Group Sex Story Hindi
मेरा नाम नैना है। मै 40 साल की हूं और मेरे दो बच्चे हैं जिनकी मै शादी कर लाइफ मे सेट कर दी हूं। मेरी बेटी, दामाद कनाडा और बेटा बहु चेन्नई मे जॉब करते हैं और वहीं रहते हैं। मेरे पति दुबई मे रहते हैं और मेरा छोटा भाई भी वहीं उनके साथ रहता है। मै दिल्ली मे एक कमरे के घर मे रहती हूं मेरे साथ मेरी भाभी निर्मला और भतीजी खुशी रहती है। Group Sex Story Hindi
निर्मला की उम्र 38 साल है पर वो 30 साल की लगती है। खुशी 18 साल की है। हम सभी बिहार से हैं। मेरे पति और मै बहुत साल पहले अपने बच्चों को लेकर दिल्ली रहने आए थे और धीरे धीरे एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा ले उसपर दो कमरों का घर बनाया। आगे वाले कमरे मे मैने पार्लर खोल लिया तो बचा सिर्फ सीढ़ी और उसके नीचे थोड़ी जगह एक छोटा सा किचेन और बाथरूम और सबसे पीछे एक कमरा।
कमरा थोड़ा बड़ा है तो जितने भी लोग घर मे होते हैं जमिन पर आराम से सो जाते हैं। कहानी तब शुरू होती है जब मेरे पति की बहन की डेथ हो जाती है उनका एक 20 साल का बेटा ही था जो उनके जाने के बाद बहुत उदास रहने लगा था मेरे पति के जीजा भी अपनी पत्नी की डेथ के बाद उदास रहते थे। मेरे पति भी उनके साथ 3 महीने गांव मे ही रहे।
और वो अपने भांजे और जीजा को लेकर काफी उदास थे तो मै अपने पति को बोली कि आप जीजा को अपने साथ दुबई ले जाइए और अंशु को हमारे पास रहने दीजिए यहाँ हमारे साथ रहेगा, खुशी के साथ पढ़ने जाएगा तो उसका मन भी लग जाएगा। मेरे पति ने वैसा ही किया। अंशु जब शुरू शुरू हमारे साथ रहने आया तो वह बहुत उदास रहता था पर तीन-चार महीने में हमारे साथ घुल मिल गया।
हम सभी चारों लोग एक ही कमरे में सोते थे एक किनारे अंशु उसके बाद में उसके बाद मेरी भाभी निर्मला और उसके बाद उसकी बेटी खुशी सोती थी। अब मैं अपने बारे में बताती हूं मैं बिल्कुल भाभी जी घर पर है कि गुलफाम कली की जैसी लगती हूं। मेरा गुद्देदार शरीर है। और मैं ठीक-ठाक गोरी भी हूं। मेरा फिगर 38-34-40 है।
निमी मेरी भाभी वैसे है तो 38 साल की लेकिन कोई भी उसे 30 से ज्यादा का नही कह सकता। वो पतली स्लिम है और गोरी भी है,32D की चूचियों है30 की कमर उसकी और गांड 36की है। हमारे पति जब आते हैं तो जिसे सेक्स करना होता वो सीढ़ियों के नीचे जाकर सो जाते और सेक्स कर लेते थे चुप चाप।
अब अंशु को हमारे साथ रहते हुए अच्छा लगने लगा था वह हमसे घुल मिल गया था। एक दिन मैं और निम्मी पार्लर का कुछ सामान लाने गई थी तो बहुत देर ट्रैफिक में फांसी रहे और हमें पैदल भी बहुत देर चलना पड़ा जिससे हम दोनों ही काफी थक गई थी उस दिन। रात में खाना बनाकर हम खा लिए और लेट गए।
खुशी और अंशु एक कोने में पढ़ाई कर रहे थे। मै: आज तो काफी थक गई हूं! निमी: मैं भी दीदी काफी थक गई हूं। मै: ऐसा कर दर्द की दवाई ही दे दे। निमी: खुशी देख तो कहीं दर्द की दवाई है दो लेकर आजा।
खुशी: देखती हूं। नहीं है लगता है दवाई। निमी: तू ऐसा करो तू बुआ के पैर दबा दे। मै: नहीं खुशी तू पढ़ाई कर। अंशु: पढ़ाई खत्म हो गया मामी जी मै पैर दबा देता हूं आपकी खुशी छोटी मामी की पैर दबा देगी।
मै: भांजे से पैर नहीं दव बाते हैं बेटा जी। निमी: अंशु तुम मेरी कमर दबा दो खुशी अपनी बुआ के पैर दबा देगी। निम्मी पीठ के बल लेट गई और अंशु से बोली के पहले सिर्फ मेरी पीठ ही दवा दो मुझे नींद आ जाएगी।
खुशी मेरे पैरों से लेकर मेरे जांघों तक दबा रही थी। मेरी आंखें बंद हो गई थी। पर निम्मी ने जब धीरे से बोला यहां तो मै अपनी आंखें खोली। निम्मी अब साइड करवट लेकर लेटी थी, और अपने हाथ से अंशु के हाथ को पकड़ कर अपनी कमर पर रखती हुई कहती है यहां दबाओ।
अंशु उसके कमर को दबाने लगता है वो अंशु से अपने कूल्हे दबबा रही थी। थोड़ी देर में निम्मी पीठ के बल लेट जाती है और अंशु उसके पैरों को दबाने लगता है। निम्मी अपनी नाईटी को अपनी घुटनों से ऊपर कर ली थी अंशु उसके घुटने के पास दबा रहा था।
निम्मी अंशु को पैर दबाते हुए घूर रही थी और धीरे धीरे अपनी नाईटी घुटनो से ऊपर करती जा रही थी। अब उसने अपनी आधी जांघें नंगी कर दी थी उसकी नंगी गोर जांघें चमक रही थी। इससे पहले कि निम्मी अपनी नाईटी और ऊपर सरकाती मै बोल पड़ी।
मै: ठीक है अब रहने दो सो जाओ तुम दोनों। अंशु उठकर मेरी ओर आ गया और खुशी निम्मी की तरफ चली गई सोने। गर्मियों के दिन थे तो काफी गर्मी पड़ती थी हमारे घर एक कुलर था जो हम अपने कमरे के दरवाजे के सामने लगा देते थे।
अब कुछ दिन से निम्मी अंशु की साईड सो जाती थी मेरे आने से पहले ही। एक सुबह मै उठी तो निम्मी की गांड पूरी नंगी थी जो मेरी ओर थी। मै उसकी नाईटी नीचे की। अब कुछ दिन और नोटिस करी की निम्मी की नाईटी पूरी उठी हुई रहती थी।
एक सुबह उठी तो उसकी नंगी गांड अंशु के जांघों से थोड़ी ही दूर थी। मै उसे धीरे से जागते हुए बोली। की ये क्या है। तो वो बोली की हवा से हो जाता है दीदी। मेरी तो कभी नही हुई, कल से तू इधर सोएगी।
मै बोली। इधर ज्यादा हवा लगती है दीदी इधर ही सोने दो ना, वो बोली। ठीक है पर अपने कपड़े का ध्यान रखना। तू साड़ी पहन कर सोया कर,मै बोली। अगली रात निम्मी साड़ी पहन कर सोई उसने अपनी साड़ी नाभि से नीचे बांध रखी थी ये मैने तब नोटिस किया जब सुबह उठी तो देखी अंशु का दाया हाथ निम्मी के नंगे पेट पर है।
अब हाथ कैसे आया मुझे नही पता। मै धीरे से उसका हाथ हटा दी। मुझे ज्यादा शक निम्मी पर ही था, क्योंकि मेरे बगल मे अंशु सोता था तो हमारे बीच काफी जगह होती थी। अगली सुबह जब मै उठी तो वापस से देखी कि निम्मी अंशु से चिपकी हुई है और अपनी गांड वो पीछे कर रखी है।
सबसे पहले मै ही उठती हूं तो वो मै निम्मी को धीरे धीरे हिला कर जगाई और बोली कि ये कैसे सो रही है। अब मै उस पर नजर रखने लगी। एक रात जब मेरी नींद खुली तो देखी कि अंशु का हाथ निम्मी के बूब्स पर था निम्मी ने उसके हाथ के ऊपर अपना हाथ रख रखा था।
वो जगी हुई थी और शायद अपनी आंखें बंद कर मजे ले रही थी। मै पहले कन्फर्म करी की अंशु सोया है या नही। जब कन्फर्म हो गया कि वो सोया है तो धीरे से निम्मी के कान को खींची।
मै: तू चल इधर सो। मै उसे शर्मिन्दा नही करना चाहती थी इसलिए हल्की सी हंसी भी। वो भी हल्की सी हंसी और ना नुकर करते हुए मेरी तरफ आ गई। मैं उसकी हालत समझती थी 1 साल से उसका पति घर नहीं आया था वैसे चुदाई* किए हुए तो मुझे भी 1 साल से ऊपर हो गए थे पर निम्मी मुझसे ज्यादा जवान थी और उसके अंदर आंग भी मुझसे ज्यादा थी।
एक दोपहर जब हम दोनों पार्लर से काम खत्म कर कमरे में आती है तो मैं उससे पूछती हूं,बच्चे कॉलेज गए थे। मै: यह सब ठीक नहीं है निम्मी! निम्मी: क्या ठीक नहीं है दीदी! मै: वही जो तू रात में हरकतें करती है। तेरे बेटी के उम्र का है वह लड़का।
निम्मी: सॉरी दीदी मुझे माफ कर दो पर पता नहीं आजकल मुझे क्या हो गया है। मै: मैं समझती हूं निम्मी तू मुझसे ज्यादा जवान है । निम्मी: दीदी आज कल रात मे ये दर्द करती हैं लगता है इन्हें कोई दबाता रहे। आपको नही लगता।
मै: हट पागल गन्दी कही की। मै उसकी बातों पर हंसती हूं। अब कुछ समय मे मै नोटिस करने लगी कि निम्मी काफी सज संवर कर रहती है, जैसे कोई नई दुल्हन हो, वो सुन्दर तो खूब थी ही पर अब और जवान लगने लगी थी,और अंशु से मजाक भी अब वो खूब करने लगी थी।
उससे वो अब टची टची भी ज्यादा रहने लगी थी। एक दोपहर अंशु कमरे मे दीवाल के सहारे पीठ लगा पढ़ाई कर रहा था तो निम्मी उसके ठीक सामने वाली दीवाल के पास बैठी थी और उसने एक पैर फैला रखा था और दूसरे पैर को मोड़ कर अपने सीने का भार दे रखा था और पैरों मे नेल पॉलिश लगा रही थी।
मै ये तब देखी जब मै बाहर से कमरे मे आ रही थी मै दरवाजे के पास से ये देख रही थी निम्मी की साड़ी भी घुटने से ऊपर थी और अंशु उसके दोनो टांगों के बीच झांकने की कोशिश कर रहा था शायद निम्मी जानबूझ कर वैसे बैठी थी।
अंशु कभी किताब देखता तो कभी निम्मी की ओर। उसकी नजर जैसे ही मुझपर पड़ी वो किताब मे देखने लगा। मै कमरे मे आई निम्मी मुझे देखकर अपनी टांग सही करी जल्दी से और उठ गई, मै समझ गई ये जान बूझकर उसे अपनी टांगों के बीच दिखा रही थी।
मै अब समझ गई कि इसकी गर्मी शान्त होने वाली नही है अगर मैने इसकी गर्मी शान्त करने का जल्दी से कोई उपाय नही किया तो ये या तो अंशु को पटा उसपर कूद जाएगी या बाहर जा कुछ कर लेगी।
अगले दिन जब अंशु और खुशी कॉलेज गए थे मै और निम्मी पॉर्लर मे अकेले बैठी थी। मै: क्या बात है निम्मी आज कल तो तू और भी जवान होती जा रही है। निम्मी: ऐसा कुछ नहीं है दीदी। वो हंसते हुए बोली।
मै: नही, कुछ तो बात है। निम्मी: चलिए दोपहर मे कोई नही आने वाली, चलिए आराम करते हैं थोड़ी देर। वो हँसते बोली। वो कमरे मे चली गई और मै भी पार्लर बंद कर कमरे मे आ गई।
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मै जैसे ही कमरे मे आई तो देखी कि ये बाथरूम से निकल रही थी मै बाथरूम मे गई तो देखी इसने अपनी पहनी हुई गुलाबी रंग की सुंदर सी ब्रा बाथरूम मे टांग दी है और अभी वो एक सुंदर सा गाउन पहना हुआ है जो उसके घुटने से थोड़ा ही नीचे था।
ऐसे ड्रेस सिर्फ औरतें अपने पति के सामने ही पहन सकती है। मै समझ गई कि ये सब अंशु को रिझाने के लिए कर रही है। मै कमरे मे आई तो वो कुलर को सही कर रही थी।
मै पीछे से गई और उसे बाहों मे भर ली। निम्मी आह दी क्या कर रही है। मै अपनी बड़ी बड़ी चूंचियां उसके पीठ पर दबाने लगी और उसकी दोनों चूंची को अपनी हाथों में भर ली और उन्हें सहलाने लगी।
निम्मी: क्या कर रही हो दीदी । वो मुझसे छुटने की कोशिश करती हुई बोली। मै: तेरी चूंचियां बहुत दर्द करती है ना आज इसका सारा दर्द मिटा दूंगी। मै उसकी चूंचियों को जोर से मसलने लगी।
मै उसे अब नीचे बिस्तर पर लिटा दी और उसके ऊपर बैठ गई। वो हंसते हुए मुझसे छुटने की कोशिश कर रही होती है पर मेरी वजन से मुझे वो हटा नही पाती है।
मै: इतनी लिपिस्टिक तू किसके लिए लगाती है, मुझे नहीं पता! मै उसके होंठों पर होंठ लगा देती हूं और उन्हें चूसने लगती हूं। मैं उसकी दोनों चूचियों को गाउन के ऊपर से अपने दोनों हाथों से पकड़ लेती हूं और उन्हें कसकस कर मसलने लगती हूं।
निम्मी: क्या कर रही हो दीदी दर्द हो रहा है, आह आह। मै: तेरी सारी गर्मी निकाल दूंगी अब मैं नहीं तो तो तू मेरे भांजे को अपने आग में जला लेगी।
निम्मी मेरे दोनों हाथों को पकड़ लेती है और मुझे साइड में करने की कोशिश करती है मुझे लगाओ उसकी चूचियों में दर्द होने लगा तो मैं भी उसे छोड़कर ऐसे नीचे उतर जती हो और उसके बगल में लेट जाती हूं हम दोनों एक दूसरे की ओर मुंह किए हुए थे थोड़ी देर दोनोंचुप रहे।
निम्मी: दीदी अंशु है तो काफी मस्त जवान उसके भी जवान काफी मस्त है वह हंसते हुए बोली। मै: रैंड कहीं की तू नहीं सुधरेगी। मैं वापस निम्मी के दोनों चुचियों अपने हाथों से दबाते हुए बोली।
निम्मी ने भी मेरी दोनों बड़ी-बड़ी चूचियों पर अब अपना हाथ रख दिया और उन्हें कसकर दबाने लगी चूचियों को काफी दिन बाद किसी ने हाथ लगाया था तो मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया।
निम्मी इस बार मेरे होठों को अपने होठों भर ली और जोड़-जोड़ से उन्हें चूसने लगी। मुझे भी काफी अच्छा लगने लगा इस तरह से उसका चूसना मैं भी उसके होठों को चूसने लगी और उसके सारे लिपस्टिक को खा गई।
फिर धीरे से मेरा दाहिना हाथ उसके चूतड़ों पर ले गई और उन्हें दबाने लगी। उसने अपना टांग मेरी कमर पर चढ़ा दिया था जिससे उसकी बर मेरी कमर पर गाउन के ऊपर से टच हो रही थी और उसे शायद मजा आने लगा था अपनी बर को मेरी गुदेदार जांघों से रगड़ना तो वह उस बार-बार आगे पीछे कर अपनी पुसी को रगड़ रही थी।
हम दोनों एक दूसरे की चूचियों को दबा रहे थे मैं उसके गांव को थोड़ा ऊपर कर उसके कमर पर कर दी थी और उसकी पैंटी में पीछे से हाथ डाल उसके गांड को भी अपने एक हाथ से दबा रही थी और हम दोनों एक दूसरे के होंठ भी कस रहे थे। “Group Sex Story Hindi”
कुछ देर में शायद वो झड़ गई और बहुत तेज सांस लेते हुए शांत होने लगी। आप सोच रहे होंगे कि यह मेरा पहला किसी महिला के साथ लेस्बियन सेक्स का मौका था पर ऐसा नहीं है मैं अपने जवानी में बहुत कुछ कर चुकी ह हालांकि उसे लेस्बियन सेक्स नहीं कहेंगे और ना ही इसे लेस्बियन सेक्स कहेंगे पर महिलाओं के साथ में दो-तीन बार और भी ऐसा मेरा एक्सपीरियंस हो चुका है जिसमें मेरी सगी बड़ी बहन और मेरी जेठानी शामिल है.
