Chhoti Bahan Chudai Kahani
हमारे घर में चार कमरे हैं, मम्मी-पापा का, मेरा, मेरी छोटी बहन दिशा का और एक गेस्ट रूम, सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि मेरा और दिशा का बाथरूम एक ही था, दोनों कमरों से अलग-अलग दरवाज़ा खुलता था, पर अंदर से एक ही जगह थी। उस दिन मैं नहा रहा था, सिर्फ़ काला अंडरवियर पहने खड़ा था. Chhoti Bahan Chudai Kahani
बालों में शैंपू लगाया ही था कि दरवाज़ा खुला और दिशा अंदर आ गई, वो मुझे ऐसे देखकर एक पल को रुक गई, उसकी नज़र मेरे तने हुए लंड पर ठहर गई, होंठों पर शरारती मुस्कान आई और बिना कुछ बोले दरवाज़ा बंद करके चली गई, मैं शर्मा गया था, क्योंकि उस वक़्त मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था, पानी की बौछार के नीचे भी वो सख्ती नहीं जा रही थी।
नहाकर बाहर आया तो दिशा किचन में नाश्ता बना रही थी, उसने मुझे देखा और फिर से वही हल्की सी मुस्कान दी, मैंने कुछ नहीं कहा, नाश्ता किया और कॉलेज चला गया, लेकिन उस दिन से दिशा का व्यवहार बदल गया, वो मेरे सामने जानबूझकर बाल संवारती, बॉडी लोशन लगाते वक़्त अपनी टाँगें ऊँची करती, कभी मेरे कमरे में ऑपरेशन रिसर्च का कोई सवाल लेकर आती और घंटों बैठी रहती।
एक दोपहर मैं कॉलेज से लौटा और थक कर सो गया, पतली शॉर्ट्स पहनी थी, लंड सुबह से ही तना हुआ था और पैंट में साफ़ दिख रहा था, दिशा चुपके से मेरे कमरे में आई, दरवाज़ा खुला छोड़कर मेरे बिस्तर के पास खड़ी हो गई और मेरे लंड को एकटक देखती रही.
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मैंने आँखें खोल दीं, वो हड़बड़ाई नहीं, बस शरमाते हुए चली गई, उसके बाद उसका मेरे कमरे में आना रोज़ का हो गया, कभी ग्यारह बजे रात, कभी बारह बजे, कभी तो दो बजे भी। मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी, दिशा का भी कोई बॉयफ्रेंड नहीं था, हम दोनों ही अपनी-अपनी दुनिया में थे, पर अब वो दुनिया आपस में टकराने लगी थी।
एक रात मैं गहरी नींद में था, अचानक लगा कोई मेरे लंड को सहला रहा है, मैंने आँखें खोलीं तो दिशा बिस्तर पर घुटनों के बल बैठी थी, उसका हाथ मेरी पैंट के ऊपर से लंड पर था, मैं चौंक कर उठा तो वो डर गई और भाग कर अपने कमरे में चली गई, अगली सुबह वो मुझसे नज़रें नहीं मिला पाई, मैं भी नहीं मिला पाया, कई दिन तक हम दोनों एक दूसरे से बचते रहे।
फिर एक शाम वो मेरे कमरे में आई, आँखें नीची करके खड़ी रही और बोली, “भैया उस रात के लिए सॉरी, मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी”, मैंने कहा, “कोई बात नहीं”, पर वो बार-बार सॉरी बोलती रही, आख़िर मैंने सख़्ती से कहा, “बस करो, भूल जाओ वो सब”, वो चली गई और कुछ दिन सब नॉर्मल रहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
फिर एक रात फिर वही हुआ, मुझे किसी के छूने का अहसास हुआ, मैंने आँखें खोल दीं, इस बार दिशा नहीं भागी, वो मेरे बगल में बैठी थी और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बोली, “प्लीज़ भैया गुस्सा मत करना, बस एक बार करने दो”.
मैंने पूछा, “क्या करने दो?”.
वो शरमाते हुए बोली, “जो बाकी लड़कियाँ अपने बॉयफ्रेंड से करवाती हैं, वही”.
मैंने डाँटा, “पागल हो गई हो क्या, मैं तेरा बड़ा भाई हूँ”.
वो रोने लगी, “मुझे भी तो ज़रूरत है भैया, मैं एक लड़की हूँ, मेरा भी मन करता है”.
मैंने कहा, “मम्मी को बता दूँगा”.
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वो डर गई और चली गई। सुबह वो पूरी तरह सहमी हुई थी, मम्मी के सामने भी नहीं आ रही थी, मैंने मम्मी को कुछ नहीं बताया, रात को वो फिर आई, मेरे बगल में बैठ गई और बोली, “थैंक यू भैया कि मम्मी को नहीं बताया”.
मैंने कहा, “तेरी वजह से नहीं, इसलिए नहीं बताया क्योंकि तू मेरी इकलौती बहन है”.
वो चुप रही, फिर धीरे से बोली, “भैया एक सवाल है, अपने भाई के साथ सेक्स करने में क्या गलत है?”
मैं हैरान रह गया, “क्योंकि मैं तेरा सगा भाई हूँ”.
वो बोली, “तो क्या हुआ, किसी को पता नहीं चलेगा, मैं किसी और से नहीं करवाना चाहती, सिर्फ़ तुमसे”.
मैंने मना किया.
वो बोली, “ठीक है, मैं किसी और से करवा लूँगी”.
ये सुनकर मेरे दिमाग में आग लग गई, “ऐसा मत करना दिशा”.
