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विधवा मौसी को फुसला कर चोद दिया

October 26, 2026 by crazy Leave a Comment

Mausi Bhanja Sex Kahani

आप सभी ने मेरी पिछली कहानी तो पढ़ी ही होगी शादीशुदा दीदी को घोड़ी बनाया 2 नहीं पढ़ी तो पढ़ लेना कैसे मैने अपनी सगी बड़ी शादीशुदा बहन को चोदा इस कहानी में देखो कैसे मैने रीना मौसी को अपना माल बनाया शादी से तीन दिन पहले ही मैं पहुँच गया था। Mausi Bhanja Sex Kahani

माँ-बाप ने कहा था कि थोड़ा जल्दी चले जाओ, मदद भी हो जाएगी और रिश्तेदारों से मिल भी लोगे। मैंने सोचा ठीक है, थोड़ा आराम से रह लूँगा। हमारे यहाँ से गाँव करीब पचास किलोमीटर था। रात के करीब ग्यारह बजे मैं पहुँचा। घर में सब सो चुके थे।

सिर्फ एक कमरे में हल्की रोशनी जल रही थी। मैंने सामान नीचे रखा और आवाज़ दी—  “कौन जगा है?” दरवाज़ा खुला तो सामने खड़ी थीं— रीना मौसी। मैंने उन्हें आखिरी बार तीन साल पहले देखा था। तब वे नई-नवेली दुल्हन थीं। अब… अब वे बिलकुल अलग लग रही थीं।

रीना मौसी तीन बहनों में सबसे बड़ी थीं। उनके दो छोटे भाई थे— मेरे दो मामा। उनकी शादी को बस एक साल ही हुआ था जब उनके पति की एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। तब से वे विधवा थीं। लेकिन विधवा होने के बावजूद उनकी सूरत-शक्ल में कोई उदासी नहीं दिखती थी। उल्टा अब वे और भी… खिली हुई लग रही थीं।

वे उस रात साड़ी पहने खड़ी थीं। हल्की गुलाबी साड़ी, ब्लाउज टाइट। कमर पतली, लेकिन नीचे… मैंने अपनी नज़र को संभाला, लेकिन आँखें अपने-आप नीचे चली गईं। उनकी गाँड… बहुत बड़ी, बहुत भारी, और गोरी। इतनी गोरी कि साड़ी के हल्के कपड़े के नीचे भी साफ चमक रही थी।

जब वे थोड़ा सा भी हिलतीं, दोनों गोल-गोल चूतड़ एक-दूसरे से रगड़ खाते हुए हिलते। इतने मोटे और गोल कि किसी बुढ़े का भी लंड पानी छोड़ दे। साड़ी का पल्लू ठीक से नहीं बँधा था, इसलिए जब वे घूमीं तो पीछे से दोनों गोलियाँ साफ नजर आईं— भारी, नरम, और इतनी भरी हुई कि लग रहा था जैसे कोई दो बड़े-बड़े गोल फल साड़ी में बंद कर दिए हों। मेरा मुँह सूख गया।

रीना मौसी मुस्कुराईं। “अरे मोनू… तू आ गया? इतनी रात को?”

उनकी आवाज़ में भी एक अलग तरह की मिठास थी। उन्होंने मुझे गले लगा लिया। उनका सीना मेरे सीने से सटा। गर्म। नरम। और उनकी गाँड… मेरे हाथ से थोड़ी दूर ही थी, लेकिन मैं महसूस कर रहा था कि कितनी भारी है।

मैंने धीरे से कहा, “हाँ मौसी… जल्दी आ गया।”

वे हँसीं। “अच्छा किया। अंदर आ। सब सो गए हैं। तुझे खाना दूँ?”

