Bhai Bahan Bathroom Chudai
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 13 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि अपने भाई से अपनी कुंवारी गांड चुदवाने के बाद मैं भी काफी खुल गई थी. एक दिन गोलू बाथरूम में नहा रहा था तो मैं भी पहुँच गई और नंगी ही बाथरूम में चली गई. अब आगे- Bhai Bahan Bathroom Chudai
मेरा चेहरा गोलू के लंड के बिल्कुल पास था और शॉवर का गुनगुना पानी हम दोनों के नंगे शरीरों को लगातार भिगो रहा था। पानी की हर बूँद के साथ उसकी गर्मी हमारे शरीर पर बह रही थी, और उस खुले पानी के नीचे उसका मोटा लंड मेरे मुँह के ठीक सामने हिल रहा था।
उसकी महक और मेरे शरीर से आ रही कामुक खुशबू उस छोटे से बाथरूम की हवा को और भी गर्म कर रही थी। मैंने दिल को शांत करने के लिए कुछ सेकंड इंतज़ार किया क्योंकि मेरी धड़कनें बहुत तेज़ थीं। भाई-बहन के रिश्ते की सारी हदें हम पहले ही पार कर चुके थे.
इससे पहले एक बार मैं गोलू का लंड चूस चुकी थी और हम दोनों ने ऐसे कई काम किए थे जो इस रिश्ते में नहीं होने चाहिए थे, लेकिन मैं उस पल को भूल नहीं पा रही थी कि वह मेरे अपने भाई का लंड था। मैंने आखिरकार एक गहरी और लंबी साँस ली, खुद को पूरी तरह तैयार किया और अपने काँपते हुए होंठ उसके लंड पर रख दिए।
बाथरूम में चल रहे शावर का गर्म पानी लगातार उसके ऊपर गिर रहा था, जिससे उसका लंड पूरी तरह गीला और चमक रहा था। जैसे ही मैंने अपने होंठों से उसके लंड को छुआ, मुझे शावर के पानी की गर्माहट और उसके बदन की गर्मी मिलकर एक बहुत गहरी और कंपकंपी पैदा करने वाली गर्माहट अपने होंठों के आसपास महसूस हुई।
वह मेरे अपने सगे भाई का लंड था जो लंबा, मोटा और छूने में बहुत गर्म था श। यह वही लंड था जो कुछ ही दिन पहले मेरी गांड के अंदर गया था और मुझे अंदर तक चीरता हुआ सुकून दे गया था। लेकिन उस वक्त जब मैंने अपने काँपते हुए होंठों से उसके इस लंड को थामा, तो मेरे मन में एक अजीब सी उलझन और कंपकंपी दौड़ गई, क्योंकि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं अपने ही भाई का लंड दोबारा अपने मुँह में लूँगी।
फिर भी, जैसे ही मेरी नज़र उसके उस पूरी तरह से तने हुए, कड़क और फड़कते लंड पर पड़ी, तो मेरे दिल और मेरे जिस्म के अंदर एक अलग ही चाहत जाग उठी। उस पल मुझे ऐसा महसूस हुआ मानो मैं किसी और चीज़ की नहीं, बल्कि अपने भाई के इसी लंड का स्वाद चखने के लिए अंदर ही अंदर बेकाबू हुई जा रही हूँ और इसके बिना अब रह नहीं सकती।
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मैंने और ज़्यादा देर न करते हुए अपने होंठों को उसके कड़क लंड पर आगे-पीछे चलाना शुरू कर दिया। शावर का गर्म पानी हमारे शरीर पर बह रहा था और उस पानी की गर्माहट के साथ-साथ उसके लंड की अपनी एक अलग ही गर्मी मेरे मुँह के अंदर महसूस हो रही थी।
