Didi Hotel Chudai Kahani
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 17 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि होटल में अपने भाई को ब्लोजॉब देने के बाद भाई के साथ एक ही बिस्तर में सोई. भाई का लंड खड़ा था मुझे भी चुदवाने का मन हो गया था, इसलिए भाई को गांड में लंड घुसाने को बोला. अब आगे- Didi Hotel Chudai Kahani
उस मोटी चादर के नीचे मैं गोलू के साथ पूरी तरह नंगी लेटी हुई थी। उसका सख्त लंड मेरी गांड के छेद पर बिल्कुल ठीक से लगा हुआ था, जैसे वह बस अंदर जाने के लिए तैयार हो। इससे पहले भी एक बार उसका लंड मेरी गांड के अंदर जा चुका था, इसलिए मुझे अच्छी तरह याद था कि उसके अंदर जाने पर कितनी तेज तकलीफ हुई थी, लेकिन इस बहुत ज्यादा ठंड और उस अजीब सी हालत में मुझे उस दर्द की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी।
उस वक्त मेरे अंदर दर्द से ज्यादा अपने भाई के उस गर्म और मजबूत लंड को अपनी गांड के अंदर महसूस करने की चाहत और बेचैनी थी। मेरे पूरी तरह तैयार शरीर को देखकर गोलू ने अब और देर नहीं की। उसने धीरे-धीरे अपनी कमर आगे की तरफ बढ़ाई और अपना सख्त और भारी लंड मेरी गांड के तंग छेद के पास लाकर धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया।
जैसे ही उसका लंड अंदर जाने लगा, मुझे महसूस हुआ कि उसका आकार कितना बड़ा था। मेरी गांड का वह छेद उसकी मोटाई को संभालने के लिए बहुत तंग लग रहा था। उसका मोटा सिरा अंदर जाते हुए वहाँ बहुत ज्यादा दबाव बना रहा था, और उसके धीरे-धीरे अंदर जाने से मुझे उसकी मोटाई साफ महसूस हो रही थी।
उस तंग जगह से जैसे-जैसे उसका वह मोटा और भारी हिस्सा मेरे अंदर जा रहा था, मेरी साँसें अटक सी गईं। मेरे शरीर के उस हिस्से में जैसे आग सी फैल गई और दर्द की एक तेज लहर मेरी रीढ़ की हड्डी तक दौड़ गई। मैंने अपने दाँतों से नीचे वाला होंठ दबा लिया ताकि मेरे मुँह से कोई चीख न निकल जाए, लेकिन गोलू ने मेरा दर्द समझते हुए अपनी रफ्तार धीमी कर दी।
उसने अपने दोनों हाथों से मेरी कमर को कसकर पकड़ लिया और अपना माथा मेरी पीठ से लगाकर गहरी साँसें लेने लगा। वह रुक-रुक कर हल्के दबाव के साथ अपना लंड और अंदर धकेलने लगा, ताकि मेरा शरीर उसके बड़े आकार के साथ थोड़ा ढल सके। उस बहुत ज्यादा जकड़न और जलन के बीच भी, जैसे-जैसे उसका आधे से ज्यादा सख्त लंड मेरी गांड के अंदर जाता गया, मुझे एक अजीब सी गर्मी महसूस होने लगी।
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मेरे छोटे और तंग छेद को पूरी तरह फैलाते हुए उसका वह बड़ा लंड अब मेरी गांड के बिल्कुल अंदर तक पहुँच चुका था, और हम दोनों की साँसें एक-दूसरे के साथ मिल गई थीं। जैसे ही उसका पूरा भारी लंड मेरी गांड के अंदर तक चला गया, मेरे मुँह से एक सिसकी के साथ निकला, “आह… गोलू… तुम्हारा लंड कितना बड़ा है…”
