Sexual Bribery Office Story
मेरा नाम दयानंद शुक्ला है। उम्र 38 साल, कद 5 फीट 10 इंच, गठीला बदन, चेहरे पर घनी मूंछें, जो मुझे और रौबदार बनाती थीं। मेरे बाल काले, घने, और थोड़े लहराते थे। मैं हमेशा क्रिस्प फॉर्मल शर्ट और पैंट में रहता, जो मेरी पर्सनैलिटी को और निखारता था। मैं दिल्ली के उत्तम नगर में एक बड़ी टेलिकॉम कंपनी में सेल्स मैनेजर था। Sexual Bribery Office Story
कंपनी ने मुझे उत्तम नगर और आसपास के इलाकों में बिजनेस बढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी सौंपी थी। मैंने एक शानदार प्रॉपर्टी किराए पर ली और वहां एक चमचमाता ऑफिस सेटअप किया। मेरा मकसद था कि कंपनी का बिजनेस आसमान छूए। इसके लिए मुझे 6 लड़कों की एक तेज-तर्रार सेल्स टीम चाहिए थी, जो हमारे प्रोडक्ट्स को मार्केट में बेच सके।
मैंने अखबार में विज्ञापन छपवाया और 6 सेल्स एग्जीक्यूटिव भर्ती कर लिए। ये लड़के बंगलों और मार्केट में जाकर प्रोडक्ट्स बेचते थे। पांच लड़के तो बढ़िया काम कर रहे थे, लेकिन छठा लड़का, अनिल, बिल्कुल निकम्मा था। अनिल, 25 साल का, पतला-दुबला, चेहरा साधारण, लेकिन उसकी आंखों में हमेशा एक डर और बेचैनी रहती थी। वो हर वक्त घबराया हुआ लगता था, जैसे दुनिया का सारा बोझ उसके कंधों पर हो।
दो महीने तक उसने एक भी डील नहीं लाई। फिर एक दिन कंपनी के हेड, श्री सूर्यप्रताप सिंह, मेरी ब्रांच में आए। सूर्यप्रताप सिंह, 45 साल के, मोटे-ताजे, गंजा सिर, लेकिन उनकी आंखों में एक चालाकी और रौब था। वो हमेशा महंगे ग्रे सूट में रहते थे, और उनकी भारी आवाज सुनकर लोग सहम जाते थे।
उन्होंने सारी रिपोर्ट्स देखीं और सीधे अनिल पटेल को निकालने का हुक्म सुना दिया। “दयानंद! ये अनिल बेकार है। दो महीने में एक भी सौदा नहीं लाया। इसे आज ही टर्मिनेशन लेटर थमा दो,” सूर्यप्रताप सिंह ने अपनी गूंजती आवाज में कहा और चले गए।
मैंने अनिल को केबिन में बुलाया। वो मेरे सामने खड़ा था, उसका चेहरा लटका हुआ, आंखें नीची। जैसे ही मैंने टर्मिनेशन की बात शुरू की, वो जोर-जोर से फूट-फूटकर रोने लगा। “सर, मेरी अभी नई-नई शादी हुई है। प्लीज, मुझे नौकरी से मत निकालिए। मेरी बीवी और मेरा क्या होगा?”
मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी : बाप बेटी के नाजायज सम्बन्ध की कहानी
उसकी आवाज में इतनी मायूसी थी कि मेरा दिल थोड़ा पिघल गया। लेकिन मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। मैंने उसे उस दिन लेटर नहीं दिया और अगले दिन आने को कहा। रात भर मैं सो नहीं पाया। मेरे दिमाग में बार-बार अनिल की जवान बीवी बबिता का चेहरा घूम रहा था।
बबिता, 23 साल की, 5 फीट 4 इंच, पतली-दुबली, गोरी, और इतनी खूबसूरत कि देखकर लंड खड़ा हो जाए। मैंने उसे एक बार कंपनी के इवेंट में देखा था। वो वाइन रेड साड़ी में थी, जो उसके जिस्म के हर उभार को बयां कर रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी काली आंखें, लंबी पलकें, और होंठों पर हल्की-सी नीली लिपस्टिक।
गले में काला मोतियों वाला मंगलसूत्र और हाथों में खनकती चूड़ियां। उसके गोरे हाथों में चांदी और सोने की अंगूठियां थीं, जो उसकी नई दुल्हन वाली अदा को और बढ़ा रही थीं। मैं रात भर यही सोचता रहा, “अगर बबिता की चूत मिल जाए, तो क्या बात हो।”
मैं बार-बार सपने में देख रहा था कि बबिता मेरे सामने गिड़गिड़ा रही है, “नहीं सर, अनिल को नौकरी से मत निकालिए, वरना हम दोनों का क्या होगा?” मेरी नीयत उस पर खराब हो चुकी थी। मैंने ठान लिया कि अनिल की नौकरी बचाने के बहाने मैं उसकी बीवी को अपने जाल में फंसाऊंगा।
अगले दिन मैंने अनिल को फिर बुलाया। वो मेरे केबिन में आया, उसकी आंखें लाल थीं, जैसे रात भर रोया हो। “देखो अनिल, तुम्हारी नौकरी बचाना अब मेरे लिए नामुमकिन है। तुम जानते हो कि कोई कंपनी बिना बिजनेस के नहीं चलती। लेकिन एक रास्ता है, जिससे तुम्हारी नौकरी बच सकती है। शायद तुम इसके लिए तैयार न हो,” मैंने चालाकी से कहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अनिल की आंखों में एक उम्मीद की चमक दिखी। “आप बोलिए सर, मैं अपनी नौकरी बचाने के लिए कुछ भी करूंगा,” उसने बेताबी से कहा। मैंने उसकी आंखों में देखा और धीरे से बोला, “अनिल, तुम्हें अपनी जवान और खूबसूरत बीवी बबिता को मुझे और हेड सर सूर्यप्रताप सिंह को तोहफे के तौर पर देना होगा। समझ रहे हो ना, मैं किस तरह इशारा कर रहा हूं? अगर तुम ऐसा कर सको, तो मैं तुम्हारी नौकरी बचा लूंगा।”
मेरी बात सुनकर अनिल का चेहरा फक हो गया। उसकी आंखें डबडबा आईं। वो समझ गया था कि मैं उसकी बीवी को चोदने की बात कर रहा हूं, और सिर्फ मैं ही नहीं, सूर्यप्रताप सिंह भी उसकी बीवी की चूत का मजा लेंगे। “अनिल, आराम से सोच लो। कोई जल्दी नहीं है। तब तक तुम्हारा टर्मिनेशन लेटर मेरे पास सुरक्षित है,” मैंने उस पर और दबाव डालते हुए कहा।
कुछ दिन बाद अनिल अपनी बीवी बबिता को लेकर मेरे ऑफिस आया। “सर, मैं अपनी नई-नवेली बीवी बबिता को ले आया हूं,” उसने धीमी, टूटी आवाज में कहा। मेरी नजर बबिता पर पड़ी। वो वाइन रेड साड़ी में थी, जो उसके गोरे जिस्म पर चमक रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी काली आंखें, नीली लिपस्टिक, और गले में काला मोतियों वाला मंगलसूत्र।
चुदाई की गरम देसी कहानी : गर्लफ्रेंड ने अपने माँ बाप के बिस्तर पर चुदवाया
उसके हाथों में चूड़ियां खनक रही थीं, और उंगलियों में चमकती चांदी, सोने, और रत्नों की अंगूठियां। उसका पतला, गोरा चेहरा और नाजुक कलाइयां मेरे लंड को बेकाबू कर रही थीं। मैंने मन ही मन सोचा, “मादरचोद, ये तो जबरदस्त माल है। इसकी चूत तो बड़ी मीठी होगी। भगवान ने इसे बड़े करीने से बनाया है।”
