Garam Bhabhi Chudai
दोस्तो, मेरा नाम सौरभ है, मेरी उम्र 28 साल की है. मेरा लंड बहुत मस्त है, इसकी तारीफ मैं नहीं इसका शिकार हुई लौंडियों और भाभियों ने की है. ये मेरी और मेरी एक मदमस्त भाभी की चुदाई की कहानी है. मैं आपको कहानी विस्तार से बताता हूं. मेरा स्कूल खत्म हो चुका था, अब मुझे कॉलेज जाना था. Garam Bhabhi Chudai
इस वजह से मुझे दूर शहर में भेज दिया गया. मेरी पड़ोस की एक आंटी की बहू और बेटा वहां रहते थे. पापा ने मुझे उनका पता आदि देकर मुझे भेज दिया. मैं जब वहां गया और उनके घर जाकर मैंने उनका दरवाजा खटखटाया, तो भाभी ने दरवाजा खोला.
मैं तो बस भाभी को देखता ही रह गया. उफ्फ्फ क्या मादक जिस्म था. खुले काले लंबे बाल, गोरे गाल, लाल होंठ, बड़े बड़े दूध, सपाट पेट, चौड़ी गांड. मैं तो मदहोश हो गया था, उनकी खुशबू से कमरा महक रहा था, जैसे कोई फूलों का बगीचा हो, और उनकी आंखों में वो चमक थी जो मुझे अंदर तक गर्म कर रही थी.
तभी भाभी ने प्यारी सी आवाज में कहा, “अरे सौरभ, तुम आ गए मम्मी जी का फोन आया था कि सौरभ आ रहा है.”
मैंने कहा, “हां भाभी, मैं आ गया.”
भाभी बोलीं, “चलो अंदर आ जाओ.”
यह कह कर भाभी मुड़ीं, तो मुझे उनकी गांड देखी, उफ्फ्फ हिलती हुई गांड बड़ी मस्त लग रही थी. उनके दोनों चूतड़ जब थिरक रहे थे, तो ऐसा लग रहा था, मानो एक दूसरे से बातें कर रहे हों. उनके दोनों चूतड़ों के बीच में छुपा हुआ मज़े से भरा हुआ गांड का छेद कैसा होगा, मैं तो बस इस कल्पना को लेकर सोचता ही रह गया.
उनकी कमर की मटकाहट से मेरे शरीर में सिरहन दौड़ गई, जैसे कोई गर्म लहर हो. मैं उनके लावण्यमयी शरीर की मदहोशी में सोफे पर जाकर बैठ गया. भाभी मेरे लिए पानी लाईं. फिर भाभी बैठ कर मुझसे बातें करने लगीं. भाभी ने बताया कि भैया तो ऑफिस के काम से दस दिन के लिए टूर पर गए हैं, मैं अकेली ही घर में हूं.
उनकी इस बात को सुनते ही मेरे दिल में भाभी को चोदने का ख्याल आने लगा, मैं उनकी गोरी गर्दन पर नजर डाल रहा था, जहां से पसीने की बूंदें चमक रही थीं, और मन में सोच रहा था कि इनको छूने का कैसा मजा आएगा. इससे पहले मैं आगे बढूं, पहले आप सभी को भाभी के बारे में बता दूं कि भाभी का फिगर 38-34-36 का है और उनकी उम्र 35 साल की है.
मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी : सेक्सी भाभी की चुदाई की सेक्सी कहानी
भाभी इतनी सेक्सी दिखती हैं कि उनको जो भी बंदा एक बार देख ले, बस वो उसी पल से भाभी को अपने बिस्तर की रानी बनाने की सोचने लगेगा, उनका हर अंग इतना मुलायम और आकर्षक था कि बस छूने को जी करता था. चूंकि पिता जी का फोन आ चुका था कि मुझे भाभी भैया के घर ही रहना है, तो भाभी ने मुझे मेरा कमरा दिखा दिया.
