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छोटी बहन के पति के मोटे लंड से चुदवा लिया

September 3, 2026 by crazy Leave a Comment

Chudasi Sali Fuck Kahani

मेरा नाम माधुरी है, मैं तेईस वर्ष की हूँ और इंदौर में रहती हूँ। लगभग तीन वर्ष पहले मेरी शादी हुई थी। शादी से पहले भी मैं बहुत ही सुन्दर दिखती थी, लेकिन शादी के बाद मेरा रंग रूप और भी ज्यादा निखर आया है, अब तो मैं एक अप्सरा से कम नहीं लगती हूँ! Chudasi Sali Fuck Kahani

मेरा फिगर हैं 36-24-36, कद पांच फुट छह इंच, रंग बहुत गोरा, छाती उठी हुई और उस पर दो कसी हुई चूचियाँ, जिनके ऊपर मोटे काले अंगूरों जैसी घुन्डियाँ, बल खाती हुई कमर पतली, चौड़े नितम्ब, सुडौल जांघें और लंबी तथा पतली टाँगें! नाभि के नीचे और टांगों के बीच में काले रंग के बालों के बीच में विराजमान मेरी संकरी सी गोरी चूत!

तीन वर्ष की शादी के बाद भी कोई बच्चा ना होने की वजह से अभी तक इस चूत में कोई बदलाव नहीं आया, अभी भी वह तीन वर्ष पहले जैसी कुंवारी और संकरी दिखती है! आज भी जब मैं चुदती हूँ तो वही पहली रात जैसा ही आनन्द आता है! यह घटना लगभग एक वर्ष पहले की है जब मेरी इक्कीस वर्षीया छोटी बहन प्रीटी की शादी, झाँसी में रहने वाले परिवार के तेईस वर्षीय मनीष से हुई थी।

मनीष कानपुर में एक कंपनी में इंजीनियर है और प्रीटी के साथ कानपुर में ही रहतें हैं। मेरी छोटी बहन भी मेरे तरह बहुत सुंदर है और उसका शरीर भी बहुत मादक है, हम दोनों बिल्कुल जुड़वाँ लगती हैं। मनीष का कद छह फुट है, चौड़ी छाती है और वह स्वस्थ तथा बलिष्ठ पुरुष है! नियमित योग और व्यायाम के कारण उसका सिक्स-पैक शरीर अत्यंत ही आकर्षक है!

शादी के तुरंत बाद मनीष और प्रीटी जब मेरे घर इंदौर में दो दिन के लिए रहने आये थे, तब मैंने उन्हें अपने साथ वाले बेडरूम में ही ठहराया था। दोनों बेडरूम के बीच में एक दरवाज़ा था, जिस में से एक दूसरे कमरे में हो रही आवाजें सुनाई देती थी और उस दरवाज़े के की-होल में से उस कमरे के अंदर का नज़ारा भी दिखाई देता था!

रात को जब मेरे पति सो गए, तब मैं उठ कर उस दरवाज़े के पास खड़े होकर दूसरे कमरे की आवाजें सुनने लगी। अंदर मनीष प्रीटी को चुदाई के लिए मना रहा था और वह कुछ नखरे दिखा रही थी! मुझसे रहा नहीं गया और मैंने की-होल में से देखा तो पाया कि कमरे की लाईट जल रही थी तथा मनीष अर्धनग्न खड़ा था और प्रीटी के कपड़े उतार रहा था।

जब उसने प्रीटी को पूरा नग्न कर दिया तब वह सीधा खड़ा हो कर प्रीटी से उसका जांघिया उतारने को कहा। प्रीटी उठ कर बेड पर बैठ गई और उसका जांघिया नीचे करके उसमें से कैद लौड़े को आज़ाद कर दिया। मैं तो उस लौड़े को देख कर दंग रह गई, मनीष का लौड़ा आठ इंच लंबा और दो इंच मोटा था तथा उसका सुपाड़ा तो ढाई इंच मोटा था!

लौड़ा एकदम तना हुआ था, उसके ऊपर की नसें फूली हुई थीं और उसका सुपाड़ा बाहर निकला हुआ था। प्रीटी पहले उस लौड़े को बड़े प्यार से अपने हाथों से मसलती रही, फिर उसने उसको अपने मुँह में डाल कर चूसना शुरू कर दिया। उधर मनीष प्रीटी की चूचियाँ दबा रहा था और उसकी घुंडियों को मसल रहा था।

कुछ देर के बाद मनीष ने प्रीटी को उठा कर बेड पर लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच में मुँह डाल कर उसकी चूत को चूसने तथा चाटने लगा। लगभग पांच मिनट के बाद प्रीटी चिल्लाने लगी और मनीष को चुदाई के लिए कहने लगी। मनीष प्रीटी की दोनों टांगों के बीच में बैठ गया और उसने अपना लौड़ा उसकी चूत के मुँह पर रख कर एक धक्का दिया तथा आधा लौड़ा प्रीटी की चूत के अंदर कर दिया।