जैसे-जैसे मैंने अपने होंठों को उसकी टिप पर ऊपर-नीचे किया, वह आहें भरने लगा और उसका हाथ हल्के से मेरे बालों में आ गया। उस छोटे से बाथरूम में बहते पानी की आवाज़ के बीच, हमारे इस रिश्ते की सारी हदों को भूल जाने वाली इस हरकत ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया था, लेकिन अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था और मैं पूरी तरह से उसे खुश करने में लग गई थी।
मैंने अपनी रफ्तार थोड़ी और तेज़ कर दी, और मेरे मुँह के अंदर उसकी गर्मी और उसका कड़ापन और ज़्यादा साफ़ महसूस होने लगा। हर बार जब मैं उसके लंड को अपने मुँह में अंदर लेती और बाहर निकालती, तो वह हल्की-हल्की आहें भरकर अपना सिर पीछे की दीवार से टिका लेता।
उसका एक हाथ अब भी मेरे बालों में कसकर उलझा हुआ था, जो बिना जाने मुझे बता रहा था कि उसे यह सब कितना अच्छा लग रहा था। शावर से गिरता पानी हमारे शरीरों को भिगो रहा था, और उस गर्म पानी के साथ-साथ मेरे अपने भाई के शरीर की महक और उसके पसीने की खुशबू उस छोटी सी जगह में फैल चुकी थी।
भाई-बहन के बीच की जो दीवारें और डर हमारे मन में हुआ करते थे, वे इस वक्त उस भाप और पानी के बीच कहीं खो चुके थे। मुझे इस बात का एहसास हो रहा था कि हम क्या कर रहे थे, लेकिन उसके लंड का स्वाद और उसकी हर एक हरकत मुझे किसी और ही दुनिया में खींचती जा रही थी।
उसने अपने हाथ से मेरे बालों को और ज़्यादा कसकर पकड़ लिया और हाँफते हुए कहा, “आलिया दीदी, आपके होंठ बहुत मुलायम हैं… मेरा लंड छोड़ना मत।” मेरा मुँह उसके लंड से पूरी तरह भरा हुआ था, इसलिए मैं चाहकर भी एक शब्द नहीं बोल पाई। मैं बस ऊपर की तरफ देखकर सीधे उसकी आँखों में देखने लगी।
मेरे मुँह के अंदर बना सारा थूक अब उसके पूरे लंड को गीला और चिकना कर रहा था, और मुझे अपने मुँह के अंदर उसकी हर एक हलचल और उसकी नसों की गर्मी साफ़ महसूस हो रही थी। उसकी कमर के झटके के साथ ही उसका भारी, कड़क लंड मेरे मुँह के अंदर पूरी गहराई तक उतर गया।
मेरा दम घुटने लगा और मुझे अपनी साँसें रोकनी पड़ीं, लेकिन मैंने पीछे हटने की बजाय अपने होंठों को उसकी जड़ तक कसकर और भी मजबूती से जमा लिया। उसके जिस्म की वो तेज़ महक, पसीने की गंध और शावर के गर्म पानी की भाप मिलकर उस छोटी सी जगह को और भी ज़्यादा घुटन भरा और कामुक बना रही थी।
उसका हाथ मेरे बालों में इस तरह कसकर पकड़ा हुआ था कि मेरे सिर की खाल खिंच रही थी, और वह हाँफते हुए लगातार अपनी कमर आगे-पीछे कर रहा था। मेरे मुँह के अंदर मलाई जैसी लार और थूक पूरी तरह फैल चुका था, जिससे उसकी हर एक नस और गर्म हरकत मेरे मुँह के हर कोने को छू रही थी।
भाई-बहन के बीच के उस खून के रिश्ते का हर एक बंधन और डर अब इस बेरहम हवस के सामने पूरी तरह टूट चुका था; वहाँ सिर्फ एक भाई का अपनी बहन के मुँह में झटके मारना और मेरा उस गंदे, तपे हुए लंड को बिना रुके चूसते जाना ही बाकी था। उसे पूरी तरह चरम सुख देने और उसकी दीवानगी को और बढ़ाने के लिए, मैंने अपने होंठ उसके लंड से हटा लिए और थोड़ा और नीचे खिसक गई।