मैंने अपना सामान रूम में सैट कर दिया और भाभी के साथ बातें करता रहा, हम हंसते-बतियाते रहे, और मैं उनकी मुस्कान में खोता जा रहा था, उनकी आवाज इतनी मधुर थी कि कान में रस घोल रही थी. रात में भाभी ने खाना लगाया, तो मैं टेबल पर बैठा था.
इस वक्त भाभी ने एक नीले रंग की झीनी सी नाइटी डाली हुई थी, जिसमें से उनका गोरा बदन चमक रहा था. नाइटी जरा चुस्त थी, तो भाभी के मोटे चुचे मानो जैसे अभी बाहर फट पड़ेंगे, ऐसा साफ दिख रहा था, उनकी चाल से नाइटी उनके जिस्म से चिपक रही थी, और मैं उनकी हर हरकत पर नजर गड़ाए हुए था.
नाइटी में चूचों के निप्पलों के ऊपर वाली जगह में एक स्टार जैसा कुछ चमकदार नग सा लगा था, जोकि उनके चूचों को और भी पूरा दिखाते हुए भी ढक रहा था. एक इस गहरे गले वाली नाइटी में से भाभी मुझे झुक कर खाना दे रही थीं, जिससे मुझे न केवल ऊपर से बल्कि अंदर से भी उनके पूरे हिमालय के दर्शन हो रहे थे. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं उनके हाव भाव से समझ गया कि भाभी आज मुझसे चुदने को राजी हैं, उनकी सांसें तेज थीं, और जब वो झुकतीं तो उनकी खुशबू मेरे नाक में भर जाती, मुझे गर्म कर देती. मैंने और भाभी ने खाना खाया और रूम में आ गए. कुछ देर मैं भाभी के रूम में ही रहा.
उसी वक्त भाभी बोलीं, “अब तुम सो जाओ, मैं नहा लूं.”
मैंने आश्चर्य जताया कि भाभी ये कौन सा वक्त है नहाने का?
भाभी बोलीं, “मैं रात में नहा कर ही सोती हूं.” ये कहते हुए भाभी ने दोनों हाथ ऊपर करके अपने चुचे हिला दिए.
मैं तो उनकी इस अदा से पागल ही हो गया. मुझे दीवाना सा देख कर भाभी मुस्कुरा कर नहाने चली गईं. मैं अपने कमरे में आ गया, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी. बस बार बार भाभी के चुचे आंखों में आ रहे थे, मैं कल्पना कर रहा था कि उनके गीले बदन को छूने का कैसा एहसास होगा, पानी की बूंदें उनके जिस्म पर कैसे सरक रही होंगी. कुछ देर बाद मैं भाभी के पास आया, तो भाभी बिस्तर में लेटी थीं. “Garam Bhabhi Chudai”
मैं बोला, “भाभी मुझे नींद नहीं आ रही है, क्या मैं आपके पास सो सकता हूं?”
भाभी ने हां कर दी. मैं बस अगले ही एक पल भाभी के पास लेट गया और बिना कुछ सोचे उनसे लिपट गया. मुझे उम्मीद थी कि भाभी कुछ विरोध करेंगी. मगर भाभी ने मुझे अपनी बांहों में समा लिया. मैंने सबसे पहले भाभी की चूचियों में मुंह लगा दिया. उफ्फ्फ, कितने नर्म चुचे थे, उनकी गर्माहट मेरे मुंह में भर गई, मैं जीभ से चाटने लगा, निप्पल को काटने लगा, भाभी की सिसकारियां निकलने लगीं, आह.. उह्ह.. सौरभ, कितना जोर से चूस रहे हो.
भाभी पहले तो ना ना करने लगीं, “क्या कर रहे हो सौरभ, छोड़ भी दो उफ्फ्फ बदमाश!”
मैं भाभी की कुछ नहीं सुन रहा था और भाभी के चूचों से पूरा लिपट गया था. मेरे लगातार चूचे चूसने के बाद भाभी ने मुझे रोकना बंद कर दिया और मुझे अपनी उफनती जवानी में डुबकी लगाने दिया. मैंने उनकी नाइटी के ऊपर से ही उनके पेट पर हाथ फेरा, धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ा, उनकी जांघों को सहलाया.
