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जवानी में मेरी भरपूर चुदाई हुई

July 9, 2026 by crazy Leave a Comment

Desi Family Chudai Stories

हेलो दोस्तों मैं नैना फिर से हाजिर हूं अपनी नई कहानी के साथ। दोस्तों मैंने पिछली कहानी में आपसे कहा था कि अगर इस कहानी पर अच्छे कमेंट करेंगे तो मैं अपनी जवानी की कहानी भी लिखूंगी। मेरी भाभी और भतीजी की अनोखी चुदाई की कहानी। आपने इस कहानी को ढेर सारा प्यार दिया और काफी लोगों ने अच्छे मैसेज भी किया मेल पर और कुछ लोगों ने गंदे भी किए। Desi Family Chudai Stories

खैर छोड़ीए जैसा कि मैं आपसे वादा किया था कि मैं आपको अपनी जवानी की रंगरलिया की कहानी बताऊंगी तो मैं अपने कहानी लेकर हाजिर हूं। मेरा नाम तो आप जानते ही होंगे। एक कहानी 2003 की है। जब मेरी शादी हुई थी बिहार के एक गांव में वैसे में भी बिहार से ही हूं। दोस्तों मेरी शादी 16 साल की उम्र में ही हो गई थी।

आप सोच रहे होंगे 16 साल में मैं कैसे दिखती थी तो मैं बता दूं 16 साल में ही मेरा पूरा शरीर भरा हुआ था और मेरी चूचियां मौसमी में के जैसी हो गई थी ऑल थैंक्स टू माय जीजा जी। 16 साल की उम्र में मैं आपको बता दूं आज कल की 24 साल की लड़कियों जैसी दिखती है मैं वैसे 16 साल की उम्र में ही दिखती थी। मेरी गांड भारी भारी थी । मेरी दीदी की शादी मेरे से एक साल पहले हुई थी वह उसे टाइम 20 साल की थी।

मेरे जीजा तब से ही मेरी चूचियों से खेलता था और उसने उन्हें खूब मसाला था मुझे भी उसे उम्र में अपनी चूचियों पर जीजा का हाथ बहुत अच्छा लगता था जब कभी अंधेरे में वह मेरे पूरे जिस्म पर हाथ फिरता था तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता था। पर जीजा सिर्फ मेरी चूचियों से ही मेरी शादी तक खेल पाया था कभी मेरी बुर पर हाथ नहीं ले गया था वह।

मेरी सील मेरे पति ने ही सुहागरात पर खोली मुझे खून भी निकलने लगा जिससे मेरा पति मुझसे इतना खुश हुआ कि जैसे पागल ही हो रहा हो उस टाइम तो मुझे उसकी खुशी का कारण समझ नहीं आया पर बाद में पता चला की कुमारी लड़की मिली है तो इतना खुश हो रहा है। अब मैं अपने ससुराल के बारे में बता दूं। मेरे ससुराल में मेरे पति मेरे जेठ जेठानी और उनका एक लड़का और एक लड़की उसे टाइम थे और मेरे साथ ससुर रहते थे मेरे पति की बहनों की शादी हो गई थी।

मेरे जेठ और मेरे पति के बीच में काफी आगे गया थ मेरे जेठ का एक लड़का भी था जो मेरी शादी के समय 13 साल दिया 14 साल का रहा होगा और एक लड़की भी थी जो उससे एक साल छोटी रही होगी। मेरे ससुर जी कांस्टेबल थे पुलिस मे जो उसे टाइम रिटायर नहीं हुए थे। मेरे जेठ जी और मेरे पति खेती बाड़ी का काम करते थे और उनका कुछ पड़ोस के कस्बे में दुकान भी था।

मेरे ससुराल का घर में सिर्फ तीन ही पक्के कमरे थे और 5, 6 कच्चे कमरे थे । उन तीन पक्को कमरों में से एक में मेरे जेठ और जेठानी सोते थे दूसरे में हम दोनों पति-पत्नी और तीसरे कमरे में सासू मां जेठ जी के बच्चों के साथ सोती थी । और जब ससुर जी घर पर होते थे तो बच्चे कभी हम दोनों पति-पत्नी के साथ तो कभी अपने माता-पिता के कमरे में सोते थे।

मेरा पति मुझे खूब चोदता था वह मुझे पूरा नंगा करके चोदता था मुझे काफी शर्म आती थी शुरू शुरू में पूरा नंगा होने में पर वो नहीं मानता था और मुझे पूरा नंगा ही कर देता था। शादी के 6 महीने बाद मेरा गौना हुआ था तो मैं ससुराल आई थी। कुछ दिनों बाद ही मुझे पता चल गया कि मेरा पति मेरे जेठानी को भी चोदता है। एक रात जेठ जी अपनी बहन के यहां गए थे।

आधी रात को जब मेरी नींद खुली तो मेरे कमरे में मेरे पति नहीं थे मैं हल्की लालटेन की रोशनी में सूसू करने के लिए कमरे से बाहर निकली तो एक कच्ची कमरे में से लालटेन की हल्की रोशनी आ रही थी। वैसे उसमें कोई सोता नहीं था। मैं उसे कमरे के करीब जाकर देखी तो दरवाजा बंद था पर दरवाजे के बीच गैप से अंदर जाकर देखी तो मेरा पति मेरी जेठानी को पूरा नंगा करके उसके ऊपर लेटा हुआ है और उसे चोद रहा है।

मैं यह देख कर दंग रह गई और गुस्से से अपने कमरे में आ गई। सुबह जब मेरे पति से मेरा सामना हुआ तो मैं उन्हें बोल दि कि आप जेठानी जी के साथ गंदा काम करते हैं अगर मैं किसी के साथ ऐसा काम करूंगी तो आपको कैसा लगेगा। मेरे पति ने बेशर्मी के साथ बोला कि अच्छा लगेगा तुम्हें भी अगर कोई पसंद हो तो उसके साथ कर सकती ह मुझे बहुत अच्छा लगेगा।

मैं उनसे नाराज हो गई तो वह मुझे सफाई देने लगे कहने लगे कि देखो भैया की उम्र हो गई है वह अब यह सब नहीं कर पाते होंगे और वहां भी अभी काफी जवान है तो उनको सेक्स चाहिए होता है और सेक्स इतनी भी बड़ी बात नहीं है आज के जमाने में तुम भी किसी के साथ भी कर सकती हो मगर ऐसा कुछ मत करना कि बाहर किसी को मुंह दिखाने लायक ना रहे हम दोनों।

तो मैं भी उन्हें गुस्से में बोल दी की ठीक है मैं भी अपने जीजा के साथ करूंगी तुम देखना। तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि ठीक है तुम अपने जीजा के साथ करोगी तो मैं भी तुम्हारी दीदी को चोदूंगा। अब कुछ महीने बाद मेरे में मायके में मेरे चाचा के बेटे की शादी थी। जहां हम दोनों पति-पत्नी को जाना था तो हम गए हुए थे। मेरे दीदी और जीजा भी आए हुए थे।

चुदाई की वजह से मैं थोड़ी और निखड़ गई थी तो मेरे जीजा तो मुझे देखकर हक्का बक्का ही रह गए। अब शादी के घर में मेहमान तो काफी आते ही है तो चाचा के घर से काफी सारे मेहमान हमारे घर पर सोने के लिए आए हुए थे । मार्च का महीना था, तो छत पर भी नहीं सो सकते थे तो सारे लोगों घर में ही कहीं दरी बिछाकर कहीं कमरे में गद्दे बिछा कर सोए हुए थे।

शादी के घर मे तो सारी महिलाएं सजी-धजी होती ही है तो मैं भी सजी-धजी थी तो शायद मेरे पति का मूड बन गया होगा तो उन्होंने कहा कि छत पर कोई नहीं रात में होता है तो 2:00 बजे जब सब लोग सो जाएं तो चुपचाप छत पर आ जाना। मैं महिलाओं के साथ एक कमरे में सो रही थी और मेरे पति पुरुषों के साथ मेरे बगल वाले कमरे में सो रहे थे। 2:30 नींद खुली तो मैं उठकर जिस कमरे में मेरे पति थे उसे कमरे में गई अगर मैं नहीं जाती तो मेरे पति काफी नाराज होते।

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और सच कहूं तो वह मेरी उम्र ही ऐसी थी कि रोज-रोज करवाने का मन करता था। ऐसा लगता था कि कोई मेरे सारे शरीर को हर रोज छूता रहे। मैं उसे कमरे में गई तो मेरे पति एक कोने में सो रहे थे तो मैं उनके पैरों को हिला कर उठे तो वह उठकर मेरे साथ चलने लगे हम चुपचाप सीडीओ से होकर छत पर आकर और वहीं पर एक दूसरे को बाहों में भर लिया।

छत पर काफी अंधेरा था तो एक कोने में लेटने लगे और वह मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरी साड़ी को उठाकर मेरे मेरे गाल गले और सीने पर चूसने लगे। वह मेरी टांगों को फैला दिए और मेरी नाजुक सी बूर को अपने हाथों से सहलाने लगे। अब उन्होंने भी अपना पेंट भी नीचे कर लिया और मेरी टांगों के बीच जाकर अपना कड़क लंड मेरी बूर पर घिसने लगे और मेरी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही अपने दांतों से काटने लगे और उसे मसलने लगे।

अब उन्होंने मेरी बुर पर लंड को लगाकर एक धक्का दिया और मेरे मुंह को अपने हाथों से बंद कर दिया। धीरे-धीरे धक्का बहुत देखकर मेरी चुदाई करने लगे और मेरे मुंह को भी बंद कर रखा था और उन्होंने अब पूरा लंड मेरी बुर में उतार दिया था। तभी दूर छत पर पायल की आवाज आई मैं डर गई मुझे उस टाइम भूतों वगैरा से बहुत डर लगता था।

मैं अपने पति को बोली रुकने के लिए और उनसे बोली की देखी ना उधर से छान-छान की आवाज आ रही है। वह रुक गया और ध्यान से सुनाने लगे तभी कुछ चूड़ियों की आवाज आई उन्होंने कहा हां चोरी की आवाज लग रही है फिर थोड़ी देर रुक कर हमने और सुना तो पायल की भी आवाज आए। मैं अपने पति को बोल कि गांव में भूत उधर रहता है कहीं भूत तो नहीं आ गया।

मेरे पति ने कहा कि पागल हो क्या भूत वगैरह कुछ नहीं होता है। मेरे अब उठ गए और मैं भी उठ गए मेरे पति ने कहा चलो चलकर देखते हैं उधर मैं मना करने लगी पर मेरे पति मैं कहां के चलो ना चल कर देखते हैं क्या आवाज आ रही है। हम अपनी जगह से उठकर चार कदम आगे गए थे कि हमसे लगभग 12, 15 कम की दूरी पर जल्दी से दो लोग उठे मेरे पति तेजी से उनकी और गए।

हम उनके करीब गए तो मैं देखी कि अंधेरे में मेरे जीजा जी और मेरी दीदी खड़ी थी। मै: दीदी आप हो आप यहां अंधेरे में क्या कर रही हो। दीदी: तुम यहां इतनी रात को छत पर क्या कर रही हो। अब मैं सोने लगी कि मैं क्या बोल उन क्या बोलूं अब मैं। मै: मुझे तो नींद नहीं आ रही थी तो उठकर आ गई। दीदी: हम दोनों को भी नींद नहीं आ रही थी तो छत पर टहलने के लिए आए थे।

मेरे पति पहले थोड़े हंस फिर मेरा जीजा भी हंसने लगा। आप दोनों को डिस्टर्ब करने के लिए सॉरी मेरे पति ने कहा। मेरी जीजा और मेरी दीदी अब नीचे जाने के लिए हो गए तो थोड़ी देर बाद हम दोनों पति-पत्नी भी चुपचाप नीचे अपनी अपनी जगह पर आकर सो गए दीदी दूसरे कमरे मे सो रहीं थीं। अब अगले रात को मेरे पति ने कहा कि पहले तुम छत पर जाकर देख लेना उसके बाद मुझे बुलाना और आज रात किसी भी कीमत पर हम दोनों करेंगे देखो मेरा कितना दर्द हो रहा है तो मैं भी उन्हें कहा कि ठीक है कर लेना अपने मन की।

आज रात मेरी नींद 1:00 के करीब ही खुल गई तो मैं सबसे पहले छत पर गई। और छत पर इधर-उधर घूम कर चुपके से देखने लगी कि आज कोई है तो नहीं ना। मैं अपने पूरे छत पर घूम कर देख खाली आज कोई नहीं था पर जैसे ह एक दीवार की तरफ गई उसके बगल में मेरे ताऊ जी का घर था मेरे घर और मेरे ताऊ जी के घर सटा हुआ था सिर्फ दोनों छत के बीच 4 फीट ऊंची दीवार थी बनी हुई।

मैं दीवार के किनारे से होते हुए आ रही थी तभी मुझे दीवाल के उसे तरफ ताऊ जी के छत पर कुछ आवाज आई मैं दीवाल से उसे और देखी तो मेरी ताऊ जी की बेटी जो मेरी दीदी से दोस्त साल बड़ी है वह अपने देवर के साथ चुदाई करवा रही है इसका देवर उसकी बुर में लंड* डालकर कूद रहा है उस पर और उसकी चूचियों को चूस रहा है मेरी दीदी अपनी चूचियों को अपने ब्लाउज के ऊपर से निकाले हुए हैं। “Desi Family Chudai Stories”

मैं दीवार से दूसरी तरफ से झांक कर देख रही थी क्योंकि वह दीवार से नजदीक ही लेते हुए थे। तो फिर मेरी दीदी की नजर मुझ पर भारी और उसने अपने देवर को धक्का दिया और उठकर अपने कपड़े सही किया और दो कदम मेरी और चल कर आई मैं अभी भी वही खड़ी थी उसने मुझे देखा और कहां नैना तू तुम यहां क्या कर रही हो।

मै: आप क्या कर रहे थे यहां और वह कौन है!