मैंने सिर हिलाया। वे किचन की तरफ गईं। उनकी चाल देखकर मेरा लंड अपने-आप सख्त होने लगा। हर कदम पर उनकी दोनों चूतड़ बाएँ-दाएँ हिल रही थीं। साड़ी के नीचे से साफ अंदाज़ा लग रहा था कि अंदर कुछ नहीं पहना होगा… या बहुत पतली चीज़। मैं खड़ा-खड़ा उन्हें देखता रहा।

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रीना मौसी… मेरी मौसी… और मैं उनके पीछे खड़ा होकर सिर्फ उनकी गाँड देख रहा था। दूसरे दिन सुबह हुई। मैं अभी भी आधा सोया हुआ था जब रीना मौसी का हाथ मेरे कंधे पर पड़ा। “मोनू… उठ जा। नहाने का पानी गरम हो गया है।” मैंने आँखें खोलीं। वे मेरे बिल्कुल पास झुकी हुई थीं।

साड़ी का ब्लाउज इतना टाइट था कि उनके स्तनों की गोल रेखा साफ नजर आ रही थी। सुबह की हल्की धूप में उनकी त्वचा और भी गोरी लग रही थी। मैंने जानबूझकर अपनी निगाह नीचे घुमाई—उनकी कमर से लेकर गाँड तक। साड़ी पीछे से इतनी कसी हुई थी कि दोनों चूतड़ अलग-अलग गोल दिखाई दे रहे थे।

मैं उठ बैठा और धीरे से बोला, “मौसी… आप इतनी जल्दी कैसे उठ जाती हैं? रात को देर तक जगी थीं ना।”

वे मुस्कुराईं। “आदत है। अब यहाँ अकेली हूँ तो सब काम खुद ही करना पड़ता है।”

मैंने धीरे से पूछा, “मौसी… आप अब यहीं गाँव में ही रहती हैं ना? हमारे घर से तो बस पचास किलोमीटर ही है।”

“हाँ,” उन्होंने सिर हिलाया। “तीन साल पहले शादी हुई थी। एक साल बाद ही… वो चले गए। तब से यहीं हूँ। माँ-बाप के पास।”

मैंने जानबूझकर उनकी आँखों में देखा और बोला, “आपको देखकर तो कोई विश्वास नहीं करेगा कि आप विधवा हैं। इतनी… सुंदर लगती हैं।”

रीना मौसी की आँखें थोड़ी झुकीं। गालों पर हल्की लालिमा आ गई। उन्होंने साड़ी का पल्लू ठीक किया और बोलीं, “अरे बाबा… तू भी ना। छोटी उम्र में ऐसी बातें करने लगा।”

मैं हँसा, “मौसी, उम्र छोटी हो या बड़ी… आँखें तो सच बोलती हैं।”

वे कुछ नहीं बोलीं। किचन की तरफ चली गईं। उनकी चाल देखकर मेरा लंड फिर से सख्त हो गया। हर कदम पर उनकी भारी गाँड बाएँ-दाएँ हिल रही थी। साड़ी के नीचे कुछ नहीं था, ये साफ लग रहा था। दोनों चूतड़ इतने मोटे और गोल थे कि साड़ी का कपड़ा उनके बीच में धँस जाता था।

दोपहर का समय। घर में सिर्फ मैं, रीना मौसी, नानी और एक मामा थे। बाकी लोग बाजार गए हुए थे। मैंने मौसी को आँगन में कपड़े सुखाते हुए देखा। वे झुकी हुई थीं। साड़ी का पल्लू आगे की तरफ सरक गया था और पीछे से उनकी गाँड पूरी तरह तन गई थी। दोनों गोलियाँ हवा में हिल रही थीं। मैं धीरे से उनके पास गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

“मौसी… मैं मदद कर दूँ?”

वे मुड़ीं। “नहीं बेटा, तू आराम कर।”

मैंने उनकी तरफ हाथ बढ़ाया जैसे कपड़ा पकड़ने के लिए, लेकिन जानबूझकर अपना हाथ उनकी कमर पर लगा दिया। फिर धीरे से नीचे सरकाते हुए उनकी गाँड के ऊपरी हिस्से को छू लिया। रीना मौसी अचानक सहम गईं। “मोनू… क्या कर रहा है?”

मैंने मासूमियत से कहा, “अरे मौसी, साड़ी का पल्लू सरक गया था। ठीक कर रहा था।”

मेरा हाथ अभी भी उनकी गाँड पर था। मैंने हल्के से दबाया। इतनी नरम और भारी… जैसे कोई गरम आटा हो। मैंने एक उँगली से उनके दोनों चूतड़ों के बीच की दरार को महसूस किया। साड़ी के नीचे कुछ नहीं था। बिल्कुल नंगी। वो मुझे एक स्माइल दी और कपड़े सुखाकर तेजी से घर के अंदर चली गईं। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

लेकिन जाने से पहले मैंने देखा—उनकी साँसें तेज चल रही थीं। शाम को मैं छत पर गया और अपनी बड़ी बहन नेहा को फोन किया। नेहा शादीशुदा थी। और मैं उसे पहले कई बार चोद चुका था। वो जानती थी कि मैं कैसा हूँ। फोन लगा। नेहा ने उठाया।

“हाँ बोल।”

मैंने धीरे से कहा, “दीदी… सुन। मैं रीना मौसी के घर आया हूँ ना… शादी में।”

“हाँ, पता है। क्या हुआ?”

