Didi Bhai Sex Story
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 10 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि मेरी बर्थडे के दिन मम्मी पापा आये थे हमसे मिलने. जिससे मैं और गोलू एक ही रूम में सोये. पर दोनों को नींद नहीं आ रही थी तो मेरे भाई ने मुझे पोर्न विडियो दिखा कर कामुक कर दिया और मैं उससे चुदने को पूरी तरह तैयार हो गई. अब आगे- Didi Bhai Sex Story
मेरे एक हाथ की मुट्ठी में गोलू का कड़क और गर्म लंड कसकर पकड़ा हुआ था, और गोलू का हाथ मेरे नाईट गाउन के अंदर जाकर मेरी पूरी तरह गीली चुत को सहला रहा था। मम्मी और पापा ठीक दूसरे कमरे में गहरी नींद में सो रहे थे, जिसकी वजह से यह एक बहुत अजीब और दिल की धड़कनें बढ़ा देने वाली हालत बन चुकी थी।
एक तरफ डर था कि कोई जाग न जाए, तो दूसरी तरफ ऐसा अजीब एहसास था कि मैं चाहकर भी गोलू के लंड से अपना हाथ हटाना नहीं चाहती थी। उसी तरह, उसकी लंबी और गर्म उंगलियाँ मेरे नाईट गाउन के अंदर लगातार मेरी चुत पर चल रही थीं, और हम दोनों की इस हरकत के ठीक सामने लैपटॉप की स्क्रीन पर पोर्न वीडियो अभी भी चल रहा था, जिसकी हल्की नीली रोशनी हम दोनों के चेहरों पर पड़ रही थी।
उस एक चुप पल में हम दोनों बिना कुछ कहे एक-दूसरे के इशारे को पूरी तरह समझ चुके थे। गोलू ने एक सेकंड के लिए अपना हाथ मेरे नाईट गाउन के अंदर से बाहर निकाला और अपने कपड़े उतारने लगा। मैंने भी बिना एक पल गँवाए उसके लंड से अपनी मुट्ठी हटाई और अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए।
मैंने सबसे पहले अपने बदन से वह सूती नाईट गाउन उतारा, फिर अपनी ब्रा निकाली और अपनी गीली पैंटी को भी खींचकर नीचे उतार दिया। उधर गोलू ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए थे। कमरे के उस हल्के अँधेरे में उसका बड़ा और मोटा लंड हवा में पूरी तरह तना हुआ था, और उसकी नजरें सीधी मेरी नंगी और पूरी तरह गीली चुत पर टिकी थीं।
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लैपटॉप की नीली रोशनी में मेरी चुत के दोनों फूले हुए होंठ गीले होकर चमक रहे थे। चुत का वह नाज़ुक हिस्सा लगातार निकल रहे गाढ़े और चिपचिपे रस से पूरी तरह भीगा हुआ था। गोलू टकटकी लगाए मेरी उस सुलगती हुई चुत को देख रहा था, और उसकी आँखों से साफ दिख रहा था कि मेरी इस हालत ने उसे अंदर तक बेकाबू कर दिया था।
उस वक्त गोलू के चेहरे की तरफ देखने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, और इसकी कई वजह थी। जैसे वह मेरा सगा और छोटा भाई था, जिसके साथ इस तरह का रिश्ता किसी भी तरह सही नहीं था। ट्रिप से वापस आने के बाद मैंने खुद से पक्का वादा किया था कि मैं उससे एक दूरी बनाकर रखूँगी, ताकि ऐसी बातें दोबारा कभी न हों।
लेकिन आज की सच्चाई इसके बिल्कुल उलट थी। मैं उसी छोटे भाई के साथ कमरे में बैठकर पोर्न वीडियो देख रही थी, और अब हम दोनों अपने सारे कपड़े उतार चुके थे। मेरा पूरा बदन नंगा था, और मेरी सूखी हुई उम्मीदों के उलट मेरी चुत से लगातार गाढ़ा और चिपचिपा रस बहकर मेरी जांघों तक जा रहा था।
इस बड़े फर्क ने मुझे अंदर से हिला दिया था। एक तरफ खून के रिश्ते का भारी गिल्ट और शर्म थी, तो दूसरी तरफ इस जिस्मानी चाहत का ऐसा नशा था, जिससे बाहर निकलने का अब कोई रास्ता नहीं बचा था। मैंने एक लंबी, गहरी साँस लेकर अपनी धड़कनों को रोकने की कोशिश की ही थी कि अचानक गोलू का हाथ मेरी खुली हुई जांघों पर आ गया।