मेरी बात सुनते ही गोलू का शरीर हल्का सा काँप गया। उसने अपनी गर्म साँसें मेरी गर्दन पर छोड़ते हुए धीमी और भारी आवाज में कहा, “आलिया दीदी… अभी मेरे इस लंड के साइज़ के बारे में मत सोचो… बस खुद को संभालकर तैयार रहो, क्योंकि अब मैं रुकने वाला नहीं हूँ।”
उसकी बात के बाद गोलू ने मुझे और ज्यादा मजबूती से पकड़ लिया। उसने अपना एक मजबूत और गर्म हाथ मेरी जाँघ के नीचे डाला और मेरे एक पैर को थोड़ा ऊपर की तरफ उठा दिया। उसके इस तरह मेरा पैर उठाने से मेरे शरीर की पोजीशन बदल गई और मैं उसके और ज्यादा करीब आ गई।
उसके इस नए तरीके से मेरे शरीर के अंदर दबाव और ज्यादा महसूस होने लगा। उस पल जब मेरा भाई मेरे पैर को हवा में उठाए हुए था और उसका वह कड़क लंड मेरी गांड के सबसे ज्यादा महसूस होने वाले और अंदर के हिस्से को पूरी तरह भर चुका था, मेरे अंदर अचानक एक अजीब सी शर्म और घुटन महसूस होने लगी।
मेरे दिमाग में अचानक यह बात आई कि हम दोनों इस वक्त क्या कर रहे हैं। मेरा अपना भाई और उसका वह अंग मेरी गांड के अंदर तक गया हुआ था। ऐसी हालत में किसी के भी मन में अजीब सी शर्म और अटपटा सा एहसास आ सकता है, और मुझे भी उस समय सब कुछ बहुत अजीब और हैरान करने वाला लगा।
लेकिन मेरी वह झिझक ज्यादा देर तक नहीं रही, क्योंकि गोलू ने अपनी कमर को पूरी ताकत और तेज रफ्तार से आगे-पीछे चलाना शुरू कर दिया। उसके उन तेज और लगातार झटकों के साथ उसका वह भारी लंड मेरी गांड के अंदर जाता और फिर बाहर आता रहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
हर बार जब उसका वह गर्म और कड़क अंग मेरे उस तंग छेद से अंदर-बाहर होता, तो उस अजीब एहसास और शर्म के बीच भी मेरे शरीर में हवस की एक तेज सी लहर दौड़ जाती। जब उसने मेरे पैर को और ऊपर हवा में उठाकर अपनी मजबूत बांह के सहारे कसकर पकड़ लिया, तो मेरी गांड का वह छेद और ज्यादा खिंचकर चौड़ा हो गया।
उस बहुत ज्यादा खिंचाव की वजह से उसके अंदर पूरी गहराई तक गया हुआ उसका सख्त और भारी लंड मेरे शरीर के अंदर की दीवारों पर और ज्यादा दबाव डालने लगा। उसकी हर नस, उसका मोटा सिरा और उसकी रगड़ मुझे उस तंग और जलते हुए हिस्से में साफ महसूस हो रही थी।
गोलू ने अब अपनी रफ्तार और तेज कर दी थी। वह अपनी कमर को लगातार आगे-पीछे झटके से चलाने लगा, जिससे उसका वह बड़ा अंग मेरी गांड के अंदर आगे-पीछे होने लगा। जब-जब उसका लंड पूरी ताकत से अंदर जाता था, तो मेरे अंदर बहुत ज्यादा दबाव महसूस होता था, और जब वह बाहर खींचता था तो एक खालीपन सा महसूस होता था।