“दीदी… मौसी… कमाल की है। इतनी सेक्सी। गाँड इतनी बड़ी और गोरी… चलते समय दोनों चूतड़ ऐसे हिलते हैं कि लंड खड़ा हो जाए। मैंने दोपहर में छू भी लिया।”

नेहा की आवाज़ तुरंत बदल गई। “क्या बकवास कर रहा है तू? पागल हो गया है क्या? रीना मौसी तेरी मौसी है हरामी!”

मैं हँसा, “दीदी, तू भी तो मेरी बहन है। फिर भी तो मैंने तुझे चोदा। याद है ना कैसे तू मेरा लंड चूसती थी?”

“चुप कर साले!” नेहा ने गाली दी। “मैं तेरी बहन हूँ, लेकिन मौसी… वो अलग बात है। पागल मत हो। कुछ मत करना।”

“दीदी, मन कर रहा है। बता कोई तरीका। रात को सब एक ही कमरे में सोते हैं। मैं मौसी के बगल में सोऊँगा।”

नेहा चिढ़ गई। “सुन मेरे हरामी भाई… जो करना है कर, लेकिन मुझे मत बता। और अगर कुछ हुआ तो बाद में रोना मत। मैंने मना कर दिया है। अब फोन रख।”

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उसने फोन काट दिया। मैं मुस्कुराया। नेहा मना कर रही थी, लेकिन मुझे पता था कि अंदर से वो भी उत्तेजित हो गई होगी। रात हो गई। खाना खाने के बाद सब एक बड़े कमरे में सोने का इंतजाम करने लगे। नानी चारपाई पर, एक मामा दूसरी तरफ, और रीना मौसी के साथ मुझे जगह दी गई।

कमरे में पर्याप्त जगह नहीं थी, इसलिए मौसी और मैं एक ही चटाई पर सोने वाले थे। बीच में सिर्फ एक पतला गद्दा था। रीना मौसी ने हल्की साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज भी ढीला। वे मेरे बगल में लेट गईं। मैंने जानबूझकर अपना शरीर उनकी तरफ कर लिया।

अंधेरे में उनकी साँसें साफ सुनाई दे रही थीं। थोड़ी देर बाद नानी और मामा सो गए। उनकी साँसें गहरी हो गईं। मैं धीरे से करीब सरका। मेरा लंड पहले से ही सख्त था। मैंने अपना हाथ धीरे से बढ़ाया और रीना मौसी की कमर पर रखा। वे हिली नहीं। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

मैंने हाथ और नीचे सरकाया—सीधे उनकी गाँड पर। दोनों चूतड़ मेरे हाथ में आ गए। नरम… गरम… और बहुत भारी। मैंने हल्के से मसला। रीना मौसी की साँस थोड़ी तेज हुई, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। शायद सो रही थीं… या फिर जानबूझकर अनदेखा कर रही थीं।

मैं और करीब चला गया। मेरा सख्त लंड उनकी गाँड से सट गया। साड़ी के पतले कपड़े के आर-पार मुझे उनकी नमी महसूस हो रही थी। मैंने धीरे-धीरे अपना लंड उनकी गाँड की दरार में रगड़ना शुरू किया। ऊपर-नीचे… ऊपर-नीचे। मेरा एक हाथ उनके स्तन तक पहुँच गया। ब्लाउज के अंदर घुसा दिया।

उनका स्तन नरम और भरा हुआ था। निप्पल पहले से ही कठोर था। मैंने उसे उँगलियों के बीच दबाया। रीना मौसी की साँस अब साफ तेज हो चुकी थी। लेकिन वे मुड़ीं नहीं। कोई आवाज़ नहीं निकाली। वे अभी भी शांत रहीं। मैंने अपना लंड साड़ी के ऊपर से उनकी गाँड के बीच में दबाया और धीरे-धीरे रगड़ते हुए मजा लेने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