वो गर्म थीं, पसीने से चिपचिपी, मैंने उंगली से उनकी चूत को छुआ, वो पहले से ही गीली हो चुकी थी, भाभी ने कमर उचकाई, उई.. सौरभ, वहां मत छुओ, लेकिन उनकी आंखें बंद हो गईं, और वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे और करीब खींच रही थीं. मैंने उंगली अंदर डाली, अंदर की गर्मी महसूस की, भाभी कराह उठीं, आह.. ह्ह..
धीरे से, मैंने उंगली घुमाई, उनकी चूत का रस मेरी उंगली पर लग गया, मैंने उसे चाटा, स्वाद इतना नमकीन और मीठा था कि मैं पागल हो गया. काफी देर बाद मैंने भाभी के चूचों को छोड़ा. इसके तुरंत बाद मैंने उनकी नाइटी को निकाल कर फेंक दिया और खुद भी नंगा हो गया. भाभी भी मेरे लंड को देखकर एकदम से मोहित हो गईं. उनकी चुदास भड़क उठी और वो मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगीं. “Garam Bhabhi Chudai”
मैंने कहा, “भाभी जी सब्र करो, आज मेरा केला आपको ही मिलने वाला है.”
भाभी बोलीं, “इसे देख कर तो सब्र ही नहीं होता, पहले एक बार प्यास बुझा दो, फिर बाद में बाकी का खेल कर लेंगे.”
चुदाई की गरम देसी कहानी : दिवाली में चाची ने सेक्स करना सिखाया
मैंने उनकी बात से सहमति जताते हुए उनकी टांगें फैला दीं और दोनों टांगों के बीच में आकर अपने लंड को निशाना दिखाने लगा. भाभी ने लंड को चूत की फांकों में फंसाया और गांड उठा कर सुपारा फंसा लिया. इधर सुपारे का फंसना हुआ और उधर मैंने ठोकर मार दी.
भाभी की मां चुद गई, उनके मुंह से दर्द भरी आह निकल गई ‘उम्म्ह.. अहह.. हय.. ओह..’ भाभी की आंखें फैल गईं और उनकी मुट्ठियों ने बिस्तर की चादर को भींच लिया, उनकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड अंदर घुसते हुए रगड़ खा रहा था, गर्म रस से सराबोर, मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ाया, भाभी की सांसें रुक गईं, आह.. ह्ह.. सौरभ, कितना मोटा है, धीरे डालो.
मैं बिना कोई परवाह किये पूरा का पूरा लंड भाभी की रसीली चूत में डालने लगा. पूरा लंड पेलने के बाद मैं एक पल के लिए रुका और उनकी चूचियों को पकड़ कर दबादब चोदने लगा. एक मिनट में ही भाभी की चूत मस्त हो गई और मेरे लंड का उछल उछल कर स्वागत करने लगी.
मैंने गति बढ़ाई, हर धक्के के साथ भाभी की चूत से चपचप की आवाज आ रही थी, उनके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे, आह.. उह्ह.. जोर से, सौरभ, चोदो मुझे. मैं काफी देर तक भाभी को चोदता रहा. उनकी गांड को सहलाते हुए चुचे चूसते और काटते हुए चुदाई की गति को तेज से तेज करने लगा.
