Village Hot Chudai Story
दो महीने से प्यासी भाभी और कुंवारी ननद को देवर ने गाँव के घर में एक साथ चोदा। भाभी की रसीली चूत और ननद की टाइट कुंवारी चूत का पूरा मज़ा। देसी थ्रीसम सेक्स कहानी हिंदी में। मेरा नाम कुणाल है। मैं उस वक्त 20 साल का था, लखनऊ में इंजीनियरिंग कर रहा था और हॉस्टल की बोरियत से बचने के लिए किराए के घर में रहता था। Village Hot Chudai Story
जिंदगी मस्ती और मौज में कट रही थी, लेकिन जो कुछ आगे हुआ, उसने मेरे अंदर की आग को हमेशा के लिए जला दिया। हमारे बगल वाले फ्लैट में सोनू भैया और उनकी बीवी ऋतु भाभी रहते थे। सोनू भैया दिनभर ऑफिस, रात को शराब और फिर खर्राटे। भाभी अकेलेपन की शिकार थीं।
ऋतु भाभी की उम्र कोई 24-25 रही होगी, लेकिन जिस्म ऐसा कि देखते ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। गोरा-गोरा रंग, भारी-भरकम स्तन जो ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थे, चौड़ी कमर, मोटी-मोटी जाँघें और एक ऐसी मटकती हुई गांड कि चलते वक्त मेरी नज़रें वहीं अटक जाती थी होंठ गुलाबी, आँखें काजल से भरी हुईं और मुस्कान ऐसी कि दिल में तीर की तरह चुभ जाए।
सोनू भैया की छोटी बहन शिखा कभी-कभी उनसे मिलने आती थी। शिखा कॉलेज में थी, उम्र कोई 18-19साल। भरी हुई शरीर की गर्म व जवान लड़की। छोटे-छोटे स्तन, पतली कमर, और चूतड़ इतने टाइट कि जींस में से भी उभरे हुए लगते। उसकी आँखों में शरारत थी और होंठों पर हमेशा एक हल्की-सी मुस्कान।
मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी – वासना के दरिया में डूब गए जीजा साली
एक दिन सोनू भैया और भाभी अपने गाँव चले गए। शिखा उनके फ्लैट में अकेली रह गई थी। कई दिन बीत गए, कोई खबर नहीं। एक शाम करीब आठ बजे मेरे दरवाज़े पर दस्तक हुई। मैंने दरवाज़ा खोला तो शिखा खड़ी थी – सादा सलवार-कमीज़, दुपट्टा सरक गया था, बाल बिखरे हुए।
वो काफ़ी डरी हुई थी “कुणाल भैया… प्लीज़ मेरे साथ गाँव चलो ना। भैया-भाभी की बहुत याद आ रही है मुझे अकेले जाने में डर लग रहा है।”
मैंने मुस्कुरा कर कहा, “अरे छोटी बहन के लिए तो जान भी हाज़िर है।”
पर मन ही मन सोचा – पराई बहन भी कोई बहन होती है? अगली सुबह हम दोनों बस पकड़ कर गाँव पहुँचे। गाँव का मकान पुराना था, आँगन बड़ा, चारों तरफ़ खेत। सोनू भैया कहीं दिखाई नहीं दिए। भाभी खेत से लौट रही थीं – साड़ी पसीने से तर, शरीर से चिपकी हुई, मंगलसूत्र गले में झूल रहा था, ब्लाउज गीला होकर स्तनों के आकार को साफ़ उघाड़ रहा था। मुझे देखते ही उनकी आँखें चमक उठीं।
“अरे कुणाल… तू? और शिखा?”
मैंने पूछा, “भैया कहाँ हैं?”
भाभी ने होंठ चबाते हुए कहा, “क्यों… मैं अकेली कम हूँ क्या? भैया के बिना नहीं चलेगा?”
