Sasur Bahu Chudai XXX
मैं नीलम, ३२ वर्षीय शादीशुदा औरत हूँ। घर में मेरी एक ८ साल की बेटी रूबी है। ५५ साल के ससुर हरिवंश हैं। सुशीला मेरी ५० साल की सास हैं। २८ साल की तलाकशुदा ननद अंजना है। मेरा पति विभूति दुबई में काम करता है और तीन साल बाद छुट्टी पर आता है, वो भी सिर्फ एक महीने की। Sasur Bahu Chudai XXX
मेरा फिगर बहुत सेक्सी है। मेरे बूब्स ३६ इंच, हिप्स ३६ इंच और कमर ३० इंच हैं। रंग गोरा। मेरे चूतड़ बड़े ही मस्त हैं और मेरे अंदर सेक्स की भूख बहुत ज्यादा है। लोग कहते हैं कि मैं अपनी माँ की तरह चुदक्कड़ हूँ। मेरी माँ उमा देवी आज भी अपनी चूत में लंड लेने से नहीं हिचकिचाती जबकि उनकी उम्र ५२ साल हो चुकी है।
जैसा कि आप जानते ही हैं, पति दुबई में होने के कारण मुझे तसल्लीबख्श चुदाई नसीब नहीं होती। मैं दिन-रात लंड के लिए तरपती रहती हूँ, मेरी चूत में लगातार जलन-सी रहती है, जैसे कोई आग लगी हो जो बुझने का नाम ही नहीं ले रही। मेरी ननद अंजना का तलाक हो गया क्योंकि उसका पति साला नामर्द था, बिल्कुल बेकार का लौड़ा जिसे खड़ा होने में भी घंटों लग जाते थे।
भोसड़ी का उस नामर्द ने अंजना को दोष देता रहता था कि वो बांझ है, जबकि खुद वो अंजना की चूत को ठीक से चोद ही नहीं पाता था, बस चूत की होंठों पर लंड रगड़-रगड़ कर झड़ जाता और सो जाता। खैर, हम दोनों भाभी-ननद लंड की भयंकर कमी के कारण एक-दूसरे के साथ लेस्बियन संबंध बना चुकी थीं, जिसमें हम रात-रात भर एक-दूसरे की चूत चाटते, चुचियाँ दबाते और उंगलियों से एक-दूसरे को चरम सुख तक पहुँचाते।
अंजना को मेरी चूत का ऐसा नशा चढ़ गया था कि वो बिना मेरी चूत चखे सो नहीं पाती। जब भी मौका मिलता, वो चुपके से मेरे कमरे में घुस आती, मेरी रात की साड़ी ऊपर करके मेरी चुचियों को दोनों हाथों से मसलने लगती, मेरे गुलाबी निप्पल्स को अपनी जीभ से घुमाती, चूसती, कुतरती, यहाँ तक कि दाँतों से हल्का-सा काट भी लेती जिससे मेरी चूत में और तेज़ी से रस टपकने लगता।
कभी वो मेरी टाँगें फैलाकर मेरी चूत की क्लिटोरिस पर जीभ घुमाती, कभी दो उंगलियाँ अंदर डालकर मेरी जी-स्पॉट को रगड़ती, और कभी अपनी मदमस्त, गीली चूत को मेरे मुँह पर रख देती ताकि मैं उसकी चूत का रस पीऊँ और वो मेरे मुँह पर झड़ जाए। अंजना का यौवन अभी खूब खिला हुआ था, उसकी चुचियाँ ३८ इंच की थीं, इतनी भरी-भरी और गोरी कि उन्हें देखते ही मेरे मुँह में पानी भर आता।
उसकी गांड भी कम से कम ३८ इंच की होगी, गोल, मस्त, इतनी मुलायम और उभरी हुई कि जब वो चलती तो दोनों चूतड़ आपस में टकरा-टकरा कर आवाज़ करते। उसके चूतड़ इतने मोटे और रसीले थे कि मैं अपने हाथ उन्हें छूए बिना रह नहीं पाती, बस दबाती, मसलती, चुटकियाँ काटती और कभी-कभी अपनी उँगलियों से उसके गुदा छेद को भी सहलाती जिससे वो सिहर उठती और अपनी चूत और गीली हो जाती।
लेस्बियन संबंध तक तो सब ठीक था, लेकिन जब अंजना जोश में आ जाती, उसकी कामवासना इतनी भड़क जाती कि उस पर काबू पाना नामुमकिन हो जाता। वो किसी भी कीमत पर असली मोटा, कड़क लंड पाने के लिए बेचैन हो जाती, अपनी चूत को बार-बार सहलाती और कराहती रहती।
एक दिन वो मेरे पास आई और सीधे पूछ बैठी कि मेरा पति यानी उसका भाई कैसी चुदाई करता है और उसका लंड कितना बड़ा है। मैंने उसे विस्तार से बताया कि उसके भैया का लंड पूरे नौ इंच लंबा है, मोटा, नसों से भरा हुआ, और जब खड़ा होता है तो लोहे की तरह कड़क हो जाता है।
जब वो मुझे चोदता है तो पहले मेरी चूत को जीभ से चाट-चाट कर इतना गीला कर देता है कि रस टपकने लगता, फिर अपना वो विशाल लंड मेरी चूत के मुंह पर रखकर धीरे-धीरे अंदर धकेलता है, और एक झटके में पूरा अंदर डाल देता है जिससे मेरी चूत की दीवारें फैल जाती हैं और मुझे तारे दिखने लगते हैं।
वो इतनी जोर-जोर से पेलता है कि हर धक्के में मेरी चूत की भोसड़ी बन जाती है, मेरी चीखें निकल आती हैं, और जब वो मेरी चूत चूसता है तो इतनी गहराई से चूसता है कि सारा रस बाहर निकाल देता है, मेरी चूत पूरी खाली हो जाती है। वो अक्सर कहता है कि अगर उसकी कामवासना का बुखार चढ़ जाए तो वो अपनी माँ या बहन को भी चोद डाले.
लेकिन मेरी बदकिस्मती देखिए कि वो दुबई में रहता है और तीन साल में सिर्फ एक महीने के लिए आता है, उस एक महीने में भी रोज़ नहीं, कभी-कभी ही मुझे चोद पाता है। मेरी चुदास चूत को तो रोज़ लंड चाहिए, अंजना, साली तू ही कोई प्लान बना कि हम दोनों रोज़ लंड के मजे ले सकें, मैंने उसे समझाया।
अंजना ने आह भरी और कहा, “भाभी, तुझे तो तीन साल में एक महीना तो लंड मिल जाता है, मुझे तो आज तक असली चुदाई का मजा नहीं आया। मेरे उस हरामी नामर्द पति का लंड तो खड़ा भी नहीं होता था, बस मेरी चूत पर रगड़ता रहता, दो मिनट में झड़ जाता और मैं तड़प-तड़प कर आग में जलती रहती। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
भाभी मैं क्या प्लान करूँ, ये तो तुम्हें ही कोई इंतजाम करना पड़ेगा, मेरी चूत को भी शांत करवा दो। अगर तेरा कोई यार है, कोई कजिन है, कोई पड़ोसी है तो उससे ही मुझे चुदवा दो, देखो भाभी मेरी चूत कैसे दहक रही है, लंड के बिना जल रही है।” उसने अपनी सलवार नीचे खींचकर अपनी चूत दिखाई, जो पहले से ही गीली थी, होंठ फूले हुए थे और क्लिटोरिस तनी हुई खड़ी थी।
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मैंने कहा, “चलो देखते हैं क्या हो सकता है।”
अगले दिन मैं बाजार जा रही थी तो मैंने अपने ससुर से पूछा, “बाबूजी आपको क्या मंगवाना है बाजार से? जो चाहिए मैं ला दूँगी।”
मेरे ससुर ने मुझे गौर से देखा, उनकी आँखें मेरे चेहरे से नीचे सरककर मेरी चुचियों पर टिक गईं, फिर धीरे-धीरे मेरे पेट और कमर की ओर घूमीं। उन्होंने कहा, “बहू तुम शिलाजीत ले आना और साथ में छुहारे भी ले आना।”
मैंने पूछा, “ठीक है लेकिन आपको क्या करनी है ये चीजें बाबूजी?”