दीदी: नैना प्लीज किसी को बताना नहीं है मेरा देवर है।

दीदी का देवर पीछे की ओर भाग चुका था मुझे देखकर उसने अंधेरे में मुझे पहचाना तो नहीं होगा।

मै: ठीक है मैं किसी को नहीं बताऊंगी ।

इतना बोलकर मैं नीचे आ गई और मेरे पति जिस कमरे में सो रहे थे उधर को जाने लगे तो मेरे पति उधर से उठकर आ ही रहे थे हम दोनों चुपके से छत पर आ गए। मेरे ताऊ जी के घर पर उतने मेहमान नहीं रुके थे सिर्फ मेरे ताऊ जी के अपने जो बेटियां बेटा दामाद वगैरा थे वही रूके थे तो मैं सोच की ताऊजी का छठा सेफ रहेगा यहां पर नीचे से कोई ऊपर नहीं आएगा।

तो मैं अपने पति को बोली की चलो ताऊ जी के छत पर चलते हैं उन्होंने मुझे मेरी कमर से उठाया और दीवाल पार कराया और खुद भी दीवाल पर कर ताऊ जी के छत पर आ गए और वो मुझे दीवाल के एक कोने मे ले गए और मुझे लिटा दिया और मेरे ब्लाउज को खोलकर मेरी चूचियों को चूसने लगे। वह मेरे पेट पर चूसने लगे और मेरी नाभि में जीभ फिर आने लगे मेरी जाघ को सहलाने लगे और अपने लंड को मेरी बुर पर घिसने लगे और धीरे-धीरे धक्के मारते हुए पूरा लंड मेरी बुर में उतार दिया।

दोस्तों मेरा आज ताऊजी के छत पर आने का प्लान इसलिए भी बना क्योंकि मेरा घर बीच में है मेरे एक तरफ चाचा जी का और दूसरी तरफ ताऊ जी का घर है तो चाचा जी के घर के छत पर लाइटिंग वगैरह चल रही थी तो उसकी रोशनी मेरे छत पर भी आ रही थी पर ताऊ जी का छत पूरा अंधेरा था इसलिए मैं यहां आ गई और यहां मेहमान भी नहीं रुके हुए थे तो यहां पर कोई ऊपर आ भी नहीं सकता था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

पर दोस्तों हमारी किस्मत खराब थी और कुछ मेरी चुदाई शुरू हुए 5 मिनट ही हुए थे कि हमारे छत से दीवार कूदने की आवाज आई तो हमने उधर देखा तो मेरी दीदी थी वह खड़ी थी तो दिख गया फिर मेरा जीजा भी दीवाल खुद करता हूं जी के छत पर आ गया बोलो को वहीं खड़े थे जहां पर मेरी ताऊजी की बेटी और उसका देवर चुदाई कर रहे थे कुछ देर पहले।

वो हमसे करीब 30 फुट की दूरी पर वह लोग खड़े थे तो उनका छाया हमें दिख रहा था पर हम लोग लेते हुए थे तो हम उन्हें नहीं दिख सकते थे मेरे पति ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और थोड़ी देर के लिए चुदाई रोक दी अब हम दोनों उधर ही देख रहे थे। मेरे जीजा ने मेरी दीदी को लिटाया और उसके ब्लाउस को खोलकर उसकी चूचियां चूसने लगा और साड़ी को उठाकर अपना पेट नीचे किया और उसके ऊपर लेट कर प्यार करने लगा।

उनके लेटने पर भी हमें उनके छाया दिख रही थी तो मुझे ऐसा लगा कि अगर वह लोग भी हमारी और गौर से देखेंगे तो उन्हें भी हम लोग दिखाई देने लगेंगे। मैं अपने पति को हटाने के लिए धक्का देने लगी खुद के ऊपर से पर उन्होंने मेरे मुंह को बंद कर रखा था और मेरे कान में धीरे से बोला कि अगर हम उठाएंगे तो बोलोगे हमें देख लेंगे।

हम दोनों वैसे ही उनकी और देखते रहे वह दोनों कुछ देर में चुदाई शुरू कर दिए कोई भी आवाज नही आ रही थी हमारे कानों तक तो कुछ देर बाद मेरे पति ने भी मेरी चुदाई शुरू कर दी। कुछ देर बाद में झड़ गई तो थोड़ी सी आवाज हमारी चुदाई की हमारे कानों तक आने लगी। कुछ देर बाद जीजू शायद झरने वाले थे तो उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी मेरी दीदी की हल्की-हल्की आवाज मेरे कानों तक आने लगी थी. “Desi Family Chudai Stories”

पर मेरे पति ने मेरे मुंह पर अपना हाथ रखा हुआ था तो मेरी आवाज बिल्कुल नहीं निकल पा रही थी इधर मेरे पति ने भी जोर-जोर से शॉर्ट लगना शुरू किया तो शायद मेरी दीदी के कानों तक हमारे भी ठप ठप की आवाज पहुंच गई होगी। हम दोनों की नजरे मेरे दीदी और जीजा कीतरफ, हमारे तब तक की आवाज दीदी के कानों तक पहुंची तो दे दे शायद घबराते हुए जीजा को रुकने बोली पर दिलदार झड़ने बना था तो वह रुका नहीं दीदी हमारी और देखिए हम तो डर ही गए उनका मुंह अपनी ओर देखकर।

नैना तू है क्या दीदी धीरे से घबराते हुए आवाज में पूछी। मेरे मुंह को मेरे पति ने बंद कर रखा था तो मैं कुछ जवाब नहीं दे पाए और उधर दीदी ने जीजू को धक्का दे रही थी जो जोर-जोर से चोट लगने में लगे हुए थे और इधर मेरे पति भी झड़ने वाले थे तो उन्होंने भी जोर-जोर से चोट लगना शुरू कर दिया मेरे हटाने के बावजूद भी वो नहीं हटे। वो दना दन मेरे अंदर शॉट लगाते रहे और फिर लंड को निकाल कर छत की तरफ कर दिया और पिचकारी को मारने लगे छत पर।

दीदी ने एक बार और पूछा नैना तू है क्या मैंने करते हुए दर्द भरी आवाज में कहां हां दीदी मैं हू। मैं अपने ब्लाउज के दो बटन खुले हुए थे उन्हें लगाई और अपनी साड़ी को नीचे करी। मेरी दीदी भी उधर अपने ब्लाउस को सही करें और अपने सारे को नीचे करते हुए उठ गए मेरा जीजा जो पूरा अपना नीचे पजामा किए हुए था वह खड़ा हुआ और अपना पजामा पहन लिया मेरे पति ने भी अपने पेट को ऊपर कर लिया हम चारों लोग अपनी-अपने जगह पर ही खड़े रहे।

मेरी तो हिम्मत नहीं हो रही थी उनकी और बढ़ने की तो मेरी दीदी और जीजा ही हमारी और बढ़ते हुए आए। मेरी दीदी शायद खाली पर थे तो उसके पैर में मेरे पति का माल लग गया पर उसने कुछ नही बोला। दीदी ने आकर मुझसे पूछा नैना तू है ना मैंने उसे कहां दीदी मैं ह हूं फिर हम चारों के बीच थोड़ी चुपी हो गई तो मेरे पति ने चुपी तोड़ने के लिए कहा की चलिए आप लोगों का भी काम हो ही गया फिर मेरी दीदी और जीजा हल्के से हंसे और मेरे पति भी हंसने लगे। कुछ देर हमारे बीच की झिझक को मिटाने के लिए हम लोग फालतू की इधर-उधर की शादी की बातें करने लगे।

दीदी: चलो अब नीचे लेडिस हमें शौच के लिए खोजने लगेगी।

मेरे पति: शौच के लिए भी जाना है क्या, !

जीजा: शौच तो हमें भी जाना है हम भी साथ में चले क्या।

मेरे पति: हां ठीक है हम लोग भी चलते हैं ऐसे किधर शौच के लिए जाती हैं आप लोग हम लोगों को तो उधर दिन में ले जाते हैं काफी लोग होते हैं दिन में।

मेरी दीदी: तो चलिए आप लोग भी हमारे साथ ही चलिए।

दोस्तों मैं बता दूं कि उसे टाइम सभी लोग शौच के लिए बाहर ही जाते थे लेडिस सारी अंधेरा में ही लालटेन लेकर जाती थी। हम चारों चुपके से नीचे आए घड़ी में समय देखा तो 3:15 बजने को थे दीदी ने एक लालटेन उठाई और सभी ने एक लोटा अपने लिए पानी लिया और चारों खेतों की तरफ चल दिए। दीदी ने लालटेन की रोशनी को कम कर दिया और हम चारों एक जुते हुए खेत में आ गए और एक दूसरे की ओर मुंह करके थोड़ी-थोड़ी दूर पर शौच के लिए बैठ गए और धीरे-धीरे बातें करने लगे। “Desi Family Chudai Stories”

मेरे जीजा: तो भाई साहब कैसी लगी आपको हमारी साली।

मेरे पति: बहुत ही अच्छी लगी है भाई साहब आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जो आपने मेरी बेबी को सही सलामत छोड़ दिया नहीं तो मुझे तो डर लग रहा था कि छोटी बहन से शादी हुई है तो उसका जीजा तो उसका खेल बजा ही चुका होगा।

मेरा जीजा हंसते हुए बोला कि अरे हम वैसे टाइप के नहीं है हर जीजा एक जैसा नहीं होता है।

मेरे पति: हां कुछ लोग सिर्फ साली की चूचियों को मसला मसलकर बड़ा कर देते हैं। मेरे पति ने हंसते हुए बोला।

मेरे जीजा ने हंसते हुए कहा कि वह तो ऐसे ही इतना तो मतलब ऐसे कोई बात नहीं है।

मेरे पति: इतना तो चलता है मैं भी कुछ कहा बोल रहा हूं बस थोड़ा सा मैं भी अपनी साली की चूचियों को मसल लूंगा तो क्या हो जाएगा।

मेरा जीजा बोला कि हां हां क्यों नहीं घटने वाली चीज थोडे ही है आप दामाद है छोटे आप तो कुछ भी कर सकते हैं।

ऐसा है उन दिनों के बीच गंदी बातें होने लगी मैं चुपचाप ही रही। मेरे पति और जीजा ने एक साथ बला की एक ग्राउंड तो और भी लग सकता है अभी तो उजाला होने में काफी टाइम ही है। मेरी दीदी ने पहले तो ना बोला फिर वह भी मान गई और बोली की ठीक है इधर ही उस खलिहान में चलते हैं। हम उथने वाली थी कि दूर से दो लेडिस लांटर्न लेकर हमारी ओर आती हुई दिखी।

उन्हें आता देख जीजा जी बोले की लेडिस आ रही है हम जाते हैं तो दीदी ने बोला कि मत जाओ सिर्फ आप दोनों हम दोनों से थोड़ी दूर पर जाकर बैठ जाओ अगर जाने लगोगे तो बोलो भी गलत समझ जाएंगे। और कुछ भी बोलना मत चुपचाप लेडिस की तरह सोच पर बैठे रहना। कुछ देर में वो दो लेडिस लालटेन लेकर हमारे करीब आ गई। वह लोग हमारे गांव के हैं दो चचिया थी उनमें से एक बोली के नैना तुम हो।

तो मैंने कहा हां चाची हम हैं आओ बैठो। एक चाचा जिधर मेरे पति और जीजा बैठे थे उधर जाने लगी त मेरी दीदी ने कहा कि उधर मत जाओ चाची यहीं पर बैठो ना। तो चाची ने पूछा कि क्यों कौन है उधर। तो मेरी दीदी ने कहा कि है कोई शहर के उन्हें खुले में करने की आदत नहीं है ना तो दूर में बैठी है। तुम दोनों चाचा लालटेन की रोशनी को कम कर हमारे करीब ही बैठ गई.

