Bua Bhatija Sex Kahani
खुदा जब खुशी देता है तो घर में ही खुदाई के लिए खुदाई का औजार मुहैया करा देता है।कहीं भटकना, अटकना और तरसना नहीं पड़ता।मैं खुशनसीब हूं कि मुझे सब घर बैठे मिल गया है। बर्छी, भाला और मूसल खुदाई के अलग अलग औजार हैं और इनसे खुदाई का भी अलग अलग मजा है। पहली खुदाई में बर्छी का दर्द झेल चुकी आपकी सबीना उसकी कहानी बाद मे बताएगी। Bua Bhatija Sex Kahani
आज सबीना के देखरेख में बर्छी, भाला और मूसल के मिलन से तैयार औजार से खुदाई की कहानी से रु-ब-रु होईए। आपकी सबीना 38 साल की कुंवारी भाभी है। चौंकिए मत कुंवारी इसलिए है कि अबतक निकाह नहीं हुआ और भाभी इसलिए है कि जि़ना(अवैध घपाघप) बीस साल से चल रहा है।
अब आप ही सोचिए 20 साल से जो घपाघप करा रही हो उसका बदन कैसा होगा? गदराया हुआ भाभीनुमा भरा-पूरा बदन दोनों जोबन तरबूजे के तरह और बड़े-बड़े कुल्हे देखते ही आपका लौड़ा अकड़ने लगेगा इसकी गारंटी है। अब मैं कुंवारी भाभी बनी अपने बदन को ऐसे ढंक कर रखती हूं ताकि किसी को पता न चले लेकिन जो तीन-तीन लंडों का जूस पीती हो, बीस साल से रोज रोज घपाघप करवाती हो उसका बदन तो फैलना ही है।
खैर! अब छोड़िए इन बातों को।आज मैं अपनी पहली कहानी मे़ घर के नये-नवेले चौथे लंड से घपाघप करवाने की बात करनेवाली हूं। आप सोचते होंगे डायरेक्ट चौथे लंड से घपाघप करवाने की बात कुछ जमी नहीं। आखिर वो तीन लंड कौन से हैं और सबसे बड़ी बात पहला खुशनसीब लंड कौन है जिसे सील तोड़ने का चांस मिला?
इन सवालों का जवाब आगे कहानी में ही बताऊंगी, अभी तो चौथे लंड से चुदाने की कहानी जानिए और मजा लिजिए। जी हां! सीधे मुद्दे पर आती हूं और इस चौथे सील पैक लंड से परिचय कराती हूं। इस लंड को मैं तब से जानती हूं जब यह भाईजान के लंड से निकला था और भाभीजान की बुर को फाड़ते हुए उनकी पेट में चार माह से मौज कर रहा था।
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तभी इसके कारण ही मुझे जबरदस्ती लंड लेने को मजबूर होना पड़ा। इसी के कारण मेरी कच्ची बुर लहूलुहान हो गई और सबीना कुंवारी औरत बन गई।फिर तो मैं घर में मौजूद तीनों लंडों से बीस साल से चुद रही हूं, कभी मन से कभी बेमन से। लेकिन चुदाई कभी रुकी नहीं।
कल रात जिस चौथे लंड से चुदी थी उसे जमीन पर आते ही सबसे पहला दीदार मैंने ही किया था और तभी सोच लिया था कि इसे पहली बार मेरे बुर का ही सैर करना होगा। मैंने बड़े मोहब्बत और शिद्दत के साथ बीस सालों तक इस नए लंड को किसी और बुर के बुरी नजर से बचाये रखा।
मैंने खिला पिलाकर और मालिश करके इतना ताकतवर और मजबूत आकार दिया है कि इसकी अम्मी भी चुदवाने को बेचैन है।लेकिन इसे तैयार मैंने किया था तो पहला हक मेरा ही था इसकी अम्मी भी मान गई। कल रात लंड के इक्सीवें जन्मदिन पर मैं अपनी बुर चोदने की तोहफा दे दी।
लंड के जन्मदिन का केक कटा और फिर मैं अपनी बुर तोहफे में उसे पेश कर दी। वह भी मेरे बुर का पूरी रात सैर किया। आइए! इस लंड का परिचय करा दूं। सोये हुए लंड की लंबाई पांच इंच और मोटाई चार इंच, रंग बिल्कुल काला और खतना किया हुआ गोल नोंकदार टोपा। जब लंड जग जाता है तो सब कुछ डबल हो जाता है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
