Chhoti Bahan Chudai Story
धर्मेन्द्र करीब तेईस साल का है। अच्छी बॉडी वाला, अभी शादी नहीं हुई। घर में मम्मी-पापा के अलावा दो बहनें हैं – उन्नीस साल की शिखा और इक्कीस साल की आँचल। दोनों ही एकदम ताज़ा-ताज़ा, गोरी-चिट्टी, गोल-गोल संतरे जैसी चूचियाँ, पतली कमर, चिकना पेट और कयामत वाली गांड। Chhoti Bahan Chudai Story
शिखा दिखने में आँचल से ज्यादा खूबसूरत थी, लेकिन आँचल भी कम नहीं थी। कॉलोनी के लगभग सभी लड़के दोनों बहनों को देखकर आहें भरते थे। धर्मेन्द्र के पापा बिजनेस में व्यस्त रहते, अक्सर बाहर जाते। कई बार मम्मी को भी साथ ले जाते। ऐसे में घर की सारी जिम्मेदारी धर्मेन्द्र पर आ जाती।
लेकिन इन जिम्मेदारियों के बीच भी वह अपनी सेक्सी बहनों को देखकर अपने ख्वाहिशों को दबा नहीं पाता था। धर्मेन्द्र को भाई-बहन की चुदाई वाली कहानियाँ सबसे ज्यादा पसंद थीं। ऐसी कहानियाँ पढ़कर वह अपनी बहनों को याद करके मुठ मारता। यहीं से उसके मन में अपनी बहनों को चोदने की तमन्ना पनपने लगी थी।
वह कहानियाँ पढ़-पढ़कर बहनों को पटाने के तरीके सोचता, लेकिन उन्हें आजमाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। डर इंसान को बहुत रोकता है। आखिर जब कंट्रोल करना मुश्किल हो गया, तो उसने सबसे पहले छोटी बहन शिखा को पटाने का फैसला किया। मोबाइल सबसे अच्छा जरिया लगा।
उसने प्लान बनाया कि शिखा को भाई-बहन की चुदाई वाली कहानियाँ पढ़ने को देगा। लेकिन कैसे? बहुत सोचने के बाद उसने एक दोस्त की आईडी से नया सिम लिया और व्हाट्सएप पर शिखा के नंबर पर चार-पाँच भाई-बहन चुदाई की कहानियाँ भेज दीं।
उस वक्त शिखा धर्मेन्द्र के पास ही बैठी थी। अनजान नंबर से आए मैसेज को देखकर उसने चेक किया तो सेक्स कहानियाँ थीं। शिखा ने धर्मेन्द्र के पास बैठे-बैठे थोड़ी पढ़ी। फिर शर्म से लाल होकर मोबाइल बंद किया और अपने कमरे में चली गई।
धर्मेन्द्र को यकीन था कि शिखा जरूर पूरी कहानी पढ़ेगी। वह चुपके से उसके कमरे के पास गया तो देखा – शिखा सच में कहानियाँ पढ़ रही थी और उसकी आँखों में वासना की लाली छाई हुई थी। धर्मेन्द्र को लगा उसकी चाल कामयाब हो रही है। शिखा कहानियाँ पढ़ती रही और धर्मेन्द्र छुपकर देखता रहा।
पढ़ते-पढ़ते शिखा गर्म हो गई। उसकी साँसें तेज होने लगीं। उसका दायाँ हाथ धीरे-धीरे अपनी स्कर्ट के किनारे पर पहुँचा। फिर स्कर्ट के नीचे सरक गया। शिखा ने अपनी जाँघों को हल्का सा फैलाया। उँगलियाँ पेंटी के ऊपर से चूत की लकीर पर फिसलने लगीं। वह धीरे-धीरे पेंटी के किनारे से हाथ अंदर डाल रही थी।
आखिरकार उसकी मध्यमा उंगली सीधे चूत के होंठों पर आ गई। वह उंगली को ऊपर-नीचे सरकाने लगी। चूत के होंठों को अलग-अलग करके क्लिटोरिस पर हल्का दबाव देने लगी। उसकी साँसें और तेज हो गईं। होंठ काटते हुए वह कहानी पढ़ रही थी और उंगली की रफ्तार बढ़ा रही थी।
धर्मेन्द्र दरवाजे की दरार से सब देख रहा था। उसका लंड बरमूडा में सख्त होकर तंबू बना रहा था। शिखा की उंगली अब पूरी तरह चूत के अंदर जा रही थी। वह धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रही थी। दूसरी उंगली भी शामिल हो गई। अब दो उँगलियाँ चूत में घुस-बाहर हो रही थीं।
शिखा की कमर हल्की-हल्की उठ रही थी। वह बेड पर लेट गई। स्कर्ट पूरी तरह कमर तक ऊपर चढ़ गई। पेंटी अब जाँघों के बीच लटक रही थी। उसने पेंटी को पूरी तरह उतार फेंका। अब उसकी चूत पूरी नंगी थी। गोरी जाँघों के बीच गुलाबी चूत चमक रही थी।
उसने एक हाथ से चूत के होंठ फैलाए और दूसरी उंगली से क्लिटोरिस को तेजी से रगड़ने लगी। उसकी आँखें बंद हो गईं। मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकल रही थीं। “आह्ह… उफ्फ…” जैसे शब्द निकल रहे थे। उसकी चूत से रस टपकने लगा। उँगलियाँ अब तेजी से अंदर-बाहर हो रही थीं। चूत की दीवारों को रगड़ रही थीं।
शिखा का बदन काँपने लगा। उसकी कमर ऊपर उठी। टाँगें फैल गईं। उँगलियाँ और तेज चलीं। आखिरकार एक लंबी सिसकारी के साथ उसकी चूत से रस फूट पड़ा। वह झड़ गई। धर्मेन्द्र के मन में आया कि अभी लोहा गर्म है, मार दो हथौड़ा। लेकिन जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती थी, इसलिए उसने सब्र किया।
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थोड़ी देर बाद उसने शिखा को “हैलो” मैसेज किया। जवाब आया – “हू आर यू?”
धर्मेन्द्र ने लिखा – “मैं आपका दीवाना हूँ। आपको देखते ही बाहों में भरने, चूमने और चुदाई करने का मन करता है।”
शिखा ने गुस्से में लिखा – “बकवास बंद करो। मैं आपको जानती भी नहीं, फिर हिम्मत कैसे हुई? दोबारा मैसेज किया तो भाई को बता दूँगी।”
धर्मेन्द्र ने हँसते हुए पूछा – “कहानियाँ कैसी लगीं?”
शिखा का कोई जवाब नहीं आया।
धर्मेन्द्र ने फिर लिखा कि अगर और कहानियाँ चाहिए तो बता देना। फिर एक कहानी और भेज दी।
शिखा ने फिर पढ़ना शुरू किया। इस बार धर्मेन्द्र ने देखा कि उसने पेंटी उतार दी, स्कर्ट ऊपर की और एक उंगली चूत में डालकर हिलाने लगी। धर्मेन्द्र ने चुपके से उसका वीडियो बना लिया। अगले दो दिन उसने कोई मैसेज नहीं किया। तीसरे दिन शिखा का “हैलो” आया। धर्मेन्द्र का दिल जोरों से धड़का। उसने तुरंत जवाब दिया।
शिखा ने लिखा – अगर और कहानियाँ हैं तो भेज दो।
धर्मेन्द्र ने पूछा – पसंद आईं?
शिखा ने हाँ कहा और पूछा – क्या ये सब सच होती हैं?
धर्मेन्द्र ने झूठ बोला – हाँ, मैं भी अपनी सगी बहन के साथ करता हूँ। बिल्कुल सेफ है, घर की इज्जत घर में ही रहती है।
शिखा ने “कमीना” लिखा।
धर्मेन्द्र ने पूछा – क्या कहानियाँ पढ़कर तेरा मन नहीं करता कि तू भी अपने भाई के साथ मजे ले?
शिखा ने मना किया और कहा – मुझे सेक्स में कोई रुचि नहीं।
धर्मेन्द्र ने कहा – फिर और कहानियाँ क्यों माँग रही हो?
शिखा बोली – बस टाइमपास के लिए।
धर्मेन्द्र अब खुलकर कमीना हो गया। वह चुपके से शिखा के पास बैठ गया और पूछा – क्या तूने कभी अपने भाई का लंड देखा है?
शिखा ने मैसेज पढ़कर धर्मेन्द्र की तरफ देखा और लिखा – नहीं।
धर्मेन्द्र ने पूछा – दिल करता है देखने का?
शिखा ने मना कर दिया। धर्मेन्द्र उसके चेहरे के भाव पढ़ रहा था। शिखा गर्म हो रही थी और बार-बार धर्मेन्द्र की बरमूडा में बने तंबू की तरफ देख रही थी। उसे पता नहीं था कि यह उसका अपना भाई है।
धर्मेन्द्र ने मैसेज किया – अगर तेरा भाई तुझे चोदना चाहे तो देगी?
