Brother Sister Taboo Porn
हेल्लो फ्रेंड्स, आप सभी का एक बार फिर मेरी कहानी में स्वागत है. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आशना दीदी और मेरे राज 5 पढ़ा होगा, जिसमें की मैंने बताया था की मैंने दीदी को चोदने के लिए बोला, तो दीदी ने एक शर्त रखी की अगर मैं उनकी सारी ख्वाहिश पूरी करूँगा तो वो मेरे साथ सेक्स कर लेगी. हर एक ख्वाहिश पर वो एक एक कदम आगे बढेंगी जब मैंने दीदी को बोला आप जुट नहीं बोल रही तो. अब आगे- Brother Sister Taboo Porn
मैं दीदी के ठीक सामने बिल्कुल बिना कपड़ों के खड़ा था और मेरा कड़ा हुआ लंड पूरी तरह से उनकी नजरों के सामने था। दीदी फर्श पर मेरे पैरों के बीच, बिल्कुल सामने बैठी थीं। उनका खूबसूरत और नरम बदन उस शांत कमरे की हल्की रोशनी में और भी अच्छा लग रहा था।
वे मेरे ठीक सामने इस तरह बैठी थीं कि उनका चेहरा मेरे लंड के बिल्कुल पास था। जब भी वे साँस लेती थीं, उनकी गर्म और खुशबू वाली साँसें सीधे मेरे लंड की नरम त्वचा को छूकर गुजरती थीं। उस हल्की सी गर्मी और उनके नरम शरीर की नजदीकी ने मेरे अंदर की बेचैनी को और बढ़ा दिया।
मेरे पैरों के बीच उनका इस तरह बैठना और हम दोनों का पूरी तरह से बिना कपड़ों के होना उस पल को और भी गहरा बना रहा था। फिर दीदी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी उंगलियों से मेरे लंड को छुआ। यह पहली बार था जब मेरी बहन का हाथ मेरे लंड पर पड़ा था।
उस छूने से मेरे पूरे शरीर में अचानक एक कंपन सा महसूस हुआ। उन्होंने अपने हाथ से मेरे लंड को मजबूती से पकड़ लिया। उनके हाथ की गर्मी और उनकी पकड़ का दबाव साफ महसूस हो रहा था। इसके बाद उन्होंने अपनी उंगलियों को मेरे लंड पर ऊपर और नीचे चलाना शुरू किया।
उनके हाथ की इस हरकत से मेरा शरीर और ज्यादा सख्त हो गया। कमरे में हम दोनों की साँसों की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी और दीदी लगातार मेरे लंड को अपने हाथ से सहला रही थीं। दीदी ने अपने हाथ की रफ्तार थोड़ी तेज कर दी। वह लगातार अपने हाथ से मेरे लंड को ऊपर और नीचे सहला रही थीं।
उनकी उंगलियों का दबाव और हाथ की तेज रफ्तार साफ महसूस हो रही थी, जिससे मेरा पूरा शरीर कस गया था। इसके बाद उन्होंने अपना दूसरा हाथ भी आगे बढ़ाया और मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। अब उनके दोनों हाथों की पकड़ और गर्मी से वह हिस्सा पूरी तरह उनके हाथों के बीच था।
वे अपने दोनों हाथों को बारी-बारी से ऊपर और नीचे चला रही थीं, जिससे मेरे शरीर में बेचैनी और ज्यादा बढ़ गई। मैंने अपने हाथों से उनके बालों को पीछे से पकड़ा और धीरे से उनका चेहरा अपने लंड की तरफ झुका दिया। मुझे उम्मीद थी कि वह अपने उन नरम होठों से मेरे लंड को चूस लेंगी, लेकिन उन्होंने हल्का सा विरोध किया और कहा, “गोलू, यह क्या कर रहे हो?”