शिखा हँस पड़ी, “भाभी, हम तो आपको ही ढूंढने आए थे।”
चुदाई की गरम देसी कहानी : भाभी और देवर की एक उत्तेजक रात
हम बात करते करते घर में जाकर बैठ गए चाय पानी पिया बातों-बातों में सच सामने आया। किसी ने सोनू भैया को पुरानी अफवाह सुना दी थी कि शादी से पहले ऋतु का किसी रामलाल नाम के लड़के से चक्कर था। बस, उसी दिन से भैया का व्यवहार बदल गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
सुबह खेत चले जाते, रात को आकर खाना खाते और सो जाते। न बात, न स्पर्श, न चुदाई। पूरे 5 महीने से भाभी तरस रही थीं। उनकी आँखें बताती थीं कि वो अंदर से जल रही हैं। रात का खाना खाकर हम तीनों एक ही कमरे में थे। लाइट मद्धम थी, बाहर झींगुर बोल रहे थे।
शिखा ने सीधा सवाल दागा, “भाभी, सच बताओ… तुम्हें पहले कभी किसी ने चोदा था?”
भाभी शर्मा गईं, फिर धीरे से बोलीं, “नहीं रे… तुम्हारे भैया ने ही सुहागरात को पहली बार लिया था। खून भी निकला था, उन्होंने खुद देखा था।”
शिखा ने मेरी जाँघ पर हाथ फेरते हुए धीरे से कहा, “तो अब क्या… 4 महीने से भाभी की प्यास कोई बुझाएगा कि नहीं?”
हवा में बिजली-सी कौंध गई। भाभी की साँसें तेज़ हो गईं। शिखा ने भाभी का हाथ पकड़ा, उनकी हथेली पर उँगलियाँ फेरीं, फिर धीरे से उनके गाल पर। भाभी ने कुछ नहीं कहा, बस आँखें बंद कर लीं। शिखा ने उन्हें अपनी गोद में खींच लिया। दोनों के जिस्म से सट गए।
शिखा ने भाभी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले हल्का-सा स्पर्श, फिर जीभ अंदर। लंबा, गहरा, गीला चुंबन। भाभी की साड़ी का पल्लू सरक गया, स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मेरा लंड पजामे में तनकर तंबू बनाकर दर्द करने लगा। शिखा मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराई और बोली, “भैया, तुम तो कहते थे ना कि भाभी के स्तन दबाने का मन करता है? आज मौका है।”
मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : ट्यूशन की कुंवारी छोकरी ने टीचर से चूत फड़वा लिया
मैं हकलाया, “मैं तो तेरे स्तनों की बात कर रहा था.”
शिखा हँसी, “बहन के स्तन भाई नहीं छूता… भाभी के तो छू सकता है ना?”
भाभी ने शर्मा कर साड़ी का पल्लू पूरी तरह गिरा दिया, फिर ब्लाउज के हुक खोल दिए। उफ्फ… क्या नज़ारा था! दो भारी-भरकम रसीले स्तन, गुलाबी निप्पल तने हुए, हल्की-हल्की नीली नसें दिख रही थीं। मैंने दोनों स्तनों को हाथों में लिया – गर्म, मुलायम, भारी। दबाया, मसला, निप्पल्स को उँगलियों से मरोड़ा।
भाभी की आह निकल गई, “उफ्फ… कुणाल …” शिखा ने मेरा पजामा नीचे खींचा, मेरा 8 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया – सख्त, नसें फूली हुईं, सुपारा लाल। उसने मुठ्ठी में जकड़ा और धीरे-धीरे हिलाने लगी। फिर भाभी को चारपाई पर लिटाया, खुद सलवार-कमीज़ उतार फेंकी।
उसकी कुँवारी चूत पर हल्के बाल, गुलाबी फाँक चमक रही थी। वो भाभी की जाँघों पर बैठ गई, दोनों की चूतें एक-दूसरे से रगड़ने लगीं। भाभी की चूत 6 महीने की प्यास से पूरी तरह भीगी हुई थी, शिखा की कुँवारी चूत भी रस छोड़ने लगी। कमरे में चिपचिपी आवाज़ें गूँजने लगीं।
मैं पीछे से शिखा की गांड पकड़कर अपना लंड उसकी गांड की दरार में रगड़ने लगा। शिखा ने सिसकारी भरी, “पहले भाभी को चोदो भैया… वो बेचारी तरस रही हैं।” भाभी ने अपनी जाँघें चौड़ी कर दीं, साड़ी कमर तक ऊपर उठा दी। उनकी चूत पूरी तरह खुली थी – गुलाबी, मोटे होंठ, बीच में चिकनी गड्ढी तरस रही थी।