शिखा ने गालियाँ लिखीं और नेट बंद कर दिया। धर्मेन्द्र उठा और शिखा के बिल्कुल पास बैठ गया। उसने फनी वीडियो दिखाने के बहाने शिखा से सटकर बैठा। लेकिन उसका ध्यान वीडियो पर कम, धर्मेन्द्र के टावर पर ज्यादा था। धर्मेन्द्र ने बेशर्मी से अपने लंड को पकड़कर हल्का दबाया, जैसे सेट कर रहा हो।
उसका लंड सात इंच लंबा और ढाई इंच मोटा था। बरमूडा का कपड़ा इतना पतला था कि तंबू साफ उभरकर दिख रहा था, सिरे पर गीला धब्बा भी बनने लगा था। शिखा ने नजरें फेर लीं और तेजी से अपने कमरे में चली गई। धर्मेन्द्र की लगाई आग अब भड़क रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
कुछ देर बाद वह शिखा के कमरे के पास गया। दरवाजा बंद था, लेकिन धर्मेन्द्र को पता था कि खिड़की के पास एक छोटा सा छेद है जहाँ से झाँका जा सकता है। वहाँ पहुँचा तो शिखा बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी सलवार थोड़ी नीचे खिसकी हुई थी और उसने एक हाथ अपनी चूत में डाल रखा था।
वह धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर कर रही थी। उसकी साँसें तेज थीं, होंठ काट रही थी और आँखें बंद थीं। दूसरा हाथ उसने अपनी एक चूची पर रखा हुआ था, जिसे वह हल्के-हल्के मसल रही थी। अगर घर में कोई और न होता तो शायद वहीँ घुस जाता। लेकिन मम्मी और आँचल घर पर थे।
धर्मेन्द्र ने फिर दो-तीन दिन कोई मैसेज नहीं किया। तीसरे दिन शिखा ने फिर कहानियाँ माँगीं। धर्मेन्द्र ने दो-तीन कहानियाँ भेजीं। शिखा ने पढ़ीं और फिर उंगली चूत में डाल ली। अब धर्मेन्द्र का मन मचल रहा था। शाम को जब मम्मी और आँचल रसोई में व्यस्त थे, तो वह शिखा के कमरे में गया। शिखा मोबाइल पर कहानी पढ़ रही थी।
धर्मेन्द्र बिल्कुल चिपककर बैठ गया और कंधे पर हाथ रखकर बोला – क्या बात है शिखा, आजकल सारा दिन मोबाइल से चिपकी रहती हो। भाई से बात करने का टाइम भी नहीं?
शिखा घबरा गई, मोबाइल साइड में रख दिया। धर्मेन्द्र ने उसके शरीर में कंपन महसूस किया। धर्मेन्द्र ने हाथ धीरे से बगल में सरकाया और शिखा को अपनी बाहों में खींच लिया। ऐसा करते ही उसका हाथ शिखा की एक चूची पर पड़ गया। उसने हल्के से दबाया, चूची नरम और गर्म थी, निप्पल सख्त होकर कपड़े के ऊपर से महसूस हो रहा था।
शिखा उछल पड़ी और रसोई की तरफ भाग गई। उस दिन के बाद धर्मेन्द्र रोज शिखा को छूने की कोशिश करता। पहले शिखा झटके से उठ जाती और दूर हो जाती, लेकिन धीरे-धीरे उसे भी अच्छा लगने लगा। अब वह खुद धर्मेन्द्र के पास चिपककर बैठती। धर्मेन्द्र पहले उसके गाल पर हल्का सा चूमता, फिर माथे पर।
बीच-बीच में उसकी चूचियों को कपड़े के ऊपर से दबा देता। कभी-कभी हाथ उसकी कमर पर सरकाता और हल्के से दबाता। सब कुछ मम्मी और आँचल से छुपाकर। दोनों को एक-दूसरे का स्पर्श अब अच्छा लगने लगा था। ऐसे ही पंद्रह दिन निकल गए।
और उस दिन… धर्मेन्द्र शाम चार बजे कॉलेज से लौटा। घर में कोई नहीं था। मम्मी और आँचल के कमरे खाली थे। वह सीधा शिखा के कमरे के पास पहुँचा। दरवाजा थोड़ा सा खुला था। अंदर झाँकते ही उसकी साँस रुक गई। शिखा बिस्तर पर लेटी हुई थी।
उसकी स्कर्ट पूरी तरह ऊपर चढ़ी हुई थी और पेंटी जाँघों के बीच तक नीचे खिसकी हुई थी। एक हाथ में मोबाइल था, जिसमें वह कोई कहानी पढ़ रही थी। दूसरा हाथ उसकी चूत पर था। उसकी मध्यम उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी। चूत गीली हो चुकी थी, उंगली पर चमकदार रस लग रहा था।
उसकी साँसें तेज थीं, होंठ हल्के से कटे हुए थे और आँखें बंद करके वह मजा ले रही थी। धर्मेन्द्र को देखते ही शिखा घबरा गई। उसने जल्दी से उंगली निकाली, पेंटी ऊपर खींची, स्कर्ट नीचे की और बाथरूम की तरफ भागी। दरवाजा बंद करके अंदर घुस गई।
धर्मेन्द्र ने आवाज दी – शिखा… शिखा सुन रही हो?
जवाब नहीं आया।
धर्मेन्द्र ने फिर कहा – शिखा… अगर एक मिनट में बाहर नहीं आई तो मम्मी को सब बता दूँगा।
कुछ सेकंड बाद दरवाजा खुला। शिखा डरते हुए बाहर आई। उसके चेहरे पर शर्म और डर था। आँखों में आँसू छलक आए थे। धर्मेन्द्र ने उसका हाथ पकड़ा, उसे बेड पर बैठाया और पास बैठ गया। “Chhoti Bahan Chudai Story”
उसने प्यार से पूछा – ये क्या कर रही थी पगली?
शिखा ने सिर झुका लिया और रोते हुए बोली – भैया… प्लीज मम्मी को मत बताना… ये गलती दोबारा नहीं होगी।
धर्मेन्द्र को सुनहरा मौका मिल गया। उसने शिखा को अपनी बाहों में खींच लिया और सीने से लगा लिया। उसका एक हाथ शिखा की पीठ पर फेर रहा था, दूसरा धीरे-धीरे उसकी कमर पर सरकाया। फिर उसने हल्के से शिखा की चूची पर हाथ रख दिया और कपड़े के ऊपर से हल्का दबाया। शिखा का शरीर काँप उठा, लेकिन इस बार वह दूर नहीं हुई।
धर्मेन्द्र ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा – कोई बात नहीं… इस उम्र में ऐसा होता है। तू मेरी अच्छी बहन है। मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा।
उसने शिखा के गाल पर चूम लिया। फिर माथे पर। शिखा अभी भी रो रही थी, लेकिन अब उसकी साँसें थोड़ी तेज हो गई थीं।
धर्मेन्द्र ने पूछा – वैसे मम्मी और आँचल कहाँ हैं?
