Didi Jabardast Chudai Kahani
कहानी के पिछले भाग शादीशुदा दीदी को घोड़ी बनाया 1 में आपने पढ़ा था कि मैंने अपनी बहन नेहा का पूरा वीडियो बना लिया था। तब तक मेरा अपना लंड भी पूरी तरह तन चुका था। लेकिन मैं चुपचाप पीछे हट गया फिर रात भी हो गई थी तो मैं अपने भांजे के पास आ गया. Didi Jabardast Chudai Kahani
थोड़ी देर बाद दीदी भी आ गई फिर हम घर आ गए लेकिन पूरे रास्ते में मेरे दिमाग वही सीन चल रहा था कि कैसे दीदी एक साथ तीन लंड ले रही थी फिर दीदी दीदी खाना बनाने लग गई थी में उसकी गांड को पीछे से देख रहा था सोच रहा तब कैसे इसकी गांड में अपना लंड डालु.
थोड़ी देर बाद जीजा भी आ गया हमने खाना खाया थोड़ी बात चीत की और अपने रूम म चले गए मैंने दीदी से पूछा दीदी मेले में मजा आया या नहीं वो बोली हां बहुत और थोड़ी देर बात करके अपने रूम में चली गई मुझे रात में नींद नहीं आ रही थी.
में बस नेहा दीदी को चोदना चाहता था तभी मैं पानी पीने के लिए उठा और किचन की तरफ जाने लगा तो दीदी के रूम की तरफ देखने की सोच के उसके कमरे की तरफ गया तो वो जीजा का लंड मुंह म में लिए हुए थी और घुटने तक नंगी थी मेरा लंड खड़ा हो गया.
तभी मेरे दिमाग में आया कि पहले इसे ऐसे ही चोद के देखूँगा चुद गई तो ठीक नहीं तो ब्लैकमेल करूंगा और मूठ मार के सो गया मेरी किस्मत अच्छी थी अगले दिन– सुबह 9 बजे जीजा गाँव जा चुके थे। भांजा स्कूल चला गया था।
घर में ऊपर सिर्फ मैं और नेहा दीदी थे दीदी की ननद और बाकी सब नीचे नेहा किचन में नाश्ता बना रही थी। हल्के गुलाबी सूट में थी। बाल खुले थे। में किचन के दरवाजे पर खड़ा होकर बोला— “दीदी, आज सुबह-सुबह आप बहुत प्यारी लग रही हो। चेहरा बिलकुल चमक रहा है।”
नेहा मुड़ी, थोड़ा मुस्कुराई— “क्या फालतू बातें करता रहता है तू। जा, हाथ-मुँह धो के आ। नाश्ता तैयार है।”
मैं पास आया, प्लेट लेते हुए बोला— “सच में दीदी… जब आप मुस्कुराती हो तो दिल में अजीब सा सुकून मिलता है। लगता है जैसे घर में कोई मिठास आ गई हो।”
नेहा ने चाय का कप देते हुए कहा— “बस कर। ज्यादा मीठी-मीठी बातें मत कर। ठंडा हो जाएगा नाश्ता।”
मैंने बैठते हुए हल्के स्वर में बोला— “मीठी बातें तो आपसे ही होती हैं दीदी। बाकी दुनिया में तो सिर्फ शोर है।”
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नेहा चुपचाप मुस्कुरा दी। उसे बुरा नहीं लगा। बात नॉर्मल और हल्की थी। दोपहर 1:30 बजे खाने के समय में टेबल पर बैठा था। नेहा रोटी बना रही थी, में प्लेट में सब्जी ले रहा था।
में बोला— “दीदी, आपकी बनाई रोटी में कोई जादू होता है। गाँव में मम्मी भी इतनी नरम नहीं बना पातीं।”
नेहा हँस पड़ी— “अब मम्मी की शिकायत करने लगा? खा चुपचाप।”
मैंने धीरे से कहा— “शिकायत नहीं… बस लगता है कि आपके हाथों में कोई अलग ही नमी और प्यार होता है। जो चीज छू लेते हो, वो और अच्छी हो जाती है।”
नेहा की नज़र थोड़ी नरम पड़ गई। उसने कोई गाली या गुस्सा नहीं दिखाया। बस बोली— “ज्यादा फलसफा मत छोड़। खाना खा।”
मैंने सिर हिलाया और खाने लगा। बात रोमांटिक थी, लेकिन सीधी नहीं थी। नेहा को असहज भी नहीं हुआ। शाम 7 बजे भांजा खेलकर आया और जल्दी सो गया। टीवी हॉल में चल रहा था। नेहा सोफे पर बैठी थी। मैं पास आकर बैठा।
थोड़ी देर चुप रहा, फिर बोला— “दीदी, आज घर बड़ा खाली-खाली लग रहा है। जीजा जी भी नहीं हैं… भांजा भी सो गया।”
