Bank Me Chudai Kahani
मेरा नाम सीमा है। मैं इंदौर की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 44 साल है, और मैं 5 फीट 2 इंच की हूँ। मेरा बदन भरा हुआ है, चूचे 36D, कमर 32 इंच, और चूतड़ 44 इंच के हैं। मेरे चूचों के निप्पल गहरे भूरे रंग के हैं, जो उत्तेजना में सख्त और उभरे हुए हो जाते हैं। मेरी चूत चिकनी और गुलाबी है, जिसके होंठ मोटे और रसीले हैं। Bank Me Chudai Kahani
मुझे टाइट कपड़े पहनना पसंद है, खासकर जींस और गहरे गले वाले टॉप, जिनमें मेरे चूचे उभरकर दिखते हैं। मैं अक्सर ब्रा नहीं पहनती, जिससे मेरे निप्पल कपड़ों के ऊपर से हल्के-हल्के नजर आते हैं। मेरा तलाक 12 साल पहले हो चुका है, और तब से मैं अपनी चूत की आग अपने बेटे और उसके दोस्तों के लंड से बुझाती हूँ। वो कहानी फिर कभी।
बात तब की है जब मेरे बेटे ने कपड़ों का नया बिजनेस शुरू किया था। उसे पैसे की सख्त जरूरत थी, क्योंकि उसने डेढ़ लाख का सामान मार्केट से उधार लिया था। बिजनेस मेरे नाम पर था, तो लोन के लिए मुझे ही बैंक जाना पड़ा। मैंने एक दिन चुना और तैयार होने लगी।
मैंने अपनी अलमारी खोली और एक टाइट ब्लैक जींस निकाली, जो मेरे चूतड़ों को पूरी तरह चिपककर उनकी गोलाई को उभारती थी। ऊपर मैंने एक व्हाइट स्लीवलेस टॉप चुना, जिसका गला इतना गहरा था कि मेरे चूचों की घाटी साफ दिख रही थी। मैंने जानबूझकर ब्रा नहीं पहनी, ताकि मेरे निप्पल टॉप के ऊपर से उभरे हुए दिखें।
मैंने हल्का मेकअप किया, गुलाबी लिपस्टिक लगाई, और अपने लंबे, घने बाल खुले छोड़ दिए। शीशे में खुद को देखकर मैंने सोचा, “सीमा, आज तू इन अफसरों को पागल कर देगी।” बैंक पहुँचने पर मैंने देखा कि लोन काउंटर पर एक लड़का बैठा था। उसका नाम अर्णव था, उम्र करीब 30 साल, गोरा, हल्की दाढ़ी, और आँखों में शरारत।
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उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा, और उसकी नजर मेरे चूचों पर अटक गई। मैंने नोटिस किया कि वो मेरे टॉप की गहरी नेकलाइन में झांक रहा था। मैंने हल्का-सा मुस्कुराते हुए उससे लोन के बारे में बात शुरू की। उसने मेरे कागजात देखे, कुछ सवाल पूछे, और फिर बोला, “मैडम, आपका लोन तो हो सकता है, लेकिन इसके लिए आपको शनिवार को दोबारा आना होगा। उस दिन हम पूरी डिटेल में बात करेंगे।”
उसकी आवाज में कुछ छुपा हुआ था, जैसे वो कोई इशारा दे रहा हो। मैंने “ठीक है” कहा और उसे अपना नंबर देकर घर लौट आई। शनिवार की सुबह मैंने खास तैयारी की। बाथरूम में जाकर मैंने अपनी चूत के बाल साफ किए। शीशे में अपनी गुलाबी, चिकनी चूत को देखकर मैंने सोचा, “आज ये तीनों मेरी चूत का भोसड़ा बनाएंगे।”
मैंने एक काली थॉन्ग पैंटी पहनी, जो मेरी चूत को मुश्किल से ढक रही थी। पैंटी इतनी पतली थी कि मेरे चूत के होंठ उसके ऊपर से उभर रहे थे। फिर मैंने टाइट ब्लैक जींस पहनी, जो मेरे चूतड़ों को और उभार रही थी। ऊपर मैंने एक पिंक क्रॉप टॉप चुना, जो मेरे चूचों को कसकर पकड़ रहा था।
मेरे निप्पल टॉप के ऊपर से साफ दिख रहे थे। मैंने काले रंग की हाई हील सैंडल पहनीं, जो मेरी टांगों को और आकर्षक बना रही थीं। मैंने गहरी लाल लिपस्टिक लगाई और बालों को हल्का कर्ल करके खुला छोड़ दिया। जब मैं बैंक पहुँची, तो गेट बंद था। मैंने अर्णव को फोन किया।