शिखा ने धीमी आवाज में कहा – मार्केट गए हैं… सामान लेने…
धर्मेन्द्र को सुनहरा मौका मिल गया था शिखा को अपना बनाने का। उसने शिखा को सीने से लगा लिया और चुप करवाने के बहाने उसके शरीर पर हाथ घुमाने लगा। उसकी हथेलियाँ धीरे-धीरे शिखा की कमर पर फिरने लगीं, फिर पीठ की ओर बढ़ीं। शिखा का शरीर अभी भी हल्का काँप रहा था।
“कोई बात नहीं शिखा… इस उम्र में ये सब हो जाता है। तू मेरी अच्छी बहन है ना… मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा।
शिखा चुप हुई तो धर्मेन्द्र ने उसका चेहरा ऊपर उठाया। उसकी उँगलियाँ शिखा के गालों पर रुकीं। आँखों से बहते आँसुओं को देखकर उसने धीरे से अपने होंठ आगे बढ़ाए और उन आँसुओं को चूम लिया। एक-एक बूँद को अपने होंठों से सोखते हुए वह शिखा की आँखों के पास पहुँचा। शिखा की आँखें बंद हो गईं। “Chhoti Bahan Chudai Story”
धर्मेन्द्र ने मौके का फायदा उठाया और अपने होंठ शिखा के जवान, रसीले होंठों पर रख दिए। पहले तो सिर्फ हल्का स्पर्श था, जैसे होंठों को महसूस कर रहा हो। फिर उसने धीरे से दबाव बढ़ाया। शिखा ने छूटने की कोशिश की, अपने हाथों से धर्मेन्द्र की छाती पर धक्का दिया, लेकिन धर्मेन्द्र की मजबूत बाँहों की पकड़ में वह नहीं छूट पाई।
धर्मेन्द्र अब उसके रसीले होंठों का रस पीने में जुट गया। उसने अपने होंठों को शिखा के निचले होंठ पर दबाया, फिर धीरे से चूसा। शिखा के मुँह से एक हल्की सिसकारी निकली। धर्मेन्द्र ने जीभ से उसके होंठों की किनारियों को सहलाया, फिर धीरे-धीरे जीभ को अंदर डाला। शिखा की जीभ से टकराई तो पहले तो वह सिकुड़ गई, लेकिन धर्मेन्द्र ने धैर्य से उसे सहलाया, चाटा, चूसा। धीरे-धीरे शिखा का प्रतिरोध कम होने लगा।
कुछ देर छटपटाने के बाद शिखा ने समर्पण कर दिया। उसका शरीर ढीला पड़ने लगा। अब वह धर्मेन्द्र के होंठों का जवाब देने लगी थी। दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपट रही थीं। धर्मेन्द्र ने होंठ चूमते हुए अपना दायाँ हाथ धीरे से शिखा की मुलायम चूची पर रखा। पहले तो सिर्फ हथेली से छुआ, फिर हल्के से दबाया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
शिखा की साँसें तेज हो गईं। उसकी चूची तन गई। धर्मेन्द्र ने अँगूठे से निप्पल को सहलाया, फिर धीरे-धीरे मसलने लगा। शिखा अब धर्मेन्द्र से चिपकती जा रही थी। उसकी बाँहें अनजाने में धर्मेन्द्र की कमर पर लिपट गईं। धर्मेन्द्र ने शिखा को खड़ा किया। अब दोनों आमने-सामने थे। उसने शिखा के टॉप के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे ऊपर करने लगा। शिखा ने दोनों हाथों से रोकने की कोशिश की।
“ये सब ठीक नहीं है भाई… हमें ऐसा नहीं करना चाहिए… आखिर हम बहन-भाई हैं।”
“शिखा, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ… बहुत दिनों से तुम्हें अपना बनाने का सपना देख रहा हूँ। आज अगर मेरा सपना पूरा होने जा रहा है तो प्लीज मुझे मत रोक।”
शिखा “नहीं भाई नहीं” करती रही, लेकिन उसकी आवाज अब कमजोर हो चुकी थी। धर्मेन्द्र ने एक न सुनी और टॉप को पूरी तरह ऊपर खींचकर उतार दिया। शिखा ने ब्रा नहीं पहनी थी। टॉप उतरते ही उसकी दोनों संतरे के साइज की तनी हुई, गुलाबी निप्पल वाली चूचियाँ धर्मेन्द्र के सामने आ गईं। वे हल्के-हल्के साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। धर्मेन्द्र को जैसे कुबेर का खजाना मिल गया। उसकी आँखें चमक उठीं। “Chhoti Bahan Chudai Story”
उसने दोनों चूचियों को अपने हाथों में थामा। पहले तो सिर्फ हथेलियों से उन्हें सहलाया, उनकी गर्माहट और मुलायमियत को महसूस किया। फिर धीरे-धीरे मसलने लगा। अँगूठे और तर्जनी से निप्पलों को पकड़कर हल्का सा खींचा, फिर छोड़ा। शिखा के मुँह से सिसकारी निकली। धर्मेन्द्र ने एक चूची को मुँह के पास लाया और पहले तो सिर्फ होंठों से छुआ। फिर जीभ की नोक से निप्पल को चाटा। शिखा का शरीर काँप उठा।
अंत में उसने पूरी चूची मुँह में ले ली। गर्म, मुलायम गोले को मुँह में भरते हुए उसने जोर से चूसा। जीभ से निप्पल को गोल-गोल घुमाया, हल्के से दाँतों से काटा। शिखा के जवान जिस्म को पहली बार किसी मर्द के हाथों और मुँह का ऐसा मजा मिला था। वह मस्ती के मारे काँपने लगी। उसकी साँसें तेज और गहरी हो गईं।
धर्मेन्द्र बेड पर बैठे-बैठे नीचे खड़ी शिखा की चूचियाँ चूस रहा था। उसका एक हाथ शिखा की नंगी पीठ पर था, जो धीरे-धीरे नीचे की ओर सरक रही थी। दूसरा हाथ उसके गदराए, गोल चूतड़ों पर पहुँच गया। उसने दोनों गालों को जोर से दबाया, फिर मसलने लगा। शिखा की कमर झुक गई और वह धर्मेन्द्र के मुँह में अपनी चूची और गहराई से धकेलने लगी।
चूचियाँ चूसते-चूसते धर्मेन्द्र ने अपना एक हाथ शिखा की स्कर्ट की कमरबंद पर ले जाकर हुक खोल दिया। स्कर्ट का बटन खुलते ही वह धीरे-धीरे नीचे सरकने लगी। धर्मेन्द्र ने हल्का सा झटका दिया तो स्कर्ट पल भर में जमीन पर गिर गई। शिखा अब सिर्फ गीली पेंटी में खड़ी थी, उसकी जाँघें हल्की काँप रही थीं।
धर्मेन्द्र ने अपना दायाँ हाथ सीधे शिखा की कुंवारी चूत पर रख दिया। पेंटी के पतले कपड़े के ऊपर से ही चूत की गर्माहट महसूस हो रही थी, जैसे कोई भट्टी जल रही हो। पूरी पेंटी कामरस से सराबोर थी, कपड़ा चिपचिपा और गीला हो चुका था। धर्मेन्द्र ने उँगलियों से हल्के से दबाया तो शिखा की सिसकारी निकल गई। “Chhoti Bahan Chudai Story”
धर्मेन्द्र धीरे से घुटनों के बल बैठ गया। उसने शिखा की टाँगों को थोड़ा-थोड़ा अलग किया। शिखा की जाँघें अब फैली हुई थीं। धर्मेन्द्र ने अपना मुँह आगे बढ़ाया और पेंटी के ऊपर से ही चूत पर होंठ रख दिए। पहले तो सिर्फ हल्के से चूमा, फिर जीभ बाहर निकालकर पेंटी के गीले हिस्से पर फेरने लगा। जीभ के हर स्पर्श पर शिखा का शरीर सिहर उठता।
शिखा की टाँगें अब जवाब देने लगीं। घुटने कमजोर पड़ रहे थे, वह खड़ी नहीं रह पा रही थी। उसने धर्मेन्द्र के कंधों पर हाथ रखकर खुद को संभालने की कोशिश की। धर्मेन्द्र ने अब पेंटी के किनारे पकड़े और धीरे-धीरे जाँघों से नीचे खींच दिया। पेंटी घुटनों तक आते ही शिखा की सुनहरी, महीन बालों से हल्के ढकी गुलाबी कुंवारी चूत पूरी तरह नंगी हो गई।
चूत की दोनों फाँकें गीली चमक रही थीं, क्लिटोरिस हल्का सा तना हुआ था। धर्मेन्द्र ने बिना एक पल गँवाए जीभ चूत पर फेर दी। जीभ के पहले स्पर्श पर ही शिखा की चूत ने और कामरस छोड़ दिया। गर्म, चिपचिपा रस धर्मेन्द्र की जीभ पर फैल गया। धर्मेन्द्र ने जीभ को और जोर से चलाया। पहले तो बाहर की फाँकों को चाटा, फिर जीभ की नोक से क्लिटोरिस को गोल-गोल घुमाया।
शिखा की सिसकारियाँ तेज हो गईं। धर्मेन्द्र ने जीभ को अंदर तक डालने की कोशिश की, चूत की दीवारों को चाटा और सारा रस चूस लिया। झड़ने से शिखा का बदन थोड़ा ढीला हुआ। उसकी साँसें तेज थीं, आँखें बंद। धर्मेन्द्र ने उसे सहारा देकर बेड पर लिटा दिया। शिखा पीठ के बल लेट गई, उसकी चूचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। शिखा को लिटाने के बाद धर्मेन्द्र खड़ा हुआ। “Chhoti Bahan Chudai Story”
उसने जल्दी से अपनी पैंट की बेल्ट खोली, जिप नीचे की और पैंट साथ अंडरवियर को घुटनों तक सरका दिया। उसका लंबा, मोटा, तना हुआ लंड बाहर आया। सुपाड़ा लाल और चमकदार था, नसें उभरी हुईं। मोटा लंड देख शिखा घबरा गई। उसकी आँखें फैल गईं, शायद पहली बार इतने नजदीक से किसी मर्द का लंड देख रही थी। धर्मेन्द्र ने लंड को शिखा के मुँह के पास ले जाकर होंठों से लगाया। शिखा ने तुरंत मुँह फेर लिया।
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“भाई, मुँह में मत लगाओ… ये गंदा है!”
