Sexy Bhabhi Fuck Kahani
मुझे बचपन से ही सेक्स के बारे में कुछ-कुछ पता था। हम देहात में रहते थे, जहाँ गाय-भैंस, कुत्ते-बिल्ली सबके सामने प्रजनन होता रहता था। पिताजी के पास कई गायें थीं। जब वे हीट में आतीं, तो नौकर साँड़ ले आता। मैंने दस साल की उम्र तक साँड़ का लंबा-पतला लंड गाय की चूत में आते-जाते देखा था। Sexy Bhabhi Fuck Kahani
पहले तो कुछ नहीं लगता था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ वो नजारा मुझे अंदर तक गुदगुदाने लगा। बारह साल की होते-होते मेरी माहवारी शुरू हो गई। बड़ी दीदी ने मुझे समझाया था कि पति जो करे, उसे खुशी-खुशी करने देना।
मेरे सीने पर बड़े-बड़े स्तन उभर आए थे, नितंब भरे-चौड़े हो गए थे, और भोस पर घने काले घुंघराले बाल निकल आए थे। उसी साल मेरी मंगनी सुधीर से हो गई। पहली बार जब वो घर आए और हम मिले, तो उन्होंने मेरी कच्ची चूचियां सहलाईं और अपना लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया।
मुझे इतनी गुदगुदी हुई कि अगर दीदी न आ जातीं तो शायद उसी दिन कुछ हो जाता। सोलह साल की उम्र में शादी हो गई और मैं ससुराल आ गई। सुहागरात आज भी याद है। सुधीर ने आधे घंटे तक मुझे चूमा, चाटा, स्तनों से खेला, भोस सहलाया, और मेरे हाथ से अपना लंड सहलवाया।
फिर धीरे-धीरे चूत में डाला। पहली बार थी, थोड़ा अजीब लगा, लेकिन उत्साह इतना था कि दर्द का ध्यान ही नहीं रहा। एक घंटे तक चुदाई चली, मैं दो बार झड़ गई। आज भी वो मुझे वैसी ही उत्साह से चोदते हैं जैसे पहली रात थी। हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।
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हमने आपस में समझौता किया है कि अगर मन करे तो बाहर किसी के साथ भी मजा ले सकते हैं, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं था। शादी के दो साल बाद सुधीर के दूर के चाचा दुबई से लौटे। उनके साथ उनका बेटा राकेश था, मेरी उम्र का, और बेटी दिशा, दो साल छोटी।
दोनों भाई-बहन वहाँ रेसिडेंशियल स्कूल में पढ़े थे। चाचा नया घर बना रहे थे, इसलिए कुछ दिन हमारे यहाँ रुके। राकेश और दिशा बहुत प्यारे थे। जल्दी ही हम तीनों में गहरी दोस्ती हो गई। नया घर बनने के बाद भी वे रोज आते, घंटों बातें करते।
मैंने देखा कि दोनों बहुत होशियार थे, लेकिन सेक्स के बारे में बिल्कुल अनजान। राकेश मानता था कि लड़का-लड़की मुँह से मुँह लगाते हैं तो बच्चा हो जाता है। दिशा थोड़ा ज्यादा जानती थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि असल में चुदाई कैसे होती है।
एक दिन सुधीर को दूसरे गाँव जाना पड़ा। इतने बड़े घर में अकेले रात बिताने से मुझे डर लगता था। मैंने राकेश और दिशा को सोने के लिए बुला लिया। चाचा-चाची ने खुशी-खुशी इजाजत दे दी। रात का खाना खाकर हम ताश खेलने लगे। राकेश ने रानी डाली, मैंने उस पर राजा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दिशा शरमाते हुए हँसी और बोली, “रानी पर राजा चढ़ गया, अब बच्चा होगा।”
राकेश हँसा, “क्या बकवास है!”
दिशा ने मुझे देखा, “है न भाभी?”