मैंने साँस लेते हुए कहा, “दीदी, तुम्हारा मुँह… मैं अपने लंड पर तुम्हारे मुँह चाहता हूँ।”
उन्होंने थोड़ी झिझक के साथ कहा, “नहीं गोलू, अभी नहीं। मैं तुम्हारा लंड अपने मुँह में लूंगी, जब तुम मेरी कोई एक ख्वाहिश पूरी कर दोगे।”
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उनकी बात सुनकर मुझे उस पल थोड़ा बुरा ज़रूर लगा। मैं दिल से यही चाहता था कि वो अपने उन नरम और रसीले होठों को मेरे लंड पर रखे, लेकिन फिर मैंने खुद को संभाला और सोचा कि कोई बात नहीं… यह पहली बार था जब वो अपने उन नरम हाथों से मुझे इस तरह खुशी देने के लिए मान गई थीं।
मैंने गहरी साँस ली और इस बात को दिल से हटा लिया। थोड़ी ही देर में मेरा वह हल्का सा मायूसी का अहसास गायब हो गया, क्योंकि उन्होंने मेरे लंड को अपने दोनों हाथों में कसकर पकड़ लिया और धीरे-धीरे उन्हें ऊपर-नीचे सहलाते हुए अपने हाथों की रफ्तार बढ़ाने लगीं।
जब दीदी ने मेरे लंड को अपने हाथों में कसकर पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे सहलाना शुरू किया, तो मेरे शरीर में एक अलग ही करंट दौड़ गया। उनकी हथेलियों की गर्मी और उनके हाथों का वो नरम छूना मेरे पूरे शरीर में महसूस हो रहा था। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और पूरी तरह उसी पल में खो गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीदी के हाथ अब तेज चलने लगे थे। उनका तरीका बहुत ही प्यार भरा था। वो कभी मेरे लंड की नोक पर हल्के से उंगलियाँ घुमातीं, तो कभी पूरे लंड पर हाथों को ऊपर-नीचे ले जातीं। उनके हाथों की इस हरकत से मेरी साँसें तेज हो गईं। मेरे मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकलने लगीं, जिन्हें मैं चाहकर भी रोक नहीं पा रहा था।
दीदी ने मेरे लंड को अपने दोनों हाथों में मजबूती से पकड़ लिया। इसके बाद उन्होंने अपने हाथों की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ानी शुरू की। उनका एक-एक हाथ मेरे लंड पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर इतनी तेज चल रहा था कि मेरे शरीर में गर्मी सी फैल गई।
उनकी हथेलियों की रगड़ और उनकी उंगलियों की गर्मी साफ महसूस हो रही थी। कमरे में सिर्फ उनके हाथों की हल्की आवाज और हमारी भारी साँसों की आवाज सुनाई दे रही थी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर पीछे कर लिया। लेकिन दीदी रुकी नहीं; उनके हाथ अब पहले से कहीं ज्यादा तेज चल रहे थे।
मुझसे अब एक सेकंड भी और नहीं रुका जा रहा था। मेरा पूरा शरीर काँपने लगा और मेरे मुँह से हाँफते हुए आवाज निकली, “दीदी… अब मुझसे और नहीं सहा जा रहा… मैं निकलने वाला हूँ!” मेरी बात सुनते ही दीदी ने अपना चेहरा मेरे लंड के बिल्कुल पास कर लिया।
उनकी आँखों में एक अलग सा नशा था और चेहरे पर अजीब सी कामुक मुस्कान थी। उन्होंने मेरे लंड को पकड़े-पकड़े ही अपना चेहरा सामने किया और बोलीं, “निकाल दो, गोलू… अपना सारा पानी मेरे चेहरे पर डाल दो।” उनके इतना कहते ही मेरे अंदर का दबाव अपनी आखिरी हद तक पहुँच गया।