बिना किसी हिचक के उसका हाथ ऊपर की तरफ फिसलता हुआ सीधा मेरी नंगी चुत पर जा पहुँचा। जैसे ही उसकी उंगलियों ने बिना किसी कपड़े की रुकावट के सीधे मेरी गर्म चुत को छुआ, मेरे पूरे शरीर में अचानक ऐसा तेज़ झटका लगा कि मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं।
वह एहसास इतना अचानक और तेज़ था कि मेरी पीठ में एक ठंडी सी सिहरन दौड़ गई। इस बार बीच में नाईट गाउन या पैंटी का कोई पर्दा नहीं था, इसलिए उसकी लंबी और गर्म उंगलियाँ पूरी आज़ादी से मेरी चुत के भीगे हुए होंठों पर चलने लगी थीं। लेकिन मेरा चेहरा देखने के बजाय गोलू की आँखें सीधे लैपटॉप की स्क्रीन पर चल रहे उस पोर्न वीडियो पर टिकी थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वह एकटक उस स्क्रीन को देखता हुआ अपनी उंगलियों से मेरी चुत को लगातार सहला रहा था। तभी उसने अपने दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और उसे खींचकर अपने कड़े लंड पर रख दिया, और धीरे से बोला, “आलिया दीदी… आप भी इसे सहलाओ ना…” यह सब इतना अचानक हुआ था कि एक पल के लिए मैं चौंक गई, लेकिन मैंने उसका लंड अपनी मुट्ठी से नहीं हटाया।
मैंने तुरंत अपना हाथ उसके लंबे और सख्त लंड पर कस लिया और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी। जैसे ही मैंने उसका लंड सहलाना शुरू किया, गोलू ने अपनी दो उंगलियाँ धीरे-धीरे मेरी चुत के अंदर डाल दीं और उन्हें आगे-पीछे चलाने लगा। मेरी गीली चुत से लगातार निकल रहा रस उसकी उंगलियों को पूरी तरह चिकना कर रहा था, जिससे उसकी उंगलियाँ बिना किसी रुकावट के और गहराई तक मेरी चुत के अंदर जाती चली गईं।
जैसे ही उसकी दो उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर गहराई तक गईं, मेरे मुँह से एक धीमी सी सिसकी निकल गई। उसकी उंगलियों का वह आना-जाना और दूसरी तरफ मेरे हाथ में उसका धधकता हुआ लंड मचल रहा था। इस एहसास ने मुझे पूरी तरह पागल कर दिया था।
मैंने भी बिना किसी हिचक के अपनी मुट्ठी में उसके लंड को कस लिया और उसकी रफ्तार के साथ तालमेल रखते हुए उसे ऊपर-नीचे सहलाने लगी। कमरे की उस खामोशी में हमारी साँसों की आवाज़ें और लैपटॉप पर चल रहे वीडियो की धीमी आवाज़ें आपस में मिल गई थीं।
गोलू अपनी उंगलियों को मेरी चुत के अंदर आगे-पीछे करने लगा था, और हर बार जब उसकी उंगलियाँ गहराई में जाती थीं, तो मेरा शरीर उसके इस मीठे छुअन से काँप उठता था। उसकी दोनों उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर और ज्यादा गहराई तक चली गईं। उसने अपनी उंगलियों को मोड़कर मेरी अंदर की दीवारों को लगातार रगड़ना शुरू कर दिया।
मेरी चुत का सारा रस बाहर फैल चुका था और उसकी उंगलियाँ उस चिपचिपे पानी में पूरी तरह डूबी हुई तेज़ी से अंदर-बाहर हो रही थीं। एक हाथ से मैं उसके कड़क, मोटे और नसों से उभरे हुए लंड को अपनी मुट्ठी में कसकर ऊपर-नीचे रगड़ रही थी। उसका लंड इतना गर्म और सख्त हो चुका था कि मेरी मुट्ठी के हर झटके पर वह फड़क रहा था।
उसकी उंगलियों की गहराई और मेरी मुट्ठी की तेज़ रफ्तार ने मिलकर हमारी हरकतों को पूरी तरह बेकाबू कर दिया था। मैंने अपने हाथ चलाने की रफ्तार और भी तेज़ कर दी, और जवाब में गोलू ने भी अपनी उंगलियों को मेरी चुत के अंदर और तेज़ चलाना शुरू कर दिया।
