Kamuk Maa Beta Chudai
मेरा नाम हर्ष है। मैं फरीदाबाद का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 19 साल है। मैं बी.कॉम. प्रथम वर्ष का स्टूडेंट हूँ। मेरी लम्बाई 5 फुट 8 इंच है। रंग गोरा है और लंड का साइज़ 8 इंच है। मेरी फैमिली में 4 मेंबर हैं। मेरे पापा अमिताभ हैं जिनकी उम्र 40 साल है। मेरी माँ रचना हैं, उम्र 38 साल है। उनका रंग गोरा है और फिगर 38-36-38 है। Kamuk Maa Beta Chudai
पेशे से स्कूल टीचर हैं और दिखने में काफी हॉट हैं। मेरी छोटी बहन नंदिनी है जिसकी उम्र 18 साल है। उसका रंग गोरा है और फिगर 36-34-36 है। वक्त से पहले ही जवान हो गई है। दोस्तों, ये घटना अभी कुछ दिन पहले की है। सुबह से ही बारिश हो रही थी और उस दिन बहुत ज्यादा तेज़ बारिश हो रही थी।
माँ स्कूल गई थीं और पापा ऑफिस गए थे। पापा का ऑफिस तो पास में ही था पर माँ को काफी दूर जाना पड़ता था। काफी बारिश होने के कारण सब कुछ ठप हो गया था। शाम को पापा का फोन आया कि हर्ष तुम जाकर अपनी माँ को रिसीव कर लेना। मैं एक ऑटो पकड़कर माँ के स्कूल 7:30 बजे पहुँचा और उन्हें लेकर बाहर आ गया।
पर बाहर काफी तेज़ बारिश हो रही थी। जिसके कारण कोई भी गाड़ी नहीं मिल रही थी। हम वहीं एक जगह खड़े होकर इंतज़ार करने लगे। धीरे-धीरे अंधेरा हो रहा था और सड़क पर कोई भी गाड़ी नज़र नहीं आ रही थी। काफी देर इंतज़ार करने के बाद हम कुछ दूर पैदल ही चल पड़े।
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बारिश में माँ की साड़ी पूरी तरह भीग गई थी। भीगी हुई साड़ी उनके शरीर से चिपक गई थी जिससे उनका 38-36-38 वाला फिगर और भी उभरकर दिख रहा था। उनकी भारी छातियाँ, पतली कमर और गोल नितंब स्पष्ट नज़र आ रहे थे। पूरी सड़क सुनसान पड़ी थी। हम दोनों काफी भीग चुके थे और अब हमें उम्मीद नहीं थी कि कोई गाड़ी हमें मिलेगी।
तो मैंने माँ से कहा कि माँ अब लगता है कि कोई गाड़ी नहीं मिलेगी। यहीं पास के मोहल्ले में ही मेरे दोस्त का घर है जो उसने मुझे किराये के लिए दिया था और मैं उसकी चाबी भी ले आया हूँ। अगर आप कहें तो आज की रात हम वहीं गुजार लें। तो माँ ने कहा ठीक है।
अब इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है। तो फिर हमने घर पर पापा को फोन पर बताया कि आज हमें कोई गाड़ी नहीं मिल रही है और हम यहीं पास के एक मकान में रुक रहे हैं। तो पापा ने कहा कि कोई बात नहीं बस तुम लोग आराम से तो हो ना। कल सुबह जब बारिश कम होगी तो आ जाना। फिर हम आगे बढ़े।
तो माँ ने कहा कि मुझे तो भूख भी लगी है। तो मैंने कहा कि पास ही एक ढाबा है जहाँ अच्छा खाना मिलता है और हमने वहाँ से खाना पैक कराया। ढाबे के सामने एक बीयर और वाइन शॉप थी। तो मैंने माँ से कहा कि माँ मुझे काफी ठंड लग रही है। क्या मैं एक बीयर ले लूँ।
तो माँ ने मौके की नज़ाकत को देखते हुए हाँ कर दी। तो मैंने वहाँ से दो बीयर लीं और चल पड़े। दोस्त के घर पहुँचे और ताला खोला। वहाँ हमारे पास कोई कपड़ा नहीं था और हमारे सारे कपड़े भीग गए थे। तो माँ ने कहा कि अब क्या करें। तो मैंने कहा कि माँ यहाँ पर कोई नहीं है और आप चाहें तो अपने कपड़े निकालकर रह सकती हैं। क्या करें? हमारी मजबूरी है। अगर नहीं निकाले तो ठंड लग जाएगी।
तो मैंने और माँ ने अपने आधे कपड़े निकाल दिए। माँ ने अपनी भीगी साड़ी और ब्लाउज उतारकर सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गईं। उनकी गोरी त्वचा बारिश के पानी से चमक रही थी। फिर हमने खाना खाया और फिर मैंने एक बीयर पी। मैंने माँ से कहा कि माँ आप भी एक-दो घूँट ले लो इससे आराम मिलेगा। पहले तो माँ ने मना कर दी पर बाद में ले ली। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
पहले तो माँ को थोड़ी कड़वी लगी पर बाद में माँ ने आधी से ज्यादा बोतल खत्म कर दी। माँ को धीरे-धीरे नशा चढ़ने लगा। साड़ी और ब्लाउज में माँ भीगी हुई काफी सेक्सी लग रही थी। उनकी भीगी साड़ी शरीर से पूरी तरह चिपक गई थी जिससे उनकी भारी छातियाँ और गोल नितंब साफ उभरकर दिख रहे थे।