एक हाथ से उनके स्तन मसल रहा था, दूसरे हाथ से उनकी गाँड के गोल हिस्से को जकड़े हुए था। मेरी साँसें तेज हो गईं। लंड और सख्त होता जा रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया— रीना मौसी की गाँड हल्के से मेरे लंड की तरफ दब रही थी। जानबूझकर। मेरी हिम्मत बढ़ गई…

रात को मैं ज्यादा कुछ नहीं कर पाया। मामा और नानी बिल्कुल पास सो रहे थे। कोई भी हल्की आवाज़ सुन लेता तो सब खराब हो जाता। इसलिए मैं सिर्फ ऊपर-ऊपर से ही करता रहा। रीना मौसी की गाँड को साड़ी के ऊपर से मसलता, अपने सख्त लंड को उनकी नरम चूतड़ों के बीच रगड़ता, और उनके स्तनों को ब्लाउज के अंदर से दबाता। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

थोड़ी देर बाद मेरा लंड फड़कने लगा। मैंने अपना हाथ अंदर डालकर लंड को पकड़ा और उनकी गाँड से सटाए रखते हुए तेज-तेज हिलाने लगा। मेरी साँसें तेज हो गईं। मैंने मुँह उनके बालों में छुपा लिया ताकि कोई आवाज़ न सुनाई दे। कुछ ही पलों में मेरा पूरा पानी उनकी साड़ी पर निकल गया। गर्म-गर्म। गाँड के गोल हिस्से पर फैल गया।

रीना मौसी की साँसें भी तेज थीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। मैंने जल्दी से साड़ी का पल्लू खींचकर सब छुपा दिया और जैसे कुछ हुआ ही न हो, करवट बदलकर सो गया। अगली सुबह जब म जगा तो मौसी नॉर्मल लग रहीथी मुझे स्माइल भी दी मुझे लगा या तो इसे पता नहीं चला या फिर ग्रीन सिग्नल है.

फिर वो मुझे नास्ते को बोली और मैं फ्रेश होकर नाश्ता करने चला गया नाश्ता करने के बाद मामा बोले, “रीना, बाजार से कुछ सामान लाना है। मोनू को ले जा। बाइक से चली जा।” रीना मौसी ने हाँ कर दी। मैंने अंदर ही अंदर खुशी मनाई। मैंने बाइक निकाली। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

मौसी साड़ी पहनकर आईं। हल्की पीली साड़ी, टाइट ब्लाउज। गाँड फिर से साड़ी में कसी हुई थी। वे पीछे बैठ गईं। उनके दोनों हाथ मेरी कमर पर थे। मैंने बाइक स्टार्ट की और चल दिया। सड़क सुनसान थी। पेड़ों के बीच से रास्ता जा रहा था।

मैं जानबूझकर बाइक को थोड़ा तेज चलाता, फिर अचानक ब्रेक मार देता। हर ब्रेक पर रीना मौसी का शरीर आगे की तरफ धकेल जाता और उनकी भारी गाँड मेरे पीछे से सट जाती। उनके स्तन मेरी पीठ से दब जाते। तीसरी बार ब्रेक मारने पर मैंने मुँह मोड़कर कहा, “मौसी… संभल के बैठो। गिर जाओगी।”

वे बोलीं, “तू ही तो अचानक ब्रेक मार रहा है। धीरे चला।”

मैंने हँसते हुए कहा, “मौसी, आप भारी है ना… बाइक का बैलेंस ही बिगड़ जाता है।”

पीछे से उनकी चुटकी सी आवाज़ आई, तू बहुत शरारती हो गया है उनके हाथ मेरी कमर पर थोड़े और कस गए। मैंने बाजार में मौसी की गांड और कमर को कई बार छुआ और दबाया भी मौसी शायद समझ गई थी फिर हम बाजार से सामान लेकर वापस लौटे।

आधा रास्ता तय करने के बाद मैंने अचानक बाइक एक सुनसान जगह पर रोक दी। चारों तरफ खेत और पेड़ ही पेड़ थे। कोई भी नजर नहीं आ रहा था। मैंने हेलमेट उतारा और बोला, “मौसी… दो मिनट रुकना। पेशाब लग रही है।”

