Bhabhi Devar Pela Peli
यह कहानी मेरी और मेरी सगी भाभी की सेक्स स्टोरी है जिसने मेरी चुदाई की जिंदगी ही बदल दी। मैं आपको बता दूं कि मेरी उम्र 26 साल है। मैंने पिछले साल बीए की परीक्षा पास की है और अब जॉब की तलाश में हूं। मेरे परिवार में मेरे माता-पिता और मेरे बड़े भैया हैं जो मुझसे 6 साल बड़े हैं। उनकी पत्नी अमीषा हैं जिनकी उम्र 29 साल है और उनकी एक 5 साल की बेटी भी है। Bhabhi Devar Pela Peli
मेरी और मेरी भाभी की बहुत अच्छी बनती है। वो मुझसे अपनी सारी चीजें शेयर करती हैं और मैं भी। हमारा हंसी-मजाक लगा रहता है। शुरू में मेरे मन में मेरी भाभी के प्रति कोई गलत विचार नहीं थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मेरी एक बड़ी बहन भी है जिनका नाम शिवांगी है। वो मुझसे 7 साल बड़ी हैं। उनकी शादी हो चुकी है और उनके दो बच्चे भी हैं।
मेरे भैया का नाम सूरज है और वो बैंक में जॉब करते हैं। मेरा घर शहर से 22 किलोमीटर दूर गांव में है जहां हमारे पुरखों की काफी जमीन-जायदाद है। हमारे घर में पैसों की कोई कमी नहीं है। मेरे पिताजी खेती-बाड़ी संभालते हैं और जब भी मौका मिलता है उनका और मेरी मां का रिश्तेदारों के यहां जाना लगा रहता है। मेरे भैया रोज सुबह ऑफिस के लिए निकलते हैं और शाम को वापस आते हैं।
अब आप लोगों को ज्यादा बोर न करते हुए मैं अपनी कहानी पर आता हूं। मेरी भाभी अमीषा मुझसे 4 साल बड़ी हैं। उनका रंग गोरा है। वो बहुत ही सुंदर औरत हैं और उनका फिगर बेहद आकर्षक है। बात लगभग एक साल पहले की है जब मेरी दीदी शिवांगी अपने बच्चों के साथ हमारे घर आई हुई थीं।
मेरी शिवांगी दीदी बहुत सुंदर हैं और उन्होंने अपना फिगर अच्छी तरह मेंटेन कर रखा है। उन्हें देखकर लगता नहीं कि उनके दो बच्चे हैं। उनके बूब्स और गोल-गोल गांड को देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है। मेरे जीजा जी तो रोज मेरी दीदी को रगड़-रगड़ कर चोदते हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है।
घर पर सब लोग बहुत खुश थे। दिन भर की मस्ती के बाद रात हो चुकी थी। हम सब खाना खाकर हंसी-मजाक कर रहे थे। रात के लगभग 10 बजे होंगे तभी भैया बोले कि अब सोना चाहिए क्योंकि सुबह ऑफिस के लिए निकलना है। वो और भाभी सोने चले गए। मेरे माता-पिता पहले ही सो चुके थे।
मेरी दीदी का बिस्तर भी मेरे ही कमरे में लगा दिया गया था और उनके बच्चों का बिस्तर भी मेरे कमरे में ही था। मेरी दीदी को आए 6-7 दिन हो चुके थे लेकिन उस रात एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरी सोच ही बदल दी। एक बिस्तर पर दीदी सो रही थीं, एक पर मैं और एक बिस्तर पर उनके दोनों बच्चे सो रहे थे।
रात के करीब 11:30 बजे होंगे। मुझे नींद नहीं आ रही थी। लाइट भी नहीं थी लेकिन लैंप की हल्की रोशनी कमरे में थी। तभी मैंने देखा कि दीदी ने किसी को कॉल किया और फोन कट कर दिया, मतलब मिसकॉल किया। कुछ देर बाद उनके फोन पर कॉल आया। उन्होंने मेरी तरफ देखा। मैं सोने का नाटक कर रहा था।
उन्हें लगा कि मैं सो चुका हूं इसलिए उन्होंने बात करना शुरू कर दी। पहले मुझे लगा कि जीजा जी का फोन है। मैं उनकी बातें सुनने लगा और मुझे मजा आने लगा क्योंकि दीदी सेक्स की बातें कर रही थीं। मैंने देखा कि दीदी एक्साइटेड हो गई थीं और अपने दूसरे हाथ से अपनी चूत को सहला रही थीं तथा सिसकियां भर रही थीं।
तभी मैंने देखा कि दीदी ने अपनी एक उंगली अपनी चूत में अंदर-बाहर करने लगी और बोलने लगी, “और चोदो, और जोर से चोदो।” यानी कि दोस्तों, फोन सेक्स चल रहा था। ये सब सुनकर मेरा भी 8 इंच का लंड रॉड बन गया था और मैं अपने लंड को सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद दीदी झड़ गईं और “आह…… आआ…… हाहाहा…… आह…… आआआआआआ…… आहह्ह्ह्ह…… हह्ह्ह्हहाह्ह्ह……” करने लगीं।