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तो मैंने माँ से कहा कि माँ अगर आप ये भी कपड़े उतार दे तो आपको ठंड नहीं लगेगी और आपको यहाँ कोई देख भी नहीं रहा है। तो माँ ने अपनी साड़ी और ब्लाउज भी निकाल दिया। माँ अब सिर्फ पिंक कलर की ब्रा और पैंटी में थीं। उनके गोरे और मोटे बूब्स ब्रा से बाहर झाँक रहे थे। बड़े-बड़े गुलाबी निप्पल ब्रा के कपड़े को तान रहे थे।
उन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था और मेरे मन में अजीब सी अकुलाहट हो रही थी। मन कर रहा था कि माँ को चोद दूँ। फिर माँ ने मुझसे भी अपनी टी-शर्ट और पैंट निकालने को कहा और मैंने उसे निकाल दिया। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में खड़ा था।
फिर मैंने माँ से कहा कि माँ आपकी तो ब्रा-पैंटी भी भीग गई है। आप इसे भी उतार दो वरना आपके शरीर पर धब्बे पड़ जाएंगे। तो माँ ने कहा कि हाँ हर्ष तू सही कह रहा है और तुझसे क्या शर्माना। माँ ने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। अब उनके मोटे-मोटे बूब्स मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे।
बड़े-बड़े गुलाबी निप्पल सख्त होकर खड़े थे। उनकी चिकनी गोरी चूत पर हल्के बाल थे जो बारिश के पानी से गीले होकर चमक रहे थे। जिसे देखकर मेरा लंड एकदम तनकर लोहा हो गया था जो मेरी अंडरवियर के ऊपर से साफ दिखाई दे रहा था। तो माँ ने कहा कि बेटा तेरा भी अंडरवियर भीग गया है तो तू भी इसे उतार दे।
तो मैंने भी अपना अंडरवियर उतार दिया। फिर क्या था मेरा 8 इंच लंबा मोटा लंड एकदम माँ के सामने लहरा रहा था। उसकी नोक से पहले ही थोड़ा-थोड़ा पानी टपक रहा था। माँ की नजर मेरे लंड पर अटक गई। उसे देखकर माँ ने कहा कि बेटा तू तो अब काफी जवान हो गया है। तेरी तो अब शादी करनी पड़ेगी।
तो मैंने माँ से कहा कि माँ अगर आपको बुरा न लगे तो एक बात कहूँ। तो माँ ने कहा कि क्या। तो मैंने कहा कि माँ आप भी बहुत सेक्सी हैं। तो माँ ने कहा कि क्या तेरा ये हाल मेरे ही कारण है। फिर मैंने कहा कि माँ आप इतनी सेक्सी हैं कि आपको देखकर तो भूतों का भी लंड खड़ा हो जाए।
तो माँ ने कहा कि बेटा तेरा भी लंड इतना बड़ा है कि किसी भी औरत का मन तुझसे चुदाने को करेगा। तो मैंने कहा कि माँ क्या आपको भी मन कर रहा है। तो माँ ने कुछ नहीं कहा और एक हल्की सी स्माइल दे दी। मैं समझ गया कि माँ की हाँ है। झट से मैंने माँ के बूब्स पकड़ लिए और उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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मेरी उँगलियाँ उनके नरम मांस में धंस रही थीं। माँ के मुँह से हल्की सी आह निकली। फिर मैंने एक-एक करके उनके दोनों निप्पल मुँह में ले लिए और चूसने लगा। मैं उन्हें जोर से चूसता और हल्का-हल्का काटता। माँ के मुँह से लगातार आहाहा… उफ्फ… की आवाजें निकल रही थीं।
फिर काफी देर के बाद माँ नीचे झुकीं और मेरा लंड अपने हाथ में थाम लिया। उन्होंने पहले उसकी नोक को चूम लिया फिर अपनी गर्म जीभ से चाटा। उसके बाद माँ ने पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगीं। उनका सिर आगे-पीछे हो रहा था। मेरे लंड पर उनकी लार चमक रही थी। “Kamuk Maa Beta Chudai”
मुझे तो जैसे स्वर्ग के दर्शन हो रहे थे कि एक तो बारिश का सुहाना मौसम और ऊपर से माँ जैसी सेक्सी औरत मेरा लंड चूस रही हो। काफी देर बाद मैंने माँ को खड़ा किया और उनकी चूत पर हाथ फेरा। मेरी उँगलियाँ उनकी गीली और गर्म चूत की फाँकों के बीच सरक गईं।
मैंने अपनी एक उँगली उनकी चूत में डाली और अंदर-बाहर करने लगा। और कहा कि माँ आपकी चूत तो अभी भी बहुत टाइट है। क्या पापा आपको चोदते नहीं हैं। तो माँ ने कहा कि नहीं बेटा वो तो महीने-दो महीने में एक बार चोदते हैं और वो भी कुछ देर के लिए।
