Badi Gand Wali Aunt
हैलो दोस्तों मेरा नाम अभी और मैं कुशीनगर जिले के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 25 साल है रंग गोरा और देखने में भी ठीक-ठाक हूं। मुझे आंटी टाइप की बड़ी गांड वाली महिलाओं को चोदना बहुत पसंद है। यह कहानी से 1 महीने पहले की है जब मैं किसी काम से कुशीनगर गया था। Badi Gand Wali Aunt
वापस आते समय रात हो गई। तो मैंने घर आने के लिए बस पकड़ ली। बस में काफी भीड़ थी। जिसके कारण मैं बस में सबसे पीछे जाकर खड़ा हो गया। बस मुश्किल से दो-तीन किलोमीटर ही चली थी कि। मैंने देखा कि मेरे गांव की एक आंटी और उसका लड़का बस में चढ़ रहे हैं।
आगे बहुत भीड़ थी तो वह लोग भी पीछे आ गए। वह लोग मेरे गांव के ही थे। उसे लड़के का नाम अर्जुन था और उसकी मां का नाम शीला था। तो उसे लड़के ने मुझसे बोल रे भैया इधर कहां से? मैंने जवाब दिया कुशीनगर से इतने में बस का कंडक्टर आया और वह लड़का टिकट लेने आगे चला गया।
अब उसकी मां मेरे आगे खड़ी थी। और वह लड़का उनके आगे खड़ा था। बस मैं बहुत ज्यादा भीड़ होने के कारण सभी लोग आपस में सटे हुए थे। दोस्तों मैं आपको बता दूं कि अर्जुन के परिवार में वो और उसकी माँ दो लोग ही हैं उसके पिता अब इस दुनिया में नही हैं।
अर्जुन की मां एक बड़ी गांड वाली गदरायी हुई बदन की एक चुदक्कड़ महिला है। उसकी उम्र 38 साल उसका रंग बिल्कुल दूध सा गोरा है। और उसके बड़े-बड़े उभरे हुए चुतड़ पीछे से उठे हुए हैं जो उसकी गांड को और भी कामुक बनाते हैं। उस आंटी की गदरायी हुई कमसिन जवानी के बारे में सोचकर मैं खुद भी कई बार मुट्ठी मार चुका हूं।
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वह अब तक बहुत से लोगों से चुद चुकी है। अब स्टोरी पर आता हूं। अर्जुन की मां मेरी तरफ अपना बैक करके खड़ी थी। जिसके कारण उसकी बड़ी सुडौल गांड मेरे लण्ड से 4 इंच की दूरी पर थी। और मै उसके बड़े-बड़े चुतड़ों को अपनी आँखों से चोद रहा था और मेरा लण्ड पैंट के अंदर फूल के ऑन्टी के चुतड़ों के बीच मे घुसने के लिए फड़फड़ा रहा था।
लगभग 2-3 किलोमीटर चलने के बाद बस स्टॉप पर बस रुकी और वहां से लगभग 10 12 लोग बस में चढ़े। अब बस और भी खचाखच भर गई। तभी आगे से कुछ लोगों ने धक्का दिया और ऑन्टी का कामुक बदन मेरे शरीर से एकदम चिपक गया। अब उसकी बड़ी गांड मेरे लण्ड में बिल्कुल सट चुकी थी अब मेरे लण्ड अपनी हवस के उफान पे आ गया और पुरा तन के उनकी कामुक गांड का अहसास लेने लगा।
दोस्तों जिस आंटी की बड़ी गांड के बारे में सोचकर मैं मुट्ठी मारता था उसकी बड़ी गांड मेरे लण्ड से चिपकी हुई थी। बस में भीड़ बहुत ज्यादा थी जिसके कारण किसी का भी ध्यान नीचे की ओर नहीं था। अब मैंने मौके का फायदा उठाया और अपने लण्ड को उसकी बड़ी सुडोल् गांड से रगड़ने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
आंटी ने का कोई रिएक्शन नही दिया। आंटी का कोई रिएक्शन ना मिला तो मैं अपने लण्ड को उनकी गांड से और जोर-जोर से रगड़ने लगा। तभी आंटी ने अपने में मेरी तरफ मुँह फेरा और गुस्से में घूरने लगी। मेरी तो गांड फट गयी मुझे डर था कि आंटी इस बारे में गांव में किसी को ना कहें। गांव में बहुत बदनामी होगी।
फिर वह आगे देखने लगी और सामान्य हो गई। उसके बाद मैं बिल्कुल से चुपचाप पीछे खड़ा था। तभी बस ब्रेकर पे चढ़ी। और ब्रेकर की झटको की वजह से आंटी की बड़ी गांड में फिर मेरे लण्ड से आ के चिपक गई। मैं डर गया कि आंटी फिर ना कुछ बोलें।
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2 मिनट ऐसे चलने के बाद आंटी अपनी बड़ी गांड को मेरे लण्ड से खुद रगड़ने लगी। मैं तो हैरान था और खुश भी की आंटी अपनी इतनी सेक्सी गांड को मेरे लण्ड से खुद रगड़ रही है। फिर क्या फिर मैं आंटी के कामुक सेक्सी बदन से बिल्कुल चिपक के खड़ा हो गया और रगड़ा रगड़ाई का खेल चालू हो गया।