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मेरे लंड ने भी पिचकारी मार दी और मेरा पूरा अंडरवियर गीला हो गया। आज मेरे लंड से बहुत ज्यादा पानी निकला और मुझे भी बहुत मजा आया। तभी मैंने दीदी को कहते सुना, “नितेश, तुम्हारा लंड तो बहुत मजा देता है।” ये सुनते ही मेरे होश उड़ गए। मैं सब कुछ समझ गया कि दीदी अपने देवर से चुदवाती हैं।
अब मैं दोनों की पूरी बात सुनना चाहता था लेकिन फोन पर होने के कारण मैं केवल दीदी की बात ही सुन पा रहा था। तभी दीदी ने कहा कि रोज-रोज एक ही खाना किसे पसंद है, टेस्ट तो बदलना ही चाहिए तभी मजा मिलता है। मैं बातें सुनता रहा। फिर दीदी बोलीं, “जब साली आधी घरवाली हो सकती है तो देवर आधा पति क्यों नहीं हो सकता।”
ये सुनते ही मेरे अंदर का जानवर जग गया। अब मैं अपनी भाभी के बारे में सोचने लगा। सोचते-सोचते मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला। अगले दिन जब मैं सोकर उठा तो सब लोग उठ चुके थे। मेरी नजर दीदी के मोबाइल पर पड़ी जो वहीं रखा हुआ था। मैंने देखा कि रात वाली सारी बातें रिकॉर्ड थीं।
मैंने उन्हें जल्दी से अपने मोबाइल में कॉपी कर लिया और उनका मोबाइल वहीं रख दिया। फिर मैंने हाथ-मुंह धोया। जब भाभी चाय लेकर आईं तो मैंने देखा कि आज वो कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थीं। शायद इसलिए क्योंकि अब मैं किसी भी तरह अपनी भाभी को चोदना चाहता था।
जब मैंने पूरी रिकॉर्डिंग सुनी तो पता चला कि दीदी अपने देवर से जी भर कर चुदवाती हैं क्योंकि उसका लंड 7 इंच का है। अब 3 महीने बीत चुके थे। दीदी के जाने के बाद से लेकर अब तक मैं रोज यही सोचता रहता कि भाभी को कैसे चोदा जाए। मैं रात को उनके कमरे के कीहोल से भैया और भाभी की चुदाई देखने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
भैया अपनी 6 इंच की लौड़ी भाभी की मक्खन जैसी चूत में डालकर 10-15 धक्कों में ही झड़ जाते थे और भाभी भी मजे से चुदवाती थीं। जनवरी का महीना चल रहा था। ठंड में अब रात-दिन मुझे भाभी का सुंदर नंगा जिस्म नजर आने लगा और मैं उन्हें चोदने के लिए तड़पने लगा। तभी भगवान ने मेरी सुन ली और मेरे जीवन में एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरी जिंदगी ही बदल दी।
मेरी भाभी पढ़ी-लिखी महिला हैं और मेरे भैया उनकी जॉब की कोशिश भी कर रहे थे। तभी भाभी के एक सर्टिफिकेट को वेरीफाई कराने के लिए भोपाल जाना जरूरी हो गया। भैया उनके साथ जाने वाले थे लेकिन ऑफिस के काम से उन्हें अचानक 10 दिनों के लिए दिल्ली जाना पड़ गया। इसलिए तय हुआ कि अब मैं भाभी के साथ भोपाल जाऊंगा।
ग्वालियर से भोपाल 500 किलोमीटर दूर है। एक ही ट्रेन है जो रात को 8 बजे निकलती है और अगले दिन सुबह 7 बजे भोपाल पहुंच जाती है। वही ट्रेन अगले दिन रात को 8 बजे भोपाल से निकलती है और सुबह 7 बजे ग्वालियर आ जाती है। तय हुआ कि हम आज रात को निकलेंगे, अगले दिन काम निपटा कर उसी रात वापस लौट आएंगे। भैया को अगले दिन निकलना था।
सब तैयारी हो गई। मैं बहुत खुश था लेकिन सोच रहा था कि मौका तो मिलेगा ही नहीं। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रात को भैया हमें स्टेशन छोड़ने आए। हम अपने सीट पर चले गए और भैया वापस चले गए। हमें एसी फर्स्ट क्लास का टिकट था लेकिन जल्दबाजी में आरएसी मिल गया था। “Bhabhi Devar Pela Peli”