मेरा चेहरा अब सीधे उसके अंडों के पास था। मैंने अपनी जीभ निकाली और सबसे पहले उसके दोनों भारी अंडों को ऊपर से नीचे तक चाटना शुरू किया, जिससे उसकी एक गहरी और तड़प भरी आह निकल गई। इसके बाद मैंने उनमें से एक को अपने मुँह के अंदर भरकर ऐसे धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, मानो कोई पिघलती हुई आइसक्रीम हो।
मेरी इस हरकत से उसका पूरा जिस्म काँप उठा और उसने मेरे बालों को और भी ज़्यादा कसकर भींच लिया। मैंने अपनी जीभ को उसके भारी और गर्म अंडों पर फेरना जारी रखा, उन्हें हल्के-हल्के से चूसते हुए उसकी हर एक नस को अपने मुँह के अंदर महसूस किया।
जैसे ही मैंने एक अंडे को अपने होंठों के बीच लेकर धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, उसकी पकड़ मेरे बालों पर और ज़्यादा कस गई। उसने हाँफते हुए अपना सिर पीछे दीवार पर टिका दिया और उसका पूरा शरीर एक अजीब सी कंपकंपी से काँप उठा। उसकी हर एक साँस अब भारी और तेज़ हो चुकी थी, और शावर का गर्म पानी हमारे पसीने से भीगे शरीरों पर लगातार बह रहा था।
मेरे मुँह की गर्माहट और मेरी जीभ की हर हरकत उसे पूरी तरह बेकाबू कर रही थी। मैंने अपनी रफ्तार थोड़ी और धीमी की, ताकि वह उस हर एक सेकेंड का पूरा मज़ा ले सके, और बिना एक पल रुके उसके उस संवेदनशील हिस्से को तब तक सहलाती रही जब तक उसकी आहें और ज़्यादा तेज़ नहीं हो गईं।
उसके अंडों पर मेरी इस हरकत ने उसके शरीर में आग सी लगा दी थी; उसका लंड पहले से भी ज़्यादा गर्म और पत्थर की तरह कड़क हो गया था। यह महसूस होते ही मैंने अपना सिर उठाया और एक बार फिर से उसके उस भारी और तपे हुए लंड को अपने मुँह में अंदर खींच लिया।
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इस बार उसका लंड इतना ज़्यादा कड़ा और लंबा महसूस हो रहा था कि जब मैंने उसे अंदर लिया, तो वह सीधे मेरी जीभ के पिछले हिस्से और गले को छूने लगा। उस गहराई की वजह से मेरा दम घुटने लगा और हल्का सा उल्टी जैसा अहसास हुआ, लेकिन मैंने रुकने के बजाय अपने सिर को आगे-पीछे चलाना जारी रखा।
उसी पल उसने भी अपनी कमर को आगे की तरफ ज़ोरदार झटका देना शुरू कर दिया, जिससे उसका लंड मेरे मुँह के अंदर और भी ज़्यादा गहराई तक उतरने लगा। मेरे होंठ और गला उसकी उस बेकाबू रफ्तार के साथ तालमेल बिठाते हुए उसे लगातार अंदर लेते रहे, और उस छोटे से बाथरूम में हमारी भारी साँसों और उसकी हर एक आह के अलावा और कुछ नहीं गूँज रहा था। “Bhai Bahan Bathroom Chudai”
जब उसने अपनी कमर को आगे-पीछे चलाना शुरू किया, तो उसका कड़क और भारी लंड मेरे मुँह के अंदर और भी ज़्यादा गहराई तक उतरता चला गया। हर बार जब वह अपनी कमर का झटका देता, उसका सिरा सीधे मेरे गले के आर-पार होने लगता, जिससे मेरा दम घुटता और आँखें फटी की फटी रह जातीं।
लेकिन उस घुटन और दमघोंटू दबाव के बावजूद मेरा मन उसे छोड़ने का बिल्कुल नहीं कर रहा था। उसके उस कड़क लंड की गर्माहट, उसकी नसों का तनाव और मुँह के अंदर उसकी वो ज़बरदस्त रगड़ मुझे किसी अलग ही नशे में डुबो रही थी। उसका स्वाद और उसका कड़ापन मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि मैं खुद अपनी मर्ज़ी से उसे अपने मुँह के अंदर और अंदर खींच रही थी, ताकि उसकी एक-एक हरकत का पूरा मज़ा ले सकूँ।
