Housewife Affair Chudai Story
हैलो दोस्तों, मेरा नाम रश्मि है, फिगर 40-34-38, भारी-भरकम मम्मे और मटकती हुई गोल गाँड, शादी को अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए थे जब ये सब हुआ। मेरी सबसे पक्की सहेली स्मृति की शादी भी मुंबई में ही हुई थी, कॉलेज टाइम से हम दोनों एक-दूसरे की हर गंदी बात शेयर करती थीं। Housewife Affair Chudai Story
शादी के बाद हमने जानबूझकर एक ही सोसाइटी में बगल के फ्लैट ले लिए, ताकि पति ऑफिस जाएँ तो हम दोनों दिन भर मस्ती करें। सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक हमारा रूटीन था, कभी मेरे घर, कभी उसके घर, चाय पीते-पीते बातें चुदाई तक पहुँच ही जाती थीं।
एक दिन स्मृति मेरे घर आई, स्कर्ट-टॉप में उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, बैठते ही बोली, “यार कल नीरज ने मुझे मार-मार के चोदा, आज तक चूत में जलन हो रही है।”
मैंने हँसते हुए पूछा, “क्या किया साले ने?”
“वो कोई नया मोटा-डॉटेड कंडोम लाया था, उभरे हुए दाने जैसे, पहले तो घुस ही नहीं रहा था, फिर ढेर सारा तेल लगाकर जब जोर से ठोका तो लगा मेरी चूत फट जाएगी, आह्ह्ह… आज तक दर्द है और खुजली भी।”
मैंने मजाक में उसकी स्कर्ट ऊपर उठाई और पैंटी के ऊपर से सहलाते हुए बोली, “देखूँ तो सही कितना निशान पड़ा है।”
स्मृति ने पैर फैला दिए, पैंटी गीली थी, मैंने उँगली से रगड़ा तो वो सिहर उठी, “आह्ह… मत कर यार, सुबह ही नीरज ने बाथटब में फिर पेला था, मना करने पर भी पीछे का छेद मार लिया, पर सच बता रही हूँ रश्मि, गाँड मारने का मजा ही अलग है, आह्ह्ह्ह… लंड एकदम अंदर तक घुस जाता है।”
मैंने तंज कसा, “कमिनी, शादी को साल भी नहीं हुआ और तूने गाँड मारवा ली, मुझे तो बताया तक नहीं।”
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वो शरमाते हुए बोली, “पहले तो मना करती थी, पर जब रोज मांगने लगा तो तरस खाकर दे दिया, पहली बार जब मारा तो दर्द के साथ इतना मजा आया कि मैं खुद ही कमर उछालने लगी, ऊईईई… अब तो हफ्ते में तीन-चार बार गाँड ही मारता है।”
फिर बात उसके एक्स-बॉयफ्रेंड तक पहुँची, वो अभी भी चोदने आता था, पिछले हफ्ते तो दोस्त को साथ लाया था। स्मृति ने हँसते हुए बताया, “मैंने मना कर दिया था, पर उसका दोस्त दरवाजे पर खड़ा मेरी चुदाई देखता रहा और लंड हिलाता रहा, जाते वक्त मेरी गाँड दबाकर बोला, अगली बार मुझे भी मौका देना भाभी।”
मैंने पूँछा, “तूने दिया क्या?”
“फिलहाल नहीं, पर सोच रही हूँ दे दूँ, बेचारा दूर से आया था मेरी चुदाई की आस लिए।”
बातों-बातों में मैंने अपनी हनीमून की पेनड्राइव निकाली, जिसमें शिखर का 8 इंच का मोटा लंड मेरी चूत और गाँड में धँस रहा था। स्मृति की आँखें फटी की फटी रह गईं, “बाप रे! इतना बड़ा? तू कैसे लेती है?”
