Chudasi Bahu Sex Kahani
मैं समीक्षा, 23 साल की शादीशुदा औरत हूँ, पर सच कहूँ तो अभी भी लगभग कुँवारी-सी हूँ। मेरी शादी को दो साल हो गए, पर कोई बच्चा नहीं हुआ। जल्दबाजी में मैंने लव मैरिज की थी, प्यार में पागल होकर। लड़कियों को चाहिए कि पहले अपने होने वाले पति की जिस्मानी ताकत चेक कर लें, वरना फंस जाती हैं। मेरा पति देखने में तो गोरा, लंबा, चौड़ा, एकदम हीरो जैसा है, पर उसका लंड खड़ा ही नहीं होता। Chudasi Bahu Sex Kahani
और अगर कभी खड़ा हो भी जाए, तो दो मिनट में खल्लास होकर वो सो जाता है। मैं अपनी टाँगें फैलाकर, चूत गीली करके इंतज़ार करती रहती हूँ, पर वो मुझे कभी खुश नहीं कर पाया। मेरी चूत इतनी टाइट है, जैसे बमुश्किल छुई हो। अकेले में मैं अपनी चूचियों को मसलती हूँ, चूत में उंगली डालकर हवस शांत करने की कोशिश करती हूँ, पर वो आग कभी ठंडी नहीं होती।
हमारा घर गांव में है, छोटा-सा, जहाँ रात को सन्नाटा पसर जाता है। लकड़ी की खिड़कियों से ठंडी हवा और चांदनी की हल्की रोशनी आती है, जो पुरानी लकड़ी की चौखट पर पड़कर कमरे को रहस्यमयी बनाती है। उस रात मेरे पति के मामा जी घर आए थे। वो दिल्ली में रहते हैं, मेरी सास से उम्र में छोटे, जवान, मर्दाना, और हॉट। उनकी चौड़ी छाती, गहरी आँखें, और भारी आवाज़ किसी का भी दिल धड़का दे।
शाम चार बजे वो आए, और रात रुकने का प्लान था। लेकिन तभी पड़ोस में एक हादसा हो गया, पड़ोस के रामू काका का एक्सीडेंट। मेरी सास और पति को दूसरे शहर के हॉस्पिटल जाना पड़ा, काफ़ी दूर। पति गाड़ी चलाकर गए, और सास साथ थी।
जाते-जाते सास ने मामा जी से कहा, “मैं जा रही हूँ, कोशिश करूँगी रात तक लौट आऊँ। अगर न आ सकी, तो कल सुबह तक आ जाऊँगी। आपको एक दिन और रुकना पड़ सकता है। हम भाई-बहन की बात भी नहीं हो पाई, पर ऊपर वाले ने ये सब कर दिया।”
घर में अब सिर्फ़ मैं और मामा जी थे। रात के नौ बज चुके थे। हमने खाना खाया, और ड्राइंग रूम में पुराने चमड़े के सोफे पर बैठकर बातें करने लगे। चांदनी की रोशनी मामा जी के चेहरे पर पड़ रही थी, उनकी आँखों में एक चमक थी, जो मेरे जिस्म में आग लगा रही थी। कमरे में एक पुराना पंखा धीरे-धीरे चल रहा था, और उसकी आवाज़ सन्नाटे में गूँज रही थी।
करीब एक घंटे तक इधर-उधर की बातें हुईं, फिर मामा जी ने गंभीर होकर पूछा, “कैसी हो समीक्षा? सब कुछ ठीक चल रहा है ना? कोई दिक्कत तो नहीं है?” उनकी नज़रें मेरे जिस्म पर थीं- मेरी हल्की गुलाबी साड़ी के नीचे मेरी भरी-भरी चूचियाँ और पतली कमर को वो जैसे अपनी आँखों से चोद रहे थे। मैंने सोचा, मौका है, अपनी भड़ास निकाल दूँ। मैंने कहा, “मामा जी, जैसा मैंने सोचा था, वैसा पति मुझे नहीं मिला।”
मामा जी ने भौंहें चढ़ाकर पूछा, “क्या बात है? ऐसा क्या हो गया जो तुमको पसंद नहीं है मेरा भांजा?”
मैंने साफ़ कहा, “मामा जी, वो शरीर से तो अच्छे हैं, मोटे-ताजे, पर जो ताकत एक मर्द में होनी चाहिए, वो उनमें नहीं है।”
मामा जी ने गहरी साँस ली, “क्या मतलब तुम्हारा? क्या बोलने की कोशिश कर रही हो?”
मैंने शर्म छोड़कर कहा, “मामा जी, आज तक वो मुझे बिस्तर पे खुश नहीं कर पाए हैं।”
मामा जी की आँखें चौड़ी हो गईं, “ये मैं क्या सुन रहा हूँ, समीक्षा? ये तो बहुत गलत बात है! तुमने डॉक्टर को दिखाया?”
मैंने जवाब दिया, “कई हकीमों, डॉक्टरों को दिखा चुके हैं। दवाइयाँ देते हैं, कहते हैं कि कुछ दिन में ठीक हो जाएगा, पर आज तक कुछ ठीक नहीं हुआ।”
मामा जी ने और गहराई से पूछा, “तुम मुझे पूरी बात बताओ, होता क्या है?”
मैंने खुलकर कहा, “जब वो मेरे साथ सोने आते हैं, उनका लंड खड़ा तो होता है, पर दो-तीन मिनट में गिर जाता है। फिर वो चुपचाप सो जाते हैं।”
मामा जी का चेहरा गंभीर हो गया। बोले, “ये तो बहुत दुख की बात है। एक जवान औरत, जिसने लव मैरिज की, अपने माँ-बाप के खिलाफ जाकर, और ससुराल में उसका पति नामर्द निकले? मैं तुम्हारे दुख को समझ सकता हूँ, समीक्षा।”
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वो मेरे करीब आए, मेरे कंधे पर हाथ रखा, और धीरे-धीरे सहलाने लगे। उनकी उंगलियाँ मेरे गाल तक पहुँचीं, और उनकी नज़रें मेरी चूचियों पर टिक गईं, जो मेरे तंग ब्लाउज़ में उभरी हुई थीं। मैंने उनकी आँखों में देखा- वो लाल थीं, हवस से भरी। उनके पजामे में उनका लंड खड़ा था, जो साफ़ दिख रहा था।
मेरे दिल में जंग छिड़ गई- रिश्ता बचाऊँ या अपनी चूत की आग बुझाऊँ? पर मेरी हवस जीत गई। मैंने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया, और सोफे की ठंडी चमड़े की सतह पर पीठ टिका दी। मेरी गोरी, भरी-भरी चूचियाँ मेरे ब्लाउज़ में कसी हुई थीं। मामा जी की साँसें तेज़ हो गईं।
वो खुद को रोक नहीं पाए और मेरी चूचियों पर हाथ रखकर ज़ोर से दबाने लगे, जैसे कोई भूखा शेर। मैं सिसकियाँ लेने लगी, मेरा जिस्म जलने लगा। उन्होंने मेरे ब्लाउज़ के बटन खोले, ब्रा को फाड़कर उतारा, और मेरी नंगी चूचियाँ देखकर पागल हो गए। मेरे गुलाबी निप्पल सख्त थे, और वो उन्हें अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी, और मैं चिल्ला रही थी, “आह, मामा जी, और चूसो!” उन्होंने मुझे सोफे से उठाकर बेडरूम में ले गए, पुराने लकड़ी के बेड पर लिटाया, जो हर हलचल में चरमराता था। मेरे होंठों को चूमते हुए, उन्होंने अपनी उंगली मेरी साड़ी के नीचे मेरी चूत में डाल दी।
मेरी चूत इतनी टाइट थी कि उनकी उंगली मुश्किल से अंदर गई, पर वो गीली थी, रस से भरी। वो उंगली को अंदर-बाहर करने लगे, और हर बार मेरी चूत का पानी चाट लेते। उनकी जीभ मेरे रस को चख रही थी, और मैं सिसकियों में डूब रही थी। मैंने अपनी टाँगें और फैलाईं, और बेड की चादर को मुट्ठी में जकड़ते हुए कहा, “मामा जी, मेरी चूत चाटो, मुझे तड़पाओ मत!”
