Beti Chut Chudai Papa
पंजाब के एक बड़े से फार्महाउस में दीवाली की रौनक जोरों पर थी। चारों तरफ रंग-बिरंगी लाइटें लगी हुई थीं, नीचे आंगन में रिश्तेदार हंसते-बोलते, पटाखे फोड़ते और मिठाइयां बांटते। घर की छत पर हवा ठंडी थी, लेकिन एकनूर का बदन गर्म। वो नाचने वाली लड़की थी, कॉलेज में डांस ग्रुप की स्टार। Beti Chut Chudai Papa
आज उसने लाल लहंगा पहना था, लेकिन अब छत पर अकेले में वो सब उतार चुकी थी। बॉयफ्रेंड पंकज का वीडियो कॉल चल रहा था। फोन प्रोप करके रखा हुआ था, और एकनूर नंगी होकर पटाखों की रोशनी में घूम-घूम कर अपने बदन को दिखा रही थी।
“देख ना पंकज… ये तेरे लिए… मेरी चूचियां कितनी टाइट हो रही हैं तेरे नाम से…” वो धीरे से कह रही थी, उंगलियां अपनी गुलाबी चूत पर फेरते हुए। नीचे से पटाखों की आवाजें आ रही थीं, ऊपर आसमान में आतिशबाजी चमक रही थी। उसका बदन उस रोशनी में चांदी सा चमक रहा था।
तभी छत का दरवाजा खुला। नवनीत सिंह, उसके पापा, ऊपर आए। वो सरदार जी थे, बड़े जमींदार, सफेद कुर्ता-पायजामा पहने, मूंछें तनी हुईं। वो बेटी को नीचे बुलाने आए थे कि सब खाना खा रहे हैं। लेकिन जैसे ही दरवाजा खोला, उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। उनकी २० साल की बेटी पूरी नंगी, फोन पर किसी लड़के से गंदी-गंदी बातें कर रही थी।
“एकनूर!” उनकी आवाज गूंजी।
एकनूर चीखी, फोन गिरा, हाथ से खुद को छिपाने की कोशिश की। लेकिन देर हो चुकी थी। नवनीत ने फोन उठाया, स्क्रीन पर पंकज का चेहरा था जो घबरा कर कॉल काट चुका था।
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“ये क्या हरकत है? तू ये सब कर रही है?” नवनीत की आवाज में गुस्सा था, लेकिन आंखों में कुछ और भी था – एक अजीब सी चमक। वो बरसों से विधुर थे, मां की मौत के बाद सिर्फ खेत और बेटी। एकनूर हमेशा से पापा की लाड़ली थी, लेकिन आज पहली बार वो उसे औरत की नजर से देख रहे थे।
एकनूर रोने लगी, “पापा… सॉरी… प्लीज किसी को मत बताना…”
नवनीत नीचे उतरने वाले थे, लेकिन पटाखे फूटे, जोर की आवाज हुई, और वो रुक गए। छत पर सिर्फ वो दोनों थे। नीचे से हंसी-ठिठोली की आवाजें आ रही थीं। नवनीत पास आए, एकनूर पीछे हटी, लेकिन दीवार से टकर गई।
“तेरी उम्र में मैं भी जवान था… लेकिन ऐसे नहीं…” नवनीत ने कहा, लेकिन उनकी नजर एकनूर की नंगी छातियों पर अटक गई। एकनूर ने देखा – पापा का कुर्ता नीचे तंबू सा बन रहा था।
“पापा… आप…” एकनूर की आवाज कांपी।
नवनीत ने उसका हाथ पकड़ा, “तेरी ये जवानी… किसी हरामी लड़के के लिए बर्बाद कर रही है? वो तुझे कभी समझ नहीं पाएगा।”
एकनूर की सांसें तेज हो गईं। पापा का हाथ गर्म था, मजबूत। वो हमेशा से पापा की ताकत से प्रभावित थी – खेतों में काम करने वाली उन बाहों से। अब वो हाथ उसके कंधे पर था।
“पापा… आप क्या कह रहे हैं?”
