Bhai Fuck Didi Pussy
हेल्लो दोस्तों, मैं आलिया फिर से स्वागत करती हूँ, आप सभी का मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग आलिया दीदी की सेक्स कहानी 8 पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि बारिश में भींगने की वजह से मेरे जिस्म में आग लगी थी, और मैंने ये आग अपने भाई से बुझवाने के लिए मन बना लिया. मैंने गोलू को अपनी चूत चाटने का न्योता दिया. अब आगे- Bhai Fuck Didi Pussy
गोलू अभी भी मेरे सामने खड़े होकर अपने ही गीले कपड़ों में उलझा हुआ था, जबकि मैं पलंग पर पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी। मैंने अपनी टाँगों को पूरी तरह चौड़ा किया हुआ था, जिससे मेरी गुलाबी चुत बिना किसी रुकावट के उसकी आँखों के सामने पूरी तरह खुली हुई थी।
एक पल के लिए वह पूरी तरह से चुप और उलझन में खड़ा मुझे देखता रहा, जैसे उसे समझ ही नहीं आ रहा हो कि वह क्या करे। लेकिन फिर, जैसे ही उसकी झिझक थोड़ी कम हुई, उसने धीरे-धीरे अपने शरीर से चिपके हुए गीले कपड़े उतारकर एक तरफ फेंक दिए।
उसके कपड़े उतरते ही उसका पूरा शरीर बारिश के पानी से भीगा हुआ चमकने लगा, और उसका लंबा और कड़ा लंड हवा में पूरी तरह तना हुआ लटक रहा था। गोलू धीरे-धीरे आगे बढ़ा और मेरे और करीब आकर मेरी दोनों टाँगों के बीच घुटनों के बल बैठ गया।
जैसे ही वह मेरे पास आया, मैंने जानबूझकर अपनी दोनों टाँगों को और ज्यादा फैला दिया, ताकि उसे बैठने के लिए पूरी जगह मिल सके और मेरा वह नाजुक हिस्सा उसकी आँखों के सामने और साफ दिखाई देने लगे। मेरी टाँगें फैलाने से मेरी चुत का गुलाबी और गीला हिस्सा पूरी तरह खुलकर उसकी नजरों के सामने आ गया।
इसके बाद उसने धीरे से अपने दोनों गर्म हाथ मेरी जाँघों पर रख दिए। उसके हाथों के छूते ही मेरे पूरे शरीर में तेज झुरझुरी दौड़ गई। उस छूने से मेरी गीली चुत में हो रही हलचल और बढ़ गई और मेरा दिल इतनी तेज धड़कने लगा, जैसे मैं अभी-अभी बहुत लंबी दौड़ लगाकर आई हूँ।
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उसकी लंबी और मजबूत उंगलियाँ मेरी जाँघों की नरम त्वचा को कसकर पकड़े हुए थीं। उस समय मेरे मन में कई तरह की बातें एक साथ चल रही थीं। एक तरफ यह सोचकर मुझे बहुत शर्म आ रही थी कि मेरा अपना भाई मेरी चुत के इतने करीब बैठा है और इसी वजह से मेरे अंदर झिझक भी हो रही थी.