वे बाइक पर ही बैठी रहीं। मैं आगे जाकर एक पेड़ के पीछे गया। पैंट का जिप खोला और अपना लंड बाहर निकाला। वो पहले से ही आधा सख्त था। मैंने जानबूझकर ऐसा खड़ा होकर पेशाब करना शुरू किया कि रीना मौसी को साफ दिखाई दे। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

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थोड़ी देर बाद मैंने मुँह मोड़कर देखा— मौसी मेरी तरफ देख रही थीं। उनकी नजर मेरे लंड पर थी। मैंने जैसे अनजाने में लंड को हाथ में लेकर हल्का सा हिलाया और बोला, “मौसी… इधर मत देखो।” रीना मौसी की आवाज़ आई, “मैं क्या देख रही हूँ? तू ही तो खड़ा होकर दिखा रहा है।”

मैंने लंड को और बाहर निकाला। अब वो पूरा सख्त हो चुका था। मोटा और लंबा। मैंने धीरे से कहा, “अनजाने में हो गया मौसी। पैंट ढीली है।” रीना मौसी बाइक से उतर आईं। वे मेरे करीब आईं और सीधे मेरी आँखों में देखकर बोलीं— “मोनू… तू ये सब क्या कर रहा है? मैं सब समझ रही हूँ। रात को भी समझ गई थी। आज सुबह से बाइक पर भी… और अब ये।”

मुझे लगा थी सही समय है कुछ करने का यू मैंने लंड को पैंट में वापस नहीं डाला। बल्कि एक कदम और करीब बढ़ाया और बोला, “तो फिर क्या हुआ मौसी? आप सुंदर हैं। आपकी गाँड… आपकी छाती… सब कुछ देखकर कंट्रोल नहीं होता।”

रीना मौसी ने आँखें झुकाईं। उनकी साँसें तेज हो गईं। “मैं तेरी मौसी हूँ मोनू। ये गलत है। बहुत गलत।”

मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और अपने सख्त लंड पर रख दिया।

“गलत है तो क्यों आपका हाथ कांप नहीं रहा? क्यों आपकी निगाहें मेरे लंड पर से हट नहीं रही?”

रीना मौसी का हाथ मेरे लंड पर था। वे हटा नहीं रहीं थीं। मैंने उनका हाथ पकड़कर ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया।

वे बोलीं, आवाज़ में कंपन के साथ— “छोड़… कोई आ जाएगा।”

“कोई नहीं आएगा मौसी। इधर कोई आता ही नहीं।”

मैंने उनका हाथ और कस लिया। मेरा लंड उनके नरम हाथ में और सख्त हो गया। मैंने दूसरी तरफ हाथ बढ़ाकर उनकी गाँड पकड़ ली। साड़ी के ऊपर से दोनों चूतड़ों को मसलने लगा। रीना मौसी की आँखें बंद हो गईं।

“मोनू… मत कर… मैं… मैं तेरी मौसी हूँ…”

मैंने उनके गले के पास मुँह लाकर कहा, “मौसी… आपका शरीर बोल रहा है। आपका हाथ मेरे लंड को छोड़ नहीं रहा। आप भी चाहती हैं।”

थोड़ी देर और मना करती रहीं। फिर उनकी साँसें बहुत तेज हो गईं। उन्होंने खुद ही मेरे लंड को हल्के से दबाना शुरू कर दिया। मैंने उनकी ठुड्डी उठाई और बोला, “बोलो मौसी… चाहिए क्या?” रीना मौसी की आँखें लाल थीं।

वे धीरे से बोलीं— “…चुपचाप कर ले। लेकिन जल्दी। और कोई देख न ले।”

मैं मुस्कुराया। मैंने रीना मौसी का हाथ अपने लंड से नहीं छोड़ा। दूसरे हाथ से उनका ब्लाउज ऊपर की तरफ खींच दिया। उनके बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए। गोरे, नरम और भारी। निप्पल पहले से ही कठोर थे। मैंने दोनों हाथों से उनके स्तनों को जोर से दबाया। “मौसी… ये कितने सॉफ्ट हैं…”