वो मुस्कुराई, “फिर तुम ही कर दो ना”।
उसने मेरा हाथ पकड़ा, फिर धीरे से पैंट पर हाथ रख दिया, मेरा लंड फौरन खड़ा हो गया, वो बोली, “देखो ये तो मान गया, इसने तो नहीं कहा कि मैं तेरी बहन हूँ”, मैं शरमा गया, उसने पैंट में हाथ डाल दिया, मैंने उसका हाथ निकाल दिया, तभी बाहर मम्मी की आवाज़ आई, दिशा भाग गई।
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अगली रात ग्यारह बजे वो सिर्फ़ टाइट जीन्स और पतली टी-शर्ट में आई, ब्रा की आउटलाइन साफ़ दिख रही थी, उसने मेरी किताब बंद की और बोली, “मैं कैसी लग रही हूँ भैया?”, मैंने कहा, “बहुत ख़ूबसूरत”, वो शरमाई और फिर अपनी टी-शर्ट के बटन खोलने लगी, एक, दो, तीन, पूरी शर्ट खुल गई, सफ़ेद ब्रा में उसके भरे हुए बूब्स उभर आए. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने मुँह फेर लिया, वो हँस पड़ी, “शर्म मैं भगा देती हूँ” और शर्ट उतार कर फेंक दी। फिर उसने मेरी पैंट की ज़िप खोली, लंड बाहर निकाला और सहलाने लगी, “कितना बड़ा और सुंदर है भैया का”, मैंने कुछ नहीं कहा, वो झुक कर उसे मुँह में ले लिया, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों…
उसकी गर्म जीभ मेरे सुपारे पर घूम रही थी, वो गले तक ले रही थी, मैंने उसका सिर पकड़ लिया और धक्के देने लगा, वो खुशी से सिसक रही थी। मैंने उसके बूब्स ब्रा के ऊपर से दबाए, फिर ब्रा ऊपर की और गुलाबी निप्पल मुँह में ले लिए, वो तड़प उठी, आह्ह… भैया… चूसो… ज़ोर से…
मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए, उसकी बुर बिल्कुल चिकनी थी, आज ही शेव की थी, मैंने उंगली अंदर की तो वो काँप गई, आह्ह्ह… भैया… और अंदर… फिर हम 69 में लिपट गए, मैं उसकी बुर चाट रहा था, वो मेरा लंड गले तक ले रही थी, उसकी चूत से रस टपक रहा था, दस मिनट बाद मैं उसके मुँह में झड़ गया और वो मेरे मुँह में, हम एक दूसरे को चाट-चाट कर साफ़ करने लगे।
फिर वो बोली, “मुझे पेशाब लगी है”.
मैंने कहा, “मुझे भी”.
वो शरमाई, “साथ चलें?”.
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बाथरूम में वो मेरे सामने बैठी और पेशाब करने लगी, उसकी आवाज़ और गंध ने मुझे फिर से पागल कर दिया, मैंने कहा, “रुक, मुझे तेरी पेशाब पीनी है”, वो हँस पड़ी, “ठीक है, पर मैं भी तुम्हारी पीऊँगी”, उसने मेरे मुँह पर बुर रखी और छोड़ दिया, मैं सब पी गया.
फिर मैंने उसके मुँह में लंड डालकर अपनी पेशाब छोड़ दी, वो गटगट पी गई। कमरे में वापस आए तो फिर से आग लग चुकी थी, मैंने उसके बूब्स चूसे, निप्पल काटे, वो मेरा लंड सहला रही थी, फिर 69 में और देर तक लिपटे रहे, आह्ह… ओह्ह… राजा… चाटो…
आख़िर वो बोली, “राजा अब असली वाला करो, लंड बुर में डालो”.
मैंने लंड सेट किया, बहुत टाइट थी, धीरे-धीरे अंदर किया, एक ज़ोर का धक्का मारा तो वो चीख पड़ी, आअह्ह्ह्ह… मर गई… भैया दर्द… बाहर निकालो… मैं रुक गया, फिर धीरे-धीरे हिलाने लगा, कुछ देर में उसे मज़ा आने लगा, आह्ह… और ज़ोर से… ह्हा… ह्हा… चोदो मुझे…
बीस-पच्चीस मिनट तक मैंने उसे अलग-अलग पोज़िशन में चोदा, दोनों एक साथ झड़े, वो मेरे सीने पर गिर पड़ी, पसीना-पसीना हो गई थी। फिर मैंने उसकी गांड पर उंगली फेरनी शुरू की, वो मना करने लगी, “नहीं राजा, फट जाएगी”, मैंने मनाया, वो तेल ले आई. “Chhoti Bahan Chudai Kahani”
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मैंने लंड और उसकी गांड पर खूब सारा तेल लगाया, धीरे-धीरे अंदर किया, वो चिल्लाई, आह्ह्ह्ह्ह… माँ… मर गई… लेकिन थोड़ी देर बाद मज़ा लेने लगी, आह्ह… गांड में भी इतना मज़ा… और ज़ोर से… हम रात भर चुदाई करते रहे, कई बार झड़े, सुबह चार बजे वो अपने कमरे चली गई, सात बजे जब उठे तो एक दूसरे को देखकर शर्मा गए. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
कॉलेज गए, लेकिन रात को फिर वो बाथरूम के दरवाज़े से मेरे कमरे में आई, मेरे गले लगी और बोली, “थैंक यू राजा, तुमने मेरी सारी प्यास बुझा दी”, मैंने कहा, “अब तू मेरी रानी है”, वो शरमाई, “जब भी बुलाओगे, तुम्हारी दुल्हन बनकर हाज़िर हो जाऊँगी, शादी के बाद भी”, और उसने सिंदूर की डिब्बी दिखाई, मैं हँस पड़ा, “पढ़ाई पूरी होने दो रानी, फिर तेरी माँग में सिंदूर मैं ही भरूँगा”।
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