मेरे पेट के नीचे वाले हिस्से में एक जोर का झटका लगा। मेरे लंड की नसें तन गईं और अगले ही पल मेरे अंदर से सफ़ेद पानी की पहली धार जोर से बाहर निकली। वो गाढ़ा सफ़ेद पानी सीधा उनके माथे पर जाकर गिरा। उसके बाद एक के बाद एक कई गर्म छींटे उनके पूरे चेहरे पर पड़ने लगे।
दीदी ने अपनी पलकें नीचे कर लीं और वो सारा गाढ़ा सफ़ेद पानी उनके गालों, नाक और होठों पर फैल गया। मेरे लंड से निकला हुआ वो सफ़ेद पानी उनकी त्वचा पर चमक रहा था। दीदी ने जरा सा भी बुरा नहीं माना, बल्कि उसी हालत में उन्होंने अपनी आँखें खोलकर मेरी तरफ देखा।
उनके पूरे चेहरे पर मेरा सफ़ेद पानी फैला हुआ था और वो उस पल को पूरी तरह महसूस कर रही थीं। अपनी बहन के चेहरे पर फैले उस सफ़ेद पानी को देखना मुझे अपनी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत पल लग रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने इससे खूबसूरत चीज़ पहले कभी नहीं देखी थी।
थोड़ी देर उसी हालत में रहने के बाद, दीदी ने फर्श पर पड़ी अपनी पैंटी उठाई और उसी से अपने चेहरे को धीरे-धीरे पोंछ लिया। इसके बाद वो उठीं और अपने कपड़े पहनने लगीं। कपड़े ठीक करने के बाद, उन्होंने कमरे का दरवाजा खोला ताकि बाहर जा सकें।
लेकिन जाने से पहले, उन्होंने मुड़कर एक बार फिर मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में मुझसे कहा, “गोलू… याद रखना, अगर तुम मेरी ख्वाहिश पूरी कर दोगे, तो अगली बार मैं तुम्हारा लंड अपने मुँह में लेकर चूसूंगी।”
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इतना कहकर दीदी ने हल्की सी मुस्कान दी और कमरे से बाहर चली गईं। उनके जाने के बाद भी कमरे में उनकी खुशबू और उस पल का असर वैसा ही बना हुआ था। अगली सुबह से ही सब कुछ बदल गया था। जब भी आशना दीदी मेरे सामने आतीं, तो चाहकर भी मैं उनकी तरफ देखने से खुद को रोक नहीं पाता था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनके होंठ बहुत ही नरम और कुदरती लाल रंग के थे। उन्हें देखकर मुझे ऐसा लगता था जैसे वो मेरे लिए ही हैं और मुझे उन्हें चखना ही चाहिए। लेकिन उसके लिए सबसे पहले मुझे दीदी की वो ख्वाहिश पूरी करनी थी, जो उनकी डायरी में लिखी थी।
वैसे तो उनकी ख्वाहिशें बहुत आसान थीं, जिन्हें पूरा करना कोई मुश्किल काम नहीं था। असली दिक्कत हमारे अब्बू थे। क्योंकि अब्बू अक्सर हमारे आस-पास ही रहते थे, जिसकी वजह से छोटी-छोटी चीज़ें पूरी करना भी बहुत मुश्किल लग रहा था।
जब अब्बू अपनी दुकान पर जाते थे, तब हमारे पास बाहर जाने का मौका होता था। लेकिन पिछली बार जब हम बाहर गए थे, तो कपड़े खरीदने का बहाना बना चुके थे। इसलिए इस बार हमारे पास बाहर जाने का कोई नया बहाना नहीं बचा था।
मैं बिल्कुल परेशान था कि अब अब्बू की नजर से बचकर दीदी की ख्वाहिश कैसे पूरी की जाए। सही मौका मिलने के इंतज़ार में पूरे तीन महीने बीत गए। इन तीन महीनों में एक बार भी ऐसा मौका नहीं आया जब मैं आशना दीदी के साथ घर से बाहर जा पाता।