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उसकी उंगलियों की उस गहरी और लगातार रगड़ से जो सिहरन उठ रही थी, वह सीधे मेरे पेट तक महसूस हो रही थी, जिससे मेरा पूरा शरीर सुन्न होता जा रहा था। तभी गोलू की साँसें बहुत तेज़ चलने लगीं और उसने हाँफते हुए कहा, “आलिया दीदी… बस… अब मैं निकलने वाला हूँ…”
मैंने उसकी बात सुनते ही बिना एक सेकंड गँवाए उसके कड़क लंड को अपनी मुट्ठी में और कस लिया और अपनी पूरी ताकत से उसे ऊपर-नीचे रगड़ने लगी। अगले ही सेकंड उसका शरीर एक तेज़ झटके के साथ काँपा, उसकी सारी नसें तन गईं और उसके कड़क लंड से गाढ़ा और गर्म सफेद पानी निकल पड़ा।
उसका वह गाढ़ा, चिपचिपा और थक्के दार सफेद पानी फव्वारे की तरह सीधे हवा में उछला और उसकी कुछ बूँदें मेरे छाती पर आकर गिरीं। इसके तुरंत बाद उसकी नसों से लगातार निकलता हुआ वह भारी और दूधिया सफेद पानी तेजी से बहकर मेरे पूरे हाथ, मेरी उंगलियों और उसके धड़कते हुए लंड को पूरी तरह गीला कर गया।
“दीदी… आपका हो गया क्या?” लंबी-लंबी साँसें लेते हुए गोलू रुककर मुझसे पूछने लगा। मैंने अपनी आवाज़ में थोड़ी शर्म और सच रखते हुए धीरे से कहा, “बस… थोड़ा सा बाकी है गोलू, अभी रुको मत…” मेरी यह बात सुनते ही गोलू के अंदर एक अलग ही जोश आ गया और वह बुरी तरह बेकाबू होकर अपनी उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर और तेज़ चलाने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी उंगलियों की वह तेज़ और लगातार हरकत मेरी गीली चुत के अंदर गर्मी बढ़ाने लगी, जिससे मेरा शरीर उसके हर एक धक्के पर काँपने लगा। उसकी उंगलियों की लगातार और पागल कर देने वाली रफ्तार ने मुझे पूरी तरह से बेहोश सा कर दिया था। मेरी चुत के अंदर से उठने वाली वह मीठी सी टीस अब मेरे पूरे शरीर में करंट की तरह दौड़ रही थी, और मेरा रोमांच अपनी सबसे ऊँची हद पर पहुँच चुका था।
मैंने अपनी दोनों जांघों को और चौड़ा कर दिया ताकि उसकी उंगलियाँ मेरी चुत के हर एक हिस्से तक पहुँच सकें। गोलू भी पूरी तरह से अपनी उंगलियों को अंदर-बाहर कर रहा था, और उसका हाथ मेरी चुत के ही गीले रस से पूरी तरह सना हुआ था। हर बार जब उसकी उंगलियाँ गहराई में जाती थीं, तो मेरी साँसें रुक जाती थीं और मेरे मुँह से सिर्फ दबी हुई आहें निकल पाती थीं।
मेरा शरीर पसीने से पूरी तरह भीग चुका था और मैं अपनी चरमसीमा के बिल्कुल करीब पहुँच रही थी, जहाँ बस एक और धक्का मुझे पूरी तरह से डुबो देने के लिए काफी था। उसकी उंगलियों की तेज़ रफ्तार मेरी चुत के अंदर लगातार चल रही थी। मेरी आँखें बंद थीं और मुँह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं। “Didi Bhai Sex Story”
गोलू बिना एक सेकंड रुके अपनी उंगलियों को और तेज़ी से अंदर-बाहर करता रहा। उसकी हर एक रगड़ और हर एक झटके के साथ मेरे अंदर की गर्मी और हलचल बढ़ती गई, जिससे मेरा पूरा शरीर काँपने लगा। जैसे-जैसे उसकी उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर और गहराई तक जाती गईं, मेरी योनि के अंदर गीलापन और बढ़ने लगा।
अचानक मेरे पेट के अंदर एक तेज़ खिंचाव हुआ और मेरे पूरे शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा। मेरी टाँगें एकदम से कस गईं और मेरी चुत से पानी की गर्म धार तेजी से बाहर निकल पड़ी। उस तेज़ झटके के साथ मेरे अंदर की सारी बेचैनी शांत हो गई, मेरा पूरा शरीर ढीला पड़ गया और मुझे आराम मिला।
