Sister In Law Chudai
छोटी साली प्रतिभा… न जाने क्यों मेरी शादी से पहले से ही मुझ पर बड़ी मेहरबान थी। उस वक्त वह जवान हो चुकी थी, कम से कम अठारह साल की तो थी ही, लेकिन उसकी बॉडी अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई थी। उसकी छाती बिल्कुल सपाट थी, इसलिए मेरी तरफ से उसकी ओर कोई खास आकर्षण नहीं था। हाँ, वह दिखने में मेरी बीवी से ज्यादा खूबसूरत थी। Sister In Law Chudai
उसका गोरा-चिट्टा चेहरा, काले लंबे बाल और बड़ी-बड़ी आँखें देखकर बस मैं उसके गालों को सहला कर खुश हो जाता था। मेरी बीवी, जिसका नाम वंशिका था, थोड़ी गेहुँआ रंग की थी, लेकिन उसकी मुस्कान और घरेलू अंदाज ने मुझे बाँध रखा था। प्रतिभा की माँ, मेरी सास, एक साधारण गृहिणी थीं, और मेरे माता-पिता गांव में रहते थे, जहाँ से ये सब रिश्ते जुड़े थे।
उसके जवानी में पूरी तरह कदम रखते ही सब कुछ बदल गया। अब वह बीस साल की हो चुकी थी, और उसके मम्मे मानो पक कर बड़े-बड़े आम जैसे फूल गए थे। वे इतने गोल और सख्त लगते थे कि उन्हें देखते ही मन करता था छू लूँ, दबा लूँ। लेकिन मैं अपनी फितरत से मजबूर था, सोचता था कि ये गलत है, रिश्ता खराब हो जाएगा।
फिर भी, दिल में एक चाहत पैदा हो गई थी, जो दबाए नहीं दबती थी। पर बात कुछ और ही थी। वह अक्सर मेरे घर आती रहती थी। उसकी शादी के बाद भी ये सिलसिला जारी रहा। शुरू से ही वह किसी न किसी बहाने मेरे पास आ जाती थी, मुझे छूने की कोशिश करती थी।
शादी के बाद तो हद हो गई, अपने पति और अन्य लोगों की मौजूदगी में भी वह बिंदास मेरी गोद में सिर रखकर लेट जाती थी। उसका पति, मेरा साढ़ू भाई, एक सरकारी नौकरी वाला आदमी था, लेकिन सेक्स में कमजोर लगता था, जैसा कि बाद में पता चला।
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शादी से पहले तो उसने हद ही कर दी थी। मेरे माता-पिता और मेरी सास के सामने वह मेरे बगल में आकर सो गई थी। मैं हैरान था, लेकिन रिश्ते की वजह से चुप रहा। रिश्ते में वह मेरी साली थी, तो हमारे बीच मस्ती-मजाक होना आम बात थी। लेकिन न जाने क्यों, उसका ध्यान हमेशा मेरे इर्द-गिर्द ही लगा रहता था।
जब वह मेरे घर आती थी, रात भर सोती नहीं थी। बिस्तर में पड़ी चुपचाप अपनी दीदी और जीजू की चुदाई का मजा लेती थी। उन्हीं के बारे में सोचती रहती थी। मैं और वंशिका रात में अक्सर सेक्स करते थे, और प्रतिभा पास के पलंग पर लेटी सब सुनती रहती थी।
एक बार मेरी बीवी वंशिका की तबीयत खराब हो गई थी, इसलिए वह जल्दी सो गई। चुदाई की छुट्टी हो गई। मैं एक दिन भी अपनी बीवी को चोदे बिना नहीं रह पाता था। मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था, सात इंच का मोटा, जो वंशिका को खुश रखता था। उस रात कुछ कदम दूर पलंग पर प्रतिभा सोई हुई थी, लेकिन वह जाग रही थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। उसने पहले अपनी दीदी की तरफ देखा, फिर मेरी आँखों में देखा, जैसे न्योता दे रही हो। मैं धीरे से उसके पलंग पर चढ़ गया और उसकी बगल में लेट गया। उसका चुप रहना मुझे लगा कि वह तैयार है, मुझसे चुदवाना चाहती है।
मैं धीरे-धीरे उसके शरीर पर चढ़ गया। मेरा लंड उसकी चूत पर टिक गया, जो पेटीकोट के ऊपर से ही गर्म महसूस हो रही थी। मैंने उसके होंठों को लंबा चुम्बन दिया, जीभ अंदर डालकर चूसा। साथ ही ब्लाउज में हाथ डालकर उसकी चूचियों को पकड़ लिया। वे इतनी नरम और भरी हुई थीं कि दबाते ही उंगलियाँ धंस गईं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैं उन्हें मसलने लगा, निप्पल्स को रगड़ने लगा। प्रतिभा की साँसें तेज हो गईं, लेकिन वह चुप रही। उसने बिना कुछ कहे अपना ब्लाउज ऊपर कर दिया, और दोनों मम्मे मेरे सामने खोल दिए। अंदर ब्रा नहीं थी, निप्पल्स गुलाबी और सख्त हो चुके थे। मैंने बाईं चूची को हाथ में लिया, मसलना शुरू किया, और दाहिने मम्मे की निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा।
