Bhai Bahan Outdoor Sex
हैलो दोस्तों, मैं अंकित मेरी उम्र 18 साल है आज मैं आपको अपनी जीवन की एक रीयल स्टोरी सुनाने जा रहा हूं। जो मेरी और मेरी दीदी उम्र 20 की बीच बनी नाजायज संबंध की है। दोस्तों सच कहूं तो मुझे गरीबी ने ही बहन की चुत दिलवाई मेरे पास उस टाइम एक ही मिट्टी से बनी कमरे था. Bhai Bahan Outdoor Sex
उसी कमरे में एक ही बेड पर हम 6 भाई बहन और मम्मी टोटल 7 लोग किसी तरह अडजस्ट होकर मजबूरी वश सोते थे। धीरे धीरे हम भाई-बहन जवान हो गए लेकिन घर की हालत जस के तस था. अब मैं 18 पार कर लिया था और मेरी दीदी 20 की हों चलीं थी फिर भी हमें उसके साथ ही सोना पड़ता था।
जिससे कि कई बार अनचाहे में सोते समय मेरे हाथ दीदी की चुचियों पर चला जाता था और कभी कभी दीदी की हाथ मेरे लन्ड के उपर आ जाती थी। ये स्टाटिगं की बात थी। उसके बाद पता नहीं क्या हुआ मम्मी ने हम दोनों भाई बहन को दुर दुर होकर सोने को कहीं साथ में नहीं।
अब हम दोनों भाई बहन के बीच में मम्मी सोने लगी थी। वैसे दोस्तों अभी तक मैं आप लोगों को अपनी दीदी की उम्र बताईं है अब मैं उसकी फिगर बता दें रहा हूँ. मेरी दीदी रंग लाल गोरी और उसकी बदन एक दम गोल मटोल है। उसकी चौड़ी गान्ड और बड़ी बड़ी चूचियों की बात ही अलग है।
मेरी दीदी हमेशा बन ठनकर रहतीं थीं। फिर आते हैं अपनी कहानी पर जैसा कि मैंने पहले कहा की हम कुल 7 लोग एक ही बेड पर सोते थे तो हम लोगों 69 पोजीशन बनाकर सोते थे तभी अडजस्ट हो पाते थे। एक दिन की बात है मैं नाच देखकर रात को देर से घर पहुंचा.
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और ठीक दीदी के सामने नीचे से सो गया यानी मैं और मेरी दीदी 69 के पोजीशन में आ गए थे. लेकिन बेड इतना लम्बा था जो मेरा पैर दीदी की ढोड़ी तक यानी उसकी कमर तक ही पहुंच पा रहा था. दीदी की पैर भी मेरे कमर तक ही पहुंच रही थी। मुझे लेटते ही नींद आ गई और मैं सो गया.
करीब सुबह के करीब 4 बजे मुझे कुछ महसूस हुआ तो आंख खुल गई मैं देखा की दीदी मेरे लन्ड को अपने पैरो से सहला रही थी और बार बार मेरे पैंट को अपने उंगलियों में फंसाकर नीचे खिंचने की कोशिश कर रही थी. ये सब देखकर मैं दंग रह गया था और सोचने लगा कि आखिर दीदी ऐसा क्यों कर रही हैं।
फिर समझ गया कि दीदी को चुत मरवाने की मन कर रही है मेरा लन्ड भी तनकर फुफकारने लगा था वो भी दीदी की चुत फाड़ने को बेताब होने लगा था। तभी मैंने अपने पैंट की बटन खोलकर लन्ड को बाहर निकाल दिया अब दीदी ने मेरे लन्ड को अपने दोनों पैर के तलवे में फंसाकर उपर नीचे करने लगी.
थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरे पैर को अपने पैरो से खिंचते हुए अपनी चुत पर सेट कर दी मानों वो कह रही थी तुम भी मेरी चुत को सहलाओ. तो मैंने भी सलवार के उपर से ही उसकी चुत को पैरो से सहलाने लगा. फिर मैंने उसकी सलवार को उंगलियों में फंसाकर नीचे खिंचने लगा.
