Real Bhai Bahan Chudai
मेरा नाम प्रियांशी है। मैं सोनीपत की रहने वाली हूं। आज मेरी उम्र 28 साल है और मेरा फिगर 34-28-38 का है। मेरी गोरी त्वचा, भरी हुई चूचियां और मोटी गांड की वजह से घर में भी नजरें टिक जाती हैं। लेकिन ये कहानी उस समय की है जब मैं 18-19 साल की थी। उस वक्त मेरी जवान होती देह में सेक्स की आग लग चुकी थी। पिछली कहानी मौसा और उनके बेटे ने मेरी माँ को चोदा में आपने पढ़ा था कि मौसेरे भाई सोनू ने मेरी कुंवारी चूत फाड़ दी थी। Real Bhai Bahan Chudai
पहली बार दर्द हुआ था, लेकिन बाद में मजा इतना आया कि मैं रोज उसकी याद में चूत में उंगली करने लगी। घर लौटने के बाद भी वो आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी। जब हम मौसा जी के घर से वापस आए तो मम्मी की चुदाई की बातें मेरे दिमाग में घूमने लगीं।
मैंने सुना था कि मेरे पापा मेरे असली पापा नहीं हैं। मैं मम्मी के पुराने बॉयफ्रेंड की बेटी हूं। शांतनु और शाम्भवी मम्मी के बुआ के लड़के के लंड से पैदा हुए हैं। यानी शांतनु मेरा सगा भाई नहीं है। ये सुनकर मेरे मन में एक नया ख्याल आया। अगर वो सगा नहीं है, तो मैं घर में ही लंड क्यों नहीं ले लूं।
धीरे-धीरे मेरी चूचियां और बड़ी हो गईं। गांड भी मोटी और गोल हो गई। मैं चुपके-चुपके मम्मी को चुदाई देखती रहती। पापा दुकान पर जाते तो मम्मी अपने किसी नए बॉयफ्रेंड को घर बुला लेतीं। मैं स्कूल से जल्दी आ जाती या हाफडे पर तो लाइव चुदाई का मजा ले लेती। मम्मी की चीखें, आहें और लंड के धक्कों की आवाजें सुनकर मेरी चूत टपकने लगती। गाजर-मूली से काम नहीं चल रहा था। मुझे असली गर्म लंड चाहिए था।
स्कूल गर्ल्स स्कूल था। आसपास के लड़के या तो बड़े थे या अच्छे नहीं लगते। फिर मैंने सोचा, घर में ही लंड है। शांतनु मेरा भाई नहीं है, तो क्या फर्क पड़ता है। मैंने प्लान बनाया। घर में ब्रा-पैंटी पहनना बंद कर दिया। ज्यादातर टाइट टॉप और छोटी स्कर्ट पहनती।
जब हम लूडो या कोई गेम खेलते, तो मैं जान-बूझकर एक घुटना मोड़कर ऊपर कर लेती। मेरी चूत साफ दिखने लगती। शांतनु नजर बचाकर देखता, फिर झट से नजर हटाता। मुझे पता था वो देख रहा है। मैं अनजान बनकर बैठी रहती। कई बार मैं जानबूझकर चीजें गिरा देती और झुककर उठाती।
टॉप ढीला होने से चूचियां लगभग बाहर आ जातीं। शांतनु की आंखें फटी रह जातीं। मैं मुस्कुराकर उठती और चल देती। कुछ दिन ऐसे ही बीते। मैं सोच रही थी कि कौन पहले पहल करेगा। मैं अपने कमरे का दरवाजा कभी लॉक नहीं करती। रात को भी नहीं। एक रात करीब 1-2 बजे की बात है।
मैंने सिर्फ छोटी स्कर्ट और पतला टॉप पहना था। अंदर कुछ नहीं। मैं गहरी नींद का नाटक कर रही थी। शांतनु चुपके से कमरे में आया। उसने मुझे धीरे से हिलाया, “दीदी…” मैंने कोई जवाब नहीं दिया। उसने फिर हिलाया। मैं चुप। उसे लगा मैं गहरी नींद में हूं। उसने धीरे से मेरी चूची पर हाथ रखा। पहले हल्का दबाया।
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फिर जोर से मसलने लगा। मेरी चूचियां नरम और भरी थीं। वो दोनों हाथों से मसल रहा था। निप्पल को पिंच कर रहा था। मेरी सांसें तेज हो गईं, लेकिन मैं चुप रही। फिर उसने मेरा टॉप ऊपर किया। स्कर्ट भी ऊपर कर दी। मेरी नंगी चूचियां और चूत उसके सामने थीं। वो चूचियों से खेलता रहा।