“पगली, जिसे तू गंदा कह रही है, लड़कियाँ तरसती हैं इसे मुँह में लेने को। एक बार लेकर देख, फिर बार-बार चूसने का मन न करे तो कहना।”
शिखा ना-ना करती रही, सिर हिलाती रही लेकिन धर्मेन्द्र ने धीरे से उसका चेहरा पकड़ा। उसने सुपाड़े को शिखा के होंठों पर रगड़ा, फिर हल्का दबाव देकर मुँह में घुसा दिया। शिखा तड़प उठी, आँखें खुल गईं, लेकिन बेबस थी। शुरू में उसने बुझे मन से जीभ चलाई, सिर्फ सुपाड़े को छुआ।
फिर धीरे-धीरे कामरस का हल्का नमकीन स्वाद जीभ पर लगा। शिखा को अजीब सा मजा आने लगा। उसने अनजाने में जीभ को और आगे बढ़ाया। अब वह मस्ती में लंड को आइसक्रीम की तरह चाटने-चूसने लगी। पहले सुपाड़े को चाटा, फिर जीभ से नसों के साथ ऊपर-नीचे फेरी। धर्मेन्द्र का लंड और सख्त हो गया।
सगी बहन ऐसा करती देख धर्मेन्द्र सातवें आसमान पर था। उसकी मस्ती भरी आहें और सिसकारियाँ निकल रही थीं। वह धीरे-धीरे कमर हिलाने लगा, लंड को शिखा के मुँह में और गहराई तक धकेलने लगा। धर्मेन्द्र ने शिखा को धीरे से सीधा किया और बेड पर लेटते हुए 69 की पोजीशन में आ गया।
उसने अपना लंड फिर से शिखा के मुँह के पास ले जाकर होंठों पर रख दिया, जबकि अपना मुँह शिखा की अभी भी गीली और गरम चूत पर लगा दिया। जीभ बाहर निकालकर उसने चूत की फाँकों को सहलाया, फिर क्लिटोरिस पर हल्के से दबाव डाला। दोनों भाई-बहन अब पूरी तरह मस्त हो चुके थे। “Chhoti Bahan Chudai Story”
वे एक-दूसरे के यौन अंगों को चाट-चूम रहे थे, दिन-दुनिया से बेखबर। धर्मेन्द्र की जीभ चूत की गहराई तक जाती, रस चूसती, जबकि शिखा अब उत्साह से लंड को मुँह में ले रही थी। वह सुपाड़े को चूसती, जीभ से नसों को सहलाती, कभी गहराई तक ले जाती तो कभी बाहर निकालकर चाटती। धर्मेन्द्र की आहें और शिखा की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “Chhoti Bahan Chudai Story”
कुछ देर बाद शिखा की चूत से तेज अमृत वर्षा हुई। उसका शरीर काँप उठा, कमर ऊपर उठी और चूत सिकुड़ती हुई रस छोड़ने लगी। धर्मेन्द्र ने सारा रस जीभ से चाट लिया, चूत को और गहराई से चूसा। उसी पल धर्मेन्द्र का लंड भी फड़का और पिचकारी छोड़कर शिखा के मुँह में गर्म वीर्य भरने लगा। धड़क-धड़क कर मोटे-मोटे फुहार निकले।
शिखा को उबकाई आई, गले में कड़वाहट महसूस हुई लेकिन लंड अभी भी मुँह में था। वह बेबसी में सारा माल गटक गई, कुछ वीर्य होंठों के किनारे से बहकर गाल पर गिर गया। दोनों पस्त हो चुके थे, साँसें तेज, शरीर पसीने से तर। लेकिन असली काम अभी बाकी था।
शिखा ने हाँफते हुए कहा, “भाई अब और मत करो… मम्मी और आँचल अब आने वाले होंगे। अगर बीच में आ गए तो सारा मजा खराब हो जाएगा।”
धर्मेन्द्र अब रुकना नहीं चाहता था। ऐसा मौका दुबारा मिलना मुश्किल था। फिर भी उसने फोन उठाया और आँचल को कॉल किया। फोन मम्मी ने उठाया।
“हाँ धर्मेन्द्र, अभी हम मार्केट में हैं। सामान बहुत है, कम से कम दो घंटे तो लगेंगे।”
इतना समय दोनों के लिए काफी था अपनी कामेच्छा शांत करने को। फोन काटते ही धर्मेन्द्र फिर शिखा पर छा गया। उसने अपना अभी भी अधसख्त लंड शिखा के होंठों के हवाले कर दिया। शिखा ने बिना विरोध के मुँह खोला और चूसने लगी। जीभ से सहलाती, चूसती। दो मिनट में ही लंड लोहे की छड़ जैसा सख्त हो गया, नसें फूल गईं, सुपाड़ा चमकदार और लाल। “Chhoti Bahan Chudai Story”
धर्मेन्द्र ने शिखा को बेड के किनारे लिटाया। उसकी टाँगें फैलाकर अपने कंधों पर रख लीं। चूत अब पूरी तरह खुली हुई थी। धर्मेन्द्र ने जीभ फिर चूत पर फेर दी, बाहर की फाँकों को चाटा, क्लिटोरिस को जीभ की नोक से घुमाया। शिखा की सिसकारियाँ फिर शुरू हो गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
थूक से चूत को अच्छे से गीली करने के बाद धर्मेन्द्र ने लंड का सुपाड़ा चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। सुपाड़ा चूत की फाँकों के बीच सरकता, क्लिटोरिस को छूता। शिखा घबरा रही थी। उसकी आँखों में डर और उत्सुकता दोनों थे।
“भाई, मेरा पहली बार है… बहुत डर लग रहा है। तुम्हारा लंड कितना मोटा-लंबा है और मेरी चूत का छेद कितना छोटा।”
“मेरी जान, जिसे तू छोटा छेद कह रही है उसमें सारा जहान समा जाए फिर भी जगह बचेगी। घबरा मत, तेरा भाई प्यार से चुदाई करेगा।”
लंड रगड़ने से शिखा की चूत भी बेचैन हो गई। वह गांड उठा-उठाकर लंड का स्वागत करने लगी, जैसे और गहराई चाह रही हो। धर्मेन्द्र ने थोड़ा लंड दबाया। सुपाड़ा चूत के मुंह में दबाव डालने लगा। शिखा के चेहरे पर दर्द की लकीरें उभरीं, आँखें सिकुड़ गईं।
धर्मेन्द्र समझ गया कि ऐसे फट जाएगी और शोर मचेगा। उसने पास पड़ी तेल की शीशी उठाई। ढेर सारा तेल अपनी हथेली में लिया, पहले चूत पर मल दिया—फाँकों को, क्लिटोरिस को, छेद को। फिर लंड पर भी अच्छे से तेल लगाया, पूरा लंड चिकना और चमकदार हो गया। फिर रगड़ना शुरू किया। सुपाड़ा अब आसानी से सरक रहा था।
“भाई और कितना तड़पाओगे… अब डाल भी दो अंदर… नहीं रुका जा रहा!”