उसके हर धक्के के साथ मेरे मुँह से लगातार सिसकियाँ और आहें निकल रही थीं। कमरे की उस बहुत ज्यादा ठंड और उस मोटी चादर के अंदर हमारे नंगे शरीरों से निकलता पसीना उस पल को और ज्यादा गीला और गर्म बना रहा था। उसकी हर हरकत पर मेरा शरीर बुरी तरह काँप रहा था, और उस दर्द और हवस के मिले-जुले एहसास में मेरा पूरा शरीर धीरे-धीरे खोता जा रहा था। “Didi Hotel Chudai Kahani”
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उसके वे लगातार झटके अब और ज्यादा तेज और गहरे होते जा रहे थे। मेरी गांड का वह तंग छेद उसके उस मोटे और सख्त लंड की हर हरकत को सहते हुए जलने लगा था। जब वह अपनी कमर को पूरी ताकत से आगे करता था, तो उसका वह सिरा मेरे अंदर की सबसे ज्यादा महसूस होने वाली जगह तक पहुँच जाता था और मेरे मुँह से एक तेज सिसकी निकल जाती थी।
कमरे के उस ठंडे माहौल में हमारे नंगे शरीरों से निकलता पसीना और हमारे शरीरों की मिलती हुई आवाजें उस पल को और ज्यादा खुला और अलग बना रही थीं। मैं अपनी उस शर्म और भाई-बहन के रिश्ते की बात को उस गर्म बिस्तर पर पीछे छोड़ चुकी थी। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर था कि उसका वह बड़ा लंड मेरे अंदर किस तरह हलचल कर रहा है और मेरे शरीर की हर नस को हिला रहा है।
गोलू के उन तेज और गहरे झटकों के बीच उसकी सांसें भारी हो चुकी थीं। उसने अपनी कमर की रफ्तार थोड़ी धीमी की और मेरे कान के पास झुककर भारी आवाज़ में धीरे से कहा, “आलिया दीदी… क्या तुम कोई दूसरी पोज़िशन करना चाहती हो?” दर्द और तेज हवस के नशे में डूबी हुई मैंने बिना एक पल गंवाए हाँ में सिर हिलाया.
और हाँफते हुए कहा, “हाँ… गोलू, चलो कुछ और बदलते हैं…” मेरी हाँ मिलते ही उसने अपना वह कड़क लंड मेरी गांड़ के अंदर से बाहर निकाल लिया। उस गर्म जगह से उसके निकलते ही मुझे हल्का सा खालीपन महसूस हुआ। मैंने तुरंत अपने ऊपर पड़ी हुई मोटी चादर पूरी तरह हटाकर फेंक दी। “Didi Hotel Chudai Kahani”
कमरे की बहुत ज्यादा ठंड अब मेरे शरीर को छू भी नहीं रही थी। उस ठंड का असर पूरी तरह खत्म हो चुका था, क्योंकि मेरे अंदर सिर्फ एक ही चाहत थी, गोलू के उस लंड को दोबारा अपनी गांड़ के अंदर महसूस करने की चाहत। मैं बिना किसी झिझक के बिस्तर पर घुटनों के बल हो गई और आगे की तरफ झुक गई।
मेरे दोनों हाथ गद्दे पर टिक गए और मेरे शरीर का पूरा वजन मेरे हाथों और घुटनों पर आ गया। इस पोज़िशन में आते ही मेरी गांड़ हवा में पूरी तरह उठ गई और उसका वह तंग छेद और भी ज्यादा साफ दिखाई देने लगा। गोलू तुरंत मेरे पीछे आ गया। लेकिन इस बार अपना लंड अंदर डालने से पहले उसने अपने दोनों हाथों से मेरी गांड़ के दोनों हिस्सों को पकड़कर जोर से अलग कर दिया, जिससे मेरा वह छेद पूरी तरह साफ दिखाई देने लगा।
