Farm House Sex Party
मेरे पुरखों ने काफी संपत्ति छोड़ी थी, पापा की मृत्यु छह-सात साल पहले हो चुकी थी, अब सिर्फ मम्मी और उनके मैनेजर ही सारा कारोबार संभालते थे। मेरा फार्महाउस शहर से बीस-बाईस किलोमीटर दूर था, वो मेरी ऐशगाह था, वहाँ मैं दोस्तों के साथ खुलकर पार्टियाँ करता, दारू पीता, लड़कियाँ बुलाता। मम्मी कभी उस तरफ नहीं आती थीं। Farm House Sex Party
मैं कॉलेज में था, बस किसी तरह पास हो जाता था। मम्मी का घर में एक अलग हिस्सा था, जहाँ वो अपने खास लोगों के साथ बंद कमरों में काम करती थीं। एक सुबह कॉलेज जाने से पहले मुझे मम्मी से पाँच हजार रुपये चाहिए थे, मैं बिना बताए उनके हिस्से में चला गया। लगा कोई नहीं है, लेकिन अचानक हल्की-हल्की हँसी और सिसकारियाँ सुनाई दीं।
मैं चुपके से पिछले कमरे की खिड़की के पास पहुँचा, पर्दा थोड़ा खुला था। जो नजारा दिखा, मेरी साँस रुक गई। मम्मी पूरी नंगी खड़ी थीं, मौर्या जी आगे से उनकी चूत में लण्ड पेल रहे थे और श्रीवास्तव जी पीछे से मम्मी की गाण्ड मार रहे थे, दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे.
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मम्मी के मुँह से लगातार आवाजें निकल रही थीं, आह्ह्ह ओह्ह्ह ह्ह्हीईई आअह्ह्ह मम्मी दोनों लण्डों के बीच झूल रही थीं, उनके बड़े-बड़े दूध हिल रहे थे, वो खुद कमर उचका-उचकाकर चुदवा रही थीं, आनंद से उनकी आँखें बंद थीं। अचानक मम्मी की नजर मुझ पर पड़ी, मैं डर गया और भागकर अपने कमरे में लेट गया।
कुछ देर बाद मम्मी मेरे कमरे में आईं, उनके चेहरे पर घबराहट थी, “बेटा, जो तूने देखा, किसी को मत बताना, प्लीज।” मैं चुप रहा। मम्मी ने आँखों में आँसू भरकर कहा, “तेरे पापा जल्दी चले गए, मैं दूसरी शादी कर सकती थी पर नहीं की, फिर शरीर की भूख मुझसे रही नहीं गई, मौर्या जी और श्रीवास्तव जी मेरे हमराज बन गए, मुझे माफ कर दे।”
मैंने उनकी हालत समझ ली, उठकर उन्हें गले लगा लिया, “मम्मी, मुझे कोई शिकायत नहीं, आप जैसा चाहें वैसा करें, बस अब मैं आपको फोन करके ही आऊँगा।” मम्मी ने मुझे गाल पर किस किया, मेरा दिल हल्का हो गया। मैंने पैसे लिए और फार्महाउस पर दोस्तों के साथ पार्टी करने चला गया।
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शाम तक दारू-कबाब चले, फिर प्लान बना, कॉलेज की चार चालू लड़कियाँ – विद्या, दिव्या, मधु और मनीषा – को भांग पिलाकर फार्महाउस पर ले आएँगे और सब मिलकर चोदेंगे। मैंने मम्मी को अपनी योजना बताई, पहले तो उन्होंने बहुत डाँटा, लेकिन जब मैंने उनकी चुदाई की बात याद दिलाई तो वो मान गईं, बोलीं, “ठीक है, मैं भी आऊँगी, लड़कियाँ मेरे सामने आसानी से मान जाएँगी।”
सन्डे को सुबह-सुबह दोनों गाड़ियाँ लड़कियों को लेने गईं, मम्मी को देखकर किसी के माँ-बाप ने मना नहीं किया। फार्महाउस पहुँचते-पहुँचते एक बज गया। सबने मिलकर पकौड़े बनाए, कुछ पकौड़ों में भांग डाल दी गई। बाहर रिमझिम बारिश शुरू हो गई, मौसम एकदम सेक्सी हो गया।
विद्या और राहुल गायब हो गए, सब समझ गए टाँका भिड़ गया। दिव्या तिरछी निगाहों से अजित को देख रही थी। मधु नशे में लॉन में लेटकर हरी घास पर लोटने लगी, उसकी टाइट जीन्स गीली हो गई, उरोज उभरे हुए थे। मैं उसके पास गया, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी छाती से चिपका लिया, मैंने उसके भरे हुए मम्मे दबाए, वो सिहरकर हँस पड़ी, ओह्ह्ह हिमांशु।
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उसने मुझे दूसरी तरफ इशारा किया, झाड़ी के पीछे विद्या पूरी नंगी लेटी थी, राहुल उसकी टाँगें कंधे पर रखकर जोर-जोर से चोद रहा था, विद्या चिल्ला रही थी, आह्ह्ह ह्ह्हीईई और जोर से राहुल्ल्ल ओह्ह्ह फाड़ दो आज। पास ही दिव्या दीवार से सटकर खड़ी थी.