समझ में तो सबको आ ही गया होगा। बुरवालियों का बुर बुलबुला छोड़ने लगी होगी न! कल एक और रिश्ता नए और नाजायज रिश्ते में तब्दील हो गया। लेकिन लंड और बुर का अपना रिश्ता ज्यों की त्यों बरकरार है। आप सोच रहे होंगे न यह कौन सा रिश्ता है? तो बता ही देती हूं।
यह उसी बाप की औलाद है जिसने मुझे औरत बनाया और कल रात मैंने उसी का बदला लिया उसके बेटे को मर्द बनाकर। इसके बाप ने मेरी कच्ची बुर फाड़ी थी लेकिन कल रात उसके बेटे को पहली बार बीस साल से चुद रही भोंसड़ा ही चोदने को मिला। हिसाब बराबर।
मैं भी कम थोड़े ही हूं। ओहो! बदला लेने के चक्कर में ही असली बात बतना ही भूल गई। दरअसल यह मेरा प्यारा भतीजा सलीम ऊर्फ सल्लू है जो मेरे उसी भाईजान का बेटा है जिसने मुझे औरत बनाया था। हुआ यूं कि तब यही सल्लू भाभीजान के पेट में था भाभीजान ने चुदवाने से मना कर दिया था। दोनों में चुदाई के लिए तकरार होने लगी।
इसी बीच मैं उनकी आवाज सुनकर उनके बेडरुम में पहुंच गई। मुझे देखते ही भाभीजान ने गुस्से में भाईजान से कहा- लो!तेरी बहन आ गई चोद ले इसे। फिर भाभीजान ने मुझे बेड पर ढकेल दिया और मेरी सलवार सरका दी। मेरी नई नवेली कोरी चूत देखते ही भाईजान बेकाबू हो गए और अपना टनटनाया लंड मेरे बूर में घुसेड़ने लगे।
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भाभीजान ने मेरे बुर पर ढेर सा थूक गिरा दिया। मैं जबतक कुछ समझती भाभी ने मेरा मुंह दबा दिया और भाईजान ने अपना पूरा लंड बुर में घुसेड़ दिया। मैं पैर पटकती रह गई लेकिन भाभी और भाईजान तबतक बेरहमी करते रहे जबतक मैं सकून से चुदवाने नहीं लगी।
उसके बाद से तो जो चुदाई का सिलसिला शुरु हुआ फिर अब्बू, बड़े भाईजान और छोटे भाईजान के लिए घर की माल बन गई। कल रात उसी भाईजान के बेटे और अपने भतीजे से चुदती रही। बुआ और भतीजा का मिलन हुआ। बुआ ने अपने भतीजे का सील तोड़ा या यूं कहें चुदाई का पहला पाठ पढ़ाया।
भतीजे से चुदवाने का प्रोग्राम बहुत फहले से ही भाभीजान के साथ मिलकर तैयार हो रहा था। केवल सही वक्त का इंतजार था। आखिरकार भतीजे के इक्कीसवें वर्षगांठ के अवसर पर बुर चुदाई का तोहफा देने का तय हो गया। भाभीजान ने खुशीखुशी सारे इंतजाम पूरे कर दिए। कल रात जब मैं बेडरुम में घुसी तो भौंचक रह गई।
पूरा कमरा इत्र की खूशबू में नहा रहा था। बेड ऐसे सजा हुआ था जैसे सुहागरात का बेड हो। मैं ये सब भौंचका होकर देख ही रही थी कि किसी ने पीछे से आकर मुझे दबोच लिया। मैं कसमसायी तभी एक फुसफुसाहट मेरी कानों में पड़ी-मेरी सौतन अब मेरी बहू बनने जा रही है मुबारक हो। मेरे लख्ते जिगर का खयाल रखना। शबा खैर! भाभीजान फटाफट कमरे से बाहर चली गई।
तभी सल्लू की आवाज आई- बुआ! बुआ! ओ बुआ! आवाज लगाते हुए सल्लू कमरे में आ धमका। -अरे बुआ! ये कमरा तो ऐसे सजाया गया जैसे किसी की सुहागरात हो।
-हां है न।
-किसकी?