फिर उसने दूसरा धक्का लगाया और पूरा लौड़ा चूत में धकेल दिया! प्रीटी ने हल्की सी चीख मारी और मनीष से लिपट गई! इसके बाद अगले दस मिनट तक मनीष उछल उछल अपना लौड़ा प्रीटी की चूत के अंदर बाहर करता रहा और प्रीटी भी उछल उछल कर मनीष का साथ देती रही।

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दस मिनट के बाद अचानक मनीष ने तेज़ी से चुदाई करने लगा और फिर दोनों ही चीखने चिल्लाने लगे तथा एकदम से अकड़ कर एक दूसरे पर ढेर हो गए। फिर दोनों अलग हुए, लाईट बंद कर दी और सो गए। मैं भी अपने बिस्तर पर आकर लेट गई और अभी अभी देखे नज़ारे के बारे में सोचने लगी!

मेरी चूत में खुजली शुरू गई थी, मैं भी चुदना चाहती थी, इसलिए मैं अपने पति से चिपट गई और उनके लौड़े को पकड़ कर मसलने लगी। मेरे पति का लौड़ा मनीष के लौड़े के सामने कुछ भी नहीं था, मेरे पति का लौड़ा सिर्फ छह इंच लंबा और सवा इंच मोटा था और सुपाड़ा तो डेढ़ इंच मोटा ही था तथा टोपी के अंदर ही रहता था!

मुझे प्रीटी से ईर्ष्या हो रही थी, मैं भी मनीष का लौड़ा अपनी चूत में डलवाना चाहती थी लेकिन उस समय के हालात और चूत की खुजली से मजबूर मैं अपने पति के लौड़े को ही जगाने लगी थी। मेरे मसलने पर लौड़ा तन गया और मेरे पति भी जाग गए! मेरी चुदाई की इच्छा को समझते हुए उन्होंने अपने और मेरे कपड़े उतार दिए तथा अपने लौड़े को मेरे मुँह में देकर मेरी चूत को चूसने लगे।

मैं तो पहले से ही गर्म थी इसलिए दो मिनट में ही मैंने पानी छोड़ दिया! मेरी यह हालत देख मेरे पति ने मुझे सीधा लिटाया और अपने लौड़े को एक ही झटके में मेरी चूत में धकेल दिया और मेरी चुदाई शुरू कर दी। अगले दस मिनट में मैंने दो बार पानी छोड़ा और फिर जाकर मेरे पति ने अपने पिचकारी छोड़ी और मेरी आग शांत की। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

इसके बाद हम सो गये, लेकिन क्योंकि मेरी संतुष्टि नहीं हुई थी इसलिए सपने में भी मुझे मनीष का लौड़ा ही दिखाई देता रहा! अगले दिन सुबह हम सब इंदौर घूमने गए, शॉपिंग भी की और खाना भी बाहर ही खाया। रात की गाड़ी से मनीष और प्रीटी वापिस कानपुर चले गए और हम लोग वापिस अपने घर आ गए।

लेकिन उस रात को मैंने अपने जिंदगी में एक बदलाव देखा, मुझे दिन रात मनीष के आठ इंच लंबे और दो इंच मोटे तथा ढाई इंच मोटे सुपारे के सपने आने लगे। मनीष के लौड़े की चाहत में मुझे पति के छोटे और पतले लौड़े से संतोष मिलना भी बंद हो गया था।

इसलिए मनीष के लौड़े को पाने के लिए मेरी इतनी तड़प बढ़ गई थी और मैं कई बार उंगली, बैंगन या खीरे का प्रयोग करके अपने आप को संतुष्ट कर लेती थी! तीन माह के बाद एक दिन प्रीटी का फोन आया और उसने बताया कि मनीष अगले सोमवार को एक सप्ताह के लिए इंदौर में ट्रेनिंग के लिए आ रहा था और हमारे पास ही रहेगा।

मैंने उसे कहा कि यह तो अच्छी बात है और आग्रह किया कि वह भी साथ में आ जाये, तो वह कहने लगी कि शादी के बाद वह माँ और पिताजी के पास नहीं गई थी, इसलिए वह इन दिनों उनके पास झाँसी जा रही थी। मनीष अकेला ही आ रहा था यह सुन कर मुझे बहुत खुशी हुई, मुझे ऐसा लगने लगा कि जैसे मन की मुराद पूरी हो गई हो और मुझे मनीष का लौड़ा मिल गया हो!