लेकिन दूसरी तरफ उसके उस छूने से मेरे शरीर में ऐसा मीठा एहसास हो रहा था कि उस पल मुझे अपनी शर्म की ज्यादा परवाह नहीं रही। गोलू धीरे-धीरे आगे झुका और अपना चेहरा मेरी चुत के बिल्कुल पास ले आया। उसने गहरी साँस लेते हुए मेरी चुत को सूँघना शुरू कर दिया।
उसकी नाक और मुँह से निकलने वाली गर्म साँसें जब मेरी चुत की मुलायम त्वचा से टकराईं, तो मेरे पूरे शरीर में फिर से तेज झुरझुरी होने लगी। जब भी वह गहरी साँस लेकर मेरी खुशबू को अंदर खींचता, उसकी गर्म साँसें सीधे मेरी चुत के दोनों होंठों को छू जातीं, जिससे मेरे पूरे शरीर में अजीब सा एहसास होने लगता था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी इस हरकत से मेरा दिल बहुत तेज धड़कने लगा। मैंने अपनी आँखें नीचे कर लीं और बहुत शर्माते हुए, काँपती आवाज में धीरे से उससे कहा, “गोलू… ऐसे मत सूँघो इसे… मुझे बहुत ज्यादा शर्म आ रही है…” गोलू ने मेरी बात सुनकर अपना सिर थोड़ा पीछे किया और धीरे से कहा, “ठीक है, आलिया दीदी…”
उसकी बात सुनकर मुझे एक पल के लिए राहत मिली और मुझे लगा कि शायद वह मेरी बात मान गया है और अब पीछे हट जाएगा। मेरे अंदर थोड़ी देर के लिए सुकून आ गया। लेकिन मेरा वह सुकून ज्यादा देर नहीं रहा। अगले ही पल, जब मैं पूरी तरह शांत होने वाली थी, तभी मुझे अपनी चुत के उस नाजुक और गीले हिस्से पर उसके गर्म और भारी होंठ महसूस हुए।
बिना कुछ बताए उसने अपने होंठ मेरी चुत के नाजुक होंठों पर रख दिए। शुरुआत में उसके होंठ बहुत हल्के और काँपते हुए थे, जैसे उसे खुद समझ नहीं आ रहा हो कि वह क्या कर रहा है। लेकिन अगले ही पल उसने अपनी झिझक छोड़ दी और धीरे-धीरे मेरी त्वचा को चूमने लगा।
उसके गर्म होंठ जब मेरी चुत के अलग-अलग हिस्सों को छूते और चूमते, तो हर बार मेरे पूरे शरीर में तेज झुरझुरी होने लगती। वह कभी मेरे उपरी हिस्से के पास हल्के से होंठ रखता और कभी मेरी चुत के गीले होंठों को अपने होंठों के बीच लेकर धीरे से चूमता। उसके मुँह की गर्मी और होंठों का हल्का दबाव इतना ज्यादा महसूस हो रहा था कि मेरी साँसें तेज होने लगीं और मेरे मुँह से हल्की आवाजें निकलने लगीं।
उसके होंठों का वह धीरे और गहराई से छूना मेरी चुत की हर एक परत में हलचल पैदा कर रहा था। गोलू अब अपनी झिझक पूरी तरह भूल चुका था और उसके हर एक किस में एक अजीब सी चाहत दिखाई दे रही थी। वह कभी मेरे ऊपर वाले हिस्से पर अपने होंठ रखकर उन्हें गोल-गोल घुमाता, तो कभी मेरी चुत के गीले होंठों को अपने होंठों के बीच लेकर धीरे से चूसने लगता।
उसके मुँह से निकलने वाली गर्म साँस और उसकी लार जब मेरी उस नाजुक जगह पर फैल रही थी, तो मेरा पूरा शरीर जोश से काँपने लगा था। मेरी टाँगें अपने आप और ज्यादा जोर से काँपने लगीं और मेरे दोनों हाथ पीछे बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ चुके थे।
जब भी वह अपने होंठों से मेरी त्वचा को चूमता, मेरे अंदर उठने वाला जोश इतना तेज हो जाता कि मुझे अपनी आँखें तक बंद करनी पड़तीं। मैंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाकर उसकी तरफ और आगे कर लिया, ताकि वह बिना किसी रुकावट के मुझे और गहराई से चूम सके।