इस तरह मेरा और निम्मी का एक दूसरे को संतुष्ट करने का किस्सा शुरू हुआ था हालांकि उसे दिन उसने मुझे संतुष्ट नहीं किया था और ना ही मुझे उसकी जरुरत लगे थे पर उसे दिन के बाद में मेरे साथ काफी खुल गई थी इन सब चीजों के लिए और वह अब अंशु के साथ उतनी हरकतें भी नहीं करने लगे थे बस धीरे-धीरे में और नेमी जब दोपहर में कोई नहीं होता तो एक दूसरे की चूचियों को दबते रहते थे और धीरे-धीरे में उसकी बुरे भी अपने हाथों से रगड़ने लगी थी और वह मेरी बर अपने हाथों से रगड़ देती थी जिससे हमें कुछ दिन के लिए तो शांति मिल गई थी।
फिर एक बार हुआ ऐसा था कि मुझे यह आइडिया आया था कि आज सुनने में को कोई खीर उसके बुर में डालकर उसे मजा देता हूं तो दोपहर में जब दोनों बच्चे कॉलेज गए हुए थे तो हम दोनों नाइटी में थे और एक खरे क लेकर हम दोनों उसे थूक लगा लगा कर उसे खेल रहे थे कभी वह उससे मेरी दोनों चूचियों के बीच रख देती कभी मैं उसे खरे को उसकी दोनों चूचियों के बीच रख देती फिर हम दोनों पूरे नंगे ह गए और काफी देर उसे खरे को अपने मुंह में लेकर चूसते कभी एक दूसरे की बुर पर रगड़ते थोड़ी देर बाद मैंने उसे खरे को नियमित की पूसी में थोड़ा सा घुस आया फिर मम्मी ने भी थोड़ी देर बाद उसे मेरी पूसी में घसा दिया मुझे इतना मजा आया था कि मैं बात नहीं सकती हालांकि खीरा ज्यादा मोटा हमने नहीं लिया था।
खीरा मीडियम से पतला ही था लेकिन था थोड़ा लंबा। हम काफी देर तक उसे खरे को एक दूसरे की पूसी में डालकर हिलाते रहे उसके बाद में मैंने मुझे लिटा दिया और उसे खरे को मेरे पूसी में डाल दिया और मेरी टांगें फैला कर आधे खरे को अपने पूसी में डाल लिया और मुझ पर लेट गए और मेरी चूचियों से खेलते हुए उसके पर कूदते हुए हम एक दूसरे की पूसी को मजा देने लगे आधी खीरा उसके पूसी में था और आधा मेरी पसी में मुझे तो काफी मजा आ रहा था और निम्मी के बच्चे मुझसे ज्यादा ही टाइट होगी तो उसे खीर उसके पूसी में अटक जाता था जिससे जब ऊपर से धक्के मारती तो मुझे कफी सेंसेशन होता था जैसे मेरी चुदाई ही हो रही हो किसी कड़क लंड से।
ऐसे ही खेलते हुए काफी देर हो गई कि बाहर दरवाजे पर खटखटाया किसी ने हम दोनों जल्दी से एक दूसरे से अलग हुए और कपड़े पहने और दरवाजा खोलने में चली गई दरवाजे पर हमारे बच्चे आ गए थे वह शायद आज कुछ देर पहले ही आ गए थे निमी बाथरूम में चली गई थी। बच्चे अंदर गए अंशु सीडीओ के नीचे आकर अपना ड्रेस चेंज किया, खुशी कमरे में अपना एड्रेस बदली और नमी के निकलने के बाद में बाथरूम में गए मैं बाथरुम से बाहर आई तो अच्छी की अंशु ने वही जो कीड़ा हमने अभी अपने गुस्से में डालकर इस्तेमाल किया था उसे उठा लिया था हम दोनों जल्दबाजी में खीरे को वहीं छोड़कर कपड़े पहनकर दरवाजा खोलने के लिए चले गए थे अंशु के हाथ में बोखरा देख मैं निम्मी को ढूंढने लगे वह किचन से बच्चों को लिए खाना निकाल कर ले और उसने भी अंशु के हाथ में वह खीरा देखा।
अंशु के हाथ में बखिरा देखने में मेरी और देखी और मैं निमि की और देखी। मै: लाओ में धो कर दे देती हूं। अंशु: नहीं कोई बात नहीं मामि मैं ऐसे ही खा लूगा! इतना बोलकर अंशु ने उसे खरे को बीच से तोड़ दिया और एक भाग खुशी की और दिया और दोनों ने उसे बिना छिले हैं खाना शुरू कर दिया अनुमिन उनके सामने थाली परोसती और बहुत दोनों बैठकर खाने लगे और खाना खीर भी हो दोनों खा रहे थे।
खुशी: कुछ अजीब टेस्ट नहीं लग रहा है खीरे का। अंशु: हां लग रहा तो है पर टेस्ट थोड़ा अच्छा लग रहा है। निम्मी: आजकल बहुत सारे केमिकल वाले खेती करते हैं लो दूसरा खीर देता हूं बोल मत खाओ धोकर दूसरा खा लो। अंशु: नहीं मामी अच्छा ही लग रहा है । वह दोनों वही खीरा खा जाते हैं और मै और निम्मी जब मेरे साथ पार्लर में आती है तो मुझे देख कर हंसती है हम दोनों ही थोड़ा-थोड़ा हल्के हल्के हंसती हैं। “Group Sex Story Hindi”
उसके बाद बच्चों के कॉलेज में एक महीने की गर्मी की छुट्टियां हो जाती है तो बच्चे सिर्फ शाम मे टयूशन हीजाते हैं। कुछ दिन तो निम्मी ने ऐसा बर्दाश्त कर लिया क्योंकि बच्चे घर पर रहते थे तो हम लोगों को चेक करने काम होगा नहीं मिलता था पर 10 दिन बाद से वह रात को ही मेरी चूचियों को पीछे से दबाने लगती थी और वह भी मुझे गलती की मैं भी उसकी चूचियों को अंधेरे में दबाव और बिना आवाज कर रात में एक दूसरे की पूसी को सलाहकार शांत करु।
पर मैं ऐसा नहीं करने वाली थी क्योंकि दोनों बच्चे हैं अकाल बकलोल सोते थे अब फिर से अंशु के साइड सोई थी और पीछे से वह मेरी चूचियों को अपना हाथ हो स रात में दबने भी लगती थी दो-तीन रात उसने मुझे ऐसे ही परेशान किया और मेरी बुरे भी पीछे से रगड़ रगड़ कर झाड़ देती थी पर मैं कुछ भी नहीं करती थी बच्चों के डर के कारण।
फिर दो तीन रातों के बाद वह मेरी जांघों से अपनी पूसी को रगड़ती थी अपना गाउन वह पूरी तरह से ऊपर उठा लेती और मेरी जांघों पर उसे रखती रहती थी मुझे तो उसका एक रूप देखकर कभी-कभी काफी डर लगता था कि वह अब इतनी गरम होने लगी थी रात में कि मैं कुछ बात नहीं सकती। तो उसकी हरकतें देखते हुए मैं भी उसे हल्के हल्के उसकी पूसी को रात में सला देती थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
कुछ दिन में बच्चों की छुट्टियां खत्म हो गई तो फिर हमारा दिन में काम शुरू हो गया। पर अब वह रात में भी कभी-कभी मेरी चूचियों को पीछे से दबाने लगती थी। एक सुपर नानी ने मुझे हल्के से जगाया मैं उठी तो अंशु और खुशी दोनों अपनी जगह पर सो रहे थे मम्मी ने मुझे धीरे से इशारा करते हुए अंशु के पेंट के ऊपर देखने को।
मैं उधर दिखी त अंशु का लंड उसके पैंट के अंदर जोर-जोर से ठुमके मार रहा था कुछ 10 ठुमके उसने मारे मेरे सामने अंशु पूरी तरह नींद में था सुबह के 5:00 या 6:00 होंगे। हिंदी में धीरे से हंस रही थी और मेरे कान में बोलती है कितना मस्त लग रहा है न ठुमके मारता हुआ बार-बार अंशु का पेट थोड़ा ऊपर होता फिर नीचे चला जाता और फिर ऊपर आता उसके बाद उसके पेट पर गिला गिला दबा होने लगा मैं समझ गई कि उसे नाईट फॉल हो रहा है।
मिनी धीरे से हंसती है और मुझे करती है कि देखिए बेचारे की जवानी पेट में बर्बाद हो रही है आपको उसे पर तरस नहीं आती है मैं भी हंसती हो और किसी से धीरे से करती हो कि पागल है क्या क्या बोल रही है। अंशु का पेंट धीरे-धीरे गीला होने लगता है और उसका पेनिस अभी भी ठुमके मार मार कर रा को बाहर रहा था शायद उसने पेट के अंदर छुट्टी नहीं पहनी थी और वह भाई करवट लेता था जिससे पेट से उसका रस थोड़ा उसकी जाघ हो की और भी जाने लगा था और पैट से भी बहने लगा था।
उसके जांघों से अपना हाथ लगती है और उसके रस को अपने हाथों में लगा लेती है और मेरी और अपना हाथ उसके रस से गिला कर करती है और मुझे सुनने बोलती है मैं उसका हाथ दूर करती हूं। मैं उसे करती हूं धीरे से की पागल है क्या उठ जाएगा वह क्या सोचेगा पर बहुत और भी उसके जांघों से और उसके पेट से अपने हाथ को और गिला करती ह और अपने हाथों में उसे लगाकर अपने नाक के पास ले जाकर सूंघती है फिर वह अचानक से अपने हाथ को मेरे होठों पर रख देती है जिससे अंशु का स्पर्म निम्मी मेरे नाक होठों से लेकर नीचे तक लगा देती है मैं हल्के से उसके पीठ पर मरते हुए बाथरूम की ओर जाती हूं और खुद का मुंह साफ करती हूं।
मैं बाथरूम में उसके बाद पोटी भी करती हूं और फ्रेश होकर कमरे में आती हो तो दरवाजे पर से देखती हूं कि। अंशु और निम्मी आमने-सामने एक दूसरे से चिपके हुए हैं और एक दूसरे के होठों से होंठ को लगाए हुए हैं और दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर रखा है खुशी दूसरी मुँह कर अभी भी सो रही थी।
मुझे दरवाजे पर देख दोनों ही हरभरते हुए एक दूसरे से अलग होते हैं मैं निम्मी को आंखें दिखाती हूं प्रभु मुझे बिना नजरे मिला है बाथरूम में चली जातीहै। और अंशु भी बिना मुझसे नज़रे मिला है सीढ़ी कि ओर भागता है। मुझे काफी गुस्सा आता है दोनों पर मैं भी अंशु के पीछे जाती हूं वह छत पर जाता है तो मुझे देख कर तो वह वैसे ही डर जाता है,। “Group Sex Story Hindi”
मैं उसे डांट भी देता हूं कि क्या कर रहा था वह तुम्हारी मामी है ऐसे क्या तू मेरे साथ भी ऐसा करेगा तुझे शर्म नहीं आती बहुत कुछ नहीं बोलता है मैं उसे पूरी तरह से डांट कर झुक जोर देती हूं वह दीवार के पास खड़ा होकर मूर्ति की तरह वहीं खड़ा रहता है फिर मैं नीचे चली आती हूं।
खुशी उसके बाद जागती है और वह काम में लग जाती है फिर मैं भी अपने काम में लग जाती हूं मैं निमेष से बिल्कुल भी कुछ नहीं कर रही थी और नहाने में मुझसे नज़रे मिला रही थी। काफी देर तक अंशु को मैं छत से नीचे आते नहीं देखते हो तो मैं वापस से छत पर जाती हूं वह वहीं पर खड़ा था जहां मैं उसे छोड़ कर गई थी।
उसकी आंखें रोने से लाल हो गई थी। मेरे ऊपर जाते हैं वह दूसरी और मुंह कर लेता है और अपने आंसुओं को पहुंचने लगता है मैं उसका चेहरा अपने और घूमते हू। मैं अपना गुस्सा थोड़ा शांत करती हूं । मुझे उस रोता देख खुद बुरा लगता है और मैं उससे मानने लगती हूं उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में थाम उसके आंसू पहुंचने ही हूं और उसे चुप करते हूं और उसे छोड़ने के लिए और हंसाने के लिए बोलता हूं कि कोई बात नहीं जवान हो गया है तू तेरी शादी करनी पड़ेगी।
मैं उसके सर को अपने सीने पर रख कुछ देर उसके बालों में उंगलियां फिर आता हूं और उसके गालों को थपथपाती हूं तब जाकर बहुत थोड़ा शांत होता है और उसे हंसाने के लिए उसके गाल खींचते हुए बोलते भी हो कि जवान हो गया है तो तो। अब मैं उसे करती हूं की जा कॉलेज भी जाना है तैयार हो जो वह नीचे जाने के लिए मुझसे दूर होता है तो मैं देखते हो कि इसका पेंट दो पूरा इसके रस से गिला हो गया था जिसका दांत इसके पूरे पेट पर लगा हुआ है मैं उसे रोकती हूं और हंसते हुए पूछता हूं कि यह क्या है किसके सपने देख रहा था तू।
वह हंसते हुए शर्मा जाता है फिर मैं उसे करती हूं कि तू यही रूप में टावर लाकर देतीहूं । मैं उसे छत पर ही रोक कर टॉवल लेकर ऊपर जाने लगते हो क्योंकि मुझे पता था कि नीचे खुशी भी होगी वह उससे कहा गीला पेंट देखेगी तो क्या सोचेगी फिर मैं उसे टावल लाकर ऊपर देता हूं।
उसके बाद में पार्लर में थी और मैं नीचे जाकर सबके लिए ब्रेकफास्ट बनाती हो और बच्चे ब्रेकफास्ट कर कॉलेज चले जाते हैं उसके बाद में भी नहीं में से उतना नहीं बोल रही थी और करने में भी मुझसे नज़रे चुरा रही थी उसे दिन दिन भर हम दोनों ने कुछ भी बात नहीं करी।
उसके बाद रात में जब सब एक साथ हुई त अंशु और मैं पूरा अलग बिहेव कर रहे थे कोई एक दूसरे से बात नहीं कर रहा था तो खुशी को कुछ मत पता लगता है तो वह पूछता है कि क्या हुआ आज आप तीनों कुछ बात ही नहीं कर रहे हो। मैं उसे टाल देती हूं फिर हम सभी सो जाते हैं।
अगले दिन मै निम्मी में से बात करने की कोशिश करती हूं पर वह मुझसे बात नहीं करती है वह कुछ भी नहीं बोल रहे थे और ना है कुछ जवाब दे रही थी मेरी बातों का। दोपहर में भी जब सोने के लिए मैं कमरे में आती हूं तो नेमी पार्लर में ही रहती है उसके बाद बच्चे आ जाते हैं और वह उन्हें मैं खाना देता हूं फिर भी निम्मी पार्लर में नहीं रहती है उसके बाद खाना खाकर खुशी सो जाती है मैं अंशु से थोड़ी बातें करते हो और खाना लेकर मैं के लिए पार्लर में ही आ जाती हूं। “Group Sex Story Hindi”
मैंने कुछ भी नहीं बोल रही थी वह खाना खा लेती है पर चुपचाप ही रहती है मैं वापस घर में आता हूं और बोलता हूं धीरज से अंशु को की मन में तुम्हारे नाराज है फिर मैं और अंशु पार्लर में आते हैं। अंशु अपने मामी को मना लो वह नाराज हो गई है अंशु निम्मी के पास जाता है पर वह कुछ भी नहीं बोलती है बस कुर्सी पर बैठे रहती है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