मनीष को चोदने के लिए कैसे राज़ी किया जाए इसकी तरकीब सोचने लगी, लेकिन दो बातें समझ नहीं आ रहीं थी। पहली यह कि मनीष चोदने को राज़ी भी होगा या नहीं और दूसरी कि मेरे पति के घर में होते हुए मैं और मनीष चुदाई कैसे कर पायेंगे! इसी उलझन में समय बीत गया और सोमवार सुबह मनीष आ गया।

मैंने इस बार भी मनीष को अपने बेडरूम के बगल वाले बेडरूम में ही ठहराया और उसकी सुख सुविधा कि सभी वस्तुओं को खुद ही उस कमरे में रख दीं। मनीष सुबह आने के बाद नहा धोकर तैयार हुआ और नाश्ता कर के ट्रेनिंग पर चला गया। दोपहर को मेरे पति जब घर आये तो उन्होंने बताया कि उन्हें उसी रात को व्यापार के सिलसिले में चार दिनों के लिए चेन्नई, बैंगलोर और हैदराबाद जाना है और वह शुक्रवार सुबह तक ही वापिस आयेंगे। “Chudasi Sali Fuck Kahani”

उन्होंने कहा कि मैं उनका सामान तैयार कर के रख दूं ताकि वह शाम को घर से सामान लेते हुए हवाई अड्डे चलें जायेंगे। पति के मुंह से यह समाचार सुन कर मुझे लगा कि मेरी लाटरी निकल आई है, अपनी किस्मत पर बहुत खुशी हुई और मुझे लगा कि शायद भगवान भी यही चाहते हैं कि मैं मनीष के दमदार लौड़े का खूब मज़ा लूँ!

पांच बजे मेरे घर पति आये और अपना सामन लेकर हवाई अड्डे चले गए। शाम छह बजे मनीष आ गया और चाय पीकर अपने कमरे में आराम करने चला गया। मैंने भी उसे परेशान नहीं किया और आराम करने दिया क्योंकि मैं जानती थी कि मैं उसे रात को बहुत परेशान करने वाली थी।

आठ बजे मैं मनीष के कमरे में गई तो देखा के वह गहरी नींद में सो रहा था। तब मैंने उसके और अपने कमरे के बीच वाले दरवाज़े की चिटकनी खोल दी। इसके बाद मैंने अपने कमरे में आकर उस दरवाज़े को खोल कर तस्सली भी कर ली और अपने कपड़े बदल कर नाइटी पहन ली।

रात नौ बजे मैंने मनीष को जगाया और हम दोनों ने खाना खाया और कुछ देर बाहर गार्डन में टहलते रहे। लगभग दस बजे हम अंदर आये तो मैंने मनीष से पूछा कि क्या वह कॉफी पीयेगा तो उसने हाँ कह दी। मैंने उसे कमरे में जाने को कहा और कॉफी बनाने चली गई। रसोई में मैंने गैस पर पानी उबलने के लिए रखा और जल्दी से अपनी नाइटी के नीचे पहनी हुई ब्रा और पैंटी उतार कर वहीं रसोई में रख दी।

अब मैं चुदने के लिए मानसोक और शारीरिक तौर पर बिल्कुल तैयार थी, मेरी आँखों के आगे मनीष का लंबा, मोटा और तगड़ा लौड़ा दिखाई देने लगा था और मेरी चूत में थोड़ी खलबली भी शुरू हो गई थी। जैसे ही कॉफी बन गई, मैं उसे मनीष के कमरे में ले गई तो देखा कि बेड पर उसका सामान बिखरा हुआ था और मनीष सिर पकड़े बैठा हुआ था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

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मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उसने बताया- प्रीटी ने रात के सोने वाले कपड़े तो बैग में रखे ही नहीं!

शायद पहली बार सामान बाँधा था इसलिए उसने बैग में पेंट और कमीज तो रख दी थी, लेकिन बनियान और जांघियाँ भी नहीं रखे थे!

मैंने उसे कहा- इसमें परेशान होने की बात नहीं!

और मैंने उसे रात के लिए अपने पति की लुंगी दे दी। काफी पीने के बाद मैंने मनीष से कहा कि वह अपना बनियान और जांघियाँ उतार दे ताकि मैं उन्हें अभी धो दूँ ताकि सुबह तक सूख जाएँ! वह कल वही पहन जाए और कल ही मैं उसके लिए नए बनियान और जांघियाँ ला दूँगी! “Chudasi Sali Fuck Kahani”

मेरी बात मान कर मनीष कपड़े बदलने के लिए बाथरूम में घुस गया! उसे अंदर गए अभी कुछ सेकण्ड ही हुए थे कि मैं भी बाथरूम का दरवाज़ा खोल कर उसमे घुस गई। मैंने देखा कि मनीष बिल्कुल नंगा खड़ा मूत रहा था! मुझे बाथरूम के अंदर देख कर वह हकबका गया और एकदम घूम गया!

मैंने उसे सँभालने का मौका ही नहीं दिया और मैं उसके पास जाकर उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा कि उसे घबराने और हैरान होने कि जरूरत नहीं है। मैंने उसे कंधों से पकड़ कर घुमाया और उसे अपने सामने कर उसके लौड़े को पकड़ लिया और बताया कि मैं उसके लौड़े को अच्छी तरह देखा हुआ है!

