Damad Sas Bus Chudai
ठंडी की रात थी, और हम पुणे जा रहे थे स्लीपर बस में। मेरी सास, उषा आंटी, को अपनी बहन की शादी अटेंड करने के लिए जाना था, और मुझे ऑफिस के काम से वहीँ पहुँचना था। संयोग से हम दोनों साथ में निकले। बस का एसी चल रहा था, ठंड इतनी कि हड्डियाँ काँप रही थीं। Damad Sas Bus Chudai
हमने ऊपरी बर्थ पर जगह ली, जो थोड़ी प्राइवेट थी – स्लीपर बेड की तरह, लेकिन बस की हलचल से थोड़ा झटका लगता रहता। कंबल ओढ़े हम दोनों लेटे थे, लेकिन जगह तंग होने से हमारे हाथ-पैर एक-दूसरे से सटे हुए थे। आंटी की साड़ी की सिल्की फील मेरी जांघ पर रगड़ रही थी, और उनकी गर्माहट से मेरा शरीर गर्म हो रहा था।
मैंने धीरे से अपनी पोज़िशन चेंज की, अब हमारा चेहरा आमने-सामने था। आंटी की आँखें बंद थीं, लेकिन सांसें तेज़ चल रही थीं। हिम्मत जुटाकर मैंने उनके होंठों पर हल्का सा किस किया। वे कुछ बोलीं नहीं, बस आँखें बंद रखीं। इससे मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ा। मैंने अपना हाथ उनकी कमर पर रख दिया, साड़ी के ऊपर से उनकी मुलायम स्किन महसूस हो रही थी।
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फिर से कोई रिएक्शन नहीं। अब मैंने जोर से किस किया, होंठ दबाए और जीभ अंदर डाल दी। इस बार आंटी ने जवाब दिया – उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई, और वे मेरी ओर खिंच आईं। ठंड भूल गए हम दोनों, बस का शोर भी दूर लग रहा था। मेरा हाथ ऊपर सरका, उनकी ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। चोली खुलते ही उनकी भरी हुई छातियाँ बाहर आ गईं – गोल, भारी, और निप्पल्स सख्त हो चुके थे ठंड से।
मैंने मुंह झुकाया और एक निप्पल को चूस लिया, जीभ से घुमाया। आंटी की सिसकी निकली, ‘आह… बेटा… ये क्या…’ लेकिन उनका हाथ मेरी पीठ पर दौड़ गया, मुझे और करीब खींच लिया। मैंने दूसरी छाती को भी चूसा, दांतों से हल्का सा काटा, और वे काँप उठीं। उनकी साड़ी नीचे सरक गई थी, पेट की नरमी महसूस हो रही थी।
अब आंटी का हाथ मेरी पैंट पर गया। उन्होंने ज़िप खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया – वो पहले से ही कड़ा हो चुका था, ठंड में भी गर्म और फूला हुआ। उनका नरम हथेली लंड को सहलाने लगी, ऊपर-नीचे रगड़ने लगी। ‘कितना सख्त है तेरा… तेरी बीवी को तो रोज़ मजा मिलता होगा,’ उन्होंने फुसफुसाया, आँखों में चमक थी।
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मैंने जवाब में उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर सरका दिया। पैंटी गीली हो चुकी थी, चूत से रस टपक रहा था। मैंने पैंटी एक तरफ की और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया – गर्माहट इतनी कि बस में ठंड का नामोनिशान मिट गया। ‘डालो ना… चोदो अपनी सास को,’ आंटी बेचैन होकर बोलीं, उनकी टाँगें फैल गईं।
मैंने कमर पकड़ी और एक झटके में लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया। आह… कितनी टाइट और गीली थी! बस की हलचल से हर धक्का और गहरा हो जाता। मैंने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया, लंड अंदर-बाहर करते हुए उनकी क्लिट को उंगली से रगड़ा। आंटी की चूत मेरे लंड को चूस रही थी, रस बह रहा था कंबल पर।
वे मेरी छाती में नाखून गाड़ रही थीं, ‘हां… जोर से… चोदो बेटा…’ हम दोनों पसीने से तर हो गए, लेकिन चुदाई का नशा ऐसा कि रुकना नामुमकिन था। करीब 15 मिनट बाद, मैं झड़ने को तैयार था। ‘आंटी… मैं आ रहा हूँ…’ मैंने सिसकी ली। उन्होंने चूत कस ली, ‘अंदर ही छोड़ दो… भर दो मेरी चूत को।’