एक ही घर में, दीदी के इतने पास रहकर भी उन्हें एक बार भी न छू पाना मेरे लिए किसी सज़ा से कम नहीं था। जब भी दीदी नहाने के लिए बाथरूम जातीं, तो मेरा दिमाग बस इसी सोच में खो जाता कि कैसे पानी की बूंदें उनके उस खुले और खूबसूरत बदन को छू रही होंगी।
सुबह जब वो ब्रश करने के लिए खड़ी होतीं और अपने होंठों के बीच ब्रश चलातीं, तो मेरा दिल बेचैन हो जाता और मैं सोचता कि उस ब्रश की जगह मेरा लंड उनके मुँह में होना चाहिए। मैंने कई बार कोशिश की कि चुपके से उन्हें छू लूँ, लेकिन दीदी ने हर बार मुझे पीछे कर दिया।
एक रात तो मैं हिम्मत करके चुपचाप उनके कमरे में भी चला गया था, लेकिन उन्होंने मुझे अपना बदन देखने देने से साफ मना कर दिया और कमरे से बाहर जाने को कह दिया। दीदी अपनी इस बात पर पक्की थीं कि जब तक उनकी डायरी की कोई एक शर्त पूरी नहीं होगी, तब तक वो मुझे कुछ नहीं करने देंगी।
अब हाल ऐसा हो गया था कि मैं किसी भी तरह बस उस सही पल का इंतज़ार कर रहा था, जब अब्बू की नजर हम पर न हो और मैं दीदी की कोई एक छोटी सी ख्वाहिश को पूरा करके उनके करीब जा सकूँ। फिर वो दिन आ ही गया जिसका मुझे महीनों से इंतज़ार था। “Brother Sister Taboo Porn”
उस सुबह अचानक अब्बा की तबीयत थोड़ी खराब हो गई, इसलिए उन्होंने दुकान पर न जाने का फैसला किया। हमेशा की तरह इस बार भी घर पर यही तय हुआ कि मैं और आशना दीदी दुकान संभाल लेंगे। यह सुनते ही मैं बहुत खुश हो गया, जैसे मुझे वो मौका मिल गया हो जिसका मैं इंतज़ार कर रहा था।
हालाँकि, हमारे पास दुकान पर समय बहुत कम था और दिमाग में कोई पक्का प्लान नहीं था कि वहाँ क्या करना है। लेकिन मैं इतना जानता था कि मुझे कोई ऐसा आसान काम करना है जिससे दीदी खुश हो जाएँ और बदले में मुझे उनके करीब जाने का मौका मिल सके।
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घर से निकलते वक्त अब्बा की सख्त नजरों से बचने के लिए दीदी ने हमेशा की तरह ऊपर से बुर्का पहन लिया था, ताकि किसी को कोई शक न हो। हम दोनों सुबह-सुबह अपने तय समय से थोड़ा पहले ही अंधेरी वाली अपनी टेलर की दुकान पर पहुँच गए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दुकान खोलते ही हमने सबसे जरूरी काम करने शुरू कर दिए। लगातार दो घंटे तक बिना रुके काम करने के बाद, हमने थोड़ी देर के लिए दुकान का शटर गिरा दिया और दुकान बंद कर दी। मैं फौरन दीदी की उस ख्वाहिश को पूरा करना चाहता था जो बहुत आसान थी और जिसे कम समय में पूरा किया जा सकता था।
वो थी अपनी पसंद के छोटे कपड़े पहनना। यह ऐसा काम था जिसे बिना किसी परेशानी के तुरंत किया जा सकता था और इससे दीदी भी खुश हो जातीं। लेकिन अंधेरी वाली दुकान के आस-पास के लोग अब्बा को अच्छी तरह जानते थे, इसलिए वहाँ रुकना ठीक नहीं था।