बाबूजी बोले, “बेटी तेरा पति तो दुबई में बैठा है, लेकिन मुझे तो पति का काम करना पड़ता है ना, तेरी सास को खुश करने के लिए ये चीजें चाहिए। इनसे मर्दानगी बढ़ती है, ताकत आती है बेटी।”
कहते हुए बाबूजी ने मुझे अजीब नजरों से देखा और मुझे लगा कि वो मेरी चुचियों को घूर रहे हैं, उनकी निगाहें मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरी गहरी दरार में उतर रही थीं। जब मैं बाजार जा रही थी तो मुझे बाबूजी की नजरें मेरे चूतड़ों का पीछा करती हुई महसूस हुई। मेरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई और मेरी चूत में पानी भर गया।
मैं सारी चीजें लेकर आई और बाबूजी की चीजें उनको देने गई। शिलाजीत की छोटी-सी डिब्बी और छुहारों का पैकेट हाथ में लिए मैं उनके कमरे में घुसी। बाबूजी बिस्तर पर बैठे थे, उनकी आँखें जैसे पहले से ही मेरा इंतज़ार कर रही थीं। जब मैंने चीजें आगे बढ़ाईं तो बाबूजी ने उन्हें पकड़ते हुए मेरे हाथों को जान-बूझकर छू लिया, उनकी उँगलियाँ मेरी हथेली पर रुक गईं, गर्म और मजबूत।
अचानक मेरा पैर फिसल गया, फर्श पर थोड़ा-सा पानी था शायद, और मैं आगे की ओर झुक गई। बाबूजी ने फुर्ती से अपनी मजबूत बाहों को फैलाया और मुझे पूरी तरह अपनी गोद में समेट लिया। मैं उनकी चौड़ी, बालों से ढकी छाती से सट गई। मेरी भरी-भरी चुचियाँ उनके सीने में गहराई तक धंस गईं, मेरे निप्पल्स सख्त होकर उनके कपड़े के ऊपर से महसूस होने लगे।
मेरे जिस्म में तुरंत आग दहकने लगी, चूत में गरम रस की लहर दौड़ गई और मेरी साँसें तेज़ हो गईं। उनका एक हाथ मेरी कमर पर टिका रहा, लेकिन दूसरा हाथ बार-बार मेरे कुल्हों पर सरक आता, मेरे गोल चूतड़ों को हल्के-हल्के दबाता, मसलता, जैसे नाप रहा हो कि कितने मुलायम और रसीले हैं। मैं शरमा गई, लेकिन शरीर से दूर होने का मन नहीं कर रहा था।
“माफ करना बाबूजी, मेरा पैर फिसल गया था। आप मुझे न थाम लेते तो मैं तो गिर ही जाती,” मैंने धीमी, काँपती आवाज़ में कहा, अपनी साँसें उनके गले पर महसूस करते हुए।
वो बोले, उनकी आवाज़ गहरी और गरम थी, “बेटी मैं किस लिए हूँ। अगर किसी चीज की जरूरत हो तो बेझिझक मेरे पास आना। मैं अपने परिवार के लिए सब कुछ करने को तैयार हूँ। मुझसे कभी भी शरमाना नहीं, मेरी बेटी।” कहते हुए उनकी उँगलियाँ मेरे चूतड़ों पर और दबाव डाल रही थीं, जैसे संदेश दे रही हों।
मैंने झटके से नीचे देखा तो उनके धोती-पजामे में उनका लंड पूरी तरह खड़ा होकर सलामी दे रहा था। वो इतना मोटा और लंबा लग रहा था कि कपड़े को फाड़ने को तैयार था, नसें उभरी हुईं, सिरा फूला हुआ। मैं मुस्कुराई, मेरे होंठों पर एक शरारती हँसी खेल गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अपने आप से मन ही मन बोली, “साली तू बाहर क्या ढूंढ रही है, महा लंड तो घर में ही विराजमान है। ये साला ससुर मेरे ऊपर ही नजरें गड़ा कर बैठा है और मुझे भी तो लंड चाहिए। लेकिन अब साला बूढ़ा नहीं जानता कि मैं उसके साथ चुदाई तो करूँगी पर इसकी बेटी को भी इसके लंड से चुदवाऊँगी।”
मैं सारी रात अपनी और अंजना की चुदाई का प्लान बनाती रही। दिमाग में हर संभावना घूमती रही – कैसे बाबूजी को ललचाऊँ, कैसे अंजना को शामिल करूँ, कैसे दोनों की चूतें एक साथ उनकी लंड की मेहरबानी से भर जाएँ। जब मैं सारा काम खत्म करके अपने कमरे में अंजना के पास जा रही थी तो बाबूजी के कमरे से आवाज़ें आने लगीं, दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था।
“अह्ह्ह्ह्ह मर डाला मेरे राजा, आज क्या खा कर आए हो, मेरी चूत की धज्जियाँ ही उड़ा डालीं। आज तेरा लंड कुछ ज्यादा ही जोर मार रहा है। ऐसा लगता है जैसे किसी जवान औरत की कल्पना करके मुझे चोद रहे हो। मेरे स्वामी मैं आपके हल्लाबी लंड के सामने नहीं टिक सकी, ये मैं नहीं झेल सकती। जब कल मैं अपने मायके चली जाऊँगी तो शुक्र होगा कम से कम दो महीने तो आराम से कट लूँगी और तुम मुठ मार-मार के गुजारा करना। ओह्ह्ह्ह मैं झड़ी, मेरी चूत का रस निकल गया। निकाल लो अपना लौड़ा मेरी बुर में से, मैं तो थक गई।” सास की आवाज़ कराहती हुई, थकी हुई लेकिन संतुष्ट थी।
बाबूजी बोले, उनकी आवाज़ में भूख अभी भी बाकी थी, “साली मेरा तो झड़ दे, चूस के, मुठ मार के या फिर अपनी गांड में चुदवा के। मैं इस खंभे जैसे लंड को लेकर कहाँ जाऊँ, बेहनचोद मेरा तो पानी निकाल दो।”
सास माँ बोली, “अपना पानी आप ही निकाल लो, मैं तो सोने लगी हूँ।”
मेरा दिल किया कि मैं दौड़ के अंदर घुस जाऊँ, बाबूजी का वो मोटा, गरम लंड अपनी चूत में लेकर मस्त हो जाऊँ, उसकी पूरी लंबाई को अपनी चूत की दीवारों में महसूस करूँ, लेकिन ऐसा कर न सकी। मैं बस खड़ी रह गई, मेरी चूत में आग लगी हुई थी, रस टपक रहा था, लेकिन मैंने खुद को रोका और अपने कमरे की ओर बढ़ गई।
अंजना सो रही थी, मैं चुपके से उसके पास लेट गई और सारी रात बाबूजी के लंड के सपने देखते हुए जाग कर निकाल दी। सुबह जब मैं उठी तो अंजना मेरे साथ लिपटी हुई थी। उसके नरम, गर्म शरीर ने मेरे पूरे बदन को घेर रखा था, और उसके दोनों हाथ मेरे मम्मों पर थे जिन्हें वो जोर से दबा रही थी। “Sasur Bahu Chudai XXX”
उसकी उंगलियां मेरे निप्पल्स को कसकर पकड़कर मसल रही थीं, जिससे मेरे स्तन सख्त और भारी हो रहे थे, मेरे निप्पल्स पूरी तरह खड़े होकर तन गए थे और एक गर्म, झनझनाती सी खुजली मेरे पूरे शरीर में फैल रही थी। मैं धीरे से उठी, बाथरूम होकर आई तो मेरी ननद अपनी चूत खुजला कर बोली, “भाभी अगर तुमने किसी लंड का इंतजाम नहीं किया तो मैं मर जाऊँगी, मुझे बचा लो मेरी प्यारी भाभी।”
मैंने मुस्कुरा कर पूछा, “किसका लंड चाहिए?”