लेकिन दीदी ने डोरी बांध रखी थी दो तीन बार खिंचा नहीं खिंचाया. बाद में दीदी ने खुद अपनी डोरी खोलकर सलवार नीचे सरका दी. अब मैं दीदी की नंगी चुत को महसूस कर रहा था उसकी चुत बहुत गर्म थी मानो उसकी चुत में ज्वालामुखी फट रही थी.
उपर से उसकी चुत बहुत ही मुलायम थी और उसकी चुत पर एक भी बाल नहीं था शायद दीदी ने अपनी झांट उसी दिन साफ की थी। दोस्तों ये सब कुछ कम्बल के अंदर चल रहा था. दीदी की बगल में लेटी मम्मी और अन्य भाई बहन में से किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था.
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लेकिन सुबह हो गई एक एक करके सब कोई जग गया था तो मैं और दीदी दोनों कम्बल अंदर ही अपने अपने अपने कपड़े ठीक करके सोने लगे क्योंकि मैं और दीदी दोनों देर रात से जग रहें थे. दोस्तों अब इसी तरह हर दिन रात्रि में रात रात भर हम दोनों भाई बहन वासनाओं की आग में जलने लगा था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
क्योंकि उसी बेड पर मम्मी भी बगल में लेटी रहती थी इसलिए ज्यादा कुछ कर नहीं पाते थे। सिवाय वासना भड़काने के और हिम्मत भी नहीं होती थी कि दीदी से कुछ कहूं. दिन में तो हम दोनों नजरें भी नहीं मिलाते थे। फिर एक दिन मैंने बड़ी हिम्मत करके दीदी से कहा दीदी कब तक हम दोनों वासनाओं की आग में जलेंगे चलो आज हम दोनो खेत में चलकर एक दूसरे की प्यास बुझाते हैं।
तो दीदी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलीं फिर अगले दिन दिन से मुझसे दूर दूर रहने लगीं। अब जो मुझे दीदी की चुत भी सहलाने को मिल रहा था वो भी बंद हो गया था। लेकिन किस्मत ने एक बार फिर पलटी मारी और फिर से वही रात वाली खेल शुरू हो गया।
दोबारा खेल शुरू होने के 10 दिन बाद एक बार फिर मैंने दीदी से मकई के खेत में चलने के लिए रिक्वेस्ट किया. इस बार दीदी ने थोड़ी मुस्कुराई और सिर हिलाकर हां में जवाब दिया तो मैंने दीदी को साथ में लेकर उसी वक्त दिन के 11 बजे ही अपने अपने मक्के खेत में पहुंच गया.
और पहले इधर उधर देखा कि कोई है तो नहीं जब सुनिश्चित हो गया कि आस पास कोई नहीं है तो मैंने दीदी की बांह पकड़ लिया और सीधा खेतों के बीच में ले गया. और अपनी बाहों में भरकर उसकी होंठों को चूसने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा.
दीदी बिल्कुल शान्त होकर खड़ी थी फिर मैंने उसकी चुत के उपर हाथ फेरने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी बोली भाई जल्दी करो नहीं तो कोई आ जायेगा. तो मैंने कहा दीदी कोई नहीं आएगा तू टेंशन मत ले आज तुझे तसल्ली से चोदुंगा तो दीदी कुछ नहीं बोली. फिर मैं दीदी की एक एक करके सभी कपड़े उतार दिए सिवाय पैंटी ब्रा के.
अब दीदी सिर्फ़ पैंटी ब्रा में थी क्या कयामत लग रही थी मैं दीदी की चिकनी गदराई बदन देखकर पागल हो रहा था. फिर उसके बाद उसकी ब्रा खोलकर हटा दिया और उसकी बड़ी-बड़ी दोनों चूचियों को पकड़कर दबाते हुए कहा दीदी क्या चीज़ हो तुम मुझे बहुत मजा आ रहा है तुम भी मेरे लन्ड को अपने हाथों से पकड़कर सहलाओ ना.