कैसे मैं मनाऊं मन में मुझे तो किसी को मनाना भी नहीं आता अंशु बोलता है। मैं और अंशु निम्मी केअगल-बगल खड़े थे। मैं अंशु के दोनों हाथ को पकड़ कर निम्मी के दोनों चूचियों पर रख देती हूं और उन्हें दबा देती हूं। ऐसे मनाया जाता है मामी को मैं बोलती हूं अंशु जल्दी से अपने दोनों हाथ को नेमी की चूचियों पर से हटा लेता है और निम्मी भी शरमाते हुए मुझे देखती है फिर अपने पल्लू से अपनी दोनों चूचियों को ढकती है और हल्के हल्के मुस्कुराने लगती है मैं वापस से अंशु का एक हाथ पकड़ कर नेमी के ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों में घुस आता ह।
निम्मी उसके और मेरे हाथ को अपनी चोली से निकलती है फिर मैं उसका सर पीछे कर उसके हठों पर अपनी उंगलियां फिर आते हो और उसके गाल पर अपने दांत को लगा देती हूं। उसके बाद वो हंसने लगती है और फिर हम तीनों ही धीरे-धीरे हसने लगते हैं और थोड़ी देर और भी बातें करने देती हूं।
फिर मैं उन दोनों को कहता हूं कि निर्मित देखा तुम्हारा मन है तो तुम दोनों कर भी सकती हो कुछ लेकिन सब अपने निमित्त याद रखना और यह लौंडा भी जवान हो गया है तुम्हारा भांजा लो इसे संभालो मैं निम्मी की गोद में अंशु को धक्का देकर बिठाते हुए बोलती हूं।
पर मैं उन्हें समझा भी देती हूं कि ऐसा ही कुछ करना कि किसी को पता ना चले और बदनामी ना हो और यह भी ध्यान रखने के घर में एक जवान लड़की भी है उससे ना पता चले।
उसके बाद कुछ दिन तो निमि शांत रही पर धीरे-धीरे में नोटिस करती की वो हमेशा अंशु की तरफ ही सोती थी और रात में कभी उनके चूमन की आवाज में मेरी कान तकआई थी। मैं दूसरी और मुंह करके सोते थी। एक बार रात में मेरी नींद खुली तो वह दोनों जैसे सदियो के बिछड़े हुए प्रेमी की तरह एक दूसरे को बाहों में भरकर सोए हुए थे निम्मी ने अपने टांग उसके कमर पर चढ़ाई हुई थी और उसने घुटनों तक की गाउन पहनी थी जो उसकी कमर तक हो गई थी और अंशु की एक टांग उसके दोनों टांगों के बीच थी और अंशु ने अपना हाथ उसके पेट पर रख रखा था और निम्मी ने अपना हाथ उसके पीठ पर रख रखाथा।
मैं धीरे से निम्मी को हीलाते हुए जगाई थोड़ी देर में उठी और मैंने नोटिस किया कि उसने गाउन के ऊपर के दो बटन खोल रखे थे शायद वह अपने चूचियां अंशु को पिला रहे होगी मैंने उसका कान खींचते हुए धीरे से कहा कि ऐसे सोते हैं अगर खुशी देख लेती तो क्या होता फिर वह सही से सो जाती है।
वह दोनों किस तो कर ही रहे होंगे और मेरे पीठ पीछे एक दूसरे को पूरी तरह टच भी कर रहे होंगे पर मैंने कभी यह नोटिस नहीं किया कि उन्होंने सेक्स भी किया होगा। धीरे-धीरे ठंड का मौसम आया और एक रजाई में मैं और अंशु पहले सोते थे। पर अब एक रजाई में अंशु और निम्मी सोते थे और मैं और खुशी एक रजाई मेंसोते थे। और ऊपर से एक पतला सा कंबल जो की बहुत बड़ा था उसे हम चारों खुद के ऊपर डाले हुए रहते थे।
ठंड की शुरुआत में ही जब हल्के ही ठंड आई थी तब से ही मैं नोटिस करने लगी कि निम्मी और अंशु काफि चिपक कर सोते हैं और पतला चादर उसे समय डालते थे । एक रात जब सर्दियों की शुरुआत ही हुई थी तो खुशी ने मुझे जगाया और उसने पूछा की मम्मी कहां गई मैंने अपनी बगल में देखा तो नेमी और अंशु दोनों गायब थे मेरे बगल से मेरा तो माता तनक गया फिर भी मैंने खुशी से बोला कि शायद पार्लर में गई होगी कोई रात में क्लाइंट आई होगी पार्लर करवाने के लिए इमरजेंसी में तो ऐसा बोलने पर खुशी वापस लेट गए वह शायद बाथरूम से आई थी।
मैं बाहर गई और कमरे का दरवाजा सट्टा दी और बाहर का दरवाजा खोलने के लिए सीडीओ के पास गई। तभी सीडीओ के आधे दूरी पर जहां मिड लैंडिंग होती है वहां से कुछ आवाज आ रही थी मैं ऊपर की ओर देखी तो अंशु का पेंट उसकी कमर से नीचे था और नेमी ने अपना ब्लाउज खोल रखा था और उसके कड़क पेनिस को अपनी चूचियों के बीच वह दबे हुई थी और वह उससे मुंह में भी ले रही थी मैं तो यह नजारा देखकर शॉक ही हो गई।
मैं एक सीधी और ऊपर चढ़ी तो उन्होंने मुझे देखा और जल्दी से अपने कपड़े सही करने लगे। वह मुझे देख घबरा गए थोड़ी देर के लिए पर नेमी ने जल्दी से अंशु के पेनिस को पकड़ कर उसके पेट में डाल दिया और अंशु ऊपर छत की और चला गया और नेमी वहीं पर मुझसे नज़रे चुराते हुए अपना ब्लाउज पहनने लगी।
मै: तू क्या पागल हो गई है खुशी भी जगी हुई है उसने अगर देख लिया होता तो क्या होता हो सकता है उसने देखा ही लिया होगा अभी वह बाथरुम से कमरे में गई है। निम्मी कुछ नहीं बोलती मैं भी उससे ज्यादा कुछ नहीं कहती और कहती हूं कि चुपचाप नीचे आओ उसे लेकर और सो जाओ।
मैं कमरे में जाकर अपनी जगह लेट जाती हूं थोड़ी देर बाद वह दोनों भी नीचे आते हैं और अपने-अपने जगह लेट जाते हैं। पर थोड़ी देर बाद में उनकी और करवट बदलता हूं तो देखते हो कि वह दोनों पतली रजाई के अंदर पूरी तरह एक दूसरे से चिपक कर सोए हुए हैं मैं उन्हें फिर कुछ नहीं बोलती हूं।
अगले दिन महीने को पार्लर में जब अकेली होती है तो उसे करती हूं कि तो क्या पागल हो गई है अगर तुझे इतना ही उसके साथ सेक्स करना है तो एक काम कर मैं खुशी को लेकर बाजार चली जाती हुं , दो-तीन घंटे के लिए तुझे जितना मन हो उतना कर ले। इस पर निम्मी काफी खुश हो जाती है और मुझे गले लगा कर करती है कि ठीक है दीदी लेकिन कल आप जाना।
अगले शाम में खुशी को लेकर मैं मार्केट चली जाती हूं उसके बाद हम फिल्म देखना भी चले जाते हैं और इधर नेमी पार्लर बंद कर लेती है उसके बाद 9:00 में और खुशी थोड़ी शॉपिंग कर सबके लिए बाहर से ही खाना लेकर घर पर आते हैं। घर पर आता हूं तो दरवाजा खोलना निम्मी आती है वह पूरी अस्त-व्यस्त थी मैंने उससे पूरे 5 घंटे के लिए छोड़ दिया था अंशु के साथ अकेले कमरे में आता हूं तो अंशु कपड़े पहन कर लेटा हुआ था शायद खूब मेहनत करवाई थे निम्मी ने उससे।
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निम्मी के चेहरे पर एक अलग ही खुशी और सेटिस्फेक्शन दिख रहा था उसके कपड़े अस्त व्यस्त थे फिर कुछ देर में वह नहा कर कमरे में आती है तो फिर सब मिलकर खाना खाते हैं। मैं थोड़ी थक गई थी मार्केट में ही चलते-चलते तो खुशी मुझे कहती है कि बुआ लाओ मैं आपके पैर दबा देती हूं।
इतने में नेमी बोलती है कि हां तुम बुआ के पैर दबा दो और अंशु की भी तबीयत भी सुस्त लग रही है आओ अंशु में तुम्हारे पैर दबा देती हूं। अंशु पहले तो मन करता है शरमाते हुए पर नमिया उसके पजामी को निकाल देती है वह सिर्फ शॉर्ट्स में था की में उसके पूरे पैरों की मालिश करती है मैं देख रही थी वह जांघों तक मालिश कर रहे थे फिर उसके बाद वह उसके पीठ और सीने पर भी मालिश करती है पर वह दूसरी और मुंह किए हुए थे और खुशी मेरे और मुंह किए हुए थे तो खुशी ऐसा नहीं देखी होगी और निम्मी को लगा होगा कि कोई नहीं देख रहा है उसे कहां-कहां वह मालिश कर रही है पर मैं अपना चेहरा पलट कर पीछे देख रही थी।
उसके बाद सभी सो जाते हैं। रात मैं निम्मी की और ही मुंह कर लेटी थी तो मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि निम्मी अंशु के ऊपर चढ़ी हुई है और उसकी कमर भी थोड़ी हरकत कर रही है उसका चेहरा भी बाहर था और वह उसके बालों को सहलाते हुए उसके माथे और होठों पर चूम रही थी मेरा भी चेहरा बाहर था मैं समझ गई की वो सेक्स कर रही है क्योंकि उसके कमर ऊपर नीचे हो रहे थे।
वह अपनी कमर को काफी धीरे-धीरे ऊपर नीचे कर रहे थे उसकी सिसकारी भी है हल्की-हल्के निकल रहे थे और अंशु भी सीसक रहा था वह दोनों एक दूसरे के होठों को चूम रहे थे। उसके बाद में अपनी आंखें बंद कर लेती हूं मुझे धीरे से सुनाई देता है आई लव यू मामि। “Group Sex Story Hindi”
सुबह जब फिर मेरी नींद खुलती है तो रचाई के अंदर और वह दोनों चिपक कर सोए हुए थे मैं निम्मी को धीरे से उठाती हूं। उसका ब्लाउज पूरा खुला हुआ उसकी बाहों से लटक रहा था और उसकी दोनों चुचियों बाहर थी वह अपने ब्लाउज के बटन को लगते हैं मैं उसके गाल को खींचते हुए कहती हो क्या कर रहे थे तुम रात में मैं धीरे से उसे हंसते हुए पूछती हूं।
तू मुझे अपनी चूची दिखाकर रहती है कि देखो कितना प्यासा है पूरा लाल कर दिया है इसमें मैं उसकी दोनों चूचियों को गौर से देखते हो और छाती पर भी देखती हूँ चूस चूस कर लाल कर दिया था अंशु ने मैं उसे धीरे से कहती हूं तू ने ही चुस्वाया होगा।
फिर हम दोनों रजाई में एक दूसरे के सामने लेट जाते हैं और वह मुझे धीरे-धीरे बताने लगते हैं कि बहुत मजा आया उसे इतना बड़ा है वह सब फालतू फालतू बातें बताने लगते हैं मैं उसके मुंह कौन बंद करते हो और करते हो थोड़ी देर और सो जा चुपचाप तुझे शर्म नहीं आती है बगल में मैं थी और तुम्हारी खुद की जवान बेटी भी है।
पर वो हंसते हुए इन बातों को टाल देती है और कहती है कि बहुत मजा आया । बहुत-बहुत दोनों रात में मेरे पेट के पीछे ही सेक्स कर लेते थे क्योंकि मैं थोड़ी मोटी हूं तो मिनी और अंशु क्या कर रहे हैं मेरे पीठ के पीछे एक खुशी को इतनी अच्छी से दिखाएं तो नहीं देता होगा पर जैसा कि मेरी कानों तक कभी-कभी सिसकी की आवाज आ जाती है उसके कान् तक भी चली ही जाती होगी।
पर शायद से अभी सुनी नहीं होगी ऐसा कुछ क्योंकि उसने कुछ भी बोल नहीं था और ना ही कुछ उसने ऐसा व्यवहार किया था अलग। अंशु और नेमी दोनों पतले पतले थे तो दोनों जब एक दूसरे के ऊपर चढ़ भी जाते थे तब भ मेरी चौड़ाई और मोटी की बराबरी नहीं कर सकते थे।
दोनों अब रेगुलर ही ऐसा करने लगे शुरू शुरू में तो मैं निम्मी को मना किया उसे समझाया की पीठ पीछे रात में ऐसा ना करें पर वह हां तो कर देती हो उसे टाइम पर तीन चार या पांच रातों के बाद फर वह दोनों करने लगते। मैं भी कुछ दिन में बोलना छोड़ दिया जिस के बाद एक दिन तो वह दोनों मेरी कमर के बिल्कुल पास ही मेरी पीठ से सटे हुए थे और सेक्स कर रहे थे ज्यादातर टाइम हमेशा नेमी ही अंशु के ऊपर होती थी इस महीने नोटिस कर लिया था।
तो उसे रात जब वह दोनों अपनी हरकतें कर रहे थे तो दोनों मेरे पीठ के सात गए उनके नंगी कमर से लेकर जान तक मेरी कमर से लेकर गांड तक फट रही थी और उनके बाजू भी मेरी पीठ से सात रहा था मम्मी कूद रही थी। मैं ज्यादा खुशी की तरफ भी नहीं सड़क सकती थी नहीं तो खुशी और निम्मी की हरकतों की बीच की दूरी काफी कम जाति और खुशी को भी उनकी थोड़ी बहुत अभाज्य सुनाई पड़ जाती।
मैं अपने कोने से निम्मी को मारती हूं तो बहुत थोड़ा दूर होती है फिर वह अपना हाथ मेरी चूची पर रख देती है और उसे दबाती है मैं उसका हाथ हटा देता हूं फिर वह मैं अपना हाथ मेरी कमर पर भी रख देती है जिसे मैं दोबारा हटा देता हूं उसके बाद वह दोनों फिर से अपने काम में लग जाते हैं। “Group Sex Story Hindi”
अंशु के साथ मिलकर तो नेमी मुझे तो बिल्कुल ही भूल गई थी उन दोनों को सेक्स करते देखा हर रात मेरी पूसी गीली होती थी पर मैं कुछ नहीं कर सकती थी। उसे सुबह जब मैं उठी तो मेरी कमर पर नेमी का हाथ था मुझे लगा कल रात के बाद उसे मेरी याद आने लगी है ।
तो मैं उसके हाथ क अपने और खींचती हूं फिर हो भी मुझे पीछे से जो करती है और मेरी चूचियों को सहलाती है फिर मैं उसकी और मुंह करती हूं और करती हूं कि आखिर याद आ ही गई मेरी। रजाई के अंदर से वह मेरी दोनों चूचियों को कस कर नहीं छोड़ती है मैं उसकी चूचियों की और हाथ पढ़ते हो तो देखती हूं कि वह ऊपर से पूरी नंगी है और उसकी दोनों चूचियां नंगी मेरे हाथ में आ जाती है मैं उससे कहती हूं कि एक नंबर की तू हो गई है ऐसे सोते हैं खुशी कभी देख लेगी तो क्या कहेंगे इस पर वह मेरे चूचियों को जोर से दबाती है और धीरे से हंसती है।