फिर हाथ नीचे ले गया। मेरी चूत की दरार में उंगली फेरने लगा। मेरी चूत पहले से गीली थी। वो धीरे-धीरे छेद तक पहुंचा। उंगली अंदर डाली। पूरी उंगली सरक गई। वो घबरा गया और निकाल ली। एक मिनट बाद फिर डाली। इस बार टांगें फैलाईं। दो उंगलियां डालकर तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगा।
मुझे बहुत मजा आ रहा था। मन कर रहा था गांड उठाकर साथ दूं, लेकिन मैं चुप रही। वो उंगलियां डालता, फिर चूत चाटता। जीभ से क्लिट को चाटता। मैं सिहर रही थी। फिर उसने हिम्मत की। टांगें और फैलाईं। मुंह चूत पर रख दिया। जोर-जोर से चाटने लगा। 5 मिनट तक चाटा। मेरी चूत से रस टपक रहा था। वो सब चाट रहा था।
फिर उसने अपना लंड निकाला। मेरे हाथ में पकड़ाया और मुट्ठी बंद करवाई। लंड ऊपर-नीचे करवाने लगा। शांतनु का लंड उस उम्र में ही 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था। गर्म और सख्त। कुछ देर बाद लंड मेरे होंठों पर रखा। मैंने मुंह ढीला छोड़ दिया। उसने सुपारा अंदर डाला। धीरे-धीरे मुंह चोदने लगा। साथ चूचियां दबाता रहा। “Real Bhai Bahan Chudai”
5 मिनट बाद मेरे मुंह में झड़ गया। आधा रस मुंह में, आधा बाहर। बाकी चूत पर डाला। उंगली से रस उठाकर मुंह में डालता रहा। फिर कपड़े ठीक किए और चला गया। मैंने मुंह का रस पी लिया और सो गई। अगला दिन संडे था। पापा दुकान गए। मम्मी बाथरूम में थीं। मैं शांतनु के कमरे में गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
चादर के ऊपर लंड का उभार दिख रहा था। चादर उठाई तो चड्डी नहीं पहनी थी। लंड खड़ा था। मन किया मुंह में ले लूं, लेकिन वक्त का इंतजार किया। मम्मी ने नाश्ता बनाया। उन्हें बाहर जाना था। जाते वक्त बोलीं, “दोपहर का खाना बना लो, सब्जी है, बना कर खा लेना।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
अब घर में सिर्फ मैं और शांतनु थे। शाम्भवी छोटी थी, वो सो रही थी। मैंने नाश्ता लगाया और शांतनु को जगाया। “उठो भाई, नाश्ता कर लो।” मैं वही स्कर्ट पहने थी, बिना पैंटी। बेड पर पैर मोड़कर बैठ गई। नाश्ता करते वक्त पैर ऊपर किया। चूत साफ दिख रही थी। शांतनु नजर बचाकर देख रहा था।
नाश्ता खत्म कर मैं बर्तन रखने गई। फिर मिनी स्कर्ट पहनी, जो बहुत छोटी थी। झुकते ही गांड और चूत दिख जाती। मैंने लिपस्टिक गांड में डाल ली ताकि झुकते वक्त दिखे। नीचे टीवी रूम में पोंछा लगाने लगी। भाई के सामने झुककर पोंछा लगाया। चूचियां हिल रही थीं। फिर कोने में झुकी। चूत और गांड साफ दिख रही थी। लिपस्टिक गांड में चमक रही थी।
फिर मैं बाथरूम गई। तौलिया जानबूझकर नहीं लिया। अलमारी में तौलिया रखा था, उसके नीचे मेरी गीली पैंटी रखी, जिसमें मेरी चूत की खुशबू थी। बाथरूम का दरवाजा नीचे से थोड़ा ऊंचा था। नीचे से झांककर सब दिखता था। मैंने कपड़े उतारे। गेट के सामने बैठकर चूत में उंगली करने लगी। गांड में लिपस्टिक अंदर-बाहर। शांतनु बाहर से झांक रहा था। उसकी परछाई दिख रही थी। “Real Bhai Bahan Chudai”
फिर मैंने नहाना शुरू किया। आवाज दी, “भाई, तौलिया दे दो, भूल गई। रूम में होगा।”
