Dadi Chut Malish Story
दोस्तों आप सभी का फिर से स्वागत है मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग दोस्त की बड़ी गांड वाली दादी को गोवा में चोदा 2 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था की मैं आशीष के घर गया था और उसके घर के सभी लोग बाहर गए थे, केवल दादी थी घर पर. फिर मैंने दादी की तेल मालिश की और दादी की मालिश करते वक़्त उनकी चूत को देखा. अब आगे- Dadi Chut Malish Story
दादी की आवाज़ सुनते ही मेरे दिल की धड़कन एकदम बंद जैसी हो गई— मेरे हाथ से फोन फिसल कर बिस्तर पर गिर ही गया। सांस रुक गई, सोचा अब पकड़ा गया ना भोसड़ी के, आज तो पूरी पोल खुल जाएगी। पर किस्मत मेरी साथ थी.
फोन बिल्कुल उल्टा गया, स्क्रीन दादी की तरफ नहीं, गद्दे में घुस गया। मैंने जल्दी से हाथ बढ़ाकर उठाया, जेब में घुसाया और चेहरे को एकदम साधा बनाकर मुस्कुराया। ‘अरे दादी, कुछ नहीं, बस ऑनलाइन देख रहा था कि किस तरह के मसाज से पैरों का पुराना दर्द जल्दी ठीक हो जाता है,’ मैंने बोला, और मेरी आवाज़ भी कैसे काँप नहीं रही थी— ये मेरा अपना ही कमाल था।
दादी तो सीधी-सादी बूढ़ी औरत थी, एकदम खुश हो गई। ‘अच्छा बेटा, तू तो बहुत होशियार है ना! ठीक है जा जारी रख,’ वो बोली और फिर से आंखें बंद कर ली, हाथों को सिर के नीचे टिका दिया। मैं फिर से मसाज करने लगा।
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तेल की गंध कमरे में फैल रही थी, और मैं धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था— घुटनों से ऊपर निकलकर, जांघों तक पहुंच गया। जैसे ही मेरा हाथ दादी की अंदरूनी जांघ के पास गया, वो अचानक हाथ उठाकर मेरा कलाई पकड़ लिया। ‘बस बेटा, इतना काफी है, ऊपर तक नहीं,’ वो बोली थोड़ी शरमाकर।
मैंने तो पहले से ही दिमाग लगा रखा था। मैंने सर हिलाकर कहा, ‘अरे दादी आप ये गलती करती हो न! पैरों का दर्द असल में जांघों की नसों में फंसा रहता है। आप यहीं रोकोगी तो दर्द कल ही वापस आ जाएगा, फिर मैं क्या करूंगा?’ दादी थोड़ी सोच में पड़ गई, फिर हाथ हटा दिया।
‘अच्छा ठीक है, तू जानता है तो चल लगा दे जांघों में भी तेल,’ वो बोली और अपनी नाइटी को घुटनों से कट तक ऊपर खींच लिया। भगवान गवाह है, उसे शायद याद ही नहीं रहा था कि आज उसने पैंटी नहीं पहनी है—नाइटी के नीचे सीधी उसकी चूत बाहर आ गई, जिस पर हल्के काले बाल लहरा रहे थे।
मेरे तो जींस के अंदर मेरा लंड पहले से ही पत्थर जैसा खड़ा था, अब तो ऐसा लग रहा था कि जींस की ज़िप अपने आप खुल जाएगी। इतना मोटा हो गया था कि जांघों में दर्द हो रहा था, सांस मेरी भी बंद हो रही थी। 1000 पोर्न फिल्में देखी हैं मैंने पर किसी में भी ऐसा सुखद नज़ारा नहीं देखा.
बूढ़ी दादी की खुली हुई चूत, तेल की चमक से चमक रही उसकी गोरी जांघें, आंखें बंद करके आराम कर रही उसकी सीधी सी शक्ल। मैंने खुद को कसकर काबू में रखा— एक गलती हुई तो ये सोने की मुर्गी हाथ से निकल जाएगी, ये तो मेरे दोस्त की दादी थी ना!