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एक आखिरी धक्के के साथ मैंने गर्म वीर्य उनकी चूत में उंडेल दिया। आंटी भी काँप गईं, उनका ऑर्गेज्म आ गया – चूत सिकुड़ रही थी, रस मिलकर बह रहा था। हम दोनों हाँफते हुए लेटे रहे, कंबल से ढके। बस पुणे की ओर बढ़ रही थी, लेकिन हमारा सफर अभी शुरू ही हुआ था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
पुणे पहुँचने के बाद, शादी की तैयारियाँ थीं, लेकिन हमारे बीच वो राज़ था। पहले दिन होटल में चेक-इन करते ही, आंटी ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे किस कर लिया। ‘कल शादी है, आज रात तेरी सास को चोद ले,’ बोलीं। मैंने उन्हें बेड पर पटक दिया, साड़ी उतार दी और डॉगी स्टाइल में चोदा।
लंड पीछे से घुसाया, गांड पर थप्पड़ मारे, और वे चीखीं – ‘हां… पीछे से जोर से… फाड़ दो मेरी चूत।’ पूरी रात हमने अलग-अलग पोज़िशन्स ट्राई कीं – मिशनरी में, काउगर्ल में, जहाँ आंटी ऊपर बैठकर लंड पर उछल रही थीं। हर बार मैं अंदर ही झड़ता, उनकी चूत को भरता। दूसरे दिन शादी की रस्मों के बीच, ब्रेक में हम बाथरूम में मिले।
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आंटी ने साड़ी ऊपर की और स्टैंडिंग पोज़िशन में चुदाई की। मेरे लंड को उनकी चूत में डाला, दीवार से सटाकर धक्के मारे। पानी चल रहा था, लेकिन हमारा रस ज्यादा बह रहा था। ‘तेरा लंड कितना मस्त है… रोज़ चोदोगे ना?’ वे बोलीं। मैंने हाँ कहा और फिर से भरा दिया। तीसरे दिन, शादी खत्म होने के बाद हम घूमने गए।
पार्क में छुपकर, आंटी ने मेरी गोद में बैठकर चुदाई की – रिवर्स काउगर्ल स्टाइल। उनकी गांड मेरी जांघों पर रगड़ रही थी, लंड गहराई तक घुसा। लोग पास से गुज़र रहे थे, लेकिन थोड़ी झाड़ियों में हम सेफ थे। आंटी की सिसकारियाँ दबी हुईं, लेकिन मजा दोगुना। चौथे दिन ऑफिस वर्क के बीच, आंटी मेरे साथ आईं।
मीटिंग रूम में अकेले पकड़े और टेबल पर लिटाकर चोदा। उनकी टाँगें कंधों पर रखीं, लंड तेज़ी से पेला। ‘बेटा… तेरी सास तेरी रंडी बन गई,’ वे हँसते हुए बोलीं। मैंने मुंह बंद कर दिया किस से और झड़ गया। पांचवें दिन, होटल के पूल साइड पर रात को। आंटी बिकनी में थीं, लेकिन हम पानी में उतरे और वॉटर सेक्स किया।
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लंड उनकी चूत में घुसाया, पानी के छींटों के साथ धक्के मारे। फ्लोटिंग पोज़िशन में, वे मेरी कमर लपेटे हुए चुद रही थीं। ठंडा पानी, लेकिन हमारी गर्मी से उबल रहा था। छठे दिन, ट्रिप खत्म होने से पहले, कार में ड्राइव पर। आंटी ने ड्राइवर सीट के पास बैठकर हैंडल पकड़ा, और मैं पीछे से चोदा। कार की सीट पर झुकाकर, लंड गांड की तरफ से चूत में डाला। रोड पर गाड़ियाँ थीं, लेकिन टिंटेड ग्लास ने बचाया।
‘सात दिन हो गए, लेकिन अभी और चाहिए,’ बोलीं। सातवें दिन, वापसी से पहले आखिरी बार। बेड पर, 69 पोज़िशन से शुरू किया – मैं उनकी चूत चाट रहा था, वे मेरा लंड चूस रही थीं। फिर मिशनरी में खत्म किया, धीरे-धीरे पेला और अंदर झाड़ा। आंटी की चूत अब मेरी शक्ल की हो चुकी थी, हर पोज़िशन में मजा दोगुना। ‘घर जाकर भी जारी रखेंगे बेटा,’ उन्होंने कहा। हमारा राज़ अब हमेशा का साथी बन गया।
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