उसने जवाब दिया, “लंड किसी का भी हो, चलेगा। अब तो चूत इतनी बेसब्री हो चुकी है कि अगर मेरे बाप का भी मिल जाए तो इसकी आग ठंडी करने के लिए ले लूँगी।”
मैंने कहा, “ठीक है अब मुकर मत जाना क्योंकि तुझे आज बाबूजी का लंड ही मिलने वाला है। तू बस वैसा ही करना जैसा मैं कहती हूँ।”
वो मान गई। जब वो तैयार होने चली गई तो मैं बाबूजी की चाय लेकर उनके रूम में चली गई। मैंने जानबूझ कर साड़ी का पल्लू नीचे गिरा रखा था जिस कारण मेरे वक्ष आधे से अधिक नंगे हो रहे थे, मेरे गोल, भरे हुए मम्मे लगभग पूरी तरह बाहर झांक रहे थे, मेरे गहरे गुलाबी निप्पल्स हल्के से उभरे हुए थे और हवा में थोड़े थोड़े हिल रहे थे। सास माँ अपने मायके जाने के लिए तैयार हो रही थी।
मैंने आगे झुक कर चाय बाबूजी को दी और अपने मुलायम, गोल कुल्हों को उनके हाथ से रगड़ दिया। मेरे नितंब उनकी हथेलियों पर जोर से दब रहे थे, मैंने उन्हें हल्का सा घुमाया ताकि उनके हाथ मेरे गद्दीदार गोरे चूतड़ों को अच्छी तरह महसूस कर सकें, और मैंने महसूस किया कि उनका लंड पजामे के अंदर उठक-बैठक करने लगा है, धीरे-धीरे सख्त होता जा रहा था, अब वो पूरी तरह खड़ा होकर कपड़े को तान रहा था।
मैंने जानबूझ कर उनसे कहा, “बाबूजी देखो मेरा हाथ दुख रहा है, क्या ये सूज गया है, देखो तो सही।”
इतना कह कर अपना हाथ उनके हाथ में दे दिया। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मलने लगे, उनकी उंगलियां मेरी हथेली पर घूम रही थीं और धीरे-धीरे कलाई तक सहला रही थीं, फिर मेरी बांह पर ऊपर चढ़ने लगीं। मैं उनसे सट कर बैठ गई, मेरा एक स्तन उनकी बांह से जोर से रगड़ खा रहा था, मेरा निप्पल उनके शरीर पर दब रहा था और मेरी सांसें तेज और गर्म हो रही थीं। “Sasur Bahu Chudai XXX”
मैंने नोट किया कि बाबूजी मेरा हाथ सहलाने लगे और उनका लंड पजामे के अंदर सिर उठाने लगा, अब वो पूरी तरह तना हुआ दिखाई दे रहा था, कपड़े पर एक मोटा, लंबा उभार बन गया था जो फड़क रहा था। मैंने उनको पूरी तरह उत्तेजित कर दिया। जब वो मेरे कंधे पर हाथ रखने लगे तो मैं जानबूझ कर बोली, “अब मैं चलती हूँ, माँजी का नाश्ता बनाना है।”
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मैंने हाथ छुड़ाया और चली गई लेकिन बाबूजी का बुरा हाल था, वो अपने लंड को मसल रहे थे, उनकी उंगलियां पजामे के ऊपर से उसके सख्त, गर्म लंड को जोर से दबा रही थीं, उसे ऊपर नीचे रगड़ रही थीं और उनकी सांसें भारी और फूली हुई हो गई थीं, उनकी आँखें बंद थीं और चेहरे पर वासना साफ झलक रही थी।
मैंने अंजना को कहा, “तुम माँजी के जाने के बाद कमर में दर्द का नाटक करना और बाबूजी को कमर पर आयोडेक्स लगाने के लिए कहना। और धीरे-धीरे नीचे तक उनका हाथ ले जाना। लेकिन ये सब उस वक्त करना जब मैं माँजी को बस स्टैंड पर छोड़ने जाऊँ और घर में कोई न हो। देखना वो तुझे चोदने को तैयार हो जाएँगे।
मैंने उनकी चाय में शिलाजीत मिला दी थी। आज तेरी चुदाई पक्की हो जाएगी मेरी बन्नो। तुम ये नॉकर और टी-शर्ट पहन लो और ब्रा-पैंटी मत पहनना। तेरा बाप आज किसी को भी चोदने को तैयार हो जाएगा। तुम उस पर अपनी जवानी का जादू चला दो मेरी रानी। उसके बाद हम दोनों उसके लंड के मजे लेंगे। वो भी चूत का भूखा है मेरी जान।”
वो हैरान होकर मेरी तरफ देखने लगी। मैं फिर बाबूजी के कमरे में गई और उनकी जांघों पर हाथ रख कर बातें करने लगी और उनके लंड को भी छू लिया। मेरी उंगलियां उनके पजामे के ऊपर से उनके सख्त, गर्म लंड पर फिसलीं, मैंने उसे पूरी हथेली से पकड़कर हल्का दबाया. “Sasur Bahu Chudai XXX”
फिर धीरे से ऊपर नीचे सहलाया और महसूस किया कि वो और भी ज्यादा फड़कने लगा है, उसकी गर्मी मेरी हथेली में फैल रही थी। वो बेचैन होने लगे और मैं मुस्कुरा कर बाहर आ गई। मैं थोड़ी देर में वापस आई और अंजना के कमरे में झांकने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अंजना ने आवाज लगाई, “पापा जरा मेरी कमर पर बाम लगा देना, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।”
उसने ये कहते हुए अपनी टी-शर्ट ऊपर उठा दी और उसका गोरा पेट नंगा हो गया, उसकी चिकनी, सपाट कमर और नाभि पूरी तरह दिख रही थी। और जब उसने अपनी नॉकर को नीचे कर दिया तो उसकी जांघें नजर आने लगीं, उसकी चिकनी, गोरी जांघों के बीच उसकी बिना बालों वाली, गुलाबी चूत की झलक भी दिखने लगी, उसकी चूत की पतली सी लकीर पर हल्की नमी चमक रही थी।
मेरी आँख ने देखा कि बाबूजी की नजर में वासना की चमक उभर आई। उनकी आँखों में एक लाली नजर आने लगी। वो अपनी बेटी के नजदीक आ गए और वासना से भरी नजरों से देखते हुए बोले, “बेटी क्या हुआ, दर्द कहाँ हो रहा है?”
