Sister Brother Anal Sex
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 16 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि होटल में हमे एक हनीमून कपल की तरह ट्रीट किया गया. होटल के स्पा सेंटर में मैंने गोलू को हैंडजॉब दिया. अब हम रूम के बेड पर गए. अब आगे- Sister Brother Anal Sex
मैं बिस्तर पर गोलू की दोनों जाँघों के बीच घुटनों के बल झुकी हुई थी। हनीमून के लिए सजाई गई लाल गुलाब की पंखुड़ियाँ हमारे बिखरे हुए कपड़ों और शरीर के नीचे दबी हुई थीं। गोलू अभी-अभी गहरी नींद से जागा था और अपनी आँखें झपकाते हुए सीधे मेरा चेहरा देख रहा था।
वह समझने की कोशिश कर रहा था कि आखिर आधी रात को यह सब क्या हो रहा है। उसके चेहरे पर हैरानी और समझ न पाने वाला भाव साफ दिख रहा था, लेकिन उसके शरीर की हालत कुछ और ही बता रही थी। उसका वह लंबा और मोटा लंड अभी भी पूरी तरह कड़क होकर हवा में था और मेरे होंठों से बस कुछ ही इंच दूर था।
उसने एक बार फिर अपनी काँपती और भारी आवाज में मुझे रोकने की कोशिश करते हुए कहा, “आलिया दीदी… प्लीज़ रुक जाओ, यह क्या कर रही हो?” मैंने अपनी नजरें उठाकर सीधे उसकी आँखों में देखा। अब उसकी आँखों से नींद पूरी तरह चली गई थी और उसकी जगह एक अजीब सी घबराहट आ गई थी।
मैंने बिना किसी शर्म या डर के बिल्कुल साफ शब्दों में उससे कहा, “गोलू, कुछ घंटे पहले मैंने अपने हाथों से तुझे खुश किया था.. लेकिन अब मेरी बारी है। मुझे अब तेरा यह लंड अपने मुँह में चाहिए, ताकि मैं भी खुश हो सकूँ और मुझे भी सुकून मिल सके।” उस एक पल के लिए, जब मैंने खुद अपने मुँह से ये बातें कहीं, तो मुझे अपनी ही बात पर यकीन नहीं हुआ।
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अगर कुछ दिन पहले मुझसे किसी ने कहा होता कि एक दिन ऐसा आएगा जब मैं अपने ही भाई गोलू का लंड उसके मना करने के बाद भी अपने मुँह में ले रही होऊँगी, तो मैं उस इंसान की बात पर कभी यकीन नहीं करती। उस वक्त तक मैं उसकी एक सीधी-सादी और भोली-भाली बहन थी, जिसके मन में भाई-बहन के रिश्ते की एक साफ लकीर थी।
लेकिन वक्त और हालात ने मुझे पूरी तरह बदल दिया था। अब मैं एक बिल्कुल अलग तरह की बहन बन चुकी थी। एक ऐसी बहन जिसे अपनी चाहत पूरी करने और खुद को खुश करने के लिए अब अपने भाई के उसी लंड की जरूरत थी, जिसे समाज कभी सही नहीं मान सकता था।
मैंने बिना एक पल गंवाए अपना मुँह पूरा खोला और आगे झुकते हुए उसका वह कड़क लंड अपने दोनों होंठों के बीच ले लिया। मेरी लार से वह पहले ही पूरी तरह गीला हो चुका था, लेकिन जब वह मेरे गर्म मुँह के अंदर गया, तो उसका आकार और उसकी गर्मी मुझे और ज्यादा महसूस होने लगी।
मेरे मुँह के अंदर उसका वह लंबा और मोटा लंड इतना बड़ा लग रहा था कि मेरा गला तक खिंच गया था। उसके उस कड़क लंड को अपने मुँह के अंदर महसूस करना किसी नशे जैसा था, और वह एहसास इतना अच्छा और जबरदस्त था कि मेरा पूरा शरीर सिहर उठा। मेरे मुँह के अंदर जाते ही उसका वह कड़क लंड और ज्यादा हिलने लगा।