उसने अपने मुँह में लार इकट्ठी की और सीधे मेरी उस छोटी सी गांड़ के छेद पर थूक दिया। उसके थूक की वह गीली और अजीब सी ठंडक जैसे ही मेरे उस आसानी से महसूस होने वाले छेद पर पड़ी, मेरा पूरा शरीर कांप उठा। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, उसने अपने उस कड़क और तने हुए लंड को सीधे उस गीले छेद के पास रखा और बिना एक पल की देरी किए अपनी पूरी ताकत से जोरदार धक्का दे दिया।
उसके उस एक ही झटके में उसका वह भारी और बड़ा लंड एक बार में, बिना किसी रुकावट के, पूरी तरह मेरी गांड़ के अंदर चला गया। उस एक ही तेज धक्के के साथ उसका वह भारी और सख्त लंड मेरी गांड़ के अंदर पूरी तरह चला गया। इस बार न तो कोई झिझक थी और न ही उस ठंड का कोई असर। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरे शरीर के अंदर सिर्फ उसके उस बड़े अंग की रगड़, उसकी सख्ती और उस गीली गर्माहट का तेज अहसास हो रहा था। घुटनों और हाथों के बल आगे झुकी हुई उस डॉगी स्टाइल पोज़िशन में, मेरे शरीर की हालत ऐसी थी कि उसका हर एक धक्का सीधे मेरे अंदर की सबसे ज्यादा महसूस होने वाली जगहों तक पहुँच रहा था।
गोलू की सांसें भारी हो गई थीं और उसने पीछे से अपनी कमर को तेज झटकों के साथ आगे चलाना शुरू कर दिया। उसके उस मोटे और तने हुए लंड के अंदर जाने और बाहर आने पर, लार और अंदर की नमी मिलकर गीली और चिपचिपी आवाज पैदा कर रही थी, जो कमरे की खामोशी में साफ सुनाई दे रही थी।
जब भी वह पूरी ताकत से पीछे से धक्का देता, तो उसका वह सिरा मेरे शरीर के बहुत अंदर तक महसूस होता और मेरे मुँह से अपने आप एक लंबी और तेज चीख निकल जाती। मेरा वह छोटा सा छेद उसकी चौड़ाई को लगातार सहते हुए जैसे जल रहा था। “Didi Hotel Chudai Kahani”
गोलू अब पूरी तरह अपने होश में नहीं था, और उसकी हर हरकत के साथ मेरे अंदर हवस की एक तेज लहर उठ रही थी। मेरा पूरा शरीर उस दर्द और तेज सुख के मिले-जुले अहसास में डूबता जा रहा था। उसकी रफ्तार इतनी तेज हो गई कि उसने अपनी कमर को पागलों की तरह आगे-पीछे चलाना शुरू कर दिया।
वह बहुत तेजी से और बिना रुके चल रहा था, और उसका वह कड़क और भारी लंड मेरी गांड़ के अंदर बहुत तेजी से अंदर-बाहर होने लगा। मेरे मुँह से हाँफते हुए निकला, “आह… गोलू… थोड़ा धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…” उसने अपनी रफ्तार और ज्यादा तेज करते हुए हाँफकर कहा, “नहीं दीदी… अब और धीरे नहीं… अब मैं खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ, मेरा बस निकलने वाला है…!”