शांतनु तौलिया लेकर आया। मैंने आधा शरीर गेट के पीछे रखा, आधा दिखा। भीगी चूचियां और चूत दिख रही थीं। शांतनु का सब्र टूट गया। वो अंदर घुसा। मेरी चूचियां दबाने लगा।
मैंने पीछे धकेला, “ये क्या कर रहे हो… बाहर निकलो।”
वो नहीं माना। हाफ लोअर उतारा। मुझे पीछे से पकड़ा। लंड गांड की दरार में रगड़ रहा था। थोड़ा नीचे झुका। लंड चूत में घुसा दिया। धक्के मारने लगा।
मैं बोली, “हटो… ये क्या कर रहे हो… मैं तुम्हारी बहन हूं।” लेकिन मजा आ रहा था। मैं हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी।
शांतनु बोला, “बस दीदी… थोड़ा सा… बस थोड़ा और…”
वो जोर-जोर से धक्के मार रहा था। लंड पूरा अंदर-बाहर। मेरी चूत रसीली हो गई। 5 मिनट में चूत में झड़ गया। फिर भी धक्के मारता रहा। फिर लंड निकाला और बाहर चला गया। मैं 2 मिनट अंदर रुकी। तौलिया लपेटकर बाहर आई। शांतनु मेरे कमरे में बैठा था। “Real Bhai Bahan Chudai”
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मैंने कहा, “तुमने ऐसा क्यों किया? मैं तुम्हारी बहन हूं। ये गलत है।”
वो बोला, “दीदी सॉरी… आप बहुत सुंदर हो। जब देखता हूं तो कंट्रोल नहीं होता।”
मैंने कहा, “ठीक है, इस बार चुप हूं। लेकिन अगली बार ऐसा मत करना। अगर कंट्रोल न हो तो मुझसे कहना।”
मैंने उसे झूठी डांट लगाई, लेकिन अंदर से बहुत खुश थी। टॉवल लपेटकर मैं मम्मी के रूम में आई। शाम्भवी अभी भी सोई हुई थी, उसकी सांसें धीरे-धीरे चल रही थीं और उसके छोटे से चेहरे पर नींद की मासूमियत छाई हुई थी। मैंने उसे हल्के से जगाया, मेरी उंगलियां उसके गाल पर फिसलीं और वो रगड़ती आंखों से उठी, “शाम्भवी, उठो बेटा, फ्रेश हो जाओ। नाश्ता लगाती हूं।”
वो नींद में बुदबुदाती हुई उठी और बाथरूम चली गई, उसके पैरों की हल्की थपक सुनाई दे रही थी। मैं अपने रूम में आई, दिल अभी भी तेज धड़क रहा था, मेरी चूत में हल्की सी गर्माहट और नमी महसूस हो रही थी जहां शांतनु का रस अभी भी चिपचिपा सा लगा हुआ था। “Real Bhai Bahan Chudai”
मैंने टॉवल उतारा, आईने में खुद को देखा, मेरी चूचियां अभी भी लाल थीं दबाने से, निप्पल सख्त होकर खड़े थे और हल्की सी खुशबू मेरी चूत से आ रही थी जो चुदाई की याद दिला रही थी। मैंने फिर वही छोटी मिनी स्कर्ट और ढीला टॉप पहना, ब्रा-पैंटी नहीं, स्कर्ट इतनी छोटी कि हल्के से हिलने पर भी हवा का स्पर्श मेरी चूत पर लगता और टॉप इतना पतला कि मेरी चूचियों की नरमी बाहर से महसूस हो सकती थी।
मैं मंद-मंद मुस्कुरा रही थी, सोच रही थी कि आज से मेरा भाई मुझे चोदने लगा है, उसका लंड कितना गर्म और सख्त था, मेरी चूत में घुसते हुए जो घर्षण हुआ था वो अभी भी याद करके मेरी जांघें गीली हो रही थीं। शाम्भवी को नाश्ता दिया, वो टीवी के सामने बैठ गई, उसके छोटे हाथों में प्लेट थी और वो खुशी से खा रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं भी उसके पास सोफे पर बैठ गई, पैर टेबल पर टिका दिए, स्कर्ट थोड़ी ऊपर सरकी, मेरी गोरी जांघें और चूत की शुरुआत साफ दिख रही थी, हवा का हल्का स्पर्श मेरी चूत की लकीर पर लग रहा था जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था। शांतनु किनारे बैठ गया, उसकी नजरें मेरी तरफ टिकीं, वो नजर छुपाकर मेरी चूत देख रहा था, उसकी आंखों में वो वासना थी जो मुझे महसूस हो रही थी।