मैंने अपनी जीभ को उसके चारों तरफ घुमाना शुरू कर दिया, जिससे मेरे मुँह की गर्मी उसे और ज्यादा महसूस होने लगी। कमरे की पूरी खामोशी में मेरे गले से निकलने वाली हल्की साँसें और उसकी हर हरकत के बीच हमारे रिश्ते की सारी हदें जैसे पार हो चुकी थीं। गोलू ने अपने हाथों को कसकर बिस्तर की चादर पर रख लिया।
उसकी उंगलियों ने हमारे आसपास बिखरी हुई लाल गुलाब की पंखुड़ियों को दबा दिया। उसकी आँखें आधी बंद थीं और उसके मुँह से एक धीमी सी आह निकल गई। जिस झिझक और रोकने की कोशिश के साथ उसने मुझे पहले रोका था, वह अब उसकी तेज साँसों के बीच कहीं खो गई थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरी इस हरकत ने उसे पूरी तरह हिला दिया था, और वह धीरे-धीरे मेरे सामने खुद को रोकना छोड़ता जा रहा था। मैंने अपने सिर को आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया, जिससे उसकी पूरी लंबाई मेरे मुँह के अंदर आगे-पीछे होने लगी। मेरे इस तरह बिना रुके चूसने से उसका वह कड़क लंड मेरे मुँह के अंदर ही और ज्यादा बड़ा और सख्त होने लगा।
कई बार जब मैं उसे पूरा अंदर तक लेने के लिए अपना मुँह पूरा खोलकर उसे अपने गले के पास ले जाती थी, तो मुझे साँस लेने में दिक्कत होने लगती थी और थोड़ा सा उल्टी जैसा लगता था। लेकिन मैंने एक पल के लिए भी पीछे हटने का नहीं सोचा। भले ही मेरा गला सिकुड़ रहा था और मेरी आँखें थोड़ी गीली हो रही थीं, लेकिन उस अजीब सी परेशानी के बीच अपने सगे भाई के उस लंड का स्वाद मुझे किसी नशे जैसा लग रहा था।
वह दर्द और साँस लेने में होने वाली दिक्कत उस अजीब से अच्छे महसूस होने के सामने कुछ भी नहीं थी, और मैं जानती थी कि मुझे यही चाहिए था। मेरे गले में हल्की सी जलन और साँस लेने में दिक्कत होने के बाद भी, मैंने अपनी तेजी कम नहीं की। मैं अपने सिर को लगातार आगे-पीछे हिलाती रही, जिससे उसका वह कड़क लंड बार-बार मेरे मुँह के अंदर आ रहा था और बाहर जा रहा था।
मेरी लार उसके पूरे लंड पर बह रही थी, जिससे वह गीला और चिकना हो गया था और मेरे गले के अंदर तक आसानी से जा रहा था। गोलू का शरीर अब पूरी तरह अकड़ गया था। उसकी जाँघें और ज्यादा सख्त हो गई थीं और उसने बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठी में इतनी जोर से पकड़ लिया था कि उसके नाखून लगभग उसमें धँस गए थे।
उसकी आधी बंद आँखों से साफ दिख रहा था कि वह उस बहुत ज्यादा मजे को और ज्यादा देर तक सहन नहीं कर पाएगा। मेरी उस बहुत तेज और पागलों जैसी जीभ की हरकत ने उसे पूरी तरह हिला दिया था, और कमरे की ठंडी हवा के बीच हम दोनों के शरीर की गर्मी साफ महसूस हो रही थी।
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मैं लगातार आगे-पीछे झुकते हुए उसके उस भारी और गर्म लंड को अपने मुँह के अंदर पूरा अंदर तक लेने लगी। हर बार जब उसकी नोक मेरे गले के पीछे वाले हिस्से को छूती, तो मेरे पेट में एक अजीब सी हलचल होने लगती थी। उसके उस कड़क लंड की रगड़ से मेरा तालू और होंठ सुन्न होने लगे थे, लेकिन मेरी दीवानगी इतनी बढ़ चुकी थी कि मुझे उस दर्द में भी एक अलग सा मजा आ रहा था।