हम दोनों अपने नंगे बदन के साथ लंबी-लंबी साँसें ले रहे थे। गोलू ने हाथ बढ़ाकर लैपटॉप बंद कर दिया, जिससे वो पॉर्न वीडियो आखिरकार बंद हो गया और कमरे में खामोशी छा गई। गोलू मेरे चेहरे को हल्की सी मुस्कान के साथ देखने लगा, जैसे उसका कोई पुराना और बड़ा सपना आखिरकार पूरा हो गया हो।
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मैंने जमीन पर पड़ी अपनी ब्रा और पैंटी उठाई और पैंटी गोलू के हाथ में दे दी। इसके बाद मैंने अपनी ब्रा से अपनी चुत को पोंछना शुरू किया, ताकि सारा गीलापन साफ हो सके। उधर गोलू ने भी हाथ में मिली पैंटी से अपना लंड अच्छी तरह पोंछकर साफ करना शुरू कर दिया।
जब हम दोनों ने सब साफ कर लिया, तो हमने वो गंदी ब्रा और पैंटी उठाकर बिस्तर के पास ही फेंक दीं। मैंने अपना नाइट गाउन पहन लिया और गोलू ने भी वापस अपने कपड़े पहन लिए। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा और कहा, ” अब सो जाओ गोलू।” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है दीदी।”
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और सोने की कोशिश करने लगी। मुझे पता था कि अब गोलू का लंड कड़ा नहीं था, इसलिए मैं खुद को थोड़ा ज्यादा ठीक और आराम में महसूस कर रही थी। उसी शांत माहौल में मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी आँख लग गई और मैं गहरी नींद में सो गई। “Didi Bhai Sex Story”
अगली सुबह गोलू ने मुझे सुबह-सुबह ही जल्दी जगा दिया। वह पहले ही बिस्तर साफ कर चुका था और जमीन पर पड़ी गंदी ब्रा और पैंटी उठाकर बाथरूम में फेंक आया था। नहा-धोकर उसने अपने दूसरे कपड़े भी पहन लिए थे। जब मैंने नींद भरी आँखों से पूछा, “क्या हुआ गोलू?”
उसने जल्दी-जल्दी कहा, “दीदी, जल्दी से अपने कपड़े बदल लो… मम्मी-पापा के उठने से पहले।” मैं नींद से उठकर सीधे बाथरूम में आ गई ताकि नहाकर अपने कपड़े बदल सकूँ। जैसे ही मैंने अपना नाइट गाउन उतारा और शॉवर के नीचे खड़ी हुई, गुनगुना पानी मेरी नंगी त्वचा पर पड़ने लगा।
पानी की धार जब मेरी चुत पर पड़ी, तो मुझे हल्का सा दर्द और जलन महसूस हुई। उस दर्द को महसूस करके मुझे खुद पर बहुत शर्म आने लगी। क्योंकि मैंने कुछ ही दिन पहले तय किया था कि मैं गोलू के साथ ये सब हमेशा के लिए बंद कर दूँगी, लेकिन कल रात उसकी उंगलियाँ मेरी चुत के अंदर थीं और मैंने खुद उसके लंड को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ा था।
मैं चाहती थी कि हमारे बीच का भाई-बहन का रिश्ता पहले जैसा ठीक हो जाए, लेकिन मैं पूरी तरह हार गई थी। मेरी चुत में हो रही वह हल्की सी जलन और दर्द इस बात का साफ सबूत था कि मैं एक बार फिर अपने इरादे पर टिक नहीं पाई थी। मैंने बाथरूम में काफी देर तक शावर लिया और फिर सिर्फ एक तौलिया लपेटकर अपने कमरे में आ गई। “Didi Bhai Sex Story”