यह सुनते ही धर्मेन्द्र ने जोश में एक जोरदार धक्का लगाया। फट की हल्की आवाज के साथ सुपाड़ा चूत में घुस गया। शिखा नहीं जानती थी कि पहली चुदाई में चूत के साथ गांड भी फटती है। वह जोर से चीख पड़ी और दर्द से हाथ-पैर मारने लगी। आँखों से आँसू बहने लगे।
धर्मेन्द्र ने तुरंत उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, जीभ अंदर डालकर शांत करने की कोशिश की। शिखा छटपटा रही थी। लंड अभी सिर्फ दो इंच घुसा था। धर्मेन्द्र ने देर न की। कमर उचकाकर दो जोरदार धक्के लगाए। आधे से ज्यादा लंड चूत में उतर गया। शिखा की चूत तनी हुई, दीवारें लंड को कसकर पकड़े हुए थीं। दर्द और मजा दोनों मिलकर उसका शरीर काँप रहा था। “Chhoti Bahan Chudai Story”
शिखा की हालत ऐसी थी जैसे वह बेहोश होने वाली हो। उसकी सांसें तेज और अनियमित चल रही थीं। चूत से खून की पतली धार निकलकर उसकी गांड तक फैल चुकी थी, जिससे चादर पर लाल-भूरा दाग बन गया था। धर्मेन्द्र का सात इंच का मोटा लंड उसकी टाइट चूत में शिकंजे की तरह फंसा हुआ था, बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था।
फिर भी धर्मेन्द्र ने गहरी, लंबी सांस ली। उसने अपने कूल्हों को थोड़ा और पीछे खींचा और फिर जोर से आगे धकेला। पहले धक्के में लंड का आधा हिस्सा और अंदर चला गया। शिखा के मुंह से तीखी चीख निकली। दूसरा धक्का और तेज था, अब लंड का तीन चौथाई हिस्सा अंदर समा गया।
तीसरे धक्के के साथ धर्मेन्द्र ने पूरी ताकत लगाई और पूरा सात इंच का लंड एक झटके में शिखा की चूत के अंदर फिट हो गया। चूत की दीवारें लंड के चारों ओर कसकर सिकुड़ गईं। अब धर्मेन्द्र ने धक्के देना बंद कर दिया। वह स्थिर होकर शिखा के ऊपर लेट गया।
उसने धीरे से शिखा की दोनों चूचियों को अपने हाथों में भर लिया। पहले दायीं चूची को मुंह में लिया, जीभ से उसकी निप्पल को गोल-गोल घुमाया, फिर जोर से चूसा। बायीं चूची को हाथ से मसलने लगा, उंगलियों से निप्पल को पिंच करता हुआ। शिखा दर्द से कराह रही थी, उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
“बस मेरी बहना… अब दर्द नहीं होगा। देख, पूरा लंड तेरी चूत में जा चुका है। जिसे तू छोटा छेद कहती थी, वो मेरा सात इंच निगल गया है।” धर्मेन्द्र ने प्यार से कहा और उसके माथे पर हल्का चुम्बन दिया।
“प्लीज भाई… बहुत दर्द हो रहा है… निकाल लो… चूत फट गई… मैं नहीं चुदवाना चाहती…” शिखा रोते हुए बोली, उसकी आवाज कांप रही थी।
“अरे देख तो, पूरा घुस चुका है… अब धीरे-धीरे दर्द कम हो जाएगा। बस थोड़ा सब्र कर।” धर्मेन्द्र ने उसे तसल्ली दी और लगातार उसकी चूचियों को चूमता रहा, होंठों को चूसता रहा, जीभ से उसके गले और कानों को चाटता रहा।
दो-तीन मिनट तक यही सिलसिला चलता रहा। धीरे-धीरे शिखा का शरीर रिलैक्स होने लगा। दर्द अब पहले जितना तेज नहीं था। उसने भी धर्मेन्द्र के चुम्बनों का जवाब देना शुरू कर दिया। जब धर्मेन्द्र ने उसके होंठ चूमे तो शिखा ने भी हल्के से होंठ दबाए। धर्मेन्द्र को समझ आ गया कि अब हरी झंडी मिल गई है। “Chhoti Bahan Chudai Story”
उसने बहुत धीरे से कूल्हे पीछे खींचे। लंड आधा बाहर निकला। शिखा की चूत की दीवारें लंड को कसकर पकड़े हुए थीं। फिर धर्मेन्द्र ने फिर से धीरे से अंदर धकेला। पूरा लंड फिर से अंदर चला गया। शिखा को हल्का दर्द हुआ, लेकिन अब वह उसे सहन करने को तैयार थी।
धर्मेन्द्र ने इसी तरह धीरे-धीरे गति बढ़ानी शुरू की। पहले हर धक्का पांच-छह सेकंड में, फिर चार सेकंड में। शिखा की चूत में अब गर्माहट और नमी बढ़ने लगी। कुछ देर बाद चूत ने पानी छोड़ना शुरू किया। चिकनाहट आने से लंड अब आसानी से फिसलने लगा। हर धक्के के साथ चपचप की हल्की आवाज आने लगी।
शिखा को भी अब मजा आने लगा था। उसने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठानी शुरू की, धक्कों का स्वागत करने लगी। उसकी सांसें तेज हो गईं, लेकिन अब दर्द की जगह सुख की कराह निकल रही थी। पांच मिनट तक धीमी और गहरी चुदाई चलती रही। फिर अचानक दोनों के बीच तूफान सा उठा।
धर्मेन्द्र ने स्पीड बढ़ा दी। अब धक्के जोरदार और तेज हो गए। शिखा भी पूरी ताकत से गांड उठाकर जवाब दे रही थी। दोनों एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश में लगे हुए थे। बिस्तर की चादर मुड़ गई थी, तकिए नीचे गिर गए थे। दस मिनट बाद शिखा का पूरा शरीर अकड़ गया। उसकी चूत सिकुड़ने लगी।
एक जोरदार झटके के साथ उसने चूत से पानी फेंका। गर्म पानी धर्मेन्द्र के लंड के चारों ओर बहने लगा। धर्मेन्द्र को वह गीलापन और गर्मी साफ महसूस हुई। शिखा की आंखें बंद हो गईं, वह सुस्त पड़ गई। लेकिन धर्मेन्द्र ने धक्के लगाना नहीं रोका। वह लगातार जोर-जोर से अंदर-बाहर करता रहा।
कुछ देर बाद शिखा फिर से हरकत में आई। उसने फिर से गांड उठाई और धक्कों का जवाब देने लगी। एक ही पोजीशन में चुदाई करते-करते धर्मेन्द्र ने शिखा को पलट दिया। उसने शिखा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे घुटनों और हाथों के बल पर घोड़ी की तरह खड़ा कर दिया। “Chhoti Bahan Chudai Story”
शिखा की गांड ऊपर उठी हुई थी, चूत पीछे की तरफ खुली हुई नजर आ रही थी। धर्मेन्द्र ने पीछे से अपना सात इंच का लंड हाथ में लिया, उसकी नोक को शिखा की चूत के मुंह पर रखा और धीरे से धकेला। लंड पहले से चिकना होने की वजह से आसानी से अंदर चला गया। पूरा लंड एक ही झटके में चूत के अंदर समा गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
चुदाई फिर से शुरू हो गई। धर्मेन्द्र ने दोनों हाथों से शिखा की कमर को मजबूती से पकड़ा और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उसके टट्टे हर धक्के के साथ शिखा की चूत और क्लिटोरिस पर थपथपा रहे थे। कमरे में फच्च-फच्च, चपचप की तेज आवाजें गूंज रही थीं। शिखा की गांड हर धक्के पर हिल रही थी, उसकी चूचियां नीचे लटककर झूल रही थीं।
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धर्मेन्द्र कभी-कभी हाथ बढ़ाकर उन चूचियों को मसल लेता, निप्पल को उंगलियों से कसकर दबाता। चुदाई बहुत लंबी चलती रही। धर्मेन्द्र की रफ्तार कभी तेज होती, कभी थोड़ी धीमी, लेकिन रुकती नहीं। शिखा की सांसें तेज हो गईं। पहले उसकी चूत ने दूसरी बार रस छोड़ा था, अब तीसरी बार आने वाला था।
उसकी चूत की दीवारें बार-बार सिकुड़ रही थीं, लंड को कसकर दबा रही थीं। अचानक शिखा का शरीर कांप उठा। उसने जोर से कराहते हुए चूत से गर्म पानी फेंका। पानी लंड के चारों ओर बहकर टट्टों तक पहुंच गया। शिखा की टांगें कांप रही थीं, लेकिन धर्मेन्द्र ने धक्के जारी रखे।
कुछ देर बाद धर्मेन्द्र को भी झड़ने का समय आ गया। उसने स्पीड और जोर बढ़ा दिया। आखिरी कुछ धक्के बहुत तेज और गहरे थे। फिर धर्मेन्द्र का शरीर अकड़ गया। उसने जोर से कराहते हुए पूरा वीर्य शिखा की चूत के अंदर छोड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य की धारें चूत की दीवारों पर पड़ रही थीं। धर्मेन्द्र ने कई बार कूल्हे पीछे-आगे करके सारा वीर्य अंदर उड़ेल दिया।
झड़ते ही दोनों थककर पस्त हो गए। धर्मेन्द्र शिखा की पीठ पर लेट गया। उसका लंड अभी भी चूत के अंदर था, धीरे-धीरे सुकड़ रहा था। कुछ देर बाद लंड पूरी तरह ढीला हो गया। फक की हल्की सी आवाज के साथ लंड चूत से बाहर निकल गया। जैसे ही लंड बाहर आया, चूत से मोटी सफेद धार बहकर निकलने लगी। “Chhoti Bahan Chudai Story”
वीर्य और शिखा का कामरस मिलकर चूत के मुंह से टपक रहा था, गांड की दरार से होता हुआ चादर पर फैल रहा था। पांच मिनट तक दोनों चुपचाप लेटे रहे। उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। फिर शिखा धीरे से उठी। उसने नीचे देखा तो पूरी चादर पर खून के लाल धब्बे, कामरस के गीले निशान और वीर्य की सफेद धारियां नजर आ रही थीं। चादर पूरी तरह गंदी और भीगी हुई लग रही थी।
धर्मेन्द्र का लंड अभी भी शिखा की चूत में गहराई तक धँसा हुआ था। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं, पसीने से तर-बतर बदन एक-दूसरे से चिपके हुए थे। धर्मेन्द्र की कमर धीरे-धीरे हिल रही थी, हर हल्की हरकत से उसका मोटा लंड शिखा की तंग चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। शिखा की आँखें बंद थीं, होंठ कँपकँपा रहे थे, और उसकी उँगलियाँ धर्मेन्द्र की पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थीं।
कुछ देर बाद धर्मेन्द्र का लंड धीरे-धीरे सुकड़ने लगा। उसकी साँसें अब भी भारी थीं। आखिरकार, पूरी तरह ढीला पड़ने पर लंड शिखा की चूत से फिसलकर बाहर निकल गया। “फक” की हल्की, गीली आवाज़ कमरे में गूँजी। जैसे ही लंड बाहर आया, धर्मेन्द्र के वीर्य की गाढ़ी धार शिखा की चूत से बहकर बाहर निकली।
सफेद, गर्म रस पहले तो धीरे-धीरे टपकता रहा, फिर तेज़ी से बेड की चादर पर फैलने लगा। चादर पर पहले से मौजूद खून के लाल धब्बों के साथ अब सफेद वीर्य के धब्बे भी मिल गए। दोनों तरल पदार्थ मिलकर चादर पर गीले, चिपचिपे निशान बना रहे थे। करीब पाँच मिनट तक दोनों चुपचाप लेटे रहे। उनकी साँसें धीमी और नियमित हो गईं।
शिखा ने आँखें खोलीं, धीरे से शरीर को हिलाया और बिस्तर पर उठकर बैठ गई। जैसे ही उसने अपने पैर नीचे किए, चूत में तेज़ टीस उठी। दर्द इतना गहरा था कि वह “आह…” करके कराह उठी। उसने झुककर अपनी चूत की ओर देखा। दोनों होंठ सूजकर लाल हो गए थे, बाहर की तरफ फूले हुए, जैसे डबल रोटी की तरह मोटे और भारी हो गए हों। “Chhoti Bahan Chudai Story”
बीच में से अभी भी हल्का खून और वीर्य का मिश्रण रिस रहा था। दर्द और शर्म से उसकी आँखों में आँसू भर आए। वह फूट-फूटकर रो पड़ी। रोते हुए उसने मुट्ठियाँ बनाईं और धर्मेन्द्र की छाती पर जोर-जोर से मुक्के मारने लगी। “यह देखो भाई… तुमने मेरी चूत का क्या हाल कर दिया! कोई भाई अपनी बहन के साथ ऐसा करता है?”
