Sexy Didi Antarvasna Story
मेरा नाम दीपिका है, और मेरा छोटा भाई राजू। मैं 22 साल की हूँ, और राजू 19 का। हम दोनों बचपन से ही बहुत करीब हैं। हमारी बॉन्डिंग ऐसी है कि हम हर छोटी-बड़ी बात शेयर करते हैं। साथ में गेम खेलते हैं, हँसी-मजाक करते हैं, और कभी-कभी तो एक ही रूम में सो जाते हैं। Sexy Didi Antarvasna Story
पर जब ऐसा होता है, तो मुझे कपड़े पहनकर सोना पड़ता है, क्योंकि भाई है ना, थोड़ी सी शर्म तो बनी रहती है। मेरी फिगर की बात करें तो मेरी चूचियाँ 34D की हैं, गोल, भरी हुई, और शेप में एकदम परफेक्ट। मेरी गांड भी ठीक-ठाक है, रसीली और उभरी हुई, जो मेरे कॉलेज के लड़कों को हमेशा घूरने पर मजबूर कर देती है।
पर सच कहूँ, मैंने आज तक किसी को मौका नहीं दिया। ना कोई बॉयफ्रेंड, ना कोई चुदाई। हाँ, मैं कुंवारी हूँ, और मुझे इस बात का थोड़ा गर्व भी है। पर उस दिन जो हुआ, उसने मेरी जिंदगी को एक नया मोड़ दे दिया। उस सुबह पापा-मम्मी किसी काम से बाहर गए थे।
मैं जल्दी उठी, किचन में गई, और नाश्ता बनाया। फिर मैं राजू को उठाने उसके रूम में गई। दरवाजा खोलते ही मेरी नजर उसके बिस्तर पर पड़ी, और मैं दंग रह गई। उसका लंड, जो पजामे से बाहर झांक रहा था, पूरी तरह से खड़ा था। इतना बड़ा, शायद 9 इंच का, मोटा और सख्त।
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मेरी तो साँस ही अटक गई। “ये क्या है?” मैंने मन में सोचा। डर और शर्म के मारे मैंने जल्दी से दरवाजा बंद किया और बाहर से ही उसे आवाज दी, “राजू, उठ जा! नाश्ता तैयार है!” वो उठा, फ्रेश हुआ, और हम दोनों ड्राइंग रूम में बैठकर नाश्ता करने लगे।
नाश्ते के बाद हम टीवी देखने बैठे। मैं अपना फेवरेट सीरियल देखना चाहती थी, और राजू को क्रिकेट मैच। बस, रिमोट को लेकर हमारी लड़ाई शुरू हो गई। मैंने रिमोट छीना और भागने लगी। राजू मेरे पीछे-पीछे दौड़ा। मैं हँस रही थी, और वो भी मजाक में मुझे पकड़ने की कोशिश कर रहा था।
अचानक उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया। उसका सख्त लंड मेरी गांड को टच कर रहा था। मेरी साँसें तेज हो गईं, पर मैंने कुछ नहीं कहा। मैंने मजाक में रिमोट अपनी ब्रा में डाल लिया और बोली, “ले, अब ले ले!” राजू ने हँसते हुए मेरी चूचियों की तरफ हाथ बढ़ाया। उसका हाथ मेरी ब्रा को छू गया, और उसने मेरी चूचियों को हल्के से दबा दिया।
मुझे अजीब सा मजा आया। मैंने उसे रोकने की बजाय चुपके से दो मिनट तक ऐसा करने दिया। फिर मैंने रिमोट उसे दे दिया और सोफे पर बैठ गई। अचानक मुझे रोना सा आने लगा। राजू ने पूछा, “क्या हुआ, दीदी? रो क्यों रही हो?” मैंने नाटक करते हुए कहा, “अब मैं क्या देखूँ? रिमोट तो तेरे पास है!”
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उसने हँसते हुए कहा, “तो आ, छीन ले!” और वो फिर भागने लगा। इस बार वो छत की सीढ़ियों की तरफ दौड़ा। मैं भी उसके पीछे भागी, पर जल्दबाजी में मेरा पैर फिसला, और मैं सीढ़ियों पर गिर गई। मेरी चूचियाँ नीचे दब गईं, और मुझे तेज दर्द हुआ। मैं वहीँ पड़ी-पड़ी रोने लगी।
राजू दौड़कर आया, मुझे उठाया, और धीरे-धीरे बेडरूम में ले गया। मैं अभी भी रो रही थी। “दीदी, क्या हुआ? कहाँ लगी चोट?” उसने चिंता से पूछा। मैंने सिसकते हुए कहा, “मेरी कमर में… और…” “बताओ ना, दीदी! मैं आइस लाता हूँ, लगाने से आराम मिलेगा।” वो फ्रिज से आइस ले आया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने अपनी टॉप थोड़ी ऊपर की ताकि वो कमर पर आइस लगा सके। उसने धीरे-धीरे आइस रगड़ना शुरू किया। मैंने कहा, “थोड़ा और नीचे भी लगी है।” उसने बिना कुछ पूछे मेरी पैंट नीचे खींच दी। मेरी पैंटी भी उसने उतार दी। मैं शॉक्ड थी, पर दर्द की वजह से कुछ बोल नहीं पाई।
उसने मेरी गांड के ऊपर आइस लगानी शुरू की। ठंडक से दर्द कम होने लगा, पर मुझे अजीब सा भी लग रहा था। “दीदी, और कहाँ लगी है चोट?” उसने पूछा। मेरे दिमाग में हलचल मच गई। मेरी चूचियों में भी दर्द था, पर उसे कैसे बताऊँ? मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “नहीं, बस यहीं… मैं खुद लगा लूँगी। तू जा, थैंक्स।”
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पर राजू ने जिद पकड़ ली। “नहीं, दीदी, मम्मी ने कहा है तुम्हारा पूरा ख्याल रखना। बताओ ना, मेरी कसम!” मैंने शर्माते हुए कहा, “मेरी… मेरी चूचियों में लगी है। बहुत दर्द हो रहा है।” वो बिना कुछ कहे मेरी टॉप ऊपर करने लगा। मैं सिर्फ ब्रा में थी, क्योंकि पैंट और पैंटी तो वो पहले ही उतार चुका था।
उसने एक सेकंड में मेरी ब्रा भी खोल दी। मेरी चूचियाँ उसके सामने थीं, नंगी, गोल और सख्त। मैंने शर्म से आँखें नीचे कर लीं। “दीदी, तुम सीधी लेटो, मैं आइस लगा देता हूँ,” उसने कहा। मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “कैसे… मैं तेरे सामने पूरी नंगी हो जाऊँ?” वो हँसा और बोला, “अरे, दीदी, तुम्हें मुझसे शर्म? मैं तुम्हारा भाई हूँ! ठीक है, तुम्हें अच्छा लगे तो मैं भी नंगा हो जाता हूँ।”
ये कहते हुए उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए। उसका लंड, जो पहले ही खड़ा था, अब मेरे सामने पूरा तना हुआ था। 9 इंच का, मोटा, नसों से भरा हुआ। मैं उसे देखकर दंग रह गई। “कैसा लग रहा हूँ, दीदी?” उसने मजाक में पूछा। मैंने शर्माते हुए कहा, “बड़ा हो गया है तू तो!”