तो मैंने कहा कि माँ आप चिंता मत करो अब मैं हूँ ना। मुझे आप अपना दूसरा पति समझो और जब भी मन करे आ जाना। मेरा लंड तुम्हारे लिए खड़ा है। तो माँ ने कहा कि सच बेटा अब देर मत कर और जल्दी से अपनी माँ को अपना बना ले। फिर मैंने माँ को घोड़ी बनाया। माँ चारों हाथ-पैरों के बल बिस्तर पर झुक गईं।
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उनकी गोरी पीठ सीधी थी और गोल-गोल नितंब ऊपर उठे हुए थे। मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और फिर अपनी उँगलियों से माँ की चूत पर फैला दिया। उनकी चूत अब पहले से ज्यादा गीली और सूजी हुई थी। मैंने लंड की नोक को उनकी चूत की फाँकों के बीच रखा और एकदम जोरदार धक्का मारा। आधा लंड एक झटके में माँ की चूत में उतर गया।
माँ जोर से चिल्लाईं, “आआह्ह्ह… हर्ष!” उनकी आँखों में आँसू आ गए। उनकी पूरी देह काँप उठी। मैं तुरंत रुक गया और चिंता से बोला कि माँ ज्यादा दर्द हो रहा हो तो बाहर निकाल लूँ। तो माँ ने साँसें तेज़ करते हुए कहा कि नहीं बेटा ये तो खुशी के आँसू हैं। इस दर्द के लिए तो मैं न जाने कब से तरस रही हूँ। बस तू मुझे चोद और ज़ोर से चोद। फाड़ दे अपनी माँ की चूत को। “Kamuk Maa Beta Chudai”
फिर क्या था, मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए। पहले तो माँ को काफी दर्द हो रहा था। उनकी चूत बहुत टाइट थी। हर धक्के के साथ माँ के मुँह से कराहें निकल रही थीं। लेकिन धीरे-धीरे उनका दर्द कम होता गया और वो भी गांड उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगीं। अब पूरा कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ों से गूँज रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
चप-चप… फच-फच… की तेज़ आवाज़ें हर धक्के के साथ भर रही थीं। माँ की भारी छातियाँ नीचे लटककर झूल रही थीं। मैंने आगे झुककर उन्हें दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर-जोर से दबाते हुए तेज़ी से चोदने लगा। करीब 35 मिनट तक लगातार चुदाई चली। इस बीच माँ दो बार झड़ चुकी थीं।
पहली बार उनकी चूत मेरे लंड को जोर से दबाते हुए काँप उठी थी और गर्म रस मेरे लंड पर बह निकला था। दूसरी बार उन्होंने तकिए को मुँह में दबाकर जोर से चीखते हुए झड़ गई थीं। फिर मुझे लगा कि मैं अब झड़ने वाला हूँ। मैंने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी। मेरे लंड के हर धक्के से माँ की चूत पूरी तरह भर जाती थी।
आखिरकार मैंने गहरी साँस ली और अपना पूरा माल माँ की चूत के अंदर ही छोड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य की धारें माँ की चूत की गहराई में फूट रही थीं। फिर माँ ने मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाला। अभी भी उस पर हम दोनों के रस चमक रहे थे। माँ ने तुरंत मुड़कर उसे अपने मुँह में ले लिया और अच्छी तरह चूसा। “Kamuk Maa Beta Chudai”
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उन्होंने सारा वीर्य और अपनी चूत का रस चाट लिया। फिर माँ ने ऊपर देखकर मुस्कुराते हुए कहा कि बेटा मज़ा आ गया। फिर मैंने कहा कि माँ असली मज़ा तो अब आएगा जब मैं आपकी गांड मारूँगा। तो माँ ने शर्माते हुए लेकिन उत्सुकता से कहा कि बेटा मेरी गांड तो कब से प्यासी है। लास्ट बार तेरे मामा ने ही मारी थी। पिछले साल जब वो विदेश से वापस आए थे।
तो मैं ये सुनकर चौंक गया कि माँ अपने सगे भाई से भी चुदवाती हैं। फिर मैंने माँ की गांड भी मारी। उस रात मैंने माँ को 5 बार चोदा। तीन बार उनकी चूत मारी और दो बार उनकी गांड मारी। फिर सुबह बारिश रुकने के बाद हम घर पहुँचे और उस दिन के बाद मैं लगभग रोज़ माँ को चोदता हूँ।
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Goutam says
Hume bhi bto koi chut9814675013