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मैंने हाथ में तेल लिया, दादी की बाहरी जांघों पर घिसना शुरू किया। गोश्त इतना नरम था जैसे कोई पकी हुई मिठाई, मेरा हाथ खुद ही अंदर की तरफ खिंच रहा था। हर बार जब मेरा हाथ चूत के पास से गुजरता, दादी की छाती एकदम ऊपर उठ जाती थी, सांसें तेज़ हो जाती थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने समझ लिया— वो भी अंदर से जल रही है। फिर मैंने नया खेल खेला। दूसरी बार तेल की कटोरी ली, जांघों पर तेल गिराया, और जान बूझकर एक हल्की सी धार सीधे दादी की चूत के ऊपर गिरा दी। ‘अरे!’ दादी की आंखें एकदम झटके से खुल गई, उसकी चूत एकदम सिकुड़ गई।
मेरी तो जान ही निकल गई थी— सोचा अब तो पकड़ा ही गया। पर मैंने हिम्मत रखी, जल्दी से बोला, ‘अरे सॉरी सॉरी दादी! गलती से गिर गया मेरे हाथ से, रुको मैं अभी साफ कर देता हूं!’ दादी उठने की कोशिश की, पर ये वो मौका था जो मेरी हवस के हाथ में आ चुका था।
मैंने एक हाथ एकदम उसके पेट पर जोर से रख दिया, वो वापस बिस्तर पर ही लेट गई। ‘नहीं दादी छोड़ो मैं साफ कर देता हूं,’ मैंने बोला, और मेरा दूसरा हाथ बिना रुके दादी की चूत के बालों के बीच घुस गया। जैसे ही मेरी उंगलियां उसकी चूत के नरम दाने पर घूमी, दादी का पूरा शरीर एक झटके से काँप गया।
उसकी आंखें एकदम ऊपर की तरफ घूम गईं, मुंह अचानक खुल गया— एक नीची, दबी हुई आह उसके गले से निकली, जैसे किसी ने उसके दिल को हल्के से दबा दिया हो। उसकी चूत तुरंत गीली हो गई, मेरी उंगली पर एकदम चिपचिपी नमी फैल गई, और वो बिल्कुल बोल नहीं पाई— सिर्फ हांफने लगी।
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दादी की आवाज़ टूट रही थी, काँप रही थी, जैसे उसने पूरी ज़िंदगी में कभी ऐसा महसूस नहीं किया था। “आआरेय ब्बेटा… आआ कोई बात नहीं… मैं साफ कर लूंगी…” वह हांफते हुए बोली, पर उसका शरीर इतना ऐंठ रहा था कि वह हिल भी नहीं पा रही थी।
मैंने तो पहले से ही हिम्मत जुटा ली थी—”ओहो दादी, देखो ना तेल थोड़ा अंदर तक चला गया ना, मैं ही साफ कर दूंगा ना!” मैंने एक ज़ोर से धक्का दिया, पहली एक फिर दूसरी उंगली एकदम उसकी गीली चूत में घुसा दी। उसका पेट एकदम बिस्तर से ऊपर उठ गया, हवा में ही रह गया, जैसे किसी ने उसकी रूह को खींचकर ऊपर कर दिया हो।
मैंने कोई वक्त बर्बाद नहीं किया, हाथ को पूरी रफ्तार से अंदर-बाहर करने लगा—5-6 झटके ही लगे थे कि मेरा खुद का मुथ फिर से निकल आया। मैं अचानक रुक गया, दोनों हांफ रहे थे— मैं थोड़ा कम, वह बिल्कुल बेदम। उसका पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था.