गोलू तब भी वहीं बिस्तर पर बैठा हुआ था। जैसे ही मैं कमरे के अंदर गई, मेरी साँसें एक बार फिर तेज़ हो गईं। उसकी नजरें सीधे मेरे सीने पर टिक गईं, जो तौलिए से ढका हुआ था, लेकिन मैं जानती थी कि वह तौलिए के पीछे छिपे मेरे स्तनो की बनावट को साफ-साफ देख रहा है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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उसे इस तरह घूरते देख मैंने जल्दी से कहा, “गोलू… बाहर जाओ, मुझे अपने कपड़े बदलने हैं।” गोलू अपनी जगह से हिला भी नहीं और धीरे से बोला, “दीदी, मैं बाहर चला जाता हूँ… लेकिन पहले अपना तौलिया उतारो, मुझे तुम्हें नंगा देखना है।” उसकी इस बात पर मैंने घबराकर तौलिए को अपने शरीर पर और कसकर लपेट लिया और डाँटते हुए कहा, “पागल जैसी बातें मत करो गोलू, मम्मी-पापा के जागने से पहले यहाँ से बाहर जाओ।”
लेकिन गोलू बिल्कुल ज़िद्दी चेहरे के साथ बोला, “नहीं दीदी, जब तक मैं तुम्हें नंगा नहीं देख लेता, मैं नहीं जाऊँगा।” सुबह-सुबह गोलू के साथ इस तरह बहस करना मुझे बिल्कुल बेकार लगने लगा, क्योंकि मैं जानती थी कि मम्मी-पापा के उठने से पहले मुझे सब संभालना और सही कपड़े पहनना ज्यादा जरूरी था।
यह सोचकर मैंने हार मान ली और तौलिए पर से अपनी पकड़ ढीली कर दी। तौलिया जमीन पर गिरते ही मेरा पूरा नंगा शरीर उसकी आँखों के सामने खुल गया। मेरे बाल गीले होकर मेरी पीठ और कंधों पर बिखरे हुए थे, और मेरे दोनों भारी और गोल स्तन बिल्कुल सामने थे। “Didi Bhai Sex Story”
उन दोनों स्तनों का उभार और उनका आकार इतना अच्छा लग रहा था कि कोई भी उन्हें देखकर बहक जाए। उनके बीच की गहरी जगह और उस पर उभरे हुए दोनों गुलाबी निप्पल सुबह की रोशनी में और ज्यादा कड़े और साफ दिखाई दे रहे थे। मेरे पेट के नीचे मेरा चिकना और बिना बालों वाला नाज़ुक हिस्सा पूरी तरह खुला हुआ था।
मेरी चुत के दोनों होंठ कल रात की हलचल और रगड़ की वजह से हल्के लाल और थोड़े खुले हुए थे, जिनके अंदर की गुलाबी और गीली परत साफ दिखाई दे रही थी। चुत के ऊपर का उभरा हुआ हिस्सा और उसके बीच की बारीक दरार साफ दिख रही थी।
सुबह की हल्की रोशनी में मेरे नाज़ुक हिस्सो की हर बनावट और नमी साफ नजर आ रही थी, और गोलू बिना पलक झपकाए मेरी चुत और स्तनों के हर हिस्से को अपनी भूखी नजरों से लगातार देख रहा था। मैंने झिझकते हुए उससे कहा, “अब बाहर जाओ गोलू, तुमने मुझे नंगी देख लिया है।”
इस पर उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “ठीक है दीदी।” लेकिन बाहर जाने के बजाय वह उठकर मेरे और करीब आ गया और मेरे सामने घुटनों पर बैठ गया। उसने अचानक अपने होंठ मेरी चुत पर रख दिए और हल्का सा चुंबन लिया। उसके गर्म और कड़े होंठों का वह नरम स्पर्श जब मेरे नाज़ुक हिस्से पर पड़ा, तो मेरा पूरा शरीर काँप उठा।
मैं बिना कुछ कहे तुरंत वहाँ से पीछे हटकर खड़ी हो गई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उसकी इस हरकत पर क्या करूँ, क्योंकि गोलू ने पहली बार ऐसा कुछ किया था। शायद कल रात जब मैंने उसके लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ा था, तो उसे लगा था कि मैं भी उसके साथ इन सब चीज़ों में दिलचस्पी लेने लगी हूँ।
लेकिन चाहे कुछ भी हो, ट्रिप के दौरान जब उसने बिना मेरी मर्जी के अपना लंड मेरी चुत के अंदर डाल दिया था, तभी से मैं अच्छी तरह जानती थी कि मैं गोलू के साथ और ज्यादा करीब नहीं जाना चाहती थी। मैंने गुस्से और झिझक से उससे कहा, “यह सब मत करो गोलू, चुपचाप बाहर जाओ।”