नेहा टीवी देखते हुए बोली— “हम्म… दो दिन ऐसे ही रहना पड़ेगा।”
मैंने थोड़ा झुककर कहा— “दीदी… अगर आप बुरा न मानो तो आज रात मैं आपके कमरे में सो जाऊँ? अकेले वाले कमरे में बैठे-बैठे बोर हो जाता हूँ। थोड़ी बातें करते-करते नींद आ जाएगी। सुबह जल्दी उठ भी जाऊँगा।”
नेहा दीदी ने मेरी तरफ देखा। थोड़ी हिचकिचाहट थी। “तेरा अपना कमरा है ना…”
मैंने धीरे से कहा— “है तो… लेकिन आज मन नहीं कर रहा अकेले रहने का।”
नेहा कुछ देर चुप रही। फिर धीरे से बोली— “…ठीक है। लेकिन जल्दी सो जाना। और हाथ-पैर फैला के मत लेटना।”
मैं मुस्कुराया— “जैसी आपकी मर्जी दीदी।”
रात क़रीब 12 बजे कमरे में हल्की रोशनी थी। नेहा ने गुलाबी नाइटी पहन रखी थी। नाइटी पतली थी, बूब्स की गोलाई और गाँड की भारी शक्ल साफ झलक रही थी। मैंने लोअर और टी-शर्ट में आकर बेड के एक तरफ लेट गया। नेहा दूसरी तरफ थी। बीच में थोड़ी जगह थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
थोड़ी देर दोनों चुपचाप लेटे रहे। पंखे की आवाज आ रही थी। फिर मैंने धीरे से करवट बदली। मेरा चेहरा दीदी की तरफ था। मैंने बहुत हल्के हाथ से दीदी के बालों को सहलाया। दीदी की साँसें नियमित थीं। वह सो चुकी लग रही थी। मैंने हाथ धीरे-धीरे नीचे सरकाया। पहले कंधे पर रुका, फिर बाजू पर। “Didi Jabardast Chudai Kahani”
फिर बहुत धीरे से नाइटी के ऊपर से उसके बाएँ स्तन पर रख दिया। हाथ हल्का था। बस रखा हुआ। कोई जोर नहीं। दीदी हिली नहीं।मैंने उंगलियों से बहुत धीरे गोला बनाया। बूब्स की नमी और मुलायमियत महसूस की। हल्का सा दबाया—बिल्कुल इतना कि नींद न खुले।
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उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। लंड पहले ही सख्त हो चुका था। थोड़ी देर बाद हाथ और नीचे सरका। पेट पर से होता हुआ कमर पर आया। फिर पीछे की तरफ। अब मेरा हाथ नेहा दीदी की गाँड पर था, नाइटी के ऊपर से। दोनों चूतड़ों की गोलाई को मैंने धीरे-धीरे सहलाया।
हल्का दबाया। उंगलियों से बीच की दरार महसूस की। नेहा दीदी की साँस थोड़ी तेज हुई, लेकिन वह जागी नहीं। मेरा कंट्रोल अब टूटने लगा था। मेरा लंड पूरी तरह तन चुका था, लोअर में जोर से धक्का मार रहा था। वह और करीब खिसक गया। अब मेरा शरीर नेहा के शरीर से सट चुका था।
मैंने अपना लंड लोअर के ऊपर से ही सीधा नेहा की गाँड की दरार पर रख दिया। नाइटी के कपड़े के ऊपर से। फिर धीरे-धीरे कमर आगे की तरफ धकेली। लंड की गर्माहट और सख्ती नाइटी के पतले कपड़े के आर-पार गाँड की दरार में महसूस हो रही थी। मैं हल्के-हल्के रगड़ने लगा। आगे-पीछे।
“हम्म…” नेहा दीदी के गले से हल्की आवाज निकली। मैं रुक गया। साँस रोके खड़ा रहा। नेहा दीदी की पलकें काँपीं। फिर आँखें खुल गईं। वह अचानक सहम गई। पीछे मुड़ी तो मुझे बिल्कुल चिपका हुआ पाया। मेरा सख्त लंड उसकी गाँड पर नाइटी के ऊपर से ही दबा हुआ था। “Didi Jabardast Chudai Kahani”
नेहा दीदी की आँखें फटी की फटी रह गईं। “मोनू…?!” उसकी आवाज में घबराहट और गुस्सा दोनों थे। “तू… क्या कर रहा है?!” मै झट से थोड़ा पीछे हटा, लेकिन पूरी तरह अलग नहीं हुआ। “दीदी… मैं… बस…” नेहा दीदी ने नाइटी नीचे खींचते हुए गुस्से में कहा— “क्या बस?! तूने वादा किया था सिर्फ सोने का! ये क्या कर रहा था तू?!”