गोलू अब पूरी तरह खुद को भूल चुका था। उसने बिस्तर को इतनी जोर से पकड़ लिया था कि उसके हाथों की नसें खिंच गई थीं। उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी और उसके मुँह से निकलने वाली आहें अब कमरे की पूरी खामोशी में साफ सुनाई दे रही थीं।
वह अपने एक हाथ से मेरे बालों को मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रहा था, जैसे वह इस बहुत ज्यादा मजे के बीच मुझे रोकना चाहता हो या फिर खुद को पूरी तरह मेरे हवाले करना चाहता हो। मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में पकड़ते ही गोलू का शरीर जोर से काँप उठा।
उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में इतनी उलझ गईं, जैसे वह मुझे अपनी तरफ खींचना चाहता हो या खुद को इस सब से बचाना चाहता हो, लेकिन उसका शरीर अब उसकी बात नहीं मान रहा था। मैंने उसकी परेशानी की परवाह किए बिना अपनी गर्दन को और तेजी से आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया।
उसके उस मोटे और कड़क लंड को अपने गले तक लेने की कोशिश में मेरा दम घुटने लगा था। कई बार जब उसका सिरा मेरे गले के बिल्कुल पीछे तक जाता, तो मेरी आँखों में हल्का पानी आ जाता और मेरा पेट सिकुड़ने लगता। उस समय ऐसा लगता था कि मैं अभी उल्टी कर दूँगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
लेकिन उसी घुटन और कड़वाहट के बीच, उसके शरीर की महक और उसकी खाल का गर्म और नमकीन स्वाद मुझे पीछे हटने नहीं देता था। मैं और ज्यादा दीवानी होकर उसे चूसने लगी। मेरी जीभ उसके नीचे वाले हिस्से पर तेजी से चल रही थी और मेरे मुँह में जमा लार की आवाज साफ सुनाई दे रही थी।
गोलू की उंगलियों का दबाव मेरे बालों पर और ज्यादा बढ़ गया और उसके मुँह से एक दबी हुई सी आवाज निकली, “आ… आलिया… दीदी… ओह… शिट…” उसकी वह बेबस और हवस से भरी आवाज सुनकर मेरे अंदर की चाहत और ज्यादा बढ़ गई। मैंने उसके उस खड़े लंड को अपने हाथ में और कसकर पकड़ लिया और उसकी हर साँस के साथ अपनी तेजी बढ़ाती चली गई।
मेरे सिर की तेजी इतनी बढ़ गई कि कमरे में सिर्फ हमारी तेज साँसों की आवाजें और गीली रगड़ की आवाजें सुनाई दे रही थीं। गोलू का पूरा शरीर बहुत ज्यादा मजे की वजह से बुरी तरह काँपने लगा। उसकी आँखें बंद थीं और उसकी उंगलियाँ मेरे बालों को इतनी जोर से पकड़े हुए थीं कि मेरा सिर सुन्न होने लगा था। “Sister Brother Anal Sex”
काँपती हुई और तेज साँसों के बीच उसने हकलाते हुए कहा, “दीदी… बस… अब नहीं… मैं… मैं आने वाला हूँ!” उसकी इस बात ने मेरे अंदर की हवस को और ज्यादा बढ़ा दिया। मैंने उसकी कसमसाहट पर ध्यान दिए बिना अपने मुँह को उसके और पास ले जाते हुए बिल्कुल साफ शब्दों में कहा, “नहीं गोलू… रुकना मत… मुझे तेरा सारा पानी अपने इस मुँह के अंदर चाहिए… अपना सब कुछ मेरे गले में डाल दे!”