उसने कहा, “मैडम, दो मिनट में आता हूँ।” थोड़ी देर बाद वो बैंक के अंदर से आया और मुझे अंदर ले गया। बैंक खाली था, और सन्नाटा ऐसा था कि मेरी सैंडल की खट-खट की आवाज गूंज रही थी। अंदर दो और मर्द बैठे थे। अर्णव ने उनका परिचय कराया। एक था अरुण सिंह, लोन डिपार्टमेंट का बॉस, उम्र करीब 40 साल, लंबा, गठीला, और चेहरे पर सख्ती। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी आँखें मेरे बदन को नाप रही थीं। दूसरा था निशांत, करीब 30 साल का, पतला लेकिन चालाक, और उसकी नजरें मेरे चूचों पर टिकी थीं। मैंने दोनों से हाथ मिलाया, और उनके गर्म स्पर्श से मेरी चूत में हल्का-सा गीलापन महसूस हुआ। अरुण ने गंभीर लहजे में कहा, “मैडम, आपका इनकम लोन के लिए काफी नहीं है। लोन देना मुश्किल होगा।”
ये सुनकर मेरे दिल में घबराहट हुई। मेरे बेटे ने डेढ़ लाख का सामान उधार लिया था, और ये लोन उसका भरोसा था। मैंने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “प्लीज सर, ऐसा न कहें। मेरे बेटे का बिजनेस दांव पर है। कुछ भी करूँगी, लेकिन लोन चाहिए।” अर्णव ने शरारती मुस्कान के साथ कहा, “मैडम, आप हमारा काम कर दो, हम आपका लोन पास कर देंगे।”
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मैं समझ गई कि बात चुदाई तक जा रही है। मेरी चूत पहले से ही गीली थी, लेकिन मैंने नाटक करते हुए कहा, “ये क्या बात कर रहे हो? मैं कोई रंडी नहीं हूँ!” अरुण ने ठंडे लहजे में जवाब दिया, “ठीक है, फिर आप जाइए। डेढ़ लाख का सामान कैसे चुकाएंगे, वो सोचिए।”
मैं चुप हो गई। मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। मन में डर था, लेकिन मेरी चूत की गर्मी मुझे उकसा रही थी। मैंने सोचा, “सीमा, तुझे तो चुदने में मजा आता है। तीन मर्दों के लंड एक साथ, ये मौका छोड़ना नहीं।” मैंने धीमे से कहा, “ठीक है, लेकिन ये बात यहीं रहनी चाहिए।”
तीनों की आँखें चमक उठीं। अर्णव और निशांत मेरे पास आए, जबकि अरुण अपनी कुर्सी पर बैठा रहा। निशांत ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसका चुंबन गहरा और भूखा था। उसने मेरे चूचों को टॉप के ऊपर से जोर-जोर से दबाना शुरू किया।
मेरे निप्पल सख्त हो गए, और टॉप के ऊपर से साफ दिख रहे थे। पीछे से अर्णव ने मेरी गर्दन पर अपने गर्म होंठ रखे और मेरी जींस का बटन खोल दिया। उसकी उंगलियाँ मेरी थॉन्ग के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगीं। मेरी पैंटी पहले से ही गीली थी, और उसकी उंगलियों ने उसे और भिगो दिया।
मैंने आँखें बंद कर लीं और “उम्म… आह्ह…” की सिसकारियाँ लेने लगी। निशांत ने मेरे पिंक क्रॉप टॉप को धीरे-धीरे ऊपर खींचा और उतार दिया। मेरे चूचे हवा में लटक रहे थे, गहरे भूरे निप्पल सख्त और उभरे हुए। निशांत ने एक चूचे को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी, और मैं “आह्ह… निशांत… और जोर से चूसो…” कहते हुए सिहर उठी। अर्णव ने मेरी जींस को नीचे खींच दिया, और मेरी काली थॉन्ग अब साफ दिख रही थी। मेरी चूत का गीलापन पैंटी पर दाग बना रहा था।
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अर्णव ने मेरे चूतड़ों को सहलाया और मेरी पैंटी को एक तरफ सरकाकर अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी। “उफ्फ… सीमा, तुम्हारी चूत तो रस से भरी है!” उसने कहा। मैंने जवाब में “हाँ… और करो… आह्ह…” कहा। मैंने आँखें खोलीं तो देखा कि अरुण अपनी कुर्सी पर बैठा अपने पैंट के ऊपर से अपने लंड को सहला रहा था।