मेरे शरीर पर अपने होंठों से मुझे चूमते-चूमते गोलू अचानक रुक गया। उसकी साँसें भी तेज चल रही थीं और उसने बहुत धीमी आवाज में मुझसे पूछा, “दीदी… क्या आपको अच्छा लग रहा है?” मैंने अपनी तेज साँसों को किसी तरह संभाला, अपने सीने के उठने-गिरने को काबू में किया और अपनी आँखें खोलकर सीधे उसकी आँखों में देखते हुए हाँफते हुए कहा, “बस… अब ज्यादा बातें मत करो गोलू… बस करते रहो… रुको मत, इसे बिल्कुल मत रोकना…”
मेरी बात सुनकर गोलू के चेहरे पर एक शरारती और खुश वाली मुस्कान आ गई। उसने सिर हिलाकर हाँ में जवाब दिया और एक बार फिर अपना चेहरा धीरे-धीरे नीचे करके मेरी चुत के बिल्कुल पास ले आया। लेकिन इस बार उसने सिर्फ अपने होंठों का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी गर्म और लंबी जीभ बाहर निकाली और सीधे मेरी चुत की गीली त्वचा पर फेरने लगा।
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उसकी उस गीली और थोड़ी खुरदुरी जीभ का पहला छूना जब मेरी सबसे नाजुक जगह पर पड़ा, तो मेरे मुँह से एक तेज और दबी हुई चीख निकलते-निकलते रह गई। मेरी कमर झुरझुरी की वजह से हवा में थोड़ी ऊपर उठ गई और मेरे दोनों हाथ बिस्तर की चादर को और भी कसकर पकड़ने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसकी गर्म और मुलायम जीभ मेरी चुत के गीले होंठों के बीच धीरे-धीरे चलने लगी। गोलू ने शुरुआत में बहुत संभलकर और धीरे-धीरे अपनी जीभ चलानी शुरू की, जैसे वह देखना चाहता हो कि मुझे उसका यह छूना कैसा लग रहा है। उसकी जीभ की हर हरकत मेरे पूरे शरीर में बिजली जैसी दौड़ रही थी।
वह कभी मेरी चुत के बाहर वाले होंठों पर अपनी जीभ ऊपर-नीचे चलाता, तो कभी अपनी जीभ की नोक को सीधे मेरे ऊपर वाले हिस्से पर फेर देता। उसकी गीली लार और उसकी साँसों की गर्मी मिलकर उस जगह को पूरी तरह गीला कर रही थी, जिससे वहाँ हल्की सी आवाज और गीलापन पैदा हो रहा था।
जब भी उसकी जीभ मेरे नाजुक हिस्सों को छूकर गुजरती, मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी होने लगती। मेरे मुँह से अपने आप धीमी आवाजें निकलने लगीं, “आह… गोलू… हाँ… ऐसे ही…” मेरा पूरा शरीर अब उसकी उस सीधी-सादी लेकिन असरदार हरकत से ढीला पड़ने लगा था।
मैंने अपनी टाँगों को और ज्यादा फैला लिया ताकि वह आराम से ऐसा कर सके, और मेरी आँखें बंद थीं क्योंकि उस पल को महसूस करने के अलावा मेरे पास कुछ और सोचने की ताकत नहीं बची थी। उसकी जीभ की रफ्तार अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी। गोलू अब और ज्यादा बेझिझक होकर अपनी जीभ को मेरी चुत के अंदर और बाहर चलाने लगा था। “Bhai Fuck Didi Pussy”
वह कभी अपनी जीभ को सीधे मेरी चुत के अंदर ले जाकर उसके अंदर की गर्मी महसूस करता, तो कभी अपनी जीभ की नोक को गोल-गोल घुमाकर मेरे ऊपर वाले हिस्से को सहलाने लगता। उसके मुँह से निकलने वाली गर्म साँस और उसकी लार की वजह से वह पूरी जगह पूरी तरह गीली और चिकनी हो गई थी।
जब भी वह अपनी जीभ को तेजी से अंदर-बाहर करता, तो वहाँ से ‘चप-चप’ की हल्की आवाजें आने लगती थीं, जो मेरे जोश को और बढ़ा रही थीं। उसकी उस हरकत से मेरे अंदर जोश इतना बढ़ गया था कि उसे रोक पाना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था। मेरी साँसें अब पूरी तरह तेज हो चुकी थीं और मेरा सीना तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था।
मैंने अपने दोनों हाथों से बिस्तर की चादर को इतना कसकर पकड़ रखा था कि मेरी उँगलियाँ सफेद पड़ गई थीं। मेरे मुँह से अब लगातार धीमी आवाजें निकल रही थीं, “आह… गोलू… ओह… बस ऐसे ही चाटते रहो… मत रोको… मुझे बहुत मजा आ रहा है…” गोलू ने मेरी बेसुध हालत और लगातार बढ़ती सिसकियों को देखते हुए अपनी जीभ की रफ्तार और भी तेज कर दी।