इसलिए हमें एक केबिन में एक ही सीट पर एडजस्ट करना था। हम केबिन में जाकर बैठ गए। एसी फर्स्ट क्लास में केबिन होते हैं और कोई दूसरा व्यक्ति केबिन में नहीं आता। हमने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे। टीटी टिकट चेक करके जा चुका था। तभी मैंने भाभी से कहा कि भाभी आप सो जाइए, मैं यहीं बैठ जाता हूं।
ठंड बहुत ज्यादा थी। भाभी ने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी और ऊपर से स्वेटर भी पहना था। भाभी ने कहा कि नहीं निखिल, सीट काफी बड़ी है, हम दोनों सो सकते हैं। मैं तो यही चाहता भी था। मैंने कहा कि ठीक है भाभी। मैंने कहा कि पहले अंदर मैं सोता हूं फिर आप मेरे आगे सो जाना। भाभी ने हां में सिर हिला दिया।
मैंने अपना जैकेट उतार दिया और लोअर पहनकर सो गया। भाभी ने भी अपना स्वेटर उतार दिया। उन्होंने बताया कि वो अपना नाइटी लाना भूल गई हैं। मैंने कहा कि कोई बात नहीं, आप साड़ी में ही सो जाओ। अब भाभी मेरे आगे सो रही थीं। हमने एक ही कंबल ओढ़ रखा था क्योंकि ठंड का मौसम था।
रात के 1 बज चुके थे। ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार में थी। भाभी गहरी नींद में सो रही थीं लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। तभी मैंने देखा कि भाभी की गांड बिल्कुल मेरे लंड के सामने है और मेरा लंड उसमें समा जाने के लिए फुंकार मार रहा है। मुझे डर भी लग रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।
तभी मैंने एक हाथ से भाभी की साड़ी के नीचे हाथ डाल दिया और धीरे-धीरे साड़ी को उनकी जांघों तक सरका दिया। उनकी मुलायम, गर्म जांघों की चिकनी त्वचा मेरी उंगलियों के नीचे महसूस हो रही थी। मैंने अपनी हथेली से उनकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया, पहले हल्के-हल्के स्ट्रोक से और फिर थोड़ा दबाव बढ़ाते हुए। उनकी जांघों की नरम मांसलता मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
मुझे बहुत डर लग रहा था कि कहीं वे जाग न जाएं, लेकिन साथ ही इतना मजा आ रहा था कि रुकना मुश्किल हो रहा था। जो लोग अपनी सगी भाभी को चोद चुके हैं वही जानते हैं कि कितना मजा आता है। फिर मैं भाभी के और सट गया और उन्हें अपने से चिपका लिया। उनका पूरा शरीर मेरे शरीर से लग गया था।
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वो अभी भी गहरी नींद में थीं। मैंने धीरे-धीरे उनके ब्लाउज के दो बटन भी खोल दिए। ब्लाउज के खुलते ही उनके बड़े, गोल बूब्स बाहर झांकने लगे। मैंने अपनी हथेली से उनके बूब्स को सहलाने लगा, पहले हल्के से मसलते हुए और फिर उनकी कठोर होती निप्पल्स को अपनी उंगलियों से दबाते हुए। “Bhabhi Devar Pela Peli”
भाभी के जिस्म की गर्मी पाकर मेरा लंड पूरे जोश में खड़ा हो गया था और मेरी पैंट के अंदर तनाव से फड़क रहा था। ऐसा करते-करते सुबह के 4 बज गए। तभी भाभी थोड़ी सी हिली और बस क्या था, मेरे लंड ने पिचकारी मार दी। मेरे लंड से इतना वीर्य निकला जितना पहले 4 बार मुठ मारने से निकलता है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
गर्म, चिपचिपा वीर्य मेरी अंडरवियर में फैल गया और मैं पूरी तरह से कांप उठा। मुझे इतना मजा पहले कभी नहीं आया था। मैं यही सोच रहा था कि जब मैं भाभी को चोदूंगा तो कितना मजा आएगा। मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला। सुबह के 6 बज रहे थे। भाभी उठ रही थीं। मेरी भी नींद खुल गई।
अभी भी मेरा एक हाथ भाभी की खुली जगह पर और दूसरा हाथ उनके बूब्स पर था। मैंने सोने का नाटक किया। मैंने देखा कि भाभी उठीं, उन्होंने धीरे से मेरा हाथ हटाया, अपनी साड़ी और ब्लाउज ठीक किया। उन्हें लगा कि शायद ठंड की वजह से मैंने अपना हाथ उनके बूब्स और जांघों पर रख दिया होगा।
उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और मुझे उठाया। बोलीं कि हम पहुंचने वाले हैं। मैं भी उठ गया। अब हम भोपाल पहुंच चुके थे। तभी मैंने भाभी से कहा कि भाभी ऑफिस तो 10 बजे के बाद ही खुलेगा। हम किसी होटल में चलते हैं और वहां नहा-धोकर ऑफिस चलेंगे। भाभी को ये ठीक लगा और उन्होंने कहा ठीक है।
हम एक होटल में गए लेकिन उसने हमें रूम देने से मना कर दिया क्योंकि उसने हमारा रिश्ता पूछा। मैंने कहा देवर-भाभी लेकिन उसने कहा कि एक मर्द और औरत को रूम तभी मिलेगा जब वो कपल हों और रिलेशन प्रूफ के लिए कोई आईडी दिखानी पड़ेगी। मैं समझ गया कि लोग होटलों में सेक्स रैकेट चलाते हैं जिसकी वजह से हमें रूम नहीं मिल रहा था। “Bhabhi Devar Pela Peli”
मैंने भाभी को सारी बात बता दी। उन्होंने कहा तो फिर कैसे करेंगे। मैंने कहा कि एक आइडिया है लेकिन हमें एक झूठ बोलना पड़ेगा। उन्होंने पूछा क्या। मैंने कहा कि हमें ये बोलना पड़ेगा कि हम पति-पत्नी हैं। वो हंसने लगीं लेकिन हालात को देखते हुए उन्होंने हां कर दी। हम दूसरे होटल में गए।
वहां मैंने अपना नाम विनय बताया और भाभी की आईडी से प्रूफ भी हो गया कि हम पति-पत्नी हैं क्योंकि मैं और मेरे भैया एक जैसे दिखते हैं तो फोटो आईडी में कोई समस्या नहीं हुई। अब हमें एक सिंगल बेड रूम मिल गया था। वो रूम काफी खूबसूरत था और शायद हनीमून कपल के लिए था।
तभी मैंने भाभी से कहा कि भाभी आप नहा लीजिए, बाद में मैं नहा लूंगा फिर हम चलेंगे। भाभी ने कहा ठीक है। भाभी नहाकर आ गईं। अब मैं नहाने चला गया। मैंने देखा कि बाथरूम में भाभी की पैंटी और ब्रा सूख रही है। मैंने उसे सूंघा तो क्या बताऊं दोस्तों, ऐसा लगा जैसे मैं जन्नत में आ गया हूं।
भाभी की पैंटी से उनकी योनी की मीठी, गर्म और थोड़ी नमक वाली खुशबू मेरे नथुनों में घुस गई और मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और पैंट के अंदर तनाव से फड़कने लगा। मैंने फिर भाभी के नाम की मुठ मारी और अपने धड़कते लंड को शांत किया।
मैंने अपनी पैंट उतारी, लंड को मुट्ठी में पकड़ा और तेजी से ऊपर नीचे करने लगा। हर स्ट्रोक के साथ भाभी की जांघों, बूब्स और उनकी गर्म योनी की कल्पना कर रहा था। कुछ ही मिनटों में मेरा लंड फड़का और गर्म वीर्य की कई धाराएं बाथरूम की दीवार पर गिर गईं। “Bhabhi Devar Pela Peli”
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जब मैं नहाकर बाहर आया तो देखा कि भाभी तैयार हो चुकी हैं। उन्होंने काले रंग का ब्लाउज और साड़ी पहनी थी और बिल्कुल अप्सरा लग रही थीं। कुछ देर में मैं भी तैयार हो गया। हम जाने के लिए बाहर निकले तो मैंने देखा कि लोग हमें घूर रहे हैं। मैंने भाभी को अपनी तरफ खींच लिया और उनकी कमर को पकड़ लिया।
भाभी समझ गईं कि मैं ऐसा इसलिए कर रहा हूं ताकि किसी को शक न हो। अब हम कलेक्टरेट ऑफिस के लिए निकल गए क्योंकि सुबह के 11 बज चुके थे। जब हम ऑफिस पहुंचे तो वहां काफी लोग थे। जिससे काम था उसका ऑफिस अंदर था। मैंने भाभी से कहा कि भाभी आप यहीं वेट कीजिए, मैं पता करके आता हूं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
भाभी ने कहा ठीक है। मैं अंदर चला गया। मैंने सोचा कि क्यों न एक प्लान बनाया जाए और भाभी को जबरदस्त तरीके से चोदा जाए। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैं बाहर आया और बोला कि भाभी एक समस्या है। उन्होंने पूछा क्या। मैंने बताया कि जिस आदमी से हमें काम था वो अभी छुट्टी पर है और अब हम सोमवार को मिलेंगे। आज शुक्रवार है।