भाभी की गांड की गर्मी हाथ में महसूस हो रही थी, मैं उंगली से उनके गांड के छेद को सहला रहा था, भाभी सिहर उठीं, उई.. वहां मत, लेकिन उनकी कमर और तेज उछलने लगी. भाभी भी मेरे मोटे लंड से चुद कर जन्नत का मजा ले रही थीं. भाभी ने मुझे अपनी चूचियों से चिपका लिया और मेरे बालों में हाथ फेरते हुए लंड की ठोकरों का मजा लेने लगीं. “Garam Bhabhi Chudai”
सच में भाभी की चुदाई में मुझे बहुत मजा आ रहा था, हमारी सांसें मिल रही थीं, पसीने से बदन चिपक रहे थे, कमरे में चुदाई की खुशबू फैल गई थी. कुछ ही देर में भाभी की तेज आह निकलने लगीं और वे झड़ गईं, उनकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया, गर्म रस बह निकला, आह.. ह्ह.. उई.. मैं जा रही हूं सौरभ. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनके झड़ने के कुछ पल बाद मैंने भी अपने लंड का पूरा रस भाभी की चूत में ही भर दिया. स्खलन के आनन्द से हम दोनों की आंखें मुंद गई थीं, मैंने महसूस किया कि मेरा रस उनकी चूत से बाहर टपक रहा था, गर्म और चिपचिपा. एक मिनट बाद जब सैलाब बह गया, तो हम दोनों भाभी देवर सेक्सी बातें करने लगे.
मुझे भाभी की नंगी गांड बहुत मस्त माल लगी थी. मैं बार बार भाभी की गांड पर हाथ फेर रहा था और उंगली भी कर रहा था. उंगली के स्पर्श से भाभी अपनी गांड को उचका रही थीं, आह.. सौरभ, तुम्हारी उंगली कितनी शरारती है, वहां डालो ना. कुछ देर बाद एक और दौर चुदाई का चला और हम दोनों नंगे ही लिपट कर सो गए.
इस बार मैंने भाभी को घोड़ी बनाया, उनकी गांड ऊपर की, लंड पीछे से डाला, हर धक्के में उनकी चूत की दीवारें रगड़ खा रही थीं, भाभी चिल्लाईं, आह.. ह्ह.. जोर से, और मैंने उनके बाल पकड़कर तेज चोदा, हमारी चुदाई की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं. मैं सुबह उठा, तो भाभी से चिपका हुआ था.
मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : 2 आंटी साथ भयंकर चुदाई की मैंने
मैंने उनकी चूचियों को चूसना शुरू किया और अपने खड़े लंड को एक बार फिर से भाभी की चूत में पेल दिया. चुदाई का जलजला फिर से अपनी छटाएं बिखेरने लगा. मैंने भाभी की चूत चोद दी और फिर से सो गया, सुबह की रोशनी में उनका बदन और चमक रहा था, मैंने उनके होंठ चूसे, जीभ अंदर डाली, भाभी ने मेरी जीभ चूसी, हमारी लार मिल गई. “Garam Bhabhi Chudai”
फिर मैंने नीचे जाकर उनकी चूत चाटी, रस चाटा, भाभी की टांगें कांपने लगीं, उई.. सौरभ, जीभ से मत चाटो, लेकिन वो मेरे सिर को दबा रही थीं. काफी देर बाद जब मैं उठा, तो भाभी रसोई में चली गई थीं. मैं उठ कर रसोई में गया. भाभी को पीछे से पकड़ लिया और मस्ती करने लगा, उनकी गांड पर लंड रगड़ा, हाथ से चुचे दबाए, भाभी सिहर उठीं, आह.. सौरभ, रसोई में नहीं.
भाभी बोलीं, “अभी तक मन नहीं भरा तुम्हारा?”
मैं बोला, “नहीं भाभी, जब आप जैसी सेक्सी माल भाभी हो, तो किस देवर का मन भरेगा.”
भाभी बोलीं, “तुम बहुत शैतान हो, यू नॉटी.”
तभी दरवाजे पर दस्तक की आवाज हुई. मैं भाग कर कमरे में जाकर अपना बरमूडा पहनने लगा. उधर भाभी ने भाग कर दरवाजा खोला और उनको अंदर बुला लिया. मैंने वापस आ कर देखा कि ड्राइंग रूम में भाभी की दो सहेलियां अपने 4 बच्चों के साथ आई हुई थीं.