-तेरी.
-पर, दुल्हन कहां है?
-तेरे सामने
-क्या आप?
-क्यों, मैं पसंद नही आई?
-लेकिन हमारा रिश्ता?
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-रिश्ता अपनी जगह दुरुस्त है। लंड और बुर का रिश्ता भी आज दुरुस्त करते हैं। दरवाजा बंद कर और शुरु हो जा। आज तेरी बुआ अपनी बुर तुझे तोहफे में दे रही है। जितना चोद सकता है चोद ले।
सल्लू ने दरवाजा लगाया और मैंने अपना बुर्का हटाया। अबतक सल्लू ने मेरा खुला बदन नहीं देखा था। गोरा चिटृटा कसी हुई बड़ी बड़ी चूंचियां, कटावदार बदन, बड़े बड़े कुल्हे…. सल्लू मियां तो लल्लू मिया़ की तरह देखते रह गए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
-सल्लू! ओ सल्लू!
-हहहां बुआ!
-ये सब देखने के लिए नहीं, भोगने के लिए है। चल शुरु हो जा।
मैं टंगरी फैलाकर पलंग पर चित्त होकर पसर गई और सल्लू मियां को बोली- सल्लू मियां! अब शुरु हो जा। अपने बुआ को इतना चूमो, चाटो और मसलो कि बदन धुनी हुई रुई की तरह हो जाए। आज तुझे पूरा मर्द बनना है। अपनी पूरी मर्दानगी का जोर अपनी बुआ पर लगाकर पूरा मर्द बन जा।
बस क्या था! कोरा जवान छोरा मेरे पांव से लेकर सिर तक एक एक अंग को इतना चूमा चाटा मसला कुचला कि बदन सचमुच धुनी हुई रुई की तरह हल्की हो गई। बुर से झर झर झरना झरने लगा, बदन तवे की तरह तप रहा था।बुर लंड का घर्षण खोजने लगी।
मेरे सिसकारियों से कमरा गूंजने लगा। अब एक पल भी बर्दाश्त करना कठिन था। मैं सल्लू के लंड को अपने मुट्ठी में पकड़कर सहलाने लगी। औरत का हाथ लगते ही सल्लू का कुंआरा लंड फुफकारने लगा। मेरे कलाई की तरह मोटा मूसल, काला नाग, लोहे की सरिया जैसा कड़क और बर्छी की नुकीला लंड चोदने के रेडी हो चुका था।
मैंने अपने मुंह में ढेर सा थूक बटोरी और लंड ऊपर गिरा कर पूरे लंड को थूक से गीला कर दी। अबतक ऐसा लंड देखी नहीं थी तो चुदती कहां से। लेकिन कल देखी भी और पूरी रात चुदी भी। -सल्लू! अब चोद डाल अपनी बुआ को और अपनी रंडी बना ले। जल्दी कर साले, डाल लंड अपने बुआ के बुर में और नए रिश्ते की शुरुआत कर। “Bua Bhatija Sex Kahani”
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सल्लू तो खुद बेचैन था।उसका लंड अकड़ रहा था। मैंने अपने कमर के नीचे तकिया सेट कर दिया, कपनी टंगरी अपने हाथों पकड़कर बुर फैला दी। सल्लू बुर देखकर मचल उठा। -सल्लू मियां! एक झटके में पूरा लंड बुर में उतार दो ताकि तेरा सिल टूट जाए, मेरा तो टूटा हुआ है।
असल में मैं ही नए लंड का नए तरह से मजा लेना चाहती थी। मैं लंड देखकर ही समझ गई थी यह मुझे पहली चुदाई का याद दिला देगा। मैं वह अहसास फिर करना चाहती थी। असल में सल्लू का लंड चुदी हुई बुर के लिए ही बना हुआ है, सील पैक वाली तो हफ्ते भर बेड से ही नहीं उठ पाएगी इसकी गारंटी है। खैर! सल्लू मेरे ऊपर आया। लंड को बुर के मुंह पर सेट किया। हमारी आ़खें चार हुई। हम मुसकुराये।
-बस एक झटके अंदर चले जाना सल्लू मियां!