धर्मेन्द्र ने उसकी कलाइयाँ पकड़ लीं और हल्के से हँसते हुए कहा, “करता है ना… तुमने भी तो भाई-बहन की चुदाई वाली बहुत कहानियाँ पढ़ी हैं, जिनमें भाई ने बहन की चूत चोदी है।”
शिखा हैरान होकर बोली, “तुम्हें कैसे पता कि मैं ऐसी कहानियाँ पढ़ती हूँ… कहीं तुम ही तो नहीं…?”
धर्मेन्द्र ने हाँ में सिर हिलाया। शिखा का मुँह खुला रह गया। फिर गुस्से से उसने फिर से मुक्के बरसाने शुरू कर दिए। “बहुत कमीने हो भाई… अपनी बहन को चोदने के लिए कैसा रास्ता अपनाया!”
धर्मेन्द्र हँस पड़ा। उसने शिखा को अपनी बाहों में खींच लिया और कहा, “पर भाई मैं ही क्यों… आँचल क्यों नहीं? वो तो मुझसे बड़ी है, पहले उसकी चूत फटनी चाहिए थी।”
“तू इसलिए क्योंकि तू मेरी जान है… आँचल से ज्यादा मैं तुझे प्यार करता हूँ।”
“अच्छा… अगर प्यार करते तो इतनी बेदर्दी से चूत न फाड़ते।”
“कभी न कभी तो फटनी ही थी… आज फट गई तो क्या बुरा हुआ? मजा तो आया न?”
शिखा ने कुछ पल चुप रहकर कहा, “हाँ… मजा बहुत आया… पर शुरू में दर्द भी बहुत हुआ। लग रहा था अब मर जाऊँगी… लेकिन फिर वो मजा आया जिसके सामने दर्द कुछ भी नहीं।”
धर्मेन्द्र ने फिर पूछा, “तू खुश है ना चुदवाकर?”
शिखा कुछ नहीं बोली। बस शरमाकर नजरें नीचे कर लीं। धर्मेन्द्र ने दोबारा पूछा तो उसने हल्के से हाँ में गर्दन हिलाई। फिर वह अपना नंगा बदन धर्मेन्द्र की बाहों में सौंप देती है। धर्मेन्द्र ने उसके होंठों को चूमा, पहले हल्के से, फिर गहराई से। दोनों एक-दूसरे से लिपट गए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
तभी धर्मेन्द्र की नजर दीवार पर टँगी घड़ी पर पड़ी। लगभग एक घंटा बीत चुका था। उसने तुरंत आँचल को फोन किया। आँचल ने बताया कि पंद्रह मिनट में वे घर पहुँच रहे हैं। धर्मेन्द्र ने जल्दी से शिखा को उठाया। “जल्दी कपड़े पहन लो,” कहकर वह खुद भी नंगे बदन से उठा और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहनकर अपने कमरे की ओर चला गया।
शिखा ने काँपते हाथों से अपने कपड़े पहने। फिर उसने चादर को उठाया, उस पर बने खून और वीर्य के धब्बों को एक बार फिर देखा और उसे अपनी पहली चुदाई की निशानी समझकर अलमारी में छुपा दिया। कमरे को जल्दी से दुरुस्त किया, बिस्तर ठीक किया और बाथरूम में चली गई। वहाँ शावर खोलकर देर तक नहाती रही, गर्म पानी से अपने बदन को धोती रही, जब तक मम्मी और आँचल घर नहीं आ गए।
धर्मेन्द्र भी अपने कमरे में नहाकर बाहर आया और बेड पर लेटकर अभी-अभी बीते पलों को याद करता हुआ सो गया। आँचल और मम्मी आधे घंटे बाद आईं। तब तक चुदाई का तूफान पूरी तरह शांत हो चुका था। शिखा ने दरवाजा खोला। उसके कदम अभी भी लड़खड़ा रहे थे, चूत में उठती टीस और सूजन के कारण चलना मुश्किल हो रहा था। “Chhoti Bahan Chudai Story”
मम्मी और आँचल अभी बाहर से आकर सामान रख रही थीं। शिखा ने सीधे मम्मी से मिलने की बजाय हाथ जोड़कर कहा, “मम्मी, मुझे बहुत सर दर्द हो रहा है। मैं कमरे में जाकर सो जाती हूँ।” मम्मी ने चिंता से देखा लेकिन कुछ बोली नहीं। शिखा धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़कर अपने कमरे में गई और दरवाजा बंद करके बिस्तर पर लेट गई।
बाकी दिन ऐसे बीता जैसे कुछ हुआ ही न हो। वह चुपचाप लेटी रही, कभी-कभी चादर के नीचे हाथ डालकर अपनी सूजी हुई चूत को सहलाती, दर्द और यादों में खोई रही। रात को खाने की टेबल पर सब इकट्ठा हुए। सबसे पहले शिखा और धर्मेन्द्र आए। शिखा ने ढीले-ढाले टॉप और पजामा पहना था ताकि चूत की सूजन छिपी रहे। आँचल मम्मी की मदद कर रही थी, रसोई से प्लेटें ला रही थी।
धर्मेन्द्र ने बेशर्मी से टेबल के नीचे अपना हाथ शिखा की जाँघ पर रख दिया। धीरे-धीरे ऊपर की तरफ फेरते हुए उसने शिखा की चूची को दबा दिया। शिखा घबरा गई, उसकी आँखें फैल गईं। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मरवाओगे क्या भाई… मम्मी ने देख लिया तो दोनों का घर से निकाला हो जाएगा।”
धर्मेन्द्र ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हो जाने दो, मैं अपनी प्यारी बहना को लेकर दूर चला जाऊँगा और वहाँ हम साथ जिंदगी बिताएंगे।”
“हट… तुम पागल हो गए हो भाई।” शिखा हँसते हुए बोली, लेकिन उसकी आवाज में डर और शरम दोनों थे।
तभी आँचल आई और हँसती शिखा देखकर पूछा, “क्या गपशप हो रही है तुम दोनों में?”
धर्मेन्द्र ने झट से हाथ हटाया और बोला, “कुछ नहीं, बहन-भाई की बात है, तुम्हें क्यों बताएँ?”
“अच्छा न बताओ… तुम्हारी मर्जी।” आँचल हँसकर रसोई में चली गई।
आँचल जाते ही धर्मेन्द्र ने फिर से शिखा की चूची पकड़ ली और जोर से दबा दिया। शिखा ने दाँत पीसे और फुसफुसाई, “क्या करते हो भाई… दिन में मन नहीं भरा? तुमने मसल-मसलकर दोनों चूचियाँ लाल कर दी हैं।”
“अच्छा दिखाओ तो जरा…” धर्मेन्द्र ने शिखा के टॉप को ऊपर करने की कोशिश की।
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शिखा डरकर झटके से उठी और रसोई की तरफ चली गई। चुदाई के बाद उसकी चाल अभी भी बदली हुई थी, कूल्हे हिलते हुए, पैर थोड़े फैलाकर चल रही थी। जानबूझकर वह रसोई में सामान से टकराई और “आह…” करके लंगड़ाकर चलने लगी जैसे चोट लगी हो। “Chhoti Bahan Chudai Story”
मम्मी ने तुरंत डाँटा, “ये लड़की देखकर चल ही नहीं सकती, चोट लग गई न!”