रीना मौसी की आँखें बंद हो गईं। वे हल्के से कराह उठीं। मैंने निप्पलों को उँगलियों के बीच पकड़कर मरोड़ा। फिर मुँह लाकर एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। दाँत से हल्के से काटा भी। “आह्ह… मोनू… धीरे…” उनकी आवाज़ काँप रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैंने एक हाथ उनकी साड़ी के अंदर डाल दिया। पैंटी नहीं पहनी थी। मेरी उँगलियाँ सीधे उनकी चूत पर जा लगीं। पहले से ही गीली थी। मैंने दो उँगलियाँ उनकी चूत के होंठों के बीच फेरकर फिर अंदर घुसा दीं। रीना मौसी का शरीर लहरा गया। “उफ़्फ़… अंदर… मत डाल…” लेकिन मैंने उँगलियाँ और अंदर तक धकेल दीं। ऊपर-नीचे हिलाने लगा।

उनकी चूत इतनी टाइट और गरम थी कि मेरी उँगलियाँ गीली होकर चमकने लगीं। मैंने अंगूठे से उनकी चूत के ऊपर वाली गांठ को भी रगड़ना शुरू कर दिया। रीना मौसी की टाँगें काँपने लगीं। वे मेरे कंधे पकड़कर खड़ी रहीं। मैंने अपना लंड उनके हाथ से छुड़ाया और उनके मुँह के सामने ले जाकर बोला, “मौसी… अब मुँह में ले लो।”

रीना मौसी ने सिर हिलाया। “नहीं… ये मत करवा… बस हल्का सा… छूने दे।” मैंने उनका सिर पकड़ लिया और लंड उनके होठों पर रगड़ा। “ले लो मौसी… बस थोड़ा सा।” वे झिझकती रहीं। फिर धीरे से मुँह खोला और सिर्फ अगल-बगल से लंड को चाटने लगीं।

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जीभ से सिरे पर फेर रही थीं। मैंने और जोर लगाया। “पूरा लो मौसी…” जैसे ही उन्होंने थोड़ा मुँह खोला, मैंने अपना लंड उनके मुँह में धकेल दिया। पहले आधा। फिर एक जोर का धक्का मारकर पूरा हलक तक घुसा दिया। रीना मौसी की आँखें फटी की फटी रह गईं। उनकी साँस रुक गई।

गले में लंड अटक गया था। उनका चेहरा तुरंत लाल हो गया। वे मेरे जाँघों को धक्का मारने लगीं। नाखून चुभो दिए। मैंने और दो-तीन बार हलक तक ही अंदर-बाहर किया। उनकी आँखों से पानी आने लगा। तब जाकर मैंने लंड बाहर निकाला। रीना मौसी जोर से खाँसने लगीं।

गले में हाथ रखकर बोलीं, “हरामी… गला… गला फाड़ दिया तूने… साला…” वे गुस्से में मेरे सीने पर धक्का मार दिया। मैं पीछे की तरफ गिर गया। जमीन पर चित्त पड़ गया। मेरा लंड अभी भी हवा में तना हुआ था, चमक रहा था उनके थूक से। रीना मौसी भारी साँसें ले रही थीं।

लेकिन उनकी निगाहें मेरे लंड पर ही थीं। मैंने उठते हुए उनकी साड़ी पकड़ ली और एक झटके में कमर तक ऊपर कर दी। उनकी नंगी गाँड और गीली चूत सामने आ गईं। मैंने उन्हें घुमाया और पेड़ के तने से सटा दिया। उनके दोनों हाथ पेड़ पर रख दिए। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

फिर अपने लंड को उनकी चूत के मुहाने पर लगाकर एक जोर का धक्का मारा। “आह्ह्ह्ह…!” रीना मौसी की लंबी चीख निकल गई। मेरा पूरा लंड उनकी टाइट चूत में समा गया। इतनी गरम और गीली… जैसे किसी ने मक्खन लगा रखा हो। मैंने दोनों हाथों से उनकी भारी गाँड पकड़ी और जोर-जोर से ठोकरें मारने लगा।

थप्पड़… थप्पड़… थप्पड़… हर धक्के के साथ उनकी गाँड मेरे पेट से टकरा रही थी। दोनों गोल चूतड़ फैल रहे थे। मैंने और तेज कर दिया। “मौसी… कैसी लग रही है?” रीना मौसी का मुँह खुला हुआ था। आवाज़ निकल रही थी— “आह्ह… धीरे… बहुत जोर से… मोनू… आह्ह… अंदर तक… जा रहा है…”