कुछ दिनों बाद सुबह जब मेरी नींद खुलती है तो मेरी चूचियों पर किसी का हाथ होता है मुझे लगा कि आज भी नहीं में कहीं हाथ होगा तो मैं उसे रहने देती हूं और टाइम देखते हो तो अभी पांच ही बजे थे। मैं खुशी की और मुंह कर लेती थी और पीछे से मुझे शायद नहीं मिलने पकड़ रखा था फिर कुछ देर बाद मुझे मेरी गांड पर कुछ चुकता हुआ महसूस होता है मैं पीछे पलट कर देखती हूं तो अंशु होता है जिसका मॉर्निंग उठ मेरी गांड में चुभ रहा था और उसका हाथ मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों पर था जिसे मैं जल्द से हट्टी हूं वह नींद में ही था पर आज उसने पहली बार मेरे चूचियों पर हाथ रख दिया था और यह हुआ इस वजह से की नियमित शायद रात में उसे तरफ सो गई और मेरे बगल में अंशु को सुला दिया।
फिर उसे रात को जब मैं खुशी की और करवट कर लेती थी तो मेरी पेट के पीछे आज भी नेमी और अंशु ने हरकतें शुरू कर दी फिर मेरा गांड पर एक हाथ आया और वह मेरे मोटी गांड को दबाने लगा पहले तो मुझे लगानी नहीं है तो मैंने कुछ नहीं किया और चुपचाप लेटी रहे फिर उसका हाथ मेरी पेट पर आ गया और नंगी पेट पर से उसका हाथ सीधा मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों की तरफ गया फिर मैंने नोटिस किया कि एक नेमी का हाथ नहीं ह यह अंशु का हाथ है मैं जल्दी से उसके हाथ को हटाए और उसके तरफ पलट कर उसके गाल पर एक थप्पड़ लगा दी यह सब मेरे से इतनी जल्दी में हुआ कि मुझे कुछ समझ नहीं आया अंशु के दाएं और लेती थी और उसने अपने एक टांग उसके कमर पर चढ़ाई हुई थी।
मेरे एक थप्पड़ की वजह सें निमी और अंशु दोनों शौक हो गए। मैंने हल्के स अंशु को डांटे हुए कहा कि यह क्या हरकत है ज्यादा ही झूठ मिल गई है तुमको यह मैंने काफी धीरज से बोल अंशु को ने में ने अपने सीने से लगा लिया फिर कुछ देर बाद उसके शिक्षक ने की आवाज आने लगे तो शायद नहीं मिलने उसके मुंह पर अपना हाथ रख दिया हगा मैं उठकर बाथरूम चली गई थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं बाथरुम से कमरे में आई तो देखिए कि अंशु को निमित्त चुप कर रही है वह उसे अपने सीने से लगाकर लेटी हुई है। बाथरूम में ही मैं सोच रही थी कि कुछ थोड़ा ज्यादा ही कर दिया मैंने थप्पड़ मार कर मैं सीधा भी मना कर सकती थी। फिर मैं आई और अपनी जगह पर लेट गई कुछ देर तो मैं खुशी की और करवट कर लेती रही पर फिर मुझे अंशु कहां से सपना मुझे देखा नहीं गया तो मैं उसकी तरफ कोई नहीं में अभी भी चुप कराया रहे थे फिर मैं अंशु के चेहरे को अपने और घुमाया और उसके होठों पर अपने होंठ लगा दी अभी मुझे पता नहीं कि प्रेत आत्मा ने करवाया जो मुझे आज तक समझ नहीं आया। “Group Sex Story Hindi”
कुछ देर तो अंशु ने अपने होठों को मेरे होठों से छुड़ाने की कोशिश की पर मैंने उसके दोनों होठों को जोर से अपने दांतों और हॉट हो क बीच भेज रखा था और उसे कस रही थी और जब बहुत छूटने की कोशिश कर रहा था तो उसके गाल पर अपने भाई हाथ से हल्के से थप्पड़ भी लगा रहे थे फिर मेरा बाया हाथ उसके सर के बालों में चला गया और मैं उसके बालों को भी खींच दे और पता नहीं शायद दो या तीन मिनट तक उसके होठों को मैं चुस्ती रहे।
मेरे तन्द्रा तब टूटी जब निम्मी ने मेरे और अंशु के होठों के बीच अपने होंठ घुसा दिए तब जाकर मैं अंशु के होठों से अपने होठों को हटाई। निम्मी मुझे देख कर हल्के से हंसी और मैं अंशु की और देखी फिर उसके गाल को खिंची छे और बोली हो गया खुश तो उसने फिर मेरे चेहरे को अपने हाथों में भर लिया और मेरे माथे पर चुम्मा फिर मेरे से शर्मा कर निम्मी की और मुंह कर लिया फिर मैंने उसके गाल पर चुम्मा और खुशी की और करवट कर लेट गई।
मेरे पीठ के पीछे कुछ देर वह दोनों खूबसूरत करते रहे फिर अंशु ने मेरे पेट पर हाथ रख दिया और मुझसे चिपक गया पीछे से और नेमी भी शायद अंशु के पीछे से चिपक कर सोनी लगे मैं भी उससे कुछ नहीं बोलती हूं और उसे वैसे ही सोने देती हूं।
अगली रात को करीब 2:00 बजे मै पीठ के बाल सोए हुए थे अपने टांगे फैला कर फिर मुझे धीरे-धीरे नींद खुली तो मुझे महसूस हुआ कि मेरी टांगे ज्यादा ही खुली है और मेरी टांगों के बीच में कोई लेट रहा है फिर निम्मी ने मेरे पेट पर अपना हाथ रखा हुआ था और अपनी एक टांग मेरी कमर पर चढ़ाई हुई थी अचानक से मेरि पूसी पर चुम्मियों शाम महसूस हुआ।
मैंने अपना हाथ नीचे किया तो रजाई के अंदर और मेरी साड़ी उठाकर अंशु मेरी पूसी पर चूम रहा था मेरी तो दिल की धड़कन है बढ़ गए किसी ने पहली बार मेरी पूसी पर अपने होंठ लगाए थे मेरे मुंह से आवाज निकल गई नेमी भी जगी हुई थी शायद वह मेरा मुंह पर हाथ रख दिया मैं अंशु को अपने एक हाथ से उसके सर को नीचे रखने की कोशिश करने लगी और धीरे-धीरे निम्मी को भी बोलने लगी की हटाने को बोल उसे पर नेमी मेरे मुंह पर अपने हाथ रखे हुए थे।
और उधर नीचे अंशु अपने होंठ से मेरी बुर* की बड़ी-बड़ी होठों पर चूम रहा था वह मेरी साड़ी के अंदर घुसा हुआ था मैं पैंटी पहन कर तो सोई नहीं हूं मेरी पूसी भी मैं हमेशा साफ ही रखती हूं वह अपने होठों से हर एक जगह पर मेरी जांघों पर चूम रहा था। कभी-कभी बोल जीव भी अब फिर आने लगा और मेरी जांघों को हल्के-हल्के कुतरने लगा मैं अपनी टांगों को हिलाते हुए और अपनी कमर को इधर-उधर करते हुए उसे हटाने की कोशिश कर रही थी पर एक तो निम्मी ने मरी कमर पर अपना पर रखा हुआ था और ऊपर से अंशु ने भी मेरी दोनों जांघों पर अपने दोनों हाथ रखकर मेरी टांगों को फैलाया हुआ था और मेरी मोटी गोरी गोरी जांघों को वह कभी काटता तो कभी मेरी खुशी पर अपनी जेब फिर आता वह मेरी उसी के दोनों होठों के बीच अपना जीव अब डालने लगा था मेरी भी पूसी ने अब जवाब दे दिया और हल्का रस निकलने लगी थी।
इधर मेरे अंदर खुशी के जग जाने का भी डर था पर अंशु की जीव जब मेरी पूसी शी के होठों पर चलती वो चूमता तो मुझे भी थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगा था और मेरे मुंह से सिसकारी फूट जाती थी तो निम्मी मेरे मुंह पर अपने हाथ रखे हुए थे और मेरी चूचियों को भी सहला रही थी। कुछ देर में मैंने रजिस्ट करना छोड़ दिया और थोड़ी देर में अंशु ने मेरी टांगे मोड दिए।
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जिससे मेरी मुनिया पूरी खुल गई और वह मेरी मुनिया के अंदर के पतले होंठों को भी अपने होठों से चूमने लगा थोड़ी देर में मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं ढेर सारा पानी उगलना शुरू कर दि। अंशु मेरी मुनिया के पानी को शायद पी रहा था मुझे तो समझ नहीं आ रहा था कि वह सब कहां से सीखा है। “Group Sex Story Hindi”
मेरी सांसे इतनी भारी हो गई थी कि मेरे सीने ऊपर नीचे होने लगे और थोड़ी देर बाद मुझे काफी शांति महसूस हुई। इतना मजा मुझे जिंदगी में कभी नहीं आया था। अंशु अभी भी मेरी सारी के अंदर ही था मैंने अपनी टांग फैला दी थी अब वह मेरी पूरी मुनिया को चैट चैट कर पूरा उसने साफ कर दिया कुछ देर बाद मुझे होश सा आया तो म उसके सर को नीचे की ओर धकेली और निमिषा धीरे से बोली कि अब बस करने को बोल उसे हिंदी में नीचे जाकर कुछ कहां उससे तो वह मेरी साड़ी के अंदर से निकाल कर रजाई में मेरी बगल में लेट गया मैं अभी भी पीठ केवल लेटी हुई थी बोजे में मेरे कमर पर अपने टांग चढ़ा दिया और अपना दाया हाथ मेरे पेट के ऊपर से रख दिया और लेट गया मेरी कमर में उसका पेनिस चुभ रहा था।
वह धीरे से बोला मामी कैसा लगा। मैं उसकी और मुड़ी और करवट बदल कर उसकी और हो गई मैं धीरे से बोली कि बदमाश कहां से सीखा तूने यह सब उसने मेरे होठों को रजाई के अंदर से अपने होठों में भर लिया और मेरी चूचियों को अपने हाथों से सहलाने लगा उसका खड़ा पेनिस मेरी पूसी के ऊपर और नाभी से थोड़ा नीचे पेड़ों पर चुप रहा था।
मैं उसके होठों को थोड़ा सा चूसी काश करके और उसके बाद उसके होठों से अपने होठों को छुड़ाएं और उसके गानों पर चूमते हुए बोली की बस हो गया अब चुपचाप सो जाओ। उसके बाद में दूसरी हार्मोन कर लेट गई मेरे प्रीत के पीछे ही सेट करनी में और अंशु ने अपना खेल शुरू कर दिया इस बार मैंने महसूस किया कि आज नींबू नीचे लेटी हुई है और अंशु ऊपर लेता है वह दिन और धीरे-धीरे चुदाई शुरू कर चुके थे।
अगले सुबह जब मैं उठी तो अंशु थोड़ा तो पहले शरमाया फिर वह बिहेव करने लगा जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो मैं निम्मी को पार्लर में पूछे कि यह सब उसने कहां से सीखा तो निम्मी ने बताया कि मैंने उसे सिखाया है। फिरने में मुझसे पूछा कि कैसा लगा रात में तो पहले तो मैं उसे कहीं की बहुत गंदा लगा बहुत गंदी है तुम दोनों फिर बहू मेरा चेहरा देखकर मेरे अंदर कहीं खुशी को समझ गई और बोली के मजा तो खूब आया होगा जिस पर मेरे भी अंदर की ख़ुशी छुपी नहीं और मैं भी हंसने लगी और बोली कि हां मजा तो आया पर यह सब नहीं कर सकते हम लोग खुशी बगल में ही सोई हुई रहती है।
जिस पर नेमी ने कहा कि कोई बात नहीं वह काफी गहरी नींद में सोती है हम इतने दिन से कर रहे हैं वह कभी नहीं जगी है आप पर हमें मेरे साथ कर सकती हो मैंने उसे मना कर दिया। कुछ रातें तो फिर कुछ नहीं हुआ उसके साथ 8 दिन बाद एक सुबह जब मेरी नींद खुली तो अंशु मुझे पीछे से चिपका हुआ था उसका खड़ा पेनिस मेरी गांड में छुप रहा था।
मैं उठकर उससे थोड़ा दूर हुई फिर उसे टाइम में भी उठ गई और वह मुझसे पूछे कि क्या हुआ तो मैंने उसे इशारे से बताया कि तुम इधर सोना कल से रोज है मुझे अपना छुपाता है धीमे-धीरे से हंसी फिर उसने अंशु के ऊपर से रजाई हटत उसके पजामे में उसका टेंट बना हुआ था जिससे नेमी ने पकड़ लिया अपने हाथों से मैं उसे मना करने के लिए उसका हाथ वहां से हटने लगे तो मेरा भी हाथ उसके पेनिस से लग गया।
और तभी अंशु जाग गया और उसने मुझे अपने पेनिस को सोते हुए देख लिया मैं जल्दी से उठकर बाहर चली गई। फिर उसे रात अंशु और मिनी मेरे पीठ के पीछे अपना खेल शुरू करते हैं और कुछ देर एक दूसरे से खेल कर फिर से अंशु मेरी स्पैरो की तरफ चला जाता है और मेरी साड़ी उठने लगता है पर मैं आज जगी हुई थी त उसे दांतों की कोशिश करते हो चुपचाप मेरे बगल में आकर सो जाता है पर मुझे पीछे से हग कर लेता है मैं उसकी और मूर्ति हूं और करती हो कि पागल हो गए हो क्या तुम दोनों को जो करना है करो मुझे इसमें मत शामिल करो प्रभु मेरी कमर पर टांग रख देता है और मेरे चेहरे को अपने हाथों से पकड़ लेता है और मेरे होठों पर अपने होंठ लगने लगता है मैं उसे धीरे-धीरे मन भी करती हूं पर वह धीरे-धीरे मुझे चुने लगता है। “Group Sex Story Hindi”
वह मेरे शरीर से खेल भी रहा था और उसका खड़ा पेनिस मेरे नबी के नीचे भी चुप रहा था जिससे मैं भी गर्म होने लगी थी मेरे कुत्तेदार शरीर को अपने हाथों से दबा रहा था और आई लव यू मन में आई लव यू मां भी बोल रहा था मुझे पता नहीं उसके मुंह से आई लव यू सुनकर बड़ा है अच्छा लग रहा था फिर मैं भी सोचे कि जो होगा देखा जाएगा मैं भी कूद पड़ती हूं इन सब में।
मैं अब उसके गाल को खींची और उसके ऊपर चढ़ गई और धीरे से बोली के रूप तेरी जवानी को भी शांत करती हूं तेरे दिल से को तो मैं पूरा निकाल सकते हो महीने में बोली धीरे से की तो इस तरफ आजा। निम्मी मेरे और खुशी के बीच में आ गई मैं अंशु के ऊपर चढ़ गई और अपने कमर को कस कस कर घर से देने लगे उसके कमर पर मेरी बर उसके लंड के ऊपर रगड़ रही थी कपड़ों के ऊपर से ही फिर मुझे बहुत है उत्तेजना होने लगी और उसके हठों को चूसने लगे उसके बाद बीवी ने नीचे उसका पजामा कर दिया जिससे उसका पेनिस बाहर आ गया मेरी भी साड़ी उठकर जांघों के ऊपर हो गई थी और मैं भी थोड़ी सी अपनी साड़ी को उठाकर अपनी कमर पर करने और रजाई के अंदर ही मैं अपने कमर को सही जगह उसके पेनिस पर सेट कर दी.