मनीष अपने लौड़े को छुड़ाने की कोशिश करता रहा पर मैंने उसको नहीं छोड़ा। उस समय उसका लौड़ा छोटा सा हो रखा था इसलिए मैं उसको मसलने लगी और आगे पीछे हिला कर बड़ा करने लगी।देखते ही देखते उसका लौड़ा तन कर लोहे की छड़ जैसा हो गया, तब मैंने नीचे बैठ कर उसे अपने मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी।

मनीष तो बहुत मना करता रहा लेकिन मैं ही नहीं मानी और चुसाई चालू रखी। क्योंकि मनीष को कुछ समझ नहीं आ रहा था इसलिए वह वहीँ खड़ा खड़ा आह्ह… आह्ह्ह्ह… आह्ह… करता रहा! फिर मैंने तेज़ी से चूसना शुरू किया और उसके ढाई इंच के टट्टों को भी हल्के हल्के मसलना शुरू कर दिया।

मेरे ऐसा करने से चुसाई का असर दुगना हो गया और दो मिनट में ही मनीष ने आह्ह्ह्ह्ह्… की ज़ोरदार आवाज़ निकलते हुए अपनी पिचकारी मेरे मुँह में छोड़ दी। इसके लिए मैं तैयार थी और उसका बहुत ही स्वादिष्ट, कुछ नमकीन और कुछ खट्टा जैसा वीर्य रस मैंने गटागट पी लिया तथा लौड़े के छेद में से भी बचा हुआ रस चूस कर खींच लिया। फिर मैंने मनीष के लौड़े और टट्टों को चाट कर साफ़ किया और उसे बेडरूम में जाने दिया। “Chudasi Sali Fuck Kahani”

इसके बाद मैंने मनीष के बनियान और जांघिये को धोया और बेडरूम में पंखे के नीचे सूखने को फैला दिए। मनीष ने बेड पर फैले सामान को समेट कर, लुंगी पहने बेड पर बैठा हैरान सा मुझे यह सब करते हुए देखता रहा था! इसके बाद मैं उसके पास जाकर बैठ गई और उसका एक हाथ अपने हाथों में ले कर पूछा कि वह हैरान परेशान क्यों है?

तो उसने कहा कि उसे समझ नहीं आ रहा कि कुछ देर पहले यह सब क्या और कैसे हुआ था! उसने मुझसे पूछा कि मैंने उसका लौड़ा पहले कब देखा था तो मैंने उसे बताया कि जब वे लोग मेरे यहाँ आये थे तब उन्हें चुदाई करते हुए देखा था और मैंने उठ कर अपने कमरे वाला दरवाज़ा खोल कर उसे की-होल के बारे में सब बताया!

मनीष मेरी बात सुन कर थोड़ा शरमाया और फिर मुस्करा कर कहा- दीदी, आप बहुत ही शातिर हैं!

फिर उसने मुझसे कहा- आपने मुझे और प्रीटी को नग्न रूप में चुदाई करते हुए देख लिया, और अब मेरा लौड़ा चूस कर उसका रस भी पी लिया लेकिन मुझे अभी तक अपने किसी भी अंग के दर्शन नहीं कराये?

तब मैंने उसे इशारा किया कि इसके लिए उसे ही मेहनत करनी पड़ेगी और मैं कमरे के बीच में आँखें बंद करके खड़ी हो गई! मनीष उठ कर मेरे पास आया और मेरी नाइटी को ऊपर उठा कर उतार दिया। नाइटी के नीचे मुझे बिलकुल नग्न पा कर वह मेरी मंशा समझ गया कि मैं इस अवसर के लिए पहले से ही तैयार हो कर आई हूँ! ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

उसने मेरी नाइटी को वहीं फेंक कर मुझे अपनी गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया तथा मेरे करीब ही बैठ गया। वह अपने हाथ मेरी चूचियों पर फेरने लगा और अंगूठे तथा उंगली के बीच में घुंडियों को पकड़ कर मसलने लगा। फिर उसने अपना एक हाथ मेरी चूत के बालों पर रखा और अपने एक उंगली से मेरे छोले को रगड़ने और बड़ी उंगली को मेरी चूत के अंदर डाल कर हिलाने लगा। “Chudasi Sali Fuck Kahani”

मैं तो लौड़ा चूसने के समय से गर्म थी, मनीष की उँगलबाजी से मैं बहुत ज्यादा गर्म हो गई, मेरे से रहा नहीं गया तो मैंने उसकी लुंगी खोल दी और उसके लौड़े को पकड़ कर मसलने लगी। एक मिनट में ही उसका लौड़ा तन कर फौलाद का हो गया, तब मैं ऊँची हो कर मनीष के लौड़े को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी.

यह देख मनीष उल्टा हो कर लेट गया और मेरी चूत में मुँह रख कर छोले को चाटने लगा और जीभ को चूत की गली में घुसाने और निकालने लगा। मैं भी उसके लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी। पांच मिनट के बाद जब मैं बहुत गर्म हो गई.