और एक चाची बोली कि हां शहर वालियों को खुले में दिक्कत आती है शुरू में जैसे हमें भी तो दिक्कत आती है जब हम शहर जाते हैं और हमें शौचालय वाले में करना होता है तो। हम चारों कुछ देर वैसे ही बैठे रहे फिर चाचा ने कहा कि कितना देर लगेगा तुम लोगों को तो मेरी दीदी ने कहा कि आप जो चाचा बोलो आएंगे तभी तो हम चलेंगे तो दोनों चचिया चली गई।

दीदी ने खड़े होकर लालटेन की रोशनी को बढ़ाया और लालटेन उठा कर हमारे हस्बैंड के और बात धीरे से लगाकर उन्हें आने को बोली हम दोनों के हस्बैंड अपने पेट को कमर से नीचे किए हुए हैं हमारी ओर आने लगे दोनों का लंड बाहर ही था जो लालटेन की रोशनी के करीब आते आते हमें दिखने लगा मैंने तो दूसरी और नज़रें फेर ली पर मेरी दीदी उनके खड़े लंड को घूर रही थी। “Desi Family Chudai Stories”

मैं दीदी को बोली कि दीदी लालटेन नीचे कर दो हम दोनों के हस्बैंड आप हमारे बिल्कुल करीब आकर बैठ गए थे इतने जितने लगभग अगर हम हाथ बढ़ाते तो दोनों के हाथ मिल जाते। लालटेन की तेज रोशनी में मैं देख कि मेरी दीदी की बड़ी सी गांड चमक रही है बहुत होने के लिए अपना लोटा अपने हाथ में ले ली थी। मेरे जीजा ने मेरी दीदी का लोटा ले लिया और मेरे पति ने मेरा लोटा ले लिया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

क्या हुआ आप लोगों ने लौटा क्यों ले लिया हमारा हमें भी धोना है मेरे पति और मेरे जीजा अपने-अपने लोटे से अपनी अपनी गांड दो चुके थे। मेरे जीजा और मेरे पति बोले कि आज हम आपकी गांड धो देंगे दीदी पहले तो मना करें मैं तो कुछ भी नहीं बोल रही थी उनके बीच में पर मेरे पति मेरी गांड के पीछे आ गए और जीजा मेरी बहन के गांड के पीछे मेरी दीदी और मेरे बीच करीब दो फीट का गैप ही था.

मेरे जीजा की और मैं अच्छी तो वह मेरी गांड को ही देख रहा था और मेरा पति मेरी बहन की गांड को देख रहा था मेरे पति ने मेरी साड़ी पीछे से थोड़ी और उठाई और पीछे से मेरी गांड पर पानी देते हुए अपने हाथ को मेरी गांड के नीचे ले जाकर मेरी गांड को साफ करने लगा। मेरा जीजा भी मेरी दीदी का गांड को धो दिया और बचे हुए पानी पानी से उन्होंने अपना हाथ धोया। चलो अब किस खलिहान में जाना है मेरा जीजा मेरी दीदी से बोला।

अब उजाला होने वाला है देखिए दूसरी ओर से अभी लालटेन लेकर कुछ लोग आ रहे हैं अब हमें चलना चाहिए। मेरे पति और मेरे जीजा ने एक साथ बोला कि यार यह तो धोखा हो गया देखो हमारा लंड एकदम खड़ा है दोनों ने अपने पजामी को अपने कमर से नीचे कर लंड को निकाल कर हमें दिखाने लगे मेरे जीजा का लंड एकदम कड़क धार मेरे पति का भी दोनों का ही लंड क्रमशः 6 इंच और 6.5 इंच था।

अब कुछ नहीं हो सकता वह उजाला होने को है दिख नहीं रहा है क्या बाकी अब घर जाकर जितना मन हो कर लेना। अरे यार आज तो बारात जाएगी आज रात को कैसे कुछ हो पाएगा। अरे अपने घर जाकर कर लेना।

मेरे पति: कम से कम हाथ से तो कर दीजिए आप लोग ऐसे कितनी देर हम लोग इसको खड़े किए रहेंगे।

मेरे पति और मेरे जीजा अपने लंड को खड़ा किया हमारे बिल्कुल करीब आ गए थे वह हमसे करीब आधे फुट की दूरी पर ही थे। मेरी दीदी थोड़ी देर तो इधर-उधर ना नौकर करें मैं उन्हें बोली कि दीदी चलते रहिए नहीं तो वह लेडिस हमारे पास ही आ जाएंगे वह हमारे रास्ते से नहीं आ रही थी हमारे विपरीत वाले रास्ते से आ रही थी।

दीदी ने लालटेन की रोशनी कम कर दिया और कहां ठीक है चलते रहिए और उन्होंने अपने पति का लंड पकड़ लिया और मेरे पति ने भी मेरा हाथ अपनी और किया और मेरे हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया। हम दोनों बहने अपने-अपने पतियों का लंड पकड़ कर चल रही थी दीदी मेरे आगे आगे चल रही थी और मैं उसके पीछे-पीछे। हम काफी धीरे-धीरे चल रहे थे और मेरे पति ने मेरा हाथ को अपने लंड के ऊपर से पकड़ लिया और अपने लंड को हिलाने लगे हैं. “Desi Family Chudai Stories”

मेरे हाथ से उनकी चमड़ी आगे पीछे हो रही थी वह सीसकारी भी ले रहे थे मेरी दीदी भी शायद मेरे जीजा के लंड को मुथ मरने लगी थी। आज पहली बार था जब मैं अपने पति की मूठ लग रही थी। ऐसे ही चलते-चलते हम गलियों में पहुंच गए तब भी मेरे पति ने मेरा हाथ खुद के लंड से हटाने नहीं दिया गलियों में भी अंधेरा ही होता था और एक गली आगे जाने के बाद पहले मेरे पति ने पिचकारी मारी मेरे हाथ में और उसके बाद मेरे जीजा ने भी मेरी दीदी के हाथ को गंदा कर दिया।

अब दिन भर सब शादी में लग रहे और बारात शाम में विदा हो गई गांव में बारात जाने के बाद एक फंक्शन होता है जिसे डोमकच बोलते हैं जिसमें सिर्फ शादीशुदा महिलाएं ही भाग लेती हैं। मेरी शादी के बाद हमारे घर की पहली शादी थी तो मुझे भी डोमकच में भाग लेना था पर वहां पर ऐसा होता है मैंने कभी सोचा भी नहीं था वहां सारी लेडिस नाच रही थी और कुछ लेडिस मर्द बनी हुई थी उनके कपड़े पहनकर.

और मेरी एक भाभी ने तो आकर मेरी चोली को फाड़ दिया और मेरी चूची को नंगा कर दिया जिससे मैं जैसे तैसे अपने पल्लू से ढाकली और भी भाभियों ने हम नंदन की चूचियों को इतना मसाला उसे रात इतना मसला की मेरी चूची तो पूरी लाल हो गई इतना तो बेदर्दी से कभी मेरे पति ने भी नहीं मसला होगा जितना उसे रात भाभियों ने चाचिया ने यहां तक की ताई ने भी मेरी चूची को मसला क्योंकि सबसे ज्यादा अच्छी और उभरी हुई चूचियां मेरी ही थी उसे रात मैंने घर की सारी महिलाओं की चूचियां देखी।

मेरी दीदी ने मुझे कहा कि इंजॉय कर तू भी तो मैं भी बहुत अपनी भाभियों और चाचियों की चूचियों को मसली और उन्हें कसकस कर दांतों से खींचकर चूसी भी। एक भाभी ने तो मेरी साड़ी उठाकर मेरी बुर में एक उंगली कर दी मैं चीहुक कर पीछे गिर गई तो वह मेरे ऊपर चढ़ गई और जैसे मर्द चुदाई करते हैं वैसे ही अपने कमर को मेरी बूर के ऊपर पटकने लगी साड़ी के ऊपर से ही और मेरी चूचियों को भी चूसने लगी.

मेरी ताई क बहू की एक बड़ी बहन आई हुई थी जिसकी तो बुर में मेरी दीदी ने दो उंगलियां डाल दी और मेरी ताई की बेटी ने भी एक उंगली डाल। मेरे सामने मेरी दोनों बहनों ने उनकी साड़ी को पूरा उठा दिया था और उनके बुर में अपनी अपनी एक दो दो उंगली डाल रही थी। उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी। तू मेरी एक चाचा ने भी मेरी ताई की बेटी की साड़ी को पीछे से उठाया और अपनी एक ऊंगली उसकी बुर में डाल दी। “Desi Family Chudai Stories”

मेरी ताई की बहू मेरी दीदी की साड़ी को पीछे से उठा दिया और दीदी की कमर को पकड़ कर पीछे से उसकी गांड में शॉट लगने लगी और हंसते हुए बोलने लगी की मधु की गांड छोडूंगी आज मैं वह पीछे से ऐसे ही ड्राई हम पिक धक्के जोर-जोर से लग रही थी। पहली बार मैंने इतनी रासलीला देखी थी। और भी मेरी एक चाचा को मेरी ताई बुर में उंगली कर रही थी और मेरी एक चाचा मेरी ताई की बुर में उंगली कर रही थी यह सब देखकर मेरा माथा घूम रहा था।

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मेरी चुचिया दर्द करने लगी थी तो मैं बचकर वहां से अपनी चोली उठाई और वीडियो के रास्ते से ऊपर जाने लगे ताकि ऊपर से अपने घर जा सकूं। पर ऊपर जाकर देखी तो मेरी एक चाचा की लड़की जो 15 16 साल की थी वह ऊपर से आंगन में रासलीला चुप कर देख रही थी और उसके साथ दो और भी लड़कियां थीं। इनको तो अभी मेरे घर पर होना चाहिए था पर यह लोग मेरे घर से दीवार बांधकर चाचा के घर के छत पर आ गई थी और यहां से नीचे की रासलीला देख रही थी।

मैं पीछे से उन्हें जाकर डरती वहां से हटने को बोली और बोली कि अगर नहीं हटी तो ताई ई से तुम्हारी शिकायत कर दूंगी। वो तीनों मेरे साथ हमारे घर पर आने लगती है और मेरी चाचा के लड़की बोलती है कि दीदी एक बात बोलूं तो मैं उनसे बोलती हूं कि हां बोल तो वह बोलती है कि सबसे सुंदर आपकी दूदू है। बहुत दिनों में मुझसे जिद करने लगती है कि एक बार दिखाओ ना दीदी मैं उन्हें डांटती भी हूं पर बहुत दिनों ही कहने लगती है कि प्लीज एक बार दिखा दो.

तो मैं अपनी चोली खोलकर उन्हें एक बार अपनी है चुटिया दिखाती हूं तो वह मेरी चूचियों को छकर देखने लगती है मैं फिर अपनी चोली बंद कर लेती हूं और उन्हें बोलता हूं कि चलो चुपचाप नीचे चल तो बहुत दिनों मेरे साथ नीचे आ जाती है हमारे कमरे मे। वह तीनों ही सबकी चूचियों के बारे में ही बात कर रही थी कि तेरी मां की ऐसी है तेरी दीदी की ऐसी है मेरी बुआ की वैसी है मेरी मौसी की वैसी है। “Desi Family Chudai Stories”

मैंने कहा चुप हो जाओ तुम दोनों तीनों और चुपचाप सो जाओ। मेरे कहने पर तीनों लेट गई कुछ देर बाद हूं उन्हें लगा कि मुझे नींद आ गई तो तीनों फिर से उठ गई और कुसूर कुसूर बातें करने लगी। एक बहन तो बोली की दिखा तेरा कितना बड़ा है तू मेरी दूसरी बहन अपना फ्रॉक उठाकर अपने चूचियों को दिखाने लगी उसकी पूरी पेट से लेकर सीने तक सब कुछ नंगा था उसके चीकू के जैसे ही चूचियां थी.

फिर उसने दूसरी को बोला कि तू दिखा तो उसने दिखाया तो उसके अमरूद के जैसे चूचियां हो गई थी और एक मेरी बहन के छोटे-छोटे नींबू जैसे थे तीनों ने एक दूसरे की चूचियों को छुए और बोला कि यार दर्द करता है कैसे नीचे सब दबा रही थी इतनी जोर-जोर से। मेरी जी बहन की चूचियां चीकू जैसी थी उसकी चूचियों पर मेरी दो अन्य बहनों ने अभी भी हाथ रखा हुआ था.