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जैसे दूध पी रहा हूँ, जोर-जोर से चूसा। “आआह… जीजू…” प्रतिभा धीरे से सिसकारी, लेकिन आवाज दबा ली। मैं चूसता रहा, जीभ से निप्पल को घुमाता, काटता हल्के से। उसकी चूचियाँ इतनी बड़ी थीं कि मुट्ठी में पूरी नहीं आतीं। फिर उसने अपना पेटीकोट निकाल दिया।
नीचे चड्डी नहीं थी, चूत पूरी नंगी, हल्के बालों वाली, गीली हो चुकी थी। वंशिका की तबीयत खराब थी, लेकिन प्रतिभा मानो तैयार बैठी थी, जैसे जानती हो कि आज मौका मिलेगा। वह बिल्कुल नंगी थी अब। उसे देखकर मेरा लंड और टाइट हो गया। मैंने दूसरे हाथ की उंगलियाँ उसकी गांड में घुसेड़ दीं, गांड का छेद टाइट था, लेकिन गीला। प्रतिभा काँप उठी, “उउफ्फ… जीजू, धीरे…”
दस मिनट तक लगातार उसकी चूचियों को चूसने के बाद मैंने अपना लंड उसकी प्यासी चूत में डालने की कोशिश की। लेकिन उसने मुझे रोका, “पहले मुझे आपका लौड़ा चूसना है।” वह फौरन उठी, मेरे लंड को मुँह में ले लिया। जीभ से चाटने लगी, ऊपर से नीचे तक।
“म्म्म… कितना मोटा है जीजू…” वह चूसती रही, लंड का सुपारा मुँह में घुमाती, चूसती जोर से। मैं उसके बाल पकड़कर धक्का देने लगा, लेकिन धीरे-धीरे। मुझे पेशाब लगी थी। मैंने उसे रोका, तो उसने कहा, “अपना पेशाब जाया मत करो… दीदी की तरह मुझे भी तुम्हारा पेशाब पीना है।
उससे ही मैं अपने शरीर को नहलाना चाहती हूँ।” मैं हैरान था, लेकिन उत्तेजित भी। मैंने अपना लंड निकाला, और पिचकारी मारकर प्रतिभा का सारा बदन गीला कर दिया। चूचियों पर, पेट पर, चूत पर। वह हँसती रही, “आआह… गर्म है जीजू…” फिर उसने कुछ बूँदें मुँह में लीं। “Sister In Law Chudai”
बाद में हम 69 की पोजीशन में आए। मैं नीचे लेटा, वह मेरे ऊपर उल्टी होकर। मैं उसकी चूत को चूसने लगा, जीभ अंदर डालकर, क्लिट को चाटता। वह मेरे लंड को चूस रही थी, “उम्म्ह… जीजू, चूत चूसो जोर से…” हम दोनों चूसते रहे, मैं उसकी गांड दबाता, उंगली अंदर-बाहर करता। प्रतिभा की चूत से पानी निकल रहा था, मैं पीता रहा।
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सेक्स के मजा में प्रतिभा ने सच्चाई बताई, “मैं आज तक आपसे नाराज थी जीजाजी।”
मैंने उसे उल्टा लिटाकर पीछे से उसके दोनों मम्मों को सख्ती से मसला, “मैंने भला कौन सा अपराध कर डाला था?”
“क्या एक लड़की को सेक्स के लिए उकसाकर उसे गर्म करके ऐसे प्यासी ही छोड़ देते हैं?”
“क्या कहना चाहती हो? मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ।”
“आज से पहले मैंने मेरी चुदाई के कितने मौके गंवा दिए हैं? हर बार तुमने थोड़ी छेड़खानी करके मेरे मम्मों को पकड़ कर उसको दबोच कर… उसको चूमकर मेरी चूत पर केवल लौड़ा दबा कर मुझे उत्तेजित करके छोड़ दिया है। कोई भी स्त्री अपने मम्मों को हाथ लगाने नहीं देती।
अगर वह ऐसा करती है… तो इसका एक ही मतलब निकलता है कि वह आपसे चुदवाना चाहती है। मैंने तुम्हें मेरे मम्मों को छूने का मेरे ब्लाउज में हाथ डालने का अधिकार दिया था। फिर भी तुमने अपने कदम आगे नहीं बढ़ाया और मुझे हर बार तड़फता छोड़ दिया।” “Sister In Law Chudai”
“तुम मेरी साली हो, साली माने बहन होती है। मैं भला तुम्हारे साथ ऐसी-वैसी हरकतें कैसे कर सकता हूँ?”