और उनका हाथ अपनी बेटी की कमर पर चला गया और उसकी कमर को सहलाने लगा। उनकी उंगलियां अंजना की नंगी कमर पर घूम रही थीं, धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरक रही थीं, अब उनकी हथेली उसके पेट पर दब रही थी और उंगलियां उसकी जांघों की तरफ बढ़ रही थीं।
मैंने देखा कि अब बाबूजी नहीं बल्कि उनका लंड बोल रहा था। उनकी आवाज से साफ जाहिर था कि कामवासना में वो बाप-बेटी के रिश्ते की पवित्रता को भूल गए थे। अब कमरे में सिर्फ चूत और लंड के मिलन का सीन बना हुआ था। बाबूजी के हाथ काँप रहे थे जब वो अपनी बेटी की कमर को सहला रहे थे। “Sasur Bahu Chudai XXX”
उनकी उंगलियां अंजना की नंगी, चिकनी कमर पर थर-थर काँपती हुई घूम रही थीं, उसकी मुलायम त्वचा को छूते ही उनकी सांसें भारी हो गई थीं और उनकी आँखें वासना से लाल हो रही थीं। अंजना ने अपना सिर बाबूजी की छाती पर टिका दिया। अंजना की साँसें तेज हो चुकी थीं, उसके गर्म, नम होंठ बाबूजी की छाती से सटे हुए थे और हर सांस के साथ उसके स्तन उनके शरीर से रगड़ खा रहे थे।
बाबूजी ने आयोडेक्स की शीशी उठाई और कमर पर लगाना शुरू कर दिया। अंजना की चुची अब उनके शरीर से सट गई थी और बाबूजी और भी उत्तेजित होने लगे, उनका सख्त लंड पजामे के अंदर जोर से फड़क रहा था और कपड़े को तान रहा था। बाबूजी ने अपना एक हाथ उसकी चुची पर रख दिया और धीरे से दबा दिया, उनकी हथेली उसके गोल, भरे हुए स्तन को पूरी तरह ढक रही थी, उंगलियां निप्पल को हल्का सा निचोड़ रही थीं जिससे अंजना के निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए।
“ओह्ह्ह पापा धीरे से, मुझे बहुत घबराहट हो रही है। हाय मुझे दर्द हो रहा है, बाम मलिये ना पापा,” अंजना बोली और अपने बाप के शरीर से चिपक गई, उसके नंगे पेट और जांघें बाबूजी के शरीर से पूरी तरह सट गई थीं, उसकी चूत की गर्मी उनके पजामे तक महसूस हो रही थी।
बाबूजी का लंड अब बेकाबू हो चुका था। अंजना ने अपनी नॉकर को और नीचे कर दिया जिसके साथ ही उसकी जांघें पूरी तरह नंगी हो गईं, उसकी गोरी, चिकनी जांघों के बीच उसकी गुलाबी, नम चूत अब पूरी तरह दिख रही थी और उसकी पतली लकीर पर चमकती हुई चिपचिपी नमी साफ नजर आ रही थी। अब उसके कुल्हे बस उसकी टी-शर्ट से ही ढके हुए थे, उसके गोल, मोटे चूतड़ हल्के से हिल रहे थे।
बाबूजी ने काँपते हाथों से अंजना की कमर और जांघों पर बाम लगाना शुरू कर दिया और अंजना और जोर से अपने बाप के शरीर से चिपकती चली गई, उसके नंगे स्तन उनकी छाती से रगड़ खा रहे थे और उसके निप्पल उनके शरीर पर दब रहे थे। उनकी उंगलियां अब उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर सरक रही थीं.
बाम की ठंडक के साथ-साथ उनकी गर्म उंगलियां उसकी चूत के बहुत करीब पहुँच रही थीं। मैं मंत्रमुग्ध होकर कमरे के अंदर का सीन देख रही थी और मेरे जिस्म में भी कामाग्नि जल रही थी, मेरी चूत पहले से ही भीगी हुई थी और मेरे निप्पल सख्त होकर कपड़ों को चुभ रहे थे। “Sasur Bahu Chudai XXX”
“पापा मेरे कुल्हे भी दर्द कर रहे हैं, प्लीज वहाँ भी बाम लगा दो।”
बाबूजी ने बाम लगाना शुरू कर दिया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर उठा दिया। वो अपनी बेटी के चूतड़ों पर बाम लगाने लगे, उनकी हथेलियां उसके गोल, नरम, गोरे चूतड़ों को जोर से दबा रही थीं, उंगलियां चूतड़ों की दरार में घुस रही थीं और बाम को अच्छी तरह मल रही थीं, हर दबाव के साथ अंजना के चूतड़ हिल रहे थे और उसकी चूत की खुशबू हवा में फैल रही थी।
अंजना ने अपना हाथ अपने पापा की छाती पर रख दिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। उसकी साँसें पापा की साँसों से टकरा रही थीं, गर्म और तेज, दोनों के मुंह से हल्की सी कराह निकल रही थी। बाबूजी ने बेटी को बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगे.
पहले धीरे-धीरे फिर जोर से, उनकी जीभ अंजना के मुंह में घुस गई और उसके साथ खेलने लगी, लार के धागे दोनों के होंठों के बीच बन रहे थे। अंजना ने नाटक करते हुए अपने आप को छुड़ाने की झूठी सी कोशिश की लेकिन बाबूजी ने उसे और भी कस कर जकड़ लिया और अपनी बेटी को बेतहाशा चूमने लगे. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनके हाथ अब उसके नंगे चूतड़ों को मसल रहे थे। उनका लंड अंजना के पेट को टच कर रहा था, सख्त, गर्म और मोटा लंड उसके नाभि के नीचे दब रहा था और फड़क-फड़क कर उसकी त्वचा को छू रहा था। बाबूजी ने उसकी चुची कस कर दबानी शुरू कर दी, उनकी उंगलियां उसके स्तनों को निचोड़ रही थीं, निप्पल को खींच रही थीं और मसल रही थीं जिससे अंजना की सांसें और तेज हो गईं। “Sasur Bahu Chudai XXX”
अंजना ने ड्रामा किया, “पापा ये क्या कर रहे हो, मैं आपकी बेटी हूँ। क्या ये पाप नहीं है? आप मुझे छोड़ दो, हम ये सब नहीं कर सकते। पापा मुझे छोड़ दो प्लीज।”
वो भी जानती थी कि अब पापा वापस आने के काबिल नहीं रहे क्योंकि उनका लंड अब फटने के करीब ही था।
पापा ने अपनी बेटी का हाथ अपने लंड पर रख कर कहा, “मेरी बेटी लंड और चूत का एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का रिश्ता। मेरी प्यारी बेटी तू भी लंड के बिना तड़प रही है मुझे पता है और साथ ही तेरी भाभी भी चुदासी है क्योंकि उसका पति भी उसे चोद नहीं सकता। आ जाओ मैं तेरी चूत को चोद कर मस्त कर दूँगा। बेटी मेरा लंड कैसे दहक रहा है, तुम इसको हाथ में लेकर सहलाओ जरा। देखो तुम्हारी चुची कितनी कड़ी हो गई है। जल्दी से अपनी टी-शर्ट भी उतार दो, मेरा लंड तुझे चोदने को तड़प रहा है।”
उन्होंने अंजना का काँपता हुआ हाथ पकड़कर अपने पजामे से बाहर निकले हुए मोटे, लंबे और नसों वाले लंड पर रख दिया। अंजना की हथेली ने तुरंत उसकी गर्मी और फड़कन को महसूस किया, लंड इतना सख्त था कि उसकी नसें उभरी हुई थीं और सिर से पहले ही प्री-कम की बूंदें चमक रही थीं। “Sasur Bahu Chudai XXX”
अंजना भी मस्ती में भर उठी और अपनी टी-शर्ट उतार कर पूरी तरह नंगी हो गई, उसके गोल-मोटे स्तन हवा में लहराने लगे और निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए, उसकी चिकनी चूत अब पूरी तरह खुली थी और उसमें से चिपचिपी नमी बह रही थी। उसने पापा के लंड को दोनों हाथों से भर के मुठियाने लगी, ऊपर नीचे जोर-जोर से सहलाने लगी.
मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : बहन ने अपनी खूबसूरत चूत दिखाई भाई को
हर स्ट्रोक के साथ लंड और ज्यादा तन गया और उसकी आँख से प्री-कम की दो मोटी बूंदें टपक पड़ीं जो अंजना की उंगलियों पर चिपक गईं। बाबूजी चुदाई की मस्ती में आ गए और जोर-जोर से अपनी बेटी की चुचियों को मुँह में लेकर चूसने लगे, पहले एक निप्पल को दाँतों से हल्का काटा फिर पूरी चुची को चूसकर खींचा, लार की धार बहने लगी और अंजना की सांसें कराहों में बदल गईं। “Sasur Bahu Chudai XXX”
“बेटी तू कितनी सेक्सी हो गई है। मेरा लंड तेरी चूत का प्यासा है। अब मुझे अपनी चूत का स्वाद दिखाओ मेरी प्यारी बेटी और मेरे लंड को चूस कर इसका स्वाद देखो। जल्दी से मैं आज सुबह से ही चोदने के लिए तड़प रहा हूँ। लाओ अपनी टाँगें खोल कर अपनी चूत का दीदार तो करवाओ।”
अंजना ने अपनी जाँघें चौड़ी खोल दीं और उसकी चूत मुस्कुरा उठी, गुलाबी फाँकें पूरी तरह फैल गईं, अंदर से गर्म रस टपक रहा था क्योंकि वो आज पहली बार किसी असली मोटे लंड से चुदाई कराने वाली थी। पापा ने अपना मुँह उसकी चिकनी चूत में घुसा दिया और अपनी लंबी जीभ चूत की फाँकों के अंदर डाल दी.
पहले क्लिटोरिस को चाटा फिर जीभ को अंदर बाहर करने लगे, चूसने की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं। “अह्ह्ह्ह्ह पापा ये क्या कर दिया मेरी चूत को, ये तो पानी छोड़ने लगी है। चूस लो मेरी बुर को पापा, ये आज चुदाई के लिए तड़पती है। लाओ मैं आपके लंड को चूस लेती हूँ। मुझे चोद डालो आज, चोद दो अपनी बेटी को मेरे पापा।”
इसके साथ ही अंजना ने पापा का लंड अपने मुँह में ले लिया और लगी चूसने उनके लंड को, पहले सिर को चाटा फिर पूरा लंड गले तक उतार लिया, उसके गले में लंड फंस गया और वो गैग करने लगी लेकिन फिर भी जोर से सक्शन देती रही। लंड आग की तरह दहकने लगा। बाबूजी अपने चूतड़ आगे-पीछे करने लगे, लंड को उसके मुंह में फटाफट ठेलने लगे।
अंजना बाबूजी के लंड को गले के भीतर तक ले गई और कराहने लगी, उधर बाबूजी की जीभ अंजना की चूत में पूरी तरह समा चुकी थी और उसकी चूत का मीठा रस बाबूजी के मुँह से बहने लगा जैसे कि उनके मुँह से लार की नदी बह रही हो, अंजना की चूत झड़ रही थी और उसके शरीर में झटके लग रहे थे।
तभी मैंने कमरे में एंट्री कर दी और बोली, “साले बाबूजी इतने कमीने निकले कि अपनी ही बेटी को चोदने के लिए तैयार हो गए। बेटीचोद साले मैं क्या मर गई थी? मुझे कौन चोदेगा बेहनचोद? तेरा बेटा तो बेहनचोद मुझे छोड़ कर चला गया और तू भी साले अपनी बेटी को ही चोद रहा है। मेरा क्या होगा?”
बाबूजी मुझे देख कर घबरा गए और फिर संभल कर बोले, “बेटी तू भी आ जा मेरी बेटी। मेरा लंड मेरी बहू और बेटी के लिए काफी है। मैं तुम दोनों को चोद कर शांत कर दूँगा। आ जाओ मेरी रानी बहू। अगर बेटा चला गया है तो क्या हुआ, बाप तो जिंदा है। मेरे पास आ मैं तेरी चुचियों को भी चूसता हूँ। आ मेरी बेटी तू भी कोई कम सेक्सी नहीं है। तेरा जिस्म भी चुदाई की आग में जल रहा होगा। ला मेरे पास आ मैं तुझे भी तृप्त कर दूँगा।”
मैंने फटाफट अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए और बिस्तर पर आकर बाबूजी के जिस्म को चाटने लगी और अंजना की चुचियाँ दबाने लगी। बाबूजी ने अपना हाथ मेरी गांड पर फिराना शुरू कर दिया, उनकी उंगलियां मेरी गांड की दरार में घुस रही थीं और मेरी चूत को छू रही थीं। मैंने बाबूजी का लंड हाथ में ले लिया और उसे सहलाना शुरू कर दिया, उनकी उंगलियों के साथ मेरा हाथ भी ऊपर नीचे चलने लगा। उनका लंड पूरी तरह कड़ा हो चुका था और उसकी नसें फूल गई थीं। मैंने उसे चाटना शुरू कर दिया, जीभ से सिर को घुमाया और पूरी लंबाई चाटी। मेरी चूत भी पानीयाई गई थी। “Sasur Bahu Chudai XXX”
मैंने कहा, “आप पहले अंजना को चोद कर शांत कर दो। इसकी चूत अभी प्यासी है लेकिन जरा प्यार से चोदना अपनी बिटिया को।”
ये कहते हुए मैंने अंजना की टाँगें चौड़ी कर दीं और उसकी चूत पर बाबूजी का लंड टिका दिया। उनके टट्टों पर हाथ फिराया जिस कारण बाबूजी के मुँह से अह्ह निकल गई। मैंने उनका लंड अंजना की चूत पर रगड़ा जिसमें से पहले ही पानी निकल रहा था, लंड का गर्म सिर उसकी चूत की फाँकों के बीच फिसल रहा था और दोनों की चिपचिपी नमी एक दूसरे में मिल रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी खुजली इतनी बढ़ गई कि वो अपने आप पर काबू न रख सकी। “पापा अब और मत तड़पाओ। मेरी चूत में आग लगी हुई है। आपका लंड रगड़ना मुझे पागल बना रहा है। पापा मेरी चूत के अंदर पेल दो अपना लौड़ा। पापा मेरे साथ सुहागरात मना लो। मुझे मम्मी की तरह चोद डालो मेरे प्यारे पापा। मुझे पेल दो पापा प्लीज। भाभी मेरी चूत में पापा का लंड पेल दो मेरी प्यारी भाभी। उसके बाद तुम मजे लो लेना पापा के लंड के साथ। मैं तेरी विनती करती हूँ मेरी आग बुझा दो प्लीज।”
बाबूजी का लंड पकड़ कर मैंने अंजना की चूत के मुंह पर टिकाया और कहा, “बाबूजी पेल दो अपना लंड अपनी बेटी की बुर में। देखो कैसे तड़प रही है साली। कैसे दहक रही है इसकी चूत। अब तो इसकी आग आपका लंड ही शांत कर सकता है। उड़ा दो इसकी चूत की धज्जियाँ। पेल दो अपनी बेटी को। डाल दो अपना लंड रस इसकी प्यासी चूत में।”
बाबूजी ने देर करना मुनासिब नहीं समझा और धक्का मार के लंड पेल दिया और उनका आधा लंड पहले धक्के में चूत में समा गया, अंजना की चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ लीं और उसका गर्म, टाइट अंदरूनी हिस्सा लंड को निचोड़ने लगा।
अंजना चिल्लाई, “पापा बहुत दर्द हो रहा है। बाहर निकाल लो अपना लंड। दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा पापा प्लीज।”
