Bahan Bhai Fuck Kahani
मेरा नाम स्वप्निल है, मेरी उम्र है 21 साल और मेरी बहन निशा की उम्र 18। निशा थोड़ी भारी है, उसका फिगर है 36-30-38। यकीन मानो, वो बहुत सेक्सी और हॉट है, मैंने खुद नोटिस किया है। वो B.A. में है, कॉलेज में। ये बात छह महीने पुरानी है, जब मेरे माता-पिता लद्दाख छुट्टियाँ मनाने गए थे। Bahan Bhai Fuck Kahani
घर में हम पाँच लोग हैं – मैं, मेरा बड़ा भाई, निशा, और मम्मी-पापा। उन दिनों निशा रोज़ कॉलेज जाती थी, मैं भी, और भाई का बिज़नेस होने की वजह से वो भी छुट्टियों पर नहीं गया। हम तीनों ही घर में अकेले थे, पूरे एक महीने के लिए।
एक दिन सुबह भाई बिज़नेस के सिलसिले में गाँव चले गए और निशा को बता गए कि कल लौटेंगे। मैं उस वक्त सो रहा था। जब उठा, तो निशा ने बताया कि भाई गाँव गए हैं। तभी मेरे दिमाग में एक खयाल आया – क्यों ना आज मौका देखकर निशा की वर्जिनिटी तोड़ दूँ?
मैं कॉलेज चला गया। उस दिन निशा की छुट्टी थी। इत्तेफाक से मेरे सारे लेक्चर कैंसल हो गए, तो मैं जल्दी घर लौट आया। घर पहुँचकर फ्रेश हुआ। गर्मी बहुत थी, निशा उस वक्त नहा रही थी। उसने कहा, “भैया, तुम भी नहा लो, पानी बचा है।”
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मैंने सोचा, चलो नहा लेते हैं। बाथरूम में गया, देखा मेरे बाल काफी बढ़ गए हैं। मैंने रेज़र की तरफ हाथ बढ़ाया, तो वो गीला था। समझ गया कि निशा ने अभी-अभी शेव किया है। मैंने भी अपने लंड के सारे बाल साफ किए और नहाकर फ्रेश हो गया।
बाहर आया, हॉल में टीवी देखने चला गया। उस वक्त लाइट भी चली गई थी। गर्मी अपने चरम पर थी। निशा ने एक पतला-सा गाउन पहना था। आप तो जानते हैं, बेकार बैठे-बैठे लंड कैसे तंग करता है! ऊपर से गर्मी और निशा के बूब्स, जो उस नाइट सूट में कातिलाना लग रहे थे।
मैंने सोचा, कुछ करना चाहिए। निशा सोफे पर लेटी थी, रिमोट मुँह में दबाए लाइट आने का इंतज़ार कर रही थी। मैं उठा, सारे कपड़े उतारे और सिर्फ तौलिया लपेटकर हॉल में आ गया। निशा ने देखा और समझ गई कि गर्मी की वजह से मैंने ऐसा किया।
लेकिन मैं उसे हवस भरी नज़रों से देख रहा था। वो मुझे इग्नोर कर रही थी। मेरा लंड 90 डिग्री पर तन चुका था। मुझे एक आइडिया आया – क्यों ना निशा के सामने तौलिया खोल दूँ? वो समझ जाएगी कि मैं क्या चाहता हूँ। मैंने प्लान बनाया।
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धीरे से निशा के सामने खड़ा हो गया। वो जिस सोफे पर थी, उसके ऊपर एक ट्यूबलाइट थी। मैंने कहा, “निशा, ज़रा हट, मुझे ट्यूबलाइट ठीक करनी है।” वो थोड़ा हटी। मैं ऐसे खड़ा हुआ कि मेरा लंड उसे दिख जाए। और मैं कामयाब भी हुआ।
तिरछी नज़रों से देखा, निशा मेरे लंड को हैरानी से देख रही थी और शायद गर्म भी हो रही थी। थोड़ी देर बाद वो उठी और किचन में चली गई, जैसे कुछ हुआ ही ना हो। निशा बहुत शरीफ है, ये मैं बता दूँ। वो मेरे लिए चाय बनाने लगी। मैं अब पूरी तरह गर्म हो चुका था।
वो भी थोड़ा-थोड़ा गर्म हो रही थी। मैं धीरे से किचन में गया और उससे बातें करने लगा। वो नीचे मुँह करके बात कर रही थी। मैं चाहता था कि वो मुँह उठाए, लेकिन वो शर्मिंदगी में डूबी थी। मैंने एक और प्लान बनाया। धीरे से अपने लंड को खुजलाने लगा और तौलिया ढीला कर दिया।
अब मैं अपनी बहन के सामने नंगा होने जा रहा था। अचानक मैंने तौलिया खींचा और निशा की तरफ पीठ करके बोला, “मेरी पीठ पर कुछ है, देख!” वो बोली, “नहीं भैया, कुछ नहीं है।” मैं उसकी तरफ पलटा। उसने एक नज़र मुझे देखा और शर्म से आँखें नीचे कर लीं। अचानक मैं उसके करीब गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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उसकी गांड पर हाथ रखकर बोला, “ये रहा वो कॉकरोच!”