और मेरे मुँह से आहंह्ह… आहंह्ह… उहंह्ह… उहंह्ह्ह… आवाजें निकली और मेरी चूत ने सिकुड़ कर पानी छोड़ दिया। मनीष ने सारा पानी पी लिया, चूत को चाट कर साफ़ कर दिया। क्योंकि मैं काफी उत्तेजित हो चुकी थी इसलिए मैंने उसे मेरी चुदाई करने का आग्रह किया। तब वह उठ कर मेरी टांगों के बीच में बैठ गया और मेरी चूत को देखने लगा।

मैंने पूछा- तुम मेरी चूत को क्यों घूर रहे हो?

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तो उसने बताया कि उसे मेरी चूत बिल्कुल प्रीटी की चूत जैसी ही लग रही थी बल्कि उससे भी कुछ संकरी लग रही थी और उसके लौड़े के चुदाई से कहीं फट गई और रस निकलने लगा तो क्या करेंगे। यह सुन कर मुझे हंसी आ गई और मैंने कहा- अगर मेरी चूत प्रीटी की चूत की जैसी है तो जैसे उसकी नहीं फटी वैसे मेरी भी नहीं फटेगी, और अगर प्रीटी की चूत में उसका लौड़ा समां गया था तो उसी तरह मेरी चूत में भी समां जाएगा!

मैं उसके आठ इंच के लौड़े को अन्दर लेने के लिए बेताब थी इसलिए मैंने उसे चुदाई के लिए उकसाया तब उसने धीरे से मेरी चूत के मुँह पर लौड़े को रखा और एक ही झटके में सुपाड़ा अन्दर घुसेड़ दिया! उसके ढाई इंच मोटे सुपारे के लिए मेरी चूत काफी तंग थी, जैसे नई चूत हो और पहली बार चुद रही हो! “Chudasi Sali Fuck Kahani”

मुझे बहुत दर्द हुआ और मैं चीख उठी ऊईई ममाँआआ… म्म्म्मररर्र… गईई… हाएए… मेरीईइ… फटगईई… आहंहह्ह… उहंहह्ह… मार डाला! मेरी चीखें सुन कर मनीष रुक गया और मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर मुझे चुम्बन करता रहा! जब मैं शांत हो गई तब उसने दूसरा झटका मारा और आधा लौड़ा मेरे अंदर घुसेड़ दिया.

मुझे एक बार फिर बहुत ही तीखा दर्द हुआ और एक बार फिर मेरी चीखें निकलने लगी ऊई ईई ममाँआआ… म्म्मरर्र… गईई… हाएए… मेरीई ईइ… फटगईई… आहंह्ह… उहंह्ह्ह…! मनीष थोड़ी देर फिर रुका और जैसे ही मेरी सांस में सांस आई उसने एक और झटका लगा कर लौड़े को पूरा मेरी चूत के अंदर पहुंचा दिया।

इस बार तो मेरी चूत में अत्यंत ही तीखा दर्द हुआ और मैं दर्द के मारे तड़प उठी, मेरे पसीने छूटने लगे, मेरी आँखों में से पानी निकल आया, मेरा पूरा बदन कांपने लगा और मेरी चीखें पूरे कमरे में गूंजने लगी! मनीष झट से मेरे ऊपर लेट गया और मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर मेरी चीखों को चुप करा दिया!

पांच मिनट वैसे ही लेटे रहने के बाद मैंने अपने होश में आई और मनीष से आगे बढ़ने को कहा, तब उसने धीरे धीरे हिलना शुरू किया और बहुत ही प्यार से लौड़े को चूत के अंदर बाहर करने लगा! उसका लौड़ा मेरी कसी चूत में बुरी तरह से फंसा हुआ था इसलिए बहुत ही अच्छी रगड़ मार रहा था जिससे मुझे बहुत मज़े आने लगे थे!

जब मेरी चूत सिकुड़ने लगी तो मैं बोल उठी- मनीष, मजा आ रहा है ज़रा तेजी से करो, ज़रा जल्दी जल्दी करो!

यह सुन कर मनीष चालू हो गया और झटके पे झटके लगाने लगा, उसने मेरे दोनों पैरों को ऊपर उठा अपने कंधों पर रख दिए और झटके लगाता रहा। मेरी चूत में आनंद के लहरें उठने लगी, बार बार गीली होने लगी जिससे लौड़े का अंदर बाहर जाने की रगड़ का आनंद चार गुना हो गया था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

पन्द्रह मिनट की तेज रगड़ाई के बाद मनीष का लौड़ा चूत के अंदर ही फड़फड़ाया और मेरी चूत भी जोर से सिकुड़ी, मैं और मनीष दोनों एकदम से अकड़ गए और दोनों के मुँह से आहंह्ह… आहंह्ह्ह… उहंहह्ह… उहंहह्ह… की आवाजें निकली! इसके साथ ही मेरी चूत में बाढ़ आ गई और वह मेरी चूत के पानी और मनीष के लौड़े से छूटे रस से लबालब भर गई! “Chudasi Sali Fuck Kahani”

मनीष तो इतना आनंदित हुआ कि पागलों की तरह मुझे चूमने लगा और मैं भी उसे बहुत देर तक चूमती रही। बारह बजने वाले थे इसलिए हम दोनों ने उठ कर एक दूसरे को साफ़ किया और फिर दोनों मेरे कमरे में आ गए! बेड पर लेट कर मनीष मेरी चूचियों को मुँह में लेकर मैं उसके लौड़े को हाथ में पकड़ कर सो गए!