मेरे सिर की तेजी अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने उसकी हर हरकत को अपने हिसाब से करते हुए अपने मुँह को उसके ऊपर और तेजी से चलाना शुरू कर दिया। उसके उस मोटे और कड़क लंड की रगड़ मेरे तालू और होंठों पर इतनी पड़ रही थी कि मेरे मुँह के अंदर लार और थूक का झाग बनने लगा था।
तभी गोलू का पूरा शरीर एक तेज झटके के साथ ऊपर उठा और उसकी पीठ की हड्डी में जैसे करंट दौड़ गया। उसके मुँह से एक लंबी और बेबस आह निकली, “आह… दीदी… अब नहीं… मैं छूट रहा हूँ!” और अगले ही सेकंड, उसका वह लंड मेरे मुँह के अंदर बुरी तरह हिलने लगा।
उसे बहुत ज्यादा मजा आते ही उसका गर्म, गाढ़ा और चिपचिपा सफ़ेद पानी तेज और बिना रुके मेरे मुँह के अंदर निकलने लगा। उसका सफ़ेद पानी इतनी तेजी से और बहुत ज्यादा निकल रहा था कि मेरी जीभ और मेरा पूरा गला उस गर्म सफेद रस से भर गया। उसके हर झटके के साथ उसकी गाढ़ी धार सीधे मेरे गले के पीछे वाले हिस्से से टकरा रही थी, जिससे मुझे उसे निगलना पड़ रहा था।
मैंने उसकी एक भी बूंद बाहर नहीं गिरने दि। अपना पूरा मुँह खोले हुए मैंने उसके उस चिपचिपे और गाढ़े सफ़ेद पानी को अपनी जीभ पर इकट्ठा किया और उसे निगलती चली गई। मेरे भाई के शरीर की गर्मी और उस गाढ़े रस का स्वाद मेरे मुँह में फैल चुका था, और मैं उस गलत मानी जाने वाली चीज की हर एक बूंद को अपने अंदर लेकर उस बहुत ज्यादा मजे को पूरी तरह महसूस कर रही थी। “Sister Brother Anal Sex”
मैंने उसके लंड से अपना सिर उठाया और उसके गाढ़े सफ़ेद पानी की एक-एक बूंद को अपने गले से नीचे उतार लिया। मेरा गला और मुँह पूरी तरह उसके रस से भर चुका था। थकान और बहुत ज्यादा मजे के बाद मैं थोड़ी देर आराम करने के लिए बिस्तर पर सीधा लेटने ही वाली थी कि तभी गोलू ने जल्दी से मुझे रोक दिया।
उसने अपनी भारी और थोड़ी गुस्से वाली आवाज में कहा, “आलिया दीदी, यह क्या कर रही हो? पहले मेरे लंड को ठीक से साफ करो। इस चिपचिपेपन और गंदगी के साथ मैं इस तरह कैसे सो सकता हूँ?” मैंने बिना एक पल गंवाए अपना सिर दोबारा उसकी जाँघों के बीच झुका दिया।
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मैंने अपनी गर्म और गीली जीभ को उसके अभी-अभी शांत हुए लंड पर फेरना शुरू कर दिया। उसके लंड की नरम खाल और नसों पर यहाँ-वहाँ उसका गाढ़ा सफ़ेद पानी और मेरी लार लगी हुई थी, जिसे मैंने अपनी जीभ की नोक से एक-एक करके चाटना शुरू कर दिया।
मैंने उसके पूरे लंड को अपनी जीभ से तब तक सहलाया और चाटा, जब तक उस पर लगा हुआ एक-एक बूंद साफ नहीं हो गया और वह पूरी तरह साफ दिखने नहीं लगा। मेरे इस तरह चाटने से उसके ढीले पड़ चुके लंड में एक हल्की सी हरकत फिर से होने लगी। जब उसका लंड बिल्कुल साफ हो गया, तब जाकर गोलू को आराम मिला और उसने एक लंबी साँस ली।
वह अपनी भारी होती आँखों के साथ बिस्तर के दूसरी तरफ मुड़कर गहरी नींद में सोने के लिए लेट गया। मैं भी उसके पास उसी बिखरे हुए और गुलाब की पंखुड़ियों से भरे बिस्तर पर लेट गई। मेरे मुँह में अभी भी उसका स्वाद और गर्मी बाकी थी। कमरे की पूरी खामोशी में थकान की वजह से मेरी आँखें भी अब भारी होने लगी थीं।