हमने तुरंत अपना प्लान बदला और किसी दूसरी जगह जाने का फैसला किया। किसी की नजर हम पर न पड़े, इसलिए मैंने अपना चेहरा मास्क से ढक लिया ताकि कोई मुझे आसानी से पहचान न सके। इसके बाद हमने तुरंत एक टैक्सी बुक की और सीधे फीनिक्स मॉल के लिए निकल पड़े। “Brother Sister Taboo Porn”
मॉल के अंदर पहुँचकर हम सीधे कपड़ों के एक बड़े स्टोर में गए, जहाँ आशना दीदी अपने लिए सबसे अच्छी और छोटी ड्रेस देखने लगीं। मॉल के अंदर भी दीदी ने ऊपर से अपना बुर्का पहन रखा था ताकि किसी को कोई शक न हो।
कुछ मिनट तक अलग-अलग रैक देखने के बाद, दीदी ने अपनी पसंद की एक शॉर्ट ड्रेस उठाई और उसे पहनकर देखने के लिए सीधे चेंजिंग रूम के अंदर चली गईं। थोड़ी देर बाद मॉल के उस कपड़े के स्टोर में चेंजिंग रूम का दरवाजा खुला और जब आशना दीदी बाहर आईं, तो मेरी साँसें जैसे रुक गईं।
एक पल के लिए तो मुझे अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हुआ। जो लड़की हमेशा खुद को बुर्के और लंबे कपड़ों में छिपाकर रखती थी, आज पहली बार उसे इतने खुले और छोटे कपड़ों में देखना मेरे अंदर एक अजीब सी गर्मी पैदा कर रहा था।
दीदी ने नीचे नीले रंग का शॉर्ट पहना हुआ था, जो उनके घुटनों से काफी ऊपर खत्म हो रहा था। उस छोटे कपड़े से उनकी मोटी जाँघें थोड़ी ढकी हुई थीं, जबकि उनकी लंबी, चिकनी और खूबसूरत टाँगें पूरी तरह खुली थीं। उनकी मोटी जाँघों का उभार और उनका कसा हुआ रूप साफ नजर आ रहा था, जिसे देखकर किसी का भी दिल बेचैन हो जाए।
ऊपर उन्होंने एक बहुत छोटी और टाइट टी-शर्ट पहनी हुई थी। वो टी-शर्ट इतनी छोटी थी कि उनका पूरा पेट और चिकने कंधे खुले हुए थे। उनके बड़े और भरे हुए स्तनों का आकार उस छोटी सी टी-शर्ट में भी साफ दिखाई दे रहा था। वो टी-शर्ट उनके दोनों उभारों को मुश्किल से आधा ही ढँक पा रही थी। “Brother Sister Taboo Porn”
उसके गले का कट इतना गहरा था कि उनके स्तनों के बीच की गहरी क्लीवेज साफ दिखाई दे रही थी। उस वक्त दीदी इतनी खूबसूरत और कामुक लग रही थीं कि मेरी नजरें चाहकर भी उनके जिस्म से हट नहीं पा रही थीं। हमने बिना देर किए उस ड्रेस का बिल दिया, और आशना दीदी ने अपना बुर्का अपने हैंडबैग में रख लिया।
इसके बाद हम सीधे मरीन ड्राइव पहुँच गए और समंदर के किनारे वाले रास्ते पर पैदल चलने लगे। दीदी के चेहरे पर अलग ही खुशी और चमक थी, क्योंकि आज पहली बार उनकी डायरी में लिखी कोई ख्वाहिश पूरी हो रही थी। खुली हवा में उनके लंबे और काले बाल उनकी पीठ पर उड़ रहे थे।
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उनके खुले जिस्म की त्वचा धूप की हल्की रोशनी में इतनी नरम और चमकती हुई लग रही थी कि देखने वाले की नजर वहीं रुक जाए। रास्ते से जाने वाला हर आदमी हमारे पास से थोड़ा दूर होकर निकलता और फिर मुड़कर एक बार नहीं, बल्कि बार-बार आशना दीदी के खूबसूरत और खुले बदन को देखता।