नवनीत ने उसे दीवार से सटा दिया। उनका चेहरा पास आया। “मैं कह रहा हूं… अगर कोई तेरे बदन को छुएगा, तो वो मैं हूं।”
एकनूर की आंखें बड़ी हो गईं। लेकिन विरोध नहीं किया। पापा की मूंछें उसके गाल को छू रही थीं। नीचे फिर पटाखे फूटे। नवनीत ने उसका होंठ चूम लिया – पहला किस, गहरा, भूखा। एकनूर के हाथ पापा की छाती पर गए।
“पापा… नीचे सब हैं…” वो फुसफुसाई।
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“पटाखे फूट रहे हैं… कोई सुन नहीं रहा।” नवनीत ने कहा और उसकी चुचियां दबोच लीं। एकनूर की सिसकारी निकल गई। पापा के हाथ रूखे थे, लेकिन स्पर्श में आग थी। वो उसकी गर्दन चूम रहे थे, मूंछें चुभ रही थीं, लेकिन अच्छा लग रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर नवनीत ने फैसला कर लिया। वो पीछे हटे, छत के दरवाजे की ओर गए। एकनूर हैरान देख रही थी। नवनीत ने दरवाजा बंद किया – बाहर से लॉक करके। वो जानते थे कि कोई ऊपर नहीं आएगा, लेकिन सावधानी बरती। अब वो दोनों पूरी तरह अकेले थे, दरवाजा बंद, सिर्फ पटाखों की रोशनी और आवाजें।
वापस आकर नवनीत ने एकनूर को फिर से दीवार से सटाया। “अब कोई रुकावट नहीं… पापा तुझे चोदेंगे… तेरी चूत को अपना बनाएंगे।”
एकनूर के हाथ नीचे गए, पापा के पायजामे के नाड़े खोल दिए। नवनीत का लंड बाहर आया – मोटा, लंबा, सरदारों वाला। एकनूर की उंगलियां उस पर फिरने लगीं।
“पापा… इतना बड़ा… कम से कम ८ इंच का तो होगा… और इतना मोटा…”
“तेरी चूत के लिए ही बना है बेटी… लेगी ना पूरा?” नवनीत ने गंदी बात की, और एकनूर को परापेट की ओर घुमाया। वो दीवार से सट गई, पीठ पापा की ओर। लेकिन नवनीत ने उसे घुमाया – सामने से।
“मुझे तेरी आंखों में देखना है जब मैं तेरी चूत में घुसूं।”
उन्होंने एकनूर की एक टांग उठाई, घुटने से मोड़कर अपनी कमर पर रखी। उनका मोटा सुपारा एकनूर की गीली चूत पर रगड़ने लगा। एकनूर की सांसें रुक रही थीं।
“पापा… धीरे… आपका इतना बड़ा… पंकज का तो सिर्फ ५ इंच का है… वो भी पतला… मैंने कभी इतना मोटा नहीं लिया…”
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नवनीत ने धीरे से दबाव डाला। सुपारा अंदर गया। एकनूर की सिसकारी निकल गई, लेकिन पटाखों में दब गई। वो थोड़ी ढीली थी, लेकिन पापा का मोटापन उसे स्ट्रेच कर रहा था। पापा रुके, उसे चूमा, फिर धीरे-धीरे अंदर बढ़े। आधा लंड अंदर था कि एकनूर की चूत ने उसे जकड़ लिया।
“ओह्ह्ह… पापा… बहुत मोटा है… मेरी चूत फैल रही है… पंकज का लंड तो आसानी से घुस जाता था… लेकिन आपका… आह्ह… फाड़ दोगे मेरी चूत को…”
“बस थोड़ा और… ले ले बेटी… पापा का मोटा लंड ले… तेरी चूत थोड़ी ढीली है, लेकिन पापा उसे टाइट कर देंगे… रोज चोदेंगे… पंकज जैसे हरामी से बेहतर मैं चोदूंगा…” नवनीत ने कमर हिलाई। पूरा लंड अंदर चला गया। एकनूर की आंखें बंद हो गईं। पापा ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। हर धक्के में उनका लंड एकनूर की चूत की दीवारों से रगड़ खा रहा था, उसे फैला रहा था। नीचे से रिश्तेदारों की आवाजें आ रही थीं – कोई गाना गा रहा था।
“पापा… आह्ह… हां… ऐसे ही… आपका लंड मेरी चूत की गहराई तक पहुंच रहा है… पंकज कभी नहीं पहुंचा… वो ५ इंच का पिद्दी सा… दो मिनट में झड़ जाता था… लेकिन आप… ओह्ह… कितना स्टेमिना है… चोदो मुझे जोर से…” एकनूर ने गंदी बातें शुरू कीं, उसकी आंखों में लस्ट था।
नवनीत ने स्पीड बढ़ाई। एकनूर की टांगें उनकी कमर में लिपट गईं। वो स्टैंडिंग मिशनरी में जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। एकनूर की चूचियां उछल रही थीं, पापा की छाती से टकरा रही थीं।