उसकी रफ्तार अचानक इतनी तेज़ हो गई कि वह अपनी कमर को पूरी ताकत से आगे-पीछे करने लगा। उसी घबराहट में उसके मुँह से निकला, “आलिया दीदी… मैं आ रहा हूँ!” इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती या पीछे हटती, उसका कड़क लंड मेरे मुँह के अंदर पूरी गहराई तक चला गया।
अगले ही पल उसका सफ़ेद पानी मेरे मुँह के अंदर निकलने लगा। वह इतना ज़्यादा था कि एक पल के लिए मेरी साँसें पूरी तरह अटक गईं, गला भर जाने की वजह से मैं चाहकर भी साँस नहीं ले पा रही थी। मैं उस सफ़ेद पानी को निगलने की कोशिश करने लगी, लेकिन वह इतना ज़्यादा था कि मेरे मुँह में समा नहीं पाया और कुछ बूँदें मेरे होंठों के किनारों से बाहर निकलने लगीं। “Bhai Bahan Bathroom Chudai”
उसके उस गाढ़े, गर्म सफ़ेद पानी का बहाव ऐसा था जैसे अंदर कोई बाँध टूट गया हो। वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था, लगातार मेरे मुँह के अंदर गर्म सा महसूस हो रहा था। उसका स्वाद पूरी तरह फैल चुका था और हर एक झटके के साथ उसका कड़क लंड मेरे मुँह के अंदर धड़कते हुए अपना सारा सफ़ेद पानी मेरे गले के रास्ते पेट में उतार रहा था।
मेरा पूरा मुँह उस चिपचिपे और गाढ़े सफ़ेद पानी से भर चुका था। जब उसने आखिरी झटके के साथ अपना सारा सफ़ेद पानी मेरे अंदर निकाल दिया, तो मेरा गला पूरी तरह भर गया था। साँस लेने की कोई जगह नहीं बची थी, और उस सफ़ेद पानी के दबाव की वजह से लगातार मेरी नाक और मुँह के कोने से वह मलाई जैसा तरल बाहर की तरफ रिसने लगा, जो मेरी ठुड्डी और उसके पैरों तक बहता चला गया।
मैंने अपना चेहरा ऊपर उठाया और मुस्कुराते हुए कहा, “गोलू… इस बार सच में बहुत मज़ा आया।” मेरी बात सुनकर उसने कोई जवाब नहीं दिया, बस शर्माते हुए नज़रें नीचे कर लीं और उसके गालों पर हल्की सी लाली आ गई। बाथरूम का गर्म पानी अभी भी हम दोनों के नंगे शरीर पर लगातार बह रहा था, भाप से पूरा कमरा महक रहा था।
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मैं सीधी खड़ी हुई, नीचे रखा साबुन उठाया और उसके बालों, चेहरे और जाँघों पर मलने लगी। जब मैंने साबुन को उसके लंड पर लगाया जो अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ था, तो उसने भी मेरे हाथ से साबुन ले लिया। उसने बिना किसी झिझक के वह साबुन मेरे शरीर पर फेरना शुरू कर दिया। “Bhai Bahan Bathroom Chudai”
उसने मेरे दोनों स्तनों पर साबुन लगाते हुए धीरे-धीरे रगड़ा, और फिर नीचे मेरी चूत पर हाथ फेरते हुए उसे अच्छी तरह से साबुन से नहलाने लगा। हम दोनों पहली बार इस तरह पूरी तरह नंगे होकर एक साथ नहा रहे थे। हालाँकि मेरे दिमाग के किसी कोने में बार-बार यह बात चल रही थी कि मैं अपने ही भाई के लंड पर साबुन लगा रही हूँ.