मनीष तो इतना आनंदित हुआ कि पागलों की तरह मुझे चूमने लगा और मैं भी उसे बहुत देर तक चूमती रही। बारह बजने वाले थे इसलिए हम दोनों ने उठ कर एक दूसरे को साफ़ किया और फिर दोनों मेरे कमरे में आ गए! बेड पर लेट कर मनीष मेरी चूचियों को मुँह में लेकर, मैं उसके लौड़े को हाथ में पकड़ कर सो गए! “Chudasi Sali Fuck Kahani”

रात दो बजे मेरी नींद खुली, मनीष के लौड़े को अपने हाथ में देख कर एक बार फिर चूत मरवाने के लिए ललचा उठी। मैंने मनीष को होंठों पर चूम लिया और उसके लौड़े को मुँह में ले कर तेज़ी से चूसने लगी! एक मिनट में मनीष भी जाग गया और उसका लौड़ा भी तन गया।

मैंने मनीष को सीधा किया और अपनी टाँगें चौड़ी कर के उसके मुँह के ऊपर बैठ गई तथा उसे चूत चूसने को कहा। पांच मिनट चूत चुसवाने के बाद मैं उसके तने हुए लौड़े को चूत में फंसा कर मैं चीखती चिल्लाती हुई उछल उछल कर चुदने लगी! दस मिनट में ही हम दोनों अकड़ गए और दोनों की चीखों के साथ हमारा रस छूट गया।

एक बार फिर मेरी चूत में बाढ़ आ गई थी, जैसे ही मैंने लौड़े को चूत से बाहर निकाला तो चूत के अंदर से सारा रस बाहर निकल कर मनीष के ऊपर फ़ैलने लगा। मैंने उस रस को अपने हाथ से मनीष के पेट और छाती पर फैला दिया और फिर उसके ऊपर लेट कर अपने आप पर भी उस रस का लेप होने दिया और उसी तरह लेटे लेटे हमें नींद आ गई।

सुबह पांच बजे मनीष की नींद खुली तो उसने मुझे अपने ऊपर चिपका हुआ पाया और जब उसने मुझे हटाने की कोशिश की तब मेरी भी नींद खुल गई। मेरे पूछने पर कि वह इतनी जल्दी क्यों उठ गया, उसने अपनी छोटी उंगली उठा कर बताया कि उसे मूत आया है।

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मूत तो मुझे भी आया था इसलिए मैं भी उठ कर उसके साथ बाथरूम में चली गई, वहाँ जाकर मैंने मनीष का लौड़ा पकड़ कर उसे मूत कराया और इसके बाद मैं पॉट पर बैठ कर मूतने लगी। मनीष को मैंने पकड़ कर अपने सामने खड़ा कर लिया था और उसका लौड़ा मुँह में डाल कर चूसने लगी।

मनीष ने ऐसा करने से मना किया और कहा कि अगर अब चुदाई करेंगे तो मुझे पछताना पड़ेगा, लेकिन मैं नहीं मानी और उसे मजबूर कर दिया। मूतने के बाद हम मनीष के बेड पर जाकर चूसा चुसाई करने लगे और फिर मनीष मेरे ऊपर चढ़ गया तथा एक ही झटके में पूरा लौड़ा मेरी चूत के अंदर तक उतार दिया! “Chudasi Sali Fuck Kahani”

उसके बाद मनीष ने आक्रमण शुरू कर दिया और राजधानी गाडी की स्पीड से मेरी चुदाई करने लगा। क्योंकि रात में वह तीन बार झड़ चुका था इसलिए उसे इस बार छूटने में देर लग रही थी। मेरी चूत का पांच बार पानी निकलने के बाबजूद भी वह नहीं झड़ा और छटी बार जब मैं झड़ने को थी तब उसका लौड़ा भी फड़फड़ाया और हम दोनों चीखते तथा चिल्लाते हुए एक साथ ही छूटे!

फिर हमने बाथरूम में जा कर एक दूसरे को साफ़ किया और दोनों मनीष के बेड पर ही जा कर सो गए! सुबह आठ बजे जब हमारी नींद खुली तो मैं उठ कर अपने कमरे में जाने लगी, लेकिन मुझसे चला ही नहीं गया! मेरी चूत और उसके आस पास के क्षेत्र में बहुत जलन हो रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैंने झुक कर देखा तो पाया कि मेरी चूत सूज कर लाल हो चुकी थी। मैं समझ गई कि मनीष ने अपने लौड़े से इसे रगड़ रगड़ कर इसका यह हाल कर दिया है। मैं चूत पर हाथ रख कर, टाँगें चौड़ी करके किसी तरह अपने कमरे में गई और क्रीम लेकर चूत और उसके आस पास के क्षेत्र में लगाई और फिर उसी तरह अपनी टाँगें चौड़ी कर के रसोई में जा कर मनीष के लिए नाश्ता बनाया!

