Bahan Pahli Chudai Story
मेरे दोस्त का नाम सूरज है और वह पहले मेरे पड़ोस में रहता था। हमारी दोस्ती बचपन की है। उसके घर पर उसके मम्मी पापा और वो खुद रहते है। हमारे घरेलू रिश्ते थे, मेरी दीदी उसको भी राखी बांधती थी और छोटा भाई समझती थी पर वो मेरी दीदी को चोदना चाहता था और मुझे उसकी मम्मी बहुत अच्छी लगती थी। Bahan Pahli Chudai Story
हम समलैंगिक सम्बन्ध भी करते थे इसीलिए हम एक दूसरे से कुछ नहीं छुपाते थे। उसके पापा का एक साल के लिए अचानक दिल्ली ट्रान्सफर हो जाने से अब वो और उसकी मम्मी ही वहाँ रहते है पर अब उन्होंने अपना घर मेरे घर से चार किलोमीटर की दूरी पर बनवा लिया है और कुछ दिन पहले वो वहाँ रहने चले गए हैं।
मेरे घर पर भी मेरे मम्मी-पापा और मेरी बहन दीपिका रहते हैं। मेरे मम्मी-पापा दोनों नौकरी करते हैं और दीपिका कालेज में पढ़ती है। दीपिका की उम्र 19 साल है। एक दिन मैं सूरज के घर गया तो उसकी माँ ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाया।
मैंने उनसे पूछा- रितु आंटी, सूरज कहाँ है? कई दिनों से मिला ही नहीं और कालेज भी नहीं आ रहा है?
रितु- उसकी तो तबीयत बहुत खराब है। क्या हो गया आंटी? मैंने पूछा।
रितु- अब तुमसे क्या छिपाऊँ, जब से इस घर में आए हैं अचानक उसको दौरे पड़ने लगे हैं। वैसे तो एकदम ठीक रहता है पर अचानक चक्कर आ कर गिर पड़ता है।
तब तक सूरज भी आ गया। मैंने देखा तो दिखने से वो एकदम फिट लग रहा था।
मैंने उससे पूछा कि आंटी क्या कह रही है? किसी डॉक्टर को दिखाया या नहीं?
सूरज- यार सभी बड़े डॉक्टरों को दिखा लिया, एक महीने से दवा खा रहा हूँ पर कुछ फर्क ही नहीं पड़ता है। अचानक चक्कर आ जाता है और एक से दो मिनट के लिए मैं बेहोश हो जाता हूँ। इसीलिए गाड़ी भी नहीं चला रहा और घर से बाहर भी नहीं जा रहा हूँ।
मैंने आंटी से कहा- आप मेरे साथ चलिए और सूरज की कुंडली ले लीजिए। मेरे एक गुरु जी है जो ज्योतिष के अच्छे जानकार है और कई लोगों की मदद कर चुके हैं। वो बता सकते हैं कि सूरज को क्या दिक्कत है।
आंटी भी साधु लोगों को बहुत मानती थी तो वो उसी समय मेरे साथ चल दी। सूरज को हमने घर पर ही छोड़ दिया कि कहीं रास्ते में तबियत न खराब हो जाये। गुरु जी के आश्रम पहुँच कर हमने अपने आने की खबर करवाई। काफी भीड़ होने के बावजूद गुरु जी ने हमें पहले ही बुलवा लिया।
गुरु जी- आओ बेटा अरुण, सब कुशल मंगल तो है?
मैंने बताया- नहीं गुरु जी, ये मेरे दोस्त की माता जी हैं। अचानक मेरे दोस्त को दौरे पड़ने लगे हैं जिससे हम बहुत परेशान हैं।
गुरु जी- क्या नाम है बेटी तुम्हारे पुत्र का?
रितु- जी सूरज!
गुरु जी- अरे बहुत ही सुन्दर और गुणी बालक है, कई बार अरुण के घर पर उससे मुलाकात हो चुकी है मेरी।
रितु- जी कई डॉक्टरों को दिखाया पर कुछ नहीं हुआ, अब तो आपका की सहारा है।
गुरु जी- बेटी तुम पुत्र की जन्म कुंडली ली हो क्या?
रितु- जी महाराज, यह लीजिये!
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यह कह कर रितु ने सूरज की कुंडली स्वामी जी को दे दी। करीब एक घंटे तक स्वामी जी ने उसको पढ़ा-देखा।
गुरु जी- बेटी, अब तक जीवन में मैंने ऐसा दोष नहीं देखा। इसका ठीक होना असंभव है।
यह सुन कर रितु आंटी जोर से रोने लगी और कहने लगी- नहीं महाराज, ऐसे मत कहिये, सूरज मेरा एक ही बेटा है, उसके लिए जो भी करना होगा वो मैं करूंगी पर आप मुझे निराश न करें।
गुरु जी- धीरज रखो बेटी!
रितु- नहीं महाराज, अब अगर मेरा बेटा ठीक नहीं हुआ तो मैं अपनी जान दे दूँगी।
गुरु जी- अरुण बेटा, तुम जरा बाहर जाओ, मुझे रितु से अकेले में कुछ बात करनी है।
मैं उठ कर बाहर आ गया और दरवाजे से कान लगा कर खड़ा हो गया।
अंदर गुरु जी आंटी से कह रहे थे- देखो बेटी, मैं वैसे तो यह उपाय बताने वाला नहीं था पर तुम्हारी हालत मुझे मजबूर कर रही है। पर यह उपाय भी आसान नहीं है और धर्म संगत भी नहीं है।
रितु- ऐसी क्या बात है स्वामी जी?