तो वह मेरी बहन बोली क पहले दर्द कर रहा था अब नहीं दर्द कर रहा है देखो वह खुद ही अपनी चूची को दबाकर हल्के से बोली तो मेरी दोनों अन्य बहाने उसकी च को हल्के हल्के दबाने लगी वह भी मेरी दोनों अन्य बहनों की छोटी-छोटी अमरुद जैसी और नींबू जैसी चूचियों को सहलाने लगी और तीनों बोली की यार मजा तो आ रहा है। मैं उठी और तीनों को डांट लगाई ऐसा करने के लिए तो तीनों ने फिर से चुपचाप सोने का नाटक किया.

पर इस बार मैं बोली की चुपचाप सो जाओ नहीं तो ताई से तुम लोगों की शिकायत कर दूंगी। शादी के बाद मेरे पति मुझे लेकर घर आ गए और पता नहीं मेरे पति और जीजा ने अकेले में क्या बात करी थी कि कुछ 20-25 दिन बाद मेरे पति मुझे मेरी दीदी के यहां ले जाने वाले थे और मैं और मेरे पति मेरी दीदी के यहांआ गए। मेरे जीजा तीन भाई थे सबसे बड़े मेरे जीजा ही थे।

बाकी दोनों भाइयों की अभी शादी नहीं हुई थी। दीदी के यहां जाकर पता चला कि जीजा के मनचले भाई की शादी ठीक हो गई है बातें मुझे किसी ने नहीं बताई थी मुझे वहां जाकर पता चला उसी का रोका था तो उसी में हम दोनों पति-पत्नी गए थे। अब रात को मैं और मेरे पति जीजा और दीदी के ही कमरे में सोने वाले थे । मेरे पति और जीजा बैठ के ऊपर सो गए और मैं और मेरी दीदी नीचे जमीन पर कुछ बिछा कर सो गई।

कमरे में पूरा अंधेरा था मेरी नींद तब खुली जब मेरे पति ने मुझे अचानक ही गोद में उठा लिया मैं भोजन का रह गई कि यह क्या हो रहा है मैं इधर-उधर दिखी तो मेरा जजा मेरी दीदी के ऊपर लेटा हुआ था मेरी दीदी उसे धक्का देने की कोशिश कर रही थी पर वह हाथ नहीं रहा था अब इधर मेरे पति ने मुझे उठाया बेड पर मुझे पटक दिया और मेरे ऊपर चढ़कर मेरे गालों को चूसने लगा और मेरी चूचियों को चूसते हुए उन्हें दबाने लगा. “Desi Family Chudai Stories”

मैं भी अपने पति को धक्का देने लगी और धीरे से बोली की क्या कर रहे हो यह सब दीदी जीजा यहीं पर है तो उसने कहा कि वह भी तो कर रहे हैं। फिर मैं समझ गई कि यह मानने वाला नहीं है तो मैं वैसे ही पड़ी रही उसने मेरी चोली को पूरा खोल दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा वह करीब 10 15 मिनट मेरी चूचियों से खेलता रहा और उन्हें चूसता रहा मैं अपनी आवाज को अपने हाथों से रोक रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मेरा पति मेरे कान में बोला तुझे अपने जीजा से छोड़ना था ना तो बोल अपनी दीदी को मुझे छोड़ने के लिए बोलेगी या मैं बोलूं। मैं कुछ नहीं बोली तो उसने दोबारा यही धीरे से मेरे कान में कहां मैं फिर भी कुछ नहीं बोली तो उसने कहा के भाई साहब आपकी साली आपको पसंद करती है आपको पता है कि नहीं तो मेरा जीजा उठ गया और बोला कि यह तो मुझे पता ही नहीं था.

मेरी दीदी भी उठ गई और अपने कपड़े सही करने लगी तो मेरे जीजा ने मेरी दीदी को भी पलंग पर लिटा दया अब हम दोनों बहने एक दूसरे के अगल-बगल लेटी हुई थी कमरे में लालटेन की तेज रोशनी हो रखे थे जिसमें बहुत कुछ दिख रहा था मेरी दीदी की चूचियां पूरी दिख रही थी और वह लाल रोशनी में चमक रही थी। मेरे जीजा ने बेड के नीचे से ही मेरी दीदी की टांगों को खोल और उसकी बुर पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

मेरी दीदी उसका विरोध कर रही थी पर वह कुछ बोल नहीं पा रही थी मैंने तो अब सुरेंद्र ही कर दिया था और अपनी आंखें बंद कर ली थी इतने में मेरे पति ने मुझे छोड़ और मेरे जीजा हूं मेरे सामने आ गया और मेरी टांगें खोलकर मेरी बर पर उसने अपना लंड रगड़ा और मेरा पति मेरी दीदी की बुर पर लंड रगड़ने लगा मेरी दीदी अभी भी थोड़ा उसे धक्का देने की कोशिश कर रही थी.

पर मेरा जीजा मेरी चूचियों पर टूट पड़ा और मेरा पति मेरी दीदी की चूचियों पर टूट पड़ा और झटका दे देकर उन दोनों ने हमारी चुदाई शुरू कर दी। यह मेरी जिंदगी का दूसरा लंड था दोस्तों मेरा जीजा जोर-जोर से अपनी कमर चलने लगा और मेरी चुदाई करने लगा उधर मेरा पति भी मेरी दीदी की दोनों चूचियों को अपने हाथों में थाम लिया और मेरी दीदी की चुदाई करने लगा.

वह कभी हमारे ऊपर लेट कर हमारी चूचियों को चुस्त तो कभी हमारे पेट को चुस्त कभी गले और गर्दन को चुस्त कभी गानों को चुस्त और ताबड़तोड़ धक्के दोनों लगने लगे और कुछ 15 मिनट बाद जब झड़ने को हुए तो दोनों ने मिलकर हमारी दोनों बहनों की बुर* पर अपना माल गिरा दिया। पहले तो मुझे थोड़ा बुरा लगा फिर जीजा मुझे नंगी ही अपनी बाहों में भर लिया मेरे सीने को चूसने लगा. “Desi Family Chudai Stories”

मेरी दीदी को मेरे पति ने बाहों में भर लिया और उसके चूचियों को चूसने लगा और दोनों बोलने वालों की मजा आया ना तो हम दोनों बहनों ने तो पहले नहीं कहा फिर उन लोगों ने जबरदस्ती हमसे हां बुला ही लिया मैंने भी बोल दिया कि हां मजा आया। सच में दोस्तों किसी और के सामने या उसके बगल में लेट कर चोदने में थोड़ा अलग रोमांस तो आता है पर यह रोमनच कम जबरदस्ती ज्यादा थी।

अगले दिन मैं और मेरे पति है हमारे घर आ गए और रोज-रोज की चुदाई की वजह से मैं जल्द ही प्रेग्नेंट हो गई और मैं मायके आ गई। उसके बाद में 3 महीने के अपने बेटे को गोद में लेकर ही ससुराल आए। जब मैं मायके से ससुराल आए तो इतने दिन से चुदाई मेरी ना कर पाने की वजह से मेरा पति भरा बैठा हुआ था। पर घर पर बच्चे कौ देखने के लिए मेरी ननद भी आई हुई थी उनका भी कोई बच्चा नहीं था शादी मेरे से एक साल पहले ही हुई थी उनके।

तो एक कमरे में तो जेठ जी जेठानी की और उनकी बेटी सो गई और मेरे कमरे में मेरी ननंद मैं और मेरे पति अपने बच्चों को लेकर सो गए और सास ससुर भी थे तो उनके कमरे में मेरे जेठ का बेटा राजू सो गया। कुछ दिनों बाद मेरे पति को दिल्ली जाना था एक डेढ़ साल के लिए तो उन्होंने मुझे रात को ही उठाया और बोला कि चलो चुदाई करते हैं पर मैं उन्हें बोली कि कैसे करेंगे.

तो उन्होंने बच्चों को मेरी ननंद के पास ही छोड़ दिया मेरी ननद सो रही थी और मुझे उठाकर कच्चे कमरे में ले गए जहां उन्होंने लालटेन की रोशनी पूरी कर दी और मुझे घट पर सुला दिया और हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए काफी देर तक हम एक दूसरे से लिपटा छुट्टी करते रहे उसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतारने शुरू किया और अपने भी सारे कपड़े उतार दिए में पूरी नंगी तो नहीं होना चाहती थी. “Desi Family Chudai Stories”

पर मैं जानती थी कि यह मुझे पूरा नंगा किए हुए बिना मानेंगे नहीं। वह मुझे पूरा नंगा कर दिया और मेरी चूचियों से दूध को पीने लगे और उन्हें खाली कर दिया और अपने एक हाथ से मेरी बुर* को सहलाने लगे और मेरे एक हाथ को अपने लंड पर रखने बोला मैं उनके लंड को सहलाने लगी। फिर उन्होंने कहा कि रुको में तेल लेकर आता हूं वह नंगे ही कमरे से बाहर चले गए.

और रसोई से सरसों का तेल लेकर आए और दरवाजे को बंद कर खुद घाट पर लेट गए और मुझे अपने लंड में तेल लगाने को बोला मैं जैसा वह कह रहे थे वैसा करने लगी और उनके लंड में 2 मिनट तक तेल लगाए फिर उन्होंने कहा कि आओ ऊपर से मेरे लंड पर बैठ जो मुझे कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने मेरी कमर को पकड़ा और मेरी टांगों को फैला कर अपनी जांघों के दोनों और कर दिया और नीचे से मेरी बुर में लंड डालने लगे और धीरे-धीरे उन्होंने पूरा उतार दिया।

फिर उन्होंने मेरी टांगों को मोड़कर खाट पर बैठा दिया और मेरी गांड को ऊपर उठने बोला पहले मैं नहीं समझी कि क्या है कर रहे हैं वह बर्बाद में पता चला ऐसे ही डॉगी स्टाइल कहते हैं वह पीछे से मेरी बुर की चुदाई करने लगे फिर खड़े होकर भी उन्होंने मेरी बुर को चोदा और उसे रात को छह बार झडे और पूरे जमीन पर उन्होंने अपने माल को गिरा गिरा कर वहां चिपचिपा कर दिया पूरी रात वह मेरी चुदाई करते रहे हैं और सुबह 4:00 बजे ही मुझे उन्होंने छोड़ा।

मैं कपड़े पहनकर निकल रही थी तो मेरी जेठानी सोच के लिए जा रही थी तो उसने मुझे भी पूछा कि चलो सो के लिए मेरा तो पूरा दर्द कर रहा था शरीर पर फिर भी मैं उनके कहने पर सौच के लिए चली गई। अब कुछ दिन बाद मेरे पति चले गए हैं तो मैं अपने बच्चों के साथ अकेली ही अपने कमरे में सोती थी। मेरे ससुराल वाले अच्छे थे मुझे बच्चों के इतनी टेंशन नहीं होती थी. “Desi Family Chudai Stories”

मेरा काम था सिर्फ बच्चे को दूध पिलाना और थोड़ा बहुत घर का काम करना मां के बच्चों को मेरी जेठानी मेरी सास और मेरी जेठानी की लड़की डोली ही संभाल लेते थे डोली का अगले साल मैट्रिक का एग्जाम था। मेरी जेठानी का लड़का राजू 16 साल का होगा कुछ बल लंबा पतला दुबला था और उसने इसी साल मैट्रिक का एग्जाम पास किया था।

मेरे पति के जाने के एक दिन बाद जब दोपहर में सिर्फ मैं और वह एक कमरे में थे मैं अपने बेटे को दूध पिला रही थी मैंने अपनी चूचियों को ढक नहीं रखा था। चाची एक बात पछूं मैंने बोली हां पूछो तो राजू ने कहा कि चाची आप चाचा के साथ 5-6 दिन पहले कच्चे वाले कमरे में क्या कर रही थी रात में उसकी बात सुनकर तो मेरे पैरों तले से जमीन ही निकल गई।

मैंने उससे कहा कि कुछ नहीं तो उसने कहा कि नहीं चाचि कुछ तो आप दोनों कर रहे थे। मैं सोची की कहानी है बाहर न किसी को बता दे अपने दोस्तों को ना आए तब बात बातें बता दे तो मैं उससे प्यार से डील करने की सोची। अच्छा राजू तुम बताओ तुमने क्या देखा मैं शांति होकर उससे पूछी। मेरे द्वारा जोर देखकर पूछने पर उसने शरमाते हुए कहां की चाची मैंने देखा कि आप और चाचा बिल्कुल बिना कपड़े के हो।