मैंने बबिता को अपने केबिन में बिठाया और अनिल को बाहर ले गया। “अनिल, तेरी बीवी तो बड़ी मस्त है यार। मैं यकीन से कह सकता हूं कि इसकी चूत बड़ी रसीली होगी। एक रात मैं इसे चोदूंगा, और एक रात हेड सर,” मैंने बेशर्मी से कहा। अनिल बेचारा बहुत उदास था। मजबूरी में उसने सर हिलाकर हामी भरी।
मैंने उसे जाने को कहा। उसने एक बार अपनी बीवी बबिता की ओर देखा, जो मेरे केबिन में बैठी थी, और फिर भारी कदमों से चला गया। मेरा लौड़ा बबिता की चूत मारने को बेताब था। मैं केबिन में गया। “बबिता, तुम जानती हो ना कि तुम किस काम के लिए आई हो?” मैंने पूछा।
उसने शर्म से सर हिलाया, उसकी आंखें नीची थीं। मैं खुश हो गया। मैंने चपरासी को बुलाकर कहा कि अगले दो घंटे तक कोई मेरे केबिन में न आए। चपरासी ने मुस्कुराकर सर हिलाया, वो समझ गया था कि मैं अनिल की बीवी की चूत लेने वाला हूं। मैंने केबिन का दरवाजा अंदर से लॉक किया, पर्दे खींचे, और बबिता के बगल सोफे पर बैठ गया।
मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा। वो शर्म और झिझक से एक इंच आगे खिसक गई। मैंने उसके दोनों कंधों को पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लिया और उसके नीली लिपस्टिक लगे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो थोड़ा झिझकी, “उफ्फ… सर…” उसने धीमी आवाज में कहा।
मैंने उसके कंधों को और जोर से पकड़ा और उसके होंठ चूसने लगा। दोस्तों, वो लड़की थी या कोई हूर। जरूर अनिल उसकी चूत रोज लेता होगा। उसके नीले-नीले होंठों का स्वाद मुझे पागल कर रहा था। उसकी छोटी-सी, प्यारी नाक को मैंने हल्के से दांतों से काट लिया।
“उह्ह… सर, धीरे…” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज में अब शर्म कम और उत्तेजना ज्यादा थी। मैंने उसका साड़ी का पल्लू धीरे से सरकाया। उसका गोरा चेहरा, नाजुक गला, और काला मोतियों वाला मंगलसूत्र मेरे सामने था। मैंने उसे सोफे की दीवार से सटाकर बिठाया और फिर से उसके होंठ चूसने लगा।
मेरे हाथ अब उसके ब्लाउज की ओर बढ़े। उसका ब्लाउज टाइट था, जिसमें से उसके 34 साइज के चुच्चे उभर रहे थे, जैसे रुई के गोले। मैंने धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के बटन खोले। “सर… प्लीज… धीरे…” उसने हल्का-सा विरोध किया, लेकिन मैंने उसकी बात अनसुनी की। ब्लाउज खुलते ही उसकी काली ब्रा मेरे सामने थी, जो उसके गोरे जिस्म पर गजब ढा रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने ब्रा के हुक खोले। उसके मम्मे मेरे सामने थे—गोरे, मुलायम, गोल, और ऊपर सिक्के जैसे भूरे निप्पल, जो हल्के गुलाबी रंग के साथ चमक रहे थे। “मादरचोद, क्या मस्त दूध हैं तेरे,” मैंने कहा। मैंने एक मम्मा अपने हाथ में लिया और धीरे से दबाया।
मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : भाभी ने माँ को चोदने का तरीका सिखाया
“आह्ह… उफ्फ… सर…” बबिता की सिसकारी निकली। मैंने उसका निप्पल अपने मुंह में लिया और चूसने लगा। उसका जिस्म कांप रहा था। मैंने दूसरे मम्मे को दबाते हुए उसके निप्पल को हल्के से दांतों से काटा। “उह्ह… सर… थोड़ा आराम से…” उसकी आवाज में अब वासना साफ झलक रही थी।
मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया। उसकी वाइन रेड साड़ी अब कमर तक सरक चुकी थी। मैंने उसकी साड़ी को धीरे-धीरे पूरा खोल दिया। अब वो सिर्फ पेटीकोट और काली पैंटी में थी। मैंने उसका पेटीकोट भी खोल दिया। उसकी गोरी, चिकनी जांघें मेरे सामने थीं, जैसे रबड़ी की तरह मुलायम।