गुरु जी- बेटी, सूरज की कुंडली में एक भयानक दोष है जो सिर्फ एक हालत मैं ही हट सकता है। मुझसे तो कहा भी नहीं जा रहा।
रितु: बताइए स्वामी जी। जो भी उपाय होगा मैं करने के लिए तैयार हूँ।
गुरु जी- बेटी, सूरज एक ही दशा मैं ठीक हो सकता है। यदि वो एक ही सप्ताह के भीतर किसी अविवाहित कुंवारी कन्या से तीन बार संभोग करे।
यह सुन कर मुझे तो झटका लग गया और आंटी भी चौंक गई। यह आप क्या कह रहे है गुरु जी? इस बात की संभावना तो बहुत कम है की कोई इस हालत में अपनी बेटी की शादी सूरज से करें जबकि हम भी उस हालत में नहीं हैं। रितु बोली।
गुरु जी- मैंने कहा है अविवाहित कन्या! यह नहीं कहा कि उसका सूरज से विवाह हो, यदि विवाह हो गया तो वो कन्या भी शादीशुदा हो जायेगी और यह उपाय विफल हो जायेगा। साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि पहले संभोग के वक्त उसकी योनि अक्षत हो और कन्या के मासिक धर्म होते हों अर्थात आयु 16 वर्ष से अधिक हो और पूरे सप्ताह वो सिर्फ सूरज के साथ ही संभोग करे किसी और के साथ नहीं! और कम से कम तीन बार संभोग करे ही। इस उपाय के बाद सूरज चाहे तो उस कन्या से विवाह कर सकता है।
मुझे तो यह असंभव लगता है, भला कौन लड़की तैयार होगी इस तरह से! और जो किसी लालच में तैयार हो जायेगी तो वो कुंवारी तो नहीं ही होगी। वैसे भी आज कल तो लड़कियाँ 13-14 की उम्र में ही अपना कुंवारापन खो देती हैं। रितु ने कहा।
गुरु जी ने कहा- जरूरी नहीं कि कन्या तैयार हो, बात संभोग की है प्रेम की नहीं। और मैंने कहा ही था कि उपाय कठिन है। पर इसके सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है। और अगर सूरज इस बीमारी से निकल जाता है तो 80 वर्ष का आरोग्य जीवन होगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
यह सुन कर रितु आंटी ने गुरु जी को प्रणाम किया और बाहर आ गई। हम वापस घर चल पड़े। इतनी देर में मैंने अपनी योजना बनाई और अनजान बनते हुए आंटी से पूछा- स्वामी जी ने क्या कहा और आप इतनी परेशान क्यों हैं?
तो रितु आंटी ने मुझसे कहा- बात तुम्हारे लायक नहीं है। अभी तुम छोटे हो।
मैंने कहा- आंटी आप मुझे नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं! पर मैंने सब कुछ सुन लिया है।
रितु- जब तुमने सब कुछ अपने कानों से सुन लिया है तो मुझसे क्या पूछ रहे हो? स्वामी जी ने जो कहा है वो तो हो नहीं सकता।
मैंने कहा- आंटी, इतनी जल्दी हार नहीं मानिए, मैं काफी देर से यही सोच रहा था कि आपके घर जो काम वाली है वो तो कुंवारी है और उसकी बेटी अभी 18 साल की ही होगी। अगर उसको पाँच दस हजार रुपये दे दिए जायें तो वो शायद तैयार हो जाये?
रितु- अरे वो कुंवारी नहीं है, जब 15 साल की थी तभी एक लौंडे के साथ भाग गई थी। 4 महीने बाद लौट कर घर आई थी और मान लो कि अगर वो कुंवारी होती भी तो कौन सी माँ मान जायेगी। तुम भी तो ब्रा*** हो, तुम्हीं कोई लड़की बताओ। अरे अगर कोई तुम्हें दस हजार रुपये दे तो क्या तुम अपने घर की लड़की किसी को दे दोगे?
मैंने कहा- आंटी, आप तो नाराज़ हो रही हैं! सूरज को मैं अपने भाई से बढ़कर मानता हूँ और जरूरत पड़े तो दीपिका को भी इस काम के लिए दे सकता हूँ और वो भी बिना किसी पैसे के। मेरी बात सुन कर रितु के तो होश ही उड़ गए.
वो बोली- सच अरुण, अगर यह तुम सच कह रहे हो तो तुम सूरज को वाकई भाई मानते हो और दीपिका है तो 18 की पर इतनी सीधी है कि पक्का कुँवारी ही होगी। तुम अगर ऐसा कर दोगे तो मैं तुम्हारा एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगी और दीपिका की शादी भी सूरज से कर दूँगी। पर दीपिका तैयार हो जायेगी?
मैंने कहा- देखिये स्वामी जी ने कहा था कि संभोग बिना कन्या की स्वीकृति से भी हो सकता है। और दूसरी बात मेरे घर वाले नहीं मानेंगे कि उसकी शादी किसी गैर जाति के यहाँ हो इसीलिए मुझे इस बात का वादा चाहिए कि यह बात बाहर नहीं जायेगी ताकि दीपिका की बदनामी न हो।
रितु- मैं जबान देती हूँ!
जबान से काम नहीं चलेगा, आज हमारे सम्बन्ध अच्छे है कल कौन जाने क्या हो जाये? आप कुछ नहीं कहेगी पर अगर मेरी सूरज से लड़ाई हो जाये और वो सबको बोल दे? मैंने कहा।
रितु- तो तुम क्या चाहते हो? देखिए, मेरी सगी बहन की इज्जत का सवाल है तो दूसरी तरफ सूरज की भी किसी सगी रिश्तेदार का सवाल होना चाहिए।
रितु- देखो अरुण, अगर मेरे कोई बेटी होती तो मैं उसे तुम्हारे हवाले कर देती, पर मेरा एक ही बेटा है सूरज!
बेटी न सही माँ ही सही! मैंने कहा।
मेरी बात सुन कर रितु चौंक गई।
मैं कहा चौकिये मत आंटी जी, देखिये अगर दीपिका के साथ सूरज ने संभोग किया और आपने मेरे साथ तो ना मैं किसी से कहूँगा ना आप लोग। सूरज की बीमारी भी ठीक हो जायेगी और मेरी चिंता भी दूर हो जायेगी जो मुझे दीपिका की बदनामी को लेकर है। अरे, अब सोच क्या रही हैं, मैं अपने दोस्त के लिए अपनी सगी बहन की क़ुरबानी दे सकता हूँ और आप अपने इकलौते बेटे के लिए अपनी क़ुरबानी नहीं दे सकती? “Bahan Pahli Chudai Story”
रितु बोली- मैं यह नहीं सोच रही हूँ! क्योंकि मेरे पास तैयार होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। बल्कि यह सोच रही हूँ कि तुम्हें एक 37 साल की औरत में इतनी दिलचस्पी क्यों है?
मैंने कहा- अरे आंटी, हीरे की कदर तो जौहरी ही जानता है। तो बताइए बात पक्की?