अगली सुबह मेरी आँखें काफी देर से खुलीं। खिड़की के पर्दों से आती धूप पूरे कमरे में फैल चुकी थी, लेकिन कमरे के अंदर अभी भी पिछली रात की गर्मी महसूस हो रही थी। बिस्तर से उठते ही मैं बिना देर किए सीधे बाथरूम में चली गई। मैंने अपने मुँह में ब्रश करके रात भर का वह गाढ़ा स्वाद पूरी तरह साफ किया। “Sister Brother Anal Sex”
फिर गुनगुने पानी से नहा लिया। उस ठंडे मौसम में नहाने के बाद मेरे शरीर और मन की सारी थकान दूर हो गई। मेरे बाहर आने के कुछ देर बाद गोलू की भी नींद खुली और वह धीरे-धीरे बाथरूम में चला गया। नहाने और तैयार होने के बाद हम दोनों कमरे से बाहर निकले और नाश्ता करने के लिए होटल की लॉबी में नीचे आ गए।
नाश्ता करने के बाद हमारे सामने यह सवाल था कि शिमला में घूमने के लिए कहाँ जाएँ, क्योंकि मुझे वहाँ के रास्तों और जगहों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। हालाँकि रात में मैंने गोलू का लंड अपने मुँह में लिया था और हमारे बीच सब कुछ बहुत आगे बढ़ चुका था, लेकिन सुबह होते ही गोलू थोड़ा बदला हुआ और चुप सा लग रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वह मुझसे ज्यादा बात नहीं कर रहा था और उसके चेहरे पर एक अजीब सी झिझक थी। इसलिए हमने बिना कोई बात बनाए बस बाहर निकलकर उस रास्ते पर चलना शुरू कर दिया, जहाँ सड़क हमें ले जाती थी। चारों तरफ इतनी ज्यादा ठंड थी कि हमने कितने भी मोटे और गर्म कपड़े पहन रखे हों, वह सर्द हवा हमारे शरीर को चीरती हुई निकल रही थी।
हमारे पैरों के नीचे जमीन पर बर्फ की हल्की परत भी जमी हुई थी। शिमला की उन ठंडी सड़कों पर हम दोनों पैदल ही काफी दूर तक चलते रहे। रास्ते में जहाँ भी कोई सुंदर नजारा या अच्छी जगह दिखती, मैं रुककर अपने फोन से तस्वीरें लेने लगती और फिर हम किसी नए रास्ते की तरफ बढ़ जाते।
इस तरह चलते-चलते लगभग तीन घंटे बीत गए और हम शहर से थोड़ा दूर एक शांत जगह पर, नदी के पास पहुँच गए। नदी का पानी ऊपर से जम गया था और उसके ऊपर बर्फ की बहुत पतली परत बनी हुई थी। जब भी हमारा पैर उस पर पड़ता, तो वह कांच टूटने जैसी आवाज के साथ टूट जाती। “Sister Brother Anal Sex”
यह देखने में बहुत अलग और मजेदार लग रहा था। इस खेल में मेरा जोश बढ़ गया और मैं उस जमी हुई बर्फ पर चलकर उछलने-कूदने लगी। लेकिन तभी मेरा पैर बर्फ की एक बहुत पतली जगह पर पड़ गया, जो मेरा वजन नहीं संभाल पाई। अचानक बर्फ टूट गई और मैं सीधे बर्फ जैसे ठंडे पानी में जा गिरी।
पानी इतना ज्यादा ठंडा था कि उसे महसूस करते ही मेरी साँसें जैसे रुक गईं और मेरा पूरा शरीर सुन्न हो गया। मुझे अपने शरीर का भी ठीक से पता नहीं चल रहा था। घबराहट और ठंड की वजह से मेरे मुँह से चीख निकल गई। तुरंत गोलू आगे आया और अपनी मजबूत बाहों से मुझे पकड़कर किसी तरह पानी से बाहर निकाल लिया।
तब तक ठंड इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मेरे हाथों की उंगलियाँ पूरी तरह सुन्न हो गई थीं और मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। मेरी हालत देखकर गोलू ने बिना देर किए मुझे अपनी बाहों में उठा लिया। वह मुझे उसी गीले और काँपते शरीर के साथ सड़क की तरफ लेकर भागा, एक टैक्सी रोकी और सीधे हमारे होटल के कमरे में वापस आ गया।