सब लोग आपस में मिल कर बात करने लगे. उनकी बातचीत से मालूम हुआ कि उन तीनों को मार्किट जाना था. भाभी ने मुझसे उन बालकों को शाम तक घर रहने की बोला और वो चली गईं. इधर मुझे भाभी को चोदने की आग लगी थी. मेरी चाहत जैसी चाहत ही शायद भाभी की भी थी. इसलिए वो अपनी सहेलियों से पीछा छुड़ा कर एक घंटे में ही बाजार से वापस घर आ गईं. “Garam Bhabhi Chudai”
वे अपनी सहेलियों के बच्चों को बाहर वाले कमरे में बिठा कर कमरे में चली गईं. भाभी ने अपने कमरे में जाकर ड्रेस बदल ली. अब भाभी फिर से नाईट ड्रेस में आ गई थीं. मैंने भाभी को पकड़ा और अलग ले जाकर चुम्मी लेने लगा, उनके होंठ इतने रसीले थे, मैंने जीभ से चाटा, भाभी ने मेरी कमर पकड़ी, हमारी सांसें गर्म हो गईं.
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : मेरा दोस्त अपनी सगी बहन की बुर पेलता है
उधर भाभी की सहेलियों के बच्चे आवाज देने लगे, “आप कहां हो आंटी?”
तो भाभी भाग कर उनके पास चली गईं. मैंने भाभी को इशारा किया कि अब नहीं रहा जाता, बस जल्दी से चुदवा लो. उधर वे चार बच्चे जान की आफत बनाए हुए थे. भाभी से उन सब बच्चों को लुका छुपी खेलने को कहा.
मैंने कहा, “सिर्फ बच्चे ही क्यों हम सभी लुका छिपी खेलते हैं न.”
मेरी बात सुनकर सब तैयार हो गए. मैं भी साथ में खेलने लगा. फिर एक जना बारी देने जाता, तो सब छिप जाते. दो बार का खेल तो सामान्य हुआ. तीसरी बार में मैं भाभी को लेकर रूम में ही छिप गया. भाभी इस वक्त मेरे आगे खड़ी थीं. मैंने पीछे से उनकी नाइटी उठाई और पेंटी नीचे करके उनकी चूत में लंड पेल दिया. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
भाभी बड़ी मुश्किल में अपनी आवाज दबा सकी थीं. मैं भाभी को पकड़ कर चोदने लगा. भाभी मुझे मना कर रही थीं और वे मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनकी चूत गीली थी, हर धक्के में चपचप की आवाज आ रही थी, भाभी कराह रही थीं, आह.. ह्ह.. सौरभ, बच्चे बाहर हैं, रुको.
तभी मेरी पकड़ ढीली हुई और भाभी उठ कर भागने लगीं. मैंने फिर से उनको पकड़ लिया और एक कोने में ले जाकर पीछे से अपना तन्नाया हुआ लंड उनकी चूत में घुसा दिया. भाभी के चूचों को दबाते हुए मैंने चुदाई के बहुत मजे लिए. चुदाई पूरी करके मैंने लंड को उनकी नाइटी से ही पौंछा और बरमूडा ऊपर कर लिया.
मैं अभी उनको छोड़ना नहीं चाहता था. पर भाभी बाहर भागने को हो गई थीं, मैंने उनकी गांड सहलाई, उंगली डाली, भाभी सिहर उठीं, उई.. सौरभ, कितने शरारती हो. तभी कुछ ही देर में हमारे वाले इस कमरे के बाहर सब बच्चे एक साथ खड़े हो कर आवाज लगाने लगे थे. “Garam Bhabhi Chudai”
भाभी बोलीं, “सौरभ, अभी इतना ही रहने दो, सब आ गए हैं.”
इतना कह कर वे अपनी गांड मटका कर चलते हुए दरवाजा खोलने चली गईं. मैं बेड पर आ गया और उधर से ही भाभी की मटकती हुई गांड को देख रहा था, उनकी मटकाहट से मेरा लंड फिर खड़ा हो गया. भाभी दरवाजा खोल कर अपनी सहेलियों के बच्चों से बात करने लगीं.