पक्की! रितु बोली।
और मैंने प्यार से आंटी के एक होठों पर एक पप्पी ले ली। उनके घर पहुँच कर मैंने गाड़ी रोकी और बोला- आंटी आप सूरज को बाहर भेज दीजिए ताकि उसे भी मैं समझा दूँ।
रितु बोली- उसे यह भी बताओगे क्या कि दीपिका के बदले तुम मुझसे संभोग करोगे?
जितना जरूरी होगा उतना ही बताऊँगा, आप उसे बाहर तो भेजिए।
रितु अंदर गई और सूरज बाहर आ गया। उसे गाड़ी में बिठा कर हम वहाँ से चल दिए थोड़ी दूर जाकर मैंने गाड़ी एक तरफ़ रोकी और उसे गले लगा कर कहा- हमारी योजना कामयाब हो गई! तुम्हारे चक्कर का चक्कर चल गया और तुम्हारी माँ मुझसे चुदने के लिए तैयार है और दीपिका की चुदाई तुमसे करवाने के लिए तो वो कुछ भी करेगी।
स्वामी जी ने क्या एक्टिंग की है, मज़ा आ गया। सूरज, अरे इतनी बढ़िया योजना बनाई थी, फ्लॉप कैसे होती? चलो घर चलो और आगे की तैयारी करते हैं। रास्ते से हमने एक दवा खरीदी और घर पहुँच कर मैंने सूरज को इशारा किया और वो अंदर चला गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने रितु से कहा- चलिए आंटी, सूरज को सब समझा दिया है, थोडा नाराज़ था पर मैंने उसे समझा दिया कि यह बहुत जरूरी है। चलिए बेडरूम में चल कर आगे की बात करते हैं।
रितु- हाय, तुमने सूरज को बता दिया कि तुम मेरे साथ क्या करोगे?
अब वो घर पर है और हम सेक्स करेंगे तो उसे पता नहीं चलेगा? मैंने कहा।
और रितु को बेडरूम में ले जाकर दरवाजा बंद कर लिया।
रितु ने कहा- अभी यह करना जरूरी है? जब सूरज दीपिका से कर ले तब हम करेंगे।
मैंने कहा- अरे यार, सूरज तो कल दीपिका के साथ पहली बार करेगा। सुनो, तुम आज रात को मेरे घर फोन करना और दीपिका से कहना कि कल तुम्हारे यहाँ पूजा है और सारे लोग आ जायें। मम्मी पापा तीन दिन के लिए बाहर गए है तो दीपिका मेरे साथ यहाँ आएगी। तब तुम कह देना कि पंडित नहीं आया और पूजा रद्द हो गई। सबको फोन करके मना कर दिया पर हमारा फोन नहीं लग रहा था। फिर हम दीपिका को किसी न किसी तरीके उत्तेजित करके मना ही लेंगे और उसके बाद सूरज का काम हो जायेगा। कहो, मेरी जान?
यह बोल कर मैंने रितु की साड़ी खोल दी और अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी।
रितु- इतनी जल्दी आंटी से जान और आप से तुम पर आ गए? मानती हूँ पक्के बहनचोद हो! आओ और अब मेरी प्यास बुझाओ!
मुझे उम्मीद नहीं थी कि रितु इतनी जल्दी खुल जायेगी! पर उसके मुँह से गालियाँ सुन कर मजा आ गया। लम्बी, गोरी चिट्टी रितु का भरा बदन, चौड़ी कमर, बाहर निकले उत्तेजक कूल्हे और ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन मेरे मन में हलचल मचाने लगे। “Bahan Pahli Chudai Story”
मेरे मन में उनको नंगा देखने का ख्याल आने लगा। फिर हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। रितु एकदम मुझ से लिपट गई, मुझे करंट सा लगा जब उनके स्तन मेरी छाती से छुए। उसकी एक टांग मेरे ऊपर थी। मैंने भी उसकी टांग पर एक पैर रख दिया और उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- आओ मेरी जान!
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रितु धीरे-धीरे मेरी बाहों में सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था। धीरे से मैंने उनके कूल्हों पर हाथ रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगा। रितु को मजा आ रहा था। फ़िर रितु सीधी लेट गई। अब मैं भी उससे चिपट गया और उसके वक्ष पर सिर रख लिया। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। मैं धीरे धीरे उनका पेट और फ़िर जांघ सहलाने लगा।
तभी रितु ने अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये यह कह कर कि बहुत गर्मी लग रही है। अब उनके चुचूक साफ़ नज़र आ रहे थे। मैंने चूचियों पर हाथ रख लिया और सहलाने लगा। मैंने उनकी चूचियाँ ब्लाउज से निकाल कर मुँह में ले लिया और दोनों हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से ऊपर करना शुरु कर दिया।
उसकी गोरी गोरी जांघों को देख कर मैं एकदम जोश में आ चुका था। उसकी चूत नशीली लग रही थी। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया। मैं पागल हो चुका था। आज मेरा बहुत पुराना सपना पूरा होने वाला था। मैंने अपने पैर रितु के सिर की तरफ़ कर लिये थे। “Bahan Pahli Chudai Story”
रितु भी मेरा लण्ड निकाल कर चूसने लगी। वह मुझे भरपूर मजा दे रही थी। कुछ देर बाद रितु मेरे ऊपर आ गई और मैं नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े कूल्हे सहलाने लगा। रितु की चूत पानी छोड़ गई। अब मैं और नहीं रह सकता था, मैं उठा और रितु को लिटा कर, उसकी टांगें चौड़ी करके चूत में लण्ड डाल दिया और रितु कराहने लगी।
मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा। रितु ने मुझे कस कर पकड़ लिया और कहने लगी- अरुण ऐसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मैं तुम्हारी हो गई, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लण्ड अपनी चूत में चाहिये! एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा। “Bahan Pahli Chudai Story”
कुछ देर बाद मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया और रितु भी कई बार डिस्चार्ज हो चुकी थी। उस दिन मैंने तीन बार अलग अलग आसनों से रितु को चोदा। रितु ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया। उसके बाद हमने कपड़े पहने और बाहर ड्राइंग रूम में आ गए, सूरज वहाँ टीवी देख रहा था. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसको देख कर रितु थोड़ा शरमा गई और मैंने घर का नंबर मिलाया और फोन रितु को दे दिया। फोन दीपिका ने उठाया और वही बात हुई जो तय हुई थी। दीपिका ने कह दिया कि वो कल दस बजे तक आ जायेगी। मैंने रितु को चूम लिया तो सूरज मुस्कुराने लगा और मैं वहां से चला आया।
घर पहुँचा तो दीपिका बोली- भैया, रितु आंटी का फोन आया था कल सुबह दस बजे उनके यहाँ जाना है, पूजा है।
मैंने कहा- ठीक है! नौ बजे तक तैयार हो जाना! और मन ही मन सोचा कि पूजा तो तुम्हारी होगी, कल की जिंदगी भर नहीं भूलोगी।
अगले दिन हम सुबह साढ़े नौ बजे घर से निकले और दस बजे सूरज के घर पहुँच गए।
अंदर गए तो दीपिका ने पूछा- आंटी, क्या हम लोग सबसे पहले आ गए हैं?