वो मेरी चूत पर झुक गए, उनकी गर्म जीभ मेरे चूत के दाने को चाटने लगी। मेरी चूत इतनी संवेदनशील थी कि हर चाट में मैं काँप उठती थी। मैं बार-बार पानी छोड़ रही थी, और वो मेरे रस को अपनी जीभ से साफ़ कर रहे थे। उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी, और मैं उनके सिर को अपनी चूत में दबा रही थी।
बेड चरमर-चरमर कर रहा था, और कमरे में हमारी सिसकियों की आवाज़ गूँज रही थी। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने चिल्लाया, “मामा जी, अब अपना लंड निकालो, मेरी चूत फाड़ दो!” उन्होंने अपना पजामा उतारा, और उनका मोटा, 9 इंच का लंड मेरे सामने था, जैसे कोई लोहे का डंडा।
मैंने उसे अपने हाथों में लिया, उसकी गर्मी महसूस की, और अपने मुँह में डाल लिया। मैं उनके लंड को चूस रही थी, जैसे कोई भूखी औरत। उनकी सिसकियाँ मेरे कानों में गूँज रही थीं। मैंने उनके लंड को 25 मिनट तक चूसा, जीभ से चाटा, होंठों से रगड़ा, और उनके टट्टों को सहलाया। मेरी चूत अब आग में जल रही थी।
मामा जी ने मुझे बेड पर लिटाया, मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं, और अपने मोटे लंड को मेरी चूत के छेद पर रगड़ा। बोले, “समीक्षा, तेरी चूत इतनी टाइट है, आज मैं इसे फाड़ दूँगा।” उन्होंने मेरी चूचियों को मसलते हुए एक ज़ोरदार धक्का मारा, और उनका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।
मैं चीख पड़ी, “आह, मामा जी, धीरे, मेरी चूत फट जाएगी!” पर वो रुके नहीं। वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे, मेरी चूचियों को मसलते हुए, मेरे होंठों को चूसते हुए। बेड चरमर-चरमर कर रहा था, जैसे टूटने वाला हो। वो गालियाँ दे रहे थे, “साली, तेरी चूत कितनी रसीली है, इसे चोदने का मज़ा ही अलग है।”
मेरी चूत हर धक्के में काँप रही थी, दर्द और मज़ा दोनों मिल रहे थे। मैं नीचे से अपनी गांड उछाल रही थी, उनके लंड को और अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। मेरी चूत उनके लंड को निगल रही थी, और मैं हर धक्के के साथ सिसक रही थी। वो मेरे निप्पल को मुँह में लेकर चूस रहे थे, मेरी चूत का पानी उनके लंड पर चमक रहा था।
करीब 45 मिनट की चुदाई के बाद, उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया। मेरी गोरी, गोल गांड उनके सामने थी। मैंने बेड की चादर को मुट्ठी में जकड़ा, और वो मेरी गांड को चाटने लगे। उनकी जीभ मेरे गांड के छेद में घुसी, और मैं चीख पड़ी, “मामा जी, मेरी गांड मत चाटो, चूत चोदो!” पर वो रुके नहीं।
उन्होंने मेरी गांड के छेद पर अपना लंड रखा और धक्का मारा। दर्द से मेरी आँखों में आँसू आ गए, “मामा जी, नहीं, बहुत दुख रहा है!” मैंने चिल्लाकर कहा, “प्लीज़, आज मेरी चूत को चोदो, गांड को कल मार लेना।” वो मान गए, और फिर से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।
पीछे से वो मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे, और ज़ोर-ज़ोर से चोद रहे थे। मैं चीख रही थी, “हाँ, मामा जी, मेरी चूत फाड़ दो, मुझे रंडी बना दो!” उनकी हर गाली मेरी हवस को और भड़का रही थी। फिर वो बेड पर लेट गए, और मैं उनके ऊपर बैठ गई। मैंने उनका लंड पकड़ा, अपनी चूत में डाला, और ज़ोर-ज़ोर से उछलने लगी।
मेरी चूचियाँ हवा में उछल रही थीं, और मामा जी उन्हें पकड़कर मसल रहे थे। मेरे निप्पल उनके उंगलियों के बीच दब रहे थे, और मैं कामवासना में डूब चुकी थी। करीब दो घंटे की इस चुदाई के बाद, मामा जी ने अपना गर्म माल मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया। मेरी चूत उनके रस से भर गई थी।
जब उन्होंने लंड निकाला, तो मैंने उसे अपने मुँह में लिया और बाकी का माल चाट लिया। मेरे होंठ उनके लंड के रस से गीले थे। रात भर हमने एक-दूसरे को चोदा, कभी बेड पर, कभी फर्श पर, कभी दीवार के सहारे। मेरी चूत, जो पहले बमुश्किल छुई थी, अब उनके लंड से तृप्त हो चुकी थी।
अगले दिन सास और पति घर वापस आ गए थे, तो घर में कुछ करना मुमकिन नहीं था। हर कोने में कोई न कोई था, और नज़रें बचाना नामुमकिन। शाम को मामा जी ने मुझे फोन किया और कहा, “समीक्षा, जरा गांव के बाइक स्टैंड तक चलो। तुम्हारी सास ने वहाँ हॉस्पिटल के लिए कुछ दवाइयाँ और सामान रखा था, ढूंढने में मदद कर दो।”
मैं समझ गई कि ये बहाना है, पर ये इतना नॉर्मल लग रहा था कि कोई शक नहीं करेगा। मैंने हल्की नीली साड़ी पहनी और चुपके से निकल गई। सूरज डूब चुका था, और घना अंधेरा छा रहा था। बाइक स्टैंड का बेसमेंट सुनसान था, चारों तरफ़ पुरानी बाइकें खड़ी थीं, जिन पर धूल जमी थी। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
एक मद्धम बल्ब जल रहा था, जो मुश्किल से रोशनी दे रहा था। ठंडी हवा मेरे जिस्म को छू रही थी, और मेरे दिल में डर के साथ-साथ हवस उबल रही थी। मामा जी वहाँ खड़े थे, उनकी आँखों में वही वासना थी। वो बोले, “समीक्षा, यहाँ कोई नहीं आएगा, आज तुझे खुले में चोदूँगा।”
मैं डर रही थी, पर मेरी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी साड़ी को कमर तक उठाया, मेरी ब्रा उतार दी, और मेरी चूचियाँ ठंडी हवा में खुली थीं। मामा जी ने अपना पजामा नीचे सरकाया, उनका 9 इंच का लंड खड़ा था, जैसे कोई हथियार। मैंने उसे देखकर सिसकारी भरी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वो मुझे एक पुरानी बाइक के पीछे ले गए, मेरी पीठ को ठंडी, गीली दीवार से टिकाया, और मेरी एक टाँग को बाइक की सीट पर रख दिया। मेरी साड़ी मेरी कमर पर लटक रही थी, और मेरी चूचियाँ मद्धम रोशनी में चमक रही थीं। उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ा, और मैं काँप उठी।
मैंने डरते हुए कहा, “मामा जी, कोई आ जाएगा!” पर मेरी आवाज़ में हवस थी। वो बोले, “साली, चुप रह, तेरी चूत का पानी मुझे पागल कर रहा है।” उन्होंने एक ज़ोरदार धक्का मारा, और उनका लंड मेरी टाइट चूत में घुस गया। मैं सिसक पड़ी, “आह, मामा जी, धीरे, मेरी चूत अभी भी नई-नई है!”
वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे, मेरी चूचियों को मसलते हुए, मेरे होंठों को चूसते हुए। बाइक हल्के-हल्के हिल रही थी, और हमारी सिसकियों की आवाज़ बेसमेंट में गूँज रही थी। ठंडी दीवार मेरी पीठ को चुभ रही थी, और वो जोखिम मेरी हवस को और भड़का रहा था। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
अचानक, बेसमेंट में एक बूढ़ा गार्ड, शायद 50-55 साल का, टॉर्च लेकर अंदर आ गया। उसने हमें देख लिया- मेरी चूचियाँ खुली थीं, साड़ी कमर पर अटकी थी, और मामा जी का लंड मेरी चूत में था। मैं डर से काँप गई, और फुसफुसाकर बोली, “मामा जी, अब क्या होगा?” गार्ड की आँखें चमक रही थीं, और वो बोला, “ये क्या कर रहे हो यहाँ?”
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मामा जी ने ठंडे दिमाग से उससे कहा, “चाचा, चुप रहो, और तुझे भी मज़ा देता हूँ।” उन्होंने अपनी जेब से एक कंडोम निकाला और गार्ड को थमा दिया। गार्ड ने हँसते हुए कंडोम लिया, और अपना पजामा खोला। उसका 7 इंच का लंड खड़ा था, और बूढ़ा होने के बावजूद वो तगड़ा लग रहा था।
मैं डर रही थी, पर मेरी चूत की हवस मुझे रोक नहीं पाई। मामा जी ने मुझे बाइक पर झुकाया, मेरी साड़ी को और ऊपर किया, और गार्ड को इशारा किया। गार्ड ने कंडोम पहना और मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। मैं चीख पड़ी, “आह, चाचा, धीरे!” पर वो रुका नहीं। उसने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए, मेरी चूचियों को पकड़कर मसलते हुए।
उसका लंड मेरी चूत को चीर रहा था, और मैं सिसक रही थी। वो बोला, “क्या मस्त माल है, साली!” उसकी चुदाई इतनी तगड़ी थी कि मैं पागल हो रही थी। करीब 20 मिनट तक उसने मुझे चोदा, और फिर अपना माल कंडोम में छोड़ दिया। मैं पसीने से तर थी, मेरी चूत थरथरा रही थी।
गार्ड ने कंडोम उतारा, हँसते हुए बोला, “दरवाजा बाहर से बंद कर रहा हूँ, जब निकलना होगा फोन कर लेना। एक टाइट रंडी को खूब रगड़ कर चोदो, इसका काम कम से कम 2-3 घंटे में होगा, ऐसे जल्दबाजी में नहीं।” वो हँसते हुए चला गया, और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मामा जी ने मुझे फिर से दीवार से टिकाया, और गुस्से में बोले, “मादरचोद, अब तेरी चूत मैं फाड़ूँगा, रंडी!” उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में ज़ोर से घुसाया, और मैं चीख पड़ी, “आह, मामा जी, मेरी चूत!” वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे, मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए, मेरे निप्पल को चूसते हुए।
वो चिल्ला रहे थे, “बहनचोद, तेरी चूत को आज चोद-चोदकर सूजा दूँगा, कुतिया! बेटीचोद, तुझे रंडी बनाकर ही छोडूंगा!” मैं भी चीख रही थी, “हाँ, मामा जी, मेरी चूत फाड़ दो, मादरचोद, मुझे अपनी रंडी बना दो!” बाइक हिल रही थी, और मेरी चूचियाँ मद्धम रोशनी में उछल रही थीं।
ठंडी दीवार मेरी पीठ को चुभ रही थी, और बंद दरवाजे की वजह से जोखिम और बढ़ गया था। वो मेरी चूत को रगड़-रगड़कर चोद रहे थे, मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे, और मेरे होंठों को चूस रहे थे। मैं उनकी हर गाली से और गीली हो रही थी। करीब दो घंटे तक उन्होंने मुझे बाइक के पीछे चोदा।
मेरी साड़ी मेरी कमर पर लटक रही थी, मेरी चूचियाँ खुली थीं, और मेरी चूत उनके लंड से भरी हुई थी। आखिरकार, उन्होंने अपना माल मेरी चूत में छोड़ दिया, और मैं पसीने और रस से तरबतर थी। हमने जल्दी से कपड़े ठीक किए, मामा जी ने गार्ड को फोन किया, और वो आकर दरवाजा खोल गया।
मैं घर लौट आई। उस रात के बाद, मामा जी की चुदाई ने मेरी हवस को एक नई आग दी थी। मैंने पहली बार जाना कि असली चुदाई का मज़ा क्या होता है। अगले दिन सुबह उठी मैं और किचन में चाय बनाने लगी। मामा जी की चुदाई का नशा मेरे जिस्म में बाकी था। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
उनकी मोटी लंड ने मेरी चूत को ऐसा मज़ा दिया था कि मैं हर वक्त उनकी चुदाई के ख्यालों में डूबी थी। चाय की केतली चढ़ाते वक्त मामा जी किचन में आए। वो मेरी सास के बड़े भाई हैं, जवान, मज़बूत, और हवस से भरे। उनकी नज़रें मेरी हल्की हरी साड़ी के नीचे मेरी चूचियों पर टिकी थीं।
मेरी फुद्दी तुरंत गीली हो गई। वो मेरे पास आए, मेरी कमर पर हाथ रखा, और बोले, “समीक्षा, आज फिर तेरी टकली चूत चोदनी है।” मैं सिहर गई, और फुसफुसाया, “मामा जी, सास जाग रही हैं!” तभी सास की खाँसी की आवाज़ आई, और मैंने उन्हें धक्का देकर दूर किया।
खाने की मेज़ पर, जब हम सब बैठे थे, मामा जी ने कहा, “बहन, मैं सोच रहा हूँ एक हफ्ता और रुक जाऊँ। दिल्ली में कुछ काम बाकी है, और तुम्हारे साथ वक्त बिताना अच्छा लग रहा है।” मेरी सास, उनकी छोटी बहन, खुश हो गईं, बोलीं, “अरे, ज़रूर रुक भैया। हमें और बात करने का मौका मिलेगा।”
मेरा पति भी मान गया, और मेरे मन में मामा जी की लंड की तस्वीरें घूमने लगीं। मैंने चुपके से उनकी तरफ देखा- वो मेरी साड़ी के नीचे मेरी जाँघों को घूर रहे थे। मेरी चूत रस छोड़ रही थी, और मैं उनके साथ अकेले होने के लिए बेताब थी। दो दिन बीत गए। मामा जी और मैं सिर्फ़ नज़रों से एक-दूसरे को तड़पा रहे थे।