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तो दीदी ने मेरे लोवर के अंदर से लन्ड निकालकर उसे हल्के हल्के हाथों से सहलाने लगी. थोड़ी देर में मैं और पागल हो गया तो अब मैं दीदी को सीधे जमीन पर उसी की चुनरी बिछाकर लेटा दिया. तो दीदी खुद अपनी दोनों टांगों को चौड़ा कर दी तो मैं उसकी पैंटी भी उतारकर हटा दिया. “Bhai Bahan Outdoor Sex”
मैं पहली बार दीदी की चुत को अपने आंखों से देखा उसकी चुत पर इस बार छोटे छोटे बाल भी थी जो बेहद खूबसूरत लग रहा था. फिर मैंने उसकी चुत के उपर हाथ फेरते हुए उसकी चुत में ऊंगली डाल दी. दीदी की चुत पहले से ही पानी छोड़ रही थी जो काफी गीली हो चुकी थी जिसे मैंने कपड़े से पोंछकर सुखाया.
फिर मैं दीदी से पूछा दीदी पहले कभी किसी से अपनी चुत मरवाई हो तो दीदी ने सर हिलाकर ना में ज़वाब दिया. तो मैंने कहा ठीक दीदी पहली बार थोड़ी दर्द होगी बर्दाश्त कर लेना. तो दीदी ने फिर सिर हिलाकर हां में जवाब दिया. तो मैंने उसकी चुत पर अपने लन्ड को रखा तो दीदी ने खुद मेरे लन्ड को पकड़कर अपने छेद पर सेट कर लिया.
उसके बाद मैंने एकदम जोर से धक्का मार दिया मेरा पूरा लन्ड दीदी की चुत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया. दीदी एकदम जोर से चिहुकने लगी तो मैं बस बस दीदी हो गया कहने लगा और थोड़ा रुक गया. क्योंकि दीदी की आंखों से आंसु निकलने लगी थी। तो मैं दो मिनट रुक गया उसके बाद मै दोबारा दीदी को चोदना स्टार्ट कर दिया. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीदी आह उह ओह कर रही थी और मैं उसे मजे से पेले जा रहा पहली बार मैं थोड़ा जल्दी झड़ गया लेकिन मेरे लन्ड खड़ा के खड़ा ही था. तो मैंने दीदी कहा दीदी तुम लेटीं रहो मैं बाहर से एक बार लोगों को देखकर आता हूं और मैं झट से लोवर पहना फिर खेतों के बाहर निकलकर इधर उधर देखा तो कोई नहीं था सिर्फ एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी भैंस चरा रहा था वो भी काफी दुर था। “Bhai Bahan Outdoor Sex”
फिर मैं दुबारा लौटकर दीदी के पास आ गया और दीदी से कहा दीदी आज तो हम दोनों भाई बहन बिंदास होकर एक दूसरे को प्यार करेंगे क्योंकि बाहर दुर दुर तक कोई आदमी दिखाई नहीं दे रहा है. तो दीदी बोली हाँ लेकिन मेरी चुत में जलन हो रही है तो मैंने कहा कुछ नहीं होगी बर्दाश्त करो बाद में सब ठीक हो जाएगा.
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और मैं अपनी नंगी बहन को अपने गोद में बिठा लिया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़कर दबाते हुए उसकी दुध पीने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी बाल पकड़कर चोदने लगा. एक बार फिर दीदी आहें भरने लगी और बोली भाई ऐसे में ज्यादा दर्द हो रही है पहले जैसें लेटाकर करो ना.
तो मैंने दीदी को लेटाकर उसकी दोनों टांगों को ऊपर उठाकर अपने 7 इंच लम्बा 5 इंच मोटा लन्ड को दीदी चुत में डाल दिया. और दीदी से पूछा दीदी कैसा लग रहा है तो दीदी बोली भाई बहुत अच्छा लग रहा है ऐसे ही चोदो मुझे तो मैंने कहा दीदी अब दर्द नहीं हो रही है.