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उसकी रफ्तार इतनी तेज और बेकाबू हो गई थी कि उसका वह कड़क लंड मेरी गांड़ के अंदर पागलों की तरह अंदर-बाहर हो रहा था। मैं घुटनों और हाथों के बल उस बिस्तर पर पूरी तरह बेबस पड़ी थी। उस दर्द और हवस के बीच अब मेरा खुद पर कोई बस नहीं चल रहा था। मैं बस चुपचाप उस दर्द को सह रही थी।
तभी, जब गोलू अपने आखिरी पल पर पहुँचा, उसने एक आखिरी और बहुत लंबा, जोरदार धक्का मारा। उस एक झटके में उसका वह बहुत बड़ा और कड़क लंड मेरी गांड़ के अंदर और ज्यादा गहराई तक चला गया, जहाँ उसका सिरा मेरे अंदर की जगह को पूरी तरह भर चुका था।
वहाँ पहुँचकर उसने अपनी कमर को पूरी तरह रोक दिया और एकदम से रुक गया। अगले ही पल उसके अंदर का जोश बाहर आ गया और उसके लंड से गर्म, गाढ़ा और चिपचिपा सफेद पानी मेरी गांड़ के अंदर गहराई तक निकलने लगा। जब-जब उसका शरीर कांपता और उसकी नसें फड़कतीं, तब-तब उसके अंदर से उस गाढ़े और चिपचिपे सफेद पानी की एक-एक गर्म धार जोर से मेरे उस तंग रास्ते के अंदर गिरती।
उसकी उस बहुत गर्म सफेद धार की गर्माहट सीधे मेरे अंदर की उस जगह से टकराती और मैं साफ महसूस कर सकती थी कि उसका सारा सफेद पानी मेरी गांड़ के अंदर गहराई तक जमा हो रहा था। उस गाढ़े और चिपचिपे सफेद पानी के मेरे अंदर भर जाने के बाद भी मेरा शरीर उसकी हर एक कंपकंपी को महसूस कर रहा था।
गोलू का भारी शरीर अभी भी मेरे ऊपर झुका हुआ था और उसकी तेज चल रही सांसें मेरी पीठ पर गर्म हवा की तरह पड़ रही थीं। उसने कुछ पल तक वैसे ही खुद को रोके रखा, जैसे वह उस आखिरी एहसास को पूरी तरह महसूस करना चाहता हो। धीरे-धीरे उसने अपनी कमर को थोड़ा पीछे किया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जैसे ही उसका वह कड़क और अभी भी थोड़ा गर्म लंड मेरी गांड़ के उस तंग और जलते हुए छेद से बाहर निकला, अंदर जमा हुआ वह सारा सफेद पानी उस खुले हुए रास्ते से एकदम बाहर निकल आया। वह गाढ़ा और सफेद पानी मेरी जांघों के बीच और बिस्तर की चादर पर साफ दिखाई दे रहा था। “Didi Hotel Chudai Kahani”
मैं वैसे ही घुटनों और हाथों के बल बिस्तर पर बेसुध सी पड़ी रही। मेरा पूरा शरीर उस दर्द, थकान और आखिरी सुख के मिले-जुले एहसास में डूबा हुआ था। गोलू भी धीरे से पीछे हटा और मेरे पास ही बिस्तर पर लेट गया। हम दोनों की तेज सांसें उस ठंडे कमरे की खामोशी में साफ सुनाई दे रही थीं।
अगली सुबह शिमला के उस ठंडे और अच्छे मौसम में हमारी आँख खुली। वह हमारा वहाँ आखिरी दिन था, इसलिए बैंगलोर वापस जाने से पहले हमने एक बार फिर शहर के खूबसूरत नज़ारे और पहाड़ों को जी भरकर देखने का फैसला किया, ताकि वापस जाने के बाद हमें किसी बात का दुख न रहे।
हमने लगभग पूरा दिन होटल से बाहर बर्फीले पहाड़ों के बीच और वहाँ के बाजारों में घूमते हुए बिताया। लगातार घूमने और पिछले दिन की थकान की वजह से उस रात जब हम वापस अपने होटल के कमरे में आए, तो बिस्तर पर लेटते ही गहरी नींद में सो गए, क्योंकि अगली सुबह ही हमें बैंगलोर की फ्लाइट पकड़नी थी।