इस बार उसकी चाल में एक ऐसा जोश था, जैसे वह अपनी इस हरकत से मुझे पूरी तरह पागल कर देना चाहता हो। वह अपनी जीभ को मेरी चुत की तंग और गीली दीवारों के बीच पूरी ताकत और गहराई से अंदर-बाहर चला रहा था। उसकी जीभ का सिरा जब भी मेरे सूजे हुए और बहुत नाजुक ऊपर वाले हिस्से से तेजी से रगड़ खाता, तो मेरे पूरे शरीर में करंट जैसा तेज झटका दौड़ जाता।
मेरा जोश अब अपनी आखिरी हद तक पहुँच रहा था। मेरा पूरा शरीर उस तेज और गहरे एहसास से काँप रहा था। मेरी टाँगें बुरी तरह कड़ी हो गई थीं और मैंने अपने दोनों हाथों से बिस्तर की चादर को इतना कसकर पकड़ रखा था कि मेरी उँगलियाँ सफेद पड़ गई थीं। “Bhai Fuck Didi Pussy”
मैंने अपनी कमर को पूरी ताकत से थोड़ा और ऊपर उठाकर उसकी जीभ की तरफ कर लिया, ताकि वह बिना किसी रुकावट के मुझे अंदर तक चाट सके। मेरे मुँह से अब होश खो देने वाली बातें निकल रही थीं, “आह… गोलू… हाँ… बस… फाड़ दे मेरी चुत को… आहाह… मैं बस छूटने वाली हूँ… मत रोक… बस चाटता जा…”
और तभी उस तेज छूने और गोलू की जीभ की लगातार चलती तेज हरकत ने मेरे अंदर का सारा सब्र खत्म कर दिया। मेरे पेट के नीचे वाले हिस्से में एक तेज झटका सा हुआ। मेरी आँखें खुली रह गईं, साँसें गले में अटक गईं और मेरे मुँह से एक लंबी, काँपती हुई चीख निकल गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मेरा पूरा शरीर एक तेज झटके के साथ काँप उठा। मेरी चुत के अंदर से गर्म पानी की धार निकल गई, जिससे गोलू का पूरा मुँह और चेहरा भीग गया। मैं अपने उस बहुत तेज ऑर्गाज्म में पूरी तरह डूब गई, जहाँ मेरा दिमाग सुन्न हो चुका था और शरीर का हर हिस्सा उस तेज एहसास से काँप रहा था।
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मैं बिस्तर पर बहुत थककर पड़ गई। मेरी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी, और साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। मैं अगले एक मिनट तक बस अपनी आँखें बंद करके खुद को शांत करने कोशिश करती रही। मेरे पूरे शरीर में उस पहले ऑर्गेज्म की थकान और मीठी सुस्ती छाई हुई थी।
लेकिन मेरा वह सुकून और आराम सिर्फ कुछ ही पलों का था। अचानक, मेरी चुत के अंदर एक बहुत तेज और काटने वाला दर्द उठा कि मेरी रूह काँप गई। ऐसा लगा जैसे अंदर से किसी ने मेरी उस नाज़ुक जगह को हाथ से बहुत जोर से दबा दिया हो। मैं दर्द में घबराकर उठी और खुली आँखों से नीचे देखा। “Bhai Fuck Didi Pussy”
सामने जो दिखा, उसे देखकर मेरे मुँह से चीख निकल गई क्योंकि गोलू का वह लंबा, भारी और सख्त लंड बिना पहले से बताए या तैयारी के मेरी चुत के अंदर पूरी तरह से समाया हुआ था। मैं उस समय पूरी तरह कुंवारी थी, इसलिए मैंने अपनी जिंदगी में कभी किसी मर्द के शरीर के उस हिस्से को अपने अंदर महसूस नहीं किया था।
मेरी वह तंग और नाज़ुक चुत उस मोटे लंड के अचानक अंदर जाने से जैसे बीच से फट रही थी। वह दर्द इतना ज्यादा था कि लगा जैसे कोई मेरी अंदर की त्वचा को नुकीले चाकू से काट रहा हो। मैं दर्द के मारे लगभग चिल्ला पड़ी और रोते हुए काँपती आवाज़ में बोली, “यह क्या कर रहा है गोलू?! पागल हो गया है क्या?! बाहर निकाल इसे… बहुत दर्द हो रहा है!”