मेरी बात सुनकर वह चुपचाप खड़ा हुआ और बिना एक भी शब्द बोले कमरे से बाहर चला गया। उसके जाते ही मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और कुछ मिनट बाद कमरे से बाहर आ गई। ठीक उसी समय मम्मी-पापा ने भी अपने कमरे का दरवाजा खोला और बाहर आ गए। मैंने सबके लिए सुबह की चाय बनाई और एक-एक करके सबको दे दी। “Didi Bhai Sex Story”
चाय पीते हुए यह तय हुआ कि रात में सब मिलकर फिल्म देखने चलेंगे, क्योंकि दिन में मुझे काम पर जाना था। गोलू सीनियर इंजीनियर था, इसलिए उसे छुट्टी मिल गई थी, लेकिन मेरे पास छुट्टी नहीं थी, इसलिए मुझे ऑफिस जाना ही था। मैंने मम्मी-पापा को बाय कहा और काम के लिए निकल पड़ी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
काम पर पूरे दिन मेरा दिमाग सिर्फ गोलू में ही लगा रहा। हम भाई-बहन के रिश्ते की हर हद पार कर चुके थे, और अब गोलू वह सब कर रहा था जो वह करना चाहता था। होश में रहते हुए उसने कभी बिना मेरी मर्जी के मेरे नाज़ुक हिस्से पर अपने होंठ नहीं रखे थे, और न ही कभी इस तरह जबरदस्ती की थी।
लेकिन अब सब कुछ पूरी तरह बिखरा हुआ लग रहा था। पूरा दिन मैं ऑफिस में चुपचाप बैठकर यही सोचती रही कि इस सबको हमेशा के लिए कैसे रोका जाए। शाम होते-होते मेरे मन में एक अजीब सा खयाल आया कि क्यों न एक दिन के लिए सारी हदें पार करके देख लिया जाए? अगर वह अपनी मर्जी से मेरे साथ पूरी तरह सबकुछ कर ले, तो शायद उसका वो पागलपन और बेचैनी थोड़ी शांत हो जाए।
मैं पहले ही उसके लंड को अपने मुँह में ले चुकी थी और उसे अपनी मुट्ठी में पकड़ चुकी थी, इसलिए अब उसे अपना शरीर पूरी तरह से सौंप देना मेरे लिए कोई बहुत बड़ी बात नहीं लग रही थी। शायद इसके बाद उसके मन की सारी चाहतें पूरी हो जातीं और फिर सब कुछ वापस आम हो जाता।
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यह बात सुनने में चाहे कितनी भी अजीब और बेवकूफी भरी लगे, लेकिन उस वक्त मुझे यही एक रास्ता दिखाई दे रहा था। इसलिए मैंने मन में तय कर लिया था कि आज रात मैं सारी हदें पार कर दूँगी। शाम को काम खत्म होने के बाद मैंने एक टैक्सी ली और सीधे अपार्टमेंट के लिए निकल पड़ी। “Didi Bhai Sex Story”
रास्ते भर मेरे दिल में एक अजीब सी झिझक और घबराहट बनी हुई थी, क्योंकि पिछले कई दिनों से मैं गोलू को रोकने की कोशिश कर रही थी ताकि वह आगे न बढ़े, और अब मैं खुद उसे पूरी छूट देने का मन बना चुकी थी। जब मैंने अपार्टमेंट का दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा, तो हॉल का नजारा देखकर मेरे पेट के अंदर कुछ टूटने जैसा लगा।
हॉल में मम्मी-पापा के साथ हमारे मकान मालिक भी बैठे हुए थे, और माहौल बहुत गंभीर लग रहा था। मेरे अंदर आते ही गोलू ने नजरें झुका लीं और मेरा सामना करने से बचने लगा। मम्मी की आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं और पापा के चेहरे पर बहुत उदासी थी। मुझे देखते ही मकान मालिक अपनी जगह से खड़े हुए और बिना कुछ कहे अपार्टमेंट से बाहर चले गए।
मैं कुछ पल अपनी जगह पर सुन्न रह गई और मेरे मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला। तभी गोलू ने मेरी तरफ देखा और बहुत धीमी और काँपती आवाज में कहा, “दीदी… मकान मालिक ने मम्मी-पापा को सब कुछ बता दिया है… कि हम यहाँ पति-पत्नी की तरह रहते हैं।” If you want next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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