धर्मेन्द्र भी रसोई में आया। शिखा ने उसकी तरफ देखकर आँख मारी। धर्मेन्द्र समझ गया।
उसने मासूमियत से कहा, “कहाँ चोट खाती घूम रही है… चल कुर्सी पर बैठा दूँ।”
उसने शिखा की बाजू पकड़ी और सहारा देते हुए टेबल की तरफ ले गया। मम्मी और आँचल काम में लगे थे, किसी का ध्यान नहीं गया। धर्मेन्द्र ने शिखा के बगल में हाथ डाल दिया, उँगलियाँ धीरे-धीरे उसकी चूची पर फिराईं और मसलने लगा। वह तब तक मसलता रहा जब तक शिखा कुर्सी पर नहीं बैठ गई।
शिखा ने फुसफुसाकर कहा, “भाई तुम बहुत बेशर्म और बदमाश हो… कुछ शर्म करो!”
“अब तुमसे कैसी शर्म… अब तो तुम मेरी रानी हो।” धर्मेन्द्र हँसा।
“आज रात का क्या प्रोग्राम है?”
“ना भाई रात को नहीं… आँचल साथ होती है, शक हो गया तो तरसते रह जाओगे।”
धर्मेन्द्र ने समझाया, “पढ़ाई के बहाने मेरे कमरे में आ जाना और वहीं सो जाना। कोई उठाएगा तो कह दूँगा सो गई है तो यहीं सो जाने दो। जब सब सो जाएँगे तो तुम और मैं… समझ गई न?”
धर्मेन्द्र ने आँख मारी। शिखा शरमाई, गाल लाल हो गए। उसने हल्का-सा मुक्का मारकर कहा, “भाई तुम पूरे बहनचोद हो…”
धर्मेन्द्र हँसा, “मुझे बहनचोद बनाया भी तो तुमने ही है मेरी प्यारी बहना!”
खाना आया। सब चुपचाप खाने लगे। शिखा दर्द से थोड़ा धीरे-धीरे खा रही थी। खाने के बाद सबने थोड़ी बातें कीं। मम्मी ने पापा को फोन किया। पापा ने बताया कि वे रात को नहीं आ रहे थे।
दस बजे सब सोने लगे। शिखा ने आँचल और मम्मी से कहा, “मैं धर्मेन्द्र भैया के पास पढ़ाई करने जा रही हूँ।”
आँचल ने कहा, “मैं समझा दूँगी लेकिन…”
शिखा ने मना कर दिया। “नहीं, मैं खुद जाऊँगी।”
सब सोने चले गए। आँचल मम्मी के साथ सो गई। धर्मेन्द्र के कमरे में दोनों किताबें खोलकर बैठे। धर्मेन्द्र ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। शिखा ने किताब खोलकर रखी लेकिन उसकी नजरें धर्मेन्द्र पर थीं। धर्मेन्द्र ने मुस्कुराकर कहा, “अब इंतजार खत्म… बस थोड़ी देर और।”
शिखा शरमाकर मुस्कुराई और किताब के पीछे छिप गई।
मम्मी दूध देने आएगी, यह दोनों को पहले से पता था। बीस-पच्चीस मिनट बाद दरवाजे पर हल्की खटखटाहट हुई। धर्मेन्द्र ने फुर्ती से किताबें ठीक कीं और शिखा ने दुपट्टा सिर पर डाल लिया। मम्मी ने दरवाजा खोलकर अंदर झाँका, हाथ में दो गिलास गरम दूध लिए हुए थे। उन्होंने ट्रे बेडसाइड टेबल पर रखी और मुस्कुराकर बोलीं, “लो, पढ़ाई के बीच में पी लेना, ठंडा न हो जाए।”
शिखा ने शरमाते हुए कहा, “मम्मी, आज रात यहीं सो जाऊँगी। काम बहुत ज्यादा है, देर तक लगेगा।”
मम्मी ने एक पल उन्हें देखा, फिर सहमति में सिर हिलाया। “जैसा ठीक लगे। बस ज्यादा देर मत जागना, सुबह जल्दी उठना है।” कहकर वे दरवाजा बंद करके चली गईं। “Chhoti Bahan Chudai Story”
मम्मी के कदमों की आवाज़ गलियारे में फीकी पड़ते ही धर्मेन्द्र ने धर्मेन्द्र झपकते ही शिखा को अपनी मजबूत बाहों में कसकर भर लिया। उसके होंठ शिखा के नरम, गर्म होंठों पर टिक गए। चुम्बन गहरा और भूखा था, जीभें एक-दूसरे से उलझ रही थीं। शिखा ने हल्के से उसका सीना धकेला और फुसफुसाई, “रुको भाई, पहले देख लूँ सब सो गए कि नहीं।”
वह उठी, धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर झाँका। घर में लाइटें बंद हो चुकी थीं, मम्मी और आँचल के कमरे से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। सब सोने की तैयारी में थे। शिखा ने मन ही मन राहत की साँस ली, वापस कमरे में आई और कुंडी लगा दी। अब कमरा पूरी तरह उनका था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
धर्मेन्द्र बाथरूम चला गया। जब वह वापस आया तो शिखा बेड पर बैठी थी। उसने दुपट्टे को सिर पर इस तरह लपेट लिया था जैसे कोई नवविवाहिता दुल्हन घूँघट निकाले बैठी हो। उसकी आँखों में शरारत और शरम दोनों थे। “अजी अपनी सुहागरात है न आज, तो सैंया का इंतजार कर रही हूँ,” उसने नखरे से कहा।
धर्मेन्द्र का लंड एक झटके में खड़ा हो गया, पजामा के नीचे तनकर उभर आया। वह धीरे-धीरे उसके पास आया, फिल्मी अंदाज़ में घूँघट उठाया। शिखा ने शरमाकर नजरें झुका लीं। धर्मेन्द्र ने गिलास उठाया, दूध का एक घूँट पिया। फिर गिलास शिखा के होंठों पर लगाया। शिखा ने स्टाइल से सिर झुकाकर दूध पिलाया। धर्मेन्द्र ने आधा पीया, बाकी शिखा को पिलाया।
“पूरा पी लो भाई… आज रात बहुत मेहनत करनी है,” शिखा ने धीमी, कामुक आवाज़ में कहा।
दूध खत्म होते ही धर्मेन्द्र ने शिखा को फिर से अपनी बाहों में कस लिया। होंठों पर गहरा चुम्बन, हाथ सीधे उसकी चूचियों पर।
उसने फुसफुसाया, “बहना… मर्द को ताकत औरत के दूध से मिलती है, भैंस के दूध से नहीं।”
एक तेज़ झटके में उसने शिखा का टॉप ऊपर खींचकर उतार दिया। चूचियाँ नंगी होकर उछल पड़ीं, निप्पल्स पहले से ही सख्त और उभरे हुए। धर्मेन्द्र ने दोनों चुचुक अपनी उँगलियों से दबाए, फिर मुँह में एक चूची भर ली। जोर से चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाता, दाँतों से हल्के से काटता। दूसरी चूची हाथ से मसलता, निचोड़ता।
शिखा सिसकारियाँ भरने लगी। उसकी आवाज़ कमरे में गूँज उठी, “आह्ह… भाई… चूस लो… अपनी बहन का सारा दूध… उफ्फ… निचोड़ लो चूचियों को… बहुत मजा आ रहा है… आह्ह!” धर्मेन्द्र पूरी चूची मुँह में भरकर चूसता रहा, दाँतों से काटता, जीभ से चाटता। शिखा तड़प उठती, कमर ऊपर उठाकर खुद को और पास लाती। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, शरीर में कंपन सा दौड़ने लगा। “Chhoti Bahan Chudai Story”
शिखा के हाथ अब धर्मेन्द्र के पजामे की तरफ बढ़े। पजामा के ऊपर से लंड को टटोला, फिर अंदर हाथ डालकर बाहर निकाला। मोटा, गरम, नसों से भरा लंड हाथ में आया। उसने धीरे-धीरे ऊपर-नीचे मसलना शुरू किया, सुपाड़े पर अँगूठे से दबाव डाला।
धर्मेन्द्र ने अपना लंड शिखा के होंठों पर रख दिया। शिखा ने सुपाड़ा दबाया, जीभ निकालकर चाटना शुरू किया। पहले सुपाड़े के चारों ओर जीभ घुमाई, फिर लंड की पूरी लंबाई चाटी, नीचे तक जाकर अंडकोष को भी चूमा। धर्मेन्द्र की साँसें भारी हो गईं।
धर्मेन्द्र ने शिखा की स्कर्ट और पेंटी एक साथ नीचे खींच दी। चूत अभी भी सूजी हुई थी, होंठ लाल और फूले हुए, दिन की चुदाई के निशान साफ दिख रहे थे। उसने जीभ चूत पर फेरी। हल्की टीस हुई लेकिन साथ ही गहरा मजा भी। धर्मेन्द्र ने पुतियाँ उँगलियों से खोलीं और जीभ अंदर डाल दी। चूत की दीवारों को चाटा, क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई।
शिखा कसमसाई, सिसकारियाँ तेज़ हो गईं। “आह्ह… भाई… उफ्फ… जीभ अंदर… और गहराई में… ओह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…” कामरस निकलने लगा, चूत गीली और चिकनी हो गई। शिखा अब तड़प रही थी लंड के लिए, कमर हिलाकर इशारा कर रही थी।
धर्मेन्द्र ने लंड मुहाने पर लगाया। पहले धीरे से दबाया, फिर जोरदार धक्के से दो-तीन इंच अंदर घुसा दिया। शिखा तड़प उठी। चीख निकलने वाली थी लेकिन धर्मेन्द्र ने तुरंत उसका मुँह अपनी हथेली से दबा दिया। आँसू उसकी आँखों से टपक पड़े। उसने हाथ जोड़कर निकालने की गुहार लगाई, लेकिन धर्मेन्द्र रुका नहीं।
उसने दो-तीन और जोरदार धक्के लगाए। पूरा मोटा लंड चूत में समा गया, जड़ तक। शिखा छटपटाई, शरीर काँप उठा, लेकिन धर्मेन्द्र जन्नत के अहसास में डूबा हुआ था। कुछ देर लंड अंदर ही रखा। वह शिखा के ऊपर लेट गया, होंठ चूमे, चूचियाँ मसलीं। धीरे-धीरे शिखा की साँसें शांत हुईं। “Chhoti Bahan Chudai Story”
“भाई… तुम बहुत गंदे हो… बहन का ख्याल नहीं… आराम से करते तो क्या जाता… कितना दर्द किया,” उसने शिकायत भरी आवाज़ में कहा।
धर्मेन्द्र हँसा और फिर चूची चूसने लगा।
शिखा ने हल्के मुक्के मारे। “अब ऐसे लेटे रहोगे या आगे करोगे?”