वो बोली, “कहाँ?”
मैंने धीरे से उसकी गांड की दरार में उंगली रखी और कहा, “हिलना मत, मैं निकालता हूँ।”
उसने डर के मारे आँखें बंद कर लीं। मैंने उसके नाइट सूट के अंदर हाथ डाला।
वो डर से बोली, “कहाँ है?”
मैंने कहा, “ज़रा ठहर, मैं देखता हूँ।”
और फिर मैंने उसके सलवार का नाड़ा ज़ोर से खींचा, जैसे गड़बड़ी में खींचा हो। उसकी सलवार नीचे सरक गई।
वो तुरंत समझ गई और बोली, “भैया, ये क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा, “निशा, तुम अब काफी बड़ी हो गई हो।”
मैं तो पहले से नंगा था। अपना लंड उठाया और उसकी गांड में रगड़ने की कोशिश करने लगा। उसने अपनी गांड की दरार को मज़बूत किया और बोली, “भैया, ये गलत है।” मैं हवस में पागल हो चुका था। मैंने ज़ोर से उसका हाथ धकेला, एक हाथ से उसके बूब्स और दूसरे से उसकी चूत को सहलाने लगा।
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जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर गया, उसका रेज़िस्टेंस कम होने लगा। दस मिनट बाद वो मेरी तरफ मुँह करके मुझे घूरने लगी। अचानक उसने मेरा लंड अपने हाथों में लिया और मुँह में ले लिया। मैं शॉक्ड था। अब हम दोनों पूरी तरह गर्म हो चुके थे।
मैंने उसे उठाया और बेडरूम की तरफ ले गया। उसकी चूत को 15 मिनट तक चाटता रहा। उसे पलटाकर उसकी गांड भी चाटी। फिर उसके सारे जिस्म पर किस करने लगा। मेरा लंड अभी भी टाइट था, लेकिन उसकी चूत से कुछ निकल रहा था।
अचानक उसने मुझे धक्का दिया, मुझे नीचे गिराया और मेरी पीठ पर बैठ गई। उसने मेरे ऊपर सारा सफेद-सफेद माल गिरा दिया। मैं हैरान हो गया और बोला, “निशा, ये क्या है?”
वो मुस्कुराकर बोली, “अब मैं सैटिस्फाई हो गई।”
मैंने कहा, “लेकिन मैंने अभी तुझे चोदा कहाँ है?”
वो बोली, “पहली बार था, इसलिए मैं जल्दी झड़ हो गई।”
मैंने कहा, “लेकिन मैं अभी सैटिस्फाई नहीं हुआ।”
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ये कहते ही मैंने उसे नीचे गिराया, उसकी टाँगें खोलीं और उसे चोदना शुरू कर दिया। वो चिल्लाने लगी, “भैया… भैया… प्लीज़, धीरे करो, रस निकल रहा है।” लेकिन मैं तब तक नहीं रुका, जब तक मैं ठंडा नहीं हो गया। बाद में देखा, चादर पर रस पड़ा था। मैं समझ गया कि निशा की सील टूट गई है। अब हम दोनों का रिश्ता और गहरा हो गया। गर्मी के वो दिन हमेशा याद रहेंगे।
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