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को हल्के से सहलाया। “आह्ह… सर… उफ्फ…” उसकी सिसकारियां तेज हो गईं। मैंने उसकी पैंटी को धीरे से उतारा। उसकी चूत मेरे सामने थी—बिल्कुल साफ, कसी हुई, और हल्के गुलाबी रंग की। उसकी क्लिटोरिस के ऊपर झांटों की एक खूबसूरत डिजाइन थी, जैसे मोर पंखी।
“बहनचोद, बबिता, ये झांटों की मोर पंखी किसने बनाई?” मैंने आश्चर्य से पूछा।
“सर, ये अनिल ने बनाई है। वो बड़े शौकीन मिजाज के हैं। अपने हाथों से बड़े प्यार से मेरी झांटें बनाते हैं। हर हफ्ते नई डिजाइन बनाते हैं,” उसने शर्माते हुए कहा।
मैंने मन ही मन सोचा, “गांडू, अनिल बड़ा रसीला है। सारा दिन अपनी बीवी की चूत में ही घुसा रहता होगा, तभी बिजनेस नहीं ला पाता।”
मैंने उसकी चूत के ऊपर की मोर पंखी को चूमा और फिर उसकी चूत को अपनी जीभ से सहलाया। “आह्ह… उफ्फ… सर… ओह्ह…” बबिता की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। मैंने उसकी चूत को खोला, उसकी गुलाबी क्लिटोरिस मेरे सामने थी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डाली और चाटने लगा। “Sexual Bribery Office Story”
उसकी चूत रसीली थी, और उसका स्वाद मुझे पागल कर रहा था। “उह्ह… सर… प्लीज… आह्ह…” बबिता तड़प रही थी। मैंने उसकी क्लिटोरिस को चूसा, और वो सिसकने लगी। “आह्ह… उफ्फ… सर…” मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।
उसकी चूत गीली हो चुकी थी, और मेरी उंगली आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी। “आह्ह… सर… और… उफ्फ…” उसकी सिसकारियां अब और तेज हो गईं। मैंने दो उंगलियां डालीं और उसकी चूत को और खोला। “उह्ह… सर… बस… आह्ह…” वो तड़प रही थी।
मैंने उसकी नाभि को चूमा, उसके मखमली पेट पर जीभ फेरी, और फिर उसकी चूत तक पहुंचा। उसकी नाभि से चूत तक हल्के-हल्के रेशमी बालों की एक कतार थी। मैंने उस कतार पर जीभ रखी और धीरे-धीरे चूमते हुए उसकी चूत तक पहुंच गया। “आह्ह… सर… गुदगुदी हो रही है…” बबिता हंसने लगी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
मैंने सोचा, अब ये मजे से खुलकर चुदवाएगी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा 10 इंच का लौड़ा पूरी तरह तन चुका था, उसका सुपारा लाल और चमकदार। मैंने बबिता की जांघें फैलाईं और अपना लौड़ा उसकी चूत पर रगड़ा। “आह्ह… सर… धीरे…” उसने कहा। मैंने धीरे से अपना लौड़ा उसकी चूत में डाला।
उसकी चूत इतनी कसी थी कि मेरा लौड़ा अंदर जाते ही रगड़ खा रहा था। “उह्ह… सर… आह्ह…” बबिता की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू की। “घप… घप… घप…” मेरे लौड़े के धक्कों की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : पति के दोस्त ने मेरी हवस को पहचान लिया
बबिता की चूत इतनी रसीली थी कि हर धक्के के साथ “चप… चप…” की आवाज आ रही थी। “आह्ह… उफ्फ… सर… थोड़ा आराम से…” बबिता सिसक रही थी। मैंने उसकी गोरी जांघ को अपने हाथों से पकड़ा और और जोर से धक्के मारने लगा। “घप… घप… घप…” मेरे धक्कों की रफ्तार बढ़ती जा रही थी।
मैंने उसकी एक जांघ को अपने कंधे पर रखा और और गहराई तक अपना लौड़ा डाला। “आह्ह… उह्ह… सर… मेरी चूत फट जाएगी…” बबिता की चीख निकली। तभी मेरा फोन बजा। अनिल का कॉल था। “सर, बबिता अभी नई-नई है। आज पहली बार किसी गैर मर्द से चुदवा रही है। प्लीज, मेरी बीवी को प्यार से चोदना। उसे कोई रंडी, कोई छिनाल मत समझना,” उसने भरी गले से कहा। “Sexual Bribery Office Story”
“अनिल, मेरे भाई, मैं तेरी औरत को अपनी औरत की तरह चोदूंगा। तू जरा भी फिकर मत कर,” मैंने कहा और फोन काट दिया। लेकिन मेरी नीयत और खराब हो गई। “मादरचोद, क्या गोरी-गोरी जांघें हैं,” मैंने कहा और उसकी भरी-भरी जांघ पर उंगली और अंगूठे से जोर की चुटकी काटी।
