Village Hot Lover Chudai
हेलो दोस्तों, मेरा नाम धर्मेश है, मैं गोरखपुर उत्तर प्रदेश का रहने वाला 23 साल का जवान लड़का हूँ। आज मैं आपको अपनी असली घटना सुना रहा हूँ, जिसे याद करके आज भी मेरा लंड खड़ा हो जाता है। मैं पहले भी दो लड़कियों को जल्दबाज़ी में चोद चुका था, पर वो मज़ा कुछ खास नहीं था क्योंकि डर लगा रहता था। Village Hot Lover Chudai
फिर पड़ोस की एक भाभी को पूरा दिन मिला तो तीन-तीन बार जमकर चोदा, उनकी प्यासी चूत को रगड़-रगड़ कर शांत किया, पर उसके बाद मौका नहीं मिला। लेकिन सबसे बड़ा मज़ा तो अपनी गर्लफ्रेंड मनीषा को चोदने में आया। मनीषा दिखने में कमाल की हॉट और सेक्सी है.
उसका गोरा-गोल चेहरा, गुलाबी होंठ, बड़े-बड़े मुलायम बूब्स जो टाइट टॉप में भी उभरे-उभरे दिखते, मटकती हुई गोल गांड, हर चीज़ मुझे पागल कर देती थी। कई महीनों से हम दोनों किस करते, चूमते, मैं मौका देखकर उसके बूब्स दबा देता, चूत में उंगली कर देता, पर पूरा खेल नहीं हो पाया था।
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दोनों बस उस दिन का इंतज़ार कर रहे थे जब हम नंगे होकर एक-दूसरे को रगड़ सकें। आखिरकार वो दिन आ ही गया। उसके घर वाले दूर किसी शादी में गए थे, रात को लौटने वाले थे। मनीषा ने बीमारी का बहाना बनाकर घर पर रुक गई और मुझे फ़ोन किया, “धर्मेश जल्दी आ जा, आज घर पर कोई नहीं है, हम जी भर के मज़े करेंगे।”
मैं तुरंत तैयार होकर उसके घर पहुँचा। दरवाज़ा खोलते ही मैंने उसे बाहों में कस लिया, उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए और पागलों की तरह चूसने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी, उसकी गर्म साँसें मेरे मुँह में घुस रही थीं, जीभ आपस में लिपट गई, लार का आदान-प्रदान हो रहा था।
किस करते-करते मैंने उसके टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने शुरू कर दिए, इतने मुलायम थे कि हाथ धँस जाते थे। फिर टॉप ऊपर उठाकर ब्रा के ऊपर से चूसे, निप्पल कड़े हो गए थे। वो सिसकियाँ ले रही थी, “आह्ह्ह धर्मेश… कितना अच्छा लग रहा है… ह्ह्ह्ह…”
मैंने ब्रा भी उतार दी, गुलाबी निप्पल मुंह में लेकर चूसने लगा, एक बूब चूसता तो दूसरे को हाथ से मसलता। वो मेरे बाल पकड़कर अपने बूब्स और ज़ोर से दबा रही थी। फिर मैंने उसकी जींस की बटन खोली, पैंटी गीली हो चुकी थी। पैंटी साइड की तो चूत पर हल्के बाल, पूरी तरह भीगी हुई।
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मैंने उंगली अंदर डाली तो वो चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह… धर्मेश… आह्ह्ह्ह… और कर… ह्हीईई…” मैं दो उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा, चूत से चिपचिपी आवाज़ आ रही थी, फच-फच-फच। वो कमर उठा-उठा कर उछाल रही थी, “आह्ह्ह्ह… धर्मेश… बस अब नहीं सहन होता… कुछ करो ना… प्लीज़ डाल दो…”
मैंने अपना लंड बाहर निकाला, पूरी तरह तना हुआ था। उसे हाथ में पकड़ाया और कहा, “मनीषा पहले मुंह में ले।” पहले तो उसने मना किया, लेकिन मेरे बार-बार कहने पर मान गई। उसने लंड को होंठों से छुआ, फिर जीभ से चाटा, फिर मुंह में लिया, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… आवाज़ें आने लगीं।