तो हो गया ना जो तुमने देखा था वही तो थे हम बिना कपड़ों के थे। पर चाचा आप दोनों बिना कपड़ों के क्या कर रहे थे। हमें गर्मी लग रही थी देखते नहीं हो कितनी गर्मी है इसलिए अपने सारे कपड़े उतार दिए थे। वह बातें करते हुए चुप-चुप कर मेरी चूचियों पर भी नजर डाल रहा था मेरी नजर उसके पेट पर गई तो वहां टेंट बना हुआ था जिसे बहुत छुपाने की कोशिश कर रहा था मेरी हल्की सी हंसी निकल गई। “Desi Family Chudai Stories”

अच्छा राजू यह बातें तुमने किसी और को बताई है क्या तो उसने कहा नहीं चाचि तो मैंने उसे कहा कि इस बारे में किसी को मत बताना। तो उसने कहा ठीक है चाचि मैं किसी को नहीं बताऊंगा। अब ऐसे ही राजू मेरे साथ धीरे-धीरे पता नहीं क्यों ज्यादा टाइम बिताने लगा और जब अकेले में होता तो ऐसे ही बातें पूछता की की क्या आप और चाचा हमेशा ही ऐसे करते हो तो मैं भी उसे बता देती कि हां जब भी तेरे चाचा को गर्मी लगती है तो ही ऐसा करते हैं।

एक दिन बगल वाले घर में से बारात गई थी जेठ की बारात गए हुए थे हम सभी लेडिस खाना-वाना खाकर सोने की तैयारी कर रहे थे मैं अपने कमरे में अपने बच्चे के साथ सोने के लिए आ गए अब हर रात यह होता था कि खाना खाकर राजू और डॉली कुछ देर तक का मेरे कमरे में जरूर बैथे होते। उसके बाद पहले डोली चली जाती थी उसके अंधे 1 घंटे में और राजू बात करते थे और उसके बाद वह सोने जाता था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

पर आज सिर्फ मैं और डोली ही थे मैं डोली से पूछा कि राजू कहां है तो उसने कहा उसे नहीं पता फिर हम दोनों ही थोड़ी देर बात किया और डोली अपनी दादी के साथ कमरे में चली गई। आप बगल वाले घर से डोमकच किया गीत गाने की आवाज आने लगे थे तो मैं सोची कि क्यों ना ऊपर छत पर से जाकर देखा जाए दिखता है क्या उनके आंगन हमारे घर से तो मैं ऊपर गई। ऊपर जाकर मैं देखी की हमारे दीवाल के किनारे पर राजू ने एक कुर्सी लगा रखी है.

और उसे पर चढ़कर वह दीवार के दूसरी तरफ झांक रहा है मैं पीछे से उसके पास गई है और उसके पैर को पकड़ कर हिला कर कहा कि क्या देख रहे हो तो वो डर गया और बोला कुछ नहीं आटी। मैं कुर्सी पर चढकर उसे तरफ झांकी तो उनके आंगन का आधा भाग दिख रहा था जिसमें डोमकच के शुरुआत हो गई थी और सारे लेडिस नाच रही थी। यही देख रहे थे तुम।

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हां चाची मैंने आज तक डोमकच नहीं देखी है। राजू लड़कों की देखने की चीज नहीं है डोमकच लड़के नहीं देखते हैं ऐसे। क्यों चाची लड़के क्यों नहीं देख सकते हैं ऐसा क्या होता है डोमकच में। आओ ऊपर खुद ही देख लो वह कुर्सी के ऊपर आ गया और मैं भी इस कुर्सी पर उसे सेट कर खड़ी थी हम दोनों ही दीवार के उसे तरफ उनके आंगन में देख रही थी। अब एक लेडिस ने दूसरी लेडिस की चूचियों को मसला कपड़ों के ऊपर से ही।

धीरे-धीरे लेडिस एक दूसरे के ब्लाउज को खोलने लगे और एक दूसरे की चूचियों को मसलने लगी और कोई चूसने लगी फिर धीरे-धीरे कोई किसी की साड़ी उठा रहा है तो कोई किसी का लहंगा उठा रही है और किसी की बुर में उंगली डाल रही है तो कोई किसी की गांड में उंगली डाल रही है। मेरा भी मन आज कुछ अजीब सा ही लग रहा था तो मैं भी राजू के साथ वही खड़ी हो डोमकच देखती रही.

करीब एक घंटे तक एक घंटे में इतना सब हो गया सब एक दूसरे की चूचियां मसलने लगी थी औरतें। मेरे हाथों में तभी टच हुआ राजू का टेंट बना हुआ लंड मैंने एक पल को अपने हाथ को झटका वहां से फिर अपनी कमर पर उसे रख ली तो राजू का लंड मेरी जानू से टच होने लगा तो फिर मैं अपने हाथ नीचे की तो मेरे हाथों और चोरियों से उसका लंड टच होने लगा वह बार-बार मेरे हाथों से अपने लंड को पेनट के अंदर से टच कर रहा था.

उसे शायद अच्छा लग रहा था मेरे हाथों से उसका लंड का टच होना। चाची क्या ऐसे ही गर्मी लगना बोलते हैं आप राजू ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। क्या राजू क्या बोल रहे हो। आंटी देखो जब चाचा को गर्मी लगती है तो ऐसा ही हो जाता है ना उसने अपने टेंट को मुझे दिखाते हुए बोला। मैं उसके लंड पर हल्की थपकी लगा दी अपने हाथों से और उसे बोली चुप हो जा बदमाश अपने चाची से कोई ऐसी बात करता है।

मेरी भी बुर गीली हो गई थी एक तो औरतों की रासलीला से ऊपर से राजू का लंड मेरे हाथों और टांगों में टच होने से पर मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी और चुपचाप नीचे आ गई। अगले दोपहर को जब मैं अपने बच्चे को दूध पिला रहे थे तो राजू मेरे कमरे में आया। कैसा लगा डोमकर देख कर तुम्हें राजू। अच्छा लगा चाची। क्या अच्छा लगा डोमकच में तुम्हें। वह कुछ नहीं बोला। “Desi Family Chudai Stories”

बताओ क्या अच्छा लगा तुम्हें डोमकच में मैंने दोबारा जोड़ देते हुए पूछी। वो शरमाते हुए कुछ नहीं बोला। महिलाओं की चूचियां अच्छी लगी तुम्हें है ना राजू। शरमाते हुए वह बोला हा चाची। अच्छा सबसे अच्छी किसकी लगी होने से तुम्हें। रीमा की राजू ने नाम लेते हुए बोला। रीमा कौन मैं पहचानी नहीं। अरे आंटी वह हर एक कलर के ब्लाउज और सारी जो पहने हुई थी वह तीनों की भाभी है वह।

अच्छा जी रीमा की इतनी अच्छी लगी तुम्हें। हां आंटी पर आपसे ज्यादा अच्छी नहीं है उनकी भी। आपसे ज्यादा अच्छी तो दुनिया में किसी की नहीं होगी। अच्छा कब देखी तुमने मेरी। बताया तो था आंटी चाचा के साथ देखा था आपको। बस एक बार ही देखा था ना प्यार भी कभी देखे थे। आंटी सच बोलूं त चाचा के जाने के बाद से रात तो पहले तक हर रात को देखा था आपको।

दोस्तों मैं बता दूं कि उसे रात जब उन्होंने मुझे नंगा करके छोड़ा था उसके बाद से हर एक रात जब तक वह दिल्ली नहीं गए थे तब तक वह मुझे नंगा ही कच्चे वाले कमरे में हाथ पर सुलाते थे और जब उनका मन करता मेरी चुदाई करने लग जाते थे। मैं राजू को बोली कि बदमाश कहीं का पहले क्यों नहीं बताया कि आज रात को देखे हो मुझे लगा सिर्फ एक ही बार देखा होगा तुमने। आं

टी आप जैसी खूबसूरत कोई नहीं है दुनिया में। उसकी बातों से मैं समझने लगी थी कि उसे फीमेल अट्रैक्शन होने लगा है इस उम्र में। अब हम इस तरह की बातें भी कर लेते थे मैं उससे पूछता कि उसने और किसका देखा है तो वह सारे चीज बताने लगता कि उसने उसको पेशाब करते देखा है कभी वह बताता कि वह किसी को खेतों में पेशाब करते देखा है यही सब बातें वह मुझे जाकर बताता।

मेरा भी मन इस सब में लग रहा था। मैं इधर अब कुछ दिनों से नोटिस करती थी कि जब मैं अपने बच्चों को दूध पिलाती तो वह खुलकर मेरी चूचियों को देखता रहता और जब भी वह मेरे आस-पास रहता है उसके पेट में टेंट बना हुआ ही होता। मैं सोचती कि इतना दिन भर टेंट बनाए हुए रखता है दर्द नहीं होता है क्या इसे। धीरे-धीरे वह अपना टेंट मेरे हाथों से कभी-कभी मेरे पास से गुजरने के बहाने से लगा देता मैं भी अपना हाथ कभी-कभी इधर-उधर घूमने के बहाने से उसके पेट में बने टेंट पर थपक्की लगा देती थी। “Desi Family Chudai Stories”

एक दिन राजू क्रिकेट खेल कर आया था तो उसके पैरों में चोट लग गई थी तो मेरी सांस ने कहा की बहू जरा उसके पैर देख दो मेरी जेठानी खाना बना रहे थे और मेरी सास बच्चे को अपने कमरे में लेकर खिला रही थी और डॉली भी वही पढ़ाई कर रही थी जेठ जी अभी बाहर थे कहीं। राजू खाट पर लेटा हुआ था और कुछ दूर वहीं पर आंगन में उसकी मां खाना बना रही थी अब मैं भी उसके साथ खाट पर बैठ गई और बोली कि कहां चोट लगा है दिखाओ.

तो उसने अपनी जाघ की ओर इशारा किया उसने हाफ पैंट पहन रखा था मैं उसकी नंगी जांघों पर अपने नाजुक हाथ को रखी और उसे सहलाने लगी। उसके पेट में टेंट बनना शुरू हो गया था सासू मां ने कहा की बहू उसके पूरे पैर में तेल लगा दे तो मैं तेल की कटोरी लेकर आई और उसके पूरे पैर में तेल लगाने लगी मुझे पता नहीं क्यों ऐसा फील हो रहा था जैसे मैं उन्हें पति को ही तेल लगा रही हूं.

मैं अपने हाथों से उसके पंत को जांघों तक कर दी थी और उसका टेंट को भी बार-बार अपने हाथों से छू रही थी। मैं उसके पेट के नीचे से हाथ डालकर उसके लंड को हल्की-हल्की उंगलियों से टच भी कर रही थी अब मुझे रहा नहीं गया और मैं हल्का सा उसका पेट नीचे कर उसके लंड को निकाल लिया उसका लंड करीब 5:30 इंच का होगा और पूरा वह तना हुआ था। “Desi Family Chudai Stories”

मैं एक हाथ को उसके मुंह पर रख दिया और उसके लंड के स्किन को नीचे कर दी और तेल को उसके लंड और उसके अखरोट पर लगाने लगे उसने अपना मुंह खोल रखा था और मेरी उंगलियां उसके मुंह में जाने लगी थी वह मजे से साथ में आसमान पर जाने लगा था। मैं अपने दोनों हाथों में तेल लगाई और चूल्हे के पास ले जाकर अपने दोनों हाथों को गम की और उसे लाकर सीधा राजू के लंड पर रख दी.

उसके मुंह से एक जोर की आंख निकल गई मेरी जेठानी दूसरी और मुंह करके रोटियां बना रहे थे उसने पूछा कि क्या हुआ। कुछ नहीं दीदी ज्यादा ही चोट लगी है इससे मैं अपने दोनों हाथों से उसके लंड को गरम तेल से नहलाने लगे मेरी एक नजर उसके लंड पर थी और एक नजर अपनी सासू मां के कमरे के दरवाजे पर क्योंकि वहां से डोली कभी भी आ सकती थी. “Desi Family Chudai Stories”

मेरी जेठानी के लिए तो मैं निश्चित ही क्योंकि वह अगर पीछे मुड़कर भी देखी तो मेरी जांघ से राजू का लंड छुपा हुआ है रहता। ऐसे ही करोगी 3 मिनट और उसके लंड को तेलों से सपोर्ट दी और उसके मुथ मरती रही तो वह मेरी हाथों में ही छुट गया उसने ढेर सारा रस मेरी हथेलियां में भर दिया और वह इतना था कि मेरे दोनों हथेलियां में भर जाता।

मैंने कपड़े से अपने हाथ को और उसके लंड को साफ कि और अपने हाथ धो ली। उसे दिन तो मैं उसके लंड को रिलैक्स दे दि पर अब वह बार-बार ऐसा करने को इशारा करता। कभी दोपहर में अकेले में भी होती तो वहां पर भी आकर अपना टेंट दिखाते हुए बोलना आंटी देखो ना यह फिर ऐसे हो रहा है उसे दिन के जैसे कर दोगी क्या मैं उसके लंड पर टपक की लगती और उसे प्यार से डरती कि नहीं हर समय नहीं ऐसा करना चाहिए.