रितु- अरे नहीं, असल में पूजा रद्द हो गई क्योंकि पंडित जी बीमार हो गए! सबको तो मैंने फोन करके मना कर दिया पर तुम्हारा फोन लग ही नहीं रहा था। अच्छा ही हुआ कि तुम आ गई, पहली बार आई हो इस घर में! अरुण तो आता रहता हैं पर तुम तो शक्ल ही नहीं दिखाती। अब खाना खाकर ही जाना। “Bahan Pahli Chudai Story”
दीपिका- नहीं आंटी, ऐसी बात नहीं है! पर कॉलेज के बाद समय ही नहीं मिलता।
अरे ऐसी भी क्या पढ़ाई! यही तो उम्र है खेलने खाने की! क्यों अरुण?
मैंने शरारत से कहा- जी, मैं तो खूब खेलता-खाता हूँ आप तो जानती ही हैं। सूरज कहाँ है?
रितु- नहा रहा है! तब तक सूरज नहा कर आ गया और उसने सिर्फ एक तौलिया लपेट रखा था। उसको देख कर दीपिका शरमा गई तो सूरज बोला- अरे क्या दीदी, बचपन में हम दोनों नंगे खेलते थे और अभी तो तौलिया पहना है मैंने! तब भी शरमा गई?
दीपिका बोली- हट बदमाश!
सूरज दीपिका के सामने इस प्रकार से बैठ गया कि उसका लण्ड दीपिका को नजर आता रहे। दीपिका की निगाहें भी बार बार उसके तौलिए के अन्दर उसके लण्ड पर जा रही थी और यह बात हम तीनों से छिपी नहीं थी।
रितु ने मुझसे पूछा- अरुण कोल्डड्रिंक या चाय?
मैंने कहा- चाय!
सूरज ने भी चाय माँगी तब रितु ने दीपिका से पूछा तो वो बोली- जब ये लोग चाय पियेंगे तो मैं भी वही ले लूंगी। पाँच मिनट में चाय आ गई और हमने अपने अपने कप उठा लिए। तभी सूरज किसी बहाने से उठा और दीपिका के पास गया। “Bahan Pahli Chudai Story”
सूरज ने दीपिका के ऊपर अपनी चाय गिरा दी, योजना के अनुसार सूरज की चाय ज्यादा गर्म नहीं थी। और वो पूरी चाय से तरबतर हो गई। रितु को मैंने इशारा किया और वो सूरज के ऊपर चिल्लाने लगी। सूरज ने तुरंत दीपिका का टॉप खींच कर उतार दिया तो दीपिका अकस्मात हुए इस घटनाक्रम से अचंभित सी रह गई।
जब उसे अपना होश आया तो वो अपने को सूरज से छुड़ाने का प्रयत्न करने लगी। तब तक रितु उनके पास पहुँच चुकी थी और रितु ने दीपिका को सूरज से छुड़वा कर अपनी बाँहों में ले लिया, उसे बाथरूम में ले गई और उसके ऊपर शॉवर चला दिया।
हम दोनों भी बाथरूम में गए तो देखा कि रितु भी बिल्कुल भीग चुकी थी। रितु दीपिका की ब्रा भी उतार चुकी थी और उसके स्तनों को धोने के बहाने मसल रही थी, उसके चुचूकों से खेल रही थी। दीपिका की यौनाग्नि प्रज्वलित हो चुकी थी और उसके आंखें मुंदी जा रही थी। सूरज अन्दर गया और वो भी दीपिका के स्तन मसलने लगा।
सूरज ने दीपिका की चूचियों पर हाथ फ़ेरते हुए पूछा- अब जलन तो नहीं हो रही?
इस पर रितु बोली- हाँ दीपिका बता दे! अगर जलन हो रही है तो सूरज से बर्फ़ मंगवाऊँ?
मैं बोला- मैं लाता हूं बर्फ़! मैं बर्फ़ रसोई में जाकर फ़्रिज़ से बर्फ़ ले आया और सूरज और रितु दोनों उसकी चूचियों पर बर्फ़ फ़िराने लगे। दीपिका सिहर गई और कहने लगी- नहीं आन्टी! बहुत ठण्डी लग रही है। तो मैं गर्म कर देता हूं ना चूस कर! कह कर सूरज कुछ ही पलों में उसके स्तन चूसने लगा।
अरे तेरी जीन्स बिल्कुल भीग गई! कहते हुए रितु दीपिका की जींस का बटन खोलने लगी और नीचे झुक कर उसकी जींस उसकी टांगों से अलग कर दी। अब दीपिका सिर्फ़ पैंटी में थी। रितु ने सूरज को आँख से इशारा किया तो सूरज अपने हाथ दीपिका की पैन्टी पर ले गया और उसकी फ़ुद्दी पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा। दीपिका ने कोई विरोध नहीं किया। “Bahan Pahli Chudai Story”
दीपिका अब पूरी गर्म हो चुकी थी और सीत्कार रही थी। फिर सूरज उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। रितु ने अपने हाथ से दीपिका की पैंटी नीचे सरका दी और अब सूरज का हाथ उसकी नंगी योनि पर था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
इसी अवस्था में रितु और सूरज मिलकर दीपिका को कमरे में ले गए और बिस्तर पर लिटा दिया। आँटी सूरज के गीले कपड़े उतारने लगी तो सूरज ने कहा- मम्मी, आप जाइए, मैं सम्भाल लूंगा। रितु के जाने के बाद सूरज उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा, फ़िर सूरज दीपिका की चूत की फांकों पर हाथ फिराने लगा।
फिर हाथ फिराते-फिराते सूरज उंगलियों को दीपिका की चूत के फाँको में डाल कर रगड़ने लगा और अपनी एक उँगली दीपिका की चूत के अन्दर घुसा कर उसकी चूत को हल्के-हल्के रगड़ने लगा। फिर उसकी चूत के जी-पॉइंट को अपनी उंगलियों से दबाने और हल्के-हल्के रगड़ने लगा। “Bahan Pahli Chudai Story”
लगभग 5-7 मिनट बाद दीपिका की चूत से कुछ बहुत चिकना सा निकलने लगा। अचानक दीपिका के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी और उसने अपनी आँखें खोल दी और काम-मद में बोली- सूरज क्या कर रहे हो?