कमरे में अचानक सन्नाटा पसर गया। नेहा दीदी की आँखें खुलते ही मैंने देखा कि उनका चेहरा गुस्से और सदमे से लाल हो चुका था। उन्होंने झटके से करवट बदली और जोर का थप्पड़ मेरे गाल पर जड़ दिया। “कुत्ते” उनकी आवाज काँप रही थी। “तुझे शर्म नहीं आती अपनी सगी शादीशुदा बड़ी बहन के साथ ऐसा करने में.”
मैंने गाल सहलाते हुए कुछ नहीं कहा। नेहा दीदी उठकर बैठ गईं। नाइटी ठीक करते हुए गुस्से में बोलने लगीं— “पिछली बार भी यही किया था ना? जीजा के घर में… मेरे सोते हुए हाथ डालने की कोशिश की थी। तब भी मैंने कहा था कि तू बहुत गिरा हुआ है। घर से निकाल दिया था तुझे। मम्मी को भी बता दिया था। तब तू रो-रोकर माफी माँग रहा था कि ‘दीदी अब नहीं करूँगा, सुधर जाऊँगा’। आज फिर वही हाल है! कितना हवसी है तू! अपनी दीदी को भी नहीं छोड़ सकता! कितना गिरा हुआ इंसान है तू मोनू!”
हर शब्द चाबुक की तरह लग रहा था। मेरा गुस्सा भी चढ़ने लगा। मैंने अचानक उठकर उनका हाथ पकड़ लिया और जोर का थप्पड़ उनके गाल पर मार दिया। “चुप कर साली!” मेरी आवाज में गुस्सा साफ था। “बहुत हो गया तेरा ये नाटक!”
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नेहा दीदी हैरान रह गईं। उन्होंने अपना गाल पकड़ लिया। मैंने और करीब जाकर उनकी गर्दन दबाई और बोला— “कल मेले के बहाने चुदने गई थी ना तू? जंगल में तीन लड़कों के साथ रंडी की तरह पड़ी हुई थी। तब तेरे संस्कार कहाँ थे साली? तब तो बड़ी आसानी से पैर फैला दिए थे। अब अचानक बड़ी संस्कारी बन रही है?! अपनी दीदी वाली इज्जत याद आ गई?!”
नेहा दीदी की आँखें फटी की फटी रह गईं। “मैं… मैं नहीं…” मैंने फोन निकाला और वीडियो चला दिया। स्क्रीन की रोशनी कमरे में फैल गई। वीडियो में साफ दिख रहा था— नेहा दीदी जमीन पर लेटी हुई, तीनों लड़के उनके ऊपर, उनके मुँह से निकलती आवाजें, पसीना और पानी से चमकता शरीर। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“देख!” मैंने फोन उनके चेहरे के पास कर दिया। “ये मैंने बना रखा है। पूरा क्लियर। आवाज के साथ। अगर चाहूँ तो अभी जीजा को भेज दूँ। या फिर व्हाट्सएप पर वायरल कर दूँ। तेरे ससुराल वाले, तेरे गाँव वाले, सब देख लें कि नेहा दीदी असल में कैसी हैं।”
नेहा दीदी का चेहरा सफेद पड़ गया। उनके हाथ काँपने लगे। आँखों से आँसू बह निकले। “न-नहीं… प्लीज… मत भेज… जीजा को मत दिखाना… मैं… मैं कुछ भी करूँगी… जो तू कहेगा… सब करूँगी… बस ये वीडियो मत भेज…” वे मेरे पैरों पर गिरने वाली थीं।
मैंने उनका बाल पकड़कर मुँह ऊपर उठाया। “सब कुछ करेगी?”