पर वह नहीं मान रहा था और बार-बार ऐसा ही करने को करता और कभी मैं छत पर कपड़े सुखाने जाती तो वह पीछे से आ जाता और वहां तो वह अपने पेट से अपने लंड को दिखा ही देता था मुझे मैं उनकी हरकतों को थोड़ा टॉलरेट कर रही थी पर उसे डांट भी देती थी। एक दिन राजू की मौसी उसकी बड़ी मम्मी और उसके मौसी आए हुए थे हमारे घर पर और उसे टाइम बरसात का दिन था और दो दिन से लगातार बारिश हो रही थी।

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तो रात को खाना खाकर सभी सोने की तैयारी करने लगे जेठ जी के कमरे में राजू के मौसी मौसी सो गए सासू मां के कमरे में सासू मां ससुर जी और डोली सो गई और मेरे कमरे में राजू की मम्मी जमीन पर बेड विचार पहले से ही सोई हुई थी क्योंकि वह था सफर में थक गई थी अब बेड पर मैं और राजू थे और मेरा बेबी था मैं अपने बच्चे को झूले में सुला दिया और मैं भी जमीन पर राजू की मामी के बगल में ही सोने वाली थी।

पर जैसे ही मैं सारा काम निपटा कर कमरे में आए और बेड पर थोड़ी देर बैठी तो राजू मुझे परेशान करने लगा उसने अपना टेंट बना रखा था मैं उसे धीरे से डरते हुए बोली कि तुम्हारी मामी है बगल में शर्म नहीं आती वह देखेंगे तो क्या सोचेंगे पर वह नहीं मान रहा था और उसने अपना पेंट पूरा ही कर दिया उसका लंड पूरी तरह से हवा में लहरा रहा था कमरे में लालटेन की पूरी रोशनी जगमगा रहे थे. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

राजू की मम्मी पीठ के बाल हटाने फैला कर सो रहे थे उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हवा में हो रही थी। तभी मेरे दिमाग में खुराफाती आया और मैं उसके लंड को पकड़ लि और उसकी मुथ मरने लगी मैं बैठ के किनारे में बैठी थी और वह बेड के बीच में पर धीरे-धीरे मैं उससे और बैठ के किनारे में उसके लंड को पकड़ कर खींचती चली आई और वह बेड के थोड़ा किनारे में लेटा हुआ था। “Desi Family Chudai Stories”

मैं अपनी दोनों हाथ की चूड़ियां उतार दी है क्योंकि चूड़ियों से खनखन की आवाज आ रही थी और उसके लंड को पकड़ कर मुठ मारने लगी कुछ 5 मिनट बाद मुझे लगा कि वह झरने वाला है तो उसके लंड की पिचकारी को मैं उसके मामी पर की और मार दी उसका सारा रा मामी के चेहरे से होते हुए उनकी चूचियों पर जहां गिरा और मैं जल्दी से कमरे से बाहर चली गई और दरवाजे के पास ही खड़ी रहे।

अपने ऊपर हुए रस के बौछार से उनकी नींद खुल गई राजू जल्दी से अपने पेट को पहनने में लगा था जिसे उसने पूरा उतार दिया था मैं दरवाजे के पास से छुपा कर देख रही थी उसकी मां भी उठी और उसे अपना पेंट पहनते हुए देखिए फिर उन्होंने अपने चेहरे से उसके रस को अपने हाथों में लेकर सोऊंगा और उसके बाद उन्होंने राजू के बाल को पकड़ लिया और उसे दे थप्पड़ दे थप्पड़ दे थप्पड़ थप्पड़ पर थप्पड़ मारने लगे.

मैं इतने में कमरे में इंटर हुई । क्या हुआ दीदी क्यों मार रही है इसे मैं धीरे से पूछी राजू की मम्मी ने बताया कि बहुत गंदा लड़का हो गया है इसको सुधारना पड़ेगा और वह उसे दे थप्पड़ दे थप्पड़ मारने लगी और मुझे बताएं कि देखो यह मूठ मार रहा था मुझे देखकर और उसने अपना रस मेरे ऊपर ही गिरा दिया इसकी इतनी हिम्मत हो गई है उसमें और राजू को चार थप्पड़ मारे। “Desi Family Chudai Stories”

अब रहने दो दीदी छोड़ दो इससे कितना बदमाश हो गया है मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी राजू की शक्ल देखने लायक थी वह रोने की तरह हो गया मैं पीछे जाकर उसे मुंह चढ़ाई। फिर राजू की मम्मी ने बोला कि नैना किसी को बताना मत इसकी यह हरकत तो मैंने उन्हें कहा कि मैं क्यों बताऊंगी दीदी। अब उन्होंने कहा कि चल उसे तरफ जहां सो जाओ किनारे में राजू बैठ के किनारे में चुपचाप सो गया और हम दोनों नीचे सो गए।

अगले दिन मुझे पता चला कि मेरी जेठानी भी इन सब के साथ कहीं जा रही है धाम घूमने। एक दिन बाद वह सभी चलेंगे अब घर में केवल में राजू जेठ की सासू मां और मेरा बेबी और डोली ही बचे थे। अब खाना बनाने की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गए थे डोली भी मेरी कुछ मदद कर देती थी और सासू मां मेरी बच्चे को संभाल लेती थी राजू उसे दिन के बाद से मुझसे बात नहीं कर रहा होता है करीब 7 दिन ऐसा ही चलता है कि वह मुझे बिल्कुल भी बात नहीं करता है। “Desi Family Chudai Stories”

एक शाम में खाना बना रही थी चूल्हे पर तो मुझे काफी गर्मी लग रही थी डाली बोलती है कि भैया जो आंटी के पंख झल दो तो राजू नहीं झलता है। मैं अकेली ही अपने बच्चे के साथ सोई थी राजू अपने पापा के साथ सोता था। एक-दो दिन बाद राज्यों की मम्मी आ गई और अभी भी बरसात के ही दिन थे तो कोई कच्चे कमरे में सो नहीं सकता था.

क्योंकि मिट्टी की दीवारें थी तो गिरने का खतरा होता था और जमीन पर भी सोना सही नहीं था कोई कीड़ा मकोड़ा भी आ सकता था तो राजू को मजबूरन मेरे कमरे में मेरे बेड पर ही सोना पड़ा। वह मुझे बिल्कुल भी बात नहीं कर रहा था मैं कमरे का दरवाजा लगा दिया और अपने बच्चों को झूले में लिटा दी वह पीठ के बल लेटा हुआ था मैं उसके होठों के पास गई और अपनी उंगलियां फिर आने लगी.

उसने मेरे हाथ हटा दिए फिर मैं थोड़ी देर और उसके साथ बात करने की कोशिश करती रही मैं हंसते हुए उसे सॉरी भी बोला उसे दिन के लिए। वह तब भी नहीं बात कर रहा था तो मैं उसके होठों पर अपने होठों को लगा दे और करीब 1 मिनट तक चुस्ती रहे। होंठ चूसना अभी मैंने कुछ दिन पहले ही टीवी पर देखा था कि कैसे हीरो हीरोइन होठों पर चूसते हैं। मैं उसके होंठ छोड़ कर उसके से बात करने लगे.

तो बहुत थोड़ा हंस फिर भी नाराज की जताते हुए बोला कि मुझे नहीं करनी आपसे बात तो मैं बोली कि मैं ऐसा क्या करूं कि तुम मुझसे बात करोगे। तो उसने कहा कि मुझे आप वह दिखाओ। उसने मेरी बुर की ओर इशारा करते हुए कहां मैं भी चार-पांच महीने से सेक्स नहीं की थी तो मेरी भी बुरे को जाने लगे थे और मैं आज सोच कर भी आए थे कि कम से कम आज उसे अपनी बुर तो दिखा ही दूंगी।

मैं हंसते हुए उससे बोली की ठीक है सिर्फ देखोगे यहां कुछ करना भी है तो उसने कहा सिर्फ देखेगा तो मैं बोली की ठीक है देख लो खुद ही मैं दीवाल से लड़कर अपनी है टांगों को प्रसार कर बैठ गई और उससे बोली की खुद देख लो। वह मेरी सारी ऊपर उठने लगा और उसे मेरी जान हो तो खिला दिया मैंने भी अपनी सारी को ऊपर तक उसे उठाने दिया मैंने पैंटी पहन रखी थी. “Desi Family Chudai Stories”

जिसे भी उसे बोली किस साइड कर सकते हो तो उसने पहले साइड करने की कोशिश की फिर कहा कि उतार दूं क्या तो मैं भी अपनी गांड को थोड़ा सा उठा लिया उसने मेरी चिकनी गांड पर हाथ रखते हुए मेरी पैंटी को पकड़ा और नीचे उतार दिया मेरी पूरी सारी पेट पर आ गई थी और मैं अपनी टांगों को मोर कर बैठ गई मेरी पूरी बूर उसकेसामने थी। “Desi Family Chudai Stories”

मेरी बुर पूरी गीली हो चुकी थी मैं दर्शकों को बता दूं कि मुझे सफाई बहुत पसंद है तो मैं हमेशा अपनी बू र को क्लीन शेव रखती हूं। वह मेरी गीली चिकनी गोरी बूर को आंखें फाड़ फाड़ कर देख रहा था मुझे उसे टाइम नहीं पता था कि बुर भी चूसी चाती जाती है नहीं तो मैं उससे जरूर चटवा लेटी। अब वह करीब दो-तीन मिनट तक मेरी बुर* को 1 फीट के करीब दूरी से देखता रहा उससे ज्यादा उसके नजदीक आने की हिम्मत नहीं हो रही थी। छूना चाहते हो।

उसने हमें सर हिलाया। तो छू कर देख लो। वह मेरी नाजुक से चिकनी बर पर अपना हाथ रख तो मेरी बातें खेलने लगी मेरी थोड़ी सी उसकी भी निकल गई मैं अपनी आंखें बंद कर लिया यार कुछ सेकेंड तक अपनी बर पर उसके हाथ के स्पर्श को फील करती रह फिर मैं अपनी आंखें खोली और उसे अपनी गुलाबी दाना दिखाई। कैसी लगी तुम्हें ये। बहुत ही सुंदर है। “Desi Family Chudai Stories”

एक उंगली डाल कर देखो यहां पर कैसा महसूस होता है मैं उसे अपनी बुर की एंट्रेंस दिखाएं और उसने धीरे से अपनी इंडेक्स फिंगर मेरी बुर में डाल दी मेरी सीसकारी निकल गई। बहुत गर्म है अंदर आंटी उसने बोला। मैं उससे बोली की दो उंगली गुस्सा हो तो उसने अपनी दो उंगली घसा दे अब मैं उसे बोली कि उसे धीरे-धीरे आगे पीछे करो तो वह धीरे-धीरे अपनी दो उंगलियों को आगे पीछे करने लगा.

मैं आंखें बंद कर अपनी बुर में अंदर बाहर जाती है उंगली का मजा लेने लगे फिर मैं उसे बोली की तीन डालो तो उसने तीन उंगलियां डाल दी उसकी पतली पतली लंबी उंगलियां तीन जब गई तो मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया और मैं अपनी आंखें तेजी से खलकर नीचे देखने लगी मेरी बर पानी उसके हाथों पर फेक रखना शुरू कर दी तो वह अपने हाथ को हटाने लगा.

मैं उसके हाथ को पकड़ ली और बोली कि ऐसे ही करते रहो तो वह तीन उंगलियां अंदर बाहर करने लगा और मेरी बुर ने ढेर सारा रस उसके हाथों में छोड़ दिया। मैं अपनी सांसे कंट्रोल करने लगी। कैसा लगा तुम्हें राजू। उसने बोला बहुत अच्छा लगा आंटी। अब मैं अपनी पैंटी उसके हाथों में भी और उसके हाथों को साफ कर दी अपनी पैंटी से फिर मैं उसके पैंट की तरफ देखी तो उसका टेंट बना हुआ था.