सूरज ने कहा- बस सोचा कि आज अपनी दीपिका को कुछ मजा कराया जाये। सच बताओ, क्या मजा नहीं आ रहा हैं? मुझे पता है तुम मजे ले रही थी। वरना तुम्हारे नीचे से चिकना-चिकना सा नहीं निकलता।
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दीपिका मुस्कुराई और बोली- सच सूरज, मुझे नहीं पता तुम क्या कर रहे थे पर मज़ा आ रहा था।
सूरज बोला- दीपिका, मेरा साथ दो। हम दोनों मिलकर खूब मजा करेंगे।
दीपिका बोली- क्या साथ दूँ और क्या दोनों मिलकर मजा करेंगे। और मेरी पैंटी क्यो उतार रखी है ?
सूरज ने कहा- दीपिका, मैं तुम्हारी पैंटी के अन्दर मजा ढूंढ रहा था!
कह कर सूरज ने उसे अपने सीने से चिपका लिया और फिर सूरज ने अपने जलते हुऐ होंठ दीपिका के होंठों पर रख दिए। फिर सूरज उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। दीपिका ने भी उसे अपनी बाँहो में कस लिया। “Bahan Pahli Chudai Story”
वो बहुत गर्म हो चुकी थी, जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थी, सूरज के बालों पर हाथ फेर रही थी और उसके होंठ चूस रही थी। सूरज का लण्ड दीपिका की जांघों से रगड़ खा रहा था। सूरज ने दीपिका का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया।
दीपिका ने बिना झिझके सूरज का लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। सूरज का लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। दीपिका लण्ड को मुठ्ठी में भर कर आगे-पीछे करने लगी। फिर वो सूरज का लण्ड पकड़ कर जोर-जोर से हिलाने लगी।
अब सूरज दीपिका की चूत मारने को बेताब हो रहा था। सूरज दीपिका के ऊपर आकर लेट गया। दीपिका का नंगा जिस्म सूरज के नंगे जिस्म के नीचे दब गया। सूरज का लण्ड दीपिका की जांघों के बीच में रगड़ खा रहा था। सूरज उसके उपर लेट कर उसके चुचूक को चूसने लगा।
वो बस सिसकारियाँ ले रही थी। फिर सूरज एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। वो मछली की तरह छटपटाने लगी और अपने हाथों से सूरज का लण्ड को टटोलने लगी। सूरज का लण्ड पूरे जोश में आ गया था और पूरा तरह खड़ा हो कर लोहे जैसा सख्त हो गया था।
दीपिका सूरज के कान के पास फुसफसा कर बोली- ओह सूरज। प्लीज़! कुछ करो ना। तन-बदन में आग सी लग रही है।
यह सुन कर अब सूरज ने उसकी टांगें थोड़ी ओर चौड़ी की और उसके ऊपर चढ़ गया। फिर अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा। फिर सूरज ने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का मारा जिससे लण्ड का सुपारा दीपिका की कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया। “Bahan Pahli Chudai Story”
लण्ड के अन्दर जाते ही दीपिका के मुँह से चीख निकल गई और वो अपने हाथ पाँव बेड पर पटकने लगी और सूरज को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन सूरज ने उसे कस कर पकड़ा था। दीपिका की चीख सुन कर रितु अन्दर आ गई और सारा खेल देखने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीपिका सूरज के सामने गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ सूरज, मुझे छोड़, सूरज मर जाऊंगी, बहुत दर्द हो रहा है।
सूरज ने कहा- दीपिका तुम ही तो कह रही थी कि सूरज, प्लीज़! कुछ करो ना। तन-बदन में आग सी लग रही हैं। इसलिये तो तुम्हारे अन्दर डाला है। दीपिका तुम चिन्ता मत करो, पहली बार में ऐसा होता है, एक बार पूरा अन्दर जाने के बाद तुम्हें मज़ा ही मज़ा आएगा।
दीपिका को देख कर रितु हंसने लगी और बोली- अरे पूरा डालो तब इसे असली मज़ा आयेगा।
यह सुन कर सूरज ने एक और धक्का लगा कर उसकी चूत में अपना आधा लण्ड घुसा दिया। दीपिका तड़पने लगी। सूरज उसके ऊपर लेट कर उसके उरोज़ों को दबाने लगा और उसके होठों को अपने होठों से रगड़ने लगा। इससे दीपिका की तकलीफ़ कुछ कम हुई।
अब सूरज ने एक जोरदार धक्के से अपना पूरा का पूरा लण्ड बहन चूत के अन्दर कर दिया। सूरज का 8″ लम्बा और ३” मोटा लण्ड उसके कौमार्य को चीरता हुआ उसकी कुँवारी चूत में समा गया। इस पर वो चिल्लाने लगी- आहह्ह, मर गई। ओह प्लीज़ सूरज इसे बाहर निकाल, सूरज मर जाउंगी। “Bahan Pahli Chudai Story”
उसकी चूत से रस टपकने लगा था। सूरज रुक गया और दीपिका से बोला- प्लीज़! दीपिका, मेरी जान, अब और दर्द नहीं होगा। दीपिका का यह पहला सैक्सपीरियन्स था। इसलिए सूरज वहीं रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा और उसके माथे को और आँखों को चूमने लगा।
उसकी आँखों से आँसू निकल आये थे और वो सिसकारियाँ भरने लगी थी। यह देख कर सूरज ने दीपिका को अपनी बाँहों में भर लिया। फिर सूरज ने अपने जलते हुऐ होंठ दीपिका के होंठों पर रख दिए और सूरज उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा, ताकि वो अपना सारा दर्द भूल जाये।
कुछ देर बाद उसका दर्द भी कम हो गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में से कस लिया। सूरज ने भी दीपिका को अपनी बाँहों में भर लिया। सूरज का पूरा लण्ड दीपिका की चूत के अन्दर तक समाया हुआ था। फिर सूरज अपने होंठों से उसके नरम-नरम होंठों को चूसने लगा। “Bahan Pahli Chudai Story”