उसकी रबड़ी-सी मुलायम खाल पर लाल निशान पड़ गया। “आह्ह… सर… प्लीज, चुटकी मत काटो… आराम से चोदो…” बबिता ने कहा। मैंने उसकी जांघ को और जोर से दबाया और चोदता रहा। “घप… घप… घप…” मेरे धक्के अब और तेज थे। मैंने बबिता को घोड़ी बनाया। उसकी गोरी, चिकनी गांड मेरे सामने थी।
मैंने उसकी गांड को सहलाया और फिर पीछे से उसकी चूत में लौड़ा डाला। “आह्ह… उफ्फ… सर… धीरे…” उसकी सिसकारियां तेज थीं। मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारे। “घप… घप… चप… चप…” उसकी चूत अब पूरी तरह गीली थी। “बबिता, तेरी चूत तो बड़ी कसी है। रोज चुदवाती है, फिर भी इतनी टाइट,” मैंने कहा।
“हां सर… ऐसी एक भी रात नहीं होती जब अनिल मेरी चूत न ले…” उसने सिसकते हुए कहा। “तू है ही इतनी हसीन कि कोई भी तेरा मर्द बने, तुझे चोदे बिना न माने,” मैंने कहा और और जोर से चोदने लगा। मैंने उसे फिर से सोफे पर लिटाया और उसकी टांगें हवा में उठाईं।
“आह्ह… सर… उह्ह…” बबिता तड़प रही थी। मैंने करीब 30 मिनट तक उसे अलग-अलग पोजीशन में चोदा—घोड़ी, लिटाकर, टांगें उठाकर। “सर… धीरे… मेरी चूत फट जाएगी…” बबिता बोली। मैं कुछ नहीं बोला, बस घप-घप करके चोदता रहा। आखिर में मैं पसीना-पसीना होकर उसकी चूत में ही झड़ गया। “Sexual Bribery Office Story”
“आह्ह… उह्ह…” मेरी सिसकारी निकली। बबिता सोफे पर लेटी थी, उसकी आंखें बंद थीं, और उसका चेहरा दर्द से भरा था। “मादरचोद, तुझे तो रंडी की तरह चोदा,” मैंने मन ही मन सोचा। मैंने उसे कुछ देर आराम करने दिया और फिर हेड सर सूर्यप्रताप सिंह को फोन लगाया। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“हेलो, हां सर, दयानंद बोल रहा हूं। वो उत्तम नगर ब्रांच का लड़का अनिल अपनी बीवी को दे गया है। सर, बहुत कड़क माल है। इसकी चूत चूत नहीं, स्वर्ग का द्वार समझिए। अगर आप इसे चोदेंगे, तो गारंटी है, पूरा मजा मिलेगा,” मैंने उत्साह से कहा।
“ठीक है, दयानंद। अनिल की बीवी को लेकर रात में मेरे बंगले पर आ जाओ,” सूर्यप्रताप सिंह ने कहा।
मैंने बबिता को कहा, “बबिता, चल, कपड़े पहन ले। आज रात तुझे हेड सर श्री सूर्यप्रताप सिंह से भी चुदना है।” उसकी चूत में अभी भी दर्द था। उसने धीरे-धीरे अपनी वाइन रेड साड़ी, ब्लाउज, और पेटीकोट पहना, मंगलसूत्र और चूड़ियां सजाईं। मैं उसे एक महंगे ब्यूटी पार्लर ले गया।
वहां उसकी मसाज और फेशियल करवाया। बबिता ने नई साड़ी पहनी—गहरी नीली, जो उसके गोरे जिस्म पर चमक रही थी। उसने पूरा मेकअप किया—नीली लिपस्टिक, काजल, और माथे पर छोटी-सी बिंदिया। वो किसी नई दुल्हन की तरह लग रही थी।
शाम को मैं उसे अपनी कार में सूर्यप्रताप सिंह के बंगले पर ले गया। सूर्यप्रताप सिंह ने दरवाजा खोला और बबिता को देखते ही उनकी आंखें चमक उठीं। “सर, अनिल की बीवी आपकी सेवा में हाजिर है,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा। सूर्यप्रताप सिंह की चुदास भरी नजरें बबिता के भरे हुए जिस्म के एक-एक हिस्से को स्कैन कर रही थीं।
मैंने उनकी पैंट की ओर देखा, उनका लंड खड़ा हो चुका था। “आओ भाई, आओ! कब से तुम लोगों का इंतजार कर रहा था,” सूर्यप्रताप सिंह ने कहा। हम अंदर गए और सोफे पर बैठे। टेबल पर कई महंगी अंग्रेजी शराब की बोतलें रखी थीं। सूर्यप्रताप सिंह ने मुझे आंखों से इशारा किया। “Sexual Bribery Office Story”