वो आधा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी, मैं उसके सिर को पकड़कर हल्का-हल्का धक्का दे रहा था। दो-तीन मिनट बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, टाँगें चौड़ी कीं, चूत के होंठ अलग किए और अपना मोटा सुपारा चूत के मुंह पर रखा। एक ही ज़ोर का झटका मारा, पूरा लंड फिसलता हुआ अंदर चला गया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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कोई रुकावट नहीं, कोई सील नहीं टूटी, बस चूत ने लंड को निगल लिया। साफ़ पता चल रहा था कि मनीषा पहले भी कई बार चुद चुकी है, उसकी चूत ढीली और गर्म थी। वो बोली, “आह्ह्ह्ह… धर्मेश… कितना मोटा है तेरा… ओह्ह्ह्ह… पूरी तरह भर गया…”
मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, हर धक्के में उसकी चूत से रस बाहर निकल रहा था, फच-फच-फच की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। वो नीचे से गांड उठा-उठा कर साथ दे रही थी, “हाँ धर्मेश… और ज़ोर से… आह्ह्ह्ह… ह्हीईई… चोद मुझे… ओह्ह्ह्ह…”
फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से गांड ऊपर उठाई और दोबारा लंड अंदर पेल दिया। अब और मज़ा आ रहा था, उसकी गोल गांड मेरे पेट से टकरा रही थी, थप-थप-थप। मैंने स्पीड बढ़ाई, वो चिल्लाने लगी, “आह्ह्ह्ह… धर्मेश… बस… मैं झड़ने वाली हूँ… ओह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह… ह्ह्ह्ह्हआआ…”
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और अचानक उसकी चूत सिकुड़ने लगी, रस का फव्वारा छूट गया। वो निढाल होकर गिर पड़ी, लेकिन मैं नहीं रुका, दस-पंद्रह तेज़ झटके और मारे और उसकी चूत में ही अपना गर्म वीर्य उड़ेल दिया। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे पर लेटे थे।
मैंने पूछा, “मज़ा आया ना?” वो हाँफते हुए बोली, “धर्मेश… आज तक किसी ने इतना अच्छा नहीं चोदा… मेरी प्यासी चूत को तूने पूरा सुकून दे दिया… आह्ह्ह… अब तो तेरा लंड ही चाहिए मुझे हर समय।” मैंने हँसकर कहा, “तेरी चूत तो पहले से ही ढीली है, कितने लंड खा चुकी है तू?”
वो शरमाते हुए बोली, “हाँ… कई बार चुदवा चुकी हूँ… लेकिन तेरे जैसा मज़ा कभी नहीं आया… अब मेरा पूरा जिस्म तेरा है… जब चाहे चोद लेना।” हम नंगे ही कुछ देर लेटे रहे, फिर मैंने कपड़े पहने और घर आ गया। उसके बाद जब भी मौका मिलता, मैं उसके घर या वो मेरे घर आ जाती और हम जमकर चुदाई करते।
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कई बार उसने मुझे ब्लोज़ॉब दिया, मैंने उसकी चूत चाटी, कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी वो ऊपर चढ़कर खुद उछलती। पर गांड मारने के लिए वो कभी नहीं मानी, कहती, “वहाँ बहुत दर्द होता है, कभी नहीं करवाया।” मैं भी उसकी मुंह और चूत की चुदाई से ही खुश रहता।
आज भी हमारी चुदाई चल रही है और मज़ा पहले से भी ज़्यादा आता है। मैं अपनी गर्लफ्रेंड मनीषा को एक बार थ्रीसम का मज़ा देना चाहता हूँ, कोई साफ-सुथरा, भरोसेमंद लड़का हो जो मेरे साथ मिलकर उसे चोदे, सिर्फ एक बार, उसके बाद ज़िंदगी में कभी मुड़कर ना देखे, ना परेशान करे। इच्छुक हों तो संपर्क करें।
Rohit says
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