मनीष तैयार होकर रसोई में आया तो मैंने उसे नाश्ता दिया। तब उसने मेरी हालत देख कर हंस कर बोला कि उसने तो मुझे सावधान किया था कि अगर मैंने चुदाई की जिद नहीं छोड़ी तो मुझे पछताना पड़ सकता है। जब मैंने पूछा कि उसे कैसे मालूम था कि यह होने वाला है.

तो उसने बताया कि शादी के बाद दूसरी रात को प्रीटी ने भी बार बार चुदने की जिद की थी और अगले दिन भी उसके साथ भी ऐसा ही हुआ था। नाश्ता करके मनीष मुझे गोद में उठा कर अपने कमरे में ले गया, बेड पर लिटा दिया और मेरी टाँगें चौड़ी करके गीले कपड़े से मेरी चूत और उसके आस पास के क्षेत्र को साफ़ किया।

फिर उसने अपने बैग में से एक मलहम की टयूब निकाली और उसमें से मलहम निकाल कर चूत और उसके आसपास के क्षेत्र पर दवाई लगाई। फिर उसने मलहम की टयूब मेरे हाथ में देकर कहा कि मैं दिन में कम से कम तीन बार ज़रूर लगा लूं! जब मैंने पूछा कि तीन बार क्यों, तो वह तुरंत बोला कि यह जल्द ठीक हो जाएगी और आज रात की चुदाई के लिए भी तैयार हो जाएगी। “Chudasi Sali Fuck Kahani”

दिन भर मैं अपनी चूत को बार बार मलहम लगाती रही और दोपहर तक मुझे आराम भी मिलना शुरू हो गया था लेकिन क्योंकि मुझे रात को चुदने की लालसा थी इसलिए मैं दिल लगा कर दिन भर चूत की देखभाल करती रही! दो बजे काम वाली के जाने के बाद मैंने एक बार फिर चूत कि सेवा की और रात की नींद पूरी करने के लिए सो गई!

लगभग पांच बजे मैं जागी और चूत पर हाथ लगाया तो उसे बिल्कुल ठीक पाया, सूजन और लाली नहीं थी, उंगली डाल कर देखा तो कोई दर्द और जलन भी नहीं थी! यह देख कर मुझे बहुत ही खुशी हुई और मेरी रात को होने वाली चुदाई के नज़ारे मेरी आँखों के सामने घूमने लगे।

छह बजे जब मनीष आया तो सबसे पहले उसने मेरी तकलीफ के बारे में पूछा और फिर मेरा गाउन उठा कर चूत को देखा और हाथ भी फेरा! इसके बाद उसने झुक कर जोर से मेरी चूत को चूम लिया, जीभ को उसकी गहराइयों में डाला तथा छोले को भी रगड़ दिया।

फिर मुझे कस कर अपनी बाजुओं में जकड़ लिया और मेरे होटों को चूमते हुए मुझे बताया कि मेरी चूत बिल्कुल ठीक हो गई थी और रात को दो या तीन बार तो चुद सकती थी! मैंने कॉफी बनाई और हम दोनों ने साथ बैठ कर पी। मनीष कॉफी पीकर अपने कमरे में चला गया और मैं रसोई में रात का खाना बनाने लगी।

आठ बजे मैं मनीष के कमरे में गई तो देखा कि वह अपनी झांटें शेव करने की तैयारी कर रहा था और यह देख कर मुझे भी अपनी झांटें साफ़ करने का ख्याल आया! मैंने मनीष से कहा कि मैं उसकी झांटे साफ़ कर देती हूँ लेकिन उसे भी मेरी झांटें शेव करनी होंगी!

यह कह कर मैंने उसके हाथ से शेविंग ब्रुश लेकर उसकी झांटों पर शेविंग क्रीम लगा दी, फिर रेजर लेकर उसके लौड़े तथा टट्टों की सारी झांटें साफ़ कर दी और उसे चिकना बना दिया। इसके बाद मैं अपनी टाँगें फैला कर मनीष के सामने बैठ गई और शेविंग ब्रुश उसके हाथ में दे दिया।

मनीष ने बड़े प्यार से मेरी चूत की झांटें साफ़ कर दी और उसे बिल्कुल गंजी कर दिया! मनीष ने एक बार मेरी गंजी चूत को कस कर चूमा और अपना चिकना लौड़ा मुझे चूमने दिया! इसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी देर गार्डन में घूमने गए तथा साढ़े नौ बजे तक हम अंदर मनीष के कमरे में आ गये!

