Hot Cousin Sister Fuck
दोस्तों, वो गर्मियों की छुट्टियाँ थीं जब मैं अठारह का हुआ था। उम्र का वो खतरनाक मोड़ जहाँ हार्मोन्स खून में आग बनकर दौड़ते हैं। दिन-रात एडल्ट फिल्में देख-देखकर दिमाग में बस एक ही तस्वीर घूमती रहती – नंगी औरतें, उनके भारी-भारी स्तन, गीली चूत, और लंड को निगलती हुईं। Hot Cousin Sister Fuck
सड़क पर कोई भी लड़की दिखती, चाहे वो दस साल बड़ी हो या छोटी, नजर सीधे उसके उभारों पर चली जाती। और सबसे सुरक्षित, सबसे आसान शिकार तो घर-परिवार में ही मिलता है ना? इसलिए हर गर्मी में मैं बुआ के घर भागा चला जाता। बुआ के तीन बच्चे। छोटा बेटा हॉस्टल में।
छोटी बेटी अभी तीसरी क्लास में, बिल्कुल मासूम। और बड़ी वाली… मेरी मीना दीदी। BA फाइनल कर चुकी थीं, घर में शादी की बातें जोरों पर। उम्र बाईस-पच्चीस के बीच। हाइट सिर्फ 5 फुट 2 इंच, पर बॉडी ऐसी भरी-पूरी कि देखते ही लंड पत्थर हो जाता – 36D के भारी-भारी दूध जो हर कदम पर हिलोरें लेते, पतली कमर, और 38 की गोल-मटोल गांड जो सलवार में भी साफ दिखती।
रंग दूध सा गोरा, जैसे रात की रोशनी में चाँद चमक रहा हो। और सबसे बड़ी बात – मुझसे बिल्कुल बेज़िज़क। अपनी हर सेक्स स्टोरी मुझे सुनातीं। कौन सा बॉयफ्रेंड कहाँ किस किया, किसने निप्पल चूसे, किसने उंगली डालकर चोदा – सब विस्तार से। सुनते ही मेरे अंदर आग लग जाती, लंड पैंट फाड़ने को होता।
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बुआ-फूफा एक कमरे में, छोटी उनके साथ। मैं और मीना दीदी दूसरे कमरे में – एक ही डबल बेड। रात को घंटों बातें, हँसी-मजाक, फिर वो सो जातीं और मैं उनकी साँसों की गर्मीली लय सुनता, लंड हाथ में लेकर हिलाता। पहली रात। वो हल्के गुलाबी रंग का पतला साटन नाइट गाउन पहने थीं।
गला इतना चौड़ा कि झुकते ही गहरी खाई दिखती – दो बड़े-बड़े गोरे बूब्स आपस में सटे, बीच में गहरी दरार। गाउन इतना पतला कि निप्पल्स की उभरी हुई आकृति साफ दिख रही थी। मैं बिस्तर पर लेटा उन्हें घूरता रहा। नींद का नाटक किया, फिर धीरे से करवट बदली और अपना दायाँ हाथ उनकी छाती पर रख दिया।
उफ्फ्फ… जैसे 440 वोल्ट का करंट लगा हो! उनकी हर साँस के साथ वो नरम, गर्म, भारी गोलाई ऊपर-नीचे हो रही थी। हल्का सा दबाव डाला… फिर थोड़ा और… जैसे गर्म रुई के दो बड़े-बड़े गोले हों, पर भारी और लचीले। मैंने हल्के-हल्के मसलना शुरू किया। उँगलियाँ निप्पल की ओर बढ़ीं – पहले हल्के से रगड़ा, फिर चुटकी में लेकर घुमाया।
वो हल्का सा सिहर उठीं, पर आँखें नहीं खोलीं। घंटों मैंने ऐसे ही खेला – कभी हल्के से दबाता, कभी उँगलियों से निप्पल खींचता, कभी पूरी हथेली से मसलता। कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला। सुबह लंड गीला था, शायद रात में ही झड़ गया था। अगले दिन सब नॉर्मल। दिन भर मस्ती, शाम को फिर वही कमरा।
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रात को बातें करते-करते मैंने शरारत से पूछा, “दीदी, जब तुम्हारा बॉयफ्रेंड तुम्हें छूता है तो सच में गुदगुदी नहीं होती?”