भाभी ने कहा अब क्या करें। हम सोचते-सोचते बाहर आ गए। तभी भैया का फोन आया। उन्होंने कहा कि अब कुछ दिनों तक उनका मोबाइल काम की वजह से बंद रहेगा इसलिए मैं उन्हें कॉल करने के लिए परेशान न होऊं। उन्होंने जल्दी से फोन कट कर दिया। मैं समझ गया कि अब भाभी को चुदने से कोई नहीं बचा सकता।
मैंने भाभी को बताया कि भैया से अब 10 दिन तक बात नहीं हो सकेगी। अब हम सोचने लगे कि क्या करना चाहिए। तभी भाभी ने कहा कि हम 3 दिन यहीं रुक जाते हैं। कमरा तो मिल ही गया है और इन 3 दिनों में भोपाल घूमते हैं। ये सुनकर तो जैसे मेरी लॉटरी निकल गई क्योंकि मैं भी यही चाह रहा था।
अब हम खाना खाकर घूमने निकल गए। ठंड का मौसम था और मजा भी आ रहा था। शाम हो गई। मैंने कहा कि मूवी चलते हैं। भाभी भी यही चाहती थीं। हम मूवी देखने गए। 6 से 9 का शो था। मूवी चल रही थी। मूवी के एडल्ट सीन देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था। “Bhabhi Devar Pela Peli”
हर हॉट सीन में स्क्रीन पर औरत के नंगे बदन को देखते ही मेरे लंड में खून की रफ्तार बढ़ जाती और वह पैंट के अंदर सख्त होकर तन जाता। मैंने देखा कि भाभी भी थोड़ी एक्साइटेड हो जाती थीं लेकिन मैंने अभी भाभी को टच भी नहीं किया क्योंकि मैं आज रात भर भाभी को चोदना चाहता था। मैंने अपने लंड को काबू में रखा।
अब हम होटल आ गए। कमरे में ही खाना ऑर्डर कर दिया। मैंने कमरा 3 दिनों के लिए भी रिजर्व कर लिया। हमने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे। अब एक ही राजाई के अंदर हमें सोना था। ये सोचकर मैं पूरे जोश से भर गया। तभी भाभी बाथरूम से हाथ-मुंह धोकर बाहर आईं और बोलीं कि अब निखिल तुम भी हाथ-मुंह धो लो फिर सोते हैं।
मैंने कहा ठीक है। जब मैं हाथ-मुंह धोकर बाहर आया तो देखा कि भाभी ने साड़ी उतार दी थी और सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। क्या बताऊं दोस्तों, उनके गोरे बदन पर ये काला ब्लाउज और काला पेटीकोट ऐसा लग रहा था जैसे चुदाई की देवी खड़ी हो।
भाभी बोलीं कि साड़ी पहनकर सोने में समस्या होती है इसलिए उतार दी। मैंने भी हां में सिर हिला दिया। मैंने भी लोअर पहन लिया और भाभी के बगल में सो गया। मैंने महसूस किया कि भाभी का बदन बहुत गरम था और मेरे बदन से टच हो रहा था। तभी मैं और भाभी आपस में बात करने लगे।
कुछ देर बाद मैंने भाभी से कहा कि भाभी आप बहुत सुंदर हो। भाभी हंस दीं और बोलीं कि आज ऐसा क्यों बोल रहे हो। मैंने कहा कि बस ऐसे ही। तभी मैंने पूछा कि भाभी आपको मूवी कैसी लगी। भाभी ने कहा कि ठीक थी लेकिन रियल में ऐसा नहीं हो सकता। मैंने कहा क्या। भाभी ने कहा कि यही कि एक औरत बहुत सारे मर्दों के साथ…… और फिर चुप हो गईं और मुस्कुरा दीं। “Bhabhi Devar Pela Peli”
फिर मैंने कहा कि भाभी मैं आपको एक ऐसी चीज सुनाऊंगा कि आपको विश्वास हो जाएगा। उन्होंने तुरंत कहा कि क्या। मैंने दीदी वाली रिकॉर्डिंग चला दी। दीदी की आवाज सुनते ही भाभी बोलीं कि ये तो आपकी दीदी है। मैंने कहा हां। वो और उत्सुकता से सुनने लगीं। सेक्स की बातें शुरू हो गई थीं और भाभी पूरे मजे में सुन रही थीं।
तभी मैंने धीरे से अपना एक हाथ भाभी की कमर में डाल दिया और पेट को सहलाने लगा। लेकिन भाभी इतनी मग्न थीं कि उन्होंने ध्यान नहीं दिया। मैंने देखा कि वो भी गरम हो रही थीं। रिकॉर्डिंग खत्म हो गई। मैंने भाभी को अपनी तरफ खींच लिया और जकड़ लिया।