चुदाई शुरू हुई। पहले धीरे-धीरे, लंड को अंदर-बाहर करते हुए हर धक्के में गहराई और लय बढ़ाता रहा। स्पीड धीरे-धीरे तेज़ हुई।
“उईई… आह्ह… धीरे… ओह्ह… भाईई…” शिखा की सिसकारियाँ कमरे में भर गईं।
दस मिनट बाद शिखा पहली बार झड़ी। कामरस फूटा, चूत सिकुड़कर लंड को कसकर जकड़ लिया। उसने टाँगों से धर्मेन्द्र को मजबूती से जकड़ा, नाखून उसकी कमर में गड़ गए। धर्मेन्द्र ने उसे किनारे लिटाया। एक जोरदार धक्के में फिर जड़ तक घुसाया। अब जोरदार, तेज़ चुदाई शुरू। गहरे, तेज़ धक्के। शिखा अब साथ दे रही थी, कमर उठाकर हर धक्के का जवाब दे रही थी।
आधा घंटा तक चुदाई चलती रही। शिखा तीसरी बार झड़ी, पूरा शरीर काँप उठा, चूत से कामरस की धार निकली। धर्मेन्द्र ने आखिरी जोरदार धक्कों के साथ वीर्य भर दिया। गर्म, गाढ़ा वीर्य चूत में फैल गया। दोनों पस्त होकर लेट गए। पसीने से तर-बतर, साँसें तेज़। धीरे-धीरे नींद आने लगी। नंगे बदन एक-दूसरे से लिपटे हुए, वे गहरी नींद में सो गए।
रात के ठीक तीन बजे धर्मेन्द्र की आँख खुल गई। कमरे में हल्की नीली रोशनी चाँद की किरणों से आ रही थी, जो पर्दे के बीच से छनकर बिस्तर पर पड़ रही थी। उसकी नजर पहले शिखा के नंगे, मुलायम बदन पर पड़ी। शिखा करवट लेकर सोई हुई थी, एक टाँग हल्के से ऊपर चढ़ी हुई, चूचियाँ धीरे-धीरे साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
उसकी चूत अभी भी थोड़ी सूजी हुई लग रही थी, लेकिन अब सूजन कम हो चुकी थी। धर्मेन्द्र को देखते ही कामेच्छा की लहर सी दौड़ गई। उसका लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा। वह धीरे से शिखा के करीब सरक गया। पहले उसने शिखा की एक चूची को हाथ में लिया, नरम मांस को सहलाया, फिर मुँह में लेकर धीरे से चूसना शुरू किया।
जीभ से निप्पल को घुमाया, हल्के से दाँत गड़ाए। शिखा नींद में ही सिसकारी, “उम्म…” करके करवट बदली। धर्मेन्द्र ने दूसरी चूची पर हाथ फेरा, फिर नीचे हाथ सरकाया। चूत पर उँगली रखी, दाना ढूँढकर हल्के से मसलने लगा। क्लिटोरिस को अँगूठे और तर्जनी से दबाकर घुमाया। शिखा की साँसें तेज़ हो गईं। “Chhoti Bahan Chudai Story”
शिखा की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। उसने धर्मेन्द्र को देखा, पहले थोड़ा हैरान हुई, फिर मुस्कुराई। “भाई… रात में भी नींद नहीं आ रही?” उसने फुसफुसाकर पूछा। धर्मेन्द्र ने जवाब में उसके होंठ चूम लिए। चुम्बन गहरा होता गया, जीभें उलझीं। शिखा ने भी हाथ बढ़ाकर धर्मेन्द्र के लंड को पकड़ लिया, धीरे-धीरे मसलने लगी।
फिर चुदाई शुरू हो गई। धर्मेन्द्र ने शिखा को पीठ के बल लिटाया, टाँगें फैलाकर बीच में बैठ गया। लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा और गीला था। उसने लंड मुहाने पर लगाया, धीरे से दबाया। चूत अब पहले जितनी तंग नहीं थी, लेकिन फिर भी गरम और गीली। एक धीमा धक्का दिया, लंड आधा अंदर चला गया। शिखा ने सिसकारी भरी, “आह्ह… भाई… धीरे…”
धर्मेन्द्र ने रुककर होंठ चूमे, चूचियाँ मसलीं, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर किया। जड़ तक पहुँचकर रुका, शिखा की कमर को सहलाया। शिखा ने टाँगें धर्मेन्द्र की कमर पर लपेट लीं। अब धक्के शुरू हुए। पहले धीमे, लंबे, गहरे। हर धक्के के साथ शिखा की सिसकारियाँ बढ़ती गईं। “उफ्फ… ओह्ह… भाई… और गहराई में… आह्ह…”
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : 3 जवान लड़को से अपनी चूत की हवस मिटवाई
धर्मेन्द्र ने स्पीड बढ़ाई। तेज़, जोरदार धक्के। बिस्तर हल्के से हिलने लगा। शिखा की चूत से कामरस की आवाज़ें आने लगीं, गीली चपचपाहट कमरे में गूँजने लगी। धर्मेन्द्र ने शिखा की टाँगें कंधों पर रख लीं, और और गहराई से चोदने लगा। शिखा तड़प उठी, नाखून धर्मेन्द्र की पीठ पर गड़ गए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
सुबह तक दोनों एक-दूसरे में समाए रहे। बीच-बीच में पोज़िशन बदली। कभी शिखा ऊपर आ गई, धर्मेन्द्र के लंड पर उछलती रही। कभी डॉगी स्टाइल में धर्मेन्द्र ने पीछे से जोर-जोर से ठोका। शिखा कई बार झड़ी, हर बार चूत सिकुड़कर लंड को जकड़ लेती। धर्मेन्द्र ने भी दो बार वीर्य छोड़ा, पहली बार चूत में, दूसरी बार शिखा के मुँह में।
अंत में धर्मेन्द्र ने शिखा की चूत पर अपना झंडा गाड़ दिया। आखिरी जोरदार धक्कों के साथ वीर्य की गर्म धार चूत की गहराई में भर दी। शिखा की चूत अब पूरी तरह उसकी थी, उसका निशान छोड़कर। अगला पड़ाव आँचल की चूत था, लेकिन इसके लिए तीन महीने इंतजार करना पड़ा।
तीन महीनों में हर दूसरी रात शिखा धर्मेन्द्र के कमरे में सोने आ जाती। पढ़ाई का बहाना बनाकर दरवाजा बंद कर लेतीं, और पूरी रात चुदाई होती। कभी धीमी, रोमांटिक, कभी जंगली और बेकाबू। शिखा अब चुदाई की आदी हो चुकी थी, दर्द की जगह सिर्फ मजा रह गया था। धर्मेन्द्र हर बार नई-नई तरकीबें आजमाता, शिखा को नई-नई ऊँचाइयों पर ले जाता।
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