मैं कभी-कभी अब पैंटी भी नहीं पहनती हो तो उसे रात भी पहनती नहीं पहनी थी जिससे मेरा मेरी नंगी पूसी उसके पहले पर जान लगे और मुझे बड़ा है अच्छा महसूस हुआ फिर मम्मी ने पता नहीं कब अपना हाथ नीचे कर उसके पेनिस को सिद्ध किया और जब मैं बैठी तो उसके पेनिस मेरी गुस्से में थोड़ा सा घुस गया मेरी सिसकी निकल गई मेरी उससे भी पानी छोड़ चुकी थी काफी सारा रा उसमें लगा हुआ था जिससे वह काफी चिकनी थी और अंशु के खड़े पेनिस पर में ठीक से बैठ गई जिससे मेरे बुर में उसका पेनिस धीरे-धीरे समा गया पर मैं मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ और मैंने अपने होंठ बंद कर लिया और अपनी आवाज को दबाने के लिए अंशु के होठों को अपने दांतों में दबा ली कसकर।
मैं ऊपर से जैसे ग्राइंड करते हैं अपनी कमर को उसके पेनिस पर ग्राइंड करने लगे फिर धीरे-धीरे धक्के देने लगी मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां उसके सीने पर रखी हुई थी वह अपने हाथ से मेरी दोनों भारी गांड पर रखे हुए थे और उन्हें दबा रहा था। मैं अपनी गांड को उठा उठा कर उसके लंड पर पटक रही थी कभी धीरे तो कभी तेज तेज उसकी हालत टाइट होने लगी मेरी इतनी जोर की चुदाई से ऐसा मुझे लग रहा था।
उसकी शिकारी भी निकलने लगी थी और कुछ 10 मिनट बाद है मैं भी घर में पाली थी तो मैं भी थोड़ी तेज तेज अपनी गांड को पटकने लगे उठाकर और एक गरम-गरम पानी अपने अंदर आता हुआ मैंने महसूस किया उसका रस मेरे अंदर निकल लग रहा था और मैं भी साथ है और अपने तेज डाली सांसों को उसके मुंह में छोड़ने लगी और उसके जीव को भी काटने लगे जैसे उसे कहां जाना चाहती हूं।
हम झड़ने के बाद भी वैसे ही लेते हुए थे उसका पेनिस अभी भी मेरी पूसी के अंदर था जो कुछ देर बाद कड़क होने लगा तो मैं जल्दी से उसके ऊपर से उतर गई। और रजाई के अंदर ही अपने कपड़े सही कर ले और उसे धीरे से बोली कि अब चुपचाप सो जाओ मैं उसकी तरफ बैठकर लेट गए इधर नहीं मिलने म मच्छर अपने सीने से लगा लिया और हल्के से मेरी चूचियों पर अपने हाथ रख दे मैं उसके हाथ को हटाया और पीछे से अंशु मुझे बाहों में भर लिया धीरे-धीरे मुझे नींद आ गई।
अगली सुबह मेरी नींद खुली तो मैं कल रात के अपनी चूदाई के बारे में सोच रही थी। मेरे भांजे ने मुझे चोद दिया था,। थोड़ी देर तो मैं निम्मी को मन ही मनकोसी की कैसे-कैसे इसने मुझे भी इन सब में घसीट लिया। भर थोड़ी देर बाद ही मुझे लगने लगा कि हां लेकिन सेक्स करके अच्छा तो बहुत लगा था इतने सालों बंद चूड़ी थी मैं वह भी अपने पति के भांजे से तो उसकी फीलिंग अलग ही आ रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर मैं सोची कि ठीक है जो हो रहा है होने देती हूं। मैं भी तो अपनी जवानी में खूब मजे किए हैं। यह सब मैं सोच ही रही थी कि निम्मी भी उठ गई और उसने मुझे हंसते हुए धीरे से कहा कि कैसे लगा तो मैं उसकी एक चूची पर अपना हाथ रख और उसे दबा दि जोर से।
अब उसे पूरे दिन भर तो मैं सोचती रहेगी अब नहीं करूंगी बस हो गया एक बार जो हो गया सो हो गया पर रात को जैसे ही निम्मी और अंशु मेरी बगल में चालूहुए। वह दोनों चुदाई करने लगे मेरे पीछे में मैं दूसरी और मुंह कर रजाई में लेटी हुई थी। “Group Sex Story Hindi”
उन्होंने अपना अकाउंट खत्म किया उसके बाद अंशु मेरे पीछे से मेरी दोनों चूचियों को दबाने लगा और अपने खड़े लंड को मेरी गांड में सताने लगा धीरे-धीरे उसने मेरी साड़ी भी ऊपर तक कर दी और पीछे से मेरी बर पर अपने लंड का दबाव बढ़ने लगा मुझे भी मजा आ रहा था तो मैं उसे कुछ नहीं बोली और वैसे ही लेती रही इधर नहीं भी मेरे आगे आ गए और मुझे किस करने लगी है और रजाई के अंदर से ही मेरी चूचियों को दबाने लगी।
मेरी हल्की सी शिकारी भी निकल जाती जब वह दोनों ही मेरी चूचियों को लेते-लेते दबा देते जोर से। अब मैं सोची कि चलो करना ही है तो इस निम्मी से अपने होंठ क्यों चुसवाऊँ अपने भांजे अंशु की ओर हो गई और वह मेरे होंठ चूसने लगा।
इधर पीछे से मेरी एक चूची निम्मी दवा रही थी और आगे से एक चूची को अंशु दबा रहा था फिर उसने मेरी ब्लाउज को खोलकर मेरी चूचियों को आजाद कर दिया और उन्हें चूसने लगा। मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों को वो पूरा चूस रहा था। वह मेरे अंगूर जैसे बड़े निपल्स को दम अपने दांतों से हल्का-हल्का कुतर रहा था।
फिर उसने मेरी मां ने तंग को थोड़ा सा उठाया और मेरी टांगों के बीच अपनी टांग डाल दी और अपने लंड को मेरी बर पर रखकर एक धक्का मारा जिससे उसका लण्ङ* मेरी बुर* में घुस गया और मेरी हल्के शिकारी निकल गई फिर वह मुझे वैसे ही चोदने लगा। कुछ 10 मिनट बाद में झड़ गई और शांत हो गई और बहुत धक्के लगा ही रहा था फिर मैं करवट लेकर पीठ के बाल हो गई तो वह मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे ऊपर पूरा लेट कर मेरी चूचियों को अपने मुंह में भर लिया और लंड़ को मेरी बुर में घुस कर मुझे चोदने लगा ठप की आवाज आ रही थी मुझे लगने लगा कि कहीं खुशी जाग न जाए।
ऐसे ही वह मुझे आज आधे घंटे तक और चोदता रहा और फिर मेरे ही अंदर चढ़ गया और मेरे ऊपर ही लेता रहा। कुछ देर मैं मैं उसे साइड में हटाया और रजाई के अंदर ही अपने कपड़े सही करने लगे फिर नेमी अभी भी जाग ही रही थी और वह मेरे और खुशी के बीच से उठकर वापस से अंशु के साइड चली गई मुझे बना है गुस्सा लगा उसे पर इतना ही लिटिल कर रही थी खुशी जरूर जाग जएगी और वह उसके साइड चली गई और मैं खुशी की और मुंह कर लिया फिर मैंने महसूस किया कि मेरे पीठ के पीछे वह दोनों फिर से चुम्मा चाती करने लगे थे उनकी आवाज मेरे कानों तक हल्की-हल्की आ रही थी।
अब लगभग हर एकदिन यही सिलसिला शुरू हो गया दिन में हम सब नॉर्मल रहते और रात में अंशु और नेमी लगभग हर एक रात को चुदाई करते थे पता नहीं निम्मी के अंदर कितनी गर्मी बाकी थी अभी अंशु तो कर जवान था तो वह कर सकता था लेकिन नेमी के अंदर पता नहीं क्या आग लगी हुई थी जो ठंडी ही नहीं हो रही थी और हर रात को दोनों मुझे भी ट्राई करने की कोशिश करते पर मैं उनसे पीछा छुड़ा लेती और चार-पांच रात बाद ही मैं उनसे चूदवाती थी। “Group Sex Story Hindi”
एक दोपहर संडे को जब मैं धूप में गई कपड़े पसारने तो अच्छी की खुशी छत पर कपड़े पसारने आए हुए थे और बहुत सुबकक-सुबक कर रो रही थी। मैंने उसे उसके रोने का कारण पूछा तो पहले तो उसने मुझे नहीं बताया फिर उसने कहा कि आप लोग रात में क्या करते हैं अंशु के साथ गंदा काम करते हैं आप लोग रात में आप लोगों ने पूरा रिश्ता खराब कर दिया है मैं उससे प्यार करती हूं अब मैं उससे शादी कैसे कर पाऊंगी।
यह सुनकर मेरा माथा थाना गया और मैं वही पर बैठ गई और रोने लगे मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था और अंशु और निम्मी पर भी गुस्सा आ रहा था कि यह सब हमने क्या कर दिया। खुशी भी मेरे बगल में बैठ गई और रोने लगे।
कुछ देर में रोते-रोते मेरे दिमाग में आइडिया आया और फिर मैं खुद को संभाला और खुशी को भी चुप कराया। मैं खुशी से कहा की खुशी चुप हो जा कोई बात नहीं देखा तेरी मम्मी है तो भी जवान है और तेरे पापा भी नहीं रहते हैं और मेरे भी पति नहीं रहते हैं तो अभी बच्ची है तो औरतों का दुख नहीं समझ सकती।
खुशी ने कहा कि नहीं समझता हूं बड़ा सेक्स करने के बाद और भी सेक्स करने का मन करता है तो मैंने उससे पूछा कि तुझे कैसे पता तूने कभी सेक्स किया है क्या तो उसने कहा नहीं मैं नहीं किया है पर मेरी सहेलियों बोलती है कि एक बार सेक्स कर लो उसके बाद हमेशा सेक्स करने का मन करेगा।
मैं खुशी को अपने गोद में लिटा लिया और उसके बालों में हाथ फिर आते हुए पूछे कि अच्छा चल ठीक है बता दो तू तो अंशु से प्यार करती है तो क्या वह भी तुझसे प्यार करता है तो खुशी ने कहा कि पता नहीं तो फिर मैंने उससे पूछा कि तुमने कभी उसे प्रपोज किया है तो उसने कहा नहीं।
तो मैं खुशी से कहा ठीक है देख तेरी मम्मी और उससे मैं किसी और तरीके से बात कर लूंगी पर तू है बातें नहीं बताना फिर उसे मैं समझने लगी की देख कर तुम्हारी मम्मी बाहर में किसी से करती वह जवानी के आज में जल रही थी अगर बाहर में किसी से कर लेती तो कितनी बदनामी होती हमारी फिर एक बार किसी की मम्मी बदनाम हो जाती है तो उसकी बेटी भी बदनाम हो जाती है और मैं भी बदनाम हो जाती तब भी कम से कम तुम्हारे मम्मी घर में ही ये सब कर रही है। “Group Sex Story Hindi”
खुशी को मैंने समझा दिया तो उसने कहा ठीक है मैं कोई भी ऑब्जेक्शन नहीं लगाऊंगी और ना ही किसी को बताऊंगी तो मैं भी उससे कहा कि तेरी शादी मै अंशु से ही करवाऊंगी चाहे जो कुछ हो जाए।
अब रात को खाने के टाइम सब बैठे हुए थे तो मैं सबसे कहां की खुशी के लिए एक रिश्ता आया है मैंने नमी और अंशु से पूछा की खुशी की अब शादी करवा देनी चाहिए यह सब बात सुनकर अंशु उदास हो गया और अंशु को उदास देखकर नेमी भी उदास हो गई खुशी मेरी और देखी मैंने उसे चुप रहने को कहा।
अंशु ने आज खाना भी है उतना अच्छा से नहीं खाया और फिर सब सोने के लिए लट गए आज मेरे पीठ के पीछे अंशु और नेमी कुछ नहीं कर रहे थे नहीं मैं शायद तो उसके कानों पर किस कर रही थी पर वह उसे नहीं कर रहा था मैं समझ गई कि अंशु के दिल में भी खुशी के लिए कुछ है।
अगले दिन जब पार्लर में, मैं और निमि थे तो निमी ने मुझे कहा कि दीदी अंशु खुशी से प्यार करता है अपने क्यों कल रात को खुशी की शादी की बात की। निम्मी के मुंह से बात सुनकर मैं समझ गई की अंशु नेमी को बताया होगा कि वह भी खुशी से प्यार करता है।
मैंने यह सुनकर निम्मी को थोड़ा डांटे हुए कहा कि तुझे यह बात पता थी तो भी तू उसके साथ यह सब कर रही है कैसी है तू अपनी बेटी के ही सुहाग पर डाका डालने के लिए रेडी है। बीवी ने हंसते हुए कहा कि दीदी मत बोलो तुमने भी अपनी भतीजी के सुहाग पर डाका डाल रखा है सारा दोस्त मुझ पर मत दो और हम दोनों मां बेटी नहीं बहने हैं हम दोनों एक लड़के को शेयर कर लेंगे।
मैंने उसे हंसते हुए गाली देते हुए कहा कि तू अपने दामाद से भी चुड़ेगी रंडी कहीं के। निम्मी ने फिर मुझे भी गाली देते हुए कहा कि आप भी तो अपने भतीजी के पति से चुदोगी।
फिर हम दोनों वैसे ही थोड़ी देर हंसते रहे और बोले कि देख कहां से क्या रिश्ता हो गया फिर मुझे भी अपनी जवानी के किस याद आने लगे कि मैं भी तो जवानी में खूब मजे किए ह तो अपने भतीजी और अंशु को क्यों रोकूं उन्हें भी मजे दिला देती हूं। “Group Sex Story Hindi”
निम्मी ने कहा कि दीदी आज रात को ही सब खुल जाते हैं आपस में ऐसे चुप चुप कर मजा भी नहीं आता है खुशी भी जवान हो ही रही है तो उसे भी लंड का स्वाद मिल जाएगा।
उसे दिन को एक और खुशी है की बात हुई थी कि अंशु का सीपीओ में रिजल्ट हुआ था । यह बात अंशु और खुशी ने शाम को ही क्लास से आने के बाद हम दोनों को बताएं थी।
तो उसे रात है हम सभी परिवार वालों ने अंशु को सरप्राइज दे दिया और खुशी को उसके सामने कर दिया और सब मिलकर खूब हंसते हुए मजे करने की सोच। सबसे पहले तो अंशु को पूरा नंगा कर लेटा दिया और अंशु ने भी हम दोनों को पूरा नंगा कर दिया और खुशी भी नंगी हो गई पूरी और हमें थोड़ी ठंड लगती थी तो हम रजाई के अंदर भी आ जाते थे और पहले निम्मी और मैं खुशी को लंड चूसना सिखाया सबसे पहले खुशी को अंशु के लंड के मुंह को चूसना सिखाए वह धीरे-धीरे उसके मुंह को चूस रही थी फिर थोड़ी देर बाद उसने मना कर दिया कि मुझे गंदा लग रहा है फिर मैं और नहीं में उसके लंड को अच्छी तरह चूसने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
निम्मी ने अब कहां की खुशी के बुरे को चूसो तो अंशु उठा और खुशी मेरे दोनों टांगों के बीच लेट गई उसका सर मेरे मामू पर था और अंशु उसके बुरे के पास लेट गया और उसके बुरे को चूसने लगा और नेमी अंशु के गांड को चूस रही थी और उसे काट भी रही थी।
खुशी अपनी बर पर अंशु के होठों को फेल कर गुदगुदी से महसूस कर रहे थे वह कभी मेरी चूचियों को भी जूस लेती थी मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों को बहुत चुस्ती और निप्पल को वह पीने लगते अंशु के 5 मिनट चूसने के बाद ही खुशी झड़ गई फिर अंशु अपना खड़ा लंड लेकर खुशी के बुर के पास आ गया।