“साली का दूसरा मतलब आधी घरवाली भी होता है। इस नाते हम कुछ भी कर सकते हैं। किसी को इस बात का संदेह भी नहीं होगा।”
उसकी बातें सुनकर मैं चकित हो गया।
मैं उससे और अधिक जवाब-तलब करूँ… उसके पहले ही उसने मेरे लौड़े को कुतिया की तरह चाटते हुए मुझसे कहा, “जीजू… तुम बिल्कुल बुद्धू हो… इशारों में कुछ समझते नहीं हो। मैं शादी के बाद भी तुमसे चुदवाने को तैयार थी। मैंने तुम्हारी सरलता के लिए मेरी साड़ी को जाँघों तक लाकर मेरी चड्डी का नजारा दिखाया था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
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तुम्हें केवल उसको खींचना भर था। उसमें इलास्टिक लगा हुआ था… वो आसानी से निकल जाती। मैं तुम्हें अपना दूध पिलाना चाहती थी। लेकिन तुम तो बिल्कुल डरपोक निकले।” मैं उसे मंत्रमुग्ध सा होकर सुने जा रहा था… वो आगे बोली, “मैं अपनी आँखें बंद करके सोच रही थी कि तुम मेरी चड्डी निकाल रहे हो, मुझसे अपना ब्लाउज खोलने की गुजारिश कर रहे हो। लेकिन तुम में तो मेरे करीब आने का… मुझे छूने का भी साहस नहीं था। तुमने आकर मुझे जरा सा छुआ भी होता… तो मैं बाकी का काम तुम्हारे लिए आसान कर सकती थी। अब तुम ही बताओ… मुझे गुस्सा आएगा या नहीं?”
“हाँ प्रतिभा… मैं वाकई में सबसे बड़ा बेवकूफ था। इसलिए उसके पहले दो लड़कियों को चोदने का मौका खो चुका हूँ। तुमने चुदासी रंडी की तरह मेरी ही मौजूदगी में अपने बेटे को स्तनपान कराते हुए मुझे उकसाया था। जानबूझ कर मुझे अपना जलवा दिखाने के लिए अपने स्तन को खुला छोड़ दिया था। मैं तुम्हारे पास आ रहा था। यह जानते हुए भी तुमने अपने स्तन को ढकने का प्रयास नहीं किया था। उस वक्त मानसिक तौर पर मैं तुम्हारी चूचियों को मुँह में लेकर तुम्हारा दूध पी रहा था। लेकिन हकीकत में कुछ भी नहीं कर पाया था।” “Sister In Law Chudai”
“जीजू… तुम सोचोगे… भला एक शादी-शुदा लड़की और वह भी एक साली… ऐसा क्यों कर रही है…? मेरा पति और तुम्हारा साढ़ू भाई… तुम्हारी तरह लंबे अरसे तक मुझे चोदता नहीं है। उसकी वजह से मेरी सेक्स की भूख पूरी नहीं मिट पाती है और मैं तुम्हें उकसाने का प्रयास करती रहती थी।”
“प्रतिभा… मैंने तुम्हारे पति द्वारा तुम्हारी चुदाई का नजारा अपनी आँखों से देखा है।”
“देखो, इस मामले में मालिक की भावना को कोसना गलत होगा, अगर तुम चाहो तो मना कर सकते हो। मैं किसी और के पास चली जाऊँगी, उसमें हमारे परिवार की बदनामी होगी, शायद मेरी शादी भी टूट सकती है, तुम चाहो तो इसे बचा सकते हो।
बाकी यह एक सनातन सत्य है कि कोई भी स्त्री या पुरुष किसी एक से शारीरिक संबंध बना कर सुखी नहीं रह सकता। परदे के पीछे ऐसे कितने नाजायज रिश्ते जन्म लेते हैं… जो अपनी शादी की बुनियाद को टूटने नहीं देते। तुम चाहो तो मेरी दीदी के साथ मुझे भी तुम्हारी सेक्स पार्टनर बना सकते हो।
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बस इतना यकीन दिला दो कि हम जब भी मिलेंगे, तुम दीदी की तरह मेरी भी चुदाई करोगे। मुझे तुम अपनी पेशाब और मलाई का प्रसाद दोगे, घंटों मुझे अपने हाथ से नंगी करके… मेरी चूत में लौड़ा डालकर मेरी चुदाई करोगे। दीदी की तरह तुम्हारा एक हाथ मेरे मम्मों पर होगा और दूसरे मम्मे की नोक को मुँह में लेकर मेरा दूध पीते रहोगे। तुम चूचियों को चूसने में माहिर हो। तुम को एक साथ दो डेयरी का दूध हासिल होगा… जिससे तुम्हारा स्वास्थ्य भी सुधर जाएगा।”
“ओके डॉल… डन… हमारे विचार मिलते-जुलते हैं। हम दोनों चुदाई की एक नई मिसाल कायम करेंगे।”
“हाँ… लेकिन हमारे रिश्ते की किसी को भनक भी नहीं लगनी चाहिए।”
“ठीक है… हम मिलते रहेंगे… चुदाई करते रहेंगे… जब तक है जान…”
बस उसके बाद मेरा शारीरिक रिश्ता मेरी साली से जुड़ गया और लंड-चूत ने नई कहानी लिखना शुरू कर दी।
Rakesh says
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