तीसरे दिन सुबह, मामा जी ने सबके सामने कहा, “समीक्षा, मेरे साथ खेत तक चलो। बहन ने कहा था कि गन्ने की फसल देखनी है, और कुछ टूल्स भी लाने हैं। मुझे अकेले समझ नहीं आएगा।” सास ने तुरंत कहा, “हाँ, समीक्षा, जा। खेत का मुआयना कर ले, दोपहर तक लौट आना।”
मैं समझ गई कि ये बहाना है, और मेरी बुर ने फड़फड़ाना शुरू कर दिया। मैंने अपनी साड़ी ठीक की और मामा जी के साथ निकल पड़ी। मामा जी ने अपनी बाइक निकाली, और मैं उनके पीछे बैठ गई। खेत 10 किलोमीटर दूर था, और रास्ता गांव की कच्ची सड़कों से होकर जाता था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
धूप चमक रही थी, और हवा मेरी साड़ी को उड़ा रही थी। मैंने मामा जी की कमर पकड़ी, मेरी चूचियाँ उनकी पीठ से दब रही थीं। बाइक की कंपन मेरी फुद्दी को और गीली कर रही थी, और हर गड्ढे में मेरी जाँघें उनकी कमर से रगड़ रही थीं। मामा जी जानबूझकर बाइक धीरे चला रहे थे, जैसे मेरी चूत की आग को और भड़काना चाहते हों। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
उन्होंने कहा, “समीक्षा, तेरी चूचियाँ मेरी पीठ पर रगड़ रही हैं, साली रंडी। कितनी रसीली हैं, अभी इन्हें चूस लूँ?” मेरी चूत में आग लग गई। मैंने धीरे फुसफुसाया, “मामा जी, धीरे बोलो, कोई सुन लेगा। मेरी बुर पहले ही भीग रही है।” वो हँसे, “भीग रही है? बहनचोद, अभी तो मज़ा शुरू हुआ है। खेत में तेरी टकली चूत में मेरा लंड पेलूँगा, मेरी घोड़ी, इतना चोदूँगा कि तेरा चूत का रस टपकेगा।”
मैं सिहर गई, मेरे निप्पल सख्त हो गए। मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, चूत को टकली क्यों बोल रहे?” वो बोले, “क्यों? तेरी चिकनी चूत टकली सी चमकती है, इसीलिए। आज इसे चोदकर फाड़ दूँगा।” मैं शरम से लाल हो गई, पर मेरी फुद्दी और गीली हो गई। मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, ऐसी बातें मत करो, मेरी चूत की आग बेकाबू हो रही है।”
वो गंदा बोलने लगे, “बेकाबू? साली छिनाल, मैं तेरी बुर को जीभ से चाटूँगा, तेरा चूत का रस चूस लूँगा।” मेरी चूचियाँ उनकी पीठ पर और ज़ोर से रगड़ रही थीं, मेरी पैंटी मेरे रस से तर थी, और साड़ी मेरी जाँघों पर चिपक रही थी। वो और गंदे हुए, “मेरा लंड 9 इंच का है, लंड की गुलाम, तेरी फुद्दी को चीर देगा। तू उस रात मेरे लंड का माल कैसे चाट रही थी? आज फिर तुझे मेरे टट्टे चटवाऊँगा।”
मैं साँसें तेज़ कर रही थी, जाँघें आपस में दबाईं। मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, मेरी बुर को और मत तड़पाओ।” उनकी बातें और गंदी हो गईं, “तड़पाओ? साली कुत्तिया, मैं तेरी चूचियों को मसलूँगा, निप्पल को दाँतों से काटूँगा। फिर तेरी टकली चूत में लंड डालकर धक्के मारूँगा, तू सिसकियाँ लेगी।”
मेरी चूत में बिजली दौड़ गई। मैंने साड़ी को जाँघों के बीच दबाया, मेरा रस रिस रहा था। मैं सिसकाई, “मामा जी, मेरी फुद्दी जल रही है।” वो बोले, “जल रही है? मेरी घोड़ी, खेत में तुझे पेड़ से टिकाकर चोदूँगा, तेरा भोसड़ा बना दूँगा। मेरे लंड का माल तेरी चूत में डालूँगा।” मैं फुसफुसाई, “मामा, धीरे बोलो, मेरी बुर फट रही है!”
उनकी बातें सबसे गंदी हो गईं। वो बोले, “साली रंडी, मैं तेरी गांड का छेद चोदूँगा, तुझे घोड़ी बनाकर पेलूँगा। रास्ते में ही तुझे बाइक पर चोद दूँ, सब देखें कि तू मेरी लंड की गुलाम है।” फिर वो हँसते हुए मेरी नकल करने लगे, “ ‘मामा जी, और जोर से! मुझे चोद दो!’ वैसे ही चिल्ला रही थी ना उस रात, छिनाल? अब फिर चीखेगी।”
उनकी नकल ने मेरे जिस्म में आग और लगा दी। मैं पागल हो रही थी, मेरी फुद्दी बाइक की कंपन और उनकी बातों से फट रही थी। मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, बाइक तेज करो, मुझे अब चुदना है!” वो बोले, “तेज चलो? बहनचोद, अभी तुझे और तड़पाऊंगा।”
फिर वो बोले, “बाहू, शरम छोड़, पूरा मज़ा ले। जो पूछूँ, डिटेल में बता। मुझे भी पता है तुझे मज़ा चाहिए, और वो मैं ही दे सकता हूँ, सेफ्टी के साथ।” उनकी बात सुनकर मैं शरम से सिहर गई, पर मेरी चूत में रस बहने लगा। मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, धीरे… ठीक है, पूछो।”
मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : पापा के दोस्त के बेटे ने जोरदार चुदाई की मेरी
मेरी फुद्दी उनकी बातों से थरथराने लगी, और मैं धीरे-धीरे खुलने लगी। वो बोले, “तेरी टकली चूत को और कितना तड़पाऊँ, मेरी घोड़ी? बता, कभी खीरा-मूली डाली चूत में? तेरी सील पैक कैसी थी? तेरा पति तो नल्ला है।” मैं शरम से मर रही थी, पर मेरी बुर और गीली हो गई। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, नहीं… खीरा-मूली नहीं डाला। सील पैक… बस पहली रात थोड़ा दर्द हुआ था।” वो हँसे, “साली रंडी, तेरा पति नल्ला है, कुछ कर ही नहीं सकता।” मेरी चूत में आग लग गई, और मेरी साड़ी नीचे से रस से चिपकने लगी। फिर वो बोले, “पति के बारे में कुछ बता, छिनाल। वो तेरी चूत को कैसे सहलाता है?”