मैंने मुस्कुरा कर कहा, “आदत हो गई, रोज दो-तीन बार तो पेलता ही है, कभी मुँह, कभी चूत, कभी गाँड।”
स्मृति ने अचानक मेरे कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोली, “रश्मि… एक बार मुझे तेरी चुदाई लाइव देखनी है, प्लीज मुझे अपने बेडरूम में छिपा दे।”
मैं हिचकिचाई, पर उसकी आँखों में चुदास थी, मैं मान गई। अगले दिन मैंने शिखर को जल्दी बुला लिया, स्मृति को अलमारी के पर्दे के पीछे छिपा दिया। मैंने लाल रंग की ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी थी, अंदर कुछ नहीं। शिखर आते ही मुझे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए, दोनों नंगे होकर नहाए, मैंने उनका लंड मुँह में लिया, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… पूरा गले तक ले लिया, शिखर की साँसें तेज हो गईं।
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बाहर बेड पर आए तो शिखर ने मुझे घोड़ी बनाया, आज उन्होंने भी वही मोटा डॉटेड कंडोम चढ़ाया था। जैसे ही लंड चूत में घुसा, जलन हुई, आह्ह्ह्ह… मैंने करवट बदल कर मुँह में ले लिया, पर वो और जोश में आ गए, मुझे फिर घोड़ी बनाया और जोर-जोर से ठोकने लगे, ठप-ठप-ठप… मेरी चूचियाँ लहरा रही थीं, मैं बार-बार स्मृति की तरफ देख रही थी, वो पर्दे के पीछे से अपनी चूत सहला रही थी, उसकी साँसें सुनाई दे रही थीं। “Housewife Affair Chudai Story”
मैंने शिखर से बोला, “आज चूत में बहुत जलन हो रही है, बाकी गाँड में कर लो।”
शिखर ने खुश होकर मेरी कमर पकड़ी और एक ही झटके में गाँड में घुसा दिया, आह्ह्ह्ह्ह… ऊईई माँ… मैं चीख पड़ी, पर मजा भी इतना था कि मैं खुद पीछे को धक्के मारने लगी, ठपठपठपठप… कमरा हमारी चुदाई की आवाजों से गूँज रहा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अचानक शिखर को शक हुआ, वो लंड निकाल कर उठे और पर्दा हटाया, स्मृति नंगी खड़ी थी, उसकी चूत से पानी टपक रहा था।
शिखर मुस्कुराए और मुझे बाहर ले गए, टीवी रूम में बैठ कर पूछा, “बता क्या माजरा है?”
मैंने सब बता दिया। शिखर हँसे, “तो तेरी सहेली को भी चुदाई का शौक है? अगर तू राजी है तो मुझे क्या एतराज, नई चूत मिलेगी, वो भी बगल में रहती है, जब मन करे तब चोद लूँगा।”
मैं चौंकी, पर अंदर से गर्मी भी हुई। शाम को स्मृति का फोन आया, “क्या हुआ?”
मैंने बताया तो वो बेसब्री से बोली, “प्लीज रश्मि, एक बार शिखर से चुदवा दे, मैं भी तुझे नीरज से चुदवा दूँगी।”
मैंने शिखर से बात की, वो तुरंत राजी हो गए। हमने प्लान बना लिया, पहले स्मृति को शिखर चोदेंगे, फिर मैं नीरज को लूँगी।
एक दिन मैंने स्मृति को फोन लगाया, बोली, “चल साली मार्केट चल, कुछ ऐसी चूत फाड़ने वाली ब्रा-पैंटी लेते हैं, तेरी चूत को तो शिखर का लंड फाड़ने वाला है, कुछ हॉट पहनकर आएँगी तो सीधे लंड खड़ा हो जाएगा।”
स्मृति हँसते हुए बोली, “सेक्स के टाइम क्या ब्रा-पैंटी चाहिए रंडी? नंगी ही तो लंड खाना है, पर चल, तेरे साथ मज़ा आएगा।”
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दोपहर में मार्केट पहुँचे, दुकान में घुसीं तो मैंने दुकानदार से बोला, “भैया, सबसे गंदी वाली चीजें दिखाओ, ऐसी जो देखते ही लंड खड़ा कर दे, मेरी सहेली की हनीमून है।”
स्मृति मेरी गांड पर चिकोटी काटकर बोली, “वाह कुत्ती, सही बोल रही है तू।”
ट्रायल रूम में घुसीं, मैंने स्मृति को पूरा नंगा कर दिया, उसके भारी-भारी दूध और मोटी गांड देखकर बोली, “आज तो तेरी चूत-गांड दोनों फटेंगी साली।”
उसने भी मुझे नंगा किया और बोली, “तेरी चूत भी तो आज फिर माल खाएगी ना रंडी।”
हमने डबल पैंटी पहनी और चोरी-चोरी बाहर निकल आईं। अगले दिन स्मृति सुबह-सुबह आ गई, शिखर ने दारू पी रखी थी, मैं उसे चूम ही रही थी कि स्मृति अंदर घुसी, बोली, “वाह चुदक्कड़, पहले से शुरू हो गई?”