कुछ देर तक दोनों ऐसे ही एक-दूसरे से चिपके रहे और एक-दूसरे के होंठों को चूसते रहे। फिर सूरज अपने लण्ड को उसकी चूत में धीरे-धीरे अन्दर बाहर करने लगा। दीपिका ने कोई विरोध नहीं किया। अब शायद उसका दर्द भी खत्म होने लगा था और वो जोश में आ रही थी और अपनी कमर को भी हिलाने लगी थी।
उसकी चूत में से रस बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी थी और आज ही सूरज ने उसकी सील तोड़ी है। उसकी चूत बहुत तंग थी और सूरज का लण्ड बहुत मोटा था, इसलिए दीपिका को चोदने में बहुत मजा आ रहा था।
सूरज अपने लण्ड को धीरे-धीरे से दीपिका की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। फिर कुछ देर बाद दीपिका ने अपनी टांगें उपर की तरफ मोड़ ली और सूरज की कमर के दोनों तरफ लपेट ली। सूरज अपने लण्ड को लगातार धीरे-धीरे बहन की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था।
धीरे-धीरे सूरज की रफ़्तार बढ़ने लगी। अब सूरज का लण्ड दीपिका की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था। सूरज दीपिका की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मारने लगा था। थोड़ी देर में दीपिका भी नीचे से अपनी कमर उचका कर सूरज के धक्कों का ज़वाब देने लगी.
और मज़े में बोलने लगी- सी …. सी…. और जोररर से………. येस अरर बहुत मज़ा आ रहा है और अन्दर डालो और सूरज और अन्दर येस्स्स्स्स जोर से करो। प्लीज़! सूरज तेज-तेज करो ना। आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।
दीपिका को सचमुच में मजा आने लगा था। वो जोर जोर से अपने कूल्हे हिला रही थी और सूरज तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। वो सूरज के हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने सूरज के कूल्हों को अपने हाथों में थाम लिया। जब सूरज लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने कूल्हे पीछे खींच लेती।
जब सूरज लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपनी जांघें उपर उठा देती। सूरज तेज-तेज धक्के मार कर दीपिका को चोदने लगा। फिर सूरज बेड पर हाथ रख कर दीपिका के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब सूरज का लण्ड दीपिका की चिकनी चूत में आसानी और तेजी से आ-जा रहा था। दीपिका भी अब चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। वो मदहोश हो रही थी।
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सूरज ने रुक कर दीपिका से पूछा- दीपिका अच्छा लग रहा है?
दीपिका बोली- हाँ सूरज बहुत अच्छा लग रहा है। प्लीज़! रुको मत। तेज-तेज करते रहो। हाँ प्लीज़! तेज-तेज करो। प्लीज़! चलो करो। अब रुको मत। तेज-तेज करते रहो।
दीपिका के मुहँ से यह सुन कर सूरज ने फिर से दीपिका को पूरे आवेग से चोदना शुरु कर दिया। सूरज ने दीपिका के बड़े-बड़े कूल्हे को अपने हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर दीपिका को चोदने लगा। “Bahan Pahli Chudai Story”
दीपिका के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्हहोहोह सिस्स्सह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआ हा-हा करो-करो अआह हाहअआ प्लीज़! सूरज तेज-तेज करो।”
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ने वाली थी तभी दोनों एक साथ अकड़ गये और एक साथ जोर-जोर से धक्के मारने लगे। फिर अचानक दीपिका ने सूरज को कस कर अपनी बाँहो में भर लिया और बोली- सूरज सूरज! क्या हो रहा है मुझे! जोर-जोर से करो येस-येस अररर् और जोर से य….य….यस यससस सूरज हई ईई….!
इसके साथ ही दीपिका की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। उसने एक जोर से आह भरी और फिर वो ढीली पड़ गई। सूरज समझ गया कि दीपिका स्खलित हो गई है। लेकिन सूरज का काम अभी नहीं हुआ था इसलिए सूरज जोर-जोर से अपने लण्ड से दीपिका की चूत को पेलने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
सूरज भी झड़ने वाला था, इसलिये सूरज तेज-तेज धक्के मारने लगा। दीपिका रोने सी लगी और सूरज के लण्ड को अपनी चूत में से बाहर निकालने के लिए बोलने लगी। लेकिन सूरज ने उसकी बातों को अनसुना कर धक्के लगाना जारी रखा।
करीब 2-3 मिनट तक दीपिका को तेज-तेज चोदने के बाद जब सूरज होने लगा तो सूरज ने अपना लण्ड दीपिका की चूत से बाहर खींच लिया और उसकी चूत के झांटों ऊपर वीर्य गिरा दिया और उसके ऊपर गिर गया।
फिर सूरज उसके ऊपर लेट कर अपनी तेज-तेज चलती हुई सांसों को सामान्य होने का इन्तज़ार करता रहा। फिर सूरज दीपिका की बगल में लेट गया। दीपिका भी सूरज के साथ लेटी हुई अपनी सांसों को काबू में आने का इंतजार कर रही थी। दीपिका की चूत के काले घने घुंघराले बालों में सूरज के वीर्य की सफेद बून्दें चमक रही थी।
रितु बोली- अरे सूरज तू पहली ही बार में इतनी देर टिका रहा? कमाल है।
मैंने कहा- अरे आखिर मेरी बहन की पहली चुदाई थी तो धमाकेदार तो होनी ही चाहिए थी।
रितु बोली- चलो अब अपन एक राउंड खेल लेते है।
फिर में रितु को चोद कर घर चला आया।
रात को मैंने फोन पर रितु से पूछा- दीपिका के क्या हाल हैं?