लेकिन उस गुनगुने पानी की बौछार में और गोलू के हाथों का वह खुला स्पर्श इतना सुकून देने वाला था कि मेरा सारा डर और झिझक दूर हो गई। जब गोलू ने मेरे स्तनों पर साबुन लगाकर सहलाया, तो मुझे एक अजीब सी राहत और गहरी ठंडक महसूस हुई। नहाने के बाद हम दोनों बाथरूम से बाहर निकले, तौलिये से अपने भीगे हुए शरीर को अच्छी तरह सुखाया और अपने-अपने कपड़े पहन लिए।
जब मैंने गोलू के साथ भाई-बहन के उस पुराने दायरे को पार कर लिया, तो उसके साथ रहना और भी ज़्यादा अच्छा और आसान लगने लगा। अब हम सिर्फ भाई-बहन नहीं रह गए थे, बल्कि ऐसे दोस्त बन चुके थे जो एक-दूसरे से कोई भी बात नहीं छिपाते थे। जैसे, अब मुझे अपने पीरियड्स के दिनों में किसी बात को छिपाने या झिझकने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी; वह एक सच्चे दोस्त की तरह मेरा पूरा ख्याल रखता था और ज़रूरत पड़ने पर मेरी देखभाल करता था।
सुबह उठने में देर हो जाने पर और जल्दी में कहीं निकलना होने पर हम बिना किसी झिझक के एक साथ शॉवर लेने लगे थे। कभी-कभी मुझे खुद पर ही हैरानी होती थी कि मैं इतने दिनों तक बिना वजह अपने भाई से दूर भागने की कोशिश करती रही। लेकिन जब मैंने उस से भागना बंद कर दिया और अपनी मर्ज़ी से, खुलकर जीना शुरू किया.
तो मुझे समझ आया कि दुनिया की बनाई उन पाबंदियों से दूर होकर अपनी मर्जी के मुताबिक जीने में जो आज़ादी और सुकून है, उसमें असली मज़ा और खुशी है। लेकिन इन सब के बावजूद, मैंने एक हद तय कर रखी थी जिसे मैंने कभी पार नहीं किया। मैंने गोलू को कभी इस बात का मौका नहीं दिया कि वह अपना लंड मेरी चूत के अंदर डालकर मेरी वर्जिनिटी तोड़ सके। “Bhai Bahan Bathroom Chudai”
बेशक, गोलू के लिए यह बहुत बड़ी बात थी और वह शायद अंदर से यही चाहता था, लेकिन मैंने वह जगह सिर्फ अपने होने वाले पति के लिए बचाकर रखी थी, अपने भाई के लिए नहीं। एक दिन जब हम दोनों साथ बैठकर खाना खा रहे थे, तो उसने धीमी आवाज़ में मुझसे पूछ ही लिया, “आलिया दीदी… मैं आपकी चूत में अपना लंड क्यों नहीं डाल सकता?”