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मैंने हँस कर कहा, “अरे ये तो ताश है, इसमें बच्चा-वच्चा नहीं होता।”
खेल आगे बढ़ा। दिशा की रानी पर मैंने गुलाम डाला।
वो फिर बोली, “रानी पर गुलाम चढ़ेगा तो राजा मार डालेगा।”
राकेश नाराज हो गया, पत्ते फेंक दिए। मैंने उसे शांत किया। दिशा मुँह छिपाए हँस रही थी।
फिर बोली, “भैया, भाभी से पूछो न, बच्चा कैसे पैदा होता है।”
राकेश चुप रहा।
मैंने धीरे से कहा, “बताओ न, मुझे भी जानना है।”
दिशा शरमाते हुए बोली, “भैया कहते हैं कि लड़का-लड़की हाथ पकड़कर मुँह से मुँह लगाते हैं, बस।”
मैंने पूछा, “और तुम क्या कहती हो?”
उसने मुँह फेर लिया, “नहीं बताती, शरम आती है।”
राकेश बोला, “मैं बताता हूँ। वो कहती है कि लड़का लड़की पर चढ़ता है। सही है न भाभी?”
मैंने कहा, “सही है, लेकिन पूरा नहीं। जब लड़का ऊपर चढ़ता है तो वो क्या करता है?”
दिशा ने सर झुका कर कहा, “चोदता है।”
राकेश चौंक गया, “गंदी बात!”
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मैं समझ गई कि दोनों को चोदने का मतलब भी ठीक से नहीं पता। मैंने धीरे-धीरे सब समझाया – लंड कैसे खड़ा होता है, चूत कैसे गीली होती है, लंड चूत में कैसे अंदर-बाहर होता है, और उस मजा से कैसे बच्चा बनता है। बातें करते-करते हम तीनों गर्म हो गए थे। दिशा बार-बार अपनी निक्कर ठीक करने के बहाने भोस सहला रही थी। राकेश का लंड पजामे में तंबू बना रहा था।
मैंने कहा, “दिखाओ न एक-दूसरे को। तुम दोनों कुछ नहीं जानते, देखो तो सही।”
राकेश ने शरमाते हुए पजामा नीचे किया। उसका लंड सात इंच लंबा, दो इंच मोटा, बिल्कुल सीधा। टोपी से ढका हुआ मट्ठा, चिकना प्री-कम से गीला। दिशा आश्चर्य से देखती रही। मैंने उसे हाथ लगाने दिया। वो छूते ही थरथराया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने टोपी ऊपर-नीचे की, साफ करने को कहा। वो बाथरूम गया। फिर दिशा की बारी। उसने कुर्ती खोली। ब्रा नहीं पहनी थी। उसके स्तन गोल, सख्त, जवानी से भरे। गुलाबी एरिओला, छोटी-सी कड़ी निप्पल। राकेश का लंड देखकर और खड़ा हो गया।
मैंने भी अपनी चोली उतारी। मेरे स्तन थोड़े झुके हुए, लेकिन निप्पल्स बहुत संवेदनशील। राकेश ने बिना पूछे मेरे स्तन सहलाए, निप्पल्स मसले। मेरी भोस तुरंत गीली हो गई। अचानक दरवाजे पर खटखट हुई। जल्दी से कपड़े पहने और मैंने दरवाजा खोला – सुधीर वापस आ गए थे।
उन्हें देखते ही उन्होंने मुझे बाहों में लिया, होंठों पर होंठ रख दिए। बिना कुछ कहे मुझे बेड पर पटक दिया, घाघरा ऊपर किया, निक्कर उतारी और अपना आठ इंच का मोटा लंड एक झटके में चूत में डाल दिया। मैंने पैर फैलाए, वो जोर-जोर से धक्के मारने लगे। पंद्रह-बीस धक्कों बाद धीमे, गहरे धक्के।
मैंने हाँफते हुए कहा, “घर में मेहमान हैं।”
वे रुक गए। मैंने राकेश-दिशा के बारे में बताया।
वे घबरा गए, लेकिन मैंने कहा, “उन्हें चुदाई सिखानी जरूरी है। चाची ने खुद कहा था कि इन दोनों को सही तरीके से समझाओ।”
सुधीर मुस्कुराए, “तो बुलाओ।”
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राकेश और दिशा पहले से ही दरवाजे पर खड़े थे। सुधीर ने मुझे चोदना जारी रखा। मैंने उन्हें पास बुलाया। सुधीर ऊपर उठे ताकि वे साफ देख सकें कि लंड चूत में कैसे आता-जाता है। दिशा एक हाथ से अपने स्तन मसल रही थी, दूसरा भोस पर। राकेश धीरे-धीरे मुठ मार रहा था।
सुधीर उतरे। मैंने राकेश का लंड पकड़ा, “चोदना चाहते हो न?”