वह घुटने अपने मोड कर खुशी के बुरे पर लंड रखने लगा तो मैं खुशी के बुरे पर अपना हाथ रख दिया और कहा कि नहीं अभी नहीं जो करना है शादी के बाद तुम लोग कर लेना अभी सिर्फ तुम दोनों ऊपर ऊपर से मजे करो।
खुशी ने भी मेरी बात मान ली और अंशु ने भी फिर वह दोनों एक दूसरे को चूसने लगे और अंशु उसकी चूचियों को भी चूसने लगा फिर उसके गले गार्डन को चूसने लगा। और उसके बगल में नहीं मैं मुझे लुटा दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगे और मेरी बुर में उंगली भी डालने लगी।
मैं भी एक हाथ उसकी चूचियों पर ले गई और उन्हें दबाने लगी और दूसरे हाथ को उसकी बुर में डाल दी। कुछ देर बाद मैं खुशी की छोटी-छोटी चूचियों को चूसा और नेमी ने भी अपनी बेटी की एक चूची को चूस फिर खुशी को मैंने बोला कि तुम देख अब दूर से तो वह हमारे बगल में लेट गई।
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : भैया मेरी पेंटी पर मुठ मार कर गिराते
खुशी नहीं पहले कहां की हुआ पहले तुम करो और उसने कहा कि डॉगी स्टाइल में करो तो मैं उसके कहने पर अपनी टांगे मोड कर उसके सामने बैठ गई और मेरी गांड अंशु की ओर थी पीछे से उसने मेरी चूतड़ों को चूसा और भारी-भारी गांड को हल्के हल्के थप्पड़ मार नेमी तो पीछे से जोर-जोर से थप्पड़ मार रही थी मेरी गांड पर फिर मेरी गांड को जहां-तहां चूस दोनों ने और अंशु ने पीछे से मेरी बुर में लंड घुसा दिया और मेरी कमर को पकड़ कर पीछे से मुझे चोदने लगा। “Group Sex Story Hindi”
कुछ देर में मेरी कमर दुखने लगी तो मैं लेट गई अंशु मेरी एक जंग पर बैठ गया और एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया और मेरी बुर में लंड पेल दिया और चुदाई करने लगा खुशी मेरे आगे थी तो वह मेरी चूचियों पर टूट गई और निम्मी अपनी बेटी खुशी की गांड पर टूट पड़ी और वह उन्हें खाने लगी।
मेरी बुर चोदते चोदते हैं अंशु मेरी बुर र के अंदर ही झड़ गया मैं भी एक बार झड़ गई थी। मैं अपनी च** से अंशु के माल को निकाल कर खुशी को दिखाते हुए बोली की देख यही लड़की के अंदर जाता है तो वह मां बनने वाली रह जाती है।
फिर नमी अंशु के ऊपर लेट गई और उसके होठों को चूसने लगे और इधर खुशी मेरे होठों को चूसने लगी और मेरी चूचियों को अपने हाथों से सहलाने लगी मैं भी अपने हाथों से उसकी छोटी-छोटी चूचियों को सहला रही थी।
निम्मी अंशु को पूरा लिटा दि और उसके लंड को थोड़ी देर चुस कर उसे गिला किया फिर उसके लंड पर अपनी गांड उठा उठा कर पटकते हुए मजे ले रही थी। कुछ देर में भी झड़ गई और अंशु भी उसके अंदर ही झड़ गया वह दोनों एक दूसरे पर लेटे हुए थ और इधर से उधर लोटपोट कर रहे थे।
कुछ देर में दोनों अलग हुए और एक दूसरे के बगल में लेट गए। अब जैसे हम पहले सोते थे वैसे ही लेट हो गए और मैं सबको कहा कि देखो अब अंशु का सीपीयू का एग्जाम क्लियर हुआ है उसके बाद दौड़ भी होगा तो अब ज्यादा चोदम चुदाई हम नहीं करेंगे और इसे अब अभी पूरे तरह से बंद कर देते हैं जब तक इसका फाइनल सिलेक्शन ना हो जाए।
उसके बाद सब परिवार वालों को बुलाकर इन दोनों की शादी कर देंगे और उसके बाद खूब मजे करना सब मिलकर। सब मेरी बात पर एग्री हो जाते हैं।
दो ढाई महीने बाद अंशु का दौड़ होता है तो हम लोग चुदाई करने का बंद कर देते हैं और अंशु सुबह में दौड़ने जाता है। रात मे निमि उसकी पूरी बॉडी की मसाज करती थी हर रात का है उसका काम था।
कुछ महीने बाद अंशु कहां दौड़ हो जाता है और उसके कुछ महीने बाद उसका फाइनल सिलेक्शन भी हो जाता है वहां दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर बन गया था। सिलेक्शन के बाद तो हम लोगों के मजे ही मजे हो जाते हैं हम दोनों को अंशु खूब चोदता था और खुशी को यह बर को जोर-जूस कर उसका पानी निकाल देता था अब दो-तीन महीने ऐसे ही हर रात हम लोगों ने किया।
उसके बाद उन दोनों की शादी परिवार वालों की मर्जी से गांव में हो गई। गांव से शादी करके कुछ दिन हम गांव में ही रहे सिर्फ अंशु दिल्ली आ गया था अपने ड्यूटी पर उसके बाद हम लोग भी दिल्ली आ गए।
खुशी की सील अंशु ने अकेले में सुहागरात में ही तोड़ी हम उसका भागीदार नहीं बन पाए उसे रात का। हम दिल्ली आए तो पहले तो अपने घर गए फिर अंशु को क्वार्टर मिल गया था 2BHK का तो वह हमें जबरदस्ती अपने क्वार्टर पर ही रहने को बोलता है तो हम उसके कहने से वही चले जाते हैं। “Group Sex Story Hindi”
अब उसे 2BHK क्वार्टर में मैं मेरे पति अंशु और खुशी और नेमी और मेरा भाई और मेरे पति के जीजा यानी अंशु के पापा रहने के लिए आ गए। अब एक कमरे में तो अंशु और खुशी सो गए अंशु तो मुझे भी बोल रहा था कि मामी आप दोनों भी यही सो जाओ मैं बाहर सो जाऊंगा पर मैंने उससे कहा कि नहीं तुम दोनों सो जाओ हम लोग इधर एडजस्ट हो जाएंगे।
अंश और खुशी को हमने एक कमरे में भेज दिया अब हाल में हम सभी बैठे हुए थे मैं और नहीं नया सोचा कि हम दोनों हाल में सोफे पर कैसे भी सो जाएंगे और वह तीनों मर्द दूसरे कमरे में बेड पर सो जाएंगे। पर मेरे भाई ने कहा कि नहीं आप तीनों वहां चले जाओ हम दोनों पति-पत्नी कैसे भी यहां पर सो जाएंगे मेरे पति ने भी कहां के हां यहां पर आ जाओ।
तो दूसरे कमरे में एक बेड था जिस पर एक साइड मेरे पति के जीजा जी यानी कि अंशु के पापा और बीच में मेरे पति और एक किनारे पर मैं सो गई और बाहर हाल में निमी और मेरा भाई सोफे पर सो गया।
थोड़ी देर में मुझे नींद आ गई और मेरी नींद तब खुली जब शायद मेरे पति पेशाब करने के लिए बाहर गए और जब वापस वह आए तो मुझे बेड के बीच में कर दिया और खुद किनारे में सो गए इस टाइम मेरी नींद खुली ।
मैंने धीरे से उन्हें कहा कि इधर आ जाओ आप तो उन्होंने कहा कोई बात नहीं सो जाओ ना फिर मैं भी लेती रही अंशु के पापा से थोड़ी दूर होकर अपने पति की और मुंह करके फिर मेरे पति ने अपना हाथ मेरी चूचियों पर रख दिया और उसे दबाने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वह भी जब से दुबई से आए थे हम लोगों को सेक्स करने का मौका नहीं मिला था क्योंकि पहले तो वही छोटे वाले घर में थे और काफी सारे लोग ही थे और उसके बाद कौन शादी के लिए चले गए जहां और भी मौका नहीं मिला तो यहां उनको कुछ मस्ती सूद रही थी मैंने उनका हाथ उठा दिया पर फिर उन्होंने मेरी चूची को जोर से पकड़ लिया और उसे दबाने लगे।
फिर उन्होंने मेरा मुंह भी अपने होठों से बंद कर दिया और मेरी चूची को दबाने लगे और मेरी चूची पर अपना मुंह लगाकर उसे कभी चूसते तो कभी मेरे होठों को चूसते मैं भी धीरे-धीरे गर्म होने लगी। फिर उन्होंने मेरी साड़ी को मेरी कमर तक उठा दिया और मेरी जांघों पर अपने हाथ को फिर आने लगे और मेरी नंगी कमर को भी दबाने लगे और इधर मेरे होंठ भी कस रहे थे मैं भी उनके होठों को चूस रही थी और अपने हाथ को उनके पीठ पर फिर आ रही थी।
मेरे पीठ के पीछे अंशु के पापा यानी मेरे पति के जीजा जी सोए हुए थे मुझे तो काफी डर लग रहा था पर इधर मेरे पति भी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। फिर मेरी चूचियों पर एक और हाथ महसूस हुआ मैं तो डर ही गई और देखा कि अंशु के पापा का हाथ था।
मुझे लगा नींद में उनका हाथ आ गया है तो मैं धीरे से उनका हाथ हटा दे पर फिर उनका हाथ मेरे च पर आ गया तो मैं समझ गई और अपने पति को बोली की छोड़ो मुझे उसे साइड जाने दो पर वह मेरी टांग पर एक टांग रखे हुए था और मेरे होठों को कस रहे थे इधर मेरे जीजा ने भ मेरी चूचियों को खसखस कर दबाना शुरू कर दिया था फिर मैंने महसूस किया कि मेरी नंगी गांड के ऊपर भी मेरे पति के जीजा ने अपना हाथ फिर आना शुरू कर दिया है तब मैं जबर्दस्ती अपने पति से अपना मुंह चुरा कर उन्हें बोली धीरे से की हटो अब और नहीं ।
मेरे पति ने बोला कि यह साल भर तो मैं तुम्हारे साथ रहता नहीं हूं आज भी मजे देने की कोशिश कर रहा हूं तो तुम हटो हटो ही कर रही है फिर मैंने उन्हें इशारा कर बोला कि आपके जीजा का हाथ देखा कहां आ रहा है तो उन्होंने कहां के कोई बात नहीं है मेरे जीजा को भी मजे दे दो जवानी की बातें भूल गई क्या तुम आज तुम्हें दोनों साइड से मजे दूंगा। “Group Sex Story Hindi”
मैं समझ गई कि यह दोनों ही मिले हुए हैं और दुबई में जरूर यह लोग लड़कियों को एक साथ चोदते होंगे मेरा भाई बहन सबको साथ लड़कियां चोदता होगा। हमारी बातें जरूर जीजा के कानों तक जा रहे थे तब भी उन्होंने अपने हाथों का जोर मेरी चूचियों पर बढ़ा दिया और मेरे से और करीब आ गए।
मेरे पति ने इधर मेरे ब्लाउज खोल दिए और मेरी चूचियों को नंगा कर दया और उसे चूसने लगे इधर पीछे से की जान मेरी गांड की दरारों में अपना हाथ डाल दिया थ और मेरी बुर को सलने लगे थे मैंने पेटी भी नहीं पहनी थी।
मेरे बुरे पर हुए आक्रमण की वजह से मैं पीठ के बल लेट गए तो जीजा ने मेरी एक चूचियों को मुंह में ले लिया और मेरे पति ने मेरी दूसरी छोटी को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगे। मैं थोड़ी देर तो उन दोनों कोई मुंह को हटाने की कोशिश करें फिर दोनों ने ही अपने हाथ मेरी दोनों जांघों पर रख दिया और मेरे दोनों जानवरों को सहलाने लगे और मेरी पेट को भी सहलाने लगे फिर मेरे पति ने आकर मुझे होठों पर किस किया और मेरे मुंह को घुमा कर कहा कि लो जीजा कि करो इसे बहुत ही अच्छा किस करती है यह पता नहीं कहां से सीखी है।
मेरे पति के जीजा यानी अंशु के पापा ने मेरी और मुंह करके दिखा मैं भी उनको देखा लाइट हल्की-हल्की कमरे में जल रही थी उन्होंने मेरी होठों की ओर अपने होंठ पढ़ाया और मेरी होठों से अपने होंठ लगा दिए मैं भी उनके होठों को चूसना शुरू कर दिया अब मैं क्या नहीं कर सकती थी जब मेरा पति है मुझे किसी और के साथ शेयर करने को तैयार था तो अंशु के पापा मेरे होठों को कस रहे थे और उनका एक हाथ मेरी बर पर था और मेरे पति ने मुझे चूचियों को चूसना चालू कर दिया जोर-जोर से और वह मेरी पेट पर मेरी नाभि को भी कस रहे थे फिर मेरे पति ने कहा कि आजा इधर ऐसे हो जाओ।
उन्होंने मुझे बेड पर घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी गांड को चाटने लगे और मेरी बुर को भी चाटने लगे और अपने जीजा को बोला कि जीजा देख क्या रहे हो अपने कपड़े खोल दो तो मेरे सामने होकर जीजा ने अपने कपड़े खोलने चालू किया और अपने घुटने के बल बैठकर अपने पजामी को भी नीचा कर दिया और मेरे चेहरे के सामने अपना मोटा तगड़ा लंड हिलाने लगे।
मेरे पति ने कहां देखा क्या रही हो मुंह में ले लो उसे मैंने सोचा कि मैं तो आज तक अपने पति का मुंह में नहीं लया सिर्फ अंशु का ही थोड़ा बहुत जोशी हूं आज फिर उसके बाप का छोड़ना पड़ रहा है।
जीजा ने अपने लंड को मेरे पूरे चेहरे पर टच करना शुरू किया और मेरे गानों को दबाकर मेरे मुंह को खोल दिया और अपना लफड़ा मेरे मुंह में डालकर अपने कमर को आगे पीछे करने लगे इधर पीछे से मेरे पति ने भी मेरी बुर को पूरा गीला कर दिया था और अपने लंड को मेरी बुर में घुसा दिया मेरी आंख निकल गई इधर मेरे मुंह में मेरे जीजा का लंड था और पीछे से मेरे पति मुझे चोद रहे थे दोनों ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। “Group Sex Story Hindi”
करीब 5 मिनट तक मेरे पति ने मुझे पीछे से चोदा। उसके बाद उन्होंने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टांगों को खींचकर किनारे कियाऔर खड़े होकर मुझे छोड़ने लगे। इधर जीजा भी मेरे मुंह के पास खड़ा था और अपने लंड को मेरे होठों पर रगड़ रहा था फिर करीब 15 मिनट बाद मेरे पति मेरे ही अंदर झड़ गए और मैं भी दो बार झड़ चुकी थी।
कुछ देर तो फिर से मेरी दोनों च यो से खेलते रहे और उन्हें पीट रहे उसके बाद मेरे पति ने फिर से मुझे डॉगी स्टाइल में होने को कहा मैंने पूछा क्यों फिर क्यों। तो उन्होंने कहा कि रुको तो थोड़ा सा फिर वह मेरे सामने घुटने के बल बैठ गए और उसके जीजा पीछे चल गए हैं और मेरी गांड को चाटने चूसने लगे।
तभी मुझे मेरी गांड की छेद पर कुछ तेल आसान लगता हुआ ठंडा ठंडा महसूस हुआ शायद लॉन्ग का तल मेरे पति के जीजा मेरी गांड के छेद पर लगा रहे थे मैं पीछे मुड़कर माना कि मैं समझ गई की कहानी है मेरी गांड तो नहीं मरेंगे मैंने अपने पति को बोला कि नहीं वहां नहीं करने को बोलिए ना मैंने कभी नहीं लिया है वहां पर तो मेरे पति ने कहा कि कर दो ना खुश प्लीज जीजा को।