मैंने उनकी साड़ी का पल्लू मुँह में दबा दिया ताकि आवाज़ कम निकले। फिर कमर पकड़कर और तेजी से चोदने लगा। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। मैंने एक हाथ आगे ले जाकर उनके स्तन मसलने शुरू कर दिए।

दूसरे हाथ से उनकी गाँड के एक चूतड़ को जोर से थप्पड़ मारा। “पाक… पाक… पाक…” रीना मौसी की आवाज़ अब रुक-रुक कर निकल रही थी। “मोनू… मैं… गिर जाऊँगी… आह्ह… और जोर से… मत… उफ़्फ़…” मैंने उनकी दोनों टाँगें थोड़ी और फैला दीं और और गहरे धक्के मारने लगा।

हर बार लंड उनकी कोख तक जा रहा था। उनकी गाँड लाल होने लगी थी थप्पड़ों से। थोड़ी देर ऐसे ही जोर-शोर से चोदने के बाद मैंने उन्हें घुमाया। अब वे मेरी तरफ मुँह करके थीं। मैंने उनकी एक टाँग अपनी कमर पर चढ़ाई और फिर से लंड अंदर डाल दिया। इस पोजीशन में और गहरा जा रहा था।

रीना मौसी ने मेरे गले में हाथ डाल लिए। उनकी आँखें बंद थीं। मुँह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं। “आह्ह… मोनू… बहुत… बहुत जोर से चोद… रहा है… तू… मेरी चूत… फाड़ देगा…” मैंने उनके होठों को चूस लिया। जीभ अंदर डाल दी। वे भी जवाब देने लगीं। दोनों के मुँह में थूक मिल रहा था।

नीचे मेरा लंड लगातार उनकी चूत को कूट रहा था। मैंने उनकी गाँड दोनों हाथों से फैला दी और और तेज गति से धक्के मारने लगा। पसीना दोनों के शरीर पर छलक रहा था। रीना मौसी की चूत से पानी की आवाज़ आ रही थी—चप-चप-चप। “मौसी… मैं निकालने वाला हूँ…”

वे बोलीं, साँस फूलते हुए— “अंदर… मत छोड़ना… बाहर निकाल… आह्ह…” लेकिन मैंने और जोर लगा दिया। कुछ ही पलों में मेरा लंड फड़कने लगा और मैंने अपना पूरा पानी उनकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया। गर्म-गर्म धाराएँ उनके अंदर फूट रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

रीना मौसी का शरीर काँप उठा। वे भी झटके खा रही थीं। उनकी चूत मेरे लंड को और कसकर जकड़ रही थी। मैं कुछ देर वैसे ही अंदर रहा। दोनों भारी साँसें ले रहे थे। फिर धीरे से लंड बाहर निकाला। उनकी चूत से सफेद पानी रिसने लगा। टाँगों के बीच से बहते हुए नीचे गिर रहा था। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

रीना मौसी दीवारनुमा पेड़ से सटकर खड़ी थीं। साड़ी अभी भी कमर तक उठी हुई थी। स्तन बाहर। चेहरा लाल। बाल बिखरे। वे धीरे से बोलीं— “साले… तूने… तूने सच में चोद दिया… अपनी मौसी को…” मैंने उनके करीब जाकर गाँड पर फिर से हाथ फेरा और बोला, “और चोदूँगा मौसी। आज रात को फिर।”

हम दोनों कुछ देर वैसे ही खड़े रहे। रीना मौसी ने साड़ी ठीक की, ब्लाउज नीचे किया और बाल संभाले। उनका चेहरा अभी भी लाल था। टाँगों के बीच से मेरा पानी धीरे-धीरे रिस रहा था, इसलिए वे थोड़ा अजीब चल रही थीं। मैंने पैंट ऊपर की और बाइक की तरफ बढ़ा। “चलो मौसी… घर पहुँच जाएँ।”

वे चुपचाप बाइक पर बैठ गईं। इस बार उनके हाथ मेरी कमर पर पहले से ज्यादा कसकर थे। रास्ता वही सुनसान था। मैंने बाइक धीरे चलाई। हवा में अभी भी उनके शरीर की गंध तैर रही थी—पसीना, सेक्स और साड़ी की खुशबू मिली हुई। आधे रास्ते पर रीना मौसी ने पीछे से धीरे से कहा, “मोनू… अगर किसी को पता चल गया तो?”