उसकी आँखों में हवस थी। मैंने उसे देखकर एक शरारती मुस्कान दी। अर्णव और निशांत ने अपने कपड़े उतार दिए। अब वो सिर्फ अंडरवियर में थे, और उनके अंडरवियर में तंबू बना हुआ था। मैंने अपनी सैंडल नहीं उतारी, क्योंकि मुझे पता था कि ये मुझे और सेक्सी बनाती हैं। मैं सिर्फ थॉन्ग और सैंडल में थी।
मैं घुटनों पर बैठ गई और अर्णव का अंडरवियर नीचे खींचा। उसका लंड बाहर निकला, करीब 7 इंच लंबा, 3 इंच मोटा, और उसका सुपारा गुलाबी और चमकदार था। मैंने उसे देखकर सोचा, “हाय राम, ये तो मेरी चूत फाड़ देगा!” फिर मैंने निशांत का अंडरवियर उतारा। उसका लंड भी 7 इंच लंबा और मोटा था, सुपारा लाल और सख्त।
मेरी चूत में गीलापन और बढ़ गया। मैं डर रही थी, लेकिन मन में उत्साह भी था कि आज ये दोनों मेरी चूत और गांड को रगड़ डालेंगे। मैंने बारी-बारी से उनके लंड चूसना शुरू किया। पहले अर्णव का लंड मेरे मुँह में था। मैंने उसका सुपारा जीभ से चाटा और “उम्म… उम्म…” की आवाजें निकालीं।
उसका लंड मेरे गले तक जा रहा था। फिर मैंने निशांत का लंड मुँह में लिया और अर्णव का लंड अपने हाथ से सहलाने लगी। दोनों के लंड इतने बड़े थे कि मेरे मुँह में मुश्किल से समा रहे थे। मैं उनके सुपारे को जीभ से चाट रही थी, और उनके लंड का नमकीन स्वाद मेरे मुँह में घुल रहा था।
“सीमा, तू तो लंड चूसने में माहिर है!” निशांत ने कहा। मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “बस अभी तो शुरूआत है!” तभी अरुण ने मेरे दोनों हाथ पीछे किए और अपनी बेल्ट से बांध दिए। उसने अपने कपड़े उतार दिए, और उसका लंड बाहर निकला—8 इंच लंबा, मोटा, और सुपारा गहरा लाल। “Bank Me Chudai Kahani”
उसने मुझे टेबल पर लिटा दिया, इस तरह कि मेरा मुँह और चूत टेबल के किनारे लटक रहे थे। अरुण ने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया और मेरे मुँह को चोदने लगा। उसका लंड मेरे गले तक जा रहा था, और मैं “गूं… गूं…” की आवाजें निकाल रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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अर्णव मेरे चूचों को चूस रहा था, और उसकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी। निशांत मेरी चूत को जीभ से चाट रहा था। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को रगड़ रही थी, और मैं “आह्ह… निशांत… और चाटो… मेरी चूत को चूस लो!” चिल्ला रही थी।
मेरी चूत से पानी टपक रहा था, जो टेबल पर गिर रहा था। करीब 15 मिनट तक वो मेरे मुँह और चूत को चोदते रहे। फिर अरुण ने मुझे उठाया और एक नीची कुर्सी पर बैठ गया। मैंने उसका लंड अपनी चूत पर टिकाया और धीरे-धीरे उसकी गोद में बैठ गई।
उसका मोटा लंड मेरी चूत में फंस गया, और मैं “आह्ह… हाय… कितना बड़ा है!” चिल्लाई। अरुण ने मेरे चूतड़ों को पकड़कर मुझे ऊपर-नीचे करने लगा। मेरी चूत से “फच… फच…” की आवाजें गूंज रही थीं। मैं “उफ्फ… अरुण… मेरी चूत फाड़ दो!” चिल्ला रही थी। “Bank Me Chudai Kahani”