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ठंड की वजह से मेरी उंगलियाँ इतनी सुन्न हो चुकी थीं कि मैं अपने गीले कपड़े भी खुद नहीं उतार पा रही थी। मेरी काँपती उंगलियों से बटन और जिप भी नहीं खुल रहे थे। मेरी यह हालत देखकर गोलू खुद आगे आया और मेरे गीले कपड़े उतारने लगा। उसने सबसे पहले मेरा भारी और गीला स्वेटर उतारा, फिर मेरी शर्ट और जींस भी उतारकर अलग रख दी।
इसके बाद उसने मेरी गीली पैंटी और ब्रा भी उतार दी, और मैं कमरे के बीच में उसके सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी। जैसे ही मेरे सारे कपड़े उतरे, मेरा पूरा शरीर उसकी आँखों के सामने था। बर्फ जैसे ठंडे पानी और ठंड की वजह से मेरे दोनों भारी स्तन बहुत ज्यादा कड़े हो चुके थे। “Sister Brother Anal Sex”
मेरे निप्पल भी ठंड की वजह से कड़े होकर उभर गए थे। मेरी तेज साँसों के साथ मेरे स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे और उनके बीच की जगह भी साफ दिख रही थी। नीचे मेरी जाँघों के बीच का हिस्सा भी पूरी तरह ठंडे पानी में भीग गया था। ठंड की वजह से वहाँ की त्वचा सिकुड़ गई थी और उसके आसपास के बाल पूरी तरह गीले होकर मेरी त्वचा से चिपके हुए थे।
उस बर्फ जैसे ठंडे पानी की वजह से मेरा वह हिस्सा भी सुन्न हो गया था और वहाँ से पानी की कुछ आखिरी बूंदें मेरी जाँघों पर बहती हुई नीचे गिर रही थीं। गोलू की आँखें खुली की खुली रह गईं और उसकी नजरें मेरे उस नंगे और काँपते शरीर पर टिक गईं। उसने तुरंत एक बड़ा और सूखा तौलिया उठाया और मेरे पूरे शरीर से तेजी से पानी पोंछने लगा।
जब मेरा शरीर थोड़ा सूख गया, तो उसने अलमारी से मेरे लिए नए और गर्म कपड़े ढूँढने शुरू किए। तब तक ठंड मेरी हड्डियों के अंदर तक पहुँच चुकी थी। मुझसे इंतजार नहीं हुआ और मैं वैसे ही बिस्तर पर जाकर लेट गई और खुद को मोटी चादर से अच्छी तरह ढक लिया।
कमरे का हीटर पूरी ताकत से हवा को गर्म कर रहा था, लेकिन फिर भी मुझे लग रहा था कि वह बहुत ज्यादा ठंड मेरी हड्डियों के अंदर तक चली गई है और कोई भी गर्मी मुझे अंदर से आराम नहीं दे पा रही थी। कमरे का हीटर पूरी ताकत से चल रहा था, लेकिन मेरे शरीर की कंपकंपी कम होने का नाम नहीं ले रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जब गोलू मेरे लिए गर्म कपड़े ढूँढकर वापस बिस्तर के पास आया, तो उसने मुझे चादर में पूरी तरह लिपटा हुआ पाया। ठंड से मेरी हालत खराब देखकर वह बिना देर किए सीधे उस मोटी चादर के अंदर आ गया और मुझे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया। उसके शरीर की गर्मी जैसे ही मेरे ठंडे और नंगे शरीर को मिली, मुझे एक अजीब सा आराम महसूस हुआ। “Sister Brother Anal Sex”
लेकिन जब मैंने उसकी तरफ ध्यान दिया, तो मुझे याद आया कि जब वह मुझे नदी से बाहर निकालकर अपनी गोद में उठाकर लाया था, तब उसके अपने कपड़े भी पानी से थोड़े भीग गए थे। उसके गीले कपड़ों की नमी मेरे सुन्न शरीर पर लग रही थी और मुझे और ठंड महसूस हो रही थी।
मैंने काँपती हुई आवाज में उससे कहा, “गोलू… तुम्हारे कपड़े भी थोड़े गीले हैं, इनकी नमी से मुझे और ठंड लग रही है… तुम अपने सारे कपड़े उतार दो और बिना कपड़ों के मुझे अपनी बाहों में पकड़ लो। तुम्हारे शरीर की असली गर्मी ही मुझे बचा सकती है।” मेरी बात सुनते ही गोलू ने बिना किसी झिझक के अपने सारे भीगे हुए कपड़े एक झटके में उतार दिए और उन्हें फर्श पर फेंक दिया।