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तभी भाभी ने कहा कि निखिल ये तुम क्या कर रहे हो, मैं आपकी भाभी हूं। मैंने कहा कि भाभी आज मत रोको। आज तो मैं आपको चोदकर ही रहूंगा। हां भाभी किसी को पता भी नहीं चलेगा और आपको भी बहुत मजा आएगा। आपने सुना ना कि दीदी किस तरह अपने देवर से चुदवाती हैं। और हां ये बात भी तो सही है कि जब साली आधी घरवाली हो सकती है तो भाभी आधी बीवी क्यों नहीं हो सकती।
ये सुनकर भाभी की ना हां में बदल गई और बोलीं कि बस एक बार ही चुदवाऊंगी। मैंने कहा कि ठीक है। अब उन्होंने भी मुझे कसकर जकड़ लिया। हम अब एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे। मैं उनके संगमरमर जैसे बदन को आज जानवरों की तरह लूटना चाहता था। “Bhabhi Devar Pela Peli”
अब मैंने तुरंत उन्हें अपनी बाहों में लेकर किस करना शुरू कर दिया। मेरे होंठ उनके नरम और गर्म होंठों से चिपक गए। मैं उनकी निचली होंठ को चूसने लगा। फिर अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी। हम दोनों गहरी किसिंग में खो गए। किसिंग की चप्प-चप्प की आवाज कमरे में गूंज रही थी। वो भी अब मजा ले रही थीं। उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने अपनी हथेलियों से उनके बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया। पहले हल्के दबाव से मसलते हुए। फिर उनकी निप्पल्स को उंगलियों से घुमाने लगा। उनकी निप्पल्स सख्त होकर खड़ी हो गईं। थोड़ी देर बाद मैंने उनका ब्लाउज उतार दिया। उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी। उनके गोरे और भारी बूब्स बाहर आ गए।
मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया। फिर उनके चुचे चूसने लगा। एक निप्पल को मुंह में भरकर जोर से चूस रहा था। दूसरा बूब अपनी उंगलियों से मसल रहा था। अब मेरा लंड पूरी तरह सख्त हो चुका था। वो भी गरम हो चुकी थीं। मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए। ब्लैक पैंटी भी निकाल दी।
उनकी चूत अब पूरी तरह नंगी थी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। फिर उन्हें सीधा लिटा दिया। अब मैं उनकी चुचे चूस रहा था। एक हाथ से उनकी मक्खन जैसी चूत को सहला रहा था। मेरी उंगलियां उनकी चूत की लकीर पर ऊपर-नीचे घिस रही थीं। उनकी क्लिटोरिस को हल्का दबा रहा था।
अब उनके मुंह से हल्की आवाजें आने लगीं। “आह…… ओऊह्ह्ह…… बस करो निखिल…… आह्ह्ह…… बस करो ना।” मैंने और तेजी से उनके बूब्स चूसना शुरू कर दिया। अब उन्होंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरा लंड पकड़ लिया। वे उसे कसकर दबाने लगीं। फिर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हिलाने लगीं। “Bhabhi Devar Pela Peli”
मैं उनकी बूब्स चूसते हुए नीचे की तरफ सरक आया। उनकी चूत पर हल्की झांटें थीं। मैंने अपनी जीभ उनके चूत के चारों तरफ फेरनी शुरू की। फिर चूत को चूसने लगा। मेरी जीभ उनकी क्लिटोरिस पर तेजी से घूम रही थी। वो भी अब ऊपर-नीचे होकर मजा लेने लगीं। उनकी कमर बार-बार उठ रही थी।
दस मिनट बाद वो झड़ गईं। उनका गर्म चूत का पानी मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया। अब वो मेरा आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड हाथ में लेकर बोलीं। “तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा और मोटा है।” उन्होंने उसे मुंह में ले लिया। पूरा लंड गले तक अंदर ले जाती थीं। उनकी गर्म जीभ मेरे लंड को लपेट रही थी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरे मुंह से भी आवाज निकलने लगी। “आह…… मेरी जान…… ओऊई…… आह्ह्ह्ह…… मेरी जान चूसो और तेज।” वो और तेजी से चूसने लगीं। जैसे लॉलीपॉप चूस रही हों। पंद्रह मिनट बाद मैं उनके मुंह में झड़ गया। मेरा सारा वीर्य उन्होंने पी लिया।