नाइटी के किनारे से उसके बांहों के बाल भी चिपके हुए दिख रहे थे, और उसकी चूत की खुशबू इतनी तेज़ थी कि मेरे नाक तक बिना कुछ कहे पहुंच रही थी। मेरा पूरा हाथ उसके चूत के पानी से गीला हो चुका था, चिपचिपाहट कलाई तक फैल गई थी।
दादी धीरे से उठने लगी, मेरा लंड अभी भी पत्थर जैसा खड़ा था, और पतलून पर पहले से ही एक बड़ा गीला गोला बन चुका था। मैं जल्दी से खड़ा होकर पलट गया, उसे मेरा लंड दिखाई न दे— मेरा गला भी सूख रहा था, दिल धड़क रहा था।
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दादी के गाल पूरी तरह लाल हो गए थे, उसने जल्दी से अपनी नाइटी नीचे खींच ली, पर उसकी आंखों में गुस्सा नहीं था, बस शर्म और एक अजीब सी हलचल थी। “सॉरी दादी, मैं हाथ धोकर आता हूं,” मैंने जल्दी से कहा और बाथरूम की तरफ भाग गया।
अंदर पहुंचते ही मैंने पतलून और कच्चा नीचे खींचा, दादी की चूत के पानी से गीले हाथ को पागलों की तरह सूंघने लगा। वो खुशबू इतनी मीठी और कामुक थी कि मेरा दिमाग तुरंत खराब हो गया। दूसरे हाथ से मैं अपने खड़े लंड को मसलने लगा, जैसे सारी दुनिया गायब हो गई हो, मैं बस उस नशे में डूबा हुआ था।
ये मेरे दोस्त की दादी थी, 60 साल की बूढ़ी औरत, पर मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं स्वर्ग में हूं, कभी न खत्म होने वाले सुख में। जल्दी से मैंने अपनी पतलून से गीला धब्बा छिपाया, कपड़े सही किए और बाहर आ गया। दादी फिर से बिस्तर पर लेट चुकी थी। “Dadi Chut Malish Story”
उससे पहले कि वह कुछ बोलती, मैंने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा: “सॉरी दादी, मुझसे गलती से तेल गिर गया… मुझे आदत ही नहीं है ना किसी के पैरों में तेल लगाने की, मेरी अपनी दादी तो बचपन में ही चली गई ना…” ये सुनकर दादी तुरंत इमोशनल हो गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी आंखों में पानी आ गया, उसने हाथ बढ़ाकर मेरा हाथ थाम लिया: “ओ मेरा बच्चा… रो मत, मैं हूं ना तेरी दादी!” फिर वह बोली: “अब जा के सो जा बेटा।” मेरा लंड अभी भी हिल रहा था, मैंने दिमाग लगाया और मासूम सा चेहरा बनाकर कहा: “दादी, आशीष तो रूम में दरवाजा बंद करके सो गया है, बाहर निकल ही नहीं रहा, बहुत थक गया होगा शायद। कोई बात नहीं, मैं सोफे पर ही सो जाऊंगा।”
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थोड़ा सा उदास चेहरा भी बना दिया। दादी तो बिल्कुल फस गई। उसने फौरन हाथ मारकर बिस्तर की तरफ खाली जगह दिखाई: “अरे बेटा सोफे पर क्यों सोएगा? ठंड भी लग जाएगी, यहां मेरे पास ही आकर सो जा!” मेरे तो दिल में ऐसी खुशी फटी कि इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने में भी इतनी खुशी नहीं हुई होगी जितनी इस एक लाइन को सुनकर हुई थी।
वहां खाली जगह दादी के ठीक बगल में थी, नाइटी की गर्माहट अभी भी बिस्तर पर फैल रही थी, और मैं जानता था कि आज रात उसकी बड़ी चूत को मेरा लंड जरूर मिलेगा। अगर कहानी अच्छी लगी हो तो फीडबैक जरूर दे जिसका अगला पार्ट जल्दी आएगा टेलीग्राम “chikutvv” या ईमेल पार: chikutvstories@gmail.Com
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