लेकिन गोलू पर जैसे पागलपन छा गया था। उसने मेरी चीख और रोने की परवाह किए बिना जिद वाली और भारी आवाज़ में कहा, “लेकिन दीदी… आप तो मज़ा लेकर शांत हो गईं, पर मेरा लंड तो अभी भी कड़ा है… मेरा तो कुछ हुआ ही नहीं…” इतना कहते हुए उसने अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का दिया।
उसका वह मोटा लंड जैसे ही मेरी उस तंग चुत के अंदर और पीछे गया, मेरे मुँह से निकली चीख वहीं दब गई। ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे शरीर को दो हिस्सों में चीर दिया हो। मेरी आँखों से बहुत सारे आँसू बह निकले और गला दर्द से भर आया। वह रुकने का नाम नहीं ले रहा था और फिर से अपनी कमर हिलाने लगा।
उस बहुत ज्यादा दर्द और बड़े झटके से मेरा दिमाग कुछ समझ नहीं पा रहा था। मैंने अपनी आखिरी ताकत जुटाई, अपने दोनों हाथों से गोलू के चौड़े सीने पर पूरी ताकत से धक्का दिया और उसे खुद से दूर गिरा दिया। धक्का लगते ही वह पीछे बिस्तर पर गिर पड़ा।
मैं बिस्तर से उठी और लड़खड़ाते हुए सीधे बाथरूम की तरफ भागी। बाथरूम के अंदर पहुँचते ही मैंने अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया और कुंडी लगा दी। मेरी आँखें आँसुओं से पूरी तरह भरी हुई थीं और वे रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। इस वक्त मेरे मन में शर्म, अपनी गलती का दुख और अजीब सी बेचैनी की इतनी सारी बातें चल रही थीं, जिन्हें बताया नहीं जा सकता था। “Bhai Fuck Didi Pussy”
मैं अच्छी तरह जानती थी कि गोलू ने मेरी इजाजत के बिना जबरदस्ती अपना लंड मेरी चुत के अंदर घुसाया था, लेकिन इसके बावजूद मैं खुद को ही इस सबकी वजह मान रही थी। मुझे अंदर ही अंदर महसूस हो रहा था कि यह सब मेरी ही गलतियों की वजह से हुआ है। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अगर मैंने शुरुआत में ही इन सब हरकतों को रोक दिया होता, अगर मैंने खुद को उससे दूर रखा होता, तो शायद यह दिन कभी न देखना पड़ता। मैंने ही तो उसका लंड चूसा था, मैंने ही उसे अपने स्तनों के बीच लंड रगड़ने की इजाजत दी थी, और अभी कुछ ही मिनटों पहले मैंने अपनी मर्ज़ी से उसे अपनी चुत चाटने और चूमने दिया था।
शायद इसी वजह से गोलू को यह गलतफहमी हो गई थी कि उसे मेरे साथ पूरी छूट मिल चुकी है और वह मुझे पूरी तरह से चोद सकता है। लेकिन मेरे दिल और दिमाग के किसी कोने में सच कुछ और ही था। मैं तो बस जो कुछ हो रहा था, उसके साथ चलती जा रही थी, यह सोचकर कि शायद यह सब करना आम है या इससे चीज़ें कंट्रोल में रहेंगी।
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मैं कभी भी एक भाई-बहन के उस बहुत खास रिश्ते की सीमा पार नहीं करना चाहती थी। मैंने तो सिर्फ यह सोचकर गोलू को संभाला था कि अगर मैं गोलू को थोड़ा प्यार देकर काबू में रखूँगी और उसके लंड को अपनी चुत से दूर रखूँगी, तो हमारा भाई-बहन का रिश्ता हमेशा अच्छा बना रहेगा।