“बबिता, सर के लिए जाम बनाओ,” मैंने कहा। बबिता झुककर शराब की बोतल उठाकर ग्लास में डालने लगी। उसका साड़ी का पल्लू सरक गया, और उसका सधा हुआ पिछवाड़ा दिखने लगा। सूर्यप्रताप सिंह खुद को रोक न सके। उन्होंने बबिता के पिछवाड़े पर हाथ रखा और सहलाने लगे।
“आह्ह… सर…” बबिता ने धीमी आवाज में कहा। सूर्यप्रताप सिंह ने उसे अपनी जांघ पर बिठा लिया और उसके नगीने जैसे होंठ चूसने लगे। “उम्ह… सर… उफ्फ…” बबिता की सिसकारियां शुरू हो गईं। सूर्यप्रताप सिंह ने उसका नीला ब्लाउज खोला। बबिता की चिकनी, सुडौल, कसी छातियां उनके सामने थीं।
उन्होंने एक ग्लास शराब लिया और बबिता के मम्मों पर धीरे-धीरे शराब डालने लगे। फिर नीचे मुंह लगाकर बहती शराब चूसने लगे। “आह्ह… उह्ह… सर…” बबिता की सिसकारियां तेज हो गईं। ये सब देखकर मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया। मैंने भी बबिता के मस्त-मस्त मम्मों से होकर बहती शराब चूसी।
“दयानंद, आ ना, मिल-बांटकर खाते हैं इस कुतिया को,” सूर्यप्रताप सिंह ने चुदास भरी आवाज में कहा। उन्होंने बबिता को दो ग्लास शराब जबरदस्ती पिलाई। बबिता को अब भारी नशा चढ़ गया था। सूर्यप्रताप सिंह ने उसकी साड़ी, पेटीकोट, और पैंटी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी थी। “Sexual Bribery Office Story”
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : खुशी की सील तोड़ कर ख़ुशी मिली
उन्होंने बबिता को अपने 10 इंच के लौड़े पर बिठा लिया, जिसका सुपारा लाल और चमकदार था। “आह्ह… उफ्फ… सर… धीरे…” बबिता सिसक रही थी। “अबे दयानंद गांडू, चल, पीछे से खड़े होकर इस कुतिया की गांड में लौड़ा दे। साथ-साथ चोदेंगे इसे, मां कसम, बड़ा मजा आएगा,” सूर्यप्रताप सिंह ने कहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
“पर सर, अनिल ने कहा है कि इस रंडी को प्यार से चोदना,” मैंने कहा। “हां, हां, प्यार से ही चोदेंगे,” सूर्यप्रताप सिंह ने हंसते हुए कहा। मैंने अपने कपड़े उतारे और बबिता की गोरी, चिकनी गांड में अपना लौड़ा डाल दिया। उधर सूर्यप्रताप सिंह ने उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
“आह्ह… उह्ह… सर… प्लीज…” बबिता की चीखें निकल रही थीं। हम दोनों बबिता को चोदने लगे। “घप… घप… घप…” हमारे धक्कों की आवाज कमरे में गूंज रही थी। बबिता शराब के नशे में थी, लेकिन उसकी सिसकारियां बता रही थीं कि उसे दर्द हो रहा था। “आह्ह… उफ्फ… सर… धीरे…” वो बार-बार कह रही थी। “Sexual Bribery Office Story”
सूर्यप्रताप सिंह तो महान चुदक्कड़ निकले। इतनी जोर-जोर से बबिता की चूत मारने लगे कि मैं डर गया कि कहीं उसकी चूत पूरी तरह फट न जाए। फिर उनकी देखा-देखी मैं भी जोर-जोर से उसकी गांड चोदने लगा। “घप… घप… चप… चप…” हमारे लौड़े बबिता के दोनों छेदों में टकराने लगे, जैसे कोई युद्ध हो रहा हो।
“चोद… चोद… बाजारू रंडी की तरह इस छिनाल को चोद!” सूर्यप्रताप सिंह चिल्लाए। उनकी उत्तेजक आवाज सुनकर मेरा लौड़ा टननाया। हमने उसे घोड़ी बनाया, फिर लिटाकर, और फिर टांगें उठाकर चोदा। करीब दो घंटे तक हमने बबिता को चोदा। आखिर में हम दोनों उसके अंदर ही झड़ गए।
“आह्ह… उह्ह…” हमारी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। बबिता अब सोफे पर लेटी थी, उसकी आंखें बंद थीं, और उसका जिस्म पसीने से भीगा था। हमने उसे कपड़े पहनने को कहा। वो धीरे-धीरे उठी और अपनी नीली साड़ी पहनी। दोस्तों, ये मेरी जिंदगी की सबसे यादगार चुदाई थी।
Rohit says
Maharashtra me kisi girl, bhabhi, aunty, badi ourat ya kisi vidhava ko maze karni ho to connect my whatsapp number 7058516117 only ladie