आंटी की साँसे हल्की-हल्की तेज होने लगी थी। अब मैं अपने दोनों हाथों को आंटी की बड़ी चुतड़ों पे रख दिए। आंटी फिर तुरंत पीछे मुड़कर देखी। मैं फिर डर गया। इस बार आंटी ने मुझे गुस्से से नहीं बल्कि एक सेक्सी और वासना बारी नजरो से देखा।
मैं तो समझ गया कि आंटी भी अब तैयार है। अब मैं उनके बड़े चूतड़ों को पकड़ के अपने लण्ड को उनके चूतड़ों के दरार में के बीच में घुस के रगड़ने लगा। या मैं अब आंटी की बड़ी गांड को अपने हाथ से मसलते हुए अपने लण्ड को उनकी गांड से रगड़ रहा था।
आंटी हमेशा स्लीवलेस ब्लाउज पहनती थी। जिसके कारण उनकी गदरायी हुई गठीली पीठ मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। मुझे जब भी मौका मिलता है उनके पीठ को चूम लेता था। आंटी एकदम गरम हो चुकी थी। अब मैंने अपना एक हाँथ आंटी के पेट पर रखा और उसे नीचे की ओर सरकाते हुए उनके साड़ी पेटिकोट के अंदर ले गया।
आंटी ने पतली पट्टी वाली पैंटी पहनी हुई थी। अब मैंने अपना हाथ आंटी की पैंटी डाला दिया और उनकी चुत को सहलाने लगा। आंटी की चुत से पहले सही ही रस टपक रहा था। उनकी चुत एकदम रसीली हो चुकी थी। मैंने आंटी को उनके कान में धीरे से पैर फैलाने को बोला उन्होंने पर फैला दिया।
अब मैं अपनी दो उँगली को आंटी की चुत में घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगा। आंटी की आंह… निकल गयी वो मेरे ऊपर पीछे की ओर झूल सी गयी। फिर उन्होंने किसी तरह अपने आप को संभाला। लेकिन जवानी और कामुकता का भाव उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। “Badi Gand Wali Aunt”
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अपने दांतों से अपने होंठ को काट रही थी। और मैं अपनी दो उंगलियों को उनकी चुत की गहराईयों मे घुसा के अंदर बाहर करते हुए अपने उंगली से उनकी चुत को चोद रहा था। आंटी के माथे पर पसीना आ चुका था और वो पसीना उनके माथे से टपकते हुए उनके गले के रास्ते उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच के दरार में जा रहा था।
जिससे उनकी बड़ी कामुक गदरायी हुयी चुचियाँ और भी कमाल की लग रही थी। मन तो कर रहा था अभी उनके ब्लाउज में अपना मुंह घुसेड दूं और चुचियों खा जाऊँ। लेकिन लोगों के कारण वह संभव था। तभी बस एक स्टॉप पर रुकी और एक आदमी जो आंटी और अर्जुन के बीच में खड़ा था उतर गया मैंने तुरंत अपने हाथ को उनके चुत से निकाल बाहर और हम दोनों नॉर्मल हो गए।
अब ऑन्टी के सामने अर्जुन था और पीछे मैं। थोड़ी देर बस चलने के बाद जब मैंने देखा कि अर्जुन का ध्यान आगे की और है तो मैंने घंटी के कान में धीरे से बोला कि आंटी नंबर ले लो मेरा। फिर इधर-उधर देखकर आंटी ने अपने हाथ को पीछे की ओर किया तो मैं उनके हाथ में नंबर थमा दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
रास्ते भर उनकी चुत को दबाते रगड़ते हुए हम लोग गांव आ गए। घर पहुँच कर ऑन्टी ने मुझे फोन किया मैंने आंटी को सीधे बोला कि आंटी क्यों ना कल हम होटल में मिले। आंटी मिलने को तुरंत राजी हो गई। मैंने अपने गांव से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक होटल बुक कर दिया।
आंटी ने अर्जुन से बहाना बनाया कि मैं कल अपनी सहेली की बेटी की सगाई में जाऊंगी और रात को ही रहूंगी। आंटी आंगनवाड़ी में काम करती थी तो अर्जुन ने ज्यादा सवाल जवाब नहीं किया और बोला हां ठीक है चली जाना। अगले दिन मैंने आंटी को बोला कि आप गाँव के बाहर वाली स्टैंड पर आ जाना मैं वहीं से आपको लेने आ जाऊंगा।
आंटी स्टैंड पर आ गई। यार क्या मस्त माल लग रही थी आंटी ने नीली कलर की टाइट साड़ी और ब्लाउज पहनी हुई थी। उनके उभरे और बड़ी सुडोल् गांड के कर्व मुझे साफ दिख रहे थे। मैं देर ना करते हुए आंटी को बायिक पे बैठाया और होटल के लिए निकल गया।