वो हँसा और बोला, “अब तुम सीधी लेटो।” मैं सीधी लेट गई। मेरी चूचियाँ हवा में तनी हुई थीं। उसने मेरी टॉप पूरी तरह उतार दी और आइस लेकर मेरी चूचियों पर लगाने लगा। उसका स्पर्श मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ा रहा था। उसका लंड मेरे होंठों के पास टच हो रहा था।
मैंने हिम्मत करके पूछा, “तेरा इतना बड़ा है?” “हाँ, दीदी, पर मैंने आज तक किसी को नहीं चोदा,” उसने शरमाते हुए कहा। मैंने हँसकर कहा, “ऐसे क्या बोल रहा है? मैं तेरी बहन हूँ!” “सॉरी, दीदी, पर सच बोल रहा हूँ,” उसने कहा। मुझे अब थोड़ा आराम मिल रहा था। मैंने कहा, “ठीक है, अब तू जा।”
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पर राजू ने शरारत से कहा, “दीदी, तुम्हें तो मजा आया, अब मेरा क्या? मुझे भी तो कुछ टिप चाहिए!” मैंने हँसते हुए पूछा, “क्या चाहिए, मेरे राजा?” वो बोला, “मेरे हथियार को भी थोड़ा प्यार दो ना। इसे शांत कर दो।” मैं चौंकी, “क्या मतलब? मैं क्या करूँ इसके साथ?”
वो हँसते हुए बोला, “इसे मुँह में लो और चूसो, जैसे आइसक्रीम चूसती हो। जब तक मेरी पिचकारी न निकले, चूसते रहो।” मैं शरम से लाल हो गई, पर मेरे जिस्म में एक अजीब सी गर्मी थी। मैंने हिम्मत करके उसका लंड अपने मुँह में लिया। उसका लंड गर्म, सख्त और इतना बड़ा था कि मेरे मुँह में मुश्किल से आ रहा था।
मैंने धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। “आह्ह… दीदी…” राजू के मुँह से सिसकारी निकली। वो मेरी चूचियों को दबाने लगा, कभी हल्के से थप्पड़ मारता, तो कभी मेरे निप्पल्स को मसलता। मैं दर्द और मजा दोनों में डूबी हुई थी। मैंने उसका लंड और तेजी से चूसना शुरू किया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“उम्म… आह्ह…” मेरी सिसकारियाँ भी निकल रही थीं। उसका लंड मेरे मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था। वो मेरे मुँह को चोद रहा था। करीब 10 मिनट बाद उसने कहा, “दीदी, अब मेरा निकलने वाला है… पी जाओ, तुम्हारा दर्द ठीक हो जाएगा।” मैंने और जोर से चूसना शुरू किया। “Sexy Didi Antarvasna Story”
अचानक उसके लंड से गर्म-गर्म माल मेरे मुँह में निकला। “आह्ह… दीदी… ओह्ह…” उसकी सिसकारियाँ रूम में गूँज रही थीं। मैंने उसका सारा माल पी लिया, जैसे कोई कुतिया हो। स्वाद मुझे अच्छा नहीं लगा, पर उस पल में कुछ और सोचने की हालत नहीं थी।
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वो मेरे पास आया, मेरी चूचियों को चूमा, मेरे निप्पल्स को हल्के से काटा, और बोला, “दीदी, तुम्हारी चूचियाँ मस्त हैं। I love you, जान। एक और बात माननी पड़ेगी।” मैंने हँसते हुए कहा, “बोल, मेरे राजा।” वो बोला, “जब भी हम घर में अकेले होंगे, हम कपड़े नहीं पहनेंगे। और साथ में सोएँगे।”
मैंने हँसकर कहा, “ठीक है, बाबा!” उसने मेरी चूचियों को मुँह में लिया और सो गया। मैंने उसका लंड पकड़ रखा था। हम दोनों कब एक-दूसरे के ऊपर सो गए, पता ही नहीं चला। जब मेरी नींद खुली, तो मुझे लगा कि मेरी गांड में कुछ घुसा हुआ है। मैंने देखा तो राजू का बड़ा सा लंड था। मुझे तेज दर्द हो रहा था। मेरी चुदाई मेरे भाई से हो चुकी थी।