मैं उदास हो गई, और फुसफुसाया, “मामा जी, वो तो कुछ कर ही नहीं सकता। शादी के बाद बस एक-दो बार कोशिश की, पर ना मज़ा दे पाया, ना कुछ। उसका लंड तो खड़ा भी नहीं होता। मैं हर रात तड़पती थी, सोचती थी कोई मर्द आए जो मुझे औरत बनाए। वो मेरी चूत की आग को बुझाने की बात तो दूर, मुझे छूता भी नहीं।”
मेरी आँखें नम हो गईं, पर मेरी फुद्दी और रस छोड़ रही थी। वो बोले, “मेरी घोड़ी, चिंता मत कर, मैं तेरी सारी तड़प मिटा दूँगा।” वो बोले, “बता, लंड की गुलाम, तुझे कैसा मज़ा चाहिए? चूत में लंड लेना पसंद है, या गांड में धक्के खाना?” मैं शरम से काँप रही थी, पर अब खुल रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, मुझे चूत में लंड लेना अच्छा लगता है… जब धक्के ज़ोर-ज़ोर से लगते हैं, और मैं सिसकियाँ लेती हूँ।” मेरी साड़ी नीचे से पूरी तरह भीग चुकी थी, मेरा रस जाँघों तक बह रहा था। वो बोले, “कुत्तिया, तुझे चुदने का शौक है। बता, कभी ख्याल आया कि तेरा पति तुझे चुदते देखे, और कोई मर्द तेरी चूत फाड़े?”
मेरी फुद्दी में बिजली दौड़ गई। मैंने फुसफुसाया, “हाँ, मामा जी… मैंने ख्याल किया है। मैं सोचती हूँ कि मैं किसी मज़बूत मर्द के नीचे हूँ, उसका लंड मेरी चूत में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा है, और मेरा पति पास बैठा देख रहा है। वो देखता है कि मैं कैसे सिसकियाँ ले रही हूँ, कैसे उस मर्द का लंड मेरी चूत का रस निकाल रहा है। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मैं चिल्लाती हूँ, और वो बस देखता रहता है, कुछ कर नहीं पाता।” उनकी आँखें चमक उठीं। वो बोले, “साली रंडी, तू तो पूरी चुदक्कड़ है। खेत में तुझे ऐसा चोदूँगा कि तू सिसकियाँ लेगी।” वो बोले, “बता, मेरी घोड़ी, तुझे चूत चटवाना कैसा लगता है? जीभ से चूत का रस चूसने का मज़ा लिया कभी?”
मैं अब पूरी खुल चुकी थी, शरम गायब हो गई थी। मैंने फुसफुसाया, “मामा, मुझे चूत चटवाना बहुत खूबसूरत लगता है। मैं सोचती हूँ कि कोई मेरी चूत में जीभ डाले, मेरे रस को चाटे, मेरी फुद्दी को चूमे। मैं तड़पती हूँ, और वो मेरी चूत को और गीला करता है।” मेरी साड़ी नीचे से लथपथ थी, मैं बाइक की कंपन से पागल हो रही थी।
वो बोले, “छिनाल, तुझे हर तरह का मज़ा चाहिए। कभी सोचा कि तुझे दो मर्द एक साथ चोदें, एक चूत में, एक गांड में?” मैं सिहर गई, पर मेरी चूत ने और रस छोड़ा। मैंने फुसफुसाया, “नहीं, मामा जी, वो नहीं सोचा… बस एक मज़बूत लंड ही काफी है।” वो हँसे, “लंड की गुलाम, खेत में तुझे मेरे लंड का मज़ा दूँगा।”
मैंने उनकी कमर को ज़ोर से पकड़ा, मेरी चूचियाँ उनकी पीठ पर रगड़ रही थीं। मैंने फुसफुसाया, “मामा जी, प्लीज़, बाइक तेज करो! मेरी चूत की आग बर्दाश्त नहीं हो रही!” वो बोले, “बर्दाश्त नहीं? मेरी घोड़ी, खेत में तुझे चारों खाने चित करूँगा। तेरी टकली चूत को चोद-चोदकर भोसड़ा बना दूँ!”
मेरी साड़ी नीचे से पूरी तरह भीग चुकी थी, मेरा रस मेरी जाँघों पर बह रहा था। मैं फुसफुसाई, “मामा, तेज चलो, मैं पागल हो जाऊँगी!” रास्ता जैसे खत्म ही नहीं हो रहा था। धूप मेरे जिस्म को झुल्साना रही थी, और उनकी गंदी बातों ने मेरी चूत को आग की भट्टनी बना दिया। आखिरकार मुझे खेत दिखा, और मैं उनकी लंड के नीचे होने को तैयार थी, मेरी फुद्दी उनकी चुदाई के लिए तड़प रही थी। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
बाइक पर रास्ते में मामा जी की गंदी बातें सुनकर मेरी चूत इतनी गीली हो गई कि खेत पहुँचते-पहुँचते बाइक की सीट मेरे रस से लथपथ हो चुकी थी। मेरी हल्की हरी साड़ी, पेटीकोट, और पैंटी मेरे चूत के रस से चिपक गए थे। मेरी चूत में आग लगी थी, मेरी चूचियाँ साँसों के साथ उछल रही थीं, और साड़ी मेरी गीली जाँघों पर लिपट रही थी।
धूप मेरे जिस्म को चुभ रही थी, गन्नों की मिट्टी की सोंधी गंध मेरी नाक में भर रही थी, और मेरी चूत मामा जी के लंड के लिए पागल हो रही थी, जैसे कोई भूखी शेरनी अपनी माँग कर रही हो। गन्ने हवा में सरसरा रहे थे, उनकी पत्तियाँ मेरे जिस्म की सनसनी के साथ ताल मिला रही थीं। दूर-दूर तक कोई नहीं दिखता था।
मैंने सोचा कि चुदाई ट्यूबवेल रूम में होगी, इसलिए उस तरफ बढ़ी। मामा जी ने मेरी कलाई पकड़ ली, उनकी उंगलियाँ मेरी त्वचा में धंस रही थीं। वो बोले, “वहाँ कहाँ चलेगी, मेरी रंडी? यहाँ खुले खेत में तुझे चोदूँगा!” मैं डरते हुए बोली, “मामा जी, कोई देख लेगा!”
वो हँसे, उनकी आँखों में हवस की चमक थी, “अगर कोई आ भी गया, तो तेरी चूत को नया लंड मिलेगा, साली!” उनकी बातों ने मेरी चूत में और आग भड़का दी। मैं सिसकते हुए बोली, “मामा जी, मेरी चूत अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती, जल्दी मुझे चोदो!”
मामा जी बाइक के पास गए, एक पुराना झोला उतारा, और गन्नों के बीच चले। मैं पीछे-पीछे गई, मेरी साड़ी मेरी गीली जाँघों पर चिपक रही थी, जैसे दूसरी त्वचा बन गई हो। मेरी चोटी मेरी गोरी पीठ पर लटक रही थी, और मेरी साँसें इतनी तेज थीं कि मेरी चूचियाँ ब्लाउज़ में उछल रही थीं।
झोले में एक पुरानी, मोटी चादर थी, जिसे मामा जी ने गीली मिट्टी पर बिछा दी। गन्नों की पत्तियाँ हिल रही थीं, धूप मेरे जिस्म पर चमक रही थी, और मेरी चूचियाँ तंग ब्लाउज़ में सख्त निप्पल्स के साथ उभर रही थीं। मामा जी ने मेरी साड़ी का पल्लू खींचा, वो मेरी जाँघों से चिपककर मिट्टी पर गिर गया। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मैंने सिसकते हुए कहा, “मामा जी, धीरे करो, साड़ी फट जाएगी!” उन्होंने मेरे ब्लाउज़ के बटन फाड़ दिए, मेरी ब्रा को खींचकर उतार फेंका, और मेरी गोरी चूचियाँ धूप में चमक उठीं। मेरे गुलाबी निप्पल सख्त थे, जैसे पत्थर। उन्होंने मेरा पेटीकोट का नाड़ा खींचा, मेरी रस से तर पैंटी को फाड़कर उतार दिया।
वो बोले, “तेरी टकली चूत तो मस्त लग रही है, साली!” मेरी चूत में ठंडी सनसनी दौड़ गई। वो बोले, “बता, कैसी चूत है तेरी?” मैं सिसकते हुए बोली, “टकली है, मामा जी!” वो हँसे, “टकली क्यों बोलते हैं?” मैं शरमाते हुए बोली, “क्योंकि ये चिकनी और गीली है, मामा जी, सिर्फ़ तुम्हारे लिए!”