अजित ने उसकी स्कर्ट ऊपर की और खड़े-खड़े लण्ड अंदर-बाहर कर रहा था, दिव्या की आँखें बंद थीं, ओह्ह्ह अजित्त्त्त आअह्ह्ह और गहरा। दूर लॉन में शशांक ने मम्मी को घोड़ी बनाया हुआ था और उनकी गाण्ड में लण्ड पेल रहा था, मम्मी आगे झुककर आनंद ले रही थीं, आह्ह्ह शशांक बेटा और जोर से, गाण्ड मारो।
मम्मी ने मुझे देखकर मुस्कुरा दिया, मैंने भी जवाब में स्माइल दी। मधु ने मेरी पैंट खोल दी, मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग, लार टपक रही थी। फिर वो घोड़ी बन गई, “हिमांशु, गाण्ड दस हजार, चूत एक हजार, बोल?”
मैंने हँसते हुए कहा, “पन्द्रह हजार दोनों के, पहले गाण्ड ही मारता हूँ।” उसने हँसकर गांड ऊँची कर दी, मैंने एक ही झटके में पूरा लण्ड उसकी टाइट गाण्ड में उतार दिया, मधु चीखी, आआअह्ह्ह्ह मादरचोद्द्द फट गयीीी ओह्ह्ह्ह फिर खुद कमर हिलाने लगी, मैंने उसकी गांड के गोले थापड़ मारते हुए जोर-जोर से ठोका।
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मनीषा अकेली नंगी घूम रही थी, अपने मम्मे मसल रही थी, कभी अजित के पास जाकर चूचियाँ चुसवाती, कभी राहुल की गांड में उंगली डाल देती। आखिर मेरे पास आई, मैंने मधु को छोड़ा और मनीषा को घास पर लिटा दिया। वो शर्मा कर बोली, “हिमांशु भैया ये तो सिर्फ कैलाश के लिए है।”
मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं और लण्ड चूत पर रगड़ा, “आज मुझे ही कैलाश समझो जानू।” मधु चिल्लाई, “छोड़ो उसे, मुझे चोदो ना।” मनीषा ने मुझे कसकर जकड़ लिया और बोली, “चोद दे भैया जल्दी।” मैंने एक जोरदार झटका मारा, पूरा लण्ड उसकी गीली चूत में समा गया, मनीषा की चीख गूँजी, आआह्ह्ह्ह्ह्ह हिमांशु मर गयीीी ओह्ह्ह फिर खुद कमर ऊपर उठाकर चुदवाने लगी, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह और तेज हिमांशु।
मैंने उसकी टाँगें कंधे पर रखकर मिशनरी में पेला, फिर घोड़ी बनाकर गांड भी मारी, मनीषा पागलों की तरह चिल्ला रही थी, ऊईईई माँ फाड़ दी तूने आज्ज्ज। बारिश की फुहारें हमारे नंगे बदनों पर पड़ रही थीं, हम दोनों सातवें आसमान पर पहुँच गए, मैंने उसकी चूत में झड़ दिया, वो काँपकर मेरे ऊपर गिर पड़ी।
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जैसे ही मैं उठा, सबने तालियाँ बजाईं, सब हमारे चारों ओर घेरा बनाकर खड़े थे, कैलाश पता नहीं कब आ गया था और पास में मधु को चोद रहा था। मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं, “शर्माओ मत बच्चो, जो आज नहीं तो कल होना ही है, खुलकर मस्ती करो, मेरी तरफ से हर लड़की को पच्चीस-पच्चीस हजार, और जो मेरे बेटे से चुदवाएगी उसे बोनस तीस हजार।”
सब उछल पड़े, दो लड़कियों ने मम्मी के मम्मे दबाए, गांड मसल दी। अजित इतना खुश हुआ कि मम्मी को फिर लिटाकर चोदने लगा, मम्मी आह्ह्ह ओह्ह्ह भर रही थीं, चुदाई पूरी होते ही मम्मी ने अपना सोने का हार अजित के गले में डाल दिया। शाम ढले हम होटल में रुके, खाना खाया, फिर मम्मी हर लड़की को घर छोड़ने गईं और उनके माँ-बाप को शुक्रिया कहा। उस दिन के बाद फार्महाउस पर ऐसी पार्टियाँ आम हो गईं।
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