लेकिन अब मुझे समझ आ रहा था कि मेरा वह सोचना कितनी बड़ी गलती थी। वह सब करना मेरे लिए बहुत बुरा और डरावना साबित हुआ था, और अब वह सीमा टूट जाने के बाद मेरे पास अपनी गलती का दुख मनाने के अलावा और कुछ नहीं बचा था। मैं लगभग आधे घंटे तक बाथरूम के अंदर ही बैठी रही।
ठंडे पानी से अपना चेहरा धोने और खुद को संभालने की कोशिश करने के बाद, हिम्मत करके मैंने दरवाज़ा खोला और बाहर निकली। कमरे में गोलू नहीं था, वह चुपचाप बालकनी में बैठा हुआ था। तब तक रात काफी हो चुकी थी, इसलिए मैंने बिना किसी से कुछ कहे सीधे जाकर बिस्तर पर आँखें बंद कर लीं और सोने की कोशिश करने लगी, जबकि गोलू पूरी रात उस बालकनी में ही चुपचाप बैठा रहा। “Bhai Fuck Didi Pussy”
अगला पूरा दिन अजीब सी खामोशी में बीता। हम दोनों ने एक-दूसरे से एक शब्द भी नहीं बोला। उस दिन शाम को हमें वापस बैंगलोर के लिए निकलना था। हम बस में आकर बैठे, जो लोगों से पूरी तरह भरी हुई थी। मैं अपनी सीट पर चुपचाप बैठ गई, और कुछ ही मिनटों बाद गोलू आकर मेरे बगल वाली सीट पर बैठ गया।
हम दोनों के बीच की वह खामोशी मुझे अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी। बस को चले हुए लगभग दो घंटे बीत चुके थे, तभी गोलू ने आखिर में अपनी गर्दन मेरी तरफ घुमाई और बहुत धीमी, काँपती हुई आवाज़ में धीरे से कहा, “दीदी… मुझे माफ़ कर दीजिए, कल रात मैं बहक गया था।”
मैं जानती थी कि वह सच कह रहा था, और यह भी जानती थी कि जो कुछ हुआ, उसमें कहीं न कहीं मेरी अपनी भी गलतियाँ थीं। उसके चेहरे पर अपनी गलती का दुख देखकर मेरा दिल पिघल गया। उसने एक बार फिर भारी आवाज़ में कहा, “मैं कसम खाता हूँ दीदी… अब कभी ऐसा दोबारा नहीं करूँगा।”
मैंने उसकी तरफ देखा, उसके चेहरे पर दिख रहा डर और गिल्ट साफ नजर आ रहा था। मैंने एक लंबी साँस ली और हल्के से मुस्कुराते हुए उससे कहा, “ठीक है गोलू… मैं तुम्हें माफ़ करती हूँ…” उस वक्त गोलू जो कह रहा था, मैं जानती थी कि वह सच बोल रहा था और उस समय उसे अपनी गलती का दुख भी सच में था।
लेकिन इसके बावजूद मेरे दिल के किसी कोने में एक डर था। मैं अच्छी तरह जानती थी कि हालात बदलने पर वह एक बार फिर बहक सकता है और वैसी ही हरकत दोबारा कर सकता है। और शायद अगली बार मेरे अंदर इतनी ताकत भी न बचे कि मैं उसे रोक पाऊँ, क्योंकि भाई-बहन के बहुत खास रिश्ते की जो सीमा एक बार टूट चुकी थी, उसे चाहकर भी वापस पहले जैसा नहीं किया जा सकता था।
जब हम बैंगलोर पहुँचे, तो हमारी जिंदगी फिर से पहले जैसी आम दिखने लगी। लेकिन मेरे दिल के अंदर यह बात अच्छी तरह बैठ गई थी कि सब कुछ पहले जैसा कभी नहीं हो सकता था। जब भी मैं कोई फिट टी-शर्ट पहनती, तो मैं साफ महसूस कर सकती थी कि गोलू की नजरें आज भी मेरे स्तनों पर टिकी होती थीं।