इसके बाद वह पूरी तरह नंगा होकर दोबारा उस मोटी चादर के अंदर आ गया और मुझे अपनी मजबूत बाहों में कसकर पकड़ लिया। उसके पूरी तरह गर्म और नंगे शरीर की रगड़ जब मेरे ठंडे और काँपते हुए शरीर से हुई, तो मुझे ऐसा लगा जैसे सर्दियों की धूप में कोई भारी और गर्म कंबल मेरे ऊपर डाल दिया गया हो।
उसके शरीर की हल्की और अच्छी गर्मी ने धीरे-धीरे मेरी हड्डियों तक पहुँची ठंड को कम करना शुरू कर दिया, और मुझे बहुत आराम महसूस होने लगा। लेकिन जैसे-जैसे हम दोनों उस चादर के अंदर कसकर एक-दूसरे से लिपटे रहे, धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा। कुछ ही पलों में मुझे महसूस हुआ कि उसका लंड फिर से जागने लगा है और कड़क होने लगा है। “Sister Brother Anal Sex”
मैं उस पर बिल्कुल भी गुस्सा नहीं हुई और न ही उसे इसके लिए गलत माना, क्योंकि इस तरह हम दोनों का पूरी तरह नंगे होकर उस गर्मी में एक-दूसरे के बहुत करीब लेटे रहना ऐसा था कि उसका जोश में आना बिल्कुल आम बात थी। उस गर्मी के बीच जब मुझे उसके उस लंड की रगड़ बार-बार अपने नीचे वाले हिस्से पर महसूस होने लगी.
तो मैंने थोड़ी झिझक के साथ धीमी आवाज में उससे पूछा, “गोलू… क्या तुम्हारा लंड सख्त हो रहा है?” मेरी बात सुनकर वह थोड़ा शर्मिंदा हो गया और अपनी नजरें नीचे करते हुए बोला, “हाँ, दीदी… सॉरी, मैं जानबूझकर…” मैंने उसकी बात बीच में ही रोक दी और उसके चेहरे पर हाथ फेरते हुए धीरे से कहा, “इसमें सॉरी कहने की कोई बात नहीं है, गोलू… अगर तुम चाहो, तो इसे मेरी गांड के अंदर डाल सकते हो।”
मेरी यह बात सुनकर गोलू थोड़ी देर तक बिल्कुल चुप रहा। फिर उसने थोड़ी झिझक के साथ कहा, “नहीं दीदी, मैं ठीक हूँ… तुम्हें अभी भी ठंड लग रही है, रहने दो।” लेकिन मेरे अंदर ठंड के बावजूद एक अलग सी बेचैनी और उसकी मौजूदगी का एहसास हो रहा था। मैंने अपना चेहरा उसके और करीब किया.
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और उसकी आँखों में देखते हुए धीरे से कहा, “गोलू, तुम फिक्र मत करो… तुम अपना यह लंड मेरी गांड़ के अंदर डाल सकते हो, सच कह रही हूँ, इस बार ऐसा करने से हम दोनों को बहुत ज्यादा मज़ा आएगा।” मैंने बिना कोई और देर किए बिस्तर पर करवट ली और पूरी तरह घूम गई, जिससे मेरी नंगी पीठ सीधे गोलू के चौड़े और गर्म सीने से लग गई।
हम दोनों इस तरह एक-दूसरे से चिपके हुए थे कि मेरे शरीर का हर हिस्सा उसके शरीर की गर्मी महसूस कर रहा था। उसी समय मेरे पीछे उसका सख्त लंड मेरी दोनों गांड़ के गालों के बीच दबने लगा। वह कुछ सेकंड तक बिल्कुल चुप रहा, शायद उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस हालत में उसे क्या करना चाहिए।
लेकिन मेरे शरीर की खुली इजाजत और उसके अंदर की चाहत ने उसे ज्यादा देर तक सोचने नहीं दिया। उसने अपने काँपते हुए हाथ को नीचे ले जाकर अपने सख्त लंड को हाथ में पकड़ लिया और उसे मेरी गांड के पास ले आया। For next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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