वो बिना बोले मेरे पैरों के बीच आ गया। पहले तो सही जगह नहीं मिली, लेकिन मैंने गाइड किया और एक झटके में पूरा लंड अंदर। फिर वो खुद ही जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मजा इतना था कि मैं जल्दी ही झड़ गई। उधर सुधीर ने दिशा को गोद में लिया।
पहले स्तन सहलाए, फिर निक्कर में हाथ डाला। दिशा पहले शरमाई, फिर खुद ही उसका लंड पकड़ कर मुठ मारने लगी। सुधीर ने उसे फ्रेंच किस किया। राकेश ये सब देखकर और तेज चोदने लगा। फिर मैंने दिशा को गोद में लिया, उसके पैर चौड़े किए।
उसकी भोस बड़ी, गुलाबी, घने बालों वाली। क्लिटोरिस मोटी और कड़ी। सुधीर ने जीभ से चाटा, उंगली से सहलाया। दिशा जल्दी ही पहला ऑर्गेज्म पा गई – पूरा बदन काँपा, सिसकारियाँ निकलीं, लेकिन कोई दर्द नहीं, सिर्फ मजा। फिर सुधीर ने मुझे फिर से चोदा। “Sexy Bhabhi Fuck Kahani”
मैं चारों खाने चित लेटी, पैर उनके कंधों पर। जोरदार धक्के, फिर डॉगी स्टाइल। दोनों बार मैं झड़ी। उनका वीर्य मेरी चूत में गिरा। बाद में हमने सबको लंड और चूत के बारे में और समझाया। दिशा ने सुधीर का लंड मुँह में लिया, चूसा। राकेश मेरे स्तन सहलाने लगा।
दिशा इतनी गर्म हो गई कि बोली, “बड़े भैया, अब मुझे भी चोद दो न, सहन नहीं हो रहा।”
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सुधीर पहले हिचके, लेकिन दिशा की जिद और मेरे इशारे से मान गए। उन्होंने उसे ऊपर बिठाया, पहले लंड को भोस की दरार में रगड़ा। दिशा खुद ही नितंब हिलाने लगी। फिर सुधीर ऊपर आए। बहुत धीरे-धीरे, प्यार से लंड अंदर किया। दिशा सिर्फ सिसकारियाँ भर रही थी, मजा ले रही थी। कोई दर्द नहीं, सिर्फ भराव और गुदगुदी। पूरा लंड अंदर गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
पहले धीमे-धीमे, फिर तेज धक्के। दिशा खुद नीचे से कमर उठा-उठा कर साथ दे रही थी। दोनों एक साथ झड़े। उस रात के बाद राकेश और दिशा अक्सर आते रहे। कभी मैं राकेश के साथ, कभी सुधीर दिशा के साथ, कभी हम चारों साथ-साथ। हर बार नया मजा, नई उत्तेजना। आज भी याद करके भोस गीली हो जाती है। नए-नए लंड और नई-नई चूत का मजा ही अलग होता है, है न?
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