“हाँ… हाँ… जो तू बोलेगा… बस मत भेज…”
मैंने मुस्कुराते हुए नाइटी के पट्टे खींच दिए। उनके मोटे-मोटे चूचे बाहर आ गए। “तो पहले ये नाइटी पूरी उतार। और बेड के बीच में लेट जा। हाथ-पैर मत मारना।” नेहा दीदी काँपते हुए नाइटी उतारने लगीं। पूरा बदन नंगा हो गया। भारी गाँड, मोटी जाँघें, भरे हुए चूचे, और बीच में उनकी चूत—सब कुछ मेरे सामने था।
मैंने अपना लोअर और अंडरवियर उतारा। मेरा साढ़े सात इंच का मोटा, नसों वाला लंड पूरी तरह तन चुका था। सिर चमक रहा था। “अब लेट जा साली।” नेहा दीदी आँसू बहाते हुए बेड पर लेट गईं। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। मैंने उनके दोनों पैर फैलाए और अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा। “Didi Jabardast Chudai Kahani”
“इतनी गीली क्यों है तू? वीडियो देखकर याद आ गया क्या कि कैसे चुद रही थी कल?” नेहा दीदी सिर हिला रही थीं। आँसू बह रहे थे। मैंने एक जोर का धक्का मारा। पूरा लंड एक बार में उनकी चूत में घुस गया। “आह्ह्ह… कुतिया!” मैंने गुर्राते हुए कहा। “कितनी टाइट है तीन लंड ले चुकी है तू, फिर भी इतनी सिकुड़ी हुई चूत!”
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मैं जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। बेड चरमरा रहा था। उनके चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने एक हाथ से उनका गला हल्का दबाया और दूसरे हाथ से जोर का थप्पड़ उनके गाल पर मारा। “बोल साली… कैसा लग रहा है अपने छोटे भाई का लंड? बोल!”
नेहा दीदी रोते हुए बोलीं— “द-दर्द… हो रहा है…”
“दर्द होना चाहिए!” मैंने और जोर से थप्पड़ मारा। “कल रंडी बनके चुद रही थी, आज दर्द का नाटक कर रही है। बोल ‘चोद मुझे मोनू’।”
मजबूरी में वे बोलीं— “…चोद… मुझे…” “जोर से!” “चोद मुझे मोनू… अपनी दीदी को चोद…”
मैं पागलों की तरह धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ गाली निकाले जा रहा था— “ली ले रंडी दीदी… तेरी चूत फाड़ दूँगा… छोटी भाई का लंड ले… रंडी जैसी चुद… तेरी ये मोटी चूत सिर्फ लंड के लिए बनी है…” मैंने उनके दोनों चूचे पकड़कर जोर-जोर से दबाए और चूसने लगा।
दाँतों से निप्पल हल्के काटे। लगभग पंद्रह मिनट बाद मैंने लंड बाहर निकाला। अब करवट लेकर बैठ जा। गाँड ऊपर कर।” नेहा दीदी काँपते हुए घुटनों के बल बैठ गईं और हाथ आगे कर दिए। उनकी भारी गाँड मेरे सामने थी। दोनों चूतड़ फैले हुए। बीच में चूत और गाँड का छेद साफ दिख रहा था।
मैंने जोर का थप्पड़ उनकी गाँड पर मारा। लाल निशान पड़ गया। “क्या मस्त गाँड है साली… कल इसी में तीनों लंड घुस रहे थे।” मैंने लंड उनकी चूत में पीछे से घुसा दिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। एक हाथ से उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा, दूसरे हाथ से गाँड पर थप्पड़ मारता रहा।
“आह्ह… कितनी गहरी जा रही है… ले साली… ले अपने भाई का लंड…” नेहा दीदी का मुँह तकिए में दबा हुआ था। वे सिसक रही थीं। मैंने और तेजी बढ़ाई। हर धक्के के साथ उनकी गाँड हिल रही थी। थप्पड़ की आवाज कमरे में गूँज रही थी। “Didi Jabardast Chudai Kahani”
“बोल… ‘मैं रंडी हूँ’… बोल!” “…मैं… रंडी हूँ…” “जोर से!” “मैं रंडी हूँ… मोनू मुझे चोद… फाड़ दे मेरी चूत…” मैंने लंड निकालकर सीधे उनके गाँड के छेद पर लगा दिया। थूक लगाकर जोर से धक्का मारा। आधा लंड गाँड में घुस गया। नेहा दीदी जोर से चिल्लाईं— “आह्ह्ह… दर्द… मत डाल… वहाँ मत डाल…!”
मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड गाँड में समा गया। “ले अब… गाँड में भी ले… रंडी दीदी… दोनों छेद फाड़ दूँगा आज…” मैं गाँड में जोर-जोर से चोदने लगा। उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींच रखा था। गाली पर गाली दे रहा था— “साली हरामजादी… मेले में जाके चुदवाई… अब अपने भाई से गाँड मरवा… कितनी गंदी है तू… कितनी हवस है तेरे अंदर…” मैंने लंड निकाला और खुद बेड पर लेट गया। “अब तू ऊपर बैठ। खुद चूत में डाल।”
नेहा दीदी रोते हुए मेरे ऊपर आईं। उन्होंने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा लंड अंदर चला गया। “अब खुद हिल… और तेजी से…” वे काँपते हुए कमर हिलाने लगीं। मैंने दोनों हाथों से उनके चूचे पकड़ लिए और जोर-जोर से दबाए। “तेजी से साली! नेहा दीदी रोते-रोते तेजी बढ़ाने लगीं। उनकी गाँड मेरे जाँघों पर पट-पट बज रही थी।
मैंने उठकर उनके गाल पर थप्पड़ मारा— “बोल ‘मैं अपने भाई की रंडी हूँ’…”
“…मैं… अपने भाई की रंडी हूँ…”
“अच्छा… और जोर से हिल… अपनी चूत खुद फड़वा…”
मैं उनके स्तन चूसते हुए नीचे से भी धक्के मारने लगा। वो अब तक तीन बार झड़ चुकी थी कमरा पूरी तरह सेक्स की आवाजों से भर चुका था। मैंने उन्हें बेड से खींचकर दीवार के साथ खड़ा कर दिया। उनके एक पैर को उठाया और लंड फिर से चूत में घुसा दिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
दीवार से उनकी पीठ रगड़ रही थी। मैं जोर-जोर से अंदर जा रहा था। “देख कितनी आसानी से घुस रहा है… क्योंकि तू रंडी है… तेरी चूत आदी हो चुकी है लंड लेने की…” हर धक्के के साथ मैं उनके गाल पर थप्पड़ मार रहा था। लाल हो चुके थे दोनों गाल।
“कल तीन लंड लिए… आज चौथा ले रही है… कल पाँचवाँ भी लेगी… मैं तुझे रोज चोदूँगा अब… जब तक जीजा वापस नहीं आते…” नेहा दीदी बस रो रही थीं। उनके मुँह से सिर्फ सिसकियाँ और “प्लीज… धीरे…” जैसी बातें निकल रही थीं। मैंने उन्हें फिर से घुटनों के बल कर दिया।
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इस बार बाल पकड़कर जोर से सिर पीछे खींचा और एक हाथ से गर्दन दबाई। लंड उनकी चूत में डालकर बेतहाशा चोदने लगा। “आह्ह्ह साली… अब झड़ने वाला हूँ… अंदर ही झाड़ूँगा… तेरी चूत में अपना पानी भर दूँगा…” नेहा दीदी चीख रही थीं— “नहीं… अंदर मत… प्लीज…” मैंने उनकी बात नहीं सुनी। “Didi Jabardast Chudai Kahani”
जोर के कई धक्के मारकर उनकी चूत के अंदर ही पूरा पानी छोड़ दिया। गर्म धार अंदर तक चली गई। मैं उनके ऊपर गिरा रहा। साँसें फूल रही थीं। थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकाला। सफेद पानी उनकी चूत से बाहर निकलकर जाँघों पर बह रहा था। उन्होंने बस सिर हिलाया।
मैंने देखा जब मेरा माल गिरा था तब उसके चेहरे पे एक अजीब सी मुस्कान आई थी मैंने उनके बाल सहलाते हुए कहा— “ये तो बस शुरुआत है नेहा दीदी। रात अभी बाकी है। उन्होंने बस सिर हिलाया। मैंने देखा जब मेरा माल गिरा था तब मैं उनके पीछे लेट गया। एक हाथ उनके चूचे पर रख दिया।
पूरी रात मैंने उसे चार बार चोदा हर पोजीशन में दूसरे राउंड में वो मेरा साथ देते हुए मजे लेने लगी थी कहानी अभी जारी है आप सभी से निवेदन है कि कमेंट जरुर करें अगर कोई बहन भाई मां बेटा अपनी बात शेयर करना चाहता है या कोई कपल हम दोनों भाई बहन के साथ चुदाई करना चाहता है तो वह monubhardwaj532@gmail.com पर बोल सकते हैं या कोई सुझाव भी.
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