मैंने लंड का सुपारा उस पर रखा और एक जोर का धक्का मारा। पूरा लंड फचाक से अंदर तक। भाभी की चूत गर्म, मुलायम और रसीली थी। “आह्ह्ह… देवरजी… मार डालोगे …” उनकी आवाज़ काँप गई। मैंने कमर पकड़कर तेज़-तेज़ ठोकना शुरू किया। हर धक्के में भाभी का जिस्म हिल रहा था, भारी स्तन उछल-उछल कर मेरे सीने से टकरा रहे थे। “Village Hot Chudai Story”
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : बारिश में मौसा साथ सुहागरात मन गई मेरी
शिखा उनके ऊपर झुककर उनके होंठ चूस रही थी, एक स्तन दबा रही थी। सिर्फ़ बारह-पन्द्रह धक्कों में भाभी झड़ गईं – उनकी चूत ने मेरे लंड को ज़ोर से जकड़ा, रस की बौछार हुई, कमर ऊपर उठाकर वो चिल्लाईं, “बस… हो गया… आह्ह्ह… मर गई…” लंड बाहर निकाला तो रस से लथपथ था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
शिखा ने तुरंत अपनी गांड पीछे खिसकाई। उसकी कुंवारी चूत पर मैंने लंड रखा। पहले सिर्फ़ सुपारा अंदर गया, शिखा ने दाँत भींचे, “डाल दो भैया… पूरा… फाड़ दो मुझे…” मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा। झटके से सील टूट गई, हल्का खून बहा। शिखा ज़ोर से चीखी, फिर खुद कमर हिलाने लगी। “अब दर्द कम है… चोदो मुझे… पूरी ताकत से…”
मैं दोनों को बारी-बारी चोदता रहा। कभी भाभी की ढीली-ढाली, रसीली चूत में, कभी शिखा की टाइट, कुंवारी चूत में। दोनों पूरी तरह मदमस्त थीं – न शर्म, न हिचक। भाभी बार-बार कह रही थीं, “और ज़ोर से देवरजी… आज फाड़ दो मुझे…” शिखा चिल्ला रही थी, “भैया… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… रोज़ चोदना मुझे…” पूरे एक घंटे तक चुदाई चली।
मैंने पहले भाभी की चूत में झड़ा – गर्म वीर्य उनकी कोख में भर दिया। बीच में शिखा तीन बार और भाभी चार बार झड़ीं। फिर शिखा ने मेरा लंड मुँह में लिया, गले तक उतारा, चूसा, चाटा। दस मिनट में फिर तन गया। इस बार मैंने शिखा को ज़मीन पर लिटाया, दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और ज़ोर-ज़ोर से ठोका।
उसकी चूत से चिपचिपी आवाज़ें आ रही थीं। हम दोनों एक साथ झड़े – मैंने उसकी कोख में दूसरा माल उड़ेल दिया। भाभी ने भी लंड मुँह में लेकर चूसा और मुझे उनके मुँह में झड़ने दिया। सारा वीर्य वो गले से नीचे उतार गईं, होंठ चाटकर बोलीं, “देवरजी का रस… कितना स्वादिष्ट…” तीनों नंगे ही थककर सो गए।
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : भैया मेरी पेंटी पर मुठ मार कर गिराते
सुबह भैया लौटे, कुछ पता नहीं चला। हम तीनों लखनऊ वापस आ गए। उस दिन के बाद ऋतु भाभी और शिखा दोनों मेरी हो गईं। जब भी मौका मिलता – कभी भैया के बाहर जाने पर, कभी रात को छुपकर – हम तीनों मिलकर पूरी रात आग लगाते। भाभी की रसीली चूत और शिखा की टाइट जवानी – दोनों का मज़ा अलग-अलग था।
आज भी जब वो दिन याद आता है, लंड अपने आप खड़ा हो जाता है एक बार अपने दोस्त को भी बुलाकर मज़ा दिलवाया था उससे पैसे भी लिया था वो कहानी बाद में लिखूँगा ये कहानी कैसी लगी जरूर बताइयेगा और अगर आपकी कोई ऐसी आपबीती हो तो बताइए मैं उसको इस वेबसाइट पर डाल दूँगा पूरी privacy के साथ धन्यवाद.
दोस्तों आपको ये Village Hot Chudai Story मस्त लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और Whatsapp पर शेयर करे………..
Discover more from Crazy Sex Story
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Leave a Reply