हमारे अब्बा अक्सर कहा करते थे कि जो लड़कियाँ छोटे कपड़े पहनती हैं, वो रंडी होती हैं। लेकिन दीदी को उस तरह देखने के बाद मेरा मन हुआ कि मैं सबको बताऊँ कि दीदी बिल्कुल वैसी नहीं लग रही थीं, क्योंकि रंडी औरतें इतनी खूबसूरत और हसीन नहीं दिखतीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जब भी दीदी समंदर की हवा में एक कदम आगे बढ़ाती थीं, तो उनकी उस टाइट टी-शर्ट के अंदर उनके भारी स्तन ऐसे हिलते थे जैसे पानी से भरे दो खूबसूरत गुब्बारे साथ-साथ हिल रहे हों। उनका हर कदम किसी का भी दिल तेज धड़काने के लिए काफी था।
चलते-चलते जब हम समंदर के किनारे थोड़ी सुनसान जगह पर पहुँचे, तो मैंने झुककर धीरे से आशना दीदी के कान में कहा, “दीदी… इस बार मैं अपना लंड आपके मुँह के अंदर डालूंगा।” मेरी बात सुनते ही दीदी का चेहरा शर्म से पूरा लाल हो गया। “Brother Sister Taboo Porn”
उन्होंने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई और वह शर्माते हुए सिर हिलाने लगी। हम करीब एक घंटे तक वहाँ मरीन ड्राइव पर चलते रहे और खुले माहौल का मजा लेते रहे। इसके बाद हमने वापस अपनी दुकान जाने का फैसला किया।
हमने एक टैक्सी पकड़ी और सीधे अपनी अंधेरी वाली टेलर की दुकान पर पहुँच गए। जैसे ही हम दुकान के अंदर गए, मैंने जल्दी से शटर गिराया और अंदर से मेन गेट का ताला लगाकर बंद कर दिया। ताले की आवाज़ सुनते ही आशना दीदी ने मेरी तरफ देखा और थोड़ी थककर बोलीं, “गोलू… मैं बहुत थक गई हूँ, क्या हम ये सब किसी और दिन कर सकते हैं?”
मैंने उनका हाथ अपने हाथ में कसकर पकड़ा और उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “दीदी, मैं इस पल के लिए महीनों से तड़प रहा हूँ… अब मुझसे एक सेकंड भी इंतज़ार नहीं होता, मैं खुद को और नहीं रोक सकता।” दीदी ने एक पल के लिए मेरा चेहरा देखा और मेरी आँखों में दिख रही बेचैनी समझ गईं।
उन्हें समझ आ गया कि अब मेरा इंतज़ार खत्म हो चुका था और पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था। बिना कुछ बोले, उन्होंने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। सबसे पहले उन्होंने अपनी टाइट टी-शर्ट ऊपर खींचकर उतार दी, जिससे उनके दोनों बड़े और भारी स्तन पूरी तरह बाहर आ गए।
इसके बाद उन्होंने अपने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा की हुक खोली और उसे भी उतारकर फेंक दिया। ब्रा हटते ही उनके दोनों सफेद और भारी स्तन सामने आ गए, जिन पर गुलाबी और बड़े निप्पल किसी रसीले फल की तरह कड़े होकर चमक रहे थे। “Brother Sister Taboo Porn”
इसके बाद दीदी ने अपने नीले शॉर्ट के नाड़े और कमर वाले हिस्से को पकड़ा और उसे नीचे खींचते हुए अपने पैरों से पूरी तरह उतार दिया। शॉर्ट के साथ ही उन्होंने अपनी छोटी सी पैंटी भी नीचे खींचकर उतार दी, जिससे उनका पूरा निचला हिस्सा मेरे सामने खुल गया।
अब वो दुकान की हल्की रोशनी में मेरे सामने पूरी तरह बिना कपड़ों के खड़ी थीं। उनकी चिकनी और भारी जाँघों के बीच उनकी नरम और गुलाबी चूत पूरी तरह खुली हुई थी, जिसके दोनों होंठ थोड़े खुले थे और वहाँ हल्की सी नमी चमक रही थी।