उनकी आँखें लाल हो गईं। मैं पूरी नंगी थी, मेरी चूत धूप में गीली चमक रही थी, और मेरी जाँघें काँप रही थीं। वो बोले, “साली, तेरी चूत का पानी तो नदी की तरह टपक रहा है!” मैंने कराहते हुए कहा, “मामा जी, ये सब तुम्हारे लंड के लिए बह रहा है!” उन्होंने मुझे चादर पर लिटा दिया, और मेरी चूचियों को ज़ोर से मसलने लगे। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उनकी उंगलियाँ मेरी त्वचा में धंस रही थीं, मेरी चूचियाँ गर्म हो रही थीं, और मेरे निप्पल सख्त होकर चुभने लगे। मैं सिसक पड़ी, “आह, मामा जी, मेरी चूचियाँ जल रही हैं, इन्हें चूसो!” उन्होंने मेरे निप्पल को मुँह में लिया, उनकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी, जैसे कोई भूखा शेर। मेरी चूचियाँ फूल रही थीं, और गर्मी मेरे सीने से मेरी चूत तक दौड़ रही थी।
मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मामा जी, और ज़ोर से चूसो, मेरे निप्पल को खा लो!” उनकी जीभ मेरे निप्पल को रगड़ रही थी, और जब उन्होंने दाँतों से हल्के से काटा, तो मेरे जिस्म में बिजली-सी दौड़ गई। मेरी चूत में गुदगुदी होने लगी, और मेरा रस मेरी जाँघों पर बहने लगा। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : भैया ने मोटे लंड से मेरी सील तोड़ डाली
मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा जी, मेरी चूत को छूओ, ये तुम्हारे लिए तड़प रही है!” वो मेरी जाँघें फैलाकर मेरी चूत पर झुके। उनकी गर्म साँसें मेरी चूत को छू रही थीं, जिससे मेरे जिस्म में सिहरन दौड़ रही थी। उन्होंने मेरी चूत के दाने को जीभ से चाटा, और मेरा जिस्म करंट से काँप उठा।
मैं चिल्लाई, “आह, मामा जी, मेरी चूत में आग लगी है, इसे बुझाओ!” उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर तक गई, मेरी चूत की दीवारें उनकी जीभ से रगड़ रही थीं। हर चाट के साथ मेरा रस और बह रहा था, उनकी जीभ पर चिपक रहा था। मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मामा जी, मेरे दाने को चूसो, मुझे पागल कर दो!”
उनकी जीभ मेरे दाने को रगड़ रही थी, और मैं अपनी गांड उछाल रही थी, उनके सिर को अपनी चूत में दबा रही थी। मेरी चूत की गहराई में गर्मी जमा हो रही थी, जैसे कोई ज्वालामुखी फटने वाला हो। मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा जी, मेरी चूत तुम्हारी है, इसे खा लो!”
हवस में डूबकर मैंने मामा जी को धकेल दिया, उनकी धोती खींचकर उतार दी। मेरी चूत इतनी गर्म थी कि मैं कुछ भी करने को तैयार थी। मैंने उन्हें चादर पर लिटाया, और उनकी गांड पर झुक गई। उनकी गांड के छेद को चाटा, उसकी खारी, पसीने की गंध मेरी नाक में भरी, और मेरी चूत में नई आग जाग उठी।
मेरी जीभ उनकी गांड में अंदर-बाहर हो रही थी, और मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मामा जी, तुम्हारी गांड चाटने में मज़ा आ रहा है!” वो सिसक पड़े, “साली, तू तो पक्की रंडी बन गई!” मेरा रस मेरी जाँघों पर बह रहा था, और मेरी हवस मुझे पागल कर रही थी। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
वो उठे, बोले, “मेरे लंड को चूस, कुतिया!” मैंने उनका 9 इंच का लंड अपने हाथों में लिया, उसकी गर्मी मेरी हथेलियों में चुभ रही थी। उसे मुँह में लिया, मेरी जीभ उसके टोपे को चाट रही थी, और लंड मेरे मुँह में धड़क रहा था। मैं कराहते हुए बोली, “आह्ह, मामा जी, तुम्हारा लंड कितना सख्त और मोटा है!”
मैंने उसे गले तक चूसा, मेरी जीभ उसकी नसों पर रगड़ रही थी। वो मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह में धक्के देने लगे, “छिनाल, और ज़ोर से चूस, साली!” मैंने उनके टट्टों को सहलाया, और मेरी चूत हर चूसने के साथ और गीली हो रही थी। मैंने उनके लंड पर थूक दिया, जिससे वो और चिकना हो गया।
मैं चिल्लाई, “उह्ह, मामा जी, इस लंड को मेरी चूत में डालो, अब और मत तड़पाओ!” उन्होंने मुझे चादर पर घुमा दिया, बोले, “घोड़ी बन जा, रंडी!” मैं घुटनों पर हो गई (डॉगी पोजीशन), मेरी गोरी गांड उनके सामने थी, और मेरी चूत धूप में गीली चमक रही थी। मेरा रस मेरी जाँघों पर बह रहा था।
मैंने अपनी चोटी अपने कंधे पर डाल दी, और मेरी चूत उनके लंड की भूखी थी। वो मेरे पीछे आए, मेरी गांड के छेद को चाटने लगे। उनकी जीभ मेरी गांड में गहरे तक गई, और मेरी चूत और रसीली हो गई। मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा जी, मेरी चूत चाटो, गांड को बाद में चखना!”
वो बोले, “साली, अभी तो मज़ा शुरू हुआ है!” उनकी जीभ मेरी चूत और गांड के बीच घूम रही थी, और मेरी चूत में गर्म लहरें दौड़ रही थीं। वो मेरे नीचे लेट गए, मेरी चूत उनके मुँह पर थी। उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरू किया, उनकी जीभ मेरे दाने को रगड़ रही थी, जिससे मेरा जिस्म गर्म लहरों में काँप रहा था। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मामा जी, मेरी चूत जल रही है, इसे ठंडा कर दो!” उनकी जीभ मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी, और मेरा रस उनके मुँह पर बह रहा था। मैं अपनी गांड उछाल रही थी, उनके सिर को अपनी चूत में दबा रही थी। मेरी जाँघें काँप रही थीं, और मेरी चूत में गर्मी जमा हो रही थी।
मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा जी, मेरी चूत फटने वाली है!” उन्होंने मेरे दाने को हल्के से काटा, और मेरा जिस्म तेज़ झटके से काँप उठा। मैं चिल्लाई, “मामा, मैं चली!” मेरा रस उनके मुँह में बह गया, और चादर गीली हो गई। वो उठे, बोले, “अब तेरी चुदाई होगी, साली, तेरी चूत को फाड़ दूँगा!”