कमरे में आते ही मैंने मनीष के और मनीष ने मेरे सारे कपड़े उतारे, दोनों नंगे हो कर एक दूसरे से लिपट गए और एक दूसरे को चूसने लगे! मनीष ने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी चूचियों को चूसने लगा, मैं उसके लौड़े को पकड़ कर मसलने तथा मरोड़ने लगी। इसके बाद मनीष पलट गया और मेरी चूत को चाटने-चूसने लगा तथा मैं उसके लौड़े को! “Chudasi Sali Fuck Kahani”

कुछ ही देर में मेरा पानी छूट गया, तब मनीष ने मुझे नीचे खड़ा कर के, मेरा ऊपर का हिस्सा बेड पर झुका कर घोड़ी बना दिया और मेरे पीछे खड़ा होकर मेरी चूत का मुँह खोला और उसमे अपने लौड़े को सेट करके धक्का दिया। पहले धक्के में मनीष का आधा लौड़ा मेरी चूत के अंदर चला गया और दूसरे धक्के में पूरा लौड़ा अंदर चला गया! ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मेरी चूत अब मनीष के लौड़े के आकार की आदि होने लगी थी इसलिए मेरे मुँह से सिर्फ हल्की हल्की सी चीख निकली और मेरी चूत बड़े आराम से मनीष के लौड़े को गप कर गई। फिर मनीष ने आहिस्ते आहिस्ते धक्के देने शुरू कर दिए, मैंने भी उसके साथ हिलना शुरू कर दिया!

पांच मिनट के बाद वह तेज धक्के देने लगा, तब मैं भी उसकी स्पीड के साथ मेल करते हुए तेजी से हिलने लगी और हमारे मुँह से आह्ह… आह्ह… और उंहह्ह्ह्… उंहह्ह्ह… की आवाजें निकलनी शुरू हो गईं। मनीष को तेज चुदाई करते हुए जब दस मिनट बीत गए तब मैंने मनीष को पुरजोर तेज धक्के लगाने को कहा!

मेरे कहने पर मनीष बहुत तेज़ी से धक्के लगाने लगा और कमरे में हम दोनों की आह्ह्ह… आह्ह्ह… उंहह… उंहह्ह… आह्ह्ह… उंहह्ह्… आह्ह्ह… उंहह… की आवाजें गूंजने लगी। अचानक मेरी चूत सिकुड़ने लगी और मनीष का लौड़ा भी फूलने लगा! देखते ही देखते हम दोनों एक दूसरे की रगड़ से उत्तेजित होने लगे, मनीष मुझे पूरे जोर शोर और तेज़ी से चोदने लगा।

कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : मम्मी अपनी लाल पेंटी मेरे सामने उतारने लगी

दो मिनट में ही मैं एकदम से अकड़ गई और जोर से चिल्लाई- उंहह्ह्ह… उंहह्ह्ह.. ओह्ह… मैं तो गई.. मैं तो गईई.. गईईई.. गईई..! इसके बाद मेरी चूत ने मनीष के लौड़े को बहुत कस कर जकड़ लिया और अंदर खींच लिया तथा अपना पानी छोड़ दिया।उसी समय मनीष का लौड़ा भी फड़का और उसकी पिचकारी की छह-सात धारा छूटीं!

देखते ही देखते मेरी चूत हम दोनों के रस से लबालब भर गई और रस बाहर भी बहने लगा! बदन के अकड़ने और चूत में खिंचाव की वजह से मेरी टाँगें कांपने लगी थी, जिससे मनीष का लौड़ा बाहर आ गया और मैं वहीं नीचे जमीन पर ही बैठ गई। मनीष भी मेरे पास बैठ गया और मेरी टाँगें पकड़ कर दबाने लगा। “Chudasi Sali Fuck Kahani”

कुछ देर के बाद मैं संभली और फिर हमने बाथरूम में जाकर एक दूसरे को साफ़ किया तथा बेड पर आकर लेट गए! मनीष ने मेरे बदन को अपने साथ चिपका कर पूछा कि मुझे क्या हो गया था, तब मैंने बताया कि मुझे अब तक की सबसे बढ़िया खिंचावट हुई है, कल रात से भी ज्यादा, बहुत ज्यादा!

इसके बाद मनीष मुझसे लिपट गया और हम नींद के आगोश में खो गए। इसके बाद रात बारह बजे और सुबह पांच बजे हमारी नींद खुली तो हमने दोनों बार भी चुदाई की! यही सिलसिला शुक्रवार सुबह तक भी चलता रहा! उन चार रातों में मैंने और मनीष ने तेरह बार चुदाई की थी।

उसके बाद जब जब मनीष इंदौर आया तब तब हमने मौका देख कर चुदाई की! आज सुबह मनीष तीन दिनों के लिए इंदौर में ट्रेनिंग पर आया हुआ है और अभी ऑफिस गया हुआ है, सौभाग्य से मेरे पति भी इन दिनों बाहर गए हुए हैं, इसलिए हमें अगले तीन रातों को बिना डर के खुल के चुदाई कर सकते हैं। अब तो मैं आने वाली तीन रातों में कम से कम नौ बार तो ज़रूर चुदवाऊँगी और इसी की तैयारी भी कर रही हूँ।

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