तो दीदी बोली भाई दर्द तो बहुत हो रही है लेकिन अब मजा भी बहुत मिल रहा है. सच में दोस्तों अब दीदी भी मेरे साथ देने लगी थी कराह भी रही थी और अपनी गान्ड उठा उठा कर मेरा मोटा लम्बा लन्ड अपने चुत के अंदर तक भी ले रही थी. तो मैंने दीदी से कहा दीदी तु तो पहले दिन ही रंन्डी की तरह उछल उछल कर चुत मरवाने लगी हों।
तो दीदी बोली भाई मैंने दो साल पहले एक दिन जब तु सोया हुआ था तब तेरा लन्ड देख लीं थीं तब से मैं तेरे लन्ड अपनी चुत में डलवाने के लिए बेचैन थी आज जब तेरा लन्ड मुझे मिला है तो सोच रहीं हु पुरी कसर आज ही निकाल लु। तो मैंने कहा दीदी ऐसी बात नहीं अब डेली तुझे मेरा लन्ड मिलेगा.
तो दीदी मुस्कुराती हुई बोली ठीक मेरे राजा भाई. उसके बाद मै दीदी से पूछा कि दीदी तेरे पिछे तो मैंने देखा है बहुत से लड़के पड़े है क्या उन सबने तुझे कुछ नहीं किया. तो दीदी बोली भाई सब मुझे पेलना चाहता था लेकिन तेरी कसम खाकर कहतीं हु आज तक मैं किसी की भी दाल गलने नहीं दी हु हाँ एक लड़का ने एक बार जबरदस्ती मेरी चूचियां दबाया था। “Bhai Bahan Outdoor Sex”
तो मैंने दीदी से उस लड़के नाम पुछा तो दीदी ने बताया वो लड़का मेरे पास के गांव से था। मैं फिर दीदी से पूछा दीदी मुझसे चुत मरवाने की ख्याल तेरे अंदर कहा से आया. तो दीदी बोली देख सबसे पहले तो तु मुझे बहुत पसंद हैं दुसरी बात तेरा लन्ड जबरदस्त है तीसरी बात अगर मैं तुमसे चुदवाऊंगी और कुछ हुआ तो घर की बात घर में रहेगी।
तो मैंने दीदी से कहा वाह दीदी क्या दिमाग लगाई है। सच में दोस्तों दीदी ये बात मुझे बहुत पसंद आया घर की इज्जत बाहर लुटे और जग हंसाई हो इससे अच्छा घर में ही लुटे वो सही बस सतर्कता होनी चाहिए। शुरू में मुझसे यही एक मात्र गलती हुई थी जो मैंने सतर्कता नहीं बरती जो आगे चलकर मुश्किल में पड़ गए थे लेकिन किसी तरह से बच गए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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हुआ ये था कि मैंने दीदी को बिना गर्भनिरोधक गोलियां दिए और बिना कंडोम के ही दीदी को चोद रहे थे जिससे वो प्रेग्नेंट हो गई थी। बहरहाल उस दिन मैं अपने दीदी को लगातार 7 बार चोदा उसके बाद हम दोनों भाई बहन घर पर आ गए.
दोस्तों ये मेरी रियल कहानी काफी लम्बी है क्योंकि मैं दीदी को एक दो बार नहीं बल्कि चार साल तक ऐसे ही खेतों झाड़ियों और कभी कभी घर में भी चोरी छुपे चोद था। फिलहाल मैं यही समाप्त करता हूं बाकी अगर आप लोग मेरी आगे की कहानी जानना चाहते हैं तो कमेंट जरुर करे…. धन्यवाद.
दोस्तों आपको ये Bhai Bahan Outdoor Sex की कहानी मस्त लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और Whatsapp पर शेयर करे……………
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