मुझे चादर पर लिटा दिया, मेरी टाँगें उनके कंधों पर रख दीं (मिशनरी), और लंड मेरी चूत में ठूँस दिया। उनका मोटा लंड मेरी चूत की दीवारों को चीर रहा था, हर धक्के में दर्द और मज़ा एक साथ फैल रहा था। मैं चिल्लाई, “आह, मामा, धीरे करो, मेरी चूत फट जाएगी!” वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे, उनकी जाँघें मेरी गांड से टकरा रही थीं, और मेरी चूचियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं।
मेरे निप्पल सख्त होकर चुभ रहे थे, और मेरी चूत उनके लंड को निगल रही थी। मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मामा, मेरा पति तो नामर्द है, तुम मुझे चोदो!” वो बोले, “उस हरामी को भूल जा, साली, अब तू मेरी रंडी है!” उन्होंने मेरी चूचियों को मसला, मेरे निप्पल उनकी उंगलियों से गर्म हो गए। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा, मेरी चूत को फाड़ डालो!” करीब 15 मिनट बाद मेरी चूत सिकुड़ने लगी, गर्म लहर मेरे जिस्म में फैल गई, और मैं चिल्लाई, “मामा, मैं झड़ रही हूँ!” मेरा रस चादर पर फैल गया, और मेरी साँसें हाँफ रही थीं। अचानक मामा जी रुक गए, उनकी नज़रें गन्नों की तरफ गईं। मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
गन्नों के बीच से एक मज़दूर निकला, 30 साल का, लंबा, गठीला, काला, पसीने से भीगी बनियान और लुंगी में। उसके मसल्स धूप में चमक रहे थे, जैसे काला पत्थर। मामा जी मुस्कुराए, “अरे, इधर आ, देख क्या माल है!” मज़दूर ने मुझे नंगी देखा और हिचकिचाया, बोला, “नहीं साहब, ये गलत है, मेरी बीवी है।”
उसकी हिचक ने मेरी चूत में सनसनी जगा दी, जैसे कोई नया मज़ा इंतज़ार कर रहा हो। मामा जी हँसे, “अरे, डर मत, ये रंडी गज़ब का मज़ा देगी। बस डॉटेड कंडोम लगा ले!” उन्होंने झोले से एक डब्बा निकाला, जिसमें डॉटेड कंडोम था। मैंने सोचा, ये कंडोम तो खास है, इसकी सतह पर छोटी-छोटी बिंदियाँ होती हैं, जो चुदाई का मज़ा और बढ़ा देती हैं।
मज़दूर ने मना किया, “साहब, ये ठीक नहीं, मैं जाऊँ।” मामा बोले, “बीवी को कुछ नहीं पता चलेगा, इसकी चूत चख ले, साला!” मज़दूर की नज़र मेरी चूत पर टिकी थी, और उसकी हिचक टूटने लगी। आखिरकार, उसने कंडोम ले लिया। उसने लुंगी खोली, उसका 8 इंच का लंड तना हुआ था, काला, मोटा, जैसे कोई हथियार। डॉटेड कंडोम को पहनकर वो बोला, “कौन है ये रंडी, साहब? मस्त है!”
मामा जी हँसे, “मेरी खास रंडी, साला, इसकी चूत लंड को निगल लेती है!” मज़दूर ने मेरी चूत को देखा, बोला, “साहब, आपकी रंडी की चूत तो टाइट है, इसे चोदकर मज़ा आएगा!” उसने मेरी चूचियों को पकड़ा, उसकी खुरदरी हथेलियाँ मेरी चूचियों को मसल रही थीं। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मेरे निप्पल सख्त हो गए, और मैं सिसक पड़ी, “आह, मेरी चूचियाँ गर्म हो रही हैं!” उसने मेरी चूत पर हाथ फेरा, उसकी उंगलियाँ मेरे दाने को रगड़ रही थीं, जिससे मेरे जिस्म में बिजली दौड़ गई। मैं चिल्लाई, “उह्ह, मेरी चूत में आग लगी है, कुछ कर, साले!” उसने अपनी उंगली मेरी चूत में डाली, और मेरी चूत की दीवारें रगड़ने लगीं। मैं कराहते हुए बोली, “आह्ह, और गहरा डाल, हरामी!”
उसने मुझे चादर पर लिटा दिया, मेरी टाँगें फैला दीं (मिशनरी), और डॉटेड कंडोम वाला लंड मेरी चूत में ठूँस दिया। उसका लंड मेरी चूत को चीर रहा था, और कंडोम की बिंदियाँ मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रही थीं, हर धक्के में मज़ा दोगुना हो रहा था। मैं चिल्लाई, “आह, धीरे कर, साले, मेरी चूत फट जाएगी!”
वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा, बोला, “साली रंडी, तेरी चूत को भोसड़ा कर दूँगा!” फिर मामा जी से बोला, “साहब, आपकी रंडी की चूत तो लंड चूस रही है!” मामा जी हँसे, “हाँ, इसकी चूत को लंड की भूख है, पेल इसे!” मज़दूर ने मेरी चूचियों को मसला, “साली, तेरी चूचियाँ भी मस्त हैं, इन्हें निचोड़ दूँ!”
उसका लंड मेरी चूत की गहराई में जा रहा था, और मेरी चूचियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं। मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मेरा पति तो नामर्द है, तू मुझे चोद, साले!” वो बोला, “तेरा पति हरामी है, मैं तेरी चूत को फाड़ दूँगा, कुतिया!” मामा से हँसा, “साहब, ये रंडी तो पक्की चुदक्कड़ है!”
मेरी चूत उसके लंड को निगल रही थी, और मेरा रस कंडोम पर चिपक रहा था। करीब 15 मिनट बाद मेरी चूत सिकुड़ने लगी, गर्म लहर फैली, और मैं चिल्लाई, “आह्ह, मैं चली!” मेरा रस चादर पर फैल गया। मामा जी बोले, “अब तू दोनों से चुदेगी, साली!” उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया (डॉगी), मज़दूर मेरे पीछे आया, और मामा मेरे सामने।
मामा का लंड मेरी चूत में गया, और मज़दूर ने डॉटेड कंडोम के साथ लंड मेरी गांड में ठूँस दिया। डबल पेनेट्रेशन में मेरी चूत और गांड एक साथ भरे थे। मैं चिल्लाई, “आह, मेरी चूत और गांड फट रही हैं!” मज़दूर बोला, “साली, तेरी गांड टाइट है, इसे ढीली कर दूँगा!” मामा से बोला, “साहब, आपकी रंडी की गांड भी मस्त है!”