लेकिन बाबूजी ने धक्के मारना जारी रखा। उनका लंड अपनी बेटी की चूत के अंदर-बाहर हो रहा था, हर धक्के के साथ ज्यादा गहराई तक घुसता जा रहा था, चूत से चिपचिपी आवाजें निकल रही थीं और अंजना के शरीर में झटके लग रहे थे। “Sasur Bahu Chudai XXX”
बाबूजी भी पुराने खिलाड़ी थे। “बेटी दर्द थोड़ी देर में खत्म हो जाएगा। नीलम तू अंजना की चुचियाँ चूसना शुरू कर दो और इसकी चूत को भी सहलाओ। साली बहुत टाइट है इसकी चूत लेकिन मैं आज इसे चोद कर ठंडी कर दूँगा। ले बेटी ले लो अपना पापा का लंड अपनी प्यासी बुर में और मिटा दो इसकी प्यास।”
मैंने अपनी जीभ से अंजना की चुची चाटना शुरू कर दिया और अपनी उँगलियों से उसकी चूत के आसपास का इलाका उत्तेजित करना शुरू कर दिया। उसका दर्द कम हो गया और उसे मजा आने लगा और वो चूतड़ उछाल कर बाबूजी के धक्कों का जवाब देने लगी, हर धक्के पर अपनी कमर उठाकर लंड को और गहराई तक लेने लगी।
“पापा मेरा दर्द खत्म हो गया है। आपके लंड से मुझे जन्नत का मजा आ रहा है। आपका लंड मेरी चूत को स्वर्ग दिखा रहा है। पेलो अपना लंड मेरी चूत के अंदर। चोद दो अपनी बेटी को। ले लो मेरी प्यासी चूत के मजे। जोर से चोदो मुझे।”
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मैंने बाबूजी के लंड पर उँगलियाँ फेरी और उनके चूतड़ पर थपकी दी और कहा, “बाबूजी चोदो अपनी हरामी बेटी को साले। जोर से लगा धक्के बेहनचोद। देखता क्या है साले तुझे आज अपनी जवान और प्यासी बेटी की चूत का मजा मिल रहा है। साले बन गया है तू बेटीचोद और थोड़ी देर में बहूचोद भी बन जाएगा। साले चोद डाल इसको। चोद डालो अपनी बेटी को। वो कब से प्यासी है लंड की। मिटा दो इसकी प्यास। छोड़ दो अपना पानी इसकी चूत में।”
बाबूजी भी पागलों की तरह धक्के मारने लगे। कमरे में घचा-घच की आवाजें आने लगीं, हर धक्के के साथ बाबूजी का मोटा, नसों वाला लंड अंजना की टाइट चूत में पूरी ताकत से घुस रहा था और बाहर निकल रहा था, चूत की चिपचिपी दीवारें लंड को कसकर निचोड़ रही थीं और हर बार चूत से सफेद फेन जैसा रस बाहर छिटक रहा था।
अंजना के मुँह से अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज आ रही थी, उसकी सांसें पूरी तरह उखड़ गई थीं, उसका गोरा शरीर पसीने से तर हो चुका था और उसके गोल चूतड़ हर धक्के पर जोर से हिल रहे थे, उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे। बाबूजी ने अपनी बेटी के चूतड़ों को कस के पकड़ रखा था और उसे पेल रहे थे. उनकी उंगलियां उसके नरम गोरे चूतड़ों में गड़ रही थीं, हर धक्के के साथ वे चूतड़ों को और फैला रहे थे ताकि लंड और गहराई तक घुस सके।
“अह्ह्ह्ह्ह्ह बेटी मेरा भी टाइम नजदीक आ रहा है। मैं भी झड़ने वाला हूँ। हाँ मैं सच में बेटीचोद बन गया हूँ और मुझे खुशी है कि तुमने अपनी प्यासी चूत मेरे लिए संभाल के रखी हुई थी। हाँ बेटी चुदवा ले मुझसे मेरी प्यारी बेटी। कसम तेरी जवानी की आज तक इतना मजा नहीं आया। क्या चूतड़ हैं तेरे। ले लो मेरा पानी तेरी चूत में जा रहा है। मेरा पानी तेरी कोख में गिर रहा है। तेरा बाप झड़ रहा है। मैं गयााआआ।”
ये कहते हुए बाबूजी ने पिचकारी अंजना की चूत में छोड़ दी, उनके लंड ने जोर-जोर से फड़कते हुए गर्म, गाढ़ा वीर्य की मोटी-मोटी धारें अंजना की चूत की गहराई में उछाल दीं, इतना ज्यादा कि चूत भर गई और अतिरिक्त वीर्य लंड के साथ बाहर निकलकर उसके चूतड़ों पर बहने लगा। “Sasur Bahu Chudai XXX”
उनका लंड छपाक की आवाज से चूत से बाहर निकल आया, लंड अभी भी फड़क रहा था और उसकी नोक से अंतिम बूंदें टपक रही थीं। मैंने पहले उनका लंड चूस कर साफ किया और फिर अपनी ननद की चूत को चाटा और हम दोनों ही बाबूजी की बगल में लेट गईं। अब मेरी बारी थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं धीरे से उठी और बिस्तर के किनारे खड़ी हो गई। सबसे पहले मैंने अपनी साड़ी का पल्लू पूरी तरह नीचे गिरा दिया ताकि मेरे भारी, गोल मम्मे पूरी तरह नंगे हो जाएं। मेरे निप्पल पहले से ही सख्त होकर खड़े थे और हवा में हल्के से काँप रहे थे। फिर मैंने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोल दिए, ब्लाउज को दोनों कंधों से उतारा और फेंक दिया।
अब मेरी गोरी, मोटी चुचियाँ पूरी तरह आजाद थीं, मैंने उन्हें दोनों हाथों से थोड़ा ऊपर उठाकर बाबूजी को दिखाया और हल्के से दबाया, जिससे मेरे निप्पल और भी ज्यादा उभर आए। इसके बाद मैंने साड़ी की पेटी खोलकर साड़ी को कमर से नीचे सरका दिया, अब मैं सिर्फ पेटीकोट में खड़ी थी। पेटीकोट की नाड़ी खींचकर उसे भी पैरों तक उतार दिया।
मेरी गोरी जांघें, मोटे चूतड़ और बिना बालों वाली, गुलाबी चूत अब पूरी तरह नंगी थी। मैंने जानबूझकर एक पैर बिस्तर पर रखा, घुटने मोड़कर अपनी चूत को पूरी तरह फैला दिया ताकि बाबूजी और अंजना दोनों को मेरी चूत की भीगी हुई फाँकें साफ दिख जाएं। मेरी चूत पहले ही बहुत गीली हो चुकी थी, उसकी फाँकों पर चमकती हुई नमी बह रही थी। “Sasur Bahu Chudai XXX”
मैंने दोनों हाथों से अपने चूतड़ों को फैलाया, बीच की उंगली से अपनी चूत में हल्का सा घुमाया और फिर उंगली को बाहर निकालकर बाबूजी की तरफ बढ़ा दी। “देखिए बाबूजी, आपकी बहू की चूत कितनी प्यासी है आपके लंड के लिए।”
फिर मैंने धीरे से बिस्तर पर चढ़ गई, बाबूजी के पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गई और उनका अभी भी आधा खड़ा लंड हाथ में ले लिया। मैंने पहले उसकी नोक को जीभ से चाटा, फिर पूरा लंड मुंह में लेकर गहरी चूसाई शुरू कर दी। साथ ही अपनी दूसरी उंगली से अपनी चूत को सहलाने लगी ताकि वो और भी ज्यादा भीग जाए।
मेरी आँखें बाबूजी की आँखों में थीं और मैं मन ही मन सोच रही थी कि अब बाबूजी का पूरा लंड मेरी चूत में घुसने वाला है। मैंने बाबूजी के लंड को मुंह से निकाला और उसे दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ लिया। लंड अब पूरी तरह कड़ा और गरम हो चुका था, उसकी मोटी नसें मेरी हथेली में फड़क रही थीं।