मैंने कभी उसे इस सवाल का असली या सीधा जवाब नहीं दिया था, क्योंकि मुझे उसके सामने खुद को बार-बार सही साबित करने या सफाई देने की कोई ज़रूरत महसूस नहीं होती थी। वह अक्सर मुझसे यह सवाल पूछता रहता था, और उस दिन मुझे लगा कि अब उससे और झूठ बोलना या बात टालना ठीक नहीं है।
मैंने खाना रोका, उसकी आँखों में देखा और सीधे सच कह दिया, “गोलू… मेरा हमेशा से यह सपना रहा है कि मेरी चूत में सिर्फ मेरा होने वाला पति ही अपना लंड डालेगा, और कोई नहीं।” मेरी बात सुनकर वह चुप हो गया। उसने पलकें नीचे कर लीं और बिना एक भी शब्द कहे चुपचाप अपना खाना खाने लगा।
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वह मेरी इस बात का मतलब और उसकी गहराई पूरी तरह समझ चुका था, और शायद उसे यह भी समझ आ गया था कि इस मामले में मेरी हद कहाँ तक है। उस दिन के बाद से उसने उस बारे में कभी दोबारा ज़िद नहीं की, और हमारे बीच सब कुछ फिर से ठीक हो गया था।
उसकी यही समझदारी मुझे सबसे ज़्यादा अच्छी लगती थी। जब भी मैं उसे अपनी निजी बातों या अपनी हदों के बारे में खुलकर बताती थी, वह बिना किसी ज़िद या बहस के उन्हें पूरी तरह समझ लेता था और कभी मुझ पर अपनी बात थोपने की कोशिश नहीं करता था। लेकिन एक दिन… वह रविवार का दिन था और मैं आराम से सोफे पर बैठकर अपनी छुट्टी का मज़ा ले रही थी। “Bhai Bahan Bathroom Chudai”
लेकिन गोलू के लिए यह दिन कोई आराम वाला नहीं था; ऑफिस के कुछ काम की वजह से उसे छुट्टी के दिन भी ऑफिस जाना पड़ गया था। जब वह देर शाम वापस लौटा, तो उसका चेहरा पूरी तरह उतरा हुआ था और वह बहुत थका हुआ लग रहा था। मैं टीवी देखते हुए सोफे पर ही थी, और वह सीधे आकर मेरे पास ही सोफे पर बैठ गया।
उसकी हालत देखकर साफ़ लग रहा था कि थकावट से उसका बुरा हाल था और उसे या तो तुरंत भरपेट खाना खाकर सो जाना चाहिए या फिर बिना किसी परेशानी के गहरी नींद ले लेनी चाहिए। मैंने उसकी थकी हुई हालत देखकर प्यार से पूछा, “गोलू, तुम बहुत थके हुए लग रहे हो… पानी या कुछ खाना चाहिए?”
उसने अपनी थकी आँखें उठाईं और धीमी में जवाब दिया, “दीदी… मुझे दूध पीना है।” मैंने थोड़ा हैरान होकर कहा, “लेकिन गोलू, घर में तो दूध है ही नहीं।” उसने अपना चेहरा मेरे करीब करते हुए सीधे मेरी आँखों में देखा और फुसफुसाया, “आलिया दीदी… मुझे तुम्हारा दूध पीना है।”
उसकी बात सुनते ही मेरे अंदर जैसे किसी ने ठंडी छुरी चला दी हो, और शर्म के मारे मेरे गाल एकदम लाल हो गए। बेशक, अब हम दोनों के बीच पहले जैसी झिझक नहीं रही थी और हम काफी खुलकर रहने लगे थे, लेकिन वह मेरा भाई था और जब उसने सीधे मेरे स्तनों का दूध पीने की ऐसी अजीब और कामुक मांग रखी, तो मुझे अंदर तक एक अजीब सी कंपकंपी महसूस हुई।
मैं कुछ कहती या अपना बचाव करती, इससे पहले ही वह मेरे और करीब आ गया। उसने बिना कोई वक्त गँवाए मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। मैं किसी बेजान पुतले की तरह चुपचाप सोफे पर बैठी रही, समझ ही नहीं पा रही थी कि वह अचानक क्या कर रहा है। “Bhai Bahan Bathroom Chudai”