-बिल्कुल, एक झटके में मेरी प्यारी रंडी बुआ!
सल्लू ने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर किया जैसे लांग जंप वाले पीछ हटकर आगे जंप लगाते हैं। सल्लू ने कमर उठाया और “हचाक्” ऊई अम्मा! मर गई! मार डाला रे साला सल्लू! आहह आहह ओह ओह आहह आह ओह ओह उई। उईईईई आहह ओहहह उईईई…. घपाघप , घपाघप , घपाघप, घपाघप …. सल्लू नानस्टाप शुरु हो चुका था। “Bua Bhatija Sex Kahani”
हम जन्नत की सैर पर निकल चुके थे। सल्लू का सील टूटा की नहीं यह तो मुझे पता नहीं चला लेकिन मेरा दुबारा टूटा ऐसा महसूस हुआ। सल्लू दनादन चोदे जा रहा था। कमरे में हमारी सांसे स्पष्ट सुनाई दे रही थी। मीठी मीठी सिसकारी और गरम गरम सांसों के बीच घपाघप की आवाज घचाघच में बदल चुकी थी क्योंकि मैं पहली पानी छोड़ चुकी थी, दुसरी छुटनेवाली थी।
मैंने सल्लू से पोजिशन बदलने कहा और कुतिया बनकर चुदवाने लगी। मैंने फिर पानी छोड़ा और पोजिशन बदला। सल्लू की सांसे बहुत तेज तेज चल रही थी। उसे बेड पर लिटाकर उसके चढकर मैंने चोदना शुरु कर दिया। सचमुच नया लंड बहुत ताकतवर होता है।
मैं लगातार चोदे जा रही थी और लंड बिल्कुल लोहे की सरिया की तरह आधे घंटे से खड़ा था। ऐसा लग रहा था कि बुर में फफोले पड़ ही जाएंगे। मैं चोदती रही और झड़ती रही। लेकिन लंड झड़ने की कौन कहे अकड़ता जा रहा था। थककर मैंने फिर पोजिशन बदल दी। पहली मिशनरी पोजिशन। “Bua Bhatija Sex Kahani”
हम पसीने से लथपथ थे कमरे का एसी भी पसीना पसीना हो रहा था। अब मैं नीचे थी और सल्लू ऊपर -चोद सल्लू! चोद। तेज तेज चोद अपनी बुआ को। और तेज और तेज, शाबाश सल्लू शाबाश। बहुत मजा आ रहा है सल्लू, चोद चोद चोद। -बुआआआआ! आहह आह बुआ आह बुर के अंदर फच् फच् फच् की फिचकारी छूटी और बुर गरम मलाई से भर गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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सल्लू मेरे बदन पर निढाल हो गया। मैं उसका पीठ सहलाती रही। वो जैसे बेहोश हो गया हो। करीब बीस मिनट बाद जैसे उसे होश आया हो तो बोल पड़ा -बहुत मजा आया बुआ! -मुझे भी -यह मजा पहले क्यों नहीं दी?
-तुम्हारी उम्र नहीं हुई थी न! आज तुम मर्द बन गए, अब रोज मजे लेते रहना।
-बहुत अच्छा बुआ! तुम कितनी अच्छी हो। लेकिन क्या मैं पहले मर्द नहीं था?
-नहीं, तुम जवान लड़के थे जिसका लंड कुंवारा था। इस कुंवारे लंड ने जैसे किसी बुर का सैर किया उसका कुंवारापन खत्म और लड़का मर्द बन गया। मर्द बनने का मुबारकबाद!!!
-शुक्रिया बुआ! आपका बुर भी बड़ी मस्त है, मजा ही मजा।
-बस बस ज्यादा मस्का मत मार, बुर जितना मारना हो मारते रहना।
हम दोनों हंस दिए और फिर दुसरी पारी की तैयारी में लग गए। बुआ-भतीजा की चुदाई कहानी कैसी लगी? बताईगा जरुर। आपकी सबीना आपके जवाब का इंतजार करेगी। कुछ गलत हो तो हाथ जोड़कर और बुर खोलकर मुआफी मांगती हूं।
Rohit says
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