मेरे पति ने मेरे होठों को चूसा और मेरे गालों को भी चूस और अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया और बोला कि करने दो ना । उधर पीछे से मेरे पति के जीजा ने मेरी गांड में एक उंगली डाल दी थी मैं चिपक गई पर कुछ आवाज नहीं निकल सके क्योंकि मेरे मुंह में मेरे पति का पुरा लंड था।
वह अपनी मोटी उंगलियों को मेरी गांड में डालकर अंदर बाहर करने लगे फिर दो उंगलियों को डाल दिया और तेल के डिब्बे के मुंह को पूरा मेरी गांड में हो रहने लगे भाकर मेरी जान हो पर भी गिर रहा था फिर उन्होंने अपना मोटा तगड़ा लंड मेरी गांड के छेद पर लगना शुरू किया मैं अपनी गांड को इधर-उधर कर रही थी तो उन्होंने मेरी बड़ी सी गांड को अपने हाथों में पकड़ लिया और अपने टॉप को मेरे गांड के छेद में उतार दिया मैं दर्द से करने वालों पर कुछ आवाज भी नहीं निकल पा रही थी क्योंकि मेरे पति ने मेरे चेहरे को पकड़ कर अपना लंड मेरी मुंह में डाल रखा था।
धीरे-धीरे से जीजा ने पूरा लंड मेरी गांड में उतार दिया मैं दर्द से तड़प रही थी पर लॉन्ग के तेल के कारण आसानी से लंड भी चला गया फिर वह पीछे से मुझे छोड़ने लगे और मुझे आगे से मेरे मुंह को छोड़ने लगे।
कुछ देर में मेरी कमर दुखने लगी ऐसे ही करते-करते तो मैं जबर्दस्ती अपने मुंह को इनके लंड से छुड़ाया और बोला कि कमर दुखने लगी है मैं लेट जाती हूं तब कर लीजिएगा जैसे भी करना हो। तो जीजा ने भी पहली बार अपना मुंह खोला और बोला कि ठीक है पहले मैं लेट जाता हूं वह पहले लेट गए और उन्होंने अपने सीने पर मुझे लिटा लिया पीठ के बल और मेरे पति ने मेरी टांगों को खोल दिया और नीचे से जीजा ने मेरी गांड में फिर से लंड घुसा दिया और मेरे पति ने मेरी दोनों टांगों को उठा रखा था और जीजा नीचे से धीरे-धीरे धक्के मार कर पूरा लंड मेरी गांड में उतर रहा था। “Group Sex Story Hindi”
जीजा का लंड पूरा मेरी गांड में उतर गया वह धीरे-धीरे नीचे से धक्के मरने लगा इधर मेरी बर मेरे पति के सामने पूरी खुली हुई थी तो वह भी अपने घुटने के बाल मेरी बर के पास बैठ गया और उसने मेरी बुर में लंड घुसा दिया और थोड़ी देर मेरी ऊपर लेट कर मेरी चूचियों को चूसता रहा अब मैं उन दोनों के बीच में सैंडविच बन गई थी मेरी डबल चुदाई हो रही थी मुझे दर्द भी हो रहा था तो मैं आह आह कर रही थी।
कुछ देर में जीजा मेरी गांड में घर गया और मेरे पति थोड़ी देर बाद मेरी बुर में झड़ गए उन दोनों ने मुझे खुद के बीच लिटा लिया और पीछे से मुझे जीजा चिपक गया और सामने से मेरे पति मुझसे चिपक के और मेरे शरीर को सहलाते रहे।
मेरा दर्द से शरीर टूट रहा था मैं कहां अब रहने दीजिए तो मेरे पति ने कहा कि ठीक है अब कुछ नहीं करूंगा सो जाओ चपचाप तो मैंने कहा कि है ऐसे बीच में नहीं मुझे बाथरूम लगी है मैं आती हूं बाथरुम से।
मैं उठकर अपने कपड़े सही करें और दरवाजा खोलकर चुपचाप से बाहर जाने लगे मेरी कमर दर्द कर रहे थे मैं धीरे से बाथरूम में गए और खुद को साफ कर बाहर जो में निकली तो अच्छी की सफे पर निम्मी और मेरा भाई नहीं थे फिर मैं गौर से इधर-उधर दिखी तो सोफे के पीछे दो टांगें उठी हुई थी तो मैं समझ गई की निम्मी को मेरा भाई छोड़ रहा है टांगे उठाकर।
फिर तो मैं चुपचाप अपने कमरे में चली आई और एक तरफ सोने लगी तो मेरे पति ने मुझे पकड़ कर बीच में सुला लया और दोनों नंगे हैं मुझसे चिपक कर सो गए इस बार सामने मेरा पति के जीजा थे और पीछे स मेरे पति मुझे चिपके हुए थे मैं मजबूरन वैसे ही चुपचाप सो ही गई।
अगले दिन मैं उठी तो दर्द से मेरा बुरा हाल था मुझे दर्द की दवाई खानी पड़ी। अंशु खुशी को घूमने के लिए ले गया था अपने स्टाफ वगैरह से मिलवाने के लिए और यह तीनों मर्द हमारे अपने घर जो दिल्ली में है वहां पर गए हुए थे शायद मेरे पति बोल रहे थे वहां किराया लगाने के लिए या फिर एक मंजिल उसका और बनवाने का भी बात कर रहे थे तो वहीं पर गए हुए थे घर पर सिर्फ मैं और नेमी ही थे दोपहर में हम दोनों कमरे में पेट पर लेटे हुए थे।
नहीं मैं मुझसे पूछा कि क्या हुआ दीदी अब काफी दर्द में लग रही हो आज तो मैंने उसे सारी बात पता नहीं शुरू की की कैसे मेरे पति और उन दोनों ने मलकर मुझे छोड़ा और मेरी गांड भी मेरी। निम्न में कहा तो वहां भी मजा तो आया होगा आपको तो मैंने उससे कहा की रांड कहीं की तू भी तैयार रह ,हो सकता है तुझे भी आज तेरे समधि को खुश करना पड़े तीनों लोग मिले हुए रहते हैं और वहां लड़कियां एक साथ चोदते होंगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
हां दीदी आपके भाई ने भी मुझे कल रात को बुरी तरह से चोदा मेरे मुंह में मेरी पैंटी डाल दी थी उसने और यह भी बोला कि आज के लिए इतना काफी है बाकी कल रात को होगा। सच बोलूं दीदी आपके भाई से ज्यादा मजा मुझे अंशु के साथ आता है कितना प्यार से करता है वह। “Group Sex Story Hindi”
हां प्यार से तो करता है और सुन अगर अपने गांड का गुड़गांव नहीं बनना चाहती है तो अंशु कुछ देर में अगर आ जाएगा तो उसे अपनी गांड मरवा ले नहीं तो यह लोग रात में तेरे गांड का गुड़गांव बना देंगे मेरी तो पहले ही खुल चुकी है दीदी।
किस खुलवाई तूने और कब। और किस से खुलवाउंगी अंशु से ,बहुत प्यार से उसने किया था और मजा भी खूब आया था। कब कर लिया तूने । यह तो तभी हो गया था जब आपने हम दोनों को ज्वाइन भी नहीं किया था।
मेरे पीठ के पीछे रात में किया था या फिर उसे दिन जब मैं खुशी को लेकर बाजार गई थी उसे दिन किया था कब कर लिया तूने दर्द ज्यादा नहीं हुआ क्या। जब आप खुशी को लेकर बाजार गई थी उसे दिन दिन में ही उसने आधा गुस्सा कर कर लिया था और उसके बाद कुछ दिनों बाद रात में उसने पीछे से पूरा घुसा दिया काफी मजा आया था दर्द तो बिल्कुल जैसे हुआ ही नहीं इतना प्यार से किया था उसने आप सो रही थी मेरे आगे फिर भी आपको पता नहीं चला।
निम्मी ने हंसते हुए बताया। मुझे तो काफी दर्द हो रहा है अभी भी, आज तो मैं बिल्कुल भी इन लोगों के साथ नही सोने वाली। मैंने निम्मी कोई अभी बता दिया कि हो सकता है यह लोग तुम्हारे साथ भी आज कुछ कर तीनों करेंगे या फिर काम से कम दो लोग तो जरूर करेंगे।
शाम में पहले अंशु और खुशी आए हैं और उसके कुछ देर बद ही यह तीनों मर्द भी आ गए फिर हमसे बैठकर कुछ देर बात की है और खाना बनाने की तैयारी में लग गए मैं और नहीं मैं खाना बनाया होंगे पहले आराम से खाया और कुछ देर और बातें कया।
अंशु और खुशी अपने कमरे में सोने के लिए चले गए मैंने मर्दों को बोला कि आप तेनु उसे कमरे में सो जाइए हम दोनों आ जाओ यही हाल में सो जाते हैं पहले तो वह वापस में थोड़ी देर एक दूसरे को देखते रहे फिर तीनों मान गए और अपने कमरे में चले गए।
हाल में मैं एक सोफे पर लेटी हुई थी और निम्मी दूसरे सोफे पर लेटी हुई थी कुछ ही देर हुआ था कि इन मर्दों के कमरे का दरवाजा खुला और वहां से मेरा भाई धीरे-धीरे चुपके-चुपके निकाला और नमी के सोफे के पास जाकर बैठ गया और उसके मुंह पर किस करने लगा और धीरे से बोला कि चलो ना। “Group Sex Story Hindi”
निम्मी ने पूछा कि कहां तो उसने कहा कि चलो ना और इतना बोलकर मेरे भाई ने निम्मी को गोद में उठा लिया निमित्त थोड़ा सा तो छूटने की कोशिश की पर उसने उसे छोड़ नहीं और उसे उसे कमरे में लेकर चले गए।
मेरा तुम दिल धक धक करने लगा के तीनों मिलकर उसके साथ क्या-क्या कर देंगे। मैं वहीं सोफे पर बैठी बैठी आराम से सुनाओ ख्यालों में डूबी हुई थी।
मैं उठकर बालकनी की तरफ गई और वहां से खिड़की से उनके कमरे के अंदर झांकने लगी। मैं कमरे में झांकी तब तक देखी की सभी के कपड़े उतारे हुए थे निम्मी की पैंटी मेरा भाई उतर रहा था और सब चारों ही अब पूरे नंगे हो गए थे नेमी भी हंस रही थी वह घबरा नहीं रही थी।
उसे उसे कमरे में गए हुए आधे घंटे से ज्यादा हो गए थे उसके बाद मेरा मन नहीं माना था तब मैं खिड़की से देखने आई थी। आप लोगों की बातें तो मैं मान ली पर अब आप लोगों को भी मेरी सारी बातें माननी होगी निम्मी ने हंसते हुए कहा।
हम तुम्हारी सारी बातें मानेंगे मेरे पति और मेरे भाई ने एक साथ बोला। तो ठीक है सबसे पहले आप ही है यह समधी जी आप ही की खातिरदारी के लिए मुझे यहां लाया गया है तो पहले आपको ही मेरी खातिरदारी करनी पड़ेगी यह बोलते हुए निम्मी बेड पर बैठ गई पर को लटका कर और अपनी टांगों को फैला दी उसकी गोरी चिकनी बर खिड़की के सामने से दिख रही थी।
यह क्या है मेरे पति ने पूछा। पहले समधी जी आपको मेरी बुर चटनी होगी निम्मी बोली और उसके बाद आप दनों को भी यही करना होगा। तीनों मर्दों में आपस में बात करना शुरू किया और कहां के हैं अपने कभी बुरे चाहती है और मैं भी नहीं चाहती थी ना आपस में बताने लगे कि हम तीनों ने कभी बुर नहीं चूसी।
तो आज चूस लीजिए। निमि तीनों की ओर देखते हुए बोली। तीनों मर्द आपस में फिर खुश फुस्स आने लगे फिर मेरे जीजा के पति ने बोला कि ठीक है इतनी अच्छी समधन की बुर मिल जाए तो उसे चाटने चूसने में भी कोई दिक्कत नहीं है वह वहीं पर घुटने के बल बैठ गए और निम्मी की गोरी बूर पर अपने होंठ लगाकर उसे पर चुम्मियों के बरसात करने लगे।
वह करीब 2 मिनट तक नेमी के बुरे को चूसते चाटते रहने में अपना सर कभी पीछे करती तो कभी इधर-उधर घूमती है वह उनके बालों को भी खींच रही थी और उनके सर को अपनी बर पैर दबा रही थी इधर मेरे पति और मेरा भाई निम्मी की दोनों छोटी-छोटी 32 दी की चूचियों को अपने मुंह में लेकर कस रहे थे।
कुछ देर में नीम मी इशारा करती है मेरे पति को तो वह भी नीचे बैठ जाते हैं और निम्मी की बुर को चूसने लगते हैं और 2 मिनट बाद फिर से नेमी इशारा करती है और अपने पति को अपना बर चूसने को बोलता है और मेरा भाई भी निम्मी की बुर को चूसने लगता है। और ऊपर में मेरे पति और उसके जीजा निम्मी की चूचियों को कस रहे थे थोड़ी देर में नेमी झरने को हो जाती है तो अपनी गांड को उठाने लगती है और बोलती है कि जोर से चूसो फिर वह मेरे पति और उसके जीजा को भी नीचे अपने टांगों के पास बैठने को बोलता है. “Group Sex Story Hindi”
वह दोनों भी नीचे आकर नेमी की टांगों के पास बैठ जाते हैं और उसकी गोरी गोरी जांघों को चूसने लगते हैं अब तीनों मिल्क मिलकर निम्मी की बुर को कस रहे थे कभी वह तो कभी बहुत कभी ह एक साथ नेमी की बुर को कस रहे थे उसकी जांघों को कस रहे थे तभी नमी ने ढेर सारा पानी फेंकना शुरू कर दिया उन तीनों के मुंह पर और बोला की भी जहां सारे रुकना मत वह भी कर रही थी तीनों मर्दों उसके बुरे के पानी को पीने लगे और उसकी जांघों को चैट चैट कर साफ किया और उसकी बुर को भी चैट चैट कर साफ किया तीनों के चेहरे गिरे हो गए थे तनों ने उठकर एक दूसरे के चेहरे को देखा और ऐसा एक दूसरे पर फिर बारी-बारी से तीनों ने अपने चेहरे साफ किया।
निम्मी पीठ के बल लेटी हुई थी बेड पर और लंबी-लंबी सांसें ले रही थी। मेरा भाई थोड़ी देर निम्मी के ऊपर लेट गया और उसके होठों को चूसता रहा। अब वह उठा और नमी को बेड के किनारे कर दिया और उसे डॉगी स्टाइल में करते हुए बोला।
उसने मेरे पति के जीजा यानी अंशु के पापा को इशारा करते हुए बोला कि जीजा को तुमने कभी गांड नहीं मारी है ना लो मारो इसकी उद्घाटन कर लो इसका। मेरे पति के जीजा ने हंसते हुए कहा कि नहीं तुम ही कर लो साले साहब मैंने कर ली है।
मेरे भाई ने पूछा किसकी कर ली तो मेरे पति हंस रहे थे और मेरे पति के जीजा ने कहा कि छोड़ो ना बस तुम ही कर लो। मेरा भाई और मेरे पति के जीजा एक दूसरे को बोल रहे थे कि पहले पहले आप कर रहे थे निम्मी की गांड में डालने के लिए उधार मेरे पति निम्मी के मुंह के सामने घुटनों के बाल हो जाते हैं और उसके चेहरे से अपने कड़क मोटे लंड गोरा करने लगते हैं और उसके होठों पर उसे तरह करते रगरत है उसके मुंह में अपने लंड को डाल देते हैं।
फिर इधर मेरा भाई भी निम्मी के पीछे हो जाता है और उसकी गांड में लंड सहित डालने लगता है। निमित्त थोड़ा ऊ करती है पर तेल लगाकर मेरा भाई निम्मी की गांड म लंड पूरा उतार देता है और उसके 34 इंच की गांड को पकड़ कर पीछे से धक्का देने लगता है मेरा पति अपने जीजा को भी अपने पास घुटने के बाल खड़ा कर लेता है और नेमी उन दोनों के लंड को बारी-बारी से मुंह में लेकर चूसने लगती है फिर मेरा पति नेमी के नीचे हो जाता है और अपने जीजा को नेमी के मुंह के पास खड़ा होने को बोलता है.