रितु ने बताया- उसको अब तो सूरज उसको तीसरी बार चोद रहा है और वो बहुत मज़े ले ले कर चुदवा रही है।
मैंने कहा- स्वामी जी ने तो एक हफ्ते का समय दिया था और सूरज ने तो एक दिन में ही तीन बार चोद डाला मेरी प्यारी दीदी को।
रितु हंसने लगी और बोली- अब सूरज की तबीयत ठीक हो जाये बस।
मैंने मन में कहा- ठीक तो हो ही जायेगा।
अगले दिन सुबह पापा का फोन आया, उन्होंने बोला कि वह चार दिन और वहीं रहेंगे। फिर मैं आराम से तैयार हो कर जब सूरज के घर पंहुचा तो रितु ने बताया- सूरज और दीपिका एक साथ नहा रहे हैं।
मैंने दीपिका से कहा- घर नहीं चलना?
तो वो बोली- मम्मी-पापा तो परसों वापस आएंगे तब तक मैं यहीं रह जाती हूँ।
यह सुन कर सूरज ने दीपिका क एक प्यारा सा चुम्मा लिया और रितु बोली- यह तो बन गई पूरी चुदासी।
मैंने झूठ बोल दिया कि सुबह पापा का फोन आया था वो कल सुबह आ रहे हैं। यह सुन कर दीपिका थोड़ा उदास हो गई.
तो मैंने कहा- अच्छा चलो! शाम तक करो खूब प्यार! आओ आंटी इनको प्यार करने दो! हम आपके बेडरूम में चलते हैं।
और मैं फिर से रितु को एक बार और चोदने चल पड़ा और उधर सूरज दीपिका को बाथटब में लिटा कर चोदने लगा। असल में मैंने सोचा कि जब दीपिका सूरज से चुद ही गई है तो क्यों न मैं भी उसको चोदूँ। यह सोच कर ही मैंने उसको झूठ बोला कि पापा कल आ रहे हैं ताकि उसे घर ले जा कर मैं खूब चोदूँ और उसकी गांड भी मारूँ।
शाम तक सूरज ने दीपिका की तबीयत से चुदाई की और फिर मैं उसे लेकर घर वापस आ गया। अब मैं यह सोच रहा था कि कैसे दीपिका को चोदा जाये। क्योंकि हो सकता है कि सूरज से एक बार चुदने के बाद से वो उसके सामने खुल गई हो पर मेरे सामने आने से पहले वो अपना बदन ढक ले रही थी। मैंने उसको बातों से गर्म करने की सोची। “Bahan Pahli Chudai Story”
मैंने उससे पूछा- कैसा लगा पहली बार सेक्स करके?
वो बोली- देखो भैया, सभी लड़कियों को शरीर की भूख होती है और सबको सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है पर एक तो बदनामी का डर और कभी कोई अनुभव न होने से कोई भी लड़की शादी से पहले सेक्स करने से डरती हैं, मैं भी शादी से पहले यह काम नहीं करना चाहती थी। जब मैं चुदी तो लगा कि जन्नत में पहुँच गई और लगा कि मैं बेकार ही डरती थी और फिर तो लगा कि बस सूरज मुझे चोदता ही जाये।
मैंने कहा- बस सूरज ही या और किसी से भी चुदने का इरादा है?
वो बोली- बात तो वही बदनामी की है और मेरा काम तो अब सूरज से हो ही जायेगा क्योंकि उसने बोला है कि जब भी जरूरत हो बुला लेना, मैं चोदने आ जाऊँगा।
मैंने कहा- बदनामी का कोई डर न हो तो?
वो बोली- मतलब? मैंने कहा- दीपिका जब से मैंने कल से तुम्हें नंगा देखा है, मेरा बुरा हाल है और जब तक तुम मुझे नहीं मिल जाती मुझे चैन नहीं आयेगा।
अचानक दीपिका भड़क गई और बोली- अपनी सगी बहन को पहले तो अपने दोस्त से चुदवाया और अब खुद भी चोदना चाहता है? बहन चोद!
उसके मुँह से गाली सुन कर मुझे बड़ा अजीब लगा क्योंकि हम सबको लगता था कि यह बहुत शरीफ है और कुछ नहीं जानती।
मैं साफ़ साफ़ बोला- देखो, तुम्हारी अगर मर्ज़ी न हो तो कोई बात नहीं! पर मम्मी पापा कल नहीं चार दिन बाद आएंगे और मैं तुम्हें झूठ बोल कर वापिस इसलिए लाया था कि तुम्हें चोद सकूँ।
वो चिल्लाने लगी- चोद सकूँ! चोद सकूँ! अरे हाथ भी मत लगाना वरना देख लेना भोसड़ी के! अरे, मैं वहाँ आराम से सूरज से चुद रही थी तब तो झूठ बोल कर मुझे वापिस ले आया और खुद चोदना चाहता है? गांड मार दूँगी अगर हाथ भी लगाया तो।
मैंने सोचा कि इस वक्त काम टेढ़ी ऊँगली से निकलना होगा।
मैंने कहा- बस इतनी सी बात? अभी मैं सूरज को यहीं ले आता हूँ! और मैं सूरज को लेने चल पड़ा।
सूरज के घर पहुँच कर मैंने रितु से कहा- आज रात को सूरज मेरे घर पर ही रुकेगा और उसको लेकर वापस आ गया।
रास्ते में सूरज बोला- यार अरुण, दीपिका बहुत मस्त चीज़ है! मैं उससे शादी करना चाहता हूँ! अभी मम्मी से मैं यही बात कर रहा था। कुछ चक्कर चलाओ और मेरे साले बन जाओ।
मुझे पता था कि दीपिका सूरज के लंड की दीवानी हो चुकी है पर मैं बोला- यार, इसमें मेरा क्या फायदा? तुम्हें तो करारा माल मिलेगा जिंदगी भर चोदने के लिए और मुझे कुछ नहीं।
वो बोला- यार मम्मी को चुदवा दिया तुमसे! और क्या चाहते हो?