मैं अनजान बनकर टीवी देख रही थी, लेकिन अंदर से जानती थी कि उसका लंड अब सख्त हो रहा होगा। बीच-बीच में खुजली का बहाना बनाकर मैंने दो उंगलियों से चूत की लकीर खोली, बीच वाली उंगली से क्लिट को सहलाया, धीरे-धीरे रगड़ा, मेरी उंगलियां गीली हो गईं और चूत से हल्की सी महक आने लगी जो कमरे में फैल रही थी। “Real Bhai Bahan Chudai”
मैं उसके सामने ऐसे कर रही थी जैसे अनजाने में हो रहा हो, लेकिन शांतनु की सांसें तेज हो गईं, उसके मुंह से लार टपक रही थी, मैंने देखा उसकी पैंट में उभार आ गया, वो असहज होकर हिल रहा था। मैंने और जोर से उंगली चलाई, लेकिन ऐसे कि लगे अनजाने में हो रहा है, मेरी चूत से चटक-चटक की हल्की आवाज आ रही थी जो सिर्फ हमें सुनाई दे रही थी।
फिर मैं उठी और अपने रूम में चली गई, मेरी गांड हिल रही थी और स्कर्ट के नीचे से हवा का स्पर्श महसूस हो रहा था। शाम्भवी टीवी देखती रही, उसके छोटे से हंसने की आवाज आ रही थी। शांतनु थोड़ी देर बाद मेरे पीछे आया, दरवाजा बंद किया, बोला, “दीदी… वो जो बाथरूम में हुआ… मेरा फिर से करने का बहुत मन कर रहा है। मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।”
मैंने मुस्कुराकर कहा, “तो जाओ, बना लो जाकर कोई गर्लफ्रेंड।”
वो बोला, “दीदी, मुझसे होता ही नहीं। मैंने बहुत कोशिश की।”
फिर मेरी चूत की तरफ इशारा करके बोला, “दीदी, अच्छा मुझे वो छू लेने दो… बस छूना… और कुछ नहीं।”
मैंने थोड़ा नाटक किया, “ठीक है… लेकिन सिर्फ छूना। कुछ और नहीं।”
वो बोला, “ठीक है दीदी।”
मैंने कहा, “जाओ, पहले दरवाजा बंद करके आओ।” वो दौड़कर गया, लॉक किया और वापस आया, उसकी आंखों में उतावलापन था।
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आते ही उसने मेरी स्कर्ट ऊपर कर दी, दोनों हाथ चूत पर रख दिए, जोर-जोर से रगड़ने लगा, उंगलियां अंदर-बाहर, उसकी उंगलियां तेज चल रही थीं, मेरी चूत से चटक-चटक आवाज आने लगी, मैं कराह रही थी, “आह्ह… शांतनु… धीरे… तेरी उंगलियां कितनी गर्म हैं…” लेकिन वो रुका नहीं, उसकी उंगलियां मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रही थीं और मेरी चूत की गर्माहट उसके हाथों पर फैल रही थी।
उसकी उंगलियां इतनी तेज चल रही थीं कि मेरी चूत ने जोर से पानी छोड़ दिया, उसका पूरा हाथ गीला हो गया, मेरी चूत से रस की बूंदें टपक रही थीं और कमरे में वो मादक खुशबू फैल गई। वो और जोश में आ गया, बोला, “दीदी… आपकी चूत कितनी गीली है… बहुत मजा आ रहा है… ये रस कितना मीठा लग रहा है।”
मैंने कुछ नहीं कहा, उसकी हिम्मत बढ़ गई, वो मुझे किस करने लगा, होंठ चूसने लगा, जीभ मुंह में डाल दी, उसके होंठ गर्म थे और उसकी सांसों की गर्मी मेरे चेहरे पर लग रही थी। मैंने साथ दिया, उसकी जीभ को चूसा, वो लोअर उतारकर लंड बाहर निकाला, लंड खड़ा था, सुपारा चमक रहा था और प्रीकम की बूंदें टपक रही थीं। “Real Bhai Bahan Chudai”
उसने लंड मेरी चूत पर रगड़ा, सुपारे से क्लिट को सहलाया, मैं सिहर उठी, “आह्ह… शांतनु… डाल ना अंदर… मत तड़पा…” फिर एक धक्के में पूरा अंदर पेल दिया। मैंने उसे खींचकर और गहरा घुसवाया, अब वो जोर-जोर से धक्के मार रहा था, मैं नीचे से गांड उठा-उठाकर साथ दे रही थी, उसका लंड मेरी चूत की गहराई छू रहा था और हर धक्के पर धप-धप की आवाज आ रही थी।