जिसका नंदनी में मुंह में दे देती है और मेरा पति नीचे जाकर निम्मी की चूचियों को चूसने लगता है और नीचे से हाथ डालकर बर को सहलाने लगता है नेमी अपने पेट का वजन मेरे पति पर डाल देती है और उसकी जान है मेरे पति के जान हो पर अटकी हुई थी और पीछे से मेरा भाई मिनी की गांड में लंड डालकर उसे छोड़ रहा था क्योंकि निम्मी की गांड पहले नियम सुनने खोल दी थी तो मेरा भाई दनादन पीछे से शॉर्ट तेजी से लगने लगता है इन्हीं के मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी क्योंकि उसके मुंह में उसके समाधि का लंड था।
तभी निमित्त चीखती हई अपने समाधि के लंड को अपने मुंह से निकलती है और अपने हाथों को मेरे पति के सीने पर रखती हुई आह उह करती है और मेरे पति के आंखों में देखती है। मेरे पति हंसते हुए बोलते हैं क्या हुआ नेमी कुछ नहीं बोलता है मेरा भाई उसके सर को फिर से नीचे की ओर दुकान देता है और मेरे पति के जीजा यानी निम्मी के समाधि नेमी के मुंह में लंड डाल देते हैं।
निमिषा डटी थी आह करते हुए क्योंकि शायद मेरे पति ने भी नीचे से उसकी बुर में लंड डाल दिया होगा डबल चुदाई उसकी पहली बार होने लगी थी क्योंकि मेरे पति भी नीचे से कमर उठा रहे थे और मेरा भाई तो पीछे से उसे डाल ही रहा था। “Group Sex Story Hindi”
कुछ देर बाद मेरा भाई तेज तेज उसके गांड मारने लगा और वो निम्मी के चूतड़ों पर अपना सारा माल निकाल दिया। निम्मी अब थमने लगी थी डबल चुदाई की वजह से। मेरे पति के जीजा ने एक तोलिया लेकर निम्मी के गांड और उसके पीठ पर गिरे मेरे भाई के माल को साफ किया।
निम्मी और पीठ के बल हो गई मेरे पति के लंड से उतर कर और मेरा भाई भी बेड के ऊपर लेट गया था। निम्मी के पीठ के बोल लेते हैं मेरे पति ने कहा कि आ जाओ जीजा ऊपर आओगे या नीचे तो मेरे पति का जजा नमी के ऊपर आ गया और उसकी बुर में लंड डाल दिया और मेरा पति मम्मी के चेहरे के पास लेट गया और उसके होठों को चूसने लगा ।
कुछ देर में मेरा भाई नमी की चूचियों को चूसने लगा और इधर निम्मी के संबंधी यानी अंशु के पापा निम्मी की टांगों को उठाकर जमीन पर खड़े हो उसके बुरे में लंड पल रहे थे। मेरा भाई निम्मी के चेहरे के पास चला गया और उसके मुंह में अपना लंड दे दिया और मेरा पति निम्मी की चूचियों को चूसने लगा।
कुछ देर में नेमी को वापस घोड़ी बनाया जाने लगा तो उसने कहा नहीं कमर दर्द करने लगी है वैसे किए हुए तो मेरे पति के जीजा अब नीचे लेट गए और निम्मी को मेरे पति ने उनके ऊपर लेटने को कहां पीठ के बाल टोनी में वैसे ही उनके सीने पर पीठ के बल लेट गई और मेरे पति के जीजा ने निमकी टांगे खोल नीचे से उसके गांड में अपने लंड को घुसना शुरू कया और नीचे से रखकर मार मार कर लंड को घुसा दिया फिर वहां पर खड़ा होकर मेरे पति ने निम्मी की बुर में लंड घुसा दिया और मम्मी को छोड़ने लगे।
मेरा भाई निम्मी के चूचियों को चूस रहा था और उसके मुंह में लंड डालकर उसे चूस रहा था। कुछ देर में मेरे पति का होने वाला था तो उन्होंने अपना माल निम्मी के दर पर निकाल दिया और खुद पेट पर पेट के बल लेट गए फिर मेरा भाई निम्मी की बुर के पास आया और टेबल से उसे साफ किया और उसके बुरे में लंड पेल दिया उधर नीचे मेरे पति के जीजा निम्मी की गांड में लंड पल रहे थे और इधर मेरा भाई निम्मी के बुरे को छोड़ रहा था।
फिर मेरा भाई नमी के ऊपर लेट गया और उसको होठों को चूसते हुए ऊपर से उसे छोड़ने लगा और निम्मी के समाधान नीचे से निम्मी की गांड में लंड पल रहे थे इतना मनोरम देश लग रहा था कुछ कहा नहीं जा सकता मैं इस सीन को देखने में मगन हो गई तभी मेरे को पीछे से किसी ने पकड़ लिया।
मैं चौंक गई और अच्छी पीछे मुड़कर तो मेरे पति ही थे वह कब रूम से उठकर गए मुझे ध्यान ही नहीं रहा उनकी चुदाई देखने में। उन्होंने पीछे से मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और कहां क्या कर रही हो जान अपने भाई को चोदते हुए देख रही हो। “Group Sex Story Hindi”
मैं उनको धोखा देने वालों पर उन्होंने मुझे वहीं पर पकड़ लिया और बोला कि देखो देखो कोई बात नह वह मेरी पीछे से साड़ी उठने लगे और अपने लंड को मेरी गांड से रगड़ने लगे मुझे उन्होंने पकड़ रखा था मैंने कहा कि जाने दो मुझे दर्द हो रहा है तो उन्होंने कहा कि इतने सालों सालों मांगता हूं मुझे मिलती हो तुम और अभी भी बहाने करती हो कि दर्द कर रहा है तो फिर मैंने उन्हें कहा कि ठक है कहीं और चलकर कर लो तो उन्होंने कहा नहीं है तुम देखते रहो मैं कर लूंगा।
वह मेरी गांड के छेद पर लंड रगड़ रहे थे तो मैंने उन्हें कहा कि नहीं वहां नहीं प्लीज दर्द हो रहा है आगे से कर लो तो करना है। उन्होंने मेरी दोनों चूचियों को मसलना शुरू किया मैं अभी भी कमरे में देख रही थी वह दोनों नेमी को दोनों तरफ से छोड़ रहे थे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
और इधर पीछे से मुझे मेरे पति ने पकड़ रखा था और मेरी चूचियों को मसल मसल कर मेरी पूरी साड़ी को ऊपर उठा दिया और मेरी बर जो पहले से ही उनकी चुदाई देखकर गीली हो गई थी उसमें पीछे से लंड ठोक दिया। वह मुझे पीछे से दनादन छोड़ने लगे और उधर कमरे में वह दोनों भी पोजीशन बदलकर निम्मी को अब लेट दिया और मेरे भाई ने निम्मी की गांड में अब लंड डाल दिया था और निम्मी के समधी उसकी चूचियों को चूस रहा था और उसके मुंह में लंड भी डाल रखा था।
अब मेरा भाई पेट के बल लेट गया और निम्मी को अपने ऊपर आने को बुलाने में उसके ऊपर लेट गई तो मेरे भाई ने अपना लंड उसकी बुर में नीचे से घुसा दिया और नीचे से धक्का मारने लगा और निम्मी के संबंध ही यानी मेरे पति के जीजा ने निम्मी के पीछे उसके गांड के पास खड़े होकर उसकी गांड में भी लंड डाल दिया निम्मी एक पल को त चिकित्स थोड़ी सी फिर वह आराम से दोनों लंड को अपनी गांड और बुर में लेटने लगे इधर मेरे पति मेरी बुर में दनादन अपना लंड पल रहे थे।
मैंने अपने पति को धीरे से कहा कि किसी को बताना नहीं कि मैं यहां से यह सब देख रही थी तो उन्होंने कहा ठीक है नहीं बताऊंगा किसी को और वह फिर आगे से मेरी टांगों को उठाने के लिए बोला और एक टांग मैं उठा दी और फिर वह मेरी चूचियों को चूसते हुए आगे से मेरे बुर में लंड डाल दिया और मेरी कमर को पकड़ कर छोड़ने लगे मैं उनके कंधे पर अपना कर रखी हुई थी और एक टांग को उनके हाथ में दे रखी थी और मेरी नजर उनके कमरे में भी थी।
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जहां बहुत दिनों तक काम पर चुदाई कर रहे थे उसके बाद शायद मेरे पति के जीजा निम्मी के गांड के अंदर ही घर गए और उन्होंने अपना लंड निकाल लिया और वह बेड पर लेट गए पर मेरा भाई अभी भी नीचे से दनादन शॉर्ट लगाए जा रहा था निम्मी के अंदर और इधर मेरे पति भ मुझे छोड़ रहे थे मैं दो बार झड़ चुकी थी इतनी चुदाई में ही।
कुछ देर में मेरे पति ने मेरे अंदर ही माल निकालना शुरू किया और उधर कुछ देर बाद मेरे भाई ने भी शायद निम्मी के बुर में अपना माल निकाल दिया। कमरे में निम्मी उनके समाधि और मेरा भाई तक कम पेड़ पर लेट गए थे मम्मी को हम दोनों ने नंगा है अपने बीच लिटा लिया और इधर मेरे पति भी है मुझे खींचकर हाल में ले गए और हम दोनों भी हाल में आराम से अपने-अपने कपड़े सही कर सोफे के नीचे सो गए।
अब एक महीने बाद इन तीनों का दुबई जाने का टिकट था उन्हें एक महीना में इन तीनों ने मिलकर हर तीसरी चौथी रात निम्मी को चोदा कभी मेरे पति और मेरे पति के जीजा मिलकर मुझे छोड़ते थे। बहुत दिनों से अंशु और खुशी के साथ में और नेमी सोई ही नहीं थी मौका ही नहीं मिल रहा था जब तक हम लोगों के पति थे तब तक।
इन तीनों मर्दों ने बदल बदल कर हम दोनों को इतना छोड़ा इतना छोड़ा था कि हम बात भी नहीं सकते थे किसी को। इन तीनों के दुबई जाने के बाद हमने पहले तो एक महीने तक खुद को रेस्ट दिया उसके बाद से हम दोनों भी अंशु के साथ उसके कमरे में बेड को हटा दिया और वहां पूरे में बिस्तर बेचकर सोने लगे चारों एक साथ अंशु हर रात को लगभग हम तीनों को खुश करता है उसके अंदर बहुत स्टेमिना है अभी जवान लड़का है तो हर रात को उसे चुदाई चाहिए पहले तो मैं उसे मना भी कर देती थी पर अब उसकी अपनी खुद की पत्नी है उसे भी चुदाई बहुत चाहिए होती है तो खुशी और अंशु करते हैं तो हम दोनों को भी करना पड़ता है। “Group Sex Story Hindi”
ऐसे ही जिंदगी हो मुझे कट रही है दोस्तों। अगर आपने कहानी यहां तक पढ़ ली है और आपको मजा आया है तो अपने कमेंट जरुर करें और अगर अच्छा रिस्पांस आप लोगों का रहा तो हो सकता है मैं आपको अपनी जवानी की कहानी भी लिखूँ।
मैं और मेरे पति ने जवानी में खूब मुझे किया है दोस्तों अपनी शादी से पहले तो मैंने किसी से नहीं चुदवाया था पर शादी के बाद से मैं बहुत से लंड पकड़े हैं और उनसे चुदी हूं और बहुत से लंड में तो मेरे पति का ही सही हो रहा है मेरा पति भी खूब लड़कियां छोड़ा है और औरतों को छोड़ा है। कहानी पूरी पढ़ने के लिए धन्यवाद। आप अपने विचार हमें मेल कर सकते हैं। anjalisingh100198@gmail.com
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