उनके जिस्म का हर हिस्सा उस वक्त मेरी हवस को भड़का रहा था। उस पल मुझे वो दिन अच्छी तरह याद आ गया, जब कुछ महीने पहले इसी दुकान में मैंने पहली बार अपनी बहन को पूरी तरह बिना कपड़ों के देखा था। और आज फिर वही जगह थी, वही आशना दीदी थीं, जो मेरे सामने बिल्कुल बिना कपड़ों के खड़ी थीं और आज वो मेरा लंड मुँह में लेने के लिए पूरी तरह तैयार थीं।
सिर्फ इस बात के ख्याल से ही मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन होने लगी कि जब दीदी के वो रसीले होंठ मेरे लंड को छुएँगे, तो मुझे कितना जबरदस्त सुकून मिलेगा। यह सोचते हुए मैंने भी बिना देर किए अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। “Brother Sister Taboo Porn”
एक-एक करके मैंने अपनी शर्ट और पैंट उतारी और आखिर में अपनी अंडरवियर भी नीचे करके अलग कर दी। अंडरवियर हटते ही मेरा भारी और तना हुआ लंड हवा में पूरी तरह कड़ा होकर झूलने लगा। एक पल के लिए आशना दीदी की आँखें सीधे मेरे उस कड़े और बड़े लंड पर टिक गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उन्होंने उसे घूरकर देखा और फिर शर्म से लाल चेहरे के साथ मेरी आँखों में देखा। तीन महीने पहले जब उन्होंने मेरे लंड को छुआ था, तब उन्होंने सिर्फ अपने हाथों का इस्तेमाल किया था। लेकिन आज का दिन बिल्कुल अलग था। आज उन्हें अपने हाथों से नहीं, बल्कि अपने उन्हीं नरम और रसीले होंठों से मेरा लंड चूसना था।
अपने ही भाई का लंड मुँह में लेना और उसे चूसना दीदी के लिए बहुत बड़ा और हिम्मत वाला काम था, जिसे करने में उनकी साँसें अटक रही थीं। मैंने दुकान में रखी छोटी सी स्टूल अपनी तरफ खींची और उस पर बैठ गया। बैठने के बाद मैंने अपने दोनों पैर थोड़े फैला लिए, ताकि दीदी के बैठने के लिए बीच में पूरी जगह बन जाए।
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दीदी ने एक नजर मेरे चेहरे पर डाली और फिर नीचे मेरे लंड पर। वो कुछ पल के लिए रुक गईं। उनके चेहरे पर थोड़ी शर्म साफ दिख रही थी। ये कदम इतना बड़ा होने की वजह से वो एक पल के लिए रुक गई थीं। लेकिन फिर उन्होंने अपनी झिझक छोड़ दी और मेरे ठीक सामने फर्श पर घुटनों के बल बैठ गईं।
उन्होंने अपने नरम हाथ आगे बढ़ाए और मेरे लंड को अपनी हथेलियों में पकड़ लिया। उनके हाथों की हल्की रगड़ और गर्मी मेरे अंदर एकदम से दौड़ गई। वो धीरे-धीरे मेरे लंड को सहलाने लगीं, ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर, ताकि वो और ज्यादा कड़ा और तना हुआ हो जाए। “Brother Sister Taboo Porn”
उनकी उंगलियों के हर स्पर्श के साथ मेरी साँसें तेज होने लगीं। कुछ ही देर में मेरा लंड पूरी तरह कड़ा हो गया और उनके हाथों में धड़कने लगा। यह महसूस होते ही दीदी की उंगलियाँ रुक गईं। उन्होंने एक लंबी साँस ली, अपनी आँखें थोड़ी ऊपर उठाईं और अपने नरम, गुलाबी होंठों को मेरे लंड के ठीक पास ले आईं… For next part Tell me golutales07@gmail.com
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