अब उसके लिए यह आसान नहीं रहा था कि वह मुझे सिर्फ अपनी बड़ी बहन की तरह देख सके। मैं समझ चुकी थी कि इस हालत को संभालने के लिए मुझे ही कुछ करना होगा। मैंने मन ही मन सोच लिया था कि मेरे बर्थडे के बाद मैं गोलू से खुलकर बात करूँगी और हमारे बीच कुछ साफ और सख्त नियम तय करूँगी, क्योंकि वह हर साल मेरे बर्थडे को लेकर बहुत खुश रहता था। “Bhai Fuck Didi Pussy”
मैं उसे किसी भी कीमत पर यह महसूस नहीं होने देना चाहती थी कि उस होटल के कमरे में जो कुछ हुआ, उसका असर आज भी मेरे दिल और दिमाग पर है। यही सोचकर मैंने खुद को संभाला और उसके सामने बिल्कुल ठीक-ठाक बनी रही। लेकिन फिर एक बार किस्मत ने कुछ अजीब खेल खेला क्योंकि मेरे बर्थडे से ठीक एक दिन पहले, जब मैं शाम को ऑफिस से थककर वापस फ्लैट पर लौटी, तो मैंने देखा कि गोलू कहीं जाने के लिए तैयार हो रहा था।
उसके बाल ठीक से बने हुए थे और उसने अच्छे कपड़े पहने हुए थे। मैंने जूते उतारते हुए उससे पूछा, ” गोलू, इतनी तैयारी करके कहाँ जा रहे हो?” गोलू के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई और उसने खुशी से कहा, “दीदी, मम्मी-पापा एयरपोर्ट पर हैं! वे इस बार आपका बर्थडे हमारे साथ बैंगलोर में ही मनाने के लिए यहाँ आए हैं!”
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गोलू के कमरे से निकलते ही और दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आते ही मैं बहुत थकी हुई सी सीधे काउच पर बैठ गई। मैंने अपनी आँखें बंद करके एक बहुत लंबी और गहरी साँस ली, लेकिन सीने पर जमा भारीपन कम होने का नाम नहीं ले रहा था। मेरे दिमाग में बहुत सारी बातें एक साथ चलने लगीं, जिससे मेरे पैरों के नीचे की जमीन जैसे खिसक गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
क्या होगा अगर मम्मी-पापा को हमारे इस रिश्ते के बारे में थोड़ा सा भी पता चल गया? क्या होगा अगर उन्हें पता चल गया कि जिस बेटे और बेटी को वे सबसे अच्छे और समझदार मानते हैं, उन्होंने भाई-बहन के रिश्ते की सारी हदें पार कर दी हैं? उस पल मुझे अपनी गलती पर खुद से ही बहुत बुरा लगने लगा। “Bhai Fuck Didi Pussy”
जब मैं गोलू का लंड चूस रही थी, जब मैं उसे अपनी चुत चाटने और चूमने की पूरी छूट दे रही थी, तब मेरे दिमाग में एक बार भी यह बात क्यों नहीं आई कि मम्मी और पापा कभी भी यहाँ आ सकते हैं? अब जब वे सच में बैंगलोर आ चुके थे और कुछ ही घंटों में हमारे सामने होने वाले थे, तो मेरा पूरा शरीर डर और घबराहट से काँपने लगा।
एक अजीब सा डर मेरे दिल में बैठ गया था कि मम्मी-पापा के सामने मैं गोलू से कैसे नजर मिलाऊँगी, उनके सामने खुद को कैसे आम रखूँगी और अगर उन्होंने हमारे बीच के इस अजीब खिंचाव को समझ लिया, तो क्या होगा। छोटी से छोटी बात अब मुझे बहुत बड़ी परेशानी जैसी लगने लगी थी, और मैं इस अचानक आई मुश्किल के सामने खुद को पूरी तरह बेबस महसूस कर रही थी। If you want next part tell me golutales07@gmail.com
Author:- Golu Jr.
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