मैं उसके पेट को नीचे की और उसके खड़े लड को अपने हाथों में पकड़ लि और उसे सहलाने लगी और उसका मुथ मरने लगी। कुछ 7 मिनट बाद उसने रस् निकलना चाहा तो मैं उसके लंड पर अपनी पैंटी रखती और अपनी पैंटी से उसके लंड को पूरा साफ कर दी । राजू मेरी हर बात मानता और मेरी खूब केयर अब करता रात में हम एक दूसरे के पैर दबाते हैं वह मेरे हर जांघों से लेकर मेरे पैरों तक दबाता था.

मैं उसे अपना पूरा बदन भी दबा लेती थी कभी-कभी जब मुझे दर्द होता था तो। मेरे लिए जरूर का कोई भी सामान मंगाना हो तो मैं उसे कह देती थी और वह लगा देता था और भी घर के काम में भी वह मेरी मदद करता था। बदले में वह मेरी चूचियों को चुस्त था और मेरी बुर में उंगली करता था और मैं उसके लंड के मुथ मार देती थी बुर में उंगली करना और मूठ मारना रोज नहीं करने देती थी. “Desi Family Chudai Stories”

करीब 10 दिन या हफ्ते में एक बार ही ऐसा करती थी मैं बाकी चुचिया तो वह मेरी रोज ही चूस लेता था। अब ऐसा एक ही महीने चला था कि मेरी सांसों मां की बहन का पोता हमारे साथ रहने के लिए आ गया था। वह भी राजू की उम्र का ही था उसने भी अभी दसवीं का एग्जाम ही दिया था। मेरे कमरे का बेड बड़ा था तो उससे भी हमारे कमरे में ही सोना था। उसके आए हुए दो-तीन दिन हो गए थे. “Desi Family Chudai Stories”

राजू बीच में सोता और एक किनारे पर रवि और दूसरे किनारे पर अपने बच्चे के साथ में सो जाती थी। एक रात खाना खाकर मैं लेटी अपने कमरे में तो राजू राजू और रवि दोनों मेरी एक पर को पकड़ लिए और मेरे पर को दबाने लगे वैसे रवि भी मुझे अच्छा लड़का लगा था मैं उन्हें पैर दबाने से मना करी फिर मैं राजू बार-बार कहने लगा कि आंटी दबाने दो ना तो मैं समझ गई की राज्यों ने कुछ तो रवि को हिंट दे दिया है.

फिर मैं भी सोचे कि चलो करने देती हूं कहां तक करते हैं। तब दोनों मेरे एक पर को दबाने लगे और तेल भी लगने लगे धीरे-धीरे राज्यों ने मेरी साड़ी को उठाना शुरू किया और उसे घुटनों के ऊपर तक उठाकर मेरी टांगों में तेल लगाने लगा रवि थोड़ा-थोड़ा चौक पर जा रहा था अब राजू ने मेरी सारी को मेरी जांघों तक उठा दिया था और मेरी बर पूरी ही दूर थी सार से अब राजू मेरी मोटी मोटी जांघों में तेल लगाने लगा. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

तो रवि की आंखें मेरी जांघों को देखकर पति की फटी रह गई धीरे-धीरे राजू ने मेरी साड़ी को पूरा उठा लिया तो मेरी नाजुक सी चिकनी बुरे भी दिखने लगी जिसे देखकर रफी ने मेरी सारी थोड़ी नीचे करदी। कोई बात नहीं वहां पर भी लगाना है तो लगा दो राजू ने फिर मेरी सारी को ऊपर उठा दिया मैंने पेंट्री भी नहीं पहनी थी तो मेरी पूरी बर उनके सामने खुली थी.

मैंने अपनी तने थोड़ी और फैला ली जिससे मेरी दरार भी थोड़ी दिखने लगे तो धीरे से पहले राजू ने मेरी बर पर तेल लगाया और रवि को कहा कि लगा लो आंटी बहुत अच्छी है तो अभी भी मेरी बर पर हाथ रखा उसके हाथ कहां पर रहे थे फिर मैंने उसका एक हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी चूची पर रख हवा लिया उसका बाया हाथ मेरी बर पर और दाया हाथ मेरी चूची पर मैं उसके हाथ को अपनी चोली के अंदर घुसने लग.

वह कांपते हाथों से मेरी बुर को भी सहला रहा था और मेरी चोली में भी हाथ घुस रहा था मेरी क्लीवेज में उंगली घुसा रहा था। राजू ने एक उंगली मेरी बुर में डाल दी यह देखकर रवि और चौक गया मैं उससे बोली कि तुम भी एक उंगली डाल सकते हो तो उसने भी अपनी एक उंगली मेरी बुर में डाल दिया मेरी सिसकारी निकल गई मैं आह उह करने लगी दोनों मिलकर अपने उंगली को आगे पीछे करने लगे। “Desi Family Chudai Stories”

रवि का ज्यादा मेरी चूचियों पर था और बुरे पर काम था बहुत धीरे-धीरे उंगली भी अंदर बाहर कर रहा था और मेरी ब्लाउज के बटन को भी खोल रहा था उसने मेरी दोनों चूचियों को मेरी ब्लाउज से आजाद कर दिया और मेरी दोनों गोल सुडौल चुचियों को अपने हाथों से मसलने लगा और निप्पल को अपनी उंगलियों के बच लेकर उनसे खेलने लगा। पीना है मैं उससे पूछी और उसके सर को अपनी चुचियों पैर दबा दी.

मेरी चूचियों से हल्का-हल्का दूध निकलने लगा जो रवि के मुंह में जाने लगा यह देखकर राजू भी मेरी एक चूची को अपने मुंह में भर लिया और दूध पीने लगा वह दोनों मेरी बूर में उंगली भी कर रहे थे। कुछ 5 मिनट बाद मैं उनके हाथों में ही झड़ गई। अब बारी मेरी थी मैंने उन दोनों को लिटा दिया और बीच में बैठ गई और उनके पेट को नीचे कर उनके लंड को बाहर निकाल दे राजू तो मेरे कहने से हमेशा साफ करके अब रखने लगा था. “Desi Family Chudai Stories”

पर रवि के जात के बाल बड़े हुए थे मैं उसे बोली कि कल साफ कर लेना इससे तो उसने हां बोल रवि का लंड करीब 6 इंच से ज्यादा लंबा होगा मैं दोनों के लंड को अपने दोनों हाथों में मुथ मरने लगे हैं दोनों अपना मुंह खोलकर मेरी हाथों को एंजॉय कररहे थे। कुछ देर में दोनों ही मेरे हाथों में झड़ गए। अब ऐसे ही कुछ 10 दिन तक चला वह हर रात मेरी पूरे शरीर की मालिश करते मेरी टांगों में तेल लगाते थे और उसके ऊपर वह अपने दोनों हाथों से दबाते थे।

एक रात काफी ज्यादा बारिश हो रही थी और ठंड भी लग रही थी और बिजली तेज तेज चमक रहे थे मैं अपने बच्चों को झूले में सुला दी थी मेरा उसे दिन पता नहीं सेक्स का मन हो रहा था बहुत ज्यादा। उन दोनों ने कभी भी मुझे सेक्स के लिए नहीं कहा शायद उन्हें पता भी नहीं होगा की कैसे करते हैं या फिर डरते होंगे कुछ कहने से।

कमरे में लालटेन की अच्छी खासी रोशनी हो रही थी दोनों मेरे दोनों तरफ बैठे हुए थे मैंने अपने दोनों हाथ उनकी गोद में रखा हुआ थी और हम तीनों बातें कर रहे थे अरबी में तभी मेरे गालों पर किस कर दिया मैं उसकी और अच्छी बोल अपनी नज़रें नीचे कर लिया तो मैं उसके चेहरे को ऊपर उठें और बोली के कर लो शर्माओ मत।

अब वह दोनों ही मेरी दोनों तरफ गालों पर किस करने लगे मैं उन्हें बोली कि नीचे की ओर आओ किस करते हुए तो वह गर्दन और कान को चूसते हुए कंधे पर चूसने लगे मेरा ब्लाउज को वह दोनों मिलकर खोल दिए और पूरा ही ब्लाउज निकाल दिया उन्होंने अब वह मेरी दोनों चूचियों पर टूट गए अब मैं बेड पर लेट गई थी और वह भी लेट कर मेरी दोनों चूचियों को पीने लगे.

अब वह मेरी पेट को चूमने लगे और मेरी साड़ी को भी खोलने लगे हमें उनकी मदद करी अपनी साड़ी और पेटिकोट उतारते में आज मैं पूरी नंगी हो गई उनके सामने। मैं उन दोनों को भी अपने कपड़े उतारने को बोली तो वह दोनों भी अपने सारे कपड़े उतार दिया अब मैं बोली कि मेरा पेट दर्द कर रहा है तेल लगा दो तो बहुत दोनों मेरी पीठ पर तेल लगाने लगे.

रवि मेरी टांगों से लेकर मेरी गांड तक तेल लगा रहा था और राजू मेरे कंधे से लेकर हाथों को होते हुए मेरी कमर तक तेल लगा रहा था। मेरी गांड को रवि जोर जोर से चूतड़ों को दबा रहा था मुझे काफी अच्छा लग रहा था अब मैं पलट गई और वह मेरे सीने से होते हुए मेरी चूचियों पर तेल लगाने लगा और राजू मेरी जांघों से लेकर मेरे पैरों तक तेल लगाने लगा. “Desi Family Chudai Stories”

अब दोनों धीरे-धीरे मेरी दूर पर और पेट पर तेल लगाने लगे और मेरे पूरे शरीर को जैसे तेल से नहला कर चिकन कर दिया था लालटेन की रोशनी में मेरा पूरा शरीर चमक रहा था। वह दोनों आज भी पहले की तरह अपनी एक-एक उंगली मेरी बुर में डाल दिए मेरी संस्कारी निकलने लगी मैं रंजू के लंड को पकड़ लिया और उससे मैं थोड़ा तेल लगा दी और रवि के लंड को भी पकड़ कर उसमें तेल लगा दी।

मैं राजू को बोली कि मेरे ऊपर आ जाओ तो राजू मेरे ऊपर लेट गय मैं उससे बोली कि अपना भर अपने हाथ पर लोड हो रहा और उसके लंड को अपनी बुर पर गिसाने लगी मैंने अपनी टांगे पसार रखी थी और उन्हें फैला दी थी राजू मेरी तनु के बीच लेता था और अपना लंड मेरी बुर र पर का हुए था मैं उसकी कमर को पकड़ कर नीचे धोखा दे तो मेरी बुर में उसका आधा लंड घुस गया मेरी सिसकारी निकल गई और राजू भी करने लगा.

कुछ देर में मुझे अच्छा लगने लगा तो मैं उसकी कमर को और नीचे करें और पूरा लंड मेरी बुर में समा गया रवि मेरे चेहरे को देख रहा था मैं उसे अपने होंठ चूसने को बोली तो वह मेरे होठों को चूसने लग और एक हाथ से मेरी गोल गोल चूचियों को सहलाने लगा। राजू अब मेरे ऊपर पूरा लेता था और उसे भी आईडिया हो गया था कि क्या करना है तो वह धीरे-धीरे अपनी कमर उठाकर मेरी चुदाई करने लगा. “Desi Family Chudai Stories”

और कुछ 5 मिनट बाद मैं घर गई और मेरी बुर की गर्मी को वह भी बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसका शरीर कांपने लगा तो मैं समझ गई कि यह भी झरने वाला है मैं जल्दी से उसे अपने ऊपर से हटा द उसने पिचकारी मेरे हाथों में करने शुरू कर दी जिससे मैं उसके कच्चे से साफ कर दी उसके कच्चे से मैं अपनी बर को भी साफ करी और वह अब मेरे बगल में लेट गया.

और रवि को मैं अपने ऊपर आने बोली अभी मेरे ऊपर आकर मेरे होठों को चूसने लगा और फिर मेरी चूचियों को चूसने लगा उसका लंड मेरी बर पर ठोकर मार रहा था जिससे उसमें धीरे-धीरे कर मेरी बुर में डालना शुरू किया और मैं जीत चुदाई करने लगा मैं तुरंत ही धर्म गई और फिर दोबारा भेज हार गए तो वह भी झरने वाला था तो मैं उसका भी लंड निकाल दे और उसके कच्चे में उसके रस को कैद कर ली और अपनी बूर को साफ कर दी।

मैं उसे रात नंगी ही उन दोनों के साथ लिपटकर सो गई। मेरी नींद कब खुली जब डोली दरवाजा खटखटा रही थी मैं उठी तो हम तीनों अभी भी पूरे नंगे थे दोनों मेरी चूचियों पर अपना हाथ रखे हुए थे और एक टांग मेरी टांगों पर चढ़ा रखा था। मैं जल्दी से उठी और अपने कपड़े पहनी और उन दोनों को बेडशीट से ढक कर बाहर आ गए डोली के साथ शौच जाने के लिए। कुछ दिनों बाद रवि चला गया.