मैंने उसकी नोक को अपनी जीभ से घुमाते हुए चाटा, फिर जीभ को नीचे सरकाकर उसके टट्टों को चूसने लगी। एक-एक करके दोनों टट्टों को मुंह में लेकर हल्का सा चूसा, जिससे बाबूजी की सांसें और तेज हो गईं। फिर मैं बिस्तर पर लेट गई, अपने घुटनों को मोड़कर दोनों टांगें काफी चौड़ी कर लीं। अपनी दोनों उंगलियों से चूत की फाँकें फैला दीं ताकि मेरी भीगी हुई गुलाबी चूत पूरी तरह खुल जाए। चूत से लगातार चिपचिपा रस बह रहा था जो मेरी जांघों पर फैल गया था।
मैंने बाबूजी की तरफ देखकर कहा, “बाबूजी अब मेरी बारी है। आइए, अपनी बहू की इस प्यासी चूत को अपने लंड से भर दीजिए। जितना जोर से आप अंजना को चोद रहे थे, उससे भी ज्यादा जोर से मुझे चोदिए। मेरी चूत आपका इंतजार कर रही है।”
बाबूजी मेरे ऊपर चढ़ आए। उन्होंने अपने लंड का सिर मेरी चूत पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगे। लंड की गर्म नोक मेरी क्लिटोरिस को छू रही थी जिससे मेरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। मैंने अपनी कमर उठाकर लंड को और दबाया। बाबूजी ने एक जोरदार धक्का मारा और उनका मोटा लंड मेरी चूत में आधा घुस गया। मेरी चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ लीं। “Sasur Bahu Chudai XXX”
मैंने आह भरकर कहा, “अह्ह्ह्ह बाबूजी… और गहरा… पूरी तरह पेल दीजिए अपना लौड़ा… मेरी चूत में।”
बाबूजी ने मेरी दोनों जांघों को कसकर पकड़ लिया और एक और जोरदार धक्का मारा। उनका पूरा मोटा, नसों वाला लंड मेरी चूत में जड़ तक घुस गया। मैंने महसूस किया कि उनका लंड मेरी चूत की सबसे गहरी जगह को छू रहा है, मेरी दीवारें उसे इतनी कसकर निचोड़ रही थीं कि बाबूजी के मुंह से भी कराह निकल गई।
मेरी चूत अब पूरी तरह भर चुकी थी, लंड की गर्मी और फड़कन मेरे अंदर तक महसूस हो रही थी। हर धक्के के साथ उनके टट्टे मेरे चूतड़ों से टकरा रहे थे और चिपचिपी आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। मैंने अपनी कमर ऊपर-नीचे करने लगी, उनके हर धक्के का जवाब देते हुए लंड को और गहराई तक लेने लगी।
मेरे भारी मम्मे जोर-जोर से उछल रहे थे। बाबूजी ने झुककर एक चुची मुंह में ले ली और जोर से चूसने लगे, दांतों से निप्पल को हल्का सा काटते हुए। दूसरी चुची को हाथ से मसल रहे थे। उनकी गति तेज होती जा रही थी, अब वो पागलों की तरह मेरी चूत को पेल रहे थे। हर धक्के के साथ मेरी चूत से सफेद फेन निकल रहा था और मेरी सांसें कराहों में बदल गई थीं।
“अह्ह्ह्ह बाबूजी… और जोर से… फाड़ डालिए मेरी चूत… आपका लंड मेरी चूत को स्वर्ग बना रहा है… चोदिए अपनी बहू को… पूरी ताकत से चोदिए…” मैं चीखते हुए बोली और अपने नाखून उनके पीठ पर गड़ा दिए। बाबूजी की सांसें भी बहुत तेज हो गई थीं, उनका पसीना मेरे शरीर पर टपक रहा था।
उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और अब और भी गहराई से धक्के मारने लगे। उनका लंड मेरी चूत में आते-जाते हर बार मेरी क्लिटोरिस को रगड़ रहा था, जिससे मेरे शरीर में लगातार झटके लग रहे थे। मेरी चूत अब पूरी तरह लंड की गर्मी से जल रही थी और मैं लगातार झड़ने के कगार पर थी।
तभी अंजना उठकर मेरे सिर की तरफ आ गई। वो मुस्कुराते हुए मेरे चेहरे के ऊपर बैठ गई, अपनी भीगी और बाबूजी के वीर्य से लथपथ चूत को मेरे मुंह पर रख दिया। उसकी गर्म, चिपचिपी चूत मेरे होंठों और नाक पर दब गई। मैंने तुरंत अपनी जीभ बाहर निकाली और उसकी चूत को चाटने लगी, बाबूजी के गाढ़े वीर्य को चूस-चूसकर पीने लगी। “Sasur Bahu Chudai XXX”
अंजना ने अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी, अपनी चूत को मेरे मुंह पर रगड़ने लगी और मेरी जीभ को अपनी चूत के अंदर लेने लगी। बाबूजी ने मेरी चूत को अब और भी सुपर हार्ड चोदना शुरू कर दिया। उनके धक्के पहले से कहीं ज्यादा तेज और जोरदार हो गए थे, हर धक्का इतना गहरा और तेज था कि मेरा पूरा शरीर हिल रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरी चूत अब पूरी तरह फटने वाली हालत में थी, लंड हर बार जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। अंजना मेरे मुंह पर बैठी हुई जोर-जोर से चीख रही थी, “भाभी… चूसो मेरी चूत… सारी मम्मी का पानी पी लो… अह्ह्ह्ह… पापा भाभी को बहुत जोर से चोद रहे हैं…”
मैं अंजना की चूत को चूसते हुए कराह रही थी, मेरी जीभ उसकी क्लिटोरिस को तेजी से चाट रही थी जबकि बाबूजी का लंड मेरी चूत को बेरहमी से फाड़ रहा था। मेरा शरीर दो तरफ से उत्तेजित हो रहा था, एक तरफ बाबूजी का मोटा लंड मेरी चूत में आग लगा रहा था और दूसरी तरफ अंजना की चूत मेरे मुंह में रस बहा रही थी। मेरी सांसें अब पूरी तरह बंद हो चुकी थीं, मैं सिर्फ चूस और चोदाई के बीच फंसी हुई थी।
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अचानक अंजना का पूरा शरीर सख्त होकर तन गया। उसकी जांघें मेरे सिर को दोनों तरफ से कसकर दबाने लगीं, जैसे वह मुझे अपने अंदर ही दबा देना चाहती हो। उसकी सांसें बहुत तेज और उखड़ी हुई थीं, “अह्ह्ह्ह्ह… भाभी… हाँ… वहीं… क्लिट पर… तेज… तेज चाटो… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…!” अंजना की चूत मेरे मुंह के अंदर अचानक सिकुड़ने लगी, उसके अंदर की दीवारें जोर-जोर से काँप रही थीं और मेरी जीभ को निचोड़ रही थीं।
फिर उसका पहला झटका आया। उसका पूरा शरीर ऊपर की तरफ उछला, चूतड़ मेरे चेहरे पर जोर से दब गए और उसकी चूत से गर्म, मीठा, चिपचिपा रस की मोटी धार मेरे मुंह में फूट पड़ी। मैंने उसे पूरा चूस लिया, जीभ से हर बूंद को निचोड़कर निगल लिया। अंजना की चीखें अब लगातार निकल रही थीं, “आह्ह्ह्ह… पापा… भाभी… मैं जा रही हूँ… अह्ह्ह्ह… झड़ रही हूँ… बहुत जोर से…!”