मैंने मुँह मोड़कर जवाब दिया, “किसे पता चलेगा मौसी? खेत में कोई था ही नहीं। और घर पहुँचकर सामान्य बने रहना।”

वे फिर चुप हो गईं। लेकिन उनके स्तन मेरी पीठ से सटे हुए थे और हर धक्के के साथ दब रहे थे। मेरा लंड फिर से हल्का सख्त होने लगा था। घर पहुँचे तो दोपहर के लगभग ढाई बज रहे थे। नानी आँगन में बैठी थीं। मामा कहीं बाहर गए हुए थे।

नानी ने पूछा, “सामान ले आए? इतनी देर लगा दी।”

रीना मौसी ने सामान्य स्वर में कहा, “हाँ माँ… बाजार में भीड़ थी। फिर रास्ते में बाइक में थोड़ी दिक्कत हो गई थी।”

मैंने सामान उतारा और अंदर रख दिया। रीना मौसी किचन की तरफ चली गईं। चलते समय उनकी चाल थोड़ी अलग लग रही थी—जैसे अभी भी अंदर कुछ महसूस हो रहा हो। मैं उनके पीछे-पीछे किचन में गया। वे बर्तन धो रही थीं। मैंने पीछे से जाकर उनकी कमर पकड़ ली और कान के पास धीरे से कहा, “मौसी… अभी भी आपकी चूत से मेरा पानी निकल रहा होगा।” रीना मौसी का हाथ थम गया।

उन्होंने पीछे मुड़कर देखा और फुसफुसाया, “चुप कर… नानी पास में हैं। कुछ मत बोल।”

मैंने उनका ब्लाउज पीछे से हल्का ऊपर किया और कमर पर हाथ फेरते हुए बोला, “रात को फिर से लूँगा। आज रात सब सो जाएँगे तो।”

वे मेरा हाथ हटाती हुई बोलीं, “पागल मत हो। एक बार हो गया… अब काफी है।”

मैंने उनकी गाँड पर जोर से दबाया और मुस्कुराते हुए कहा, “एक बार काफी नहीं होता मौसी। आपकी चूत इतनी टाइट थी… फिर से चाहिए।” रीना मौसी ने आँखें तरेरते हुए कहा, “अब जा… नहाने का पानी गरम कर। और मुँह संभाल के रह।” मैं हँसकर बाहर आ गया।

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लेकिन अंदर ही अंदर मैं सोच रहा था— रात को फिर से मौसी को नंगी करके चोदना है। इस बार और देर तक, और जोर से। शाम होने वाली थी। घर में धीरे-धीरे लोग लौटने लगे। मामा आ गए, कुछ रिश्तेदार भी आ गए। सब शादी की तैयारियों की बात करने लगे। “Mausi Bhanja Sex Kahani”

रीना मौसी पूरे समय व्यस्त रहीं— चाय बनाना, सामान सजाना, लोगों से बात करना। लेकिन जब-जब हमारी निगाहें मिलतीं, उनके गाल हल्के गुलाबी हो जाते। एक बार वे मेरे पास से गुजरीं तो मैंने धीरे से उनके कान में कहा, “मौसी… आपकी साड़ी के नीचे अभी भी मेरा निशान होगा।”

वे बिना कुछ कहे आगे बढ़ गईं, लेकिन उनकी साँसें साफ तेज हो गई थीं। रात का खाना हो गया। फिर वही व्यवस्था—एक ही कमरे में सब सोने वाले थे। नानी, मामा, रीना मौसी और मैं। मैंने जानबूझकर मौसी के बगल में जगह बनाई। चटाई बिछाई गई। लाइट बुझा दी गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

अंधेरे में मैंने धीरे से हाथ बढ़ाया और रीना मौसी की कमर पकड़ ली… कहानी अभी जारी है आप सभी से निवेदन है कि कमेंट जरुर करें अगर कोई बहन‌ भाई मां बेटा अपनी बात शेयर करना चाहता है या कोई कपल हम दोनों भाई बहन के साथ चुदाई करना चाहता है तो वह monubhardwaj553@gmail.com पर बोल सकते हैं या‌ कोई सुझाव भी.

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