निशांत मेरे सामने आया और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मैं “गूं… गूं…” करते हुए उसका लंड चूस रही थी। अर्णव पीछे आया और मेरी गांड के छेद को सहलाने लगा। उसने अपने लंड पर थूक लगाया और मेरी गांड के छेद पर टिकाकर एक जोरदार धक्का मारा।
मैं दर्द से चिल्लाई, “उफ्फ… मर गई… धीरे करो!” उसका आधा लंड मेरी गांड में घुस गया था। अरुण ने भी उसी वक्त अपनी कमर उठाकर अपना लंड मेरी चूत की गहराई में डाल दिया। अब मेरे तीनों छेद में लंड थे। अरुण मेरी चूत चोद रहा था, अर्णव मेरी गांड, और निशांत मेरा मुँह।
मैं “आह्ह… उफ्फ… चोदो मुझे… और जोर से!” चिल्ला रही थी। मेरी चूत से पानी टपक रहा था, और कमरे में “फच… फच…” और “गूं… गूं…” की आवाजें गूंज रही थीं। अर्णव ने मेरी गांड में धीरे-धीरे पूरा लंड डाल दिया और बोला, “सीमा, तेरी गांड तो बहुत टाइट है!” मैंने जवाब दिया, “हाँ… फाड़ दो इसे… आह्ह…”
करीब 20 मिनट तक वो तीनों मुझे चोदते रहे। अचानक निशांत का शरीर अकड़ा। उसने मेरा सिर पकड़कर अपना लंड मेरे गले तक डाला और अपनी मलाई छोड़ दी। उसका गर्म, नमकीन माल मेरे गले में उतर गया। मैंने उसकी एक-एक बूंद पी ली। उसने अपना लंड बाहर निकाला, जो मेरे थूक से चमक रहा था। “Bank Me Chudai Kahani”
अरुण और अर्णव भी अब झड़ने वाले थे। मैंने जल्दी से उनकी गोद से उठकर उनके लंड को बारी-बारी से चूसना शुरू किया। पहले अर्णव का लंड, फिर अरुण का। दोनों के लंड से गर्म माल का फव्वारा छूटा, जो मेरे मुँह, चूचों, और गर्दन पर गिरा। मैंने उनके लंड चाट-चाटकर साफ किए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे चूचे उनके माल से चिपचिपे हो गए थे। थोड़ी देर बाद तीनों के लंड फिर खड़े हो गए। इस बार निशांत ने मुझे टेबल पर लिटाया और मेरी टांगें अपने कंधों पर रखीं। उसने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा और एक जोरदार धक्का मारा। मैं “आह्ह… निशांत… मेरी चूत फाड़ दो!” चिल्लाई।
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उसने मेरी चूत में गहरे धक्के मारने शुरू किए, और “फच… फच…” की आवाजें गूंजने लगीं। अर्णव मेरे मुँह में अपना लंड डालकर चोद रहा था, और अरुण मेरी गांड में अपना लंड पेल रहा था। मैं “उम्म… आह्ह… और जोर से…” की सिसकारियाँ ले रही थी। तीनों ने बारी-बारी से मेरे छेद बदले। “Bank Me Chudai Kahani”
कभी निशांत मेरी गांड चोदता, तो अर्णव मेरी चूत, और अरुण मेरा मुँह। हर बार वो मेरे चूचों को दबाते, मेरे निप्पल चूसते, और मेरी चूत को रगड़ते। मैं बार-बार झड़ रही थी, और मेरी चूत से पानी टपक रहा था। तीन घंटे तक वो मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदते रहे। एक बार निशांत ने मुझे डॉगी स्टाइल में चोदा, जबकि अर्णव मेरे मुँह में था।
फिर अरुण ने मुझे अपनी गोद में बिठाकर मेरी चूत में लंड डाला, और अर्णव मेरी गांड में। मैं “आह्ह… उफ्फ… मेरी चूत… मेरी गांड… चोदो!” चिल्ला रही थी। आखिर में, उन्होंने मेरे लोन के फॉर्म पर साइन करवाए और मुझे जाने दिया। मेरी चूत और गांड इतनी रगड़ चुकी थी कि मैं मुश्किल से चल पा रही थी। मेरी थॉन्ग पूरी तरह गीली थी, और मेरे चूचे उनके माल से चिपचिपे थे। मैंने अपनी जींस और टॉप पहना, लेकिन मेरी सैंडल की खट-खट अब भी गूंज रही थी। एक हफ्ते बाद मेरे अकाउंट में लोन का पैसा आ गया।
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