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मैने ऑन्टी से पूछा की अर्जुन इतनी जल्दी मान कैसे गया। तो ऑन्टी बोली की जब मैं घर पे नही होती हूँ तो अर्जुन पुरा दिन नंगा हो के पोर्न वीडियो देखता है और अपने लण्ड को हिलता है। इस लिए वो चाहता है की वो घर पे अकेला रहे। ऐसे ही गंदी बातें करते हुए हम लोग होटल पहुँच गए। “Badi Gand Wali Aunt”
होटल पहुंचे और चेकिंग किया। और हम दोनों अपने होटल के कमरे में पहुंच गए। जैसे ही आंटी ने होटल का दरवाजा बंद किया मैं उनके ऊपर टूट पड़ा। उनकी बड़ी सुडोल् गांड को अपने हाथों से पकड़ के जोर-जोर से मसलने लगा। ऑन्टी भी फुल मूड में थी अपनी गांड को हिला हिला के मसलवा रही थी।
मैंने तुरन्त ऑन्टी साड़ी उनके कमर तक सरका दिया अब उनकी बड़ी और सुडोल् गांड मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। उन्होंने पिंक रंग पैंटी पहनी हुई थी मैंने उनकी पैंटी को घुटनों तक खिसकाया और उनके बड़े बड़े चुतड़ों के बीच मे अपने मुँह को घुसेड़ दिया। और उनकी चुत मे जीभ घुसेड़ घुसेड़ के चाटने लगा।
ऑन्टी भी अपनी गांड को मेरे ओर धकेल धकेल के चटवाने लगी। मैंने तुरंत अपनी शर्ट और पेंट को निकाल कर फेंक दिया। अब मै केवल अंडरवियर में था। ऑन्टी मेरे गठीले शरीर को देख के पूरे मूड मे आ गयी। और उन्होंने अपने एक हाँथ से मेरे लण्ड को जोर से पकड़ और मसलने लगी। और मेरे चौड़े छाती को चूमने और चाटने लगी।
अब मैंने उनके ब्लाउज निकाल के फेक दिया। और उनके बड़े बड़े मुलायम बूब्स को अपने मुँह मे भर लिया और उन्हें किसी बच्चे की तर निचोड़ के पीने लगा। ऑन्टी अपने हांथो से मेरे सर को पकड़ के अपने छाती से दबाने लगी। दो मिनट बाद ऑन्टी नीचे घुटनों के बल बैठे गयी और मेरे चड्ढी को खिचकर नीचे कर दिया।
ऑन्टी दंग रह गयी। मेरा 8 इन्च लम्बा और 3 इन्च मोटा लण्ड अब उनके मुँह के सामने था। ऑन्टी बोली क्या लण्ड है यार। तुरंत मुँह में भर लिया और रण्डी की तरह चूसने लगी। मैंने उनके बालों में अपनी कसके पकड़ा और अपने लण्ड की ओर पुरा दबा दिया मेरा पुरा लण्ड ऑन्टी के मुँह मे गले तक घुस गया।
ऑन्टी की साँसे टंग गयी उनका चेहरा पुरा लाल हो गया। और उनकी आँख से आँसू निकल गए। 5 मिनट ऐसे ही लण्ड चुसाने के बाद मैंने अपने लण्ड को बाहर निकला और ऑन्टी को गोदी मे उठाया और बेड पे ले जाके पटक दिया। और उनकी टांगों को फैला दिया। “Badi Gand Wali Aunt”
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उनकी चुत चुदने के लिए बिल्कुल तैयार थी। उनकी चुत से रस टपक रहा था। ऑन्टी बिन पानी के मछली की तरह तड़प रही थी और बोल रही थी। पेल दो अपने इस मोटे लौड़े को अपनी इस राण्ड की चुत मे। मैंने देर न करते हुए अपने मोटे लण्ड पे थूक लगाया और पुरा लण्ड ऑन्टी की चुत मे पेल दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
ऑन्टी की तो चीखें निकल गयी और उन्होंने बेड सीट को खिच कर पकड़ लिया और तड़प उठी। और बोली आह…. मर गयी। पर उनके चेहरे पे एक अलग ही चमक थी। मैं समझ गया की ऑन्टी को आज उनकी पसंद का लण्ड मिल है। और मैं जोर-जोर से चोदने लगा। ऑन्टी भी जोर-जोर से सिसकियाँ लेने लगी। आह.. चोदो फाड़ दो… आह…. कमाल का चोद रहे हो….. आह.. उम्ह….. उम्ह….. आंह….
मैंने बोला ऑन्टी आज तो आपको मैं पुरी रात इसी तरह चोदूँगा। ऑन्टी बोली ‘मेरे राज मैं तुम्हारी राण्ड हुँ। मुझे शिला बोलो ऑन्टी नही। मैंने उन्हे बोला ‘ठीक है साली रण्डी आज से तु मेरी रण्डी है। ये ले… पूरे कमरे में गच गच और थप् थप्’ की आवाजें गूंज रही थी। दोस्तों उस रात हमे सुबह के 4 बजे तक अलग अलग पोजिसन में चुदाई की। आगे की कहानी अगले भाग में।
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