जब हम वापस बैंगलोर आए और दोबारा अपनी-अपनी ऑफिस की जिंदगी शुरू की, तो माहौल बिल्कुल बदल गया था। ऑफिस में हर कोई हमारे साथ अलग तरीके से बात कर रहा था। हर कलीग बस यही जानना चाहता था कि आखिर गोलू ने मुझे शादी के लिए कैसे मनाया, क्योंकि ऑफिस में सबको यही लगता था कि हम दोनों पति-पत्नी हैं।
किसी को भी यह पता नहीं था कि हम असल में भाई-बहन हैं। इसके अलावा, मेरे कलीग्स और टीम के लोग भी मेरे साथ बहुत अच्छे और सम्मान से पेश आ रहे थे। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि गोलू ऑफिस में सीनियर इंजीनियर था और कोई भी उसके साथ पंगा नहीं लेना चाहता था।
उसकी ‘पत्नी’ यानी मेरे साथ भी कोई बदतमीजी करने का खतरा कोई नहीं लेना चाहता था। ऑफिस में हमारी उस झूठी पहचान और भाई-बहन होकर भी पति-पत्नी बनने के उस अजीब नाटक के साथ हमने धीरे-धीरे खुद को ढाल लिया और अपनी रोज़ की जिंदगी में वापस आ गए। सब कुछ पहले जैसा लगने लगा था, या कम से कम बाहर से तो ऐसा ही दिख रहा था। “Didi Hotel Chudai Kahani”
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फिर एक दिन, जब हम रात का खाना खाने के लिए अपने अपार्टमेंट की डाइनिंग टेबल पर बैठे थे, तो अचानक मेरे मन में वही पुरानी बात फिर से आ गई। मैंने अपना कौर प्लेट में रखते हुए सीधे गोलू से पूछा, “अच्छा गोलू… एक बात बता, उस दिन तूने मुझसे शादी की बात सिर्फ इसलिए कही थी ना… ताकि तू अपनी इस बहन के साथ सेक्स कर सके और उसका मज़ा ले सके, है ना?”
मेरी यह सीधी और चुभने वाली बात सुनकर गोलू के हाथ का निवाला बीच में ही रुक गया। उसके चेहरे के भाव एक पल के लिए बदल गए। उसे मुझसे इतनी सीधी बात की उम्मीद नहीं थी और वह थोड़ा दुखी होकर अपनी जगह पर सीधा बैठ गया। उसने अपनी प्लेट से नजरें हटाकर सीधे मेरी आँखों में देखा. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
और थोड़ी गंभीर आवाज़ में कहा, “तुम गलत समझ रही हो, आलिया दीदी… मैं तुमसे शादी सिर्फ इसलिए नहीं करना चाहता था कि मुझे तुम्हारी चूत चाहिए थी या मैं सिर्फ तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता था।” वह थोड़ा रुका, अपनी साँस आम की और फिर पूरी सच्चाई से बोला, “सच बात तो यह है कि मैं तुम्हें शुरू से ही पसंद करता था, दिल से चाहता था।”
गोलू के मुँह से यह जवाब सुनकर मैं अंदर तक हैरान रह गई। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह ऐसा कुछ कहेगा। शुरू से लेकर अब तक मेरे मन में यही बात बैठी हुई थी कि वह मुझे अपनी बहन की तरह इसलिए नहीं देखता क्योंकि उसे सिर्फ मेरे शरीर की चाहत थी और वह मेरे साथ सेक्स करना चाहता था।
और सच कहूँ तो, जब मैंने पहली बार उसका लंड चूसा था और जब उसका वह कड़क अंग मेरी गांड़ के अंदर गया था, तो मुझे इतना गहरा सुकून और मज़ा मिला था कि मैं मन ही मन इस बात से बहुत खुश थी कि अब हम भाई-बहन की तरह नहीं जी रहे थे। लेकिन मैं हमेशा यही मानती रही थी कि यह सब सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि गोलू को मेरा शरीर चाहिए था, वह मेरे साथ सेक्स करना चाहता था।
पर उस दिन जब उसने यह कहा कि वह मुझसे शादी सिर्फ इसलिए करना चाहता है क्योंकि वह मुझे पसंद करता है, तो मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल होने लगी। उसके साथ उसकी नकली पत्नी बनकर रहना एक अलग बात थी, लेकिन यह जानने के बाद कि वह मुझे लंबे समय से पसंद करता है, मैंने उसे एक बिल्कुल नई नजर से देखना शुरू कर दिया।