वो कहने लगीं। “तुम्हारा माल मस्त है मेरी जान। तुम्हारे मोटे लंड से मेरी चूत को आज मजा आ जाएगा।” वो मेरे बराबर में लेट गईं। मेरे लंड को हाथ में पकड़कर खेलने लगीं। उनकी उंगलियां उसे सहला रही थीं। मेरा लंड अब दोबारा चोदने के लिए तैयार हो गया था।
मैंने उन्हें अपना लौड़ा चूसने को कहा तो वो तुरंत मेरे लंड को हाथ में पकड़कर मुंह में ले लिया। उनकी गर्म और नरम होंठ मेरे लंड के सिरे को घेर गए। उन्होंने जीभ से लंड के ऊपरी हिस्से को चारों तरफ चाटना शुरू कर दिया। फिर धीरे-धीरे पूरा लंड मुंह के अंदर ले जाती हुईं और गले तक पहुंचा रही थीं। “Bhabhi Devar Pela Peli”
उनकी सांसें तेज हो रही थीं और मुंह से हल्की-हल्की आवाजें निकल रही थीं। करीब 10 मिनट तक वो लगातार ऊपर-नीचे करती रहीं। उनके मुंह की गर्मी और जीभ की नमी मेरे लंड को और सख्त बना रही थी। फिर मैंने उन्हें पैर फैलाकर लेटने के लिए कहा। वो दोनों पैर चौड़े करके लेट गईं। उनकी चूत पूरी तरह खुल गई थी।
मैंने अपनी जीभ से थूक निकालकर उनकी चूत पर फैला दिया और उंगलियों से अच्छी तरह गीला कर दिया। फिर अपना मोटा लंड उनकी चूत की लकीर पर ऊपर-नीचे घिसने लगा। लंड का सिरा उनकी क्लिटोरिस को छू रहा था। वो तड़पते हुए कहने लगीं, “निखिल अब डाल भी दो, अब और इंतजार नहीं हो रहा। मेरी चूत जल रही है।”
उनकी तड़प देखकर मैंने अपना लंड उनकी चूत के छेद पर ठीक से रखा। एक जोरदार धक्का लगाया। मेरा पूरा 8 इंच लंबा और मोटा लंड एक ही झटके में उनकी टाइट चूत में समा गया। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को बहुत कसकर जकड़ रही थीं। वो दर्द से चिल्ला उठीं, “ओऊई…… मर गई मैं तो…… आह्ह्ह……।”
मैंने तुरंत अपना मुंह उनके मुंह पर दबा दिया ताकि उनकी चीख बाहर न निकले। मैंने देखा कि वो बहुत तड़प रही थीं। उनका शरीर कांप रहा था और वे मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थीं। अब मैंने आधा लंड बाहर निकाला और फिर एक तेज झटके से पूरा अंदर डाल दिया। फिर आहिस्ता-आहिस्ता हिलना शुरू कर दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
हर धक्के के साथ मेरा लंड उनकी चूत की गहराई तक जा रहा था। अब उन्हें दर्द की जगह बहुत मजा आने लगा। उन्होंने अपनी गांड ऊपर-नीचे उछालना शुरू कर दिया। इससे हम दोनों को और ज्यादा मजा आने लगा। अब वो जोर-जोर से कहने लगीं, “और जोर से चोदो मेरे जान, फाड़ दो मेरी चूत को, और तेज-तेज चोदो।”
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मेरी स्पीड अब और बढ़ गई। मैं पूरे जोर से धक्के लगा रहा था। 5 मिनट बाद वो पहली बार झड़ गईं। उनकी चूत सिकुड़ने लगी और गर्म पानी मेरे लंड के चारों तरफ बहने लगा। लेकिन मैं अभी झड़ने वाला नहीं था। मैं अब उनकी बूब्स को भी जोर से दबा रहा था। साथ ही लंड को लगातार अंदर-बाहर कर रहा था।
अब मैंने उनकी बूब्स को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। एक निप्पल को जोर से चूस रहा था और दूसरे को उंगलियों से मसल रहा था। उनकी आवाजें निकलने लगीं, “ओऊई…… आआई…… मेरी जान जरा जोर से चोदो, बहुत मजा आ रहा है। मुझे आज पहली बार इतना मजा आया है।”
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। वो फिर से झड़ गईं। इस बार उनकी चूत ने बहुत सारा पानी बाहर निकाल दिया। अब कमरे में छप-छप की तेज आवाज गूंज रही थी। हर धक्के के साथ उनकी चूत से पानी छपक रहा था। मैंने उनसे पूछा, “मजा आया मेरी जान?”