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मामा हँसे, “साला, इसकी दोनों छेदों को चोदकर भोसड़ा बना दे!” मैं कराहते हुई बोली, “उह्ह, मेरी चूत और गांड में आग लगी है, चोदो!” मज़दूर बोला, “साली, तेरी गांड को रगड़ दूँ, कुतिया!” मामा से बोला, “साहब, ये रंडी तो लंड की भूखी है!” मामा का लंड मेरी चूत को रगड़ रहा था, और मज़दूर का डॉटेड कंडोम मेरी गांड में चुभ रहा था, इसकी बिंदियाँ मेरी गांड में अलग सनसनी जगा रही थीं। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मेरी चूचियाँ लटक रही थीं, निप्पल सख्त थे। मैं चिल्लाई, “आह्ह, मेरा पति बेकार है, तुम दोनों मुझे चोद डालो!” करीब 20 मिनट बाद मेरी चूत और गांड सिकुड़ने लगीं, गर्म लहर फैली, और मैं चिल्लाई, “आह्ह, मैं चली!” मेरा रस चादर पर फैल गया। मामा जी ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, मेरी टाँगें उनकी कमर पर लपेट दीं (स्टैंडिंग), और लंड मेरी चूत में डाल दिया।
मेरा नंगा जिस्म धूप में चमक रहा था, मेरी चूचियाँ उनकी छाती से रगड़ रही थीं, और मेरे निप्पल उनके कुरते से चुभ रहे थे। उनका लंड मेरी चूत को चीर रहा था, हर धक्के में गर्मी मेरे जिस्म में भर रही थी। मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा, मेरी चूत जल रही है!” वो बोले, “उस नामर्द को भूल जा, साली!”
मेरा रस उनकी जाँघों पर बह रहा था। मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मामा, मैं टूट जाऊँगी!” वो बोले, “चुप रह, कुतिया!” तीसरी बार मेरी चूत सिकुड़ी, गर्मी फैली, और मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा, मैं मर गई!” मज़दूर बोला, “अब मेरी पसंदीदा पोजीशन में चुदेगी, साली!” उसने मुझे चादर पर लिटा दिया, मेरी टाँगें ऊपर उठाकर मेरे कंधों तक मोड़ दीं, मेरी गांड हवा में थी, और मेरी चूत पूरी खुली थी।
ये “मेढक पोजीशन” थी, जिसमें मैं पीठ के बल थी, टाँगें मेन्ढक की तरह मोड़ी थीं, मेरी चूत और गांड दोनों उसके लंड के लिए तैयार थे। वो मेरे ऊपर झुका, और डॉटेड कंडोम वाला लंड मेरी चूत में ठूँस दिया। लंड मेरी चूत की गहराई में जा रहा था, और कंडोम की बिंदियाँ मेरी चूत को रगड़ रही थीं, जिससे मज़ा और सनसनी दोगुनी हो रही थी।
मैं चिल्लाई, “आह, मेरी चूत फट रही है!” वो ज़ोर से धक्के मारने लगा, बोला, “साली रंडी, तेरी चूत को मेन्ढक बनाकर भोसड़ा कर दूँगा!” मामा से बोला, “साहब, आपकी रंडी की चूत इस पोजीशन में और टाइट है!” मामा हँसे, “पेल दे, साला!” मेरी चूचियाँ उछल रही थीं, निप्पल सख्त थे।
मैं चिल्लाई, “उह्ह, साले, और ज़ोर से चोद!” वो बोला, “तेरा पति कचरा है, मैं तेरी चूत फाड़ दूँगा!” करीब 20 मिनट बाद मेरी चूत सिकुड़ी, गर्म लहर फैली, और मैं चिल्लाई, “आह्ह, मैं चली!” मेरा रस चादर पर फैल गया। मामा जी ने मुझे गन्नों के बीच पुराने, खुरदरे पेड़ की टहनी पर टिका दिया (स्टैंडिंग अगेंस्ट ट्री)।
मेरा नंगा जिस्म धूप में चमक रहा था, मेरी चूचियाँ हवा में सख्त थीं, और मेरी चूत लाल और गर्म थी। उन्होंने मेरी एक टाँग अपनी कमर पर लपेट ली, और लंड मेरी चूत में ठूँस दिया। लंड मेरी चूत की दीवारों को खींच रहा था, और तेज़ दर्द मेरे जिस्म में फैल रहा था। “Chudasi Bahu Sex Kahani”
मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा, मेरी चूत अब और नहीं ले सकती!” वो बोले, “साली, अभी तो इसे और पेलना है!” वो ज़ोर से धक्के मारने लगे, मेरी चूचियों को मसलते हुए। मेरी चूचियाँ उनकी उंगलियों से गर्म हो रही थीं। पेड़ की खुरदरी छाल मेरी नंगी पीठ को चुभ रही थी, और मेरी पीठ पर खरोंचें पड़ रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मज़दूर पास आया, और मामा जी बोले, “भाई, इसकी चूत को फिर चोद, कंडोम मत हटाना!” मज़दूर ने मुझे पेड़ से हटाया, और चादर पर लिटा दिया (मिशनरी)। मेरी नंगी पीठ गीली मिट्टी से सन गई। उसने मेरी टाँगें फैला दीं, और डॉटेड कंडोम वाला लंड मेरी चूत में डाल दिया। लंड मेरी चूत को चीर रहा था, और कंडोम की बिंदियाँ रगड़ रही थीं, जिससे मेरी चूत में सनसनी और मज़ा दोनों बढ़ रहे थे।
मैं चिल्लाई, “आह, मेरी चूत फट रही है!” वो ज़ोर से धक्के मारने लगा, बोला, “साली रंडी, तेरी चूत को भोसड़ा कर दूँगा!” मामा से बोला, “साहब, आपकी रंडी की चूत अभी भी टाइट है!” मैं कराहते हुए बोली, “उह्ह, मेरा पति नामर्द है!” वो बोला, “तेरा पति कचरा है, मैं तेरी चूत फाड़ दूँगा!”
करीब 20 मिनट बाद मेरी चूत सिकुड़ी, गर्म लहर फैली, और मैं चिल्लाई, “आह्ह, मैं चली!” मेरा रस चादर पर फैल गया। करीब दो घंटे बाद, मामा जी ने अपना माल मेरी चूत में छोड़ दिया। उनका गर्म रस मेरी चूत में भर रहा था, और मेरी चूत सिकुड़ रही थी। मैं चिल्लाई, “आह्ह, मामा, मेरी चूत भर गई!”
उनका रस मेरी चूत से बह रहा था, और मैं चादर पर ढह गई। मज़दूर ने डॉटेड कंडोम में माल छोड़ा, और मेरी चूत लाल, थरथर काँप रही थी। मेरा नंगा जिस्म पसीने और रस से तर था, और गन्नों की हवा मेरी त्वचा को सहला रही थी। मामा जी मेरे पास लेट गए, मेरे बाल सहलाए।
मैं हाँफते हुए बोली, “मामा जी, तुमने और इस मज़दूर ने मेरी सारी तड़प मिटा दी। मेरा पति तो नामर्द है, तुम दोनों ने मुझे असली औरत का सुख दे दिया।” वो बोले, “समीक्षा, तू मेरी रंडी है।” मज़दूर हँसकर बोला, “साली, तेरी चूत को फिर मेन्ढा बनाकर चोदूँगा। साहब, आपकी रंडी तो कमाल है!” गन्नों की पत्तियाँ सरसरा रही थीं, चादर पर मेरा रस बिखरा था, और मिट्टी की सोंधी गंध मेरे रस की महक से मिल रही थी। मेरी चूत की आग बुझ चुकी थी, पर मामा जी और मज़दूर के लंड की चाहत मेरे मन में और भड़क रही थी।
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