वह हमेशा मेरा ख्याल रखता था, मेरी हर गलती संभालता था, और जब भी मुझे उसकी जरूरत पड़ी, वह हमेशा मेरे साथ खड़ा रहा। एक लड़की को अपने पति से और क्या चाहिए होता है? उसे बस यही सब तो चाहिए होता है, मुश्किल समय में साथ और हमेशा ख्याल रखने वाला इंसान। “Didi Hotel Chudai Kahani”
लेकिन सच्चाई यह थी कि गोलू मेरा अपना भाई था, और वह सब कुछ मेरे लिए सिर्फ एक भाई की तरह नहीं बल्कि एक ऐसे इंसान की तरह कर रहा था जिसके दिल में मेरे लिए कुछ और था। और यही इस पूरी कहानी की सबसे दुख वाली बात थी। इस दुनिया में भाई-बहन कभी आपस में शादी नहीं कर सकते।
समाज के नियमों के हिसाब से भाई-बहन का एक-दूसरे से प्यार करना और इस हद तक करीब आ जाना बहुत गलत माना जाता है, चाहे वे एक-दूसरे के कितने भी करीब क्यों न हों। लेकिन इन सब बातों के बारे में सोचते-सोचते मेरे दिमाग में एक अजीब सा अलग ख्याल आया।
इस दुनिया में कौन सी ऐसी बहन होगी जो अपने ही भाई के साथ इस हद तक करीब आ सकती है, इस दुनिया में ऐसी कौन सी बहन होगी, जो अपने ही सगे भाई के इतने मोटे और कड़क लंड को अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसेगी जैसे वह उसका पति या बॉयफ्रेंड हो।
इस दुनिया में कौन सी ऐसी लड़की होगी, जो अपने भाई के लंड को अपनी गांड़ के अंदर जाते हुए महसूस करेगी, उसकी हर हरकत को सहेगी और उसके शरीर से निकले उस गाढ़े, गर्म सफेद पानी को अपने अंदर लेगी। इस पूरी दुनिया में मेरे अलावा शायद ही कोई दूसरी बहन होगी, जिसने इस हद तक अपने भाई के शरीर को अपने अंदर महसूस किया हो। “Didi Hotel Chudai Kahani”
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भाई-बहन के रिश्ते की जो सबसे बड़ी और मजबूत दीवार इस समाज ने बनाई थी, उसे मैं बहुत पहले और कई बार तोड़ चुकी थी। मैंने सोचा जब मैं गोलू के साथ शरीर की हर हद को पार कर चुकी हूँ, जब मैं उसकी बाहों में अपने भाई-बहन के रिश्ते की हर सीमा को मिटा चुकी हूँ, तो फिर पीछे मुड़कर देखने का क्या फायदा?
अब जब मैंने सब कुछ पार कर ही लिया है, जब मैं इस गलत काम और उस बहुत ज्यादा सुख की हर हद तक जा चुकी हूँ, तो फिर समाज के इन बेकार नियमों और रोक-टोक से डरने या खुद को रोकने की कोई वजह ही नहीं बचती। मेरे दिल में चल रही इतनी सारी बातों और उस खामोशी के बीच, मैंने खुद को संभाला। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
डाइनिंग टेबल पर रखे खाने से ध्यान हटाकर मैंने अपनी नम आँखें उठाईं और सीधे गोलू की आँखों में देखा। मेरा गला अंदर से सूख रहा था और इतनी बड़ी बात कहने से पहले मेरे होंठ कांपने लगे। एक गहरी सांस लेते हुए, अपने अंदर के सारे डर, समाज के डर और इस रिश्ते की हर सीमा को एक पल के लिए भूलकर, मैंने अपनी झिझक को खत्म किया और कांपती आवाज़ में उससे कह दिया, “गोलू… मैं तैयार हूँ… मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार हूँ।” For next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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