उसका दूसरा और तीसरा झटका और भी तेज था। उसकी चूत बार-बार सिकुड़-फैल रही थी, हर सिकुड़न के साथ नया रस मेरे मुंह में भर रहा था। उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे, निप्पल सख्त होकर खड़े थे और पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो चुका था।
अंजना की आँखें बंद थीं, मुंह खुला था और वो लगातार कराह रही थी, उसकी आवाज में शुद्ध वासना और सुख की चरम सीमा झलक रही थी। उसकी जांघें थर-थर काँप रही थीं, घुटनों के पास की मांसपेशियां सख्त हो रही थीं और वो मेरे चेहरे पर अपनी चूत को रगड़ते हुए अपना पूरा ऑर्गेज्म निकाल रही थी। “Sasur Bahu Chudai XXX”
कई सेकंड तक वो इसी हालत में रही, बार-बार छोटे-छोटे झटके आते रहे, हर झटके के साथ उसकी चूत से और रस टपकता रहा। आखिरकार जब उसका ऑर्गेज्म धीरे-धीरे कम होने लगा तो उसकी जांघों का दबाव थोड़ा ढीला पड़ा, लेकिन वो अभी भी मेरे मुंह पर बैठी हुई हल्के-हल्के काँप रही थी। उसकी सांसें बहुत भारी थीं और चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान आ गई थी।
जैसे ही उसका ऑर्गेज्म थोड़ा कम हुआ, अंजना ने मेरे चेहरे से उठकर पीछे की तरफ घूम लिया। अब वो बाबूजी के पीछे बैठ गई, उनके चूतड़ों को दोनों हाथों से फैलाया और अपना मुंह उनके गुदा में लगा दिया। बाबूजी अभी भी मेरी चूत को सुपरहार्ड चोद रहे थे, उनके हर जोरदार धक्के से मेरा पूरा शरीर हिल रहा था।
अंजना ने अपनी जीभ बाबूजी के गांड के छेद पर घुमानी शुरू कर दी, पहले बाहर से चाटा फिर जीभ को अंदर डालने की कोशिश करने लगी। वो जोर-जोर से चूस रही थी और अपनी उंगलियों से भी उनके गांड को सहला रही थी। बाबूजी की सांसें और भी भारी हो गईं।
“अह्ह्ह्ह… अंजना… क्या कर रही है बेटी… अह्ह्ह… तेरी जीभ मेरी गांड में… उफ्फ… बहुत मजा आ रहा है…” उन्होंने मेरी चूत को और भी तेजी से पेलना शुरू कर दिया, जैसे कि उनकी बेटी की जीभ उनके गांड में घुसने से उनकी चुदाई की ताकत कई गुना बढ़ गई हो। हर धक्का पहले से कहीं ज्यादा गहरा और तेज था, उनका लंड मेरी चूत को जड़ तक फाड़ रहा था और उनके टट्टे मेरे चूतड़ों से जोर-जोर से टकरा रहे थे।
अंजना बाबूजी के गांड को चाटते हुए कराह रही थी, “पापा… आपकी गांड कितनी स्वादिष्ट है… चोदो भाभी को और जोर से… मैं आपकी गांड चूसती रहूँगी…” उसकी जीभ अब पूरी तरह उनके गांड के अंदर-बाहर हो रही थी, वो कभी चूसती, कभी चाटती और कभी उंगलियों से भी अंदर घुसाने की कोशिश कर रही थी। “Sasur Bahu Chudai XXX”
बाबूजी का लंड मेरी चूत में और भी सख्त हो गया, उनकी गति पागलों जैसी हो गई थी। मैं नीचे लेटी हुई दोनों की इस हरकत को महसूस कर रही थी और मेरी चूत अब और भी ज्यादा भीगकर सिकुड़ रही थी। तभी बाबूजी की सांसें एकदम रुक गईं। उनका पूरा शरीर काँपने लगा और उन्होंने जोर से दहाड़ मारी, “अह्ह्ह्ह्ह… मैं झड़ रहा हूँ… ले लो… दोनों ले लो… बहुत सारा पानी… आ रहा है…!”
उनका लंड मेरी चूत के अंदर फड़कने लगा और फिर अचानक गर्म, गाढ़ा वीर्य की मोटी-मोटी धारें मेरी चूत में फूट पड़ीं। इतना ज्यादा कि मेरी चूत तुरंत भर गई, वीर्य की धारें मेरी चूत से बाहर निकलकर मेरे चूतड़ों पर बहने लगीं। बाबूजी बार-बार झड़ते रहे, हर फड़कन के साथ नया वीर्य मेरी चूत में उछाल रहे थे।
उन्होंने कम से कम दस-बारह बार जोर से फूटा, इतना सारा पानी कि मेरी चूत से लगातार सफेद रस टपक रहा था और बिस्तर भी भीग गया। जैसे ही बाबूजी का लंड मेरी चूत से बाहर निकला, हम दोनों बहू-बेटी ने उन्हें घोड़ा बना दिया। अंजना ने बाबूजी को घुटनों के बल बैठा दिया और मैं उनके सामने आ गई।
हम दोनों ने मिलकर उनके लंड को चूसना शुरू कर दिया। अंजना लंड का सिर चूस रही थी जबकि मैं उनके टट्टों को मुंह में लेकर चूस रही थी। फिर हमने बारी-बारी से उनका पूरा लंड गले तक ले लिया, लंड पर लगा हमारा और बाबूजी का वीर्य चूस-चूसकर साफ किया। “Sasur Bahu Chudai XXX”
अंजना ने उनके चूतड़ फैलाए और मैं उनकी गांड चूसने लगी, अपनी जीभ उनके गांड के छेद में डालकर चाटने लगी। फिर अंजना गांड चूसने लगी और मैं लंड चूसने लगी। हम दोनों बारी-बारी से उनकी गांड और लंड को चूसती रहीं, कभी एक साथ दोनों को चूसते हुए, कभी एक लंड चूसती तो दूसरी गांड चूसती।
बाबूजी की सांसें फिर से तेज हो गईं और उनका लंड दोबारा खड़ा होने लगा। हम दोनों बहू-बेटी ने बाबूजी को पूरी तरह घोड़ा बनाकर उनका लंड और गांड चूस-चूसकर साफ कर दिया। उसके बाद से मुझे अपने पति का इंतजार खत्म हो गया और मेरी प्यारी प्यासी ननद को भी घर में लंड मिल गया और बाबूजी को मिली दो नई और प्यासी चूतें जो चुदाई को कभी ना नहीं कहतीं।
तो दोस्तों ये थी मेरी और मेरी ननद की एक ही लंड से चुदाई की कहानी। बाबूजी ने कुछ नए लंड भी हमें दिलाए और हमने भी बाबूजी को कुछ नई चूतें दिलवाईं, उसकी कहानी फिर कभी, उम्मीद है मेरी कहानी पढ़कर शायद मुठ मारी होगी चाहे लड़का हो या लड़की, अगर ऐसा है तो जरूर कमेंट करें।
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