वो मेरी चूचियां चूसने लगा, निप्पल काट रहा था, “आह्ह… दीदी… आपकी चूत कितनी टाइट है… बहुत मजा आ रहा है… मैं रोज चोदूंगा आपको… तेरी चूत मेरे लंड के लिए बनी है…” मैं कराह रही थी, “आह्ह… शांतनु… और जोर से… चोद अपनी दीदी को… मेरी चूत फाड़ दे… ओह्ह… तेरा लंड कितना मोटा है… अंदर तक लग रहा है…”
5 मिनट में वो मेरी चूत में झड़ गया, उसका गर्म रस मेरी चूत में फैल गया, मैंने उसकी गांड पकड़ी, पैरों से कसकर दबाया, लंड अंदर दबा रहा, रस की गर्मी मुझे और उत्तेजित कर रही थी। वो मेरे ऊपर लेट गया, उसकी सांसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने उसके कान में धीरे से कहा, “शांतनु… तुम मेरे सगे भाई नहीं हो।”
वो चौंककर उठा, “क्या कह रही हो दीदी?” उसकी आंखों में हैरानी थी, लेकिन उत्सुकता भी।
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मैंने पूरी बात बताई, मम्मी के पुराने बॉयफ्रेंड, बुआ के लड़के, सब, मेरी आवाज धीमी थी लेकिन स्पष्ट, कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज थी। वो पहले हैरान हुआ, फिर मुस्कुराया, बोला, “तो फिर कोई टेंशन नहीं… अब तो और मजा आएगा।” वो मुझे पकड़कर जोर से किस करने लगा, उसके होंठ मेरे होंठों पर दबे और उसकी जीभ मेरे मुंह में घूम रही थी। “Real Bhai Bahan Chudai”
मैंने उसे हटाया, कान में कहा, “रात में आना मेरे रूम में। मम्मी-पापा सो जाएं उसके बाद।” वो और खुश हो गया, मेरी चूचियां जोर से दबाईं और एक गहरा किस लिया, उसकी उंगलियां मेरी चूचियों को मसल रही थीं और दर्द के साथ मजा आ रहा था।
फिर हम बाहर निकले, मैं खाना बनाने लगी, किचन में गर्मी थी और मेरी चूत से अभी भी रस टपक रहा था जो मेरी जांघों पर बह रहा था। शाम को मम्मी और पापा आ गए, मम्मी थकी लग रही थीं लेकिन उनके चेहरे पर वो संतुष्टि थी जो चुदाई के बाद आती है। सबने खाना खाया, खाने की खुशबू कमरे में फैली थी और सब इधर-उधर अपने काम में लग गए। रात हुई, सब सोने चले गए, घर में सन्नाटा छा गया।
मैंने तैयारी कर रखी थी, बिस्तर पर बिना कपड़ों के चादर ओढ़कर लेट गई, मेरी नंगी त्वचा चादर के नीचे मुलायम लग रही थी और मेरी चूत पहले से गीली हो चुकी थी। 5 मिनट बाद शांतनु आया, वो चुपके से दरवाजा खोलकर अंदर घुसा, उसकी सांसें तेज थीं। मैंने कहा, “पहले अपने रूम का दरवाजा लॉक कर आ। ताकि लगे तुम अंदर सो रहे हो।” वो गया, लॉक किया और वापस आया, उसके पैरों की हल्की आवाज सुनाई दी।
मैंने कहा, “रात में जब भी बुलाऊं, लॉक करके आना।” उसने मेरे रूम का दरवाजा अंदर से बंद किया, क्लिक की आवाज हुई। लाइट ऑन की, कमरे में हल्की पीली रोशनी फैल गई। वो झट से आया, मुझे किस करने लगा, उसके होंठ गर्म थे और उसकी सांसों में वो मर्दाना खुशबू थी जो मुझे मदहोश कर रही थी।
मैंने उसके कपड़े उतारे, उसकी टीशर्ट ऊपर की, उसके सीने पर हाथ फेरा, वो नंगा हो गया, उसका लंड खड़ा था और गर्मी से थरथरा रहा था। मैंने उसे बेड पर खींचा, जोर से किस किया, मेरी जीभ उसकी जीभ से लड़ रही थी। वो मेरी चूत में उंगली करने लगा, उंगली गीली हो गई और अंदर की दीवारों को रगड़ रही थी। मैंने उसका लंड हिलाया, वो सख्त और गर्म था, प्रीकम की बूंदें मेरे हाथ पर लगीं। “Real Bhai Bahan Chudai”