एक बच्चा बोला, “आंटी आप मिल गईं, आपने कितनी देर में दरवाजा खोला, वो भैया कहां हैं?”
तभी मैंने पीछे से आकर भाभी की गांड पर दांत से काट लिया. भाभी चिहुंक गईं और मुझे दूर करने लगीं.
भाभी बोलीं, “जाओ अपने सौरभ भैया को कहीं और ढूंढ लो. वे इधर नहीं हैं.”
इतना बोल कर भाभी ने दरवाजा बंद कर लिया. मैंने करीब आकर भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और ले जाकर बिस्तर पर पटक दिया. फिर मैं उनकी चूत खोल कर उनको चोदने लगा. मैं फिर से भाभी की चूचियों से लिपट गया और उनकी मोटी चूचियों को मुंह में भर कर चूसते हुए भाभी को चोदने लगा.
कुछ देर में फिर से दरवाजा बजने लगा, पर इस बार मैं नहीं रुका. मैं भाभी को जोर से चोद रहा था, हर धक्के में भाभी की चूत से रस टपक रहा था, भाभी चिल्ला रही थीं, आह.. ह्ह.. उई.. जोर से सौरभ, बच्चे सुन लेंगे, लेकिन मैंने गति बढ़ा दी, उनके निप्पल काटे, गांड थपथपाई.
कुछ देर में लंड की पिचकारी पर पिचकारी निकलीं और मैंने भाभी के चूचों को जोर से मुंह में भर कर कस कर माल निकाल दिया. मुझे बहुत मजा आया. भाभी की चूचियों पर दांतों के निशान हो गए थे. मुझे भाभी से अलग होने का मन नहीं था, पर होना पड़ा क्योंकि बच्चे परेशान करने लगे थे, हमारी सांसें अभी भी तेज थीं, बदन पसीने से भीगा था.
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : ब्लू फिल्म के जैसी चुदाई करो मेरी
भाभी ने दरवाजा खोल दिया. वे नाइटी डाल कर बच्चों के साथ बाहर जाकर बैठ गईं और उनसे बातें करने लगीं. इधर मैं भी कपड़े पहन कर बाहर आ गया और बैठ गया. शाम होने को थी, बच्चे अपने घर जाने वाले थे. मेरा मन तो भाभी की गांड में अटका हुआ था. मैं बार बार जब भी मौका मिलता, भाभी की चूचियों को और गांड को दबा देता था, उनकी गांड इतनी मुलायम थी कि हाथ डूब जाता था. “Garam Bhabhi Chudai”
फिर उनकी सहेलियां आकर बच्चों को ले गईं. हम भाभी देवर फिर से एक हो गए. जब तक भैया टूर से वापस नहीं आ गए हम दोनों ने जी भरके चुदाई का मजा लिया. मैंने भाभी की गांड भी मार ली थी. उसकी कहानी मैं अगली बार लिखूंगा. मेरे दिन मजे से निकलने लगे थे, हर रात हम नई पोजीशन ट्राई करते, भाभी की चूत का स्वाद लेते, उनकी कराहें सुनते.
इसी बीच मुझे पता लगा कि भाभी अपनी सहेली के भांजे से भी चुद चुकी हैं. ये सुनकर मुझे बहुत जलन हुई कि इतनी सेक्सी सुन्दर भाभी को किसी और ने भी लूट लिया है. ये कहानी मैं आपको बाद में बताऊंगा. इस बारे में मैंने भाभी को चोदते हुए एक दिन पूछ लिया था और भाभी ने भी मजे से बता दिया था कि कैसे वो सहेली के भांजे से चुद गयी थीं. फिर मैंने भी भाभी की सहेली को चोद दिया था. आप अपना प्यार देते रहना, मैं ऐसे ही चुदाई की कहानी लिखता रहूंगा.
दोस्तों आपको ये Garam Bhabhi Chudai की कहानी मस्त लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और Whatsapp पर शेयर करे………….
Discover more from Crazy Sex Story
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Leave a Reply