करने में अपनी खुशी ढूंढने लगी थी।
वह ‘टीचर’ अब पूरी तरह एक ‘हवसी रखैल’ बन चुकी थी, जिसका वजूद बस उन मर्दों की प्यास बुझाने तक सीमित रह गया था। दुकान के उस केबिन में अब बेशर्मी की सारी हदें पार होने लगी थीं। सचिन को अब अकेले कामिनी को चोदने में वो मजा नहीं आ रहा था, जो उसे दूसरों के सामने अपनी ‘मर्दानगी’ दिखाने में आता था।
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एक शाम, जब सूरज ढल चुका था और बाजार की भीड़ कम होने लगी थी, सचिन ने अपने उसी दोस्त को दुकान पर बुला लिया जिसका जिक्र उसने पहले भी किया था। कामिनी उस वक्त केबिन के अंदर अपनी टाइट जींस उतारकर सचिन की दी हुई एक छोटी सी सिल्क की जालीदार चड्डी पहनकर आइने में खुद को निहार रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अचानक केबिन का पर्दा हटा और सचिन के साथ उसका दोस्त अंदर दाखिल हुआ। कामिनी पहले तो घबराई और अपने बदन को ढंकने की कोशिश की, पर सचिन ने उसके बाल पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा और कहा— “आज ये भी देखेगा कि मेरी पार्टनर कितनी हॉट है।”
कामिनी की शर्म धीरे-धीरे हवस में बदलने लगी। सचिन के दोस्त की नजरें कामिनी के उभरे हुए बूब्स और चौड़ी जांघों पर भूखे भेड़िए की तरह जमी थीं। सचिन ने कामिनी को हुक्म दिया कि वह उसके दोस्त के सामने अपनी चड्डी उतार दे। कामिनी ने कांपते हाथों से अपनी आखिरी शर्म भी उतार फेंकी और नग्न खड़ी हो गई।
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सचिन ने उसे गद्दे पर घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चूत में अपना लंड झोंक दिया। जैसे ही “पट्ट-पट्ट” की आवाजें शुरू हुईं, सचिन के दोस्त ने सामने आकर अपना लंड कामिनी के मुँह में ठूँस दिया। कामिनी की हालत अब किसी चक्की में पिसने जैसी थी।
नीचे से सचिन के जबरदस्त धक्के उसकी चूत को फाड़ रहे थे और ऊपर से उसका दोस्त उसके मुँह की गहराई नाप रहा था। वह चाहकर भी चीख नहीं पा रही थी, उसकी आँखों से आँसू गिर रहे थे पर जिस्म मजे के चरम पर था। कुछ देर बाद सचिन ने जगह बदली और अपने दोस्त को पीछे से चोदने का मौका दिया।
सचिन का दोस्त सामर्थ से भी ज्यादा दरिंदा निकला। उसने कामिनी की कमर पर अपने नाखूनों के निशान छोड़ दिए और उसे इतनी बुरी तरह चोदा कि कामिनी पसीने से नहा गई। वह बार-बार ‘ना’ कहती, पर उन दोनों के लिए वह बस एक ‘मजे की मशीन’ बन चुकी थी।
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कमरे में सिर्फ हाफने की और मांस से मांस टकराने की गंदी आवाजें गूँज रही थीं। अंत में, जब दोनों का चरम सीमा पर पहुँचने का वक्त आया, उन्होंने कामिनी को सीधा लिटाया। सचिन ने उसके चेहरे पर और उसके दोस्त ने उसके भारी बूब्स पर अपना सारा गाढ़ा वीर्य निकाल दिया। कामिनी उस गंदगी से सनी हुई बिस्तर पर बेजान पड़ी रही।
उन दोनों मर्दों ने अपनी पैंट चढ़ाई और हंसते हुए बाहर निकल गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो। कामिनी ने अपने बदन को उसी जालीदार नाइटी से पोंछा और फिर से अपनी जींस पहन ली। उस रात जब वह केशव के घर पहुँची, तो उसके जिस्म का कोना-कोना उन दो मर्दों की गंध से महक रहा था, पर वह चुपचाप अंधेरे में अपनी उस ‘दोहरी जिंदगी’ के मजे को याद कर मुस्कुरा रही थी।
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