उसने मेरी पूरी शर्ट खोलकर दूर फेंक दी, और अगले ही पल मेरी ब्रा की स्ट्रिप्स भी खोलकर ज़मीन पर गिरा दी। अब मेरे दोनों नंगे स्तन पूरी तरह से उसकी भूखी नज़रों के सामने थे। गोलू की नज़रें मेरे दूधिया और भारी स्तनों पर टिक गईं। वे दोनों गोल हल्की ठंड और उसकी गर्म साँसों की वजह से थोड़े कड़े हो चुके थे, और उनके बीच के गुलाबी निप्पल किसी पके हुए फल की तरह तनकर बाहर की तरफ निकले हुए थे।
उनके चारों ओर का भूरा घेरा उस गोरी त्वचा पर साफ दिख रहा था, और थकावट के बीच भी उसकी आँखों में एक अजीब सी हवस और भूख साफ दिखाई दे रही थी। मेरे स्तन हल्के से काँप रहे थे, और वह बिना पलक झपकाए बस उन्हें एकटक देखता जा रहा था। उसकी उँगलियाँ आगे बढ़ीं और उसने मेरे दोनों स्तनों के सख्त हो चुके निप्पलों को अपनी उँगलियों के बीच कसकर पकड़ लिया।
जब उसने उन्हें जोर-जोर से मरोड़ना और दबाना शुरू किया, तो एक तेज़ और कंपकंपी देने वाला दर्द सीधे मेरी रीढ़ की हड्डी में दौड़ गया। उस अचानक पड़ी पकड़ और तेज़ दर्द से मेरे मुँह से आह निकल पड़ी, जिसे दबाने के लिए मैंने तुरंत अपने दाँतों से अपना नीचे वाला होंठ कसकर चबा लिया।
दर्द और उस अजीब सी गर्मी का वह मिलाजुला असर इतना तेज़ था कि मेरी साँसें उखड़ने लगीं, और मैं उसकी इस हरकत पर बस काँप कर रह गई। उसने मेरे स्तनों को दबाते हुए आह भरी और फुसफुसाया, “ओह दीदी… आपके बुब्स कितने खूबसूरत और मुलायम हैं।” यह कहते हुए उसने मेरे निप्पलों को और भी ज़्यादा ताकत से कसकर मरोड़ दिया।
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उस तेज़ दबाव और रगड़ की वजह से मेरे निप्पल दर्द के मारे लाल पड़ने लगे थे। लेकिन वह कोई आम दर्द नहीं था, वह एक ऐसा नशे जैसा और अजीब दर्द था, जिसके अंदर एक गहरी चाह छिपी हुई थी। उस दर्द के बावजूद मेरे अंदर से एक अजीब सी चाह उठ रही थी कि वह इसे और ज़ोर से दबाए, क्योंकि उस तकलीफ के साथ-साथ मेरे बदन में एक अलग ही मज़ा दौड़ रहा था जो मुझे पूरी तरह पागल कर रहा था। “Bhai Bahan Bathroom Chudai”
उसने मेरे स्तनों को अपनी मुट्ठियों में पकड़े हुए अपनी गर्म साँसें मेरे सीने पर छोड़ीं और काँपती हुई आवाज़ में कहा, “आलिया दीदी… क्या मैं आपसे एक बात पूछ सकता हूँ?” उसकी बात सुनकर मुझे लगा कि वह इस बार मेरे स्तनों से दूध पीने की ज़िद छोड़कर, उन्हें आपस में दबाकर उनके बीच अपना लंड रगड़ने की बात करने वाला है, बिल्कुल वैसे ही जैसे उसने कुछ महीने पहले किया था।
ज़ाहिर है, मेरे स्तनों में कोई असली दूध तो बनता नहीं था, इसलिए उनके बीच अपना कड़क लंड रखकर मज़ा लेना उसके लिए एक अच्छा तरीका था। मैं उसके बदले हुए मन पर ज़रा भी हैरान नहीं हुई और न ही मन ही मन उसे इसके लिए बुरा समझ रही थी।
मैंने अपनी तेज़ साँसों को थोड़ा ठीक करते हुए उसकी तरफ देखा और नरमी से कहा, “हाँ गोलू… पूछो, जो पूछना है।” उसने एक गहरी और भारी साँस ली, और सीधे मेरी आँखों में देखते हुए धीरे से कहा, “दीदी… क्या आप मुझसे शादी कर सकती हैं?” For next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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