मैंने कहा, “आ जा कुत्तिया, आज तेरी चूत की बारी है, शिखर का लौड़ा तैयार है।”
स्मृति अपनी मटकती गांड हिलाते हुए आई, ट्रांसपेरेंट ब्रा में उसके काले निप्पल साफ दिख रहे थे, शिखर का लंड देखते ही खड़ा हो गया। वो बोला, “आजा मेरी रंडी नंबर दो।”
स्मृति शिखर की गोद में बैठ गई और बोली, “आज मेरी चूत फाड़ दो साहब, पूरा लंड अंदर चाहिए।”
मैंने पूछा, “जानू, पहले किसकी चूत लोगे?”
शिखर ने लंड पकड़कर हिलाते हुए कहा, “जिसकी चूत पहले गीली हो जाए।”
स्मृति बोली, “दोनों की चूत एक साथ लो ना, दोनों रंडियाँ तैयार हैं।”
कपड़े उतारते देर न लगी, शिखर ने हम दोनों को नंगा कर दिया, हमने भी उसका मोटा लौड़ा बाहर निकाला। मैं और स्मृति दोनों ने मिलकर लंड पकड़ा, स्मृति बोली, “वाह रश्मि, कितना मोटा है, आज मेरी चूत फट जाएगी।” शिखर आह्ह्ह्ह भरा और बोला, “दोनों रंडियों के हाथ एक साथ, मज़ा आ गया।”
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शिखर ने स्मृति को लिटाया और उसके दूध चूसने लगा, चट-चट की आवाज़ करते हुए, स्मृति चिल्लाई, “आह्ह्ह चूसो साहब, पूरा दूध निचोड़ दो, ओह्ह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है।” मैं नीचे बैठकर स्मृति की चूत में दो उंगलियाँ पेल दीं, फच्च-फच्च आवाज़ आई, स्मृति तड़पी, “आह्ह्ह रश्मि रंडी, कितनी जोर से उंगली कर रही है, मेरी चूत फाड़ देगी।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर शिखर ने अपना दस इंच का लौड़ा स्मृति की चूत पर रखा और एक झटके में आधा अंदर कर दिया, स्मृति चीखी, “आअह्ह्ह्ह्ह माँ मर गई, कितना मोटा है, धीरे साहब, चूत फट जाएगी आह्ह्ह्ह्ह्ह।” मैं हँसते हुए बोली, “ले साली, आज तेरी चूत का भोसड़ा बनना है।” कुछ देर बाद स्मृति खुद कमर उचकाने लगी, “चोदो शिखर, पूरा लंड पेलो, आह्ह्ह्ह्ह फाड़ दो मेरी चूत।”
शिखर बोला, “आह्ह्ह्ह इस रंडी की चूत में तो अलग मज़ा है रश्मि, कितनी टाइट और रसीली है।”
मैंने कहा, “हाँ हाँ, आज से ये तेरी दूसरी रखैल है, रोज़ चोदना इसे।”
फिर शिखर ने मुझे स्मृति के ऊपर लिटाया, पहले मेरी चूत में लंड पेला, दस-पंद्रह जोरदार धक्के, फिर निकालकर स्मृति की चूत में, इस तरह हम दोनों की चूत बारी-बारी से चुद रही थीं। स्मृति चिल्ला रही थी, “हाँ ऐसे ही, दोनों रंडियों को एक साथ चोदो।”