फिर मैं 69 पोजीशन में आई, उसके मुंह पर बैठ गई, मेरी चूत उसके होंठों पर दबी, लंड मुंह में लिया, चूसने लगी, ग्ग्ग्ग… गोग… गी… आवाजें आने लगीं, लंड का स्वाद नमकीन और मीठा था। वो मेरी चूत चाट रहा था, जीभ अंदर डालकर चाटता, क्लिट को चूसता, उसकी जीभ की गर्मी और रफनेस मेरी चूत पर लग रही थी। वो मेरी गांड के छेद में उंगली घुसाता, उंगली गीली होकर अंदर-बाहर होती, मैं कराह रही थी, “आह्ह… शांतनु… चाटो अच्छे से… मेरी चूत खा जाओ… गांड में उंगली और तेज…”
मैंने लंड गहरा चूसा, गला तक घुसाया, वो सिसकारियां ले रहा था, “दीदी… चूसो… तेरे मुंह की गर्मी कितनी अच्छी है…”
फिर मैं उठी, उसके लंड पर बैठ गई, लंड चूत में घुसा, मैं ऊपर-नीचे होने लगी, वो नीचे से कमर उठाकर धक्के मार रहा था, “दीदी… आपकी चूत कितनी गरम है… मुझे आपकी गांड भी मारनी है… तेरी गांड कितनी मोटी है, उसमें लंड घुसाकर मजा आएगा।”
मैंने कहा, “आज नहीं… कल। अभी जोर से चोदो… तेरे लंड का स्पर्श कितना अच्छा लग रहा है… और तेज…” वो और जोर से धक्के मारने लगा, हर धक्के पर मेरी चूचियां उछल रही थीं और धप-धप की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
मैंने कहा, “जब झड़ने वाले हो, मुंह में झड़ जाना।”
वो दो मिनट बाद उठा, मेरी चूचियों पर बैठा, लंड मुंह में डाला, मैंने जोर से हिलाया, सारा रस मुंह में गिरा, गर्म और गाढ़ा रस मेरी जीभ पर फैला, मैंने सब पी लिया, स्वाद नमकीन और मीठा था। फिर 2 मिनट लंड चूसा, वो फिर सख्त हो गया। फिर उसे ऊपर लिटाया, लंड फिर चूत में घुसवाया, बोली, “बस ऐसे ही सो जाओ।”
वो लंड अंदर रखे मस्ती करने लगा, हल्के धक्के मारता, हम सो गए, उसका लंड मेरी चूत में दबा रहा और गर्मी फैल रही थी। रात में वो कई बार उठा, फिर से चोदा, हर बार फोरप्ले करता, चूचियां चूसता, चूत चाटता, मैं उसके लंड को हिलाती, चूसती, फिर धक्के मारता, “दीदी… तेरी चूत रात भर गीली रहती है… चोदने दो और…”
मैं कहती, “चोद ले भाई… मेरी चूत तेरे लिए है… फाड़ दे…” सुबह 4 बजे नींद आई। सुबह 6 बजे मेरी आंख खुली, शांतनु नंगा था, मेरी चूची पकड़े सोया था, उसकी सांसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने उसे किस किया, होंठ चूसे, लंड मुंह में लिया, 5-6 बार अंदर-बाहर किया, लंड गर्म हो गया। वो उठ गया, सिर दबाया, लंड गला तक घुसा, “दीदी… चूसो… सुबह-सुबह मजा आ रहा है…”
मैंने इशारा किया, “ये चाहिए?” वो चूत चाटने लगा, जीभ गहरा घुसाई, चूत की दीवारों को चाटा, क्लिट चूसा, मैं कराह रही थी, “आह्ह… शांतनु… चाट… मेरी चूत तेरे लिए गीली है…” फिर लंड घुसाया, चोदा, चूत में रस भरा, गर्म रस फैला। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर बोली, “जल्दी अपने रूम में जाओ।”
वो गया। मैं कपड़े पहनकर नीचे गई। स्कूल चली गई। स्कूल में भी ब्रा-पैंटी नहीं पहनती, हवा का स्पर्श महसूस होता, मन करता जल्दी घर जाऊं, भाई से चुदूं। दोपहर स्कूल से लौटी, पापा दुकान गए, मम्मी घर पर। भाई स्कूल से आया, मुझे देखकर मुस्कुराया।
मम्मी ने पूछा, “दिन कैसा रहा?”