“हां बेटी… बताती जा… पंकज तेरी चूत कैसे चोदता था? पापा को जलन हो रही है… अब ये चूत सिर्फ मेरी… मैं तेरी चूत को रोज मोटे लंड से फैलाऊंगा… तेरी गांड भी चोदूंगा एक दिन… ले धक्के… आह्ह… कितनी गीली है तेरी चूत…” नवनीत ने जवाब दिया, उसकी गांड दबोचते हुए। “Beti Chut Chudai Papa”
“पापा… पंकज हमेशा ऊपर आता था… लेकिन उसका छोटा सा लंड… मैं कभी नहीं झड़ी उसके साथ… लेकिन आप… आह्ह… आपका मोटा लंड मेरी चूत को भर रहा है… मैं तो आपकी रंडी बन जाऊंगी… चोदो जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… हां… ऐसे… पापा का लंड बेस्ट है…” एकनूर चिल्लाई, उसके नाखून पापा की पीठ में गड़ रहे थे।
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नवनीत ने उसकी गांड दबोची, और और तेज चोदा। एकनूर की चूत से चिपचिपी आवाजें आ रही थीं – पच-पच की। उसका रस पापा के लंड पर लिपट रहा था, हर धक्के में बाहर छलक रहा था। अचानक एकनूर की कमर झुक गई – वो झड़ने वाली थी।
“पापा… मैं… आ रही हूं… आपका लंड… ओह्ह… पंकज कभी नहीं दे पाया ऐसा मजा… आह्ह्ह्ह्ह! चोदो… हां…”
उसकी चूत ने पापा के लंड को जोर से जकड़ा, और एक जोर की फुहार छूटी। एकनूर स्क्वर्ट कर रही थी – गरम रस पापा के लंड से होता हुआ नीचे छत पर गिर रहा था। नवनीत ने और तेज धक्के मारे।
“ले बेटी… पापा भी दे रहा है… तेरी चूत में अपना माल… तेरी चूत अब पापा के लंड की आदी हो जाएगी… रोज मांगेगी… आह्ह… ले मेरा रस…”
उनका लंड फूल गया, और गर्म-गर्म वीर्य एकनूर की चूत के अंदर छूटने लगा। इतना कि बाहर बहने लगा। दोनों की सांसें तेज थीं। पापा ने उसे चूमा, लंड अभी भी अंदर था। “Beti Chut Chudai Papa”
फिर पोस्ट-क्लाइमैक्स का वो पल… नवनीत ने धीरे से लंड बाहर निकाला। एकनूर की चूत से उनका वीर्य और उसका रस मिलकर जांघों पर बह रहा था – गीला, चिपचिपा, हल्का नमकीन गंध वाला। एकनूर की टांगें कांप रही थीं, वो परापेट पर टिक कर खड़ी थी, सांसें अभी भी तेज। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
नवनीत ने उसे अपनी बाहों में लिया, उसकी पीठ सहलाते हुए। “शांत हो जा बेटी… पापा हैं ना…” वो फुसफुसाए, उसकी गर्दन पर चूमते हुए। एकनूर की चूत में अभी भी झनझनाहट थी, संवेदनशील हो गई थी – जैसे छूने से फिर से उत्तेजना हो जाए। वो पापा की छाती से चिपक गई, उनके पसीने की गंध सूंघते हुए, जो मर्दाना और मिट्टी वाली थी।
“पापा… ये… इतना अच्छा लगा… लेकिन अब क्या?” एकनूर ने पूछा, उसकी आंखों में आंसू और मुस्कान दोनों।
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नवनीत ने उसकी जांघों से बहते रस को अपने कुर्ते से पोंछा – धीरे-धीरे, प्यार से, जैसे कोई बच्चे को साफ कर रहा हो। “अब ये हमारा राज है… दीवाली हर साल आएगी, और हम ऐसे ही मनाएंगे।” उन्होंने कहा, और एकनूर को फिर से चूमा – इस बार नरम, लंबा किस। एकनूर ने महसूस किया कि पापा का लंड अभी भी आधा खड़ा था, लेकिन वो थक गए थे। दोनों ने हंसकर एक-दूसरे को देखा, वो अजीब सी शर्म और खुशी का मिश्रण।
नीचे फिर पटाखे फूटे। आतिशबाजी का आखिरी राउंड शुरू हो गया था। नवनीत ने दरवाजा खोला, बाहर से लॉक खोलकर। दोनों ने कपड़े ठीक किए – एकनूर का लहंगा थोड़ा सिकुड़ा था, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता। वो नीचे उतरे – जैसे कुछ हुआ ही न हो। लेकिन एकनूर की चाल में एक नई मिठास थी, और नवनीत की आंखों में एक नई चमक। एकनूर की चूत में अभी भी पापा के वीर्य की गर्माहट महसूस हो रही थी, हर कदम पर याद दिलाते हुए। दीवाली की वो रात… सच में यादगार बन गई, और आने वाली रातों का वादा लेकर।
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