तो उन्होंने हांफते हुए कहा, “हां, इतना मजा तो तुम्हारे भैया से कभी नहीं आया क्योंकि वो 10 मिनट से ज्यादा चोद भी नहीं पाते और झड़ जाते हैं।”
मैं और जोर से उन्हें चोदने लगा। थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे बताया कि वे अब फिर झड़ने वाली हैं और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हो रहा। मैंने भी अपनी स्पीड बहुत तेज कर दी। वो “ओई…… आह्ह्ह……” करते हुए जोर से झड़ गईं। उनका पूरा शरीर कांप रहा था। मैंने उनसे कहा कि मैं भी अब झड़ने वाला हूं।
मैंने उन्हें घोड़ी बनने के लिए कहा। वो तुरंत घुटनों और हाथों के बल घोड़ी बन गईं। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने अपना लंड उनकी चूत में फिर से डाला और जोरदार स्टोक मारना शुरू कर दिए। दोनों हाथों से उनकी गांड को पकड़कर कसकर थपथपा रहा था। उनकी गांड का छोटा सा गुलाबी छेद देखकर मेरा मन उनकी गांड मारने को कर रहा था। “Bhabhi Devar Pela Peli”
लेकिन मैं झड़ने वाला था। इसलिए मैंने उनसे पूछा कि पानी कहां निकालूं। उन्होंने बोला मेरी चूत में ही निकाल दो। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ाई। आखिर में एक जोरदार धक्का लगाकर उनकी चूत में गहराई तक झड़ गया। मेरे गर्म और मोटे वीर्य की धाराएं उनकी चूत में भर गईं। मेरे माल की गर्मी ने उन्हें भी एक बार फिर डिस्चार्ज कर दिया।
और हम दोनों ही बेड पर नंगे एक दूसरे से चिपककर लेट गए। मेरी छाती उनके नरम बूब्स से सटी हुई थी। उनका एक पैर मेरी जांघों पर रखा हुआ था। मेरा लंड उनकी चूत से हल्का सा टच हो रहा था। हम दोनों की सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। हम एक-दूसरे को कसकर जकड़े हुए थे।
उनकी गर्म त्वचा मेरी त्वचा से चिपकी हुई थी। 30 मिनट के बाद हम उठकर बाथरूम गए। वहां मैंने अपने लंड को साफ किया और उनकी चूत को भी साफ किया। मैंने गर्म पानी से उनका पूरा निचला हिस्सा धोया। अपनी उंगलियों से उनकी चूत के अंदर तक पानी डालकर साफ किया।
फिर हम वापस आकर बेड पर बैठ गए और बातें करने लगे। फिर रात को 3 बार और मैंने भाभी को चोदा। हर बार अलग-अलग पोजीशन में। कभी वो ऊपर सवार होकर, कभी मैं उन्हें कुत्ते की तरह, कभी साइड से। अगले 3 दिनों में मैंने भाभी को इतना चोदा जितना शायद भैया भाभी को 3 महीने में भी न चोद पाते। हर सुबह, दोपहर और रात को हम होटल के कमरे में नंगे होकर एक-दूसरे को चोदते रहते। अब घर पर जब भी हमें मौका मिलता है मैं अपनी भाभी को चोदता हूं।
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