मैं बोला- मैंने भी तो दीपिका चुदवा दिया तुमसे! हिसाब बराबर।
सूरज- ऐसा मत बोल, तू मेरा दोस्त है। कुछ कर न यार।
मैं- देख कर तो सकता हूँ पर तू कुछ ऐसा कर कि दीपिका मुझसे चुदवा ले बस एक बार।
सूरज- साले अपनी सगी बहन को चोदेगा? मैं उससे शादी करना चाहता हूँ और तू बोल रहा है कि उसको तुझसे चुदवाऊँ।
मैं- अबे जाने दे, सबसे बड़ा रिश्ता तो आदमी और औरत का होता है। बोल क्योंकि मेरे मनाये बिना मम्मी पापा नहीं मानेंगे।
सूरज- चल यार, तू आखिर दोस्त है, आज ही ग्रुप सेक्स करते है दीपिका के साथ। चल एक बोतल वोदका ले ले।
मैं- हाँ खाना भी तो लेना है।
सूरज के कहने से मैंने सिर्फ नानवेज खाना लिया। खाना और वोदका खरीद कर हम जैसे ही घर पहुँचे, दीपिका सूरज से लिपट गई और पैंट के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर हिलाने लगी।
मैंने कहा- अरे पहले खाने-पीने का इंतज़ाम करो, इसके लिए तो पूरी रात पड़ी है।
दीपिका बोली- लाओ, पैकेट मुझे दे दो! मैं खाना लगाती हूँ। खाना देख कर दीपिका बोली- अरे तुम लोग सिर्फ नानवेज ले कर आये हो ? अब मैं क्या करूंगी।
सूरज बोला- मेरी जान, पहले सिर्फ कबाब और तीन गिलास ले कर आओ।
दीपिका कबाब और गिलास ले कर आई तो सूरज ने कहा- ये सब मेज पर रख दो और मेरी गोद में बैठ जाओ। अरुण तुम पेग बनाओ।
दीपिका सूरज की गोद में बैठ गई और सूरज उसकी चूचियों से खेलने लगा। मैंने तीन मोटे पेग बना दिए और सूरज ने एक पेग उठा कर दीपिका के मुँह से लगा दिया।
दीपिका बोली- अरे, मैं नहीं पीती! पर सूरज ने एक ना सुनी और पूरा गिलास जबरदस्ती दीपिका के गले में उड़ेल दिया।
सूरज ने कहा- एक और पेग बनाओ इसके लिए।
इस बार मैंने वोदका थोड़ा कम और कोल्ड ड्रिंक ज्यादा डाल कर पेग बनाया तो दीपिका धीरे धीरे पीने लगी। तब तक सूरज ने एक कबाब का टुकड़ा उठाया और उसके मुँह में डालने लगा।
दीपिका ने कहा- नहीं सूरज, मैंने तुम्हारे कहने से शराब पी ली है पर यह नहीं खा सकती, उलटी हो जायेगी।
सूरज बोला- मेरी जान एक बार चखो तो!
दीपिका ना ना करती रही और सूरज ने सिर्फ एक सिर्फ एक मेरे लिए करते करते उसके मुँह में कबाब डाल ही दिया। बोनलेस होने की वजह से दीपिका को कुछ पता ही नहीं चला और वो कबाब खा गई। जैसा हमने सोचा था. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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हमने दीपिका को चार पेग पिला दिए और खुद सिर्फ दो ही पेग पिए और दीपिका का पहला पेग तो तीन पेग के बराबर था। अब दीपिका नशे में धुत हो चुकी थी और मज़े ले लेकर तंदूरी चिकन फाड़ रही थी। खा पीकर हम दीपिका को गोद में उठा कर बेडरूम में ले गए। तब तक तो नशे से बेहोश हो चुकी थी।
सूरज बोला- इतनी पी ली है इसने कि कल सुबह तक नशा नहीं उतरेगा इसका! आधा घंटा सोने दे इसे, तब तक कोई ब्लू फिल्म लगा दे।
आधे घंटे में हम दोनों के लण्ड कुतुब मीनार बन चुके थे। हमने तब जा कर दीपिका को जगाया। मैंने उसकी दोनों चूचियों को मसल दिया पर उस पर नशा बहुत था तो उसने कोई विरोध नहीं किया और फ़िर वहीं सोफ़े पर दीपिका के बिल्कुल सामने बैठ गया। “Bahan Pahli Chudai Story”
सूरज ने दीपिका को अपने ऊपर खींच लिया और दीपिका को अपने पूरे बदन पर फ़ैला कर उसके होंठ चूसने शुरु कर दिये। दीपिका अब भी अपने दोनों टाँगों को सटाए हुइ थी, उन दोनों के सर मेरी ओर थे। दीपिका की छाती सूरज के सीने पे दबी हुई थी।
सूरज अब दीपिका को वैसे ही चिपटाये हुए पलट गया और दीपिका अब उसके नीचे हो गई। वो अब उसके चुम्मे का जवाब देने लगी थी। सूरज 2-3 मिनट के बाद हटा और फ़िर उसकी दाहिनी चूची को चूसने लगा। वह अपने एक हाथ से उसकी बाईं चूची को हल्के से मसल भी रहा था।
दीपिका की आँखें बन्द थी और उसकी साँस गहरी हो चली थी। जल्द ही दीपिका अपने पैरों को हल्के हल्के हिलाने, आपसे में रगड़ने लगी। उसकी चूत गीली होने लगी थी। जैसे ही उसने एक सिसकारी भरी, सूरज उसके ऊपर से पूरी तरह हट गया और मुझे उसके पैरों की तरफ़ जाने का इशारा किया।
मैं अब दीपिका की सर की तरफ़ से हट कर उसके पैरों की तरफ़ हो गया। सूरज अब उसकी चूत पर झुका। होठों के बीच उसकी झाँटों को ले कर दो-चार बार हलके से खींचा और फ़िर उसकी जाँघ खोल दी। उसकी चूत की फ़ाँक खुद के पानी से गीली हो कर चमक रही थी।
सूरज अपने स्टाईल में जल्द ही चूत चूसने लगा और दीपिका के मुँह से आआअह आआअह ऊऊऊऊऊओह जैसी आवाज ही निकल रही थी। सूरज चूसता रहा और दीपिका चरम सुख पा सिसक सिसक कर, काँप काँप कर हम लोगों को बता रही थी कि उसको आज पूरी मस्ती का मजा मिल रहा है। जल्द ही वो निढ़ाल हो कर थोड़ा शान्त हो गई।
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