हमने कहा, “ठीक।”
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मम्मी टीवी रूम में आराम करने लगीं, शाम्भवी उनकी गोद में लाड़ कर रही थी। हम उनके सिर के पीछे बैठ गए। मैंने टांग भाई की चेयर पर रखी, स्कर्ट ऊपर, चूत दिख रही थी। शांतनु ने पैर का अंगूठा चूत में घुसाने की कोशिश की, मैंने पकड़कर घुसा दिया, वो अंगूठा अंदर-बाहर करने लगा, अंगूठा गर्म था और मेरी चूत को रगड़ रहा था।
मैं उसके लंड को पैर से सहला रही थी, उसका लंड सख्त हो गया। उसने लंड लोअर से बाहर निकाला, प्रीकम टपक रहा था। मैंने लंड पकड़ा, मुट्ठी मारने लगी, 2 मिनट में झड़ गया, रस टांग पर गिरा, गर्म और चिपचिपा। मैंने चाटकर पी लिया, स्वाद अभी भी ताजा था।
फिर इशारा किया, वो जमीन पर बैठा, चूत चाटने लगा, जीभ की गर्मी और रफनेस महसूस हो रही थी। 5 मिनट बाद मैं झड़ने लगी, उसे उठाया, बाथरूम ले गई, वहां जोर से रगड़ा, चूत से रस बहा, मैं लगातार झड़ती रही, रस की धारा मेरी जांघों पर बह रही थी। “Real Bhai Bahan Chudai”
शाम को सब घर में थे, लेकिन रात हुई तो फिर वही खेल शुरू। शांतनु मेरे रूम में आया, हमने दरवाजा बंद किया। इस बार मैंने कहा, “आज गांड भी मार ले… कल नहीं… आज ही।” वो खुश हो गया। पहले फोरप्ले किया, मेरी चूत चाटी, उंगली घुसाई, फिर लंड पर थूक लगाया, मेरी गांड पर लगाया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने घुटनों पर बैठकर गांड ऊपर की। वो धीरे से लंड गांड के छेद पर रगड़ा, फिर धक्का मारा। दर्द हुआ, लेकिन मजा भी। “आह्ह… शांतनु… धीरे… तेरी गांड कितनी टाइट है…” वो धीरे-धीरे अंदर घुसाता रहा। जब पूरा घुस गया तो धक्के शुरू। मैं कराह रही थी, “आह्ह… चोद… मेरी गांड फाड़ दे… जोर से…” वो तेज धक्के मारने लगा, गांड की दीवारें लंड से रगड़ रही थीं, दर्द और मजा दोनों एक साथ। वो मेरी चूत में भी उंगली डालता रहा।
करीब 10 मिनट बाद वो मेरी गांड में झड़ गया, गर्म रस अंदर फैला। मैंने गांड कसकर दबाई। वो मेरे ऊपर लेट गया। फिर हमने फिर से चूत चुदाई की, रात भर कई राउंड हुए। सुबह तक हम थककर सो गए। अब ये सिलसिला रोज चलता है। भाई बहन की रिश्ते में अब कोई शर्म नहीं बची। हम दोनों खुश हैं।
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