और अब सिर्फ मैं और राजू है एंजॉय करते थे वह मेरे सारे काम करता हूं हर रात को मेरे पैर दबाता मेरी गांड को भी वह दबाता मेरी कमर को भी दबाता। और बदले में 10 दिन 12 दिन पर मैं उसका मुठ मार देती थी और उसे दिन वह मेरी बुर में अपनी उंगलियां डल कर मुझे ठंडा करता था और महीने में एक बार में उसका लंड अपनी बुर में लेती थी। “Desi Family Chudai Stories”

अब ऐसे ही समय बीत गया और कुछ महीने बाद डोली का एग्जाम भी खत्म हो गया मैट्रिक का तो वह अब मेरे कमरे में सोने लगी थी और राजू अब अपनी दादी के साथ सोता था हम दोनों का अब मन नहीं लगने लगा था। अब मेरे भाई की शादी थी जिसमें मेरे पति नहीं आ सके थे और शादी में मैं और डाली मेरे मायके गई हुई थी। वहां पर एक सुबह जब मैं और डोली सोच के लिए गई थी तो मैं अच्छी की डोली की बोर पर काफी सारे बाल हैं.

मैं पहली बार सोच के लिए उसके इतने नजदीक बैठी थी तेज लालटेन की रोशनी में। मैं उससे बोली कि तुम साफ नहीं करती हो नीचे के बल क्या तो डॉली बोली की आंटी कट जाएगा इसके डर से नहीं करती हूं तो मैं उससे बोली कि घर चलना मैं कर दूंगी। शाम को बारात विदा हो गई तो डोमकच का खेल चल रहा था। इस बार भी सारी भाभियों ने मेरी दोनों चूचियों को खूब मसाला और उन्हें चूस भी और मैं उनसे खुद को छुड़ा लिए इस बार तो मेरा दूध भी पीने लगी थी. “Desi Family Chudai Stories”

वह अब एक चाचा को मेरी बुआ ने उंगली कर करके उसका पानी निकाल दिया और एक भाभी की बुर में भी मेरी बहनों ने उंगली कर कर उनका पानी निकाल दिया और सारे महिलाएं ऊपर से नंगी हो गई थी सब की बड़ी-बड़ी चचियां दिख रही थी मैं अब चुपके से निकाल कर कमरे की ओर बढ़ी तो देखी कि सीडीओ के पास से मेरी तीन छोटी-छोटी चचेरी बहनें जो थी बूंद डोमकत देख रही थी और डोली भी उनके साथ देख रही थी.

मैं उन्हें डांट लगाई और कमरे में चलने बोली वह सभी है मेरे साथ कमरे में आ गई मैं अपने बच्चों को सुला दिए झूले में और खुद भी पेट परलेट गई। मेरी एक बहन बोली की अभी भी सब में बेस्ट च नैना दीदी की है तो डाली ने भी कहा कि हां आंटी की चूची सबसे बढ़िया है। मेरी एक बहन ने कहा कि है दीदी मेरी भाभी को नीचे उंगली कर रही थी तो थोड़ी देर बाद भाभी ने पानी निकला था नीचे से लगता है उनको सूसू आ गया होगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मेरी एक बहन ने डोली से पूछा की डोली क्या तुमने कभी नीचे उंगली करी है तो डोली ने कहा नहीं तो फिर उसने कहा मैं करूं क्या नीचे उगली तभी मैं उठकर उनको दांती और बोली की कोई उंगली उंगली नहीं करेगा दो-दो थप्पड़ नहीं तो लगाऊंगी तुम लोगों को वह फिर चुपचाप सोने का नाटक करने लगी। वहां पर फिर और कुछ नहीं हुआ और एक-दो दिन बाद में अपने ससुराल चली आई.

क्योंकि अब मुझे मायके में उतना मन नहीं लगता था ससुराल में ही जन मन लगता था क्योंकि यहां राजू भी था कम से कम चुप-चुप कर ही सही वह मेरी बुर में कभी-कभी उंगली कर देता था भले ही इतना टाइम ना मिले की पानी निकल सके पर कभी-कभी चुप मैं उसे अपनी बुर में तीन उंगलियां डलवा लेती थी जिससे थोड़ी मुझे राहत मिल जाती थी और उसके भी लंड को मैं कभी-कभी से मौका देखकर हिला देती थी.

कभी-कभी उसके लंड\ को हिलाते हुए लेट पकड़े जाते-जाते बची हूं। कभी मौका देख कर वो मेरी चूचियों को मसलने लगता था मैं भी मजे से उसे अपनी चूचियां मसलने देती थी। जब ससुराल में वापस अपने आ गई और अब मैं अपने कमरे में बच्चे और डोली के साथ सोई थी मेरे दिमाग से निकल ही गया था कि मैं डोली से कहा था कि उसके बालों को नीचे साफ कर दूंगी तो एक रात जब सोने आए तो डोली नीचे अपनी बूर को बार-बार खुजला रहे थे.

मैंने उससे पूछा तो उसने कहा खुजली हो रही है आंटी तो मैंने उसे कहा कि ठीक है कल जरूर से याद दिला देना मैं देखूंगी कल साफ कर दूंगी। अगले दिन सारा काम खत्म कर डोली मुझे याद दिलाए तो मैं उसे एक कच्ची कमरे में ले गए और उसे सलवार उतारने बोली उसने सलवार उतार दी और मैं उसकी पैंटी भी उतार दी मैं उसे खाट पर बिठा दिया और उसकी टांगों को फैला दी,

मैं देखी कि उसके बाल बड़े-बड़े थे और कुछ दाने-दाने से भी हो गए थे खुजली के कारण मैं पहले उसे पर सेविंग क्रीम लगाई और अपने रेजर से धीरे-धीरे उसके बालों को साफ करने लगी जब मैं उसकी नाजुक दूर को छू रहे थे तो वह अपनी आंखें बंद कर रही थी उसे मजा आ रहा था। मैं देखी कि उसकी बुर पर हल्के हल्के लाल लाल लाइन हुई है और कहीं-कहीं दाने भी हो रखे हैं. “Desi Family Chudai Stories”

कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : सेक्सी किताबे पढ़ कर भाई साथ संभोग की

तो मैं क्रीम लाई और उसकी बूर पर लगाने लगे उसने अपनी आंखें बंद कर ली मैं उसकी बुर की दरारों के बीच उंगलियां फिर आई तो उसने कहा आंटी आह कुछ हो रहा है फिर मैं उसे कहीं ठीक है जो हमेशा ही साफ कर लेना और एक क्रीम को इससे लागत रहोगी तो दाने खत्म हो जाएंगे। अप रात को मैं और डोली सोने के लिए कमरे में आई तो दो ली पूछे कि आंटी आपकी चूचियां इतनी अच्छी क्यों है मेरी आपके जैसी कैसे होगी।

मैं उससे बोली कि तुम्हें कैसे पता कि मेरी चूची अच्छी है तो उसने कहां की है मैं भूतों की अच्छी है पर आपके जैसे सुंदर किसी की नहीं है फिर उसने कहा के चाचि क्या आप दिखाओगे एक बार अच्छे से। मैं अपने बच्चों को दूध पिला ही रही थी अपनी एक चूची निकाल कर तो अपने ब्लाउस को खोल दिया और दूसरी चूची भी निकल गए जिसे देखकर डोली की आंखें बड़ी-बड़ी हो गई. “Desi Family Chudai Stories”

औरउसने कहां आटी इतनी अच्छी चूची कैसे हैं आपकी उसने मेरी चूची को छू दिया और हल्के से दवा दिया जिससे दूध निकलने लगा और वह बोली कि यह तो काफी करत है आंटी। मैं उसे बोली कि तुम्हारी कैसी है तो उसने कहा आंटी मेरी छोटी है अभी उसने अपनी कमीज को तोड़ दिया और स्टार ब्रा को ऊपर उठकर अपनी अमरुद जैसे चुचियों को मुझे दिखाई मैं उसकी नाजुक चूचियों को छूकर देख.

वह फिर बोली की चाची आपकी जैसी चोचिया मेरी कैसी होगी। तो मैं बोली की हो जाएगी डेली मालिश करो हल्के हल्के हाथों से अपने। थोड़ी देर वैसे ही डोली रही फिर उसे पता नहीं क्या हो गया और मेरे बगल में बैठ गई और मेरे गालों पर किस कर दी वह धीरे-धीरे मेरी होठों की ओर बढ़ने लगी और मेरी चूची को भी पीने लगी मैं उसे रोक तो वह बोली चाचि मुझे पीने दो ना दूध मैं बहुत कम दूध पी हूं बचपन में।

धीरे-धीरे मैं और डॉली भी अच्छी सहेलियां बन गई और अब धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी और मुझे अपनी चूचियों की मसाज करवाने लगे थे तो उसकी चूचियां भी बड़ी होने लगी थी। अब तो मैं उसे अपनी बुर में तीन उंगली डलवाने लगी थी और उसकी बुर को हल्के हल्के रगड़ कर उसे मजा देने लगी थी। कुछ समय बद मेरे पति आ गए और फिर उन्होंने मेरी खूब चुदाई करनी शुरू कर दी.

और मेरी दीदी का बेबी हुआ था तो उसे मौके पर मुझे वह मेरी दीदी के यहां भी लेकर गए जहां पर फिर से मेरे जीजा और मेरे पति ने बदलकर मेरी चुदाई करी और इस बार मेरे जीजा के भाई की शादी भी हो चुकी थी तो उसकी भी पत्नी थी घर में तो उसके साथ भी मिलकर मेरे पति ने मेरी और जीजा के भाई की पत्नी की चुदाई करी जीजा के भाई के साथ मिलकर जीसमें जीजा और दीदी शामिल नहीं हए थे। “Desi Family Chudai Stories”

दिल्ली जाने से पहले मेरे पति ने मुझे चोद चोद कर प्रेग्नेंट कर दिया और कुछ महीने बाद मेरी एक बेटी हुई। मेरी बेटी को जन्म हुए 8 10 महीने हो गए थे तो मैं अपने बच्चों के साथ दीदी के यहां गई थी कुछ फंक्शन था उनके यह तो। जीजा के भाई ने तो मुझे छोड़ ही रखा था मेरे पति के साथ अपनी पत्नी की अदला-बदली करके मेरा जीजा भ अपने मनचले भाई की बीवी को छोड़ना चाहता था.

तो उसने मुझसे कहा और इस बार जीजा के मनचले भाई ने मुझे छोड़ा और इस पलंग पर जीजा ने अपने भाई की बीवी को चोदा। मैं दीदी के यहां तीन दिन रही जिसमें दो रात तक बदल बदल कर उन दोनों ने चुदाई करी। जीजा का छोटे भाई की भी शादी ठीक हो गई थी तो वह मेरे ससुराल अपनी शादी का कार्ड देने आया हुआ था तो उसने मुझे धीरे से कहा कि उसे पता है कि मैं अपने जीजा और उसके भाई के साथ पत्नियों की अदल बदल कर चुदाई करती हो.

वह भी मुझे चोदना चाहता था तो मैं भी उसे बोल दी की है मुझे चोदने के ऐवज में अपनी बीवी को मेरे पति से चुदाना पड़ेगा मेरे पति है सब में बहुत क्लियर रहते हैं तो उसने कहा कि आपको चोदने के लिए तो मैं किसी को भी चूदा दूं। अब मैं शादी में गई तो शादी से दो रात पहले उसने मुझे छोड़ा और मैं उसके मनचले भाई की बीवी को भी छत पर लेकर गई जिससे भी उसने पहली बार चोदा। “Desi Family Chudai Stories”

कुछ महीने बाद मेरे पति आए तो उन्होंने मेरे जीजा की छोटे भाई की बीवी को छोड़कर हिसाब बराबर किया। तो दोस्तों उसके बाद मैं भी अपने बच्चों के साथ अपने पति के साथ रहने के लिए दिल्ली आ गई थी दिल्ली में यहां हमारा अपना कोई नहीं था तो यहां पर मैं कुछ नहीं करी क्योंकि मेरे पति ही मुझे रोज चोद कर मुझे खुश किया रहते थे तो यहां पर मैं सिर्फ सिंगल मैन वाइफ बनी हुई थी। कहानी पूरी पढ़ने के लिए धन्यवाद दोस्तों उम्मीद है आपको कहानी अच्छी लगी होगी आप अपने राय में कमेंट कर सकते हैं। anjalisingh100198@gmail.com

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