अचानक शिखर ने स्मृति की गांड में लंड सटा दिया, स्मृति बोली, “नईइइइइइ, गांड मत मारो,” पर शिखर ने झटके से पूरा लंड गांड में उतार दिया, स्मृति की चीख निकली, “ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माँआआआ फट गई मेरी गांड, आह्ह्ह्ह्ह्ह बहुत मोटा है, फिर भी चोदो साहब, गांड फाड़ दो आज।” थप्प्प्प-थप्प्प्प की आवाज़ से कमरा गूँज उठा। “Housewife Affair Chudai Story”
फिर मेरी गांड में भी लंड घुसा, दोनों सहेलियों की गांड एक ही दिन में फट गई। शिखर ने आखिर में स्मृति की चूत में झड़ दिया, स्मृति काँपते हुए बोली, “ऊईईईई माँआआ, पूरा माल मेरी चूत में, झड़ गई मैं भी।”
मैं अभी तक नहीं झड़ी थी, स्मृति को बाथरूम ले गई और बोली, “साली, अभी और लंड चाहिए क्या?”
वो बोली, “हाँ रंडी, तेरे पति का लौड़ा छोड़ूँगी नहीं आज।”
बाहर आते ही स्मृति ने शिखर का लंड मुँह में लिया, ग्ग्ग्ग्ग्ग-गी-गी-गी करते हुए पूरा गले तक उतारा, फिर घोड़ी बनकर बोली, “चोदो साहब, फिर से चूत फाड़ दो।”
चुदाई के बाद मैं नंगी चाय बनाने गई, स्मृति बोली, “तेरा पति मत छीन लेना रे।”
मैंने कहा, “नहीं साली, तू तो बस रखैल बनकर चुदवाती रह।”
चाय पीते-पीते फिर स्मृति ने एक और चुदाई करवा ली, बोली, “तेरा पति का लंड नहीं छोड़ूँगी कभी।”
एक दिन मैं रोटी बना रही थी, स्मृति सिर्फ़ मैक्सी में आई, आते ही शिखर को किस करने लगी, बोली, “साहब जल्दी लंड पेलो, चूत में आग लगी है।”
शिखर ने उसे स्लैब पर घोड़ी बनाया और मेरे सामने लंड पेल दिया, स्मृति चिल्लाई, “आह्ह्ह्ह रश्मि देख, तेरे पति मेरी चूत फाड़ रहे हैं, कितना मज़ा आ रहा है।”
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मैं रोटी सेंकते हुए बोली, “चुद साली, खूब चुद।”
फिर फर्श पर शिखर लेट गया, स्मृति उसकी गोद में लंड गांड में लेकर उछलने लगी, बोली, “आज गांड भी फाड़ दो साहब।”
मैंने उसकी गांड दबाई और बोली, “कितनी मोटी गांड हो गई है तेरी रंडी।”
वो हँसकर बोली, “नीरज भी रोज़ गांड मारते हैं, मज़ा बहुत आता है।”
मैं भी नंगी हो गई, शिखर के मुँह में चूत देकर बैठ गई, वो चाटते हुए बोला, “दोनों रंडियों की चूत एक साथ खा रहा हूँ।” स्मृति झड़ गई तो मैं बेडरूम ले गई और खूब चुदवाई, स्मृति दरवाजे पर खड़ी देखती रही और बोली, “जल्दी खत्म करो, मेरी बारी है फिर।” अब तो स्मृति को लत लग गई, कभी भी आ जाती और शिखर से चुदवा लेती, कभी अपने घर भी बुला लेती। हम तीनों बहुत खुश हैं, नीरज से मेरी चुदाई की कहानी जल्दी लिखूँगी।
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