वो हँस पड़ीं, “नहीं रे पागल, बहुत मजा आता है।”
“मुझे तो बहुत होती है।”
उन्होंने आँखें तरेरीं, फिर चिढ़ाते हुए बोलीं, “अच्छा? मुझे तो बिल्कुल नहीं होती। ट्राय करके देख ना।”
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने धीरे से उँगलियाँ उनके गले पर फेरीं। वो आँखें बंद कर मुस्कुरा दीं। हिम्मत बढ़ी। हाथ नीचे सरका – गाउन के पतले कपड़े पर से उनके भारी दूधों को सहलाने लगा। पहले हल्के-हल्के, फिर पूरी हथेली से दबाया। वो गहरी साँसें ले रही थीं, पर कुछ नहीं बोलीं। लगा जैसे नींद का नाटक कर रही हों। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने गाउन के अंदर हाथ डाल दिया। ब्रा थी, पर इतनी पतली कि कुछ ढक नहीं रही थी। उँगलियाँ निप्पल पर पहुँची – पहले हल्के से छुअन, फिर चुटकी काटी। वो हल्का सा कराहीं, “उम्म्म…” पर आँखें नहीं खोलीं। मैंने और बढ़ाया – कमर पर हाथ फेरा, गांड के गोलों को जोर से दबाया, फिर जाँघों के बीच तक पहुँचा। पैंटी पूरी गीली थी, गर्मी साफ महसूस हो रही थी।
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अचानक वो उठ बैठीं, “अरे ये क्या कर रहा है तू साले?”
मैं डर गया, पर हिम्मत से बोला, “तुमने ही तो कहा था गुदगुदी करो, तुम्हें होती ही नहीं।”
वो पहले शरमाईं, फिर ठहाका मार कर हँस पड़ीं। “पागल! अभी तुझे पता ही नहीं असली गुदगुदी क्या होती है। देख, जब मैंने तुझे छोटे में की थी तब तुझे हुई थी ना?”
मैंने हाँ में सिर हिलाया। वो बिस्तर पर लेट गईं, अपना गाउन धीरे-धीरे कमर से ऊपर तक चढ़ा दिया। अंदर सिर्फ एक पतली लेस वाली काली पैंटी। गोरी-गोरी, मक्खन जैसी जाँघें चाँदनी में चमक रही थीं। वो अपनी भीतरी जाँघों की ओर इशारा करके फुसफुसाईं, “गले में नहीं… यहाँ कर। तब पता चलेगा असली गुदगुदी।”
मेरा दिमाग घूम गया। मैं उनके पैरों के पास बैठ गया। जाँघें इतनी मुलायम कि छूते ही लंड फटने को हुआ। मैंने पहले हल्के से उँगलियाँ फेरीं, फिर होंठ रखे। धीरे-धीरे किस करना शुरू किया… भीतर की जाँघों पर जीभ फेरी। वो सिहर उठीं। अचानक उनके हाथ मेरे बालों में आ गए, जोर से खींचा और मेरा मुँह सीधे उनकी चूत पर ले आईं।
पैंटी उन्होंने खुद नीचे सरका दी थी। चूत एकदम क्लीन शेव्ड, गुलाबी होंठ, हल्की सी चमक, और बीच में एक पतली सी गीली लकीर। गंध… उफ्फ, वो मीठी-सी मदहोश करने वाली गंध जो सीधे दिमाग में चढ़ जाती है।
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वो फुसफुसाईं, “यहाँ किस कर… तब असली गुदगुदी होगी।”
मैंने अपना मुँह लगा दिया। उन्होंने खुद अपनी उँगलियों से होंठ अलग किए और बोलीं, “चाट… जीभ अंदर तक डाल।”
मैं पागल हो गया। जीभ अंदर घुसाई – गर्म, चिकना, नमकीन-मीठा रस। clit ढूँढ़ी – छोटी सी गुलाबी गांठ जो पहले से ही कड़क थी। मैंने उस पर जीभ घुमानी शुरू की। उनकी साँसें तेज़, कमर ऊपर उठने लगी। वो खुद अपनी दो उँगलियाँ चूत में डालकर तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगीं।
फिर मेरे सिर को दोनों हाथों से दबाया और चिल्लाईं, “ऊपर… clit चूस… जोर से चूस!” मैंने गाउन पूरा ऊपर उठा दिया। भारी-भारी दूध बाहर। मैंने ब्रा के हुक खोल दिए। निप्पल्स गुलाबी, एकदम कड़क, जैसे दो चेरी। मैंने दोनों हाथों से उन्हें जोर-जोर से मसलना शुरू किया – निप्पल्स चुटकी में लेकर खींचे, मरोड़े। ऊपर होंठों से चूसता, दाँतों से हल्का काटता, और नीचे जीभ तेज़-तेज़ clit पर। “Hot Cousin Sister Fuck”
अचानक उनकी कमर एकदम ऊपर उठी, चूत मेरे मुँह पर रगड़ने लगीं, पैर मेरी पीठ पर कस गए। आवाजें निकलने लगीं – “हाय मार गई… आह्ह्ह… और जोर से… बस कर… आह्ह्ह… आ गया… आ गया रे!” पूरा शरीर काँप उठा, चूत से गर्म रस की तेज बौछार मेरे मुँह में। मैंने सब निगल लिया। फिर वो ढीली पड़ गईं, हाँफते हुए।
थोड़ी देर बाद आँखें खोलीं, शरमाते हुए मुस्कुराईं और बोलीं, “समझ आया ना… असली गुदगुदी कैसी होती है?”
मैं हाँफ रहा था, मुँह उनके रस से गीला। बोला, “हाँ दीदी… जिंदगी में कभी नहीं भूलूँगा।”
उसके बाद जितने भी दिन बुआ के घर रहा, हर रात “गुदगुदी” का खेल चलता रहा। कभी मैं घंटों उनकी चूत चाटता, clit चूसता, तीन उँगलियाँ अंदर डालकर जी-स्पॉट रगड़ता – वो चिल्लातीं, पानी छोड़तीं। कभी वो मेरे लंड को मुँह में लेकर गले तक ले जातीं, जीभ से तले चाटतीं, हाथ से हिलातीं और सारा माल निगल जातीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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कभी मैं उनके भारी दूधों के बीच लंड रखकर टाइटजॉब लेता – वो दोनों बूब्स को जोर से दबाकर ऊपर-नीचे करतीं, मैं उनके मुँह में झड़ जाता। कभी 69 की पोजीशन में घंटों लिप्त रहते – मैं उनकी चूत चाटता, वो मेरा लंड निगलतीं। कभी मैं उनकी गांड में जीभ डालता, वो सिहर कर चिल्लातीं।
सब कुछ आपसी रजामंदी से, बिना एक शब्द बोले – सिर्फ आँखों, साँसों, कराहों और रस से। फिर छुट्टियाँ खत्म हुईं, मैं घर लौट आया। पर मीना दीदी का वो स्वाद, वो गंध, वो गोरी जाँघें, वो भारी दूध, वो गी चूत की चमक और रस… आज भी जब याद आती है, लंड अपने आप खड़ा हो जाता है। अगली गर्मी जब गया तो दीदी की शादी हो चुकी थी… पर वो रातें फिर भी हुईं, और भी जोरदार, और भी